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विधान-परिषद् अधिनियम, 1957 ( Legislative Councils Act, 1957 )


 

विधान-परिषद् अधिनियम, 1957

(1957 का अधिनियम संख्यांक 37)

[18 सितम्बर, 1957]

आन्ध्र प्रदेश राज्य के लिए विधान-परिषद् के सृजन और

ऐसी परिषद् वाले राज्यों की विधान-परिषदों

की संख्या बढ़ाने तथा उससे संबद्ध

मामलों के लिए उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के आठवें वर्ष में निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम विधान-परिषद् अधिनियम, 1957 है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में परिभाषित, किन्तु इस अधिनियम में परिभाषित न किए गए शब्दों और पदों में से प्रत्येक का वही अर्थ होगा जो उस अधिनियम में है;

(ख) आसीन सदस्य" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व किसी विधान परिषद् का सदस्य है ।

3. [आन्ध्र प्रदेश के लिए विधान परिषद् का सृजन]-आन्ध्र प्रदेश विधान परिषद् (उत्सादन) अधिनियम, 1985 (1985 का 38) की धारा 6 द्वारा (1-6-1986 से) लोप किया गया ।

4. बिहार विधान परिषद् की संख्या में वृद्धि-(1) बिहार की विधान परिषद में स्थानों की कुल संख्या 72 से बढ़ाकर 96 की जाएगी और उन स्थानों में से-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचक-मंडलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या क्रमशः 34, 8 और 8 होगी;

(ख) उक्त खंड के उपखंड (घ) के उपबन्धों के अनुसार बिहार की विधान-सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 34 होगी; और

(ग) उस खंड के उपखंड (ङ) के उपबन्धों के अनुसार बिहार के राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 12 होगी ।

                (2) परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (बिहार) आदेश, 1951 जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया जाए, तब तक प्रथम अनुसूची द्वारा निदेशित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा ।

                (3) इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, -

(क) इस अधिनियम द्वारा यथा उपान्तरित उक्त आदेशों द्वारा विभिन्न परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों को आबंटित अतिरिक्त स्थान; और

(ख) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों से भरे जाने वाले अतिरिक्त स्थान,

भरने के लिए निर्वाचन किए जाएंगे मानो वे स्थान रिक्त हुए हों ।

                (4) इसलिए कि उक्त परिषद् के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई सदस्य 6 मई, 1958 को और तत्पश्चात् प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर निवृत्त हो जाएं, बिहार का राज्यपाल निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध करेगा, जैसा उपधारा (3) के अधीन अतिरिक्त स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित किए जाने वाले सदस्यों की पदावधि के बारे में वह आवश्यक समझे ।

5. मुम्बई विधान परिषद् की संख्या में वृद्धि-(1) मुम्बई की विधान परिषद् में स्थानों की कुल संख्या बढ़ाकर 108 की जाएगी और उन स्थानों में से-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचक-मंडलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या क्रमशः 36, 9 और 9 होगी;

(ख) उक्त खंड के उपखण्ड (घ) के उपबन्धों के अनुसार मुम्बई की विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 42 होगी; और

(ग) उस खंड के उपखंड (ङ) के उपबन्धों के अनुसार मुम्बई के राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 12 होगी ।

                (2) इस अधिनियम के प्रारम्भ से परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मुम्बई) आदेश, 1951, जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया जाए, तब तक द्वितीय अनुसूची द्वारा निदेशित उपान्तरों के अधीन रहते हुए, प्रभावी होगा और इस प्रकार यथा उपान्तरित उक्त आदेश में मुम्बई राज्य के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा मानो वह निदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 8 द्वारा बनाए गए उस राज्य के प्रति निर्देश है ।

                (3) इस अधिनियम के प्रारम्भ से-

(क) नीचे दी गई सारणी के स्तम्भ 1 में विनिर्दिष्ट किसी परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र के ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व प्रतिनिधित्व करने वाले उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उक्त परिषद् को उक्त सारणी के स्तम्भ 2 में उस निर्वाचन-क्षेत्र के सामने विनिर्दिष्ट परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा निर्वाचित किया गया है, यदि ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व वह मुम्बई राज्य में किसी सभा-निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचक है:

सारणी

1

2

मुम्बई शहर (स्नातक)

बृहत मुम्बई (स्नातक)

अहमदाबाद शहर (स्नातक)

उत्तरी खण्ड (स्नातक)

गुजरात (स्नातक)

पुणे शहर (स्नातक)

दक्षिणी खंड (स्नातक)

महाराष्ट्र (स्नातक)

मुम्बई शहर (अध्यापक)

पुणे शहर (अध्यापक)

केन्द्रीय खंड (अध्यापक)

दक्षिणी खंड (अध्यापक)

बृहत मुम्बई-एवं-महाराष्ट्र (अध्यापक)

अहमदाबाद शहर (अध्यापक)

उत्तरी खंड (अध्यापक)

गुजरात (अध्यापक)

मुम्बई शहर (स्थानीय प्राधिकारी)

बृहत मुम्बई-एवं-महाराष्ट्र पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी)

अहमदाबाद शहर (स्थानीय प्राधिकारी)

अहमदाबाद जिला (स्थानीय प्राधिकारी)

मेहसाणा-एवं-बनासकाण्ठा (स्थानीय प्राधिकारी)

गुजरात उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी)

बडोदा-एवं-अमरेली (स्थानीय प्राधिकारी)

भडोच-एवं-पंचमहल (स्थानीय प्राधिकारी)

कैरा (स्थानीय प्राधिकारी)

सूरत (स्थानीय प्राधिकारी)

गुजरात दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी)

पूर्वी खानदेश (स्थानीय प्राधिकारी)

नाशिक (स्थानीय प्राधिकारी)

अहमदनगर-एवं-पश्चिमी खानदेश (स्थानीय प्राधिकारी)

महाराष्ट्र दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी)

पुणे शहर (स्थानीय प्राधिकारी)

पुणे (स्थानीय प्राधिकारी)

शोलापुर (स्थानीय प्राधिकारी)

उत्तर सातारा (स्थानीय प्राधिकारी)

महाराष्ट्र दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी)

 

1

2

कुलाबा-एवं-ठाणे (स्थानीय प्राधिकारी)

रत्नागिरी-एवं-कनारा (स्थानीय प्राधिकारी)

कोल्हापुर-एवं-दक्षिण सातारा (स्थानीय प्राधिकारी)

महाराष्ट्र उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी)

(ख) भूतपूर्व मुम्बई राज्य की विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 34 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अनुसरण में चुने गए उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह विद्यमान मुम्बई राज्य की विधान सभा के सदस्यों द्वारा सम्यक् रूप से निर्वाचित किया गया है, यदि ऐसे प्रारम्भ के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य में किसी सभा निर्वाचन-क्षेत्र के लिए वह निर्वाचक है ।

(4) उक्त परिषद् का प्रत्येक आसीन निर्वाचित सदस्य, जिसके बारे में यह नहीं समझा गया है कि वह उपधारा (3) के खंड (क) या खण्ड (ख) के आधार पर उस परिषद् के लिए निर्वाचित किया गया है, इस अधिनियम के प्रारंभ से उसका उक्त परिषद् का सदस्य होना समाप्त हो जाएगा ।

(5) ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र इस अधिनियम द्वारा यथा उपान्तरित परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मुम्बई) आदेश, 1951 द्वारा विभिन्न परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों को आबंटित ऐसे स्थानों को और उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों में से ऐसे स्थानों को, जो तत्समय रिक्त हैं, भरने के लिए निर्वाचन किए जाएंगे मानो वे स्थान तत्समय रिक्त हुए थे ।

(6) उक्त परिषद् के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका प्रथम गठन ऐसी तारीख को हुआ है, जिसको भूतपूर्व मुम्बई राज्य की विधान परिषद् प्रथम गठित की गई थी ।

(7) इसलिए कि उक्त परिषद् के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई सदस्य 24 अप्रैल, 1958 को और तत्पश्चात् प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर निवृत्त हो जाएं, मुम्बई का राज्यपाल निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध करेगा, जैसा वह राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 34 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अनुसरण में चुने गए आसीन सदस्यों और इस धारा की उपधारा (5) के अधीन निर्वाचित किए जाने वाले सदस्यों की पदावधि की बाबत ठीक समझे ।

(8) राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 34 का निम्नलिखित रूप में संशोधन किया जाएगा और वह सदैव से संशोधित की गई समझी जाएगीः-

(क) उपधारा (2) में जब तक इस धारा की उपधारा (4) और (5) के उपबन्धों के अनुसार, उक्त परिषद् पुनर्गठित न की गई हो और प्रथम बार अधिवेशन के लिए आहूत न की गई हो" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर जब तक कि विधि द्वारा अन्यथा उपबंधित न किया जाए" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ख) उपधारा (3), (4) और (5) का लोप किया जाएगा ।

                (9) इस धारा में, भूतपूर्व मुम्बई राज्य" पद से 1 नवम्बर, 1956 के ठीक पूर्व यथा विद्यमान मुम्बई राज्य अभिप्रेत है ।

6. मध्य प्रदेश विधान परिषद् की संख्या में वृद्धि-(1) राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 33 के अधीन गठित की जाने वाली मध्य प्रदेश राज्य की विधान परिषद् में स्थानों की कुल संख्या उस धारा की उपधारा (2) द्वारा यथा नियत 72 से बढ़ाकर 90 की जाएगी ।

(2) उक्त धारा निम्नलिखित रूप में संशोधित की जाएगी-

                (क) उपधारा (2) में, -

(i) 72" अंकों के स्थान पर 90" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ii) खण्ड (क) में 24, 6 और 6", अंकों और शब्द के स्थान पर 31, 8 और 8" अंक और शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(iii) खण्ड (ख) में, 24" अंकों के स्थान पर 31" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ख) उपधारा (3) में, इस अधिनियम" शब्दों के स्थान पर, विधान परिषद् अधिनियम, 1957" शब्द और अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे; और

(ग) उपधारा (4) में, -

(i) नियत दिन" शब्दों के स्थान पर, ऐसा प्रारम्भ" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे; और

(ii) परन्तुक का लोप किया जाएगा ।

7. मद्रास विधान परिषद् की संख्या में वृद्धि-(1) मद्रास की विधान परिषद् में स्थानों की कुल संख्या 50 से बढ़ाकर 63 की जाएगी और उक्त स्थानों में से-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचक-मंडलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या क्रमशः 21, 6 और 6 होगी;

(ख) उक्त खंड के उपखंड (घ) के उपबन्धों के अनुसार मद्रास विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 21 होगी; और

(ग) उस खंड के उपखंड (ङ) के उपबन्धों के अनुसार मद्रास के राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 9 होगी ।

(2) परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मद्रास) आदेश, 1951, जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया जाए तब तक तृतीय अनुसूची द्वारा निदेशित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा ।

(3) इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र-

(क) (i) इस अधिनियम द्वारा यथा उपान्तरित उक्त आदेश द्वारा स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र और अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र को आबंटित अतिरिक्त स्थान; और

(ii) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों से भरे जाने वाले अतिरिक्त स्थान,

                भरने के लिए निर्वाचन किए जाएंगे मानो वे स्थान रिक्त हुए हों;

(ख) उक्त उपधारा के खंड (ग) के अधीन अतिरिक्त स्थान भरने के लिए मद्रास के राजयपाल द्वारा एक व्यक्ति नामनिर्देशित किया जाएगा ।

(4) इसलिए कि, उक्त परिषद् के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई सदस्य 20 अप्रैल, 1958 को और तत्पश्चात् प्रत्येक द्वितीय वर्ष समाप्ति को निवृत्त हो जाएं, मद्रास का राज्यपाल निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध करेगा, जैसा उपधारा (3) के खंड (क) के अधीन निर्वाचित किए जाने वाले सदस्यों और उस उपधारा के खंड (ख) के अधीन नामनिर्देशित किए जाने वाले सदस्य की पदावधि की बाबत वह ठीक समझे ।

8. मैसूर विधान-परिषद् की संख्या में वृद्धि-(1) मैसूर की विधान परिषद् में स्थानों की कुल संख्या बढ़ाकर 63 की जाएगी और उन स्थानों में से-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचक-मंडलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या क्रमशः 21, 6 और 6 होगी;

(ख) उक्त खंड के उपखंड (घ) के उपबन्धों के अनुसार मैसूर विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 21 होगी; और

(ग) उस खंड के उपखंड (ङ) के उपबंधों के अनुसार मैसूर के राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 9 होगी ।

                (2) इस अधिनियम के प्रारम्भ से, परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मैसूर) आदेश, 1951, जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया जाए, तब तक चतुर्थ अनुसूची द्वारा निदेशित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, और इस प्रकार उपान्तरित उक्त आदेश में मैसूर राज्य के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा मानो वह राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 7 द्वारा बनाए गए उस राज्य के प्रति निर्देश है ।

(3) इस अधिनियम के प्रारम्भ से, -

(क) नीचे दी गई सारणी के स्तम्भ 1 में विनिर्दिष्ट किसी परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र के ऐसे प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रतिनिधित्व करने वाले उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उक्त परिषद् को, उक्त सारणी के स्तम्भ 2 में उक्त निर्वाचन-क्षेत्र के सामने विनिर्दिष्ट परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा निर्वाचित किया गया हैः

सारणी

1

2

मैसूर (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर दक्षिण (स्नातक) निर्वाचन क्षेत्र

मैसूर (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर दक्षिण (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र

 

1

2

कोलार (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

तुमकुर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

बंगलोर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर दक्षिण-पूर्व (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

हसन (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

मांड्या (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

चिकमगलोर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

शिमोगा (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

चितलदुर्ग-एवं-बेलारी (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर दक्षिण-पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

(ख) भूतपूर्व मैसूर राज्य की विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य, राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 36 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अनुसरण में चुने गए उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य और राज्य पुनर्गठन (अन्तःकालीन राज्य विधान-मंडलों के लिए निर्वाचन) नियम, 1956 के नियम 4 के उपनियम (7) के अधीन मद्रास विधान-परिषद् के अध्यक्ष द्वारा विनिर्दिष्ट उक्त परिषद् के आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह विद्यमान मैसूर राज्य की विधान-सभा के सदस्यों द्वारा सम्यक् रूप से निर्वाचित किया गया है ; और

(ग) भूतपूर्व मैसूर राज्य के राजप्रमुख द्वारा नामनिर्देशित उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह विद्यमान मैसूर राज्य के राज्यपाल द्वारा उक्त परिषद् को नामनिर्देशित किया गया है ।

                (4) उन तीन सदस्यों के बारे में, जो एक नवम्बर, 1956 के ठीक पूर्व मुम्बई विधान-परिषद् के सदस्य थे और राज्य पुनर्गठन (अन्तःकालीन राज्य विधान-मंडलों के लिए निर्वाचन) नियम, 1956 के नियम 4 के उपनियम (7) के आधार पर उस तारीख को मैसूर विधान-परिषद् के सदस्य बनें, यह समझा जाएगा कि वे मैसूर उत्तर-पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा मैसूर विधान-परिषद् को निर्वाचित किए गए हैं ।

(5) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र इस अधिनियम द्वारा यथा उपान्तरित परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मैसूर) आदेश, 1951 द्वारा विभिन्न परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों को आबंटित ऐसे स्थानों और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले ऐसे स्थानों के लिए, जो तत्समय रिक्त हैं, निर्वाचन किए जाएंगे, मानो वे स्थान तब रिक्त हो गए हों ।

(6) ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन आबंटित स्थानों में की रिक्तियां राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशन द्वारा भरी जाएंगी ।

(7) उक्त परिषद् के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस तारीख को प्रथम गठित की गई है जिसको भूतपूर्व मैसूर राज्य की विधान-परिषद् प्रथम गठित की गई थी ।

(8) इसलिए कि उक्त परिषद् के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई सदस्य  [13 मई, 1958ट को और तत्पश्चात् प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर निवृत्त हो जाए, मैसूर का राज्यपाल, निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध करेगा जैसा वह राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 36 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अनुसरण में चुने गए आसीन सदस्यों और इस धारा की उपधारा (5) और (6) के अधीन निर्वाचित किए जाने वाले और नामनिर्देशित किए जाने वाले सदस्यों की पदावधि की बाबत ठीक समझे ।

(9) राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 36 का निम्नलिखित रूप में संशोधन किया जाएगा और वह सदैव से संशोधित की गई समझी जाएगीः-

(क) उपधारा (2) में, जब तक इस धारा की उपधारा (3) और (4) के उपबन्धों के अनुसार उक्त परिषद् पुनर्गठित न की गई हो और प्रथम बार अधिवेशन के लिए आहूत न की गई हो" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर जब तक विधि द्वारा अन्यथा उपबंधित न किया जाए" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे; और

(ख) उपधारा (3) और (4) का लोप किया जाएगा ।

(10) इस धारा में भूतपूर्व मैसूर राज्य" पद से 1 नवम्बर, 1956 के ठीक पूर्व यथा विद्यमान मैसूर राज्य अभिप्रेत है ।

9. पंजाब विधान परिषद् की संख्या में वृद्धि-(1) पंजाब की विधान-परिषद् में स्थानों की कुल संख्या बढ़ाकर 51 की जाएगी और उन स्थानों में से-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचन-मंडलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या क्रमशः 17, 4 और 4 होगी;

(ख) उक्त खंड के उपखंड (घ) के उपबन्धों के अनुसार पंजाब की विधान-सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियोंसे भरी जाने वाली संख्या 18 होगी; और

(ग) उस खंड के उपखंड (ङ) के उपबन्धों के अनुसार पंजाब के राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 8 होगी ।

                (2) इस अधिनियम के प्रारंभ से, परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पंजाब) आदेश, 1951 जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया गया हो, तब तक पंचम अनुसूची द्वारा निदेशित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा और इस प्रकार यथा उपान्तरित उक्त आदेश में, पंजाब राज्य के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा मानो वह निर्देश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) 11 द्वारा बनाए गए उस राज्य के प्रति निर्देश है ।

(3) इस अधिनियम के प्रारम्भ से, -

(क) नीचे दी गई सारणी के स्तम्भ 1 में विनिर्दिष्ट किसी स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र का ऐसे प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रतिनिधित्व करने वाले उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उक्त परिषद् को उक्त सारणी के स्तम्भ 2 में उस निर्वाचन-क्षेत्र के सामने विनिर्दिष्ट स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित किया गया हैः-

सारणी

1

2

अम्बाला-एवं-करनाल (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पंजाब दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

गुड़गांव-एवं-रोहतक-एवं-हिसार-एवं शिमला (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पंजाब दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

होशियारपुर-एवं-कांगड़ा-एवं-गुरदासपुर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पंजाब उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

जलंधर-एवं-फिरोजपुर-एवं-अमृतसर-एवं-लुधियाना (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पंजाब उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

(ख) स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र या अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र के ऐसे प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रतिनिधित्व करने वाले उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उपधारा (2) के आधार पर यथा परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा उक्त परिषद् को निर्वाचित किया गया है;

(ग) भूतपूर्व पंजाब राज्य की विधान-सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 37 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन निर्वाचित उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह विद्यमान पंजाब राज्य की विधान-सभा के सदस्यों द्वारा सम्यक् रूप से निर्वाचित किया गया है ।

(4) ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र-

(क) इस अधिनियम द्वारा यथा उपान्तरित परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पंजाब) आदेश, 1951 द्वारा विभिन्न परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों को आबंटित अतिरिक्त स्थानों को;

(ख) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले अतिरिक्त स्थानों को,

भरने के लिए निर्वाचन किए जाएंगे मानो वे स्थान रिक्त हो गए हों ।

                (5) उक्त परिषद् के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका प्रथम गठन ऐसी तारीख को हुआ है जिसको भूतपूर्व पंजाब राज्य की विधान-परिषद् प्रथम गठित की गई थी ।

(6) इसलिए कि उक्त परिषद् के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई सदस्य 26 अप्रैल, 1958 को और तत्पश्चात् प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर निवृत्त हो जाएं, पंजाब का राज्यपाल निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध करेगा जैसा वह राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 37 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन निर्वाचित आसीन सदस्यों और इस धारा की उपधारा (4) के अधीन निर्वाचित किए जाने वाले सदस्यों की पदावधि की बाबत ठीक समझे ।

(7) राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 37 का निम्नलिखित रूप में संशोधन किया जाएगा और वह सदैव से संशोधित की गई समझी जाएगी-

(क) उपधारा (2) में, जब तक इस धारा की उपधारा (3) और (4) और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबन्धों के अनुसार उक्त परिषद् पुनर्गठित न की गई हो और प्रथम बार अधिवेशन के लिए आहूत न की गई हो," शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर जब तक विधि द्वारा अन्यथा उपबंधित न किया जाए" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ख) उपधारा (3) और (4) का लोप किया जाएगा ।

(8) इस धारा में भूतपूर्व पंजाब राज्य" पद से 1 नवम्बर, 1956 के ठीक पूर्व यथाविद्यमान पंजाब राज्य अभिप्रेत है ।

10. उत्तर प्रदेश विधान-परिषद् की संख्या में वृद्धि-(1) उत्तर प्रदेश की विधान-परिषद् में स्थानों की कुल संख्या 72 से बढ़ाकर 108 की जाएगी और उन स्थानों में से-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचक-मंडलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या क्रमशः 39, 9 और 9 होगी;

(ख) उक्त खंड के उपखंड (घ) के उपबन्धों के अनुसार उत्तर प्रदेश की विधान-सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 39 होगी; और

(ग) उस खंड के उपखंड (ङ) के उपबन्धों के अनुसार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 12 होगी ।

(2) परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (उत्तर प्रदेश) आदेश, 1951 जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया जाए, तब तक छठी अनुसूची द्वारा निदेशित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा ।

(3) इस अधिनियम के प्रारम्भ से-

(क) किसी स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र या अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र का ऐसे प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रतिनिधित्व करने वाले उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में, जिसका विस्तार उपधारा (2) के आधार पर परिवर्तित किया गया है, यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार ऐसे परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा उक्त परिषद् को निर्वाचित किया गया है;

(ख) नीचे दी गई सारणी के स्तम्भ 1 में विनिर्दिष्ट किसी स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र का ऐसे आरंभ के ठीक पूर्व प्रतिनिधित्व करने वाले उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उक्त सारणी के स्तम्भ 2 में उस निर्वाचन-क्षेत्र के सामने विनिर्दिष्ट स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा उक्त परिषद् को निर्वाचित किया गया हैः-

सारणी

1

2

उत्तर प्रदेश उत्तर-पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

मेरठ (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

उत्तर प्रदेश उत्तर-पूर्व (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

रूहेलखंड (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

उत्तर प्रदेश पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

आगरा (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

उत्तर प्रदेश मध्य (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

लखनऊ (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

उत्तर प्रदेश दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र 

इलाहाबाद (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

उत्तर प्रदेश पूर्व (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

वाराणसी (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

(4) ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, -

(क) इस अधिनियम द्वारा यथा उपान्तरित उक्त आदेश द्वारा कई विभिन्न परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों को आबंटित अतिरिक्त स्थानों; और

(ख) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले अतिरिक्त स्थानों,

को भरने के लिए निर्वाचन किए जाएंगे, मानो वे स्थान रिक्त हो गए हों ।

(5) इसलिए कि, उक्त परिषद् के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई सदस्य 5 मई, 1958 को और तत्पश्चात् प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर निवृत्त हो जाएं, उत्तर प्रदेश का राज्यपाल निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध करेगा जैसा वह उपधारा (4) के अधीन निर्वाचित किए जाने वाले सदस्यों की पदावधि की बाबत ठीक समझे ।

11. पश्चिमी बंगाल विधान-परिषद् की संख्या में वृद्धि-पश्चिमी बंगाल की विधान-परिषद् में स्थानों की कुल संख्या 51 से बढ़ाकर 75 की जाएगी और उन स्थानों में से-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचक-मंडलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या क्रमशः 27, 6 और 6 होगी;

(ख) उक्त खंड के उपखंड (घ) के उपबन्धों के अनुसार पश्चिमी बंगाल की विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 27 होगी; और

(ग) उस खंड के उपखंड (ङ) के उपबन्धों के अनुसार पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 9 होगी ।

                (2) परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पश्चिमी बंगाल) आदेश, 1951 जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया गया हो, तब तक सप्तम अनुसूची द्वारा निदेशित उपान्तरों के अधीन रहते हुए, प्रभावी होगा ।

(3) इस अधिनियम के प्रारम्भ से, - 

(क) कलकत्ता (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र का ऐसे प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रतिनिधित्व करने वाले उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य और कलकत्ता (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले, जिसका विस्तार उपधारा (2) के आधार पर परिवर्तित किया गया है, प्रत्येक ऐसे सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह क्रमशः कलकत्ता (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र और कलकत्ता (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा उक्त परिषद् को निर्वाचित किया गया है;

(ख) नीचे दी गई सारणी के स्तम्भ 1 में विनिर्दिष्ट परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र में से किसी का, ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व प्रतिनिधित्व करने वाले उक्त परिषद् के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उक्त सारणी के स्तम्भ 2 में उस निर्वाचन-क्षेत्र के सामने विनिर्दिष्ट परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा उक्त परिषद् को निर्वाचित किया गया हैः-

सारणी

1

2

पश्चिमी बंगाल दक्षिण (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल पश्चिम (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल उत्तर (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र

बरद्वान खंड (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र

प्रेसिडेंसी खंड दक्षिण (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र

प्रेसिडेंसी खंड उत्तर (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र

दार्जीलिंग (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

नाडिया-मुर्शीदाबाद (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल पूर्व (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

कलकत्ता-24 परगना (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

हुगली-हावड़ा (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल मध्य (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

बर्दवान खंड उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र

 (4) ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र-

                (क) इस अधिनियम द्वारा यथा उपान्तरित उक्त आदेश द्वारा कई परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों को आबंटित अतिरिक्त स्थानों, और

                (ख) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों से भरे जाने वाले अतिरिक्त स्थानों,

को भरने के लिए निर्वाचन किए जाएंगे, मानो वे स्थान रिक्त हो गए हों ।

(5) इसलिए कि उक्त परिषद् के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई सदस्य 4 जून, 1958 को और तत्पश्चात् प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर निवृत्त हो जाएं, पश्चिमी बंगाल का राज्यपाल निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध करेगा जैसा वह उपधारा (4) के अधीन निर्वाचित सदस्यों की पदावधि की बाबत ठीक समझे ।

12. [1950 के अधिनियम सं० 43 का संशोधन ।]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1960 (1960 का 58) की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।

13. [1951 के अधिनियम सं० 43 का संशोधन ।]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1960 (1960 का 58) की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।

प्रथम अनुसूची

[धारा 4(2) देखिए]

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (बिहार) आदेश, 1951 में उपान्तरण

                सारणी में, -

(क) स्नातक निर्वाचन-क्षेत्रों से संबंधित तृतीय स्तम्भ में, 2", 2", 1" और 1" अंकों के स्थान पर क्रमशः 3", 2", 2" और 1" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ख) अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्रों से संबंधित तृतीय स्तम्भ में, 1", 1", 2" और 2" अंकों के स्थान पर क्रमशः 2", 1", 3" और 2" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ग) स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्रों से संबंधित तृतीय स्तम्भ में, 6", 6", 6" और 6" अंकों के स्थान पर क्रमशः 8", 8", 9" और 9" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।

द्वितीय अनुसूची

[धारा 5(2) देखिए]

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मुम्बई) आदेश, 1951 में उपान्तरण

                उक्त आदेश से संलग्न सारणी के स्थान पर, निम्नलिखित सारणी प्रतिस्थापित की जाएगीः-

सारणी

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम

निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार

स्थानों की संख्या

1

2

3

स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र

बृहत् मुम्बई (स्नातक)

बृहत मुम्बई

2

गुजरात (स्नातक)

कच्छ, हलार, सोरठ, गोहिलवाड, मध्य सौराष्ट्र, झालावाड़, अमरेली, अहमदाबाद, मेहसाणा, बनासकांठा, साबरकांठा, कैरा, पंचमहाल, बड़ोदा, भड़ोच और सूरत जिले

2

महाराष्ट्र (स्नातक)

ठाणे, कुलाबा, रत्नागिरी, कोलहापुर, दक्षिण सातारा, उत्तर सातारा, सोलापुर, पुणे, अहमदनगर, नाशिक, डांग, पश्चिम खानदेश, पूर्व खानदेश, औरंगाबाद, परभणी, भीर, उस्मानाबाद और नान्देड जिले

2

विदर्भ (स्नातक)

बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा और चांदा जिले

3

अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र

गुजरात (अध्यापक)

कच्छ, हलार, सोरठ, गोहिलवाड, मध्य सौराष्ट्र, झालावाड़, अमरेली, अहमदाबाद, मेहसाणा, बनासकांठा, साबरकांठा, कैरा, पंचमहाल, बड़ोदा, भड़ोच और सूरत जिले

2

बृहत् मुम्बई-एवं-महाराष्ट्र (अध्यापक)

बृहत् मुम्बई, ठाणे, कुलाबा, रत्नागिरी, कोल्हापुर, दक्षिण सातारा, उत्तर सातारा, सोलापुर, पुणे, अहमदनगर, नाशिक, डांग, पश्चिम खानदेश और पूर्व खानदेश जिले

4

 

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम

निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार

स्थानों की संख्या

1

2

3

अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र

विदर्भ (अध्यापक)

बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा, चांदा,

नान्देड, उस्मानाबाद, भीर, परभणी, और औरंगाबाद जिले

3

स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र

सौराष्ट्र (स्थानीय प्राधिकारी)

हलार, सौरठ, गोहिलवाड़, मध्य सौराष्ट्र, झालावाड़ और अमरेली जिले

5

गुजरात उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी)

अहमदाबाद, मेहसाणा, बनासकांठा, साबरकांठा और कच्छ जिले

4

गुजरात दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी)

सूरत, भडोच, बड़ोदा, कैरा और पंचमहाल जिले

5

बृहत् मुम्बई-एवं-महाराष्ट्र पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी)

बृहत मुम्बई, ठाणे, कुलाबा, रत्नागिरी और कोल्हापुर जिले

4

महाराष्ट्र दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी)

पुणे, उत्तर सातारा, दक्षिण सातारा, और सोलापुर जिले

5

महाराष्ट्र उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी)

अहमदनगर, नाशिक, डांग, पश्चिम खानदेश और पूर्व खानदेश जिले

5

विदर्भ (स्थानीय प्राधिकारी)

बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा और चांदा जिले

5

मराठवाड़ा (स्थानीय प्राधिकारी)

औरंगाबाद, भीर, परभणी, नांदेड और उस्मानाबाद जिले

3"

तृतीय अनुसूची

[धारा 7(2) देखिए]

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मद्रास) आदेश, 1951 में उपान्तरण

सारणी में, -

(क) अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित तृतीय स्तम्भ में 4" अंक के स्थान पर 6" अंक प्रतिस्थापित            किया जाएगा;

(ख) स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित तृतीय स्तम्भ में, 4", 4", 4" और 4" अंकों के स्थान पर क्रमशः 5", 5", 6" और 5" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।

चतुर्थ अनुसूची

[धारा 8(2) देखिए]

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मैसूर) आदेश, 1951 में उपान्तरण

उक्त आदेश से संलग्न सारणी के स्थान पर, निम्नलिखित सारणी प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -

सारणी

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम

निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार

स्थानों की संख्या

1

2

3

स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर उत्तर (स्नातक)

बिदर, गुलबर्गा, रायचूर, धारवाड, बीजापुर, बेलगांव, उत्तर कनारा और बेलारी जिले

2

 

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम

निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार

स्थानों की संख्या

1

2

3

मैसूर दक्षिण (स्नातक)

चितलदुर्ग, तुमकुर, मांड्या, मैसूर, हासन, चिकमगलूर, शिमोगा, बंगलोर, कोलार, दक्षिण कनारा और कुर्ग जिले

4

अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर उत्तर (स्नातक)

बिदर, गुलबर्गा, रायचूर, धारवाड, बीजापुर, बेलगांव, उत्तर कनारा बेलारी जिले

2

मैसूर दक्षिण (स्नातक)

चितलदुर्ग, तुमकुर, मांड्या, मैसूर, हासन, चिकमगलूर, शिमोगा, बंगलोर, कोलार, दक्षिण कनारा और कुर्ग जिले

4

स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र

मैसूर उत्तर-पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी)

बेलगांव, उत्तर कनारा, धारवाड और बीजापुर जिले

6

मैसूर उत्तर-पूर्व (स्थानीय प्राधिकारी)

बिदर, गुलबर्गा, रायचूर और बेलारी जिले

3

मैसूर दक्षिण-पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी)

चितलदुर्ग, दक्षिण कनारा, शिमोगा और चिकमगलूर जिले

4

मैसूर दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी)

हासन, मांड्या, कुर्ग और मैसूर जिले

4

मैसूर दक्षिण-पूर्व (स्थानीय प्राधिकारी)

तुमकुर, बंगलोर और कोलार जिले

4"

पंचम् अनुसूची

[धारा 9 (2) देखिए]

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पंजाब) आदेश, 1951 में उपान्तरण

सारणी में, -

                                (क) स्नातक-निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित तृतीय स्तम्भ में 3" अंक के स्थान पर, 4" अंक प्रतिस्थापित किया जाएगा;

(ख) अध्यापक-निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित तृतीय स्तम्भ में, 3" अंक के स्थान पर, 4" अंक प्रतिस्थापित          किया जाएगा;

(ग) स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र" शीर्षक के नीचे की प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टियां प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात्ः-

पंजाब उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी)

अमृतसर, गुरदासपुर, कांगड़ा, होशियारपुर, कपूरथला, जलंधर, लुधियाना और फिरोजपुर जिले

8

पंजाब मध्य (स्थानीय प्राधिकारी)

पटियाला, भटिंडा और संगरुर जिले

3

पंजाब दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी)

शिमला, अम्बाला, करनाल, रोहतक, गुडगांव, मोहिंदरगढ़ और हिसार जिले

6"

षष्ठम् अनुसूची

[धारा 10 (2) देखिए]

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (उत्तर प्रदेश) आदेश, 1951 में उपान्तरण

आदेश से संलग्न सारणी के स्थान पर, निम्नलिखित सारणी प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-

सारणी

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम

निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार

स्थानों की संख्या

1

2

3

स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र

उत्तर प्रदेश पश्चिम (स्नातक)

मेरठ, आगरा, झांसी और इलाहाबाद खंड

5

उत्तर प्रदेश पूर्व (स्नातक)

कुमांऊ, रूहेलखंड, लखनऊ, फैजाबाद, गोरखपुर और वाराणसी खंड

4

अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र

उत्तर प्रदेश पश्चिम (अध्यापक)

मेरठ, आगरा, झांसी, और इलाहाबाद खंड

4

उत्तर प्रदेश पूर्व (अध्यापक)

कुमांऊ, रूहेलखंड, लखनऊ, फैजाबाद, गोरखपुर और वाराणसी खंड

5

स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र

मेरठ (स्थानीय प्राधिकारी)

मेरठ खंड

6

आगरा (स्थानीय प्राधिकारी)

आगरा खंड

5

इलाहाबाद (स्थानीय प्राधिकारी)

इलाहाबाद और झांसी खंड

6

वाराणसी (स्थानीय प्राधिकारी)

वाराणसी और गोरखपुर खंड

6

लखनऊ (स्थानीय प्राधिकारी)

लखनऊ और फैजाबाद खंड

8

रूहेलखंड (स्थानीय प्राधिकारी)

रूहेलखंड और कुमांऊ खंड

8"

सप्तम अनुसूची

[धारा 11 (2) देखिए]

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पश्चिमी बंगाल) आदेश, 1951 में उपान्तरण

उक्त आदेश से संलग्न सारणी के स्थान पर निम्नलिखित सारणी प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-

सारणी

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम

निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार

स्थानों की संख्या

1

2

3

स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र

कलकत्ता (स्नातक)

फोर्ट विलियम सहित कलकत्ता नगरपालिका अधिनियम, 1951 (1951 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 33) की धारा 5 के खंड (ii) में यथा परिभाषित कलकत्ता, और नदी किनारे तक का क्लाइड रो और स्ट्रैण्ड रोड के साउथ नोक (एज) का हेस्टिंग्ज नार्थ का भाग

3

पश्चिमी बंगाल (स्नातक)

बर्दवान खंड और प्रेसिडेन्सी खंड (डिवीजन) [फोर्ट विलियम सहित कलकत्ता नगरपालिका अधिनियम, 1951 (1951 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 33) की धारा 5 के खंड (ii) में यथा परिभाषित कलकत्ता, और नदी किनारे तक का क्लाइड रो और स्ट्रैण्ड रोड के साउथ नोक (एज) का हेस्टिंग्ज नार्थ का भाग अपवर्जित करके]

3

 

निर्वाचन-क्षेत्र का नाम

निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार

स्थानों की संख्या

1

2

3

अध्यापक निर्वाचन-क्षेत्र

कलकत्ता (अध्यापक)

24 परगना जिला; फोर्ट विलियम सहित कलकत्ता नगरपालिका अधिनियम, 1951 (1951 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 33) की धारा 5 के खंड (ii) में यथा परिभाषित, कलकत्ता और नदी किनारे तक का क्लाइड रो और स्ट्रैण्ड रोड के साउथ नोक (एज) का हेस्टिंग्ज नार्थ का भाग

3

पश्चिमी बंगाल (अध्यापक)

बरदवान खंड और प्रेसिडेन्सी खंड (डिवीजन) [24-परगना जिला और फोर्ट विलियम सहित कलकत्ता नगरपालिका अधिनियम, 1951 (1951 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 33) की धारा 5 के खंड (ii) में यथा परिभाषित कलकत्ता और नदी किनारे तक का क्लाइड रो और स्ट्रैण्ड रोड के साउथ नोक (एज) का हेस्टिंग्ज नार्थ का भाग अपवर्जित करके]

3

स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र

पश्चिमी बंगाल उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी)

दार्जीलिंग, जलपाइगुडी और कूचबिहार जिले

3

पश्चिमी बंगाल पूर्व (स्थानीय प्राधिकारी)

पश्चिमी दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया जिले

5

पश्चिमी बंगाल पश्चिम (स्थानीय प्राधिकारी)

बरदवान खंड (हावड़ा और हुगली जिलों को अपवर्जित करके)

7

पश्चिमी बंगाल मध्य (स्थानीय प्राधिकारी)

हावड़ा और हुगली जिले

5

पश्चिमी बंगाल दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी)

24-परगना जिला, और फोर्ट विलियम सहित कलकत्ता नगरपालिका अधिनियम, 1951 (1951 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 33) की धारा 5 के खंड (ii) में यथा परिभाषित कलकत्ता और नदी किनारे तक का क्लाइड रो और स्ट्रैण्ड रोड के साउथ नोक (एज) का हेस्टिंग्ज नार्थ का भाग

7"

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