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नारियल विकास बोर्ड अधिनियम, 1979 ( Coconut Development Board Act, 1979 )


 

नारियल विकास बोर्ड अधिनियम, 1979

(1979 का अधिनियम संख्यांक 5)

[17 मार्च, 1979]

संघ के नियंत्रण के अधीन नारियल उद्योग के विकास और

उससे संबंधित विषयों का उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम नारियल विकास बोर्ड अधिनियम, 1979 है । 

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे । 

2. संघ द्वारा नियंत्रण समीचीन है इसके बारे में घोषणा-इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि लोकहित के लिए यह समीचीन है कि नारियल उद्योग को संघ अपने नियंत्रण में ले ले ।

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) बोर्ड" से धारा 4 के अधीन स्थापित नारियल विकास बोर्ड अभिप्रेत है; 

(ख) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है; 

(ग) नारियल" से नारियल वृक्ष का फल अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत कच्चा नारियल, पका नारियल और खोपरा भी है ।

                                स्पष्टीकरण-नारियल वृक्ष" से अभिप्रेत है कोकोस न्यूसिफेरा लिन नामक नारियल वृक्ष;  

(घ) नारियल उद्योग" के अन्तर्गत-

(i) कयर उद्योग, या 

(ii) नारियल तेल से उत्पाद (जिसमें उपोत्पाद भी हैं) विनिर्मित करने वाला कोई उद्योग,

                नहीं है; 

(ङ) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है; 

(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है । 

अध्याय 2

नारियल विकास बोर्ड

4. बोर्ड की स्थापना और उसका गठन-(1) ऐसी तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बोर्ड स्थापित किया जाएगा जो नारियल विकास बोर्ड के नाम से ज्ञात होगा । 

(2) बोर्ड पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे स्थावर और जंगम दोनों ही प्रकार की सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की और संविदा करने की शक्ति होगी तथा उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा । 

(3) बोर्ड का मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे । 

(4) बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-

(क) एक अध्यक्ष जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ; 

(ख) भारत सरकार का  [उद्यान-कृषि आयुक्त], पदेन;  

(ग) केन्द्रीय बागान फसल अनुसंधान संस्थान (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्) का निदेशक, पदेन;  

(घ) कयर उद्योग अधिनियम, 1953 (1953 का 45) की धारा 4 के अधीन गठित कयर बोर्ड का अध्यक्ष, पदेन; 

(ङ) संसद् के तीन सदस्य, जिनमें से दो लोक सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे तथा एक राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किया जाएगा; 

(च) दो सदस्य, जो निम्नलिखित से संबंधित केन्द्रीय सरकार में मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे, अर्थात् :-

(i) राजस्व; और 

(ii) नागरिक पूर्ति और सहकारिता;

(छ) तीन सदस्य, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों की, जो ऐसे राज्य हैं जिनमें बड़े पैमाने पर नारियल उगाया जाता है, सरकारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए, प्रत्येक राज्य के लिए एक-एक सदस्य, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे; 

(ज) पांच सदस्य, जो आंध्र प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, उड़ीसा और पश्चिमी बंगाल राज्यों तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, दमन और दीव, लक्षद्वीप और पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसी क्रम से केन्द्रीय सरकार द्वारा बारी-बारी से नियुक्त किए जाएंगे; 

(झ) चार सदस्य, जिनमें से केरल राज्य के नारियल उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो तथा तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों के नारियल उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रत्येक राज्य के लिए एक-एक, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे; 

(ञ) एक सदस्य, जो नारियल प्रसंस्करण उद्योग का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ;

(ट) दो सदस्य, जो नारियल उद्योग से संबंधित ऐसे अन्य हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे, जिनका प्रतिनिधित्व उस सरकार की राय में किया जाना चाहिए :

परन्तु खण्ड (छ) और खण्ड (ज) के अधीन हर नियुक्ति, यथास्थिति, संबंधित राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र की सिफारिश पर की जाएगी ।

(5) बोर्ड अपने सदस्यों में से एक उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेगा, जो अध्यक्ष की ऐसी शाक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।  

(6) सदस्यों की पदावधि और सदस्यों में हुई रिक्तियां भरने की रीति और उनके कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वह होगी जो विहित की जाए । 

(7) केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी को, जो बोर्ड का सदस्य नहीं है, जब उसे इस निमित्त प्रतिनियुक्त किया जाता है बोर्ड के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु उसे मत देने का हक नहीं होगा । 

(8) बोर्ड ऐसी रीति से, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, और ऐसे प्रयोजनों के लिए जो विहित किए जाएं किसी ऐसे व्यक्ति को अपने साथ सहयोजित कर सकेगा जिसकी सहायता या सलाह की इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों का पालन करने में बोर्ड वांछा करे और इस प्रकार सहयोजित व्यक्ति को बोर्ड के ऐसे विचार-विमार्श में भाग लेने का अधिकार होगा जो ऐसे प्रयोजनों से जिसके लिए वह सहयुक्त किया गया है, सुसंगत है किन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा और वह ऐसे भत्ते या फीस पाने का हकदार होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत की जाए ।

(9) बोर्ड का या धारा 9 के अधीन उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति का कोई भी कार्य या कार्यवाही निम्नलिखित के कारण अविधिमान्य नहीं होगी, अर्थात् :-

(क) बोर्ड या ऐसी समिति में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि; या 

(ख) बोर्ड या ऐसी समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्त में कोई त्रुटि; या

(ग) बोर्ड या ऐसी समिति की प्रक्रिया में कोई अनियमितता, जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता है ।

(10) बोर्ड ऐसे स्थानों और समयों पर अपने अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कार्य करने के बारे में (जिसके अंतर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा, जो इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों में उपबंधित किए जाएं ।

5. अध्यक्ष का वेतन और भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें तथा सदस्यों के भत्ते-(1) अध्यक्ष ऐसे वेतन और भत्तों का हकदार होगा और छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन रहेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर नियत की जाएं ।

(2) बोर्ड के सदस्य ऐसे भत्ते पाएंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत किए जाएं ।

6. सदस्यों द्वारा पदत्याग-कोई सदस्य, जो पदेन सदस्य नहीं है, केन्द्रीय सरकर को लिखित सूचना देकर अपने पद को त्याग सकेगा और ऐसे त्यागपत्र के स्वीकार किए जाने पर यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है ।

7. बोर्ड के अधिकारी और अन्य कर्मचारिवृन्द-(1) अध्यक्ष बोर्ड का मुख्य अधिशासक होगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं ।

(2) केन्द्रीय सरकार मुख्य नारियल विकास अधिकारी की नियुक्ति करेगी जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या जो अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं । 

(3) उपधारा (2) के अधीन नियुक्त मुख्य नारियल विकास अधिकारी को बोर्ड तथा धारा 9 के अधीन नियुक्त उसकी समितियों के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु उसे मत देने का हक नहीं होगा ।

(4) केन्द्रीय सरकार बोर्ड का एक सचिव नियुक्त करेगी जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या जो बोर्ड या अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।

(5) मुख्य नारियल विकास अधिकारी और सचिव ऐसे वेतन और भत्तों के हकदार होंगे और छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि या अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन रहेंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर नियत की जाएं ।

(6) ऐसे नियंत्रण और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, बोर्ड ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा जो उसके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों और बोर्ड के ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का ढंग, सेवा की शर्तें और वेतनमान और भत्ते वे होंगे जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों में बोर्ड द्वारा उपबंधित किए जाएं ।

(7) बोर्ड का अध्यक्ष, मुख्य नारियल विकास अधिकारी, सचिव और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा के बिना इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों से असंसक्त किसी काम को अपने हाथ में नहीं लेंगे । 

8. बोर्ड को कर्मचारियों के अन्तरण के लिए विशेष उपबन्ध-(1) बोर्ड की स्थापना पर केन्द्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह आदेश द्वारा और उस तारीख या उन तारीखों से, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को, जो बोर्ड की स्थापना की तारीख के ठीक पहले नारियल विकास निदेशालय में उस रूप में पद धारण कर रहा था, बोर्ड को अन्तरित कर दे : 

परन्तु जिस पद पर ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी का अन्तरण किया जाता है उसका वेतनमान उस पद के वेतनमान से कम नहीं होगा जिसे वह ऐसे अन्तरण के ठीक पहले धारण कर रहा था और जिस पद पर उसका अन्तरण किया जाता है उस पद की सेवा के अन्य निबन्धन और शर्तें (जिनके अन्तर्गत पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा प्रसुविधाएं भी हैं) उसके द्वारा ऐसे अन्तरण के ठीक पहले धारित पद से सम्बन्धित सेवा के निबन्धनों और शर्तों से कम लाभप्रद नहीं होंगी :

परन्तु यह और भी कि यदि उसके अन्तरण के ठीक पहले कोई ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी केन्द्रीय सरकार के अधीन किसी उच्चतर पद पर या तो छुट्टी से हुई रिक्ति में या किसी विनिर्दिष्ट अवधि की किसी रिक्ति में स्थानापन्न रूप से कार्य कर रहा है तो अन्तरण पर उसके वेतन और अन्य भत्तों को, यदि कोई हों, ऐसी रिक्ति की असमाप्त अवधि के लिए संरक्षित किया जाएगा और उसके पश्चात् वह केन्द्रीय सरकार के अधीन उस पद को लागू होने वाले वेतनमान का हकदार होगा जिस पर वह पदावनत होता ।

(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश जारी किए जाने के पहले नारियल विकास निदेशालय के सभी अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को ऐसे प्ररूप में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए और ऐसे समय के भीतर जो उस सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, यह विकल्प दिया जाएगा कि वे यह बताएं कि वे बोर्ड के कर्मचारी बनने के लिए रजामन्द हैं या नहीं और एक बार विकल्प का प्रयोग करने पर वह अन्तिम होगा : 

परन्तु उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश नारियल विकास निदेशालय के किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के सम्बन्ध में जारी नहीं किया जाएगा जिसने इस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर बोर्ड का कर्मचारी न होने के अपने आशय की प्रज्ञापना दे दी है :

परन्तु यह और भी कि केन्द्रीय सरकार द्वारा उक्त निदेशालय में नियोजित ऐसे व्यक्तियों के साथ जो उस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर बोर्ड के कर्मचारी बनने का अपना आशय प्रकट नहीं करते हैं उसी रीति से और उन्हीं नियमों के अनुसार बरता जाएगा जो रीति और जो नियम केन्द्रीय सरकर के उन कर्मचारियों को उस दशा में लागू होते हैं जब उनका नियोजन करने वाले विभाग के कर्मचारियों की संख्या में कमी की जाती है ।

(3) उपधारा (1) के अधीन आदेश द्वारा अन्तरित अधिकारी या कर्मचारी, अन्तरण की तारीख से ही केन्द्रीय सरकार का कर्मचारी नहीं रहेगा और ऐसे अभिधान से, जो बोर्ड अवधारित करे, बोर्ड का अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा तथा उपधारा (1) के प्रथम और द्वितीय परन्तुक के अधीन रहते हुए इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों से पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तों (जिनके अन्तर्गत पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा प्रसुविधाएं भी हैं) के बारे में शासित होगा और बोर्ड का अधिकारी या अन्य कर्मचारी बना रहेगा जब तक कि उसका नियोजन बोर्ड द्वारा सम्यक्तः समाप्त नहीं कर दिया जाता है :

परन्त जब तक बोर्ड के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तों को शासित करने वाले ऊपर विनिर्दिष्ट विनियम बोर्ड द्वारा नहीं बनाए जाते हैं तब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए सुसंगत नियम और आदेश ऐसे अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों को लागू होते रहेंगे । 

(4) यदि यह प्रश्न उठता है कि क्या बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों में किसी विषय के बारे में सेवा के निबन्धन और शर्तें, जिनके अन्तर्गत पारिश्रमिक, पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा प्रसुविधाएं भी हैं, उनसे कम लाभप्रद हैं जो उस अधिकारी या अन्य कर्मचारी को बोर्ड को उसके अन्तरण के ठीक पहले लागू होती थी तो इस विषय में केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

9. बोर्ड की समितियां-(1) बोर्ड ऐसी समितियां नियुक्त कर सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के दक्ष निर्वहन और उसके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों ।

(2) बोर्ड को यह शक्ति होगी कि वह उतनी संख्या में, जितनी वह ठीक समझे, अन्य व्यक्तियों को, जो बोर्ड के सदस्य नहीं हैं, उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किसी समिति के सदस्यों के रूप में सहयोजित कर ले और इस प्रकार सहयोजित व्यक्तियों को समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु मतदान का अधिकार नहीं होगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन समिति के सदस्यों के रूप में सहयोजित व्यक्ति समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए ऐेसे भत्ते या फीस प्राप्त करने के हकदार होंगे जो केंद्रीय सरकार द्वारा नियत किए जाएं । 

10. बोर्ड के कृत्य-(1) बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन नारियल उद्योग के विकास की ऐसे उपायों द्वारा वृद्धि करे जो वह ठीक समझे । 

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उसमें निर्दिष्ट उपायों द्वारा निम्नलिखित के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा-

(क) नारियल उद्योग के विकास के लिए उपाय करना जिससे कृषक, विशेषकर छोटे कृषक नारियल उद्योग के विकास और वृद्धि में भाग ले सकें और उसके हिताधिकारी हो सकें;

(ख) भारत में नारियल और उसके उत्पादों के विपणन में सुधार के लिए उपायों की सिफारिश करना; 

(ग) नारियल की खेती या नारियल और उसके उत्पादों के प्रसंस्करण या विपणन में लगे हुए किसी व्यक्ति को तकनीकी सलाह देना; 

(घ) नारियल उद्योग की वृद्धि में सुधार लाने की दृष्टि से अधिक उत्पादन करने वाले संकर नारियल के विकास के लिए नारियल की खेती के विकसित तरीकों को अपनाने के लिए, नारियल के प्रसंस्करण के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी को ग्रहण करने के लिए तथा नारियल की खेती के क्षेत्र-विस्तार के लिए (जिसके अन्तर्गत पुनः पेड़ लगाना भी है), वित्तीय या अन्य सहायता देना; 

(ङ) नारियल उगाने वालों को प्रोत्साहन कीमतें प्राप्त करने के लिए ऐसे उपाय करना जो व्यवहारिक हों जिनके अंतर्गत जब आवश्यक हो नारियल और उसके उत्पादों के लिए न्यूनतम और अधिकतम कीमतों की सिफारिश करना भी है; 

(च) नारियल और उसके उत्पादों के आयात और निर्यात के विनियमन के लिए उपायों की सिफारिश करना; 

(छ) नारियल उगाने वालों, नारियल के व्योहारियों, नारियल के उत्पादों के विनिर्माताओं और ऐसे अन्य व्यक्तियों से और ऐसी संस्थाओं से, जो विहित की जाएं नारियल उद्योग से संबंधित किसी विषय पर आंकड़े संग्रह करना और इस प्रकार संगृहीत आंकड़ों या उनके किसी भाग या उनसे उद्धरणों को प्रकाशित करना; 

(ज) नारियल और उसके उत्पादों के लिए श्रेणियां, विनिर्देश और मानक तय करना; 

(झ) केन्द्रीय सरकार और उन राज्यों की सरकारों से, जिनमें बड़े पैमाने पर नारियल उगाया जाता है, परामर्श करके उचित स्कीमों का वित्तपोषण करना जिससे नारियल के उत्पादन में वृद्धि हो और नारियल की क्वालिटी और उपज की उन्नति हो और इस प्रयोजन के लिए पुरस्कार देने या नारियल उगाने वालों को और उसके उत्पादों का विनिर्माण करने वालों को प्रोत्साहन देने तथा नारियल और उसके उत्पादों के लिए विपणन सुविधाएं देने के लिए स्कीमें तैयार करना;

(ञ) नारियल और उसके उत्पादों के सम्बन्ध में कृषिक, प्रौद्योगिक, औद्योगिक या आर्थिक अनुसंधान के लिए उपबन्ध संस्थाओं का उपयोग करके ऐसी रीति से सहायता करना, प्रोत्साहन देना या संवर्धन या वित्तपोषण करना जो बोर्ड ठीक समझे; 

(ट) नारियल और उसके उत्पादों के अनुसंधान और विकास के लिए ऐसा प्रचार करना और ऐसे कालिक पत्र, पुस्तकें या बुलेटिन प्रकाशित करना जो आवश्यक समझे जाएं; 

(ठ) नारियल और उसके उत्पादों के उत्पादन, श्रेणीकरण और विपणन के संवर्धन और विकास के लिए नारियल उगाने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में बोर्ड के कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए और उसके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रादेशिक कार्यालयों और अन्य अभिकरणों की स्थापना करना; 

(ड) ऐसे अन्य उपाय करना, जो इस अधिनियम के प्रयोजनों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे राज्यों की सरकारों से, जिनमें बड़े पैमाने पर नारियल उगाया जाता है, परामर्श करके विहित किए जाएं ।    

(3) बोर्ड इस धारा के अधीन अपने कृत्यों का पालन ऐसे नियमों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएं । 

11. बोर्ड का विघटन-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, और उन कारणों से, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएंगे, यह निदेश दे सकेगी कि बोर्ड का ऐसी तारीख से और ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, विघटन कर दिया जाएगा :

परन्तु ऐसी कोई अधिसूचना जारी करने के पहले केन्द्रीय सरकार बोर्ड को प्रस्थापित विघटन के विरुद्ध अभ्यावेदन करने के लिए उचित अवसर प्रदान करेगी और बोर्ड के अभ्यावेदन पर, यदि कोई हो, विचार करेगी । 

(2) जब उपधारा (1) के अधीन बोर्ड का विघटन कर दिया जाता है तब- 

(क) सभी सदस्य इस बात के होते हुए भी कि उनकी पदावधि समाप्त नहीं हुई है, विघटन की तारीख से ऐसे सदस्य के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे; 

(ख) विघटन की अवधि के दौरान बोर्ड की सभी शक्तियों का प्रयोग और सभी कर्तव्यों का पालन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे और उनका पारिश्रमिक ऐसा होगा जो विहित किया जाए; 

(ग) बोर्ड में निहित सभी निधियां और अन्य सम्पत्ति, विघटन की अवधि के दौरान, केन्द्रीय सरकार में निहित रहेंगी; तथा 

(घ) विघटन की अवधि समाप्त होते ही, बोर्ड का पुनर्गठन इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार किया जाएगा ।

अध्याय 3

वित्त, लेखा और लेखा परीक्षा

12. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् बोर्ड को ऐसी धनराशियां अनुदान या उधार के रूप में दे सकेगी जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने के लिए ठीक समझे ।

13. नारियल विकास निधि का गठन-नारियल विकास निधि के नाम से ज्ञात होने वाली एक निधि गठित की जाएगी और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे- 

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

(ख) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए गए अनुदान या उधार;  

(ग) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए अनुदान या उधार जिसमें धारा 14 के अधीन उधार सम्मिलित हैं; 

(घ) राज्य सरकारों, स्वैच्छिक संगठनों या अन्य संस्थाओं से कोई अनुदान या संदान :

परन्तु निधि में ऐसा कोई अनुदान, उधार या संदान केन्द्रीय सरकार का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करके ही जमा किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।  

(2) निधि का उपयोजन निम्नलिखित के लिए किया जाएगा, अर्थात्:-

(क) धारा 10 में निर्दिष्ट उपायों की लागत चुकाना; 

(ख) बोर्ड के, यथास्थिति, सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक चुकाना; 

(ग) बोर्ड के अन्य प्रशासनिक खर्चों और इस अधिनियम द्वारा, या इसके अधीन प्राधिकृत किन्हीं अन्य खर्चों को चुकाना; 

(घ) अन्य उधारों का प्रतिसंदाय करना ।

14. बोर्ड की उधार लेने की शक्तियां-(1) बोर्ड, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का क्रियान्वयन करने के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से और उसके निदेशों के अधीन रहते हुए निम्नलिखित से धन उधार ले सकेगा, अर्थात्: -

(क) ऐसे बन्धपत्रों या डिबेंचरों या दोनों का, जिस पर उस दर से ब्याज होगा जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, जनता को पुरोधरण या विक्रय करके; 

(ख) कोई बैंक या अन्य संस्था; 

(ग) ऐसा कोई अन्य प्राधिकरण, संगठन या संस्था जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित की जाए । 

(2) केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन बोर्ड द्वारा उधार लिए गए धन के प्रतिसंदाय और उस पर ब्याज और अन्य आनुषंगिक प्रभारों के संदाय के लिए प्रत्याभूति दे सकेगी । 

15. लेखा और संपरीक्षा-(1) बोर्ड उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामर्श करके विहित करे । 

(2) बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर, जो वह विनिर्दिष्ट करे, की जाएगी और ऐसी संपरीक्षा के सम्बन्ध में उपगत कोई व्यय बोर्ड द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा । 

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को और बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी संपरीक्षा के सम्बन्ध में वे ही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के सम्बन्ध में होते हैं और विशेषतया उन्हें बहियों, लेखाओं, सम्बद्ध वाऊचरों तथा अन्य दस्तावेजों और कागज-पत्रों के पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के किसी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित बोर्ड के लेखे और उनकी संपरीक्षा की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को प्रति वर्ष भेजी जाएगी और वह सरकार उन्हें संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।

अध्याय 4

केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण

16. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश-बोर्ड ऐसे निदेशों को कार्यान्वित करेगा जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के दक्ष प्रशासन के लिए उसे समय-समय पर दे ।

17. विवरणियां और रिपोर्ट-(1) बोर्ड केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर तथा ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए या जो केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, ऐसी विवरणियां और विवरण तथा नारियल उद्योग के संवर्धन और विकास के लिए प्रस्तावित या विद्यमान कार्यक्रम के बारे में ऐसी विशिष्टियां देगा जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे । 

(2) बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अपने क्रियाकलापों का एक कार्यक्रम केन्द्रीय सरकार को उसकी जानकारी और निदेशों, यदि कोई हों, के लिए देगा । 

(3) उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना बोर्ड, यथासम्भव शीघ्र प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् एक रिपोर्ट ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख से पूर्व, जो विहित की जाए, केन्द्रीय सरकार को देगा जिसमें पूर्व वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों, नीति और कार्यक्रमों का सही और पूरा विवरण होगा । 

(4) उपधारा (3) के अधीन प्राप्त रिपोर्ट की एक प्रति उसके प्राप्त होने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएगी । 

 

 

 

अध्याय 5

प्रकीर्ण

18. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार अथवा बोर्ड के या उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति के अथवा बोर्ड के या ऐसी समिति के किसी सदस्य के अथवा केन्द्रीय सरकार या बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी के अथवा केन्द्रीय सरकार या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध होगी  

19. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी   

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: - 

() वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कृत्य जिनका पालन बोर्ड का उपाध्यक्ष धारा 4 की उपधारा (5) के अधीन करेगा;

() सदस्यों की पदावधि, उनमें रिक्तियों के भरने की रीति और सदस्यों द्वारा धारा 4 की उपधारा (6) के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया

() वह रीति जिससे और वे प्रयोजन जिनके लिए बोर्ड किसी व्यक्ति को धारा 4 की उपधारा (8) के अधीन सहयुक्त कर सकेगा

() वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कर्तव्य जिनका पालन अध्यक्ष बोर्ड के मुख्य अधिशासक के रूप में धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन कर सकेगा

() वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कर्तव्य जिनका पालन बोर्ड का मुख्य नारियल विकास अधिकारी धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन कर सकेगा

() वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कर्तव्य जिनका पालन बोर्ड का सचिव धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन कर सकेगा;

() वे नियंत्रण और निर्बन्धन जिनके अधीन रहते हुए बोर्ड धारा 7 की उपधारा (6) के अधीन अधिकारी और अन्य कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा;  

() वह प्ररूप जिसमें नारियल विकास निदेशालय के अधिकारी और अन्य कर्मचारी धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन अपना विकल्प दे सकेंगे

() नारियल उद्योग से सम्बन्धित किसी विषय के बारे में आंकड़ों का धारा 10 की उपधारा (2) के खण्ड () के अधीन संग्रहण;  

() वे विषय जिनके सम्बन्ध में बोर्ड अपने कृत्यों के निर्वहन में धारा 10 की उपधारा (2) के खण्ड () के अधीन उपाय कर सकेगा

                                 () धारा 11 की उपधारा (2) के खण्ड () में निर्दिष्ट व्यक्ति या व्यक्तियों को संदेय पारिश्रमिक और अन्य भत्ते

() वह प्ररूप जिसमें धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन बोर्ड के लेखे रखे जाएंगे

() वह प्ररूप और रीति जिससे और वह समय जब बोर्ड केन्द्रीय सरकार को धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन विवरणियां और रिपोर्ट दे सकेगा

() वह प्ररूप जिसमें और वह तारीख जिसके पूर्व बोर्ड केन्द्रीय सरकार को अपने क्रियाकलापों और कार्यक्रम की रिपोर्ट धारा 17 की उपधारा (3) के अधीन दे सकेगा

() कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित किया जाना है या किया जाए  

20. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उन सभी विषयों का उपबन्ध करने के लिए, जिनके लिए इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के प्रयोजनों के लिए उपबन्ध करना आवश्यक या समीचीन है, इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों से सुसंगत विनियम बना सकेगा  

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित में से सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: - 

() बोर्ड या उसकी किसी समिति के अधिवेशनों का समय और स्थान और उनमें अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और उन सदस्यों की संख्या जिनसे धारा 4 की उपधारा (10) के अधीन अधिवेशन की गणपूर्ति होगी

() बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की धारा 7 की उपधारा (6) के अधीन नियुक्ति का ढंग, उनकी सेवा की शर्तें और वेतनमान और भत्ते

() साधारणतया बोर्ड के क्रियाकलापों का दक्ष संचालन  

(3) केन्द्रीय सरकार अपने द्वारा मंजूर किए गए किसी विनियम को राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उपान्तरित या विखण्डित कर सकेगी और इस प्रकार उपांतरित या विखण्डित विनियम ऐसे उपांतरित रूप में ही, यथास्थिति, प्रभावी होगा या निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु ऐसे किसी उपांतरण या विखंडन का उस विनियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा  

21. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, यथास्थिति, उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह नियम या विनियम ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि, यथास्थिति, वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु उस नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव  नहीं पड़ेगा

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