बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को एक महिला को 22 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है। नवंबर 2013 में पुणे के यरवदा मानसिक अस्पताल में महिला के 52 वर्षीय पति की एक हिंसक मरीज ने हत्या कर दी थी।
जस्टिस मनीष पिटाले और जस्टिस श्रीराम शिरसाट की खंडपीठ ने इस घटना को बेहद भयावह और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही। कोर्ट ने अस्पताल अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लिया।
केवल 3 अटेंडेंट थे 72 मरीजों पर
अदालत ने पाया कि घटना वाली रात ऑब्जर्वेशन रूम में 72 मरीजों की देखभाल के लिए सिर्फ 3 अटेंडेंट तैनात थे, जो बेहद अपर्याप्त था। कोर्ट ने कहा कि हिंसक प्रवृत्ति वाले मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिसके कारण यह घटना हुई।
मृतक रियल एस्टेट एजेंट थे
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि मृतक एक रियल एस्टेट एजेंट थे, जो सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) से पीड़ित थे। उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने पर नवंबर 2013 में उन्हें यरवदा मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कस्टडी के दौरान उन पर हमला कर उनकी हत्या कर दी गई।
सरकार को चुकाना होगा मुआवजा
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मुआवजे के रूप में 22 लाख देने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल प्रबंधन को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
परिवार को न्याय मिला
महिला के वकील ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला न सिर्फ इस परिवार को न्याय दिलाता है बल्कि सरकारी मानसिक अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी एक मिसाल कायम करता है।
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