हिन्दू विवाह (कार्यवाहियों का विधिमान्यकरण) अधिनियम, 1960
(1960 का अधिनियम संख्यांक 19)
[6 मई, 1960]
हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अधीन कतिपय कार्यवाहियों
को विधिमान्य करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के ग्यारहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो : -
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिन्दू विवाह (कार्यवाहियों का विधिमान्यकरण) अधिनियम, 1960 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।
2. 1955 के अधिनियम सं० 25 के अधीन कतिपय न्यायालयों की कार्यवाहियों का विधिमान्यकरण-(1) हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अधीन अधिकारिता का प्रयोग या तात्पर्यित प्रयोग करने वाले, उपधारा (2) में निर्दिष्ट न्यायालयों में से किसी के द्वारा, इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व की गई सभी कार्यवाहियां तथा पारित डिक्रियां और आदेश, किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी, विधि की दृष्टि में उतने ही उचित और विधिमान्य समझे जाएंगे, मानो ऐसी अधिकारिता का प्रयोग या तात्पर्यित प्रयोग करने वाला न्यायालय उक्त अधिनियम के अर्थ में जिला न्यायालय है ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट न्यायालय निम्नलिखित हैं अर्थात् : -
अपर न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायाधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, सहायक न्यायाधीश का न्यायालय तथा कोई भी अन्य न्यायालय, चाहे वे किसी भी नाम से पुकरा जाए, जो अधीनस्थ न्यायाधीश के न्यायालय से निम्नतर पंक्ति का नहीं है ।
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