हथकरघा (उत्पादनार्थ वस्तु आरक्षण) अधिनियम, 1985
(1985 का अधिनियम संख्यांक 22)
[29 मार्च, 1985]
हथकरघों द्वारा अनन्य उत्पादन के लिए कुछ
वस्तुओं का आरक्षण करने के लिए
और उससे संबंधित विषयों का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के छत्तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हथकरघा (उत्पादनार्थ वस्तु आरक्षण) अधिनियम, 1985 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) सलाहकार समिति" से धारा 4 के अधीन गठित सलाहकार समिति अभिप्रेत है;
(ख) हथकरघा" से पावरलूम से भिन्न कोई करघा अभिप्रेत है;
(ग) विनिर्माता" के अन्तर्गत उत्पादक और प्रसंस्करणकर्ता" है और विनिर्माण" पद का तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा;
(घ) पावरलूम" से कोई ऐसा करघा अभिप्रेत है जो कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 2 के खंड (छ) में यथापरिभाषित शक्ति द्वारा कार्य करता है;
(ङ) प्रसंस्करणकर्ता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो कपड़े के उत्पादन के पश्चात् रंगाई, विरंजन, मरसरीकरण, कैलेन्डरण, कशीदाकारी, छपाई, रंजकक्षेपण, कपड़ा समुद्भरण जैसे किसी आनुषंगिक प्रसंस्करण में या किसी अन्य परिसाधन प्रसंस्करण में लगा हुआ है, किन्तु इसके अन्तर्गत कोई उत्पादक नहीं है और प्रसंस्करण" पद का तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा;
(च) उत्पादक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो हथकरघा से भिन्न किसी करघे पर कपड़े के उत्पादन में लगा हुआ है और इसके अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति है जो कपड़े के उत्पादन के लिए करघे का स्वामी है, करघे पर कार्य करता है या करघा चलाता है और उत्पादन" पद का तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा ।
3. हथकरघों द्वारा अनन्य उत्पादन के लिए वस्तुओं को विनिर्दिष्ट करने की शक्ति-(1) उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951(1951 का 65) में किसी बात के होते हुए भी यदि केन्द्रीय सरकार की सलाहकार समिति द्वारा उसे की गई सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि हथकरघा उद्योग के संरक्षण और विकास के लिए ऐसा करना आवश्यक है, जो वह राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा समय-समय पर यह निदेश दे सकेगी कि कोई वस्तु या वस्तुओं का वर्ग ऐसी तारीख से ही, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए (जिसे इसमें इसके पश्चात् आरक्षण की तारीख कहा गया है), हथकरघों द्वारा अनन्य उत्पादन के लिए आरक्षित किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित प्रत्येक आदेश, उसके किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा ; यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि यह आदेश नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
4. सलाहकार समिति का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार किसी ऐसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग की प्रकृति का अवधारण करने की दृष्टि से, जो हथकरघों द्वारा अनन्य उत्पादन के लिए आरक्षित की जाए, ऐसी सलाहकार समिति गठित करेगी, जिसमें ऐसे व्यक्ति होंगे जिनके पास सरकार की राय में, उस विषय पर सलाह देने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता है ।
(2) सलाहकार समिति निम्नलिखित विषयों पर विचार करने के पश्चात्, केन्द्रीय सरकार को अपनी सिफारिशें भेजेगी, अर्थात्: -
(क) ऐसी वस्तु या वस्तुओं का वर्ग, जो जन उपभोग के लिए हथकरघा द्वारा उत्पादित किया जा रहा है;
(ख) ऐसी वस्तु या वस्तुओं का वर्ग जो हथकरघों द्वारा परम्परागत रूप से उत्पादित किया जा रहा है;
(ग) उस नियोजन का स्तर जिसके खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट वस्तु या वस्तुओं के वर्ग के हथकरघों द्वारा अनन्य उत्पादन से पैदा होने की संभावना है;
(घ) हथकरघा उद्योग में लगे हुए व्यक्तियों के हितों का संरक्षण और उद्योग को निरन्तर बनाए रखने की आवश्यकता; और
(ङ) ऐसे कोई अन्य विषय जो सलाहकार समिति उचित समझे ।
5. हथकरघों के लिए अनन्य रूप से आरक्षित वस्तुओं के उत्पादन का प्रतिषेध-जहां धारा 3 के अधीन कोई ऐसा आदेश किया गया है, जिसमें हथकरघों द्वारा अनन्य उत्पादन के लिए किसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग को आरक्षित किया गया है वहां ऐसी वस्तु या वस्तुओं का वर्ग आरक्षण की तारीख से ही, हथकरघे से भिन्न किसी करघों द्वारा उत्पादित नहीं किया जाएगा:
परन्तु ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग के आरक्षण की तारीख से ठीक पूर्व हथकरघे से भिन्न किसी करघे में ऐसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग के उत्पादन में लगा हुआ था ऐसे आरक्षण की तारीख से तीन मास की समाप्ति तक इस प्रकार लगा रह सकेगा ।
6. जानकारी और नमूने मंगाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, किसी भी विनिर्माता से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए-
(क) ऐसी जानकारी, जो उसके द्वारा या किसी अन्य व्यक्ित द्वारा किए जा रहे किसी विनिर्माण क्रियाकलाप या कारबार के संबंध में उसके पास हो, ऐसे अधिकारी या उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किसी प्राधिकारी को ऐसे प्ररूप में और ऐसी अवधि के भीतर दे जो उस सरकार द्वारा आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए;
(ख) किन्हीं वस्तुओं के ऐसे नमूने, जो उसके द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विनिर्मित किए गए हैं, ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा निरीक्षण के लिए, ऐसे स्थानों पर और ऐसी अवधि के भीतर दे जो उसके द्वारा आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए ।
(2) जहां कोई आदेश किसी विनिर्माता को उपधारा (1) के अधीन किया गया है वहां वह ऐसे आदेश का अनुपालन करेगा ।
7. प्रवेश और निरीक्षण करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी (जिसे इसमें इसके पश्चात् प्राधिकृत अधिकारी कहा गया है) इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनों के लिए सभी युक्तियुक्त समयों पर किसी विनिर्माता के किसी ऐसे स्थान या परिसर में प्रवेश कर सकेगा जिसमें कपड़े की वस्तुएं भंडारित की जाती हैं, रखी जाती हैं या विक्रय के लिए रखी जाती हैं और उसमें रखी गई लेखा बहियों, रजिस्टरों, अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों को निरीक्षण के लिए पेश करने की अपेक्षा कर सकेगा और किन्हीं ऐसी वस्तुओं के विनिर्माण, भंडारकरण या विक्रय के लिए रखने या ऐसे पावरलूम से, जो ऐसे स्थान में पाए जाएं, संबंधित ऐसी जानकारी मंगा सकेगा जो वह ठीक समझे ।
8. तलाशी लेने और अभिग्रहण करने की शक्ति-यदि प्राधिकृत अधिकारी को यह विश्वास करने का कोई कारण है कि-
(क) धारा 3 के अधीन किए गए किसी आदेश में विनिर्दिष्ट कोई वस्तु या वस्तुओं का वर्ग ऐसे आदेश के उल्लंघन में किसी स्थान में उत्पादित किया जा रहा है; या
(ख) ऐसे आदेश के उल्लंघन में उत्पादित कोई वस्तु या वस्तुओं का वर्ग किसी स्थान में छिपाया जा रहा है; या
(ग) कोई वस्तु या वस्तुओं का वर्ग इस अधिनियम के अधीन समपहरण के लिए दायी है,
तो वह ऐसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग या किसी शक्ति करघा के लिए ऐसे किसी स्थान या परिसर में प्रवेश कर सकेगा और तलाशी ले सकेगा जिसका प्राधिकृत अधिकारी की राय में ऐसी वस्तु या ऐसी वस्तुओं के वर्ग के उत्पादन के लिए उपयोग किया गया हो ।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन ली गई किसी तलाशी के परिणामस्वरूप कोई वस्तु या वस्तुओं का वर्ग या कोई पावरलूम पाया गया है और प्राधिकृत अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग का उत्पादन या किसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग के उत्पादन में ऐसे पावरलूम का उपयोग धारा 3 के अधीन किए गए किसी आदेश के उल्लंघन में किया गया है तो वह ऐसी वस्तु, वस्तुओं के वर्ग या पावरलूमों को उस पैकेज, आवेष्टक या पात्र, यदि कोई हो, सहित, जिसमें ऐसी वस्तु या वस्तुओं का वर्ग पाया जाता है, अभिगृहीत कर सकेगा :
परन्तु जहां किसी वस्तु या पावरलूम को अभिगृहीत करना साध्य नहीं है वहां प्राधिकृत अधिकारी, यथास्थिति, उस वस्तु या पावरलूम के स्वामी पर आदेश की तामील कर सकेगा कि वह उस वस्तु या पावरलूम को, ऐसे प्राधिकृत अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना, नहीं हटाएगा, अलग नहीं करेगा या उसके संबंध में अन्यथा कार्रवाई नहीं करेगा ।
(3) जहां उपधारा (2) के अधीन कोई वस्तु या पावरलूम अभिगृहीत किया जाता है और ऐसे अभिग्रहण के छह मास के भीतर कोई अभियोजन प्रारम्भ नहीं किया जाता है, वहां वह वस्तु या पावरलूम उस व्यक्ति को वापस कर दिया जाएगा जिससे वह अभिगृहीत किया गया था ।
(4) प्राधिकृत अधिकारी ऐसे किन्हीं दस्वावेजों या चीजों को भी अभिगृहीत कर सकेगा जो उसकी राय में इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के लिए लाभदायक या सुसंगत हो ।
(5) वह व्यक्ति, जिसकी अभिरक्षा से उपधारा (4) के अधीन किन्हीं दस्तावेजों का अभिग्रहण किया जाता है, प्राधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में ऐसे दस्तावेजों की प्रतिलिपियां बनाने और उनसे उद्धरण लेने का हकदार होगा ।
(6) यदि उपधारा (4) के अधीन अभिगृहीत दस्तावेजों या चीजों को वैध रूप से हकदार कोई व्यक्ति दस्तावेज या चीजों का प्राधिकृत अधिकारी द्वारा रखे जाने का किसी भी कारण से विरोध करता है, तो वह केन्द्रीय सरकार को आवेदन कर सकता है जिसमें ऐसे विरोध के लिए कारण कथित किए गए हों, और दस्तावेजों या चीजों को वापस करने के लिए अनुरोध किया गया हो ।
(7) उपधारा (6) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर केन्द्रीय सरकार आवेदक को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् ऐसा आदेश पारित कर सकती है जो वह ठीक समझे ।
9. तलाशी और अभिग्रहण का दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अनुसार किया जाना-तलाशी और अभिग्रहण से संबंधित दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंध जहां तक हो सके, इस अधिनियम के अधीन की गई प्रत्येक तलाशी या अभिग्रहण को लागू होंगे ।
10. धारा 3 के अधीन किए गए आदेशों के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई धारा 3 के अधीन किए गए किसी आदेश के उल्लंघन में किसी वस्तु या वस्तुओं के किसी वर्ग का उत्पादन करेगा वह-
(क) कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो प्रति करघा, जिससे उक्त वस्तु या वस्तुओं के वर्ग का उत्पादन किया जाता है, पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा और जारी रहने वाले किसी उल्लंघन की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिनके दौरान, ऐसा उल्लंघन प्रथम ऐसे उल्लंघन की दोषसिद्धि के पश्चात् चालू रहता है, प्रति करघा पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा;
(ख) ऐसी वस्तु या वस्तुओं का वर्ग जिसकी बाबत आदेश का उल्लंघन किया गया है, या कोई पावरलूम जिसका उपयोग करने से ऐसे आदेश का उल्लंघन होता है, जिसके अन्तर्गत ऐसे कोई पैकेज, आवेष्टक या पात्र भी हैं जिनमें वस्तु या वस्तुओं का वर्ग पाया जाता है, केन्द्रीय सरकार को समपहृत किया जाएगा:
परन्तु यदि न्यायालय की यह राय है कि किसी भी वस्तु, पावरलूम या किन्हीं पैकेजों, आवेष्टकों या पात्रों के बारे में समपहरण का निदेश देना आवश्यक नहीं है तो वह उन कारणों से, जो अभिलिखित किए जाएंगे, ऐसा करने से विरत रह सकता है ।
11. मिथ्या कथन-यदि कोई व्यक्ति-
(क) जब उससे धारा 6 के अधीन किए गए किसी आदेश द्वारा कोई जानकारी या सैम्पल देने की अपेक्षा की जाए, तब वह ऐसा कोई कथन करेगा या ऐसी कोई जानकारी देगा जो किसी तात्त्विक विशिष्टि की दृष्टि से मिथ्या है और जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का युक्तियुक्त हेतुक है कि वह मिथ्या है या उसके सही होने का विश्वास नहीं करता है, या ऐसा सैम्पल देने में असफल रहेगा या किसी ऐसी वस्तु को, जिससे ऐसे सैम्पल की अपेक्षा की गई थी, नुकसान पहुंचाएगा या उसे नष्ट करेगा, या
(ख) जब उससे धारा 7 के अधीन प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लेखा पुस्तकों, रजिस्टर, अभिलेख या अन्य दस्तावेजों को पेश करने की अपेक्षा की जाए तब वह ऐसी पुस्तकों, रजिस्टरों, अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों को पेश करने में असफल रहेगा, तो,
वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
12. प्रयत्न और दुष्प्रेरण-किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में, जो धारा 3 के अधीन किए किसी आदेश का उल्लंघन करने का प्रयत्न करता है या उसके उल्लंघन का दुष्प्रेरण करता है, यह समझा जाएगा कि उसने उस आदेश का उल्लंघन किया है ।
13. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया हो, वहां प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, और कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित कर दिया जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत ऐसी सहकारी समिति, जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकृत समझी गई है, और फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और
(ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
14. अपराधों का संज्ञेय होना-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम द्वारा दण्डनीय प्रत्येक अपराध संज्ञेय अपराध होगा ।
15. प्रत्यायोजन की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा निदेश दे सकेगी कि धारा 3 के अधीन या धारा 18 के अधीन आदेश करने की या धारा 19 के अधीन नियम बनाने की शक्ति से भिन्न ऐसी शक्तियां, जो इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रयोक्तव्य हैं, ऐसे विषयों के संबंध में और ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए जिन्हें निदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, -
(क) केन्द्रीय सरकार के अधीनस्थ ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा, या
(ख) ऐसी राज्य सरकार या राज्य सरकार के अधीनस्थ ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा,
भी, जैसा निदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रयोक्तव्य होंगी ।
16. निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के बारे में राज्य सरकार को ऐसे निदेश दे सकेगी जो वह आवश्यक समझे ।
17. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या धारा 3 के अधीन किए गए किसी आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी या किसी प्राधिकृत अधिकारी के विरुद्ध न होगी ।
18. छूट देने की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि धारा 3 के अधीन आदेश द्वारा आरक्षित किसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग की भारत के बाहर मांग ऐसी है कि हथकरघा उद्योगों के लिए ऐसी मांग की पूर्ति करना सम्भव नहीं है या अनुसंधान के प्रयोजनों के लिए किसी ऐसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग का उत्पादन किया जाना अपेक्षित है या ऐसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग के या साधारणतया हथकरघा उद्योग के लिए बाजारों के विकास के लिए ऐसा करना आवश्यक है या समीचीन है तो वह राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग को ऐसे आदेश के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी और ऐसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग के एक मात्र निर्यात, या ऐसी संस्थाओं द्वारा, जो आदेश में निर्दिष्ट की जाएं, अनुसंधान के प्रयोजन के लिए उनका उत्पादन पावरलूम द्वारा किए जाने की अनुज्ञा दे सकेगी ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह आदेश नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
19. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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