बन्दी अंतरण अधिनियम, 1950
(1950 का अधिनियम संख्यांक 29)
[12 अप्रैल, 1950]
कारागार में परिरुद्ध व्यक्तियों को एक राज्य से हटा कर दूसरे
राज्य में भेजने का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है :-
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम बन्दी अन्तरण अधिनियम, 1950 है ।
(2) इसका विस्तार *** सम्पूर्ण भारत पर है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में,-
(क) “न्यायालय” के अन्तर्गत ऐसा अधिकारी भी है, जो सिविल, दांडिक अथवा राजस्व अधिकारिता का विधिपूर्वक प्रयोग करता हो ;
[(ख) “सरकार” या “राज्य सरकार” से, किसी संघ राज्यक्षेत्र के सम्बन्ध में उस राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है ;]
(ग) “कारागार” के अन्तर्गत ऐसा स्थान भी है, जिसे राज्य सरकार ने, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, उप-कारागार घोषित किया हो ।
3. बन्दियों का एक राज्य से हटाकर दूसरे राज्य को भेजा जाना-(1) जहां कोई बन्दी,-
(क) मृत्यु दण्डादेश के अधीन, अथवा
(ख) कारावास या निर्वासन के दण्डादेश के अधीन, या उसके बदले में, अथवा
(ग) जुर्माने के संदाय के व्यतिक्रम में, अथवा
(घ) परिशान्ति कायम रखने या सदाचार बनाए रखने के लिए प्रतिभूति देने के व्यतिक्रम में,
किसी राज्य के किसी कारागार में परिरुद्ध है वहां, उस राज्य की सरकार, किसी अन्य राज्य की सरकार की सहमति से, आदेश द्वारा, यह उपबन्ध कर सकती है कि उस बन्दी को उस कारागार से हटाकर उक्त अन्य राज्य के किसी कारागार में भेज दिया जाए ।
(2) उस कारागार का भारसाधक अधिकारी, जहां किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के अधीन हटाकर भेजा जाता है, उसे ले लेगा और उस न्यायालय की, जिसके द्वारा वह व्यक्ति सुपुर्द किया गया है, किसी रिट, वारंट या आदेश की अभ्यावश्यकताओं के अनुसार जब तक हो, या जब तक वह व्यक्ति विधि के सामान्य अनुक्रम में उन्मोचित नहीं कर दिया जाता या हटा नहीं दिया जाता, निरुद्ध रखेगा ।
4. [1900 के अधिनियम सं० 3 की धारा 29 का संशोधन ।]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1957 (1957 का 36) की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।
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