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असम राइफल्स अधिनियम, 2006 ( Assam Rifles Act, 2006 )


 

असम राइफल्स अधिनियम, 2006

(2006 का अधिनियम संख्यांक 47)

[3 नवंबर, 2006]

भारत की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में विद्रोह से निपटने

का अभियान चलाने और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिविल

प्राधिकारियों की सहायता में कार्य करने के लिए संघ के

सशस्त्र बल असम राइफल्स का शासन करने से

संबंधित विधि का समेकन और संशोधन

करने तथा उससे संबंधित

विषयों के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के सतावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम असम राइफल्स अधिनियम, 2006 है ।

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) सक्रिय ड्यूटी" से, इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति के संबंध में, बल की किसी ऐसी यूनिट से संलग्न या इसके भागरूप किसी सदस्य के रूप में उसकी उस अवधि के दौरान ड्यूटी अभिप्रेत है, जब वह-

(i) किसी शत्रु या किसी विद्रोही या किसी आतंकवादी या संघ के विरुद्ध सशस्त्र किसी व्यक्ति के विरुद्ध संक्रियाओं में लगा हुआ है, या

(ii) भारत की सीमाओं पर पिकेट की संक्रियाएं या गश्ती कर्तव्य कर रहा है या अन्य रक्षा कर्तव्य कर रहा है,

और इसके अंतर्गत ऐसे व्यक्ति द्वारा किसी ऐसी अवधि के दौरान की गई ड्यूटी भी है, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसे क्षेत्र के प्रतिनिर्देश से, जिसमें या इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के प्रयोजनों के लिए कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग, जो इस अधिनियम के अधीन है, सेवा कर रहा है, सक्रिय ड्यूटी की अवधि घोषित की गई है;

(ख) असम राइफल्स न्यायालय" से धारा 86 में निर्दिष्ट न्यायालय अभिप्रेत है;

(ग) बटालियन" से बल की वह यूनिट अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बटालियन के रूप में गठित की गई है;

(घ) मुख्य विधि आफिसर" और विधि आफिसर" से, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त क्रमशः बल का मुख्य विधि आफिसर और कोई विधि आफिसर अभिप्रेत है;

(ङ) सिविल अपराध" से ऐसा अपराध अभिप्रेत है, जो किसी दंड न्यायालय द्वारा विचारणीय है;

(च) सिविल कारागार" से ऐसी जेल या स्थान अभिप्रेत है जो किसी आपराधिक कैदी के निरोध के लिए कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का 9) या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन प्रयुक्त किया जाता है;

(छ) कमांडेंट" से, जहां इसका प्रयोग इस अधिनियम के किसी उपबंध में बल की किसी यूनिट के प्रति निर्देश से किया गया है, ऐसा आफिसर अभिप्रेत है जिसका कर्तव्य, नियमों या विनियमों या ऐसे नियम या विनियम के अभाव में, सेवा रूढ़ि के अधीन उस यूनिट की बाबत उस उपबंध में निर्दिष्ट प्रकार के विषयों के संबंध में, कमांडेंट के कृत्यों का निर्वहन करना है;

(ज) दंड न्यायालय" से भारत के किसी भाग में का मामूली दंड न्यायालय अभिप्रेत है;

(झ) प्रतिनियुक्ति" से वह अवधि अभिप्रेत है, जिसके लिए केन्द्रीय सरकार के किसी विभाग के किसी व्यक्ति की सेवाएं महानिदेशक की सेवा में अर्पित की जाती हैं;

(ञ) महानिदेशक" और अपर महानिदेशक" से क्रमशः धारा 5 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन नियुक्त बल के महानिदेशक और अपर महानिदेशक अभिप्रेत हैं;

(ट) शत्रु" के अंतर्गत ऐसे सब सशस्त्र सैन्य विद्रोही, सायुध बागी, सायुध बल्वाकारी, जलदस्यु, आतंकवादी और ऐसा कोई सशस्त्र व्यक्ति भी है जिसके विरुद्ध कार्रवाई करना किसी ऐसे व्यक्ति का कर्तव्य है जो इस अधिनियम के अध्यधीन है;

(ठ) अभ्यावेशित व्यक्ति" से इस अधिनियम के अधीन अभ्यावेशित कोई अवर आफिसर या अन्य व्यक्ति अभिप्रेत है;

(ड) बल" से असम राइफल्स अभिप्रेत है;

(ढ) बल की अभिरक्षा" से नियमों के अनुसार बल के सदस्य की गिरफ्तारी या परिरोध अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46) के अधीन ऐसे सदस्य की कोई सैनिक अभिरक्षा भी है;

(ण) महानिरीक्षक" और उपमहानिरीक्षक" से धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन नियुक्त बल का क्रमशः महानिरीक्षक और उपमहानिरीक्षक अभिप्रेत है;

(त) बल का सदस्य" से कोई आफिसर, अधीनस्थ आफिसर, अवर आफिसर या अन्य अभ्यावेशित व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त व्यक्ति भी हैं;

(थ) अधिसूचना" से शासकीय राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(द) अपराध" से इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई कार्य या लोप अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत सिविल अपराध भी है;

(ध) आफिसर" से बल के आफिसर के रूप में नियुक्त या वेतन पाने वाला कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, किन्तु इसके अन्तर्गत कोई अधीनस्थ आफिसर या अवर आफिसर नहीं है;

(न) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(प) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं;

(फ) नियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाया गया नियम अभिप्रेत है;

(ब) अधीनस्थ आफिसर" से बल के सूबेदार-मेजर, सूबेदार या नायब सूबेदार के रूप में नियुक्त या वेतन पाने वाला व्यक्ति अभिप्रेत है;

(भ) वरिष्ठ आफिसर" से, जहां इसका प्रयोग ऐसे किसी व्यक्ति के संबंध में किया गया है, जो इस अधिनियम के अधीन है, निम्नलिखित अभिप्रेत है, -

(i) बल का कोई सदस्य या प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त कोई व्यक्ति जिसकी कमान के वह व्यक्ति नियमों के अनुसरण में तत्समय अधीन है;

(ii) उस व्यक्ति से उच्चतर रैंक या वर्ग का अथवा एक ही वर्ग में उच्चतर ग्रेड का कोई आफिसर, और इसके अंतर्गत जब ऐसा व्यक्ति आफिसर नहीं है तब उच्चतर रैंक, वर्ग या ग्रेड का अधीनस्थ आफिसर या अवर आफिसर है;

(म) आतंकवादी" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो विधि द्वारा स्थापित सरकार को आतंकित करने या जनता या जनता के किसी वर्ग में आतंक फैलाने या जनता के किसी वर्ग को पृथक् करने या जनता के विभिन्न वर्गों के बीच सौहार्द्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के आशय से, बमों, डायनामाइट या अन्य विस्फोटक पदार्थों या ज्वलनशील पदार्थों या अग्न्यायुधों या अन्य प्राणहर आयुधों या विषों का या अपायकर गैसों या अन्य रसायनों या परिसंकटमय प्रकृति के किन्हीं अन्य पदार्थों का (चाहे वे जैव हों या अन्यथा), ऐसी रीति से उपयोग करके, जिससे किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों की मृत्यु या उन्हें क्षति या संपत्ति को नुकसान या उसका विनाश अथवा समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक किन्हीं प्रदायों या सेवाओं में विघ्न कारित होता है या कारित होने की संभावना है, कोई कार्य या बात करता है;

(य) अवर आफिसर" से बल का वारंट आफिसर, हवलदार, नायक और लांस नायक अभिप्रेत है;

(यक) यूनिट" से बल का कोई-

(i) बटालियन; या

(ii) रेजीमेंट; या

 (iii) प्रशिक्षण संस्था; या

(iv) उपमहानिरीक्षक का मुख्यालय; या

(v) महानिरीक्षक का मुख्यालय; या

(vi) महानिदेशक का मुख्यालय,

अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत केन्द्रीय सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट बल की कोई अन्य विरचना आती है ।

(2) उन सभी शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं, किन्तु भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उस संहिता में हैं ।

(3) इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त नहीं है, निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे उस राज्य में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के प्रति निर्देश हैं ।

3. इस अधिनियम के अधीन व्यक्ति-(1) निम्नलिखित व्यक्ति (चाहे प्रतिनियुक्ति पर या अन्यथा नियोजित हों) चाहे वे कहीं भी हों, इस अधिनियम के अधीन होंगे, अर्थात्: -

(क) आफिसर तथा अधीनस्थ आफिसर; और

(ख) अवर आफिसर और इस अधिनियम के अधीन अभ्यावेशित अन्य व्यक्ति ।

(2) इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान बल के सदस्यों को, इस अधिनियम के अधीन उस रूप में, यथास्थिति, नियुक्त किया गया या अभ्यावेशित किया गया समझा जाएगा ।

(3) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति, जो सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46) की धारा 3 के खंड (न्न्त्) में यथा परिभाषित नियमित सेना से प्रतिनियुक्ति पर बल में नियोजित किया गया है, इस अधिनियम के अधीन नहीं होगा और ऐसी प्रतिनियुक्ति की अवधि के दौरान सेना अधिनियम, 1950 के अधीन समझा जाएगा:

परन्तु ऐसा व्यक्ति, अपने कर्तव्यों और अनुशासन के संबंध में बल के उस सदस्य की कमान के अधीन समझा जाएगा, जिसकी कमान के अधीन तत्समय ऐसा व्यक्ति रखा गया है:

परन्तु यह और कि ऐसे व्यक्ति की दशा में, उसकी ड्यूटी और अनुशासन के प्रयोजनों के लिए धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (क) में परिभाषित सक्रिय ड्यूटी" पद को उक्त सेना अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए, सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46) की धारा 3 के खंड (झ) में यथापरिभाषित सक्रिय सेवा" समझा जाएगा ।

(4) ऐसा व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन नहीं है बल के सदस्यों के साथ किसी सेवा में तैनात किया जाता है या बल के सदस्यों के साथ या उन्हें किसी रीति से कोई सेवा प्रदान करने के लिए किसी ऐसे, -

(i) कैम्प;

(ii) प्रगमन पथ;

(iii) सीमांत चौकी;

(iv) सक्रिय ड्यूटी; या

(v) विद्रोह से निपटने के अभियान,

में लगाया जाता है, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, तब तक बल का सदस्य समझा जाएगा जब तक कि वह ऐसे तत्स्थानी रैंक में तैनात है या लगाया जाता है, जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा, अवधारित किया जाए ।

(5) प्रत्येक व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन है, तब तक इस प्रकार अधीन बना रहेगा जब तक कि वह इस अधिनियम और नियमों के उपबंधों के अनुसार बल से सेवानिवृत्त, उन्मोचित, निर्मुक्त, पदच्युत नहीं कर दिया जाता है या हटा नहीं दिया जाता है ।

अध्याय 2

बल का गठन और बल के सदस्यों की सेवा की शर्तें

4. बल का गठन-(1) भारत की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने, विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में विद्रोह से निपटने का अभियान चलाने और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिविल प्राधिकारियों की सहायता में कार्य करने तथा उनसे संबंधित विषयों के लिए भारत संघ का असम राइफल्स नामक एक सशस्त्र बल होगा ।

(2) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, बल का पुनर्गठन ऐसी रीति से किया जाएगा, जो विहित की जाए और बल के सदस्यों की सेवा की शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं ।

5. नियंत्रण, निदेशन, आदि-(1) बल का साधारण अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण केन्द्रीय सरकार में निहित होगा और वही उसका प्रयोग करेगी और उसके तथा इस अधिनियम, नियमों और विनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए बल की कमान और अधीक्षण ऐसे आफिसर में निहित होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार बल के महानिदेशक के रूप में नियुक्त करे ।

(2) इस अधिनियम के अधीन महानिदेशक के कर्तव्यों के निर्वहन में उसकी सहायता करने के लिए उतने अपर महानिदेशक, महानिरीक्षक, उपमहानिरीक्षक, कमांडेंट और अन्य आफिसर होंगे, जितने केन्द्रीय सरकार नियुक्त करे ।

6. अभ्यावेशन-(1) बल में अभ्यावेशित किए जाने वाले व्यक्ति, अभ्यावेशन का ढंग और अभ्यावेशन की प्रक्रिया वह होगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए ।

(2) इस अधिनियम, नियमों और विनियमों में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को सम्यक् रूप से अभ्यावेशित किया गया समझा जाएगा, जिसने लगातार तीन मास तक इस अधिनियम के अधीन अभ्यावेशित व्यक्ति के रूप में वेतन प्राप्त किया है और जिसका नाम बल की नामावली में रहा है ।

(3) कोई व्यक्ति जो भारत का नागरिक नहीं है, केन्द्रीय सरकार की लिखित रूप में संज्ञापित सहमति के सिवाय, बल में अभ्यावेशित नहीं किया जाएगा ।

7. भारत के बाहर सेवा करने का दायित्व-बल का प्रत्येक सदस्य भारत के किसी भाग में तथा भारत के बाहर भी सेवा करने के दायित्व के अधीन होगा ।

8. पद-त्याग और पद से अलग होना-विहित प्राधिकारी की लिखित पूर्व अनुज्ञा के बिना, बल के किसी सदस्य को, -

(क) अपने नियोजन की अवधि के दौरान, अपना पद त्याग देने की; या

(ख) अपने पद के सभी या उनमें से किन्हीं कर्तव्यों से अलग होने की, स्वतंत्रता नहीं होगी ।

9. अधिनियम के अधीन सेवा की अवधि-इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।

10. केन्द्रीय सरकार द्वारा सेवा का पर्यवसान-इस अधिनियम तथा नियमों और विनियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति को सेवा से पदच्युत कर सकेगी या हटा सकेगी ।

11. महानिदेशक और अन्य आफिसरों द्वारा पदच्युत किया जाना, हटाया जाना या अवनत किया जाना-(1) महानिदेशक, अपर महानिदेशक या कोई महानिरीक्षक इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसे व्यक्ति को, जो आफिसर नहीं है, सेवा से पदच्युत कर सकेगा या हटा सकेगा या निम्नतर ग्रेड या रैंक में अवनत कर सकेगा ।

(2) कोई आफिसर, जो उपमहानिरीक्षक के रैंक से नीचे का नहीं है, अपनी कमान के अधीन किसी ऐसे व्यक्ति को, जो ऐसे रैंक या रैंकों का आफिसर या अधीनस्थ आफिसर नहीं है, जैसा विहित किया जाए, सेवा से पदच्युत कर सकेगा या हटा सकेगा ।

(3) उपधारा (2) में वर्णित कोई आफिसर, अपनी कमान के अधीन किसी व्यक्ति को, जो आफिसर या अधीनस्थ आफिसर नहीं है, निम्नतर ग्रेड या रैंक या रैंकों में अवनत कर सकेगा ।

(4) इस धारा के अधीन किसी शक्ति का प्रयोग इस अधिनियम तथा नियमों और विनियमों के अधीन रहते हुए किया जाएगा ।

12. सेवा की समाप्ति का प्रमाणपत्र-अधीनस्थ आफिसर या अवर आफिसर या अन्य अभ्यावेशित व्यक्ति को, जो सेवा से निवृत्त, उन्मोचित, निर्मुक्त कर दिया गया है या हटा दिया गया है या पदच्युत कर दिया गया है, उस आफिसर द्वारा जिसकी कमान के अधीन वह है, ऐसी भाषा में जो उस व्यक्ति की मातृभाषा है और हिन्दी और अंग्रेजी में भी एक प्रमाणपत्र दिया जाएगा जिसमें निम्नलिखित उपवर्णित होगा, अर्थात्ः-

(क) उसकी सेवा को समाप्त करने वाला प्राधिकारी;

(ख) सेवा की ऐसी समाप्ति के कारण; और

(ग) बल में उसकी सेवा की पूर्ण अवधि ।

13. संगम बनाने, वाक्-स्वातंत्र्य, आदि के अधिकार के संबंध में निर्बंधन-(1) कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन है, केन्द्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी की लिखित रूप में पू्र्व मंजूरी के बिना, -

(क) किसी व्यापार संघ, श्रम संघ, राजनीतिक संगम या व्यापार संघों, श्रम संघों, राजनीतिक संगमों के किसी वर्ग का न तो सदस्य होगा और न उससे किसी प्रकार सहयोजित होगा; या

(ख) किसी सोसाइटी, संस्था, संगम या संगठन का, जिसे बल के भाग के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है या जो केवल सामाजिक, आमोद-प्रमोद या धार्मिक स्वरूप का नहीं है, न तो सदस्य होगा और न उससे किसी प्रकार से सहयोजित होगा; या

(ग) प्रेस से संपर्क नहीं करेगा या कोई पुस्तक, पत्र या अन्य दस्तावेज प्रकाशित नहीं करेगा या कराएगा, सिवाय तब के जब ऐसा संपर्क या प्रकाशन उसके कर्तव्यों के सद्भावपूर्वक निर्वहन के लिए है या बिल्कुल साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक प्रकृति का है या विहित प्रकृति का है ।

स्पष्टीकरण-यदि इस बारे में कोई प्रश्न उठता है कि क्या इस उपधारा के खंड (ख) के अधीन कोई सोसाइटी, संस्था, संगम या संगठन केवल सामाजिक, आमोद-प्रमोद या धार्मिक स्वरूप का है या नहीं तो उस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

(2) कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन है, ऐसे किसी अधिवेशन में न तो भाग लेगा और न उसे संबोधित ही करेगा और न ऐसे किसी प्रदर्शन में भाग लेगा, जो किन्हीं राजनीतिक प्रयोजनों से या ऐसे अन्य प्रयोजनों से, जो विहित किए जाएं, व्यक्तियों के किसी निकाय द्वारा संगठित किया गया है ।

अध्याय 3

सेवा के विशेषाधिकार

14. वेतन में से केवल प्राधिकृत कटौतियां की जाएंगी-इस अधिनियम के अध्यधीन हर व्यक्ति का वेतन जो तत्समय प्रवृत्त किन्हीं नियमों या आदेशों के अधीन उसे उस रूप में शोध्य है, इस या किसी अन्य अधिनियम के द्वारा या अधीन प्राधिकृत कटौतियों से भिन्न कोई कटौती किए बिना दिया जाएगा ।

15. आफिसरों से भिन्न व्यथित व्यक्तियों को प्राप्त उपचार-(1) आफिसर से भिन्न इस अधिनियम के अध्यधीन कोई भी व्यक्ति, जो यह समझता है कि किसी आफिसर या अधीनस्थ आफिसर द्वारा उसके साथ अन्याय किया गया है, उस आफिसर को, जिसके समादेश या आदेश के अधीन वह सेवा कर रहा है, परिवाद कर सकेगा ।

(2) जब वह आफिसर, जिसके विरुद्ध परिवाद किया गया है, ऐसा आफिसर है जिससे कोई परिवाद उपधारा (1) के अधीन किया जाना चाहिए, तब व्यथित व्यक्ति उस आफिसर के अगले वरिष्ठ आफिसर से परिवाद कर सकेगा ।

(3) हर आफिसर, जिसे ऐसा कोई परिवाद प्राप्त हो । परिवादी को, पूरा प्रतितोष देने के लिए यावत्संभव पूर्ण अन्वेषण करेगा या जब आवश्यक हो परिवाद वरिष्ठ प्राधिकारी को निर्देशित कर देगा ।

(4) ऐसा हर परिवाद ऐसी रीति से किया जाएगा जो महानिदेशक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट की जाए ।

(5) महानिदेशक द्वारा उपधारा (2) के अधीन किए गए किसी विनिश्चय को केन्द्रीय सरकार पुनरीक्षित कर सकेगी, किन्तु, उसके अध्यधीन रहते हुए, महानिदेशक का विनिश्चय अंतिम होगा ।

16. व्यथित आफिसरों को प्राप्त उपचार-कोई आफिसर जो यह समझता है कि उसके कमांडेंट या किसी वरिष्ठ आफिसर द्वारा उसके साथ अन्याय किया गया है और जिसको अपने कमांडेंट या ऐसे वरिष्ठ आफिसर से सम्यक् आवेदन करने पर ऐसा प्रतितोष प्राप्त नहीं होता जिसका वह स्वयं को हकदार समझता है, वह केन्द्रीय सरकार से ऐसी रीति से परिवाद कर सकेगा जो महानिदेशक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट की जाए ।

17. कुर्की से उन्मुक्ति-ऐसे किसी भी व्यक्ति के, जो इस अधिनियम के अध्यधीन है, न तो आयुधों, कपड़ों, उपस्कर, साज-सामान या आवश्यक वस्तुओं का और न उसके कर्तव्य के निर्वहन में उसके द्वारा प्रयुक्त किसी जीवजन्तु का अभिग्रहण और न ऐसे किसी व्यक्ति के वेतन और भत्तों की या उसके किसी भाग की कुर्की, किसी सिविल या राजस्व न्यायालय या किसी राजस्व आफिसर के ऐसे निदेश द्वारा किसी ऐसी डिक्री या आदेश की तुष्टि में की जाएगी जो उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय हो ।

18. ऋण के लिए गिरफ्तारी से उन्मुक्ति-(1) इस अधिनियम के अध्यधीन का कोई व्यक्ति, ऋण के लिए तब तक, जब तक वह बल का अंग रहता है, केन्द्रीय सरकार की पूर्व सहमति के सिवाय, किसी सिविल या राजस्व न्यायालय या राजस्व आफिसर के द्वारा या प्राधिकार से निकाली गई किसी आदेशिका के अधीन गिरफ्तार किए जाने के दायित्व के अधीन नहीं होगा ।

(2) ऐसे किसी न्यायालय का न्यायाधीश या उक्त आफिसर ऐसे व्यक्ति की इस धारा के उपबन्धों के प्रतिकूल गिरफ्तारी के किसी ऐसे परिवाद की, जो उस व्यक्ति या उसके वरिष्ठ आफिसर द्वारा किया जाए, छानबीन कर सकेगा और उस व्यक्ति को स्वहस्ताक्षरित अधिपत्र द्वारा उन्मोचित कर सकेगा और परिवादी को युक्तियुक्त खर्च अधिनिर्णीत कर सकेगा और परिवादी उस खर्च को उसी रीति से वसूल कर सकेगा जिससे वह आदेशिका अभिप्राप्त करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध, डिक्री द्वारा उस अधिनिर्णीत खर्च को वसूल करता ।

(3) ऐसे खर्च की वसूली के लिए परिवादी द्वारा कोई भी न्यायालय फीस देय न होगी ।

19. असम राइफल्स न्यायालय में हाजिर होने वाले व्यक्तियों की गिरफ्तारी से उन्मुक्ति-(1) किसी भी असम राइफल्स न्यायालय का पीठासीन आफिसर या सदस्य, कोई भी विधि आफिसर, असम राइफल्स न्यायालय के समक्ष की किसी कार्यवाही का कोई भी पक्षकार या उसका कोई भी विधि व्यवसायी या अभिकर्ता, और किसी असम राइफल्स न्यायालय में हाजिर होने के समन के आज्ञानुवर्तन में कार्य करने वाला कोई भी साक्षी, असम राइफल्स न्यायालय को जाने, उसमें हाजिर रहने या वहां से लौटने के दौरान सिविल या राजस्व आदेशिका के अधीन गिरफ्तार किए जाने के दायित्व के अधीन न होगा ।

(2) यदि ऐसा कोई व्यक्ति, ऐसी किसी आदेशिका के अधीन गिरफ्तार किया जाता है तो वह असम राइफल्स न्यायालय के आदेश से उन्मोचित किया जा सकेगा ।

20. अन्य विधियों के अधीन अधिकारों और विशेषाधिकारों की व्यावृत्ति-इस अध्याय की पूर्ववर्ती धाराओं में विनिर्दिष्ट अधिकार और विशेषाधिकार उन अन्य अधिकारों और विशेषाधिकारों के अतिरिक्त होंगे, जो इस अधिनियम के अधीन व्यक्तियों को साधारणतया तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा प्रदत्त हों, न कि उनके अल्पीकरण में ।

अध्याय 4

अपराध

21. शत्रु से संबंधित अपराध, जो मृत्यु से दंडनीय हैं-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई भी व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) किसी चौकी, स्थान या गारद को, जो उसके भारसाधन में सुपुर्द किया गया है या जिसकी रक्षा करना उसका कर्तव्य है लज्जास्पद रूप से परित्यक्त या समर्पित करेगा; या

(ख) इस अधिनियम या सेना, नौसेना, वायु सेना विधि के अध्यधीन किसी भी व्यक्ति को, या सशस्त्र बलों के किसी अन्य व्यक्ति को, शत्रु के विरुद्ध कार्य करने से प्रविरत रहने के लिए विवश या उत्प्रेरित करने के लिए या ऐसे व्यक्ति को शत्रु के विरुद्ध कार्य करने से निरुत्साहित करने के लिए किन्हीं साधनों का साशय उपयोग करेगा; या

(ग) शत्रु की उपस्थिति में अपने आयुधों, गोलाबारूद, औजारों या उपस्कर को लज्जास्पद रूप से संत्यक्त करेगा या ऐसी रीति से कदाचार करेगा, जिससे कायरता दर्शित हो; या

(घ) विश्वासघातपूर्वक शत्रु से या किसी ऐसे व्यक्ति से, जो संघ के विरुद्ध उद्यतायुद्ध है, वर्गाचार करेगा या उसे आसूचना देगा; या

(ङ) धन, आयुध, गोलाबारूद, सामान या प्रदाय से या किसी भी अन्य रीति से शत्रु की प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः सहायता करेगा; या

(च) शत्रु के विरुद्ध सक्रिय कार्रवाई के समय संघर्ष स्थल में, कैंप में, क्वार्टरों में मिथ्या अलार्म साशय कारित करेगा या ऐसी रिपोर्ट, जो अलार्म या नैराश्य पैदा करने के लिए प्रकल्पित हो, फैलाएगा या फैलवाएगा; या

(छ) संघर्ष के समय नियमित रूप से अवमुक्त हुए बिना या बिना छुट्टी अपने कमांडेंट या अन्य वरिष्ठ आफिसर को या अपनी चौकी, गारद, पिकेट, पैट्रोल या दल को छोड़ेगा; या

(ज) शत्रु द्वारा पकड़े जाने पर या युद्ध कैदी बनाए जाने पर स्वेच्छा से शत्रु पक्ष में सेवा करेगा या शत्रु की सहायता करेगा; या

(झ) ऐसे शत्रु को, जो कैदी नहीं है, जानते हुए संश्रय देगा या उसका संरक्षण करेगा; या

(ञ) शत्रु के विरुद्ध सक्रिय कार्रवाई के समय या अलार्म के समय संतरी होते हुए अपनी चौकी पर सो जाएगा या नशे में होगा; या

(ट) जानते हुए कोई ऐसा कार्य करेगा जो बल की या भारत के सैनिक, नौसैनिक या वायु सेना बलों की या उनसे सहयोग करने वाले केन्द्रीय सरकार के किन्हीं अन्य सशस्त्र बलों की या ऐसे बलों के किसी भाग की सफलता को संकट में डालने के लिए प्रकल्पित हो, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर मृत्यु दंड या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

22. शत्रु से संबंधित अपराध, जो मृत्यु से दंडनीय नहीं है-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) सम्यक् पूर्वावधानी के अभाव में या आदेशों की अवज्ञा या कर्तव्य की जानबूझकर उपेक्षा के कारण शत्रु द्वारा कैदी बना लिया जाएगा या पकड़ लिया जाएगा या कैदी बना लिए जाने पर या इस प्रकार पकड़े जाने पर तब, जब वह अपनी सेवा पर वापस आ जाने में समर्थ है, ऐसा करने में असफल रहेगा; या

(ख) सम्यक् प्राधिकार के बिना शत्रु के साथ या ऐसे व्यक्ति के साथ, जो शत्रु से मिला हुआ है, वार्ताचार करेगा या उससे संपर्क रखेगा या ऐसे किसी वार्ताचार या संपर्क का ज्ञान प्राप्त होने पर उसे तुरंत अपने कमांडेंट या अन्य वरिष्ठ आफिसर को प्रकट करने का जानबूझकर लोप करेगा,

तो वह असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

23. अपराधों का अन्य समयों की अपेक्षा सक्रिय ड्यूटी के समय अधिक कठोरता से दंडनीय होना-इस अधिनियम के अध्यधीन का कोई भी व्यक्ति जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) किसी संरक्षण गारद का अतिक्रमण करेगा या किसी संतरी का अतिक्रमण करेगा या उस पर आपराधिक बल का प्रयोग करेगा; या

(ख) लूटपाट की तलाश में किसी गृह या अन्य स्थान में अनधिकृत प्रवेश करेगा; या

(ग) संतरी होते हुए, अपनी चौकी पर सो जाएगा या नशे में होगा; या

(घ) अपने वरिष्ठ आफिसर के आदेशों के बिना गारद, पिकेट, पैट्रोल या चौकी छोड़ेगा; या

(ङ) कैंप या क्वार्टरों में मिथ्या अलार्म साशय या उपेक्षा से कारित करेगा या ऐसी रिपोर्ट, जो अनावश्यक अलार्म या नैराश्य पैदा करने के लिए प्रकल्पित हों, फैलाएगा या फैलवाएगा; या

(च) पैरोल, संकेत-शब्द या प्रतिसंकेत किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उसे जानने का हकदार नहीं है, बताएगा; या

(छ) जो पैरोल, संकेत-शब्द या प्रतिसंकेत उसे बताया गया है उससे भिन्न पैरोल, संकेत-शब्द या प्रतिसंकेत जानते हुए देगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, -

(अ) उस दशा में जिसमें कि ऐसा कोई अपराध वह तब करेगा, जब वह सक्रिय ड्यूटी पर है, कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा, और

(आ) उस दशा में जिसमें कि ऐसा कोई अपराध वह तब करेगा जब वह सक्रिय ड्यूटी पर नहीं है कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

24. विद्रोह-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) बल में या भारत के सैनिक, नौसैनिक या वायुसेना बलों में या उनसे सहयोग करने वाले किन्हीं बलों में विद्रोह आरंभ करेगा, उद्दीप्त करेगा, कारित करेगा या कारित करने के लिए किन्हीं अन्य व्यक्तियों के साथ षड्यंत्र करेगा; या

(ख) ऐसे किसी विद्रोह में सम्मिलित होगा; या

(ग) ऐसे किसी विद्रोह में उपस्थित होते हुए, उसे दबाने के लिए अपने अधिकतम प्रयास नहीं करेगा; या

(घ) यह जानते हुए या इस बात के विश्वास का कारण रखते हुए कि ऐसा कोई विद्रोह या ऐसा विद्रोह करने का आशय या ऐसा कोई षड्यंत्र अस्तित्व में है, उसकी इत्तिला अपने कमांडेंट या अन्य वरिष्ठ आफिसर को अविलंब नहीं देगा; या

(ङ) बल के या भारत के सैनिक, नौसैनिक या वायुसेना बलों के या उनसे सहयोग करने वाले किन्हीं बलों के किसी व्यक्ति को उसके कर्तव्य से या संघ के प्रति उसकी राजनिष्ठा से विचलित करने का प्रयास करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर मृत्यु दंड का या ऐसे लघुतर दंड का, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भागी होगा ।

25. अभित्यजन और अभित्यजन में सहायता करना-(1) इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो सेवा का अभित्यजन करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर-

(क) उस दशा में जिसमें कि ऐसा अपराध वह सक्रिय ड्यूटी पर करेगा या तब करेगा, जब वह सक्रिय ड्यूटी पर जाने के आदेश के अधीन है, मृत्यु या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा; और

(ख) उस दशा में जिसमें कि ऐसा अपराध वह किन्हीं अन्य परिस्थिति में करेगा, कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

(2) इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो ऐसे जानते हुए किसी अभित्यजक को संश्रय देगा, वह असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

(3) इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो किसी व्यक्ति के किसी अभित्यजन या अभित्यजन के प्रयत्न का संज्ञान रखते हुए तत्काल अपने स्वयं के या किसी अन्य वरिष्ठ आफिसर को सूचना नहीं देगा या ऐसे व्यक्ति को पकड़वाने के लिए अपनी शक्ति में कोई कार्रवाई नहीं करेगा, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

26. छुट्टी बिना अनुपस्थिति-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) छुट्टी के बिना अपने को अनुपस्थित रखेगा; या

(ख) अपने को अनुदत्त छुट्टी के उपरांत पर्याप्त हेतुक के बिना अनुपस्थित रहेगा; या

(ग) अनुपस्थिति-छुट्टी पर होते हुए और समुचित प्राधिकारी से यह इतिला मिलने पर कि किसी बटालियन या बटालियन के भाग को या बल की किसी अन्य यूनिट को जिसका वह अंग है, सक्रिय ड्यूटी पर जाने के लिए आदिष्ट हो गई है, काम पर अविलंब वापस आने में पर्याप्त हेतुक के बिना असफल रहेगा; या

(घ) परेड में या अभ्यास या ड्यूटी के लिए नियुक्त स्थान पर नियत समय पर उपसंजात होने में पर्याप्त हेतुक के बिना असफल रहेगा; या

(ङ) उस दौरान जब वह परेड में या प्रगमन पथ पर है, पर्याप्त हेतुक के बिना या अपने वरिष्ठ आफिसर से इजाजत लिए बिना परेड या प्रगमन पथ छोड़ेगा; या

(च) जब वह कैंप में या अन्यत्र है, तब किसी साधारण, स्थानीय या अन्य आदेश द्वारा नियत किन्हीं परिसीमाओं के परे या किसी प्रतिषिद्ध स्थान में, पास या अपने वरिष्ठ आफिसर की लिखित इजाजत के बिना पाया जाएगा; या

(छ) जब कि उसे किसी स्कूल में हाजिर होने के लिए सम्यक् रूप से आदेश दिया गया है, तब अपने वरिष्ठ आफिसर की इजाजत के बिना या सम्यक् हेतुक के बिना अपने को उससे अनुपस्थित रखेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

27. वरिष्ठ आफिसरों पर आघात करना या उन्हें धमकी देना-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) अपने वरिष्ठ आफिसर पर आपराधिक बल का प्रयोग करेगा या हमला करेगा, या

(ख) ऐसे आफिसर के प्रति धमकी भरी भाषा का प्रयोग करेगा, या

(ग) ऐसे आफिसर के प्रति अनधीनता द्योतक भाषा का प्रयोग करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर-

(अ) उस दशा में जिसमें ऐसा आफिसर उस समय अपना पद निष्पादन कर रहा है या उस दशा में जिसमें कि अपराध सक्रिय ड्यूटी पर किया जाता है, कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा; और

(आ) अन्य दशाओं में कारावास, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा:

परंतु खंड (ग) में विनिर्दिष्ट अपराध की दशा में कारावास पांच वर्ष से अधिक का नहीं होगा ।

28. वरिष्ठ आफिसर के प्रति अवज्ञा-(1) इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो अपने वरिष्ठ आफिसर द्वारा अपने पद-निष्पादन में स्वयं दिए गए किसी विधिपूर्ण समादेश की, चाहे मौखिक रूप से या लिखकर या संकेत द्वारा या अन्यथा दिया गया हो, ऐसी रीति से अवज्ञा करेगा, जिससे प्राधिकारी को जानबूझकर किया गया तिरस्कार दर्शित हो, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

(2) इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो अपने वरिष्ठ आफिसर द्वारा दिए गए किसी विधिपूर्ण समादेश की अवज्ञा करेगा, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर-

(क) उस दशा में जिसमें ऐसा अपराध वह तब करेगा, जब वह सक्रिय ड्यूटी पर है, कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा;

(ख) उस दशा में जिसमें ऐसा अपराध वह तब करता है, जब वह सक्रिय ड्यूटी पर नहीं है, कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

 29. अनधीनता और बाधा-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) किसी झगड़े, दंगे या उपद्रव में संपृक्त होते हुए, किसी ऐसे आफिसर की, भले ही वह निम्नतर रैंक का हो, जो उसकी गिरफ्तारी का आदेश देता है, आज्ञा पालन से इन्कार करेगा या ऐसे आफिसर पर आपराधिक बल का प्रयोग करेगा या हमला करेगा; या

(ख) किसी ऐसे व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करेगा या हमला करेगा, जिसकी अभिरक्षा में उसे विधिपूर्वक रखा गया है, चाहे वह व्यक्ति इस अधिनियम के अध्यधीन हो या न हो और चाहे उसका वरिष्ठ आफिसर हो या न हो; या

(ग) ऐसे अनुरक्षक का प्रतिरोध करेगा, जिसका कर्तव्य उसे पकड़ना या अपने भारसाधन में लेना है; या

(घ) बैरकों, कैंप या क्वार्टरों से अनधिकृत रूप से निकलेगा; या

(ङ) किसी साधारण, स्थानीय या अन्य आदेश के पालन की उपेक्षा करेगा; या

(च) धारा 85 में निर्दिष्ट बल की पुलिस के या उसकी ओर से विधिपूर्वक कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के समक्ष अड़चन डालेगा या बल की पुलिस या उसकी ओर से विधिपूर्वक कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के कर्तव्य-निष्पादन में उसकी सहायता की अपेक्षा किए जाने पर उससे इंकार करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि उन अपराधों की दशा में, जो खंड (घ) और (ङ) में विनिर्दिष्ट हैं, दो वर्ष तक की, और उन अपराधों की दशा में, जो अन्य खंडों में विनिर्दिष्ट हैं, दस वर्ष तक की हो सकेगी या इन दोनों दशाओं में से किसी दशा में ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

30. कपटपूर्ण अभ्यावेशन-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो जानबूझकर ऐसे किसी अन्य व्यक्ति को अभ्यावेशित करने का प्रयास करेगा या अभ्यावेशित करेगा, जो उसे अभ्यावेशित होने में समर्थ बनाने के लिए शर्तों को पूरा नहीं करता है, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

31. अभ्यावेशन किए जाने के समय मिथ्या उत्तर-कोई भी व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अध्यधीन हो गया है और जिसके बारे में, यह पता चलता है कि अभ्यावेशन के समय उसने अभ्यावेशन के लिए विहित प्ररूप में उपवर्णित किसी ऐसे प्रश्न का, जो उससे उस अभ्यावेशन आफिसर द्वारा किया गया था जिसके समक्ष वह अभ्यावेशन के प्रयोजन के लिए उपसंजात हुआ था, जानबूझकर मिथ्या उत्तर दिया था, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दण्ड जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

32. अशोभनीय आचरण-कोई भी आफिसर, अधीनस्थ आफिसर या अवर आफिसर, जो ऐसी रीति से व्यवहार करेगा, जो उसके पद और उससे प्रत्याशित शील की दृष्टि से अशोभनीय है, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, पदच्युत किए जाने के दायित्व के या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

33. कलंकास्पद आचरण के कतिपय प्रकार-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) क्रूर, अशिष्ट या अप्राकृतिक प्रकार के किसी कलंकास्पद आचरण का दोषी होगा; या

(ख) मिथ्या रोगी बन जाएगा या अपने में रोग या अंगशैथिल्य का ढोंग करेगा या अपने में उसे उत्पन्न करेगा या निरोग होने में साशय विलंब करेगा या अपने रोग या अंगशैथिल्य को गुरुतर बनाएगा; या

(ग) अपने आप को या किसी अन्य व्यक्ति को सेवा के अयोग्य बनाने के आशय से अपने आपको या उस व्यक्ति को स्वेच्छा उपहति कारित करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

34. अधीनस्थ के साथ बुरा बर्ताव करना-कोई आफिसर, अधीनस्थ आफिसर या अवर आफिसर, किसी ऐसे व्यक्ति पर, जो रैंक या पद में उसके नीचे का है और जो इस अधिनियम के अधीन है, आपराधिक बल का प्रयोग करेगा या उसके साथ अन्यथा बुरा बर्ताव करेगा, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

35. मत्तता-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो मत्तता की हालत में पाया जाता है, चाहे वह ड्यूटी पर हो या न हो, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दण्ड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भागने के दायित्व के अधीन होगा ।

36. अभिरक्षा में से किसी व्यक्ति को निकल भागने देना-इस अधिनियम के अध्यधीन, कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) उस दौरान, जब वह किसी गारद, पिकेट, पैट्रोल या चौकी का समादेशक है, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उसके भारसाधन में सुपुर्द किया गया है, उचित प्राधिकार के बिना, चाहे जानबूझकर, चाहे युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना निर्मुक्त करेगा या किसी कैदी या ऐसे सुपुर्द किए गए व्यक्ति को लेने से इंकार करेगा; या

(ख) ऐसे व्यक्ति को, जो उसके भारसाधन में सुपुर्द किया गया है या जिसे रखना या जिस पर पहरा रखना, उसका कर्तव्य है, जानबूझकर या युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना निकल भागने देगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर उस दशा में जिसमें उसने जानबूझकर कार्य किया है, कारावास, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा और उस दशा में जिसमें उसने जानबूझकर कार्य नहीं किया है, कारावास, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

37. गिरफ्तारी या परिरोध के संबंध में अनियमितता-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) किसी गिरफ्तार या परिरुद्ध व्यक्ति को विचारण के लिए लाए बिना अनावश्यक रूप से निरुद्ध रखेगा या उसका मामला अन्वेषण के लिए उचित प्राधिकारी के समक्ष लाने में असफल रहेगा; या

(ख) किसी व्यक्ति को बल की अभिरक्षा के लिए सुपुर्द करके, ऐसी सुपुर्दगी के समय या यथासाध्य शीघ्र और किसी भी दशा में तत्पश्चात् अड़तालीस घंटों के अंदर उस आफिसर या अन्य व्यक्ति को, जिसकी अभिरक्षा में गिरफ्तार किया गया व्यक्ति सुपुर्द किया गया हो, उस अपराध का जिसका कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति पर आरोप है, लिखित और स्वहस्ताक्षरित वृत्तान्त परिदत्त करने में युक्तियुक्त हेतुक के बिना असफल रहेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

38. अभिरक्षा से निकल भागना-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो विधिपूर्ण अभिरक्षा में होते हुए निकल भागेगा या निकल भागने का प्रयत्न करेगा, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

39. संपत्ति के बारे में अपराध-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) सरकार की या किसी बल की मैस, बैंड या संस्था की या ऐसे किसी व्यक्ति की, जो इस अधिनियम के अध्यधीन है, किसी संपत्ति की चोरी करेगा; या

(ख) ऐसी किसी सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग करेगा या उसको अपने उपयोग के लिए संपरिवर्तित कर   लेगा; या

(ग) ऐसी किसी संपत्ति के बारे में आपराधिक न्यास भंग करेगा; या

(घ) ऐसी किसी संपत्ति को, जिसके बारे में खंड (क), खण्ड (ख) और खण्ड (ग) के अधीन अपराधों में से कोई अपराध किया गया है, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुआ कि ऐसा अपराध हुए है, बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखे रखेगा; या

(ङ) सरकार की किसी संपत्ति को, जो उसे न्यस्त की गई हो, जानबूझकर नष्ट करेगा या उसकी क्षति करेगा; या

(च) कपट वंचन करने के या एक व्यक्ति को सदोष अभिलाभ या किसी अन्य व्यक्ति को सदोष हानि पहुंचाने के आशय से कोई अन्य बात करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

40. उद्दापन और भ्रष्टाचार-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) उद्दापन करेगा; या

(ख) उचित प्राधिकार के बिना किसी व्यक्ति से धन ऐंठेगा, रसद या सेवा उद्दापित करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

41. उपस्कर गायब कर देना-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः- 

(क) किन्हीं आयुधों, गोलाबारूद, उपस्कर, उपकरणों, औजारों, कपड़ों या किसी अन्य वस्तु को, जो सरकार की सम्पत्ति होते हुए उसे अपने उपयोग के लिए दी हुई हो या उसे न्यस्त की हुई हो, गायब कर देगा या गायब करवा देने में संपृक्त होगा; या

(ख) खंड (क) में वर्णित किसी वस्तु को उपेक्षा से गंवा देगा; या

(ग) अपने को अनुदत्त किसी पदक या अलंकरण को बेचेगा, गिरवी रखेगा, नष्ट करेगा या विरूपित करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि खंड (क) में विनिर्दिष्ट अपराधों की दशा में दस वर्ष तक की और अन्य खंडों में विनिर्दिष्ट अपराधों की दशा में पांच वर्ष तक की हो सकेगी या इन दोनों दशाओं में से किसी दशा में ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

42. संपत्ति को क्षति-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) धारा 41 के खंड (क) में वर्णित कोई संपत्ति या किसी बल के मैस, बैंड या संस्था की या किसी ऐसे व्यक्ति की, जो इस अधिनियम के अधीन है, कोई संपत्ति नष्ट करेगा या उसे क्षति कारित करेगा; या

(ख) कोई ऐसा कार्य करेगा, जिसके कारण अग्नि से सरकार की किसी संपत्ति को नुकसान होता है या उसका नाश होता है; या

(ग) अपने को न्यस्त किए गए किसी जीव-जन्तु को मार देगा, क्षति कारित करेगा, गायब कर देगा या उससे बुरा बर्ताव करेगा या उसे गंवा देगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, उस दशा में, जिसमें उसने जानबूझकर ऐसा कार्य किया है कारावास, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा और उस दशा में, जिसमें उसने युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना ऐसा कार्य किया है, कारावास जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसे लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

43. मिथ्या अभियोग-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई मिथ्या अभियोग, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए लगाएगा कि यह अभियोग मिथ्या है; या

(ख) इस अधिनियम के अध्यधीन, किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई परिवाद करने में कोई ऐसा कथन, जो ऐसे व्यक्ति के शील पर आक्षेप करता है, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करेगा कि वह कथन मिथ्या है या किन्हीं तात्त्विक तथ्यों को, जानते हुए और जानबूझकर दबा लेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

44. शासकीय दस्तावेजों का मिथ्याकरण तथा मिथ्या घोषणाएं-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) किसी ऐसी रिपोर्ट, विवरणी, सूची, प्रमाणपत्र, पुस्तक या अन्य दस्तावेज में जो इसके द्वारा बनाई या हस्ताक्षरित की गई है या जिसकी विषय-वस्तु की यथार्थता अभिनिश्चित करना उसका कर्तव्य है, कोई मिथ्या या कपटपूर्ण कथन जानते हुए करेगा या किए जाने में संसर्गी होगा; या

(ख) कपट वंचन करने के आशय से, किसी ऐसे दस्तावेज में, जो खंड (क) में वर्णित वर्णन की है, कोई लोप जानते हुए करेगा या लोप किए जाने में संसर्गी होगा; या

(ग) जानते हुए और किसी व्यक्ति को क्षति करने के आशय से या जानते हए और कपट वंचन करने के आशय से किसी ऐसी दस्तावेज को, जिसे परिरक्षित रखना या प्रस्तुत करना उसका कर्तव्य है, दबा लेगा, विरूपित करेगा, परिवर्तित करेगा या उसे गायब कर देगा; या

(घ) जहां कि किसी बात के बारे में घोषणा करना उसका पदीय कर्तव्य है वहां जानते हुए मिथ्या घोषणा करेगा; या

(ङ) अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई पेंशन, भत्ता या अन्य फायदा या विशेषाधिकार ऐसे कथन से, जो मिथ्या है, और जिसके मिथ्या होने का उसे या तो ज्ञान है या विश्वास है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है अथवा किसी पुस्तक या अभिलेख में कोई मिथ्या प्रविष्टि करके या उसमें मिथ्या प्रविष्टि का उपयोग करके, अथवा मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट करने वाली कोई दस्तावेज बनाकर अथवा कोई सही प्रविष्टि करने में का या सत्य कथन अन्तर्विष्ट रखने वाली दस्तावेज बनाने का लोप करके, अभिप्राप्त करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

45. रिक्त स्थान छोड़कर हस्ताक्षर करना और रिपोर्ट देने में असफल रहना-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) वेतन, आयुध, गोलाबारूद, उपस्कर, कपड़े, प्रदाय या सामान से या सरकार की किसी संपत्ति से सम्बद्ध ऐसी किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते समय किसी तात्त्विक भाग को, जिसके लिए उसका हस्ताक्षर प्रमाणक है, कपटपूर्वक रिक्त छोड़ देगा; या

(ख) ऐसी रिपोर्ट या विवरणी देने या भेजने से, जिसका देना या भेजना उसका कर्तव्य है, इंकार करेगा या वैसा करने का लोप आपराधिक उपेक्षा से करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

46. असम राइफल्स न्यायालयों से संबद्ध अपराध-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) किसी असम राइफल्स न्यायालय के समक्ष साक्षी के तौर पर हाजिर होने के लिए सम्यक् रूप से समनित या आदिष्ट होने पर हाजिर होने में जानबूझकर या युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना व्यतिक्रम करेगा; या 

(ख) उस शपथ या प्रतिज्ञान को जिसके लिए या किए जाने की अपेक्षा असम राइफल्स न्यायालय द्वारा वैध रूप से की गई हो लेने या करने से इंकार करेगा; या

(ग) अपनी शक्ति या नियंत्रण में के किसी दस्तावेज को जिसे उसके द्वारा पेश या परिदत्त किए जाने की अपेक्षा असम राइफल्स न्यायालय द्वारा वैध रूप से की गई हो पेश या परिदत्त करने से इंकार करेगा; या

(घ) जब कि वह साक्षी है तब किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने से इंकार करेगा, जिसका उत्तर देने के लिए वह विधि द्वारा आबद्ध है; या

(ङ) अपमानजनक या धमकी भरी भाषा का प्रयोग करके या असम राइफल्स न्यायालय कार्यवाहियों में कोई विघ्न या विक्षोभ कारित करने के द्वारा उस न्यायालय के अवमान का दोषी होगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

47. मिथ्या साक्ष्य-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो किसी असम राइफल्स न्यायालय या अन्य ऐसे न्यायालय के समक्ष, जो शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए इस अधिनियम के अधीन सक्षम है, सम्यक् रूप से शपथ लेकर या प्रतिज्ञान करके कोई ऐसा कथन करेगा, जो मिथ्या है और जिसके मिथ्या होने का उसे या तो ज्ञान या विश्वास है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

48. वेतन का विधिविरुद्ध रोक रखना-कोई आफिसर, अधीनस्थ आफिसर या अवर आफिसर, जो इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति का, वेतन प्राप्त करके, उसके शोध्य होने पर उसे विधिविरुद्धतया रोक रखेगा या देने से इंकार करेगा, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

49. अच्छी व्यवस्था और अनुशासन का अतिक्रमण-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो किसी ऐसे कार्य या लोप का दोषी है जो, यद्यपि इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट नहीं है तथापि अच्छी व्यवस्था और बल के अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

50. प्रकीर्ण अपराध-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई भी अपराध करेगा, अर्थात्ः-

(क) किसी चौकी पर या प्रगमन पर समादेशन करते हुए और यह परिवाद प्राप्त होने पर कि उसके समादेश के अधीन किसी व्यक्ति ने किसी व्यक्ति को पीटा है या उसके साथ अन्यथा बुरा बर्ताव किया है या उसे सताया है या किसी मेले या बाजार में विघ्न डाला है या कोई बलवा या अत्याचार किया है, क्षतिग्रस्त व्यक्ति की सम्यक् हानि पूर्ति कराने या मामले की रिपोर्ट उचित प्राधिकारी से करने में असफल रहेगा; या

(ख) पूजा के किसी स्थान को अपवित्र करके या अन्यथा किसी व्यक्ति के धर्म का साशय अपमान करेगा या उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा; या

(ग) आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा और ऐसा प्रयत्न करने में उस अपराध के किए जाने की दिशा में कोई कार्य   करेगा; या

(घ) अधीनस्थ आफिसर के रैंक से नीचे का होते हुए, जब वह ड्यूटी पर न हो, तब कैंप में या उसके आसपास अथवा किसी नगर या बाजार को जाते हुए, या उससे वापस आते हुए, कोई राइफल, तलवार या अन्य आक्रामक शस्त्र ले जाते हुए उचित प्राधिकार के बिना देखा जाएगा; या

(ङ) किसी व्यक्ति के अभ्यावेशन या सेवा में के किसी व्यक्ति के लिए अनुपस्थिति छुट्टी, प्रोन्नति या कोई अन्य फायदा या अनुग्रह उपाप्त कराने के हेतु या इनाम के रूप में कोई परितोषण अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः प्रतिगृहीत करेगा या अभिप्राप्त करेगा या प्रतिगृहीत करने के लिए सहमत होगा या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करेगा; या

(च) उस देश के, जिसमें वह सेवा कर रहा है, किसी वासी या निवासी की संपत्ति या उसके शरीर के विरुद्ध कोई अपराध करेगा,

असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

51. प्रयत्न-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो धारा 21 से धारा 50 तक में (जिनमें ये दोनों धाराएं सम्मिलित हैं) विनिर्दिष्ट अपराधों में से कोई अपराध करने का प्रयत्न करेगा और ऐसा प्रयत्न करने में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करेगा, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, उस दशा में जिसमें कि ऐसा प्रयत्न दंडित करने के लिए इस अधिनियम द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं किया गया है, -

(क) तब जब कि किए जाने के लिए प्रयतित अपराध मृत्यु से दंडनीय है कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा; और

(ख) तब जबकि किए जाने के लिए प्रयतित अपराध कारावास से दंडनीय है, कारावास, जिसकी अवधि उस अपराध के लिए उपबंधित दीर्घतम अवधि की आधी तक हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

52. किए गए अपराधों का दुष्प्रेरण-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो धारा 21 से धारा 50 तक में (जिनमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) विनिर्दिष्ट अपराधों में से किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, उस दशा में जिसमें कि दुष्प्रेरित कार्य दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया है और इस अधिनियम द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबंध ऐसे दुष्प्रेरण को दण्डित करने के लिए नहीं किया गया है, उस अपराध के लिए उपबंधित दंड या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

53. मृत्यु से दंडनीय उन अपराधों का दुष्प्रेरण जो किए गए हों-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो उन अपराधों में से किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, जो धारा 21, धारा 24 और धारा 25 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन मृत्यु से दंडनीय असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, उस दशा में जिसमें कि वह अपराध दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप नहीं किया गया है और इस अधिनियम द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबंध ऐसे दुष्प्रेरण को दंडित करने के लिए नहीं किया गया है, कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

54. कारावास से दंडनीय उन अपराधों का दुष्प्रेरण जो किए गए हों-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो उन अपराधों में से किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, जो धारा 21 से धारा 50 तक में (जिनमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) विनिर्दिष्ट और कारावास से दंडनीय है, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, उस दशा में जिसमें वह अपराध दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप नहीं किया गया है और इस अधिनियम द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबंध ऐसे दुष्प्रेरण को दंडित करने के लिए नहीं किया गया है, कारावास, जिसकी अवधि उस अपराध के लिए उपबंधित दीर्घतम अवधि की आधी तक हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

55. सिविल अपराध-धारा 56 के उपबंधों के अध्यधीन यह है कि इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो भारत में या भारत से परे किसी स्थान में सिविल अपराध करेगा, इस अधिनियम के विरुद्ध अपराध का दोषी समझा जाएगा और यदि उस पर वह अपराध इस धारा के अधीन आरोपित किया जाए असम राइफल्स न्यायालय द्वारा विचारण किए जाने के दायित्व के अधीन होगा और दोषसिद्धि पर निम्नलिखित रूप से दण्डनीय होगा, अर्थात्ः-

(क) यदि अपराध ऐसा है जो भारत में प्रवृत्त किसी विधि के अधीन मृत्यु से दण्डनीय है, तो वह किसी ऐसे दंड का, जो उस अपराध के लिए पूर्वोक्त विधि द्वारा समनुदेशित है और ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा; और

(ख) अन्य किसी दशा में, वह किसी ऐसे दंड का, जो भारत में प्रवृत्त विधि द्वारा उस अपराध के लिए समनुदिष्ट है या कारावास जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा ।

56. सिविल अपराध, जो असम राइफल्स न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं है-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जो इस अधिनियम के अध्यधीन नहीं है, हत्या का या हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध का या ऐसे व्यक्ति से बलात्संग करने का अपराध करेगा, इस अधिनियम के विरुद्ध किसी अपराध का दोषी नहीं समझा जाएगा और असम राइफल्स न्यायालय द्वारा उसका विचारण तभी किया जाएगा जब तक कि वह उक्त अपराधों में से कोई अपराध-

(क) सक्रिय ड्यूटी पर रहते समय करता है; या

(ख) भारत के बाहर किसी स्थान पर करता है; या

(ग) किसी ऐसे स्थान पर करता है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया गया हो ।

अध्याय 5

दंड

57. असम राइफल्स न्यायालयों द्वारा अधिनिर्णेय दण्ड-(1) इस अधिनियम के अध्यधीन व्यक्तियों द्वारा, जो असम राइफल्स न्यायालयों द्वारा सिद्धदोष ठहराए गए हैं, किए गए अपराधों के बारे में दंड निम्नलिखित मापमान के अनुसार दिए जा सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) मृत्यु;

(ख) कारावास, जो आजीवन या किसी अन्य लघुतर अवधि का हो सकेगा, किन्तु इसके अंतर्गत बल की अभिरक्षा में तीन मास से अनधिक अवधि का कारवास नहीं है;

(ग) सेवा से पदच्युति;

(घ) सेवा से अनिवार्य सेवानिवृत्ति;

(ङ) आफिसरों और अधीनस्थ आफिसरों के मामले के सिवाय बल की अभिरक्षा में तीन मास से अनधिक अवधि का कारावास;

(च) अवर आफिसर की दशा में निम्नतर रैंक या उनकी रैंक की सूची में निम्नतर रैंक या ग्रेड या स्थान पर अवनति;

(छ) रैंक में की ज्येष्ठता का समपहरण और प्रोन्नति के प्रयोजन के लिए सेवा की पूर्ण अवधि या उसके किसी भाग का समपहरण;

(ज) वर्धित वेतन, पेंशन या किसी अन्य विहित प्रयोजन के लिए सेवा का समपहरण;

(झ) जुर्माना;

(ञ) तीव्र-धिग्दंड या धिग्दंड, किन्तु अवर आफिसर के रैंक से नीचे के व्यक्तियों को नहीं;

(ट) सक्रिय ड्यूटी के दौरान किए गए किसी अपराध के लिए तीन मास से अनधिक की अवधि के लिए वेतन और भत्तों का समपहरण;

(ठ) सेवा से पदच्युति से दंडित व्यक्ति की दशा में वेतन और भत्तों के उन सब बकायों और अन्य लोक धन का समपहरण, जो ऐसी पदच्युति के समय उसको शोध्य हों;

(ड) वेतन और भत्तों का तब तक के लिए रोक दिया जाना, जब तक उस साबित हुई हानि या नुकसान की प्रतिपूर्ति न हो जाए, जो उस अपराध के कारण हुआ है, जिसका वह सिद्धदोष ठहराया गया है ।

(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रत्येक दंड उपर्युक्त मापमान में पूर्ववर्ती प्रत्येक दंड से कोटि में निम्नतर समझा जाएगा ।

58. असम राइफल्स न्यायालयों द्वारा अधिनिर्णेय आनुकल्पिक दंड-इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए असम राइफल्स न्यायालय इस अधिनियम के अध्यधीन उस व्यक्ति को, जो धारा 21 से धारा 54 तक में (जिनमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) विनिर्दिष्ट अपराधों में से किसी का सिद्धदोष ठहराने पर या तो वह विशिष्ट दंड जिससे वह उक्त धाराओं में अपराध दंडनीय कथित है या उसके बदले में धारा 57 में दिए गए मापमान में के दंडों में से कोई निम्नतर दंड, अपराध की प्रकृति और मात्रा को ध्यान में रखते हुए, अधिनिर्णीत कर सकेगा ।

59. दंडों का संयोजन-असम राइफल्स न्यायालय का दंडादेश, किसी एक अन्य दंड के अतिरिक्त या बिना, धारा 57 की उपधारा (1) के खंड (ग) में विनिर्दिष्ट दंड और उस उपधारा के खंड (च) से खंड (ड) तक में (जिनमें ये दोनों खंड भी सम्मिलित हैं), विनिर्दिष्ट दंडों में से कोई एक या अधिक दंड अधिनिर्णीत कर सकेगा ।

60. सक्रिय ड्यूटी पर दोषसिद्ध किए गए व्यक्ति का बल में प्रतिधारण-जब किसी अभ्यावेशित व्यक्ति को उस समय के दौरान जबकि वह सक्रिय ड्यूटी पर है, असम राइफल्स न्यायालय द्वारा पदच्युति का या पदच्युति सहित या रहित कारावास का दंडादेश दिया गया हो, तब विहित आफिसर निदेश दे सकेगा कि ऐसे व्यक्ति को रैंक में सेवा करने के लिए प्रतिधृत रखा जाए और ऐसी सेवा उसके कारावास की, यदि कोई हो, अवधि के भाग के रूप में गिनी जाएगी ।

61. असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दंडित किए जाने से अन्यथा दंडित किया जाना-इस अधिनियम के अध्यधीन व्यक्तियों द्वारा किए गए अपराधों के बारे में दंड असम राइफल्स न्यायालय के मध्यक्षेप के बिना धारा 62, धारा 64, धारा 65 और धारा 66 में कथित रीति से भी दिए जा सकेंगे ।

62. लघु दंड-धारा 63 के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, कोई कमांडेंट या ऐसा अन्य आफिसर, जिसे महानिदेशक ने केन्द्रीय सरकार की सम्मति से विनिर्दिष्ट किया हो जो इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध जो आफिसर या अधीनस्थ आफिसर नहीं है और जिस पर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप है, विहित रीति से कार्यवाही कर सकेगा और ऐसे व्यक्ति को निम्नलिखित दंडों में से एक या अधिक दंड विहित विस्तार तक अधिनिर्णीत कर सकेगा, अर्थात्ः-

(क) बल की अभिरक्षा में अट्ठाईस दिन तक का कारावास;

(ख) अट्ठाईस दिन तक का निरोध;

(ग) अट्ठाईस दिन तक का लाईन्स में परिरोध;

(घ) अतिरिक्त पहरा या ड्यूटी;

(ङ) किसी विशेष पद से या विशेष उपलब्धियों या किसी कार्यकारी रैंक से वंचित करना या वेतन की निम्नतर श्रेणी में अवनत करना;

(च) सुसेवा वेतन और सदाचरण वेतन का समपहरण;

(छ) तीव्र-धिग्दंड या धिग्दंड;

(ज) किसी एक मास में चौदह दिन के वेतन तक का जुर्माना;

(झ) उसके वेतन और भत्तों में से किसी ऐसी राशि की कटौती, जो उसके द्वारा केन्द्रीय सरकार को या किसी भवन या संपत्ति को किए गए किसी व्यय, हानि, नुकसान या नाश के लिए ऐसे प्रतिकर की पूर्ति के लिए अपेक्षित हो, जो उसके कमांडेंट द्वारा अधिनिर्णीत किया जाए ।

63. धारा 62 के अधीन दंडों की परिसीमा-(1) धारा 62 के खंड (क), खंड (ख), खंड (ग) और खंड (घ) में विनिर्दिष्ट दंडों में से दो या अधिक के अधिनिर्णयन की दशा में खंड (ग) या खंड (घ) में विनिर्दिष्ट दंड, खंड (क) या खंड (ख) में विनिर्दिष्ट दंड के खत्म होने पर ही प्रभावशील होगा ।

(2) जब किसी व्यक्ति को उक्त खंड (क), खंड (ख) और खंड (ग) में विनिर्दिष्ट दंडों में से दो या अधिक दंड संयुक्ततः अधिनिर्णीत किए गए हों या तब अधिनिर्मित किए गए हों जब वह उक्त दंडों में से एक या अधिक पहले से ही भोग रहा हो, तब उन दंडों का संपूर्ण विस्तार कुल मिलाकर बयालीस दिन से अधिक नहीं होगा ।

(3) उक्त खंड (क), खंड (ख) और खंड (ग) में विनिर्दिष्ट दंड किसी ऐसे व्यक्ति को अधिनिर्णीत नहीं किए जाएंगे जो अवर आफिसर के रैंक का है या जो उस अपराध को करते समय, जिसके लिए उसे दंडित किया जाता है, ऐसे रैंक का था ।

(4) धारा 62 के खंड (छ) में विनिर्दिष्ट दंड अवर आफिसर के रैंक से नीचे के किसी व्यक्ति को अधिनिर्णीत नहीं किया   जाएगा ।

64. उप महानिरीक्षकों और अन्यों द्वारा डिप्टी कमांडेंट, अधीनस्थ आफिसरों और वारंट आफिसरों से नीचे के रैंक के आफिसरों को दंडित किया जाना-(1) ऐसा आफिसर, जो उप महानिरीक्षक के रैंक से नीचे का नहीं है या ऐसा अन्य आफिसर जिसे महानिदेशक ने केन्द्रीय सरकार की सम्मति से विनिर्दिष्ट किया हो, डिप्टी कमांडेंट के रैंक के और अधीनस्थ आफिसर के और वारंट आफिसर के रैंक से नीचे के किसी ऐसे आफिसर के विरुद्ध, जिस पर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप हो, विहित रीति से कार्यवाही कर सकेगा और निम्नलिखित दंडों में से एक या अधिक दंड अधिनिर्णीत कर सकेगा, अर्थात्ः-

(क) ज्येष्ठता का समपहरण या उनमें से किसी ऐसे की दशा में जिसकी प्रोन्नति सेवाकाल की लंबाई पर निर्भर है बारह मास से अनधिक की कालावधि के सेवाकाल का इसलिए समपहरण कि वह प्रोन्नति के प्रयोजन के लिए न गिना जाए, किन्तु यह बात दंड अधिनिर्णीत किए जाने के पूर्व अभियुक्त के यह निर्वाचन करने के अधिकार के अध्यधीन होगी कि उसका विचारण असम राइफल्स न्यायालय द्वारा किया जाए;

(ख) तीव्र-धिग्दंड या धिग्दंड;

(ग) वेतन और भत्तों का तब तक के लिए रोक दिया जाना जब तक उस साबित हुई हानि या नुकसान की प्रतिपूर्ति न हो जाए जो उस अपराध के कारण हुआ है, जिसका वह सिद्धदोष ठहराया गया है ।

(2) ऐसे प्रत्येक मामले में, जिसमें उपधारा (1) के अधीन दंड अधिनिर्णीत किया गया है, दंड अधिनिर्णीत करने वाला अधिकारी कार्यवाहियों की प्रमाणित सही प्रतियां विहित वरिष्ठ प्राधिकारी को विहित रीति से भेजेगा और यदि वरिष्ठ प्राधिकारी को अधिनिर्णीत दंड अवैध, अन्यायपूर्ण या अत्यधिक प्रतीत होता है तो वह उस दंड को रद्द, परिवर्तित या उसका परिहार कर सकेगा और ऐसा अन्य निदेश दे सकेगा, जो उस मामले की परिस्थितियों में समुचित हो ।

65. महानिरीक्षक और अन्यों द्वारा कमांडेंट की रैंक से नीचे के आफिसरों, अधीनस्थ आफिसरों और वारंट आफिसर को दंडित किया जाना-(1) ऐसा आफिसर, जो महानिरीक्षक के रैंक से नीचे का नहीं है या ऐसा अन्य आफिसर जिसे महानिदेशक ने केन्द्रीय सरकार की सम्मति से विनिर्दिष्ट किया हो, कमांडेंट के रैंक के और अधीनस्थ आफिसर और किसी वारंट आफिसर के रैंक से नीचे के किसी ऐसे आफिसर के विरुद्ध, जिस पर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप है, विहित रीति से कार्यवाही कर सकेगा और निम्नलिखित दंडों में से एक या अधिक दंड दे सकेगा, अर्थात्ः-

(क) ज्येष्ठता का समपहरण, या उनमें से किसी ऐसे की दशा में, जिसकी प्रोन्नति, सेवाकाल की लंबाई पर निर्भर है, बारह मास से अनधिक की कालावधि के सेवाकाल का इसलिए समपहरण कि वह प्रोन्नति के प्रयोजन के लिए न गिना जाए, किन्तु यह बात दंड अधिनिर्णीत किए जाने के पूर्व अभियुक्त के यह निर्वाचन करने के अधिकार के अध्यधीन होगी कि उसका विचारण असम राइफल्स न्यायालय द्वारा किया जाए;

(ख) तीव्र-धिग्दंड या धिग्दंड;

(ग) वेतन और भत्तों का तब तक के लिए रोक दिया जाना जब तक उस साबित हुई हानि या नुकसान की प्रतिपूर्ति न हो जाए जो उस अपराध के कारण हुआ है जिसका वह सिद्धदोष ठहराया गया है ।

(2) ऐसे प्रत्येक मामले में, जिसमें उपधारा (1) के अधीन दंड अधिनिर्णीत किया गया है, दंड अधिनिर्णीत करने वाला अधिकारी कार्यवाहियों की प्रमाणित सही प्रतियां विहित वरिष्ठ प्राधिकारी को विहित रीति से भेजेगा और यदि वरिष्ठ प्राधिकारी को अधिनिर्णीत दंड अवैध, अन्यायपूर्ण या अत्यधिक प्रतीत होता है तो वह उस दंड को रद्द, परिवर्तित या उसका परिहार कर सकेगा और ऐसा अन्य निदेश दे सकेगा, जो उस मामले की परिस्थितियों में समुचित हो ।

66. कमांडेंट आदि द्वारा अधीनस्थ आफिसर और वारंट आफिसर को दंडित किया जाना-ऐसा कमांडेंट या ऐसा अन्य आफिसर जिसे महानिदेशक ने, केन्द्रीय सरकार की सम्मति से विनिर्दिष्ट किया हो, किसी ऐसे अधीनस्थ आफिसर या वारंट आफिसर के विरुद्ध, जिस पर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप है, विहित रीति से कार्यवाही कर सकेगा और निम्नलिखित दंडों में से एक या अधिक दंड दे सकेगा, अर्थात्ः-

(क) तीव्र-धिग्दंड या धिग्दंड;

(ख) वेतन और भत्तों का तब तक के लिए रोक दिया जाना जब तक उस साबित हुई हानि या नुकसान की प्रतिपूर्ति न हो जाए जो उस अपराध के कारण हुआ है जिसका वह सिद्धदोष ठहराया गया है:

परन्तु खंड (क) के अधीन वर्णित दंड केवल ऐसे अधिकारी द्वारा ही दिया जाएगा जो कमांडेंट के रैंक से नीचे का न हो और जिसे ऐसा दंड देने के लिए महानिदेशक ने प्राधिकृत किया हो ।

67. सामूहिक जुर्माने-(1) जब कभी कोई शस्त्र या शस्त्र का भाग या गोलाबारूद, जो बल की किसी यूनिट के उपस्कर का भाग है, खो जाता है या चोरी हो जाता है, तब ऐसा आफिसर, जो बटालियन के कमांडेंट के रैंक से नीचे का न हो, ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे और नियमों के अधीन रहते हुए, ऐसे अधीनस्थ आफिसरों, अवर आफिसरों और ऐसी यूनिट के जवानों पर या उनमें से उतनों पर, जितने उसके निर्णय में ऐसे खो जाने या चोरी के लिए उत्तरदायी ठहराए जाने चाहिएं, सामूहिक जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा ।

(2) ऐसा जुर्माना उन व्यक्तियों के, जिन पर वह पड़ता है, वेतन के प्रतिशत के रूप में निर्धारित किया जाएगा ।

 

अध्याय 6

शास्तिक कटौतियां

68. आफिसरों के वेतन और भत्तों में से कटौतियां-किसी भी आफिसर के वेतन और भत्तों में से निम्नलिखित शास्तिक कटौतियां की जा सकेंगी, अर्थात्ः-

(क) उस हर दिन के लिए, जिस दिन वह छुट्टी के बिना अनुपस्थित रहता है आफिसर को शोध्य सभी वेतन और भत्ते तब के सिवाय जब कि उसके कमान आफिसर को समाधानप्रद स्पष्टीकरण दे दिया गया है और केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है;

(ख) ऐसे हर दिन के सभी वेतन और भत्ते जब वह किसी ऐसे अपराध के आरोप पर अभिरक्षाधीन या कर्तव्य से विलम्बित रहा है जिसके लिए वह तत्पश्चात् किसी दण्ड न्यायालय या असम राइफल्स न्यायालय द्वारा या किसी ऐसे आफिसर द्वारा जो धारा 64 या धारा 65 के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है दोषसिद्ध किया जाता है;

(ग) इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति के उस वेतन की जो उसने विधिविरुद्ध रूप से प्रतिधृत कर रखा है या जिसे देने से उसने विधिविरुद्ध रूप से इन्कार कर दिया है, प्रतिपूर्ति के लिए अपेक्षित कोई राशि;

(घ) किसी अपराध के किए जाने से हुए किन्हीं व्ययों, हानि, नुकसान या नाश के लिए ऐसे प्रतिकर की, जो किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा वह ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है या किसी ऐसे आफिसर द्वारा जो धारा 64 या धारा 65 के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है अवधारित किया जाए, प्रतिपूर्ति के लिए अपेक्षित कोई राशि;

(ङ) वे सब वेतन और भत्ते, जिनके समपहरण या रोक दिए जाने का आदेश किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दिया गया हो;

(च) किसी दण्ड न्यायालय या असम राइफल्स न्यायालय द्वारा अधिनिर्णीत जुर्माने के संदाय के लिए अपेक्षित कोई राशि;

(छ) लोक-सम्पत्ति या रेजिमेन्ट-सम्पत्ति की किसी ऐसी हानि, नुकसान या नाश की, जिसकी बाबत केन्द्रीय सरकार को सम्यक् अन्वेषण के पश्चात् यह प्रतीत होता है कि वह उस आफिसर के सदोष कार्य से या उपेक्षा से घटित हुआ है, प्रतिपूर्ति के लिए अपेक्षित कोई राशि;

(ज) केन्द्रीय सरकार के आदेश से समपहृत सभी वेतन और भत्ते, यदि महानिदेशक द्वारा उस निमित्त गठित जांच न्यायालय का यह निष्कर्ष हो कि आफिसर शत्रु से जा मिला था या जब वह शत्रु के हाथ में था, तब उसने शत्रु की ओर से या शत्रु के आदेशों के अधीन सेवा की थी या उसने किसी रीति से शत्रु की सहायता की थी या सम्यक् सावधानी न बरत कर या आदेशों की अवज्ञा या कर्तव्य की जानबूझकर उपेक्षा करने द्वारा उसने स्वयं को शत्रु द्वारा कैदी बना लिया जाने दिया था या शत्रु द्वारा कैदी बना लिए जाने पर तब जब उसके लिए अपनी सेवा पर वापस आ जाना संभव था, वह ऐसा करने में असफल रहा था;

(झ) केन्द्रीय सरकार के आदेश के द्वारा उसकी पत्नी या उसकी धर्मज या अधर्मज सन्तान के भरण-पोषण के लिए दिए जाने के लिए या उक्त सरकार द्वारा उक्त पत्नी या सन्तान को दी गई सहायता के खर्चे के निमित्त दिए जाने के लिए अपेक्षित कोई राशि ।

69. आफिसरों से भिन्न व्यक्तियों के वेतन और भत्तों में से कटौतियां-धारा 72 के उपबन्धों के अध्यधीन यह है कि आफिसर से भिन्न इस अधिनियम के अध्यधीन किसी भी व्यक्ति के वेतन और भत्तों में से निम्नलिखित शास्तिक कटौतियां की जा सकेंगी, अर्थात्ः-

(क) अभित्यजन पर या छुट्टी बिना या युद्ध कैदी होने के कारण अनुपस्थिति के हर दिन के लिए तब के सिवाय जब कि समाधानप्रद स्पष्टीकरण दे दिया गया है और उसके कमांडेन्ट द्वारा स्वीकार कर लिया गया है और किसी भी दंड न्यायालय, असम राइफल्स न्यायालय या किसी ऐसे आफिसर द्वारा जो धारा 62 के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है, अधिनिर्णीत कारावास के हर दिन के लिए सब वेतन और भत्ते;

(ख) हर ऐसे दिन के सब वेतन और भत्ते, जब कि वह किसी ऐसे अपराध के आरोप पर जिसके लिए वह तत्पश्चात् किसी दंड न्यायालय द्वारा या असम राइफल्स न्यायालय द्वारा सिद्धदोष ठहराया जाता है या छुट्टी बिना ऐसी अनुपस्थिति के आरोप पर, जिसके लिए तत्पश्चात् उसे किसी ऐसे आफिसर द्वारा, जो धारा 62 के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है, कारावास अधिनिर्णीत किया जाता है, अभिरक्षा में रहा है;

(ग) हर ऐसे दिन के सब वेतन और भत्ते, जब वह ऐसी रुग्णता के कारण अस्पताल में रहा है जिसकी बाबत उसकी परिचर्या करने वाले चिकित्सा आफिसर द्वारा यह प्रमाणपत्र दिया गया है कि वह उसके द्वारा किए गए इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध से कारित हुई है;

(घ) हर ऐसे दिन के लिए, जब वह ऐसी रुग्णता के कारण अस्पताल में रहा है जिसकी बाबत उसकी परिचर्या करने वाले चिकित्सा आफिसर द्वारा यह प्रमाणत्र दिया गया है कि वह उसके अपने अवचार या प्रज्ञाहीनता से कारित हुई है, उतनी राशि जितनी केन्द्रीय सरकार के या ऐसे आफिसर के, जो उस सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए;

(ङ) वे सब वेतन और सब भत्ते, जिनके समपहरण या रोक दिए जाने का आदेश किसी असम राइफल्स न्यायालय या किसी ऐसे आफिसर द्वारा, जो धारा 62, धारा 64, धारा 65 और धारा 66 में से किसी के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है, दिया गया है;

(च) शत्रु से उसका उद्धार किए जाने के और सेवा से उसकी ऐसी पदच्युति के, जो शत्रु द्वारा उसके कैदी बनाए जाने के समय के या शत्रु के हाथ में रहने के दौरान के उसके आचरण के परिणामस्वरूप हुई है, बीच के हर दिन के सब वेतन और भत्ते;

(छ) केन्द्रीय सरकार को या किसी भवन या सम्पत्ति को उसके द्वारा कारित व्ययों, हानि, नुकसान या नाश के लिए ऐसे प्रतिकर की जो उसके कमांडेंट द्वारा अधिनिर्णीत की जाए, प्रतिपूर्ति के लिए अपेक्षित कोई राशि;

(ज) किसी दण्ड न्यायालय द्वारा या किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा या किसी ऐसे आफिसर द्वारा, जो धारा 62 और धारा 69 में से किसी के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है, अधिनिर्णीत जुर्माने के संदाय के लिए अपेक्षित कोई राशि;

(झ) केन्द्रीय सरकार के या किसी विहित आफिसर के आदेश द्वारा उसकी पत्नी या उसकी धर्मज या अधर्मज सन्तान के भरण-पोषण के लिए दिए जाने के लिए या उक्त सरकार द्वारा उक्त पत्नी या सन्तान को दी गई सहायता के खर्चे के निमित्त दिए जाने के लिए अपेक्षित कोई राशि ।

70. अनुपस्थिति या अभिरक्षा के समय की संगणना-धारा 69 के खण्ड (क) और खण्ड (ख) के प्रयोजनों के लिए-

(क) किसी भी व्यक्ति को एक दिन के लिए अनुपस्थित या अभिरक्षा में तब तक नहीं माना जाएगा, जब तक कि अनुपस्थिति या अभिरक्षा, चाहे पूर्णतः एक दिन में या भागतः एक दिन में और भागतः किसी अन्य दिन में, लगातार छह या अधिक घंटों तक न रही हो,

(ख) एक दिन से कम की अनुपस्थिति या अभिरक्षा को एक दिन की अनुपस्थिति या अभिरक्षा गिना जा सकेगा, यदि ऐसी अनुपस्थिति या अभिरक्षा ने उस अनुपस्थित व्यक्ति को किसी ऐसे कर्तव्य की पूर्ति करने से निवारित किया है, जो उस कारण किसी अन्य व्यक्ति पर डाला गया है,

(ग) लगातार बारह या अधिक घंटों की अनुपस्थिति या अभिरक्षा को उस हर एक पूरे दिन की अनुपस्थिति या अभिरक्षा गिना जा सकेगा, जिसके किसी प्रभाग के दौरान वह व्यक्ति अनुपस्थित था या अभिरक्षा में रहा था,

(घ) अनुपस्थिति या कारावास की ऐसी कालावधि को, जो मध्य रात्रि के पूर्व प्रारम्भ और पश्चात् समाप्त हो, एक दिन गिना जा सकेगा ।

71. विचारण के दौरान वेतन और भत्ते-इस अधिनियम के अध्यधीन किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में, जो किसी अपराध के आरोप पर अभिरक्षा में है या कर्तव्य से निलम्बित है, विहित आफिसर निदेश दे सकेगा कि धारा 68 के खण्ड (ख) और धारा 69 के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के लिए, ऐसे व्यक्ति के पूरे वेतन और भत्ते या उनका कोई भाग उस आरोप के, जो उसके विरुद्ध है, विचारण का परिणाम लम्बित रहने तक विधारित रखे जाएं ।

72. कतिपय कटौतियों की परिसीमा-किसी व्यक्ति के वेतन और भत्तों में से धारा 69 के खण्ड (ङ), खंड (छ) से खंड (झ) तक के अधीन की गई कुल कटौतियां तब के सिवाय, जब कि वह पदच्युति या पद से हटाए जाने से दण्डादिष्ट किया गया हो, किसी एक मास में उसके उस मास के वेतन और भत्तों के आधे से अधिक नहीं होंगी ।

73. किसी व्यक्ति को शोध्य लोक-धन में से कटौती-किसी व्यक्ति के वेतन और भत्तों में से काटी जाने के लिए इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत कोई राशि, उसे वसूल करने के किसी अन्य ढंग पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, पेंशन से भिन्न किसी ऐसे लोक-धन में से काटी जा सकेगी, जो उसे शोध्य है ।

74. युद्ध कैदी के आचरण की जांच के दौरान उसके वेतन और भत्ते-जहां कि इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति के उस समय के आचरण की जांच, जब कि वह शत्रु द्वारा कैदी बनाया जा रहा था या जबकि वह शत्रु के हाथों में था, इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन की जानी है, वहां महानिदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई आफिसर आदेश दे सकेगा कि ऐसे व्यक्ति के पूरे वेतन और भत्ते या उनका कोई भाग उस जांच का परिणाम लम्बित रहने तक विधारित रखे जाएं ।

75. कटौतियों का परिहार-वेतन और भत्तों में से इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत किसी कटौती का परिहार ऐसी रीति से और इतने विस्तार तक तथा ऐसे प्राधिकारी द्वारा किया जा सकेगा जो समय-समय पर विहित किया जाए ।

76. परिहारित कटौतियों में से युद्ध कैदी के आश्रितों के लिए उपबन्ध-इस अधिनियम के अध्यधीन उन सब व्यक्तियों की दशा में, जो ऐसे युद्ध कैदी हैं, जिनके वेतन और भत्ते धारा 69 के खण्ड (क) के अधीन समपहृत किए गए हैं, किन्तु जिनकी बाबत धारा 75 के अधीन कोई परिहार किया गया है, यह विधिपूर्ण होगा कि विहित प्राधिकारियों द्वारा ऐसे व्यक्तियों के किन्हीं आश्रितों के लिए उचित उपबन्ध ऐसे वेतन और भत्तों में से किया जाए और उस दशा में वह परिहार ऐसे वेतन और भत्तों में से ऐसा करने के पश्चात् जो कुछ बाकी बचे उतने को ही लागू समझा जाएगा ।

77. युद्ध कैदी के वेतन और भत्तों में से उसके आश्रितों के लिए उपबन्ध-यह विधिपूर्ण होगा कि इस अधिनियम के अध्यधीन जो कोई व्यक्ति युद्ध कैदी है या लापता है, उसके किन्हीं आश्रितों के लिए उचित उपबन्ध विहित प्राधिकारियों द्वारा उसके वेतन और भत्तों में से किया जाए ।

78. वह कालावधि जिसके दौरान कोई व्यक्ति युद्ध कैदी समझा जाता है-किसी व्यक्ति की बाबत धारा 76 और धारा 77 के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि जब तक उसके आचरण की ऐसी जांच जैसी धारा 74 में निर्दिष्ट है, समाप्त नहीं हो जाती तब तक और यदि वह ऐसे आचरण के परिणामस्वरूप पदच्युत किया जाता है या सेवा से हटा दिया जाता है तो ऐसे पदच्युत किए जाने की या हटाए जाने की तारीख तक युद्ध कैदी बना रहा है । 

अध्याय 7

गिरफ्तारी तथा विचारण के पूर्व की कार्यवाहियां

79. अपराधियों की अभिरक्षा-(1) इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जिस पर किसी अपराध का आरोप है, किसी वरिष्ठ आफिसर के आदेश से बल की अभिरक्षा में लिया जा सकेगा ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, कोई आफिसर यह आदेश दे सकेगा कि किसी ऐसे अन्य आफिसर को, भले ही वह उच्चतर रैंक का हो, जो झगड़ा, दंगा या उपद्रव करने में लगा हो, बल की अभिरक्षा में ले लिया जाए ।

80. निरोध के संबंध में कमांडेंट का कर्तव्य-(1) हर कमान आफिसर का यह कर्तव्य होगा कि वह इस बात की सतर्कता बरते कि जो व्यक्ति उसके समादेश के अधीन है, उस पर किसी अपराध का आरोप लगाए जाने पर वह व्यक्ति उस आरोप का अन्वेषण किए बिना उस समय के पश्चात्, जब उस व्यक्ति की अभिरक्षा में सुपुर्द किए जाने की रिपोर्ट ऐसे आफिसर को की गई है, तब के सिवाय जबकि अड़तालीस घंटे के अंदर ऐसे अन्वेषण का किया जाना लोक सेवा की दृष्टि से उसे असाध्य प्रतीत होता हो, अड़तालीस घंटे से अधिक के लिए अभिरक्षा में निरुद्ध न किया जाए ।

(2) हर ऐसे व्यक्ति के मामले की, जो अड़तालीस घंटे से अधिक की कालावधि के लिए अभिरक्षा में निरुद्ध किया हुआ है और ऐसे निरुद्ध किए जाने के कारण की रिपोर्ट कमांडेट उस उपमहानिरीक्षक को, जिसके अधीन वह सेवा कर रहा है या ऐसे अन्य आफिसर को की जाएगी जिसको, उस व्यक्ति का जिस पर आरोप है, विचारण करने के लिए असम राइफल्स न्यायालय संयोजित करने का आवेदन किया जाएगा ।

(3) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अड़तालीस घंटों की अवधि की गणना करने में, रविवार और अन्य लोक अवकाश दिन अपवर्जित किए जाएंगे ।

(4) इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, केन्द्रीय सरकार वह रीति और वह कालावधि उपबंधित करने वाले नियम बना सकेगी जिसमें और जिसके लिए कोई ऐसा व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन है, उसके द्वारा किए गए किसी अपराध के लिए किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा विचारण के लंबित रहने तक सुरक्षा बल की अभिरक्षा में लिया जा सकेगा और निरुद्ध किया जा सकेगा । 

81. सुपुर्दगी और विचारण के बीच का अंतराल-ऐसे प्रत्येक मामले में, जिसमें कोई ऐसा व्यक्ति, जो धारा 79 में वर्णित है और सक्रिय ड्यूटी पर नहीं है, संयोजित किए जाने के आदेश होने पर भी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा विचारण न होने पर, ऐसी अभिरक्षा में आठ दिन से दीर्घतर अवधि के लिए रहता है, उसके कमांडेंट द्वारा विलंब का कारण देने वाली एक विशेष रिपोर्ट, विहित रीति में की जाएगी और ऐसी ही रिपोर्ट हर आठ दिन के अंतरालों पर तब तक भेजी जाएगी जब तक असम राइफल्स न्यायालय संयोजित न कर लिया जाए या उस व्यक्ति को अभिरक्षा से निर्मुक्त न कर दिया जाए ।

82. सिविल प्राधिकारियों द्वारा गिरफ्तारी-जब कभी कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अध्यधीन किसी अपराध का अभियुक्त है, किसी मजिस्ट्रेट या पुलिस आफिसर की अधिकारिता के भीतर है तब तक मजिस्ट्रेट या पुलिस आफिसर, उस व्यक्ति के पकड़े जाने और बल की अभिरक्षा में दिए जाने में सहायता, उस व्यक्ति के कमांडेंट द्वारा या ऐसे आफिसर द्वारा जिसे कमांडेंट ने इस निमित्त प्राधिकृत किया है, हस्ताक्षरित उस प्रभाव के लिखित आवेदन की प्राप्ति पर करेगा ।

83. अभित्याजकों को पकड़ना-(1) जब कभी इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, अभित्यजन करेगा, तब उस यूनिट का, जिसका वह अंग है, कमांडेंट अभित्यजन की इत्तिला ऐसे  सिविल प्राधिकारियों को देगा, जो उसकी राय में अभित्याजक को पकड़ने में सहायता देने में समर्थ हों, और तदुपरि वे प्राधिकारी उक्त अभित्याजक को पकड़ने के लिए उसी रीति से कार्यवाही करेंगे मानो वह ऐसा व्यक्ति है जिसे पकड़ने के लिए किसी मजिस्ट्रेट द्वारा वारंट निकाला गया है और अभित्याजक के पकड़ लिए जाने पर उसे बल की अभिरक्षा में दे देंगे ।

(2) कोई भी पुलिस आफिसर किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके बारे में युक्तियुक्त रूप से यह विश्वास है कि वह इस अधिनियम के अध्यधीन है और अभित्याजक है या प्राधिकार के बिना यात्रा कर रहा है, बिना वारंट गिरफ्तार कर सकेगा और विधि के अनुसार बरते जाने के लिए, उसे अविलंब निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष लाएगा ।

84. छुट्टी बिना अनुपस्थित रहने की जांच-(1) जब कि इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, सम्यक् प्राधिकार के बिना तीस दिन की कालावधिपर्यन्त अपने कर्तव्य से अनुपस्थित रहा है तब एक जांच न्यायालय यथासाध्य शीघ्र ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी रीति से नियुक्त किया जाएगा, जो विहित की जाए; और ऐसा जांच न्यायालय उस व्यक्ति की अनुपस्थिति के बारे में और उसे देखरेख के लिए न्यस्त की गई सरकारी संपत्ति में या किन्हीं आयुधों, गोलाबारूद्ध, उपस्कर, उपकरणों, कपड़ों या आवश्यक वस्तुओं में हुई कमी, यदि कोई हो, के बारे में जांच, विहित रीति से दिलाई गई शपथ या कराए गए प्रतिज्ञान पर करेगा; और यदि उसका इस तथ्य की बाबत समाधान हो जाए कि अनुपस्थिति, सम्यक् प्राधिकार या अन्य पर्याप्त कारण के बिना हुई है तो न्यायालय उस अनुपस्थिति और उसकी कालावधि की तथा ऐसी कमी की, यदि कोई हो, घोषणा करेगा तथा उस यूनिट का, जिसका वह व्यक्ति अंग है, कमांडेंट विहित रीति से उसे लेखबद्ध करेगा ।

(2) यदि वह व्यक्ति, जो अनुपस्थित घोषित किया गया है, तत्पश्चात् न तो अभ्यर्पण करता है और न पकड़ा जाता है तो वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अभित्याजक समझा जाएगा ।

85. बल के पुलिस आफिसर-(1) महानिदेशक या कोई विहित आफिसर उपधारा (2) और उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट कृत्यों का निर्वहन करने के लिए व्यक्तियों को (जिन्हें इस अधिनियम में सुरक्षा बल पुलिस कहा गया है) नियुक्त कर सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त व्यक्ति के कर्तव्य हैं, किसी अपराध के लिए परिरुद्ध व्यक्तियों को अपने भारसाधन में लेना, बल में सेवा करने वाले या उससे संलग्न व्यक्तियों में, सुव्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना तथा उनके द्वारा उसका भंग किया जाना निवारित करना ।

(3) धारा 79 में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन नियुक्त व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को, जो इस अधिनियम के अधीन है और जो कोई अपराध करता है या जिस पर किसी अपराध का आरोप है, विचारण के लिए किसी भी समय गिरफ्तार और निरुद्ध कर सकेगा तथा असम राइफल्स न्यायालय द्वारा या किसी ऐसे आफिसर द्वारा, जो धारा 62 के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है, अधिनिर्णीत दंडादेश के अनुसरण में दंड को कार्यान्वित भी कर सकेगा, किन्तु वह अपने प्राधिकार से कोई दंड नहीं देगा :

परंतु किसी आफिसर को किसी अन्य आफिसर के आदेश पर ही गिरफ्तार या निरुद्ध किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

अध्याय 8

असम राइफल्स न्यायालय

86. असम राइफल्स न्यायालयों के प्रकार-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए असम राइफल्स न्यायालय तीन प्रकार के होंगे, अर्थात्ः-

(क) जनरल असम राइफल्स न्यायालय;

(ख) पैटी असम राइफल्स न्यायालय; और

(ग) समरी असम राइफल्स न्यायालय ।

87. जनरल असम राइफल्स न्यायालय संयोजित करने की शक्ति-जनरल असम राइफल्स न्यायालय केंद्रीय सरकार द्वारा या महानिदेशक द्वारा या महानिदेशन के अधिपत्र से इस निमित्त सशक्त किए गए किसी आफिसर द्वारा संयोजित किया जा सकेगा ।

88. पैटी असम राइफल्स न्यायालय संयोजित करने की शक्ति-पैटी असम राइफल्स न्यायालय, जनरल असम राइफल्स न्यायालय संयोजित करने की शक्ति रखने वाले आफिसर द्वारा या ऐसे किसी आफिसर के अधिपत्र से इस निमित्त सशक्त किए गए आफिसर द्वारा संयोजित किया जा सकेगा ।

89. धारा 87 और धारा 88 के अधीन निकाले गए अधिपत्रों की अंतर्वस्तुएं-धारा 87 या धारा 88 के अधीन निकाले गए अधिपत्र में ऐसे निर्बन्धन, आरक्षण या शर्तें हो सकेंगी, जैसे उसे निकालने वाला आफिसर ठीक समझे ।

90. जनरल असम राइफल्स न्यायालय की संरचना-जनरल असम राइफल्स न्यायालय, कम से पांच ऐसे आफिसरों से मिलकर बनेगा, जिनमें से हर एक कम से कम तीन पूरे वर्ष तक सहायक कमांडेंट का पद धारण कर चुका हो और जिनमें से कम से कम चार स्थायी सहायक कमांडेंट" के रैंक से नीचे रैंक के न हों ।

स्पष्टीकरण-इस धारा और धारा 91 के प्रयोजनों के लिए, सहायक कमांडेंट" के अंतर्गत उससे उच्चतर रैंक का कोई पद और कोई ऐसा पद, जिसे केंद्रीय सरकार ने अधिसूचना द्वारा उसके बराबर का पद घोषित कर दिया है तथा इस प्रकार घोषित पद से रैंक में उच्चतर कोई पद भी है ।

91. पैटी असम राइफल्स न्यायालय की संरचना-पैटी असम राइफल्स न्यायालय कम से कम तीन आफिसरों से मिलकर बनेगा, जिनमें से हर एक कम से कम दो पूरे वर्ष तक सहायक कमांडेंट का पद धारण कर चुका हो ।

92. समरी असम राइफल्स न्यायालय-(1) समरी असम राइफल्स न्यायालय बल की किसी यूनिट के कमांडेंट द्वारा अधिविष्ट किया जा सकेगा और वह न्यायालय अकेले उससे ही गठित होगा ।

(2) कार्यवाहियों में दो अन्य ऐसे व्यक्ति आरंभ से अंत तक हाजिर रहेंगे, जो आफिसर या अधीनस्थ आफिसर या दोनों में से एक-एक होंगे और जिन्हें उस रूप में न तो शपथ दिलाई जाएगी, न प्रतिज्ञान कराया जाएगा ।

93. असम राइफल्स न्यायालय का विघटन-(1) यदि विचारण के प्रांरभ के पश्चात्, किसी असम राइफल्स न्यायालय में उन आफिसरों की संख्या, जिनसे मिलकर वह बना है, उस न्यूनतम संख्या से, जो इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित है, कम हो जाती है तो वह विघटित कर दिया जाएगा ।

(2) यदि निष्कर्ष के पहले विधि आफिसर की या अभियुक्त की रुग्णता के कारण विचारण चलाते रहना असंभव हो जाए तो असम राइफल्स न्यायालय विघटित कर दिया जाएगा ।

(3) वह आफिसर, जिसने असम राइफल्स न्यायालय संयोजित किया है, ऐसे न्यायालय को विघटित कर सकेगा, यदि उसे यह प्रतीत हो कि सैन्य आवश्यकताओं या अनुशासनिक आवश्यकताओं ने उक्त असम राइफल्स न्यायालय का चालू रहना असंभव या असमीचीन कर दिया है ।

(4) जहां कि असम राइफल्स न्यायालय इस धारा के अधीन विघटित किया जाए, वहां अभियुक्त का विचारण फिर से किया जा सकेगा ।

94. जनरल असम राइफल्स न्यायालय की शक्तियां-जनरल असम राइफल्स न्यायालय को इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए, जो उसके अधीन दंडनीय है, विचारण करने और तद्द्वारा प्राधिकृत कोई दंडादेश पारित करने की शक्ति होगी ।

95. पैटी असम राइफल्स न्यायालय की शक्ति-पैटी असम राइफल्स न्यायालय को, आफिसर या अधीनस्थ आफिसर से भिन्न इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति को, ऐसे अपराध के लिए, जो उसके अधीन दंडनीय किया गया है, विचारण करने की तथा इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत कोई दंडादेश पारित करने की, जो मृत्यु या दो वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास के दंडादेश से भिन्न है, शक्ति होगी ।

96. समरी असम राइफल्स न्यायालय की शक्तियां-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, समरी असम राइफल्स न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी भी अपराध का विचारण कर सकेगा ।

(2) जब कि तुरंत कार्रवाई के लिए गंभीर कारण नहीं है और अभिकथित अपराधी के विचारण के लिए निदेश अनुशासन का अहित किए बिना उस आफिसर को किया जा सकता है, जो पैटी असम राइफल्स न्यायालय संयोजित करने के लिए सशक्त है, तब समरी असम राइफल्स न्यायालय अधिविष्ट करने वाला आफिसर इस अधिनियम की धारा 21, धारा 24 और धारा 55 में से किसी के अधीन दंडनीय किसी भी अपराध का या न्यायालय अधिविष्ट करने वाले आफिसर के विरुद्ध किसी अपराध का विचारण ऐसे निर्देश के बिना नहीं करेगा ।

(3) समरी असम राइफल्स न्यायालय इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति का, जो न्यायालय को अधिविष्ट करने वाले आफिसर के समादेश के अधीन है विचारण कर सकेगा, किन्तु किसी आफिसर या अधीनस्थ आफिसर का विचारण नहीं कर सकेगा ।

(4) समरी असम राइफल्स न्यायालय, मुत्यु या उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट परिसीमा से अधिक अवधि के कारावास के दंडादेश से भिन्न कोई भी ऐसा दंडादेश पारित कर सकेगा, जो इस अधिनियम के अधीन पारित किया जा सकता है ।

(5) उपधारा (4) में निर्दिष्ट परिसीमा, -

(क) उस दशा में एक वर्ष होगी, जिसमें असम राइफल्स न्यायालय को अधिविष्ट करने वाला आफिसर या तो कमांडेंट का पद या कोई पद, जिसे केन्द्रीय सरकार ने अधिसूचना द्वारा उसके समान घोषित कर दिया है, कम से कम तीन वर्ष की अवधि के लिए धारण कर चुका है या उक्त पदों में से किसी उच्चतर रैंक का पद धारण करता है; और

(ख) किसी अन्य दशा में तीन मास की होगी । 

97. द्वितीय विचारण का प्रतिषेध-(1) जब इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा या दंड न्यायालय द्वारा किसी अपराध से दोषमुक्त या उसके लिए दोषसिद्ध किया गया है या उसके बारे में धारा 62 या धारा 64 या धारा 65 धारा 66 के अधीन कार्यवाही की गई है तब वह उसी अपराध के लिए असम राइफल्स न्यायालय द्वारा पुनः विचारण किए जाने या उक्त धाराओं के अधीन पुनः कार्यवाही किए जाने के दायित्व के अधीन नहीं होगा ।

(2) जब इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा किसी अपराध से दोषमुक्त या उसके लिए दोषसिद्ध किया गया है या उसके बारे में धारा 62 या धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 के अधीन कार्यवाही की गई है तब वह उसी अपराध के लिए या उन्हीं तथ्यों पर किसी दंड न्यायालय द्वारा पुनः विचारण किए जाने के दायित्व के अधीन नहीं होगा ।

98. विचारण के लिए परिसीमा काल-(1) उपधारा (2) द्वारा यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति का, किसी अपराध के लिए असम राइफल्स न्यायालय द्वारा कोई विचारण तीन वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् प्रारंभ नहीं किया जाएगा और ऐसी अवधि-

(क) अपराध की तारीख से प्रारंभ होगी; या

(ख) जहां अपराध के किए जाने की जानकारी अपराध से व्यथित व्यक्ति को या कार्रवाई आरंभ करने वाले सक्षम प्राधिकारी को नहीं थी वहां उस प्रथम दिन को प्रारंभ होगी, जिस दिन ऐसे अपराध की जानकारी ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी को होती है, इनमें से जो भी पहले हो; या

(ग) जहां यह ज्ञात नहीं है कि अपराध किसने किया था, वहां उस प्रथम दिन को प्रारंभ होगी, जिस दिन अपराधी का पता, अपराध से व्यथित व्यक्ति को या कार्रवाई प्रारंभ करने वाले सक्षम प्राधिकारी को चलता है, इनमें से, जिसको भी पहले हो:

परंतु इस धारा के अधीन किसी कालावधि की संगणना करने में वह कालावधि, जिसके दौरान ऐसे अपराध में, किसी न्यायालय ने व्यादेश या आदेश द्वारा अन्वेषण की कार्यवाहियों पर रोक लगाई है, व्यादेश या आदेश के जारी रहने की अवधि, वह दिन जिसको व्यादेश जारी किया गया था या आदेश किया गया था और वह दिन, जिसको वह वापस लिया गया था, अपवर्जित होगा । 

(2) उपधारा (1) के उपबंध अभित्यजन के अपराध के लिए या धारा 24 में वर्णित अपराधों में से किसी अपराध या धारा 30 के अधीन अपराध के लिए विचारण को लागू नहीं होंगे ।

(3) उपधारा (1) के अधीन तीन वर्ष की कालावधि की संगणना करने में अपराध के कारित किए जाने के पश्चात् ऐसे व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी से बचने के लिए व्यतीत किया गया कोई समय विवर्जित होगा ।

99. उस अपराधी का विचारण, आदि, जो इस अधिनियम के अधीन नहीं रह जाता है-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी व्यक्ति द्वारा उस समय किया गया था जब कि वह इस अधिनियम के अध्यधीन था और वह ऐसे अध्यधीन नहीं रह गया है वहां उसे बल की अभिरक्षा में ऐसे ले लिया और रखा जा सकेगा तथा ऐसे अपराध के लिए ऐसे विचारित और दंडित किया जा सकेगा, मानो वह ऐसे अध्यधीन बना रहा हो ।

(2) ऐसा कोई भी व्यक्ति किसी अपराध के लिए विचारित तभी किया जाएगा जब कि उसके विचारण का प्रारंभ उसके इस अधिनियम के अध्यधीन न रह जाने के पश्चात् तीन वर्ष की कालावधि के भीतर हो जाए, अन्यथा नहीं; और ऐसी कालावधि की संगणना करने में वह समय, जिसके दौरान ऐसा व्यक्ति फरार होकर या अपने को छिपाकर गिफ्तारी से बचता है या जहां किसी अपराध की बाबत कार्यवाही का संस्थित किया जाना किसी व्यादेश या आदेश द्वारा रोक दिया गया है वहां, व्यादेश या आदेश के बने रहने की कालावधि, वह दिन जिसको वह जारी किया गया था या दिया गया था और वह दिन जिस दिन उसे वापस लिया गया था, अपवर्जित किया जाएगा :

परंतु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई भी बात अभित्यजन के अपराध के लिए या धारा 24 में वर्णित अपराधों में से किसी के लिए किसी व्यक्ति के विचारण को न तो लागू होगी और न ऐसे किसी अपराध का विचारण करने की दंड न्यायालय की अधिकारिता पर प्रभाव डालेगी, जो ऐसे न्यायालय द्वारा तथा असम राइफल्स न्यायालय द्वारा भी विचारणीय है ।

100. दंडादेश की अवधि के दौरान इस अधिनियम का लागू होना-(1) जबकि इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति को किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा कारावास का दंडादेश दिया जाता है तब यह अधिनियम उसके दंडादेश की अवधि के दौरान उसे लागू होगा, भले ही उसे बल से पदच्युत कर दिया जाता है या अन्यथा इस अधिनियम के अधीन नहीं रह गया है और उसे ऐसे रखा, हटाया या कारावासित और दंडित किया जा सकेगा, मानो वह इस अधिनियम के अध्यधीन बना रहा है ।

(2) जबकि इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति को असम राइफल्स न्यायालय द्वारा मृत्यु का दंडादेश दिया जाता है, तब यह अधिनियम उसे तब तक लागू होगा जब तक कि वह दंडादेश कार्यान्वित नहीं कर दिया जाता ।

101. विचारण का स्थान-इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम के विरुद्ध कोई अपराध करेगा, वह ऐसे अपराध के लिए किसी भी स्थान में विचारित और दंडित किया जा सकेगा ।

102. दंड न्यायालय और असम राइफल्स न्यायालय में से किसी एक का चयन-जबकि दंड न्यायालय और असम राइफल्स न्यायालय में से हर एक किसी अपराध के संबंध में अधिकारिता रखता है तब यह विनिश्चित करना कि कार्यवाहियां किस न्यायालय के समक्ष संस्थित की जाएं उस महानिदेशक या महानिरीक्षक या उप महानिरीक्षक के, जिसके समादेश में अभियुक्त व्यक्ति सेवा कर रहा है या ऐसे अन्य आफिसर के, जो विहित किया जाए, विवेकाधीन होगा और यदि वह आफिसर विनिश्चित करता है कि कार्यवाहियां असम राइफल्स न्यायालय के समक्ष संस्थित की जाएं तो यह निदेश देना कि अभियुक्त व्यक्ति को बल की अभिरक्षा में निरुद्ध किया जाए, उसके विवेकाधीन होगा ।

103. दंड न्यायालय की यह अपेक्षित करने की शक्ति कि अपराधी परिदत्त किया जाए-(1) जब अधिकारिता रखने वाले दंड न्यायालय की यह राय है कि किसी अभिकथित अपराध के बारे में कार्यवाहियां उसी के समक्ष संस्थित की जानी चाहिएं तब वह लिखित सूचना द्वारा धारा 102 में निर्दिष्ट आफिसर से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह स्वविकल्प से अपराधी को विधि के अनुसार उसके विरुद्ध कार्यवाही किए जाने के लिए निकटतम मजिस्ट्रेट को परिदत्त कर दे या तब तक के लिए कार्यवाहियों को मुल्तवी कर दे तब तक केन्द्रीय सरकार के पास निदेश लम्बित रहे ।

                (2) ऐसे हर मामले में उक्त आफिसर या तो अध्यपेक्षा के अनुपालन में अपराधी को परिदत्त कर देगा या इस प्रश्न को कि कार्यवाहियां किस न्यायालय के समक्ष संस्थित की जानी हैं, केंद्रीय सरकार के अवधारण के लिए तत्क्षण निर्देशित करेगा जिसका कि ऐसे निर्देश पर आदेश अंतिम होगा ।

अध्याय 9

असम राइफल्स न्यायालयों की प्रक्रिया

104. पीठासीन आफिसर-हर जनरल असम राइफल्स न्यायालय या पैटी असम राइफल्स न्यायालय में ज्येष्ठ सदस्य पीठासीन आफिसर होगा ।

105. विधि आफिसर-एक विधि आफिसर या यदि ऐसा कोई आफिसर उपलब्ध नहीं है तो मुख्य विधि आफिसर या विधि आफिसर द्वारा अनुमोदित कोई आफिसर, प्रत्येक जनरल असम राइफल्स न्यायालय और प्रत्येक पैटी असम राइफल्स न्यायालय में हाजिर रहेगा ।

106. आक्षेप-(1) किसी जनरल असम राइफल्स न्यायालय या पैटी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा सभी विचारणों में जैसे ही न्यायालय समवेत हो वैसे ही, पीठासीन आफिसर और सदस्यों के नाम अभियुक्त को पढ़कर सुनाए जाएंगे जिससे तब यह पूछा जाएगा कि क्या वह न्यायालयासीन किसी आफिसर द्वारा अपना विचारण किए जाने पर आक्षेप करता है ।

(2) यदि अभियुक्त ऐसे किसी आफिसर के बारे में आक्षेप करता है तो उसका आक्षेप और उस पर उस आफिसर का, जिसके बारे में आक्षेप किया गया हो, उत्तर भी सुना और अभिलिखित किया जाएगा और न्यायालय के बाकी आफिसर उस आक्षेप पर उस आफिसर की अनुपस्थिति में विनिश्चय करेंगे, जिसके बारे में आक्षेप किया गया है ।

(3) यदि आक्षेप मतदान करने के हकदार आफिसरों में से आधे या उससे अधिक आफिसरों के मतों से मंजूर किया जाए तो आक्षेप मंजूर किया जाएगा और वह सदस्य, जिसके बारे में आक्षेप किया गया है, निवृत्त हो जाएगा और उस रिक्ति को विहित रीति से किसी अन्य आफिसर से अभियुक्त के आक्षेप करने के उसी अधिकार के अध्यधीन रहते हुए भरा जाएगा ।

(4) जबकि कोई आक्षेप नहीं किया गया है या जबकि आक्षेप किया गया है और नामंजूर कर दिया गया है या ऐसे हर आफिसर का स्थान, जिसके बारे में सफलतापूर्वक आक्षेप किया गया है, किसी अन्य ऐसे आफिसर से भर दिया गया है जिसके बारे में कोई आक्षेप नहीं किया गया है या मंजूर नहीं किया गया है, तब न्यायालय विचारण के लिए अग्रसर होगा ।

107. सदस्य, विधि आफिसर और साक्षी को शपथ दिलाना-(1) इसके पूर्व कि विचारण प्रारम्भ हो हर असम राइफल्स न्यायालय के हर सदस्य को और, यथास्थिति, विधि आफिसर या धारा 105 के अधीन अनुमोदित आफिसर को विहित रीति से शपथ दिलाई जाएगी या उससे प्रतिज्ञान कराया जाएगा ।

(2) असम राइफल्स न्यायालय के समक्ष साक्ष्य देने वाले हर व्यक्ति की परीक्षा, विहित प्ररूप में सम्यक् रूप से उसे शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के पश्चात् की जाएगी ।

(3) उपधारा (2) के उपबंध वहां लागू नहीं होंगे, जहां कि साक्षी बारह वर्ष से कम आयु का बालक है और असम राइफल्स न्यायालय की यह राय है कि यद्यपि साक्षी सत्य बोलने के कर्तव्य को समझता है तथापि वह शपथ या प्रतिज्ञान की प्रकृति को नहीं समझता ।

108. सदस्यों द्वारा मतदान-(1) उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए यह है कि असम राइफल्स न्यायालय का हर विनिश्चय स्पष्ट बहुमत से पारित किया जाएगा; और जहां या तो निष्कर्ष पर या दंडादेश पर, मतसाम्य हैं वहां विनिश्चय अभियुक्त के पक्ष में होगा ।           

(2) जनरल असम राइफल्स न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश उस न्यायालय के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की सहमति के बिना पारित नहीं किया जाएगा ।

(3) आक्षेप या निष्कर्ष या दंडादेश के मामलों से भिन्न मामलों में पीठासीन आफिसर का निर्णायक मत होगा ।

109. साक्ष्य के बारे में साधारण नियम-भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1), इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, असम राइफल्स न्यायालय के समक्ष की सब कार्यवाहियों को लागू होगा ।

110. न्यायिक अवेक्षा-असम राइफल्स न्यायालय किसी ऐसी बात की न्यायिक अवेक्षा कर सकेगा, जो बल के आफिसरों के रूप में सदस्यों के साधारण ज्ञान में होती है ।

111. साक्षियों को समन करना-(1) यथास्थिति, संयोजक आफिसर, असम राइफल्स न्यायालय का पीठासीन आफिसर या जांच न्यायालय या विधि आफिसर या धारा 105 के अधीन अनुमोदित आफिसर या अभियुक्त व्यक्ति का कमांडेंट स्वहस्ताक्षरित समन द्वारा किसी व्यक्ति की, या तो साक्ष्य देने के लिए या कोई दस्तावेज या अन्य वस्तु पेश करने के लिए, उस समय और स्थान पर जो समन में वर्णित किया जाए, हाजिरी की अपेक्षा कर सकेगा ।

(2) किसी साक्षी की दशा में, जो इस अधिनियम के अधीन है, समन उसके कमांडेंट को भेजा जाएगा और वह आफिसर उस पर तद्नुसार उसकी तामील करेगा ।

(3) किसी अन्य साक्षी की दशा में, समन उस मजिस्ट्रेट को भेजा जाएगा जिसकी अधिकारिता के भीतर वह हो या निवास करता हो और वह मजिस्ट्रेट समन को ऐसे कार्यान्वित करेगा, मानो साक्षी उस मजिस्ट्रेट के न्यायालय में आने के लिए अपेक्षित हो ।

112. पेश किए जाने से छूट-प्राप्त दस्तावेज-(1) धारा 111 की कोई भी बात भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 123 और धारा 124 के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली अथवा डाक या तार प्राधिकारियों की अभिरक्षा में के किसी पत्र, पोस्टकार्ड, तार या अन्य दस्तावेज को लागू होने वाली नहीं समझी जाएगी ।

(2) यदि ऐसी अभिरक्षा में का कोई दस्तावेज मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक महानगर मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय में से किसी की राय में किसी असम राइफल्स न्यायालय के प्रयोजन के लिए वांछनीय है तो वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय, यथास्थिति, डाक या तार प्राधिकारियों से अपेक्षा कर सकेगा कि वे ऐसे दस्तावेज ऐसे व्यक्ति को परिदत्त करे, जिसे वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय निदिष्ट करे ।

(3) यदि ऐसे कोई दस्तावेज किसी अन्य मजिस्ट्रेट की या किसी पुलिस आयुक्त या जिला पुलिस अधीक्षक की राय में ऐसे किसी प्रयोजन के लिए वांछित हैं तो वह, यथास्थिति, डाक या तार प्राधिकारियों से अपेक्षा कर सकेगा कि वे ऐसे दस्तावेज की तलाश कराएं और ऐसे किसी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय के आदेश तक रोके रखें ।

113. साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन-(1) जब कभी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा किए जा रहे विचारण के अनुक्रम में न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि न्याय के उद्देश्यों के लिए यह आवश्यक है कि साक्षी की परीक्षा की जाए और ऐसे साक्षी की हाजिरी इतने विलंब, व्यय या असुविधा के बिना, जितना मामले की परिस्थितियों में अनुचित होगा, नहीं कराई जा सकती है, तब ऐसा न्यायालय मुख्य विधि आफिसर को इस वास्ते संबोधित कर सकेगा कि उस साक्षी का साक्ष्य लेने के लिए कमीशन निकाला जाए ।

(2) तब, यदि मुख्य विधि आफिसर आवश्यक समझे तो, वह साक्षी का साक्ष्य लेने के लिए किसी ऐसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के नाम, जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर वह साक्षी निवास करता है, कमीशन निकाल सकेगा ।

(3) वह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी का न्यायिक मजिस्ट्रेट जिसके नाम कमीशन निकाला गया है या यदि वह न्यायिक मजिस्ट्रेट है तो, वह या ऐसा प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट जिसे उसने इस निमित्त नियुक्त किया है, साक्षी को अपने समक्ष आने के लिए समन करेगा और उसी रीति से उसका साक्ष्य लिखेगा और इस प्रयोजन के लिए उन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा, जो दंड प्रकिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के अधीन वारंट मामलों के विचारणों के लिए हैं ।

(4) जबकि साक्षी किसी जनजाति क्षेत्र में या भारत के बाहर किसी स्थान पर निवास करता है, तब कमीशन उस रीति में निकाला जा सकेगा जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के अध्याय 23 के उपशीर्ष ख-साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन" में विनिर्दिष्ट है ।

114. साक्षी की कमीशन पर परीक्षा-(1) किसी भी ऐसे मामले में, जिसमें धारा 113 के अधीन कमीशन निकाला जाता है, अभियोजक और अभियुक्त व्यक्ति क्रमशः कोई ऐसे लिखित परिप्रश्न भेज सकेंगे जिन्हें न्यायालय विवाद्यक से सुसंगत समझे और ऐसे कमीशन का निष्पादन करने वाला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट साक्षी की परीक्षा ऐसे परिप्रश्नों पर करेगा ।

(2) अभियोजक और अभियुक्त व्यक्ति ऐसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष काउंसेल की मार्फत या उस दशा के सिवाय जबकि अभियुक्त व्यक्ति अभिरक्षा में है, स्वयं उपसंजात हो सकेंगे और उक्त साक्षी की, यथास्थिति, परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और पुनःपरीक्षा कर सकेंगे ।

(3) धारा 113 के अधीन निकाले गए कमीशन के सम्यक् रूप से निष्पादित किए जाने के पश्चात्, उसे उस साक्षी के अभिसाक्ष्य सहित, जिसकी उसके अधीन परीक्षा की गई है, मुख्य विधि आफिसर को लौटा दिया जाएगा ।

(4) उपधारा (3) के अधीन लौटाए गए कमीशन और अभिसाक्ष्य की प्राप्ति पर, मुख्य विधि आफिसर उसे उस न्यायालय को, जिसकी प्रेरणा पर वह कमीशन निकाला गया था या, यदि वह न्यायालय विघटित कर दिया गया है तो, अभियुक्त व्यक्ति के विचारण के लिए संयोजित किसी अन्य न्यायालय को अग्रेषित कर देगा और वह कमीशन, तत्संबंधी विवरणी और अभिसाक्ष्य अभियोजक और अभियुक्त व्यक्ति द्वारा निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे और सब न्यायसंगत अपवादों के अध्यधीन रहते हुए, या तो अभियोजक द्वारा या अभियुक्त द्वारा मामले में साक्ष्य में पढ़े जा सकेंगे और न्यायालय की कार्यवाही का भाग होंगे ।

(5) हर मामले में, जिसमें धारा 113 के अधीन कमीशन निकाला गया हो, विचारण ऐसे विनिर्दिष्ट समय के लिए, जो कमीशन के निष्पादन और लौटाए जाने के लिए युक्तियुक्त रूप से पर्याप्त है, स्थगित किया जा सकेगा ।

115. ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्धि, जिसका आरोप लगाया गया हो-वह व्यक्ति जिस पर असम राइफल्स न्यायालय के समक्ष-

(क) अभित्यजन का आरोप लगाया गया है, अभित्यजन करने का प्रयत्न करने या छुट्टी के बिना अनुपस्थित होने का दोषी ठहराया जा सकेगा;

(ख) अभित्यजन करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है, छुट्टी बिना अनुपस्थित होने का दोषी ठहराया जा सकेगा;

(ग) यह आरोप कि उसने आपराधिक बल का प्रयोग किया है, लगाया गया है, हमले का दोषी ठहराया जा सकेगा;

(घ) धमकी भरी भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है, अनधीनता द्योतक भाषा का प्रयोग करने का दोषी ठहराया जा सकेगा;

(ङ) धारा 39 के खंड (क), खंड (ख), खंड (ग) और खंड (घ) में विनिर्दिष्ट अपराधों में से किसी एक का आरोप लगाया गया है, इन अपराधों में से किसी ऐसे अन्य अपराध का दोषी ठहराया जा सकेगा, जिसका उस पर आरोप लगाया जा सकता था;

(च) धारा 55 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का आरोप लगाया गया है, किसी ऐसे अन्य अपराध का दोषी ठहराया जा सकेगा जिसका दोषी वह तब ठहराया जा सकता था जब दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबन्ध लागू होते;

(छ) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप लगाया गया है, अपराध के ऐसी परिस्थितियों में किए जाने का, जिनमें अधिक कठोर दंड अंतर्वलित है, सबूत न होने पर उसी अपराध के ऐसी परिस्थितियों में, जिनमें कम कठोर दंड अंतर्वलित हैं, किए जाने का दोषी ठहराया जा सकेगा;

(ज) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप लगाया गया है, उस अपराध के प्रयत्न का या दुष्प्रेरण का दोषी ठहराया जा सकेगा, चाहे प्रयत्न या दुष्प्रेरण का आरोप पृथक्तः न लगाया गया हो ।

116. हस्ताक्षरों के बारे में उपधारणा-इस अधिनियम के अधीन किसी भी कार्यवाही में कोई भी ऐसा आवेदन, प्रमाणपत्र, वारंट, उत्तर या अन्य दस्तावेज, जिसका सरकार की सेवा में के किसी आफिसर द्वारा हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है, पेश किए जाने पर यह बात जब तक तत्प्रतिकूल साबित न कर दी जाए, उपधारित की जाएगी कि वह उस व्यक्ति द्वारा और उस हैसियत में सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित की गई है, जिसके द्वारा और जिस हैसियत में उसका हस्ताक्षरित किया जाना तात्पर्यित है ।

117. अभ्यावेशन पत्र-(1) कोई अभ्यावेशन पत्र, जो किसी अभ्यावेशन आफिसर द्वारा हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है, इस अधिनियम के अधीन की कार्यवाहियों में इस बात का साक्ष्य होगा कि अभ्यावेशित व्यक्ति ने प्रश्नों के वे उत्तर दिए थे, जिनका उसके द्वारा दिया जाना उसमें व्यपदिष्ट है ।

(2) ऐसे व्यक्ति का अभ्यावेशन उसके मूल अभ्यावेशन पत्र या उसकी ऐसी प्रतिलिपि, जो अभ्यावेशन पत्र को अभिरक्षा में रखने वाले आफिसर द्वारा शुद्ध प्रतिलिपि के रूप में प्रमाणित होनी तात्पर्यित है, पेश करके साबित किया जा सकेगा ।

118. कतिपय दस्तावेजों के बारे में उपधारणा-(1) बल की किसी यूनिट में किसी व्यक्ति के सेवा में होने या ऐसी यूनिट से किसी व्यक्ति की पदच्युति किए जाने, पद से हटाए जाने या उन्मोचन के संबंध में या किसी व्यक्ति की इन परिस्थितियों के बारे में कि उसने बल की किसी यूनिट में सेवा नहीं की है या वह उसका अंग नहीं था, कोई पत्र, विवरणी या अन्य दस्तावेज उस दशा में, जिसमें कि उसका केन्द्रीय सरकार या महानिदेशक द्वारा या उसकी ओर से या किसी विहित आफिसर द्वारा हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है, उन तथ्यों का साक्ष्य होगी जो ऐसे पत्र, विवरणी या अन्य दस्तावेज में कथित है ।

(2) असम राइफल्स सूची या राजपत्र में, जिसका प्राधिकार से प्रकाशित होना तात्पर्यित है, उल्लिखित आफिसरों, अधीनस्थ आफिसरों की प्रास्थिति तथा रैंक का और उनके द्वारा धारित किसी नियुक्ति का तथा बल की उस बटालियन, यूनिट या शाखा का, जिसके वे अंग हैं, साक्ष्य होगा ।

(3) जहां इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अनुसरण में या अन्यथा शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में कोई अभिलेख किसी बटालियन पुस्तक में लेखबद्ध किया गया है और कमांडेंट द्वारा या उस आफिसर द्वारा, जिसका कर्तव्य ऐसा अभिलेख अभिलिखित करना है, हस्ताक्षरित हुआ तात्पर्यित है, वहां ऐसा अभिलेख उन तथ्यों का, जो उसमें कथित हैं; साक्ष्य होगा ।

(4) किसी बटालियन पुस्तक में के किसी अभिलेख की प्रतिलिपि, जो ऐसी पुस्तक को अभिरक्षा में रखने वाले आफिसर द्वारा शुद्ध प्रतिलिपि के रूप में प्रमाणित होनी तात्पर्यित है, ऐसे अभिलेख का साक्ष्य होगी ।

(5) जहां कि इस अधिनियम के अध्यधीन, जो किसी व्यक्ति का विचारण, अभित्यजन के या छुट्टी बिना अनुपस्थिति के आरोप पर हो रहा है और ऐसे व्यक्ति ने किसी आफिसर या इस अधिनियम के अध्यधीन ऐसे अन्य व्यक्ति या बल के किसी यूनिट की अभिरक्षा में अपने को अभ्यर्पित कर दिया है या उसे ऐसे आफिसर या व्यक्ति द्वारा पकड़ लिया गया है, वहां ऐसा प्रमाणपत्र, जिसका, यथास्थिति, ऐसे आफिसर द्वारा या उस यूनिट के, जिसका कि वह व्यक्ति अंग है, कमांडेंट द्वारा हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है और जिसमें ऐसे अभ्यर्पण या पकड़े जाने का तथ्य, तारीख और स्थान तथा यह बात कि उसका पहनावा कैसा था, ऐसी कथित बातों का साक्ष्य होगा ।

(6) जहां कि इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति का विचारण, अभित्यजन या छुट्टी के बिना अनुपस्थिति के आरोप पर हो रहा है और ऐसे व्यक्ति ने किसी ऐसे पुलिस आफिसर की, जो किसी पुलिस थाने के भारसाधक आफिसर की पंक्ति से नीचे का नहीं है, अभिरक्षा में अपने को अभ्यर्पित कर दिया है या वह ऐसे आफिसर द्वारा पकड़ लिया गया है, वहां ऐसा प्रमाणपत्र, जिसका ऐसे पुलिस आफिसर द्वारा हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है और जिसमें ऐसे अभ्यर्पण या पकड़े जाने का तथ्य, तारीख और स्थान तथा यह बात कि उसका पहनावा कैसा था कथित है, ऐसी कथित बातों का साक्ष्य होगा ।

(7) कोई दस्तावेज, जिसका किसी सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञ द्वारा हस्ताक्षरित ऐसी रिपोर्ट होना तात्पर्यित है, जो इस अधिनियम के अधीन की किसी कार्यवाही के अनुक्रम में ऐसे किसी पदार्थ या चीज के बारे में है, जो परीक्षा या विश्लेषण और रिपोर्ट के लिए उसे सम्यक् रूप से भेजी गई थी, इस अधिनियम के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त की जा सकेगी ।

(8) असम राइफल्स न्यायालय, यदि वह ठीक समझे, अपनी रिपोर्ट की विषयवस्तु के बारे में उपधारा (7) में निर्दिष्ट विशेषज्ञ को आहूत कर सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा ।

(9) जहां असम राइफल्स न्यायालय द्वारा कोई ऐसा विशेषज्ञ आहूत किया जाता है और वह स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ है, वहां वह, जब तक न्यायालय ने स्पष्टतः उसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए निदेश न दे दिया हो, न्यायालय में उपस्थित होने के लिए उसके साथ कार्य कर रहे किसी जिम्मेदार अधिकारी को भेज सकेगा, यदि ऐसा भेजा गया अधिकारी मामले के तथ्यों से अवगत है और अपनी ओर से न्यायालय में समाधानप्रद रूप से अभिसाक्ष्य देता है ।

(10) उपधारा (7), उपधारा (8) और उपधारा (9) के उपबंध, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 293 की उपधारा (4), में यथाविनिर्दिष्ट सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञों को लागू होंगे ।

119. अभियुक्त द्वारा सरकारी आफिसर को निर्देश-(1) यदि अभित्यजन के या छुट्टी बिना अनुपस्थिति के, छुट्टी के उपरान्त अनुपस्थिति के या सेवा के लिए बुलाए जाने पर वापस न आने के लिए किए जा रहे किसी विचारण में अभियुक्ति व्यक्ति अपनी अप्राधिकृत अनुपस्थिति के लिए किसी पर्याप्त या युक्तियुक्त प्रतिहेतु का कथन अपनी प्रतिरक्षा में करता है और उसके समर्थन में सरकार की सेवा में के किसी आफिसर के प्रति निर्देश करता है या यदि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिरक्षा में के उक्त कथन के किसी ऐसे आफिसर द्वारा साबित या न साबित किए जाने की संभावना है तो न्यायालय ऐसे आफिसर को लिखेगा और कार्यवाहियां को तब तक के लिए स्थगित कर देगा जब तक उसका उत्तर प्राप्त न हो जाए ।

(2) ऐसे निर्देशित आफिसर का लिखित उत्तर, यदि वह उसके द्वारा हस्ताक्षरित हो, साक्ष्य में लिया जाएगा और उसका वैसा ही प्रभाव होगा मानो वह न्यायालय के समक्ष शपथ पर दिया गया हो ।

(3) यदि ऐसे उत्तर की प्राप्ति के पूर्व न्यायालय का विघटन हो जाता है या यदि न्यायालय इस धारा के उपबंधों का अनुपालन करने का लोप करता है तो संयोजक आफिसर, कार्यवाहियों को स्वविकेकानुसार बातिल कर सकेगा और नए विचारण का आदेश दे सकेगा । 

120. पूर्व दोषसिद्धियों और साधारण शील का साक्ष्य-(1) जब कि इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति को, असम राइफल्स न्यायालय ने किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया हो तब वह असम राइफल्स न्यायालय, ऐसे व्यक्ति की किसी असम राइफल्स न्यायालय या किसी दंड न्यायालय द्वारा की गई पूर्व दोषसिद्धियों की या धारा 62 या धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 के अधीन किए गए किसी पूर्व दंड अधिनिर्णय की जांच कर सकेगा और साक्ष्य प्राप्त तथा अभिलिखित कर सकेगा और इसके अतिरिक्त ऐसे व्यक्ति के साधारण शील की तथा ऐसी बातों की, जो विहित की जाएं, जांच कर सकेगा और उन्हें अभिलिखित कर सकेगा ।

(2) इस धारा के अधीन प्राप्त किया गया साक्ष्य या तो मौखिक या असम राइफल्स न्यायालय की पुस्तकों में की या अन्य शासकीय अभिलेखों में की प्रविष्टियों या उनमें से प्रमाणित उद्धरणों के रूप में हो सकेगा और विचारित व्यक्ति को, विचारण के पूर्व यह सूचना देना आवश्यक नहीं होगा कि उसकी पूर्व दोषसिद्धियों या शील के बारे में साक्ष्य प्राप्त किया जाएगा ।

(3) यदि समरी असम राइफल्स न्यायालय में, विचारण करने वाला आफिसर ठीक समझे तो वह अपराधी के विरुद्ध की किन्हीं पूर्व दोषसिद्धियों को, उसके साधारण शील को और ऐसी अन्य बातों को जो विहित की जाएं, इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन साबित किए जाने की अपेक्षा करने के बदले में उन्हें अपने ज्ञान के रूप में अभिलिखित कर सकेगा ।

121. अभियुक्त का पागलपन-(1) जब कभी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा विचारण के अनुक्रम में न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि वह व्यक्ति, जिस पर आरोप है कि चित्तविकृति के कारण अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ है या कि उसने अभिकथित कार्य तो किया था किन्तु वह चित्तविकृति के कारण उस कार्य की प्रकृति को जानने में या यह जानने में कि वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, असमर्थ था, तब न्यायालय तद्नुसार निष्कर्ष अभिलिखित करेगा ।

(2) न्यायालय का पीठासीन आफिसर या समरी असम राइफल्स न्यायालय की दशा में, विचारण करने वाला आफिसर तत्काल मामले की रिपोर्ट, यथास्थिति, पुष्टिकर्ता आफिसर को या उस प्राधिकारी को करेगा, जो उसके निष्कर्ष पर धारा 137 के अधीन कार्यवाही करने के लिए सशक्त हो ।

(3) यदि पुष्टिकर्ता आफिसर, जिसको मामले की रिपोर्ट उपधारा (2) के अधीन की जाती है, निष्कर्ष की पुष्टि नहीं करता है तो वह अभियुक्त व्यक्ति का, उस अपराध के लिए जिसका उस पर आरोप लगाया गया था, विचारण उसी या किसी अन्य असम राइफल्स न्यायालय द्वारा कराने के लिए कार्यवाही कर सकेगा ।

(4) वह प्राधिकारी, जिसको समरी असम राइफल्स न्यायालय के निष्कर्ष की रिपोर्ट उपधारा (2) के अधीन की जाती है और पुष्टिकर्ता आफिसर, जो ऐसे मामले में, जिसकी रिपोर्ट उसको की गई है, निष्कर्ष की पुष्टि करता है, अभियुक्त व्यक्ति को विहित रीति से अभिरक्षा में रखे जाने का आदेश देगा तथा मामले की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार के आदेशों के लिए करेगा ।

(5) उपधारा (4) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर, केन्द्रीय सरकार, अभियुक्त व्यक्ति को किसी पागलखाने में या सुरक्षित अभिरक्षा के अन्य उपयुक्त स्थान में निरुद्ध किए जाने का आदेश दे सकेगी ।

122. पागल अभियुक्त का आगे चल कर विचारण के उपयुक्त हो जाना-जहां कि कोई अभियुक्त व्यक्ति चित्तविकृति के कारण अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ पाए जाने पर धारा 121 के अधीन अभिरक्षा या निरोध में है, वहां इस निमित्त विहित कोई आफिसर-

(क) यदि ऐसा व्यक्ति धारा 121 की उपधारा (4) के अधीन अभिरक्षा में है तो किसी चिकित्सीय आफिसर की इस रिपोर्ट पर कि वह अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है; या

(ख) यदि ऐसा व्यक्ति धारा 121 की उपधारा (5) के अधीन किसी जेल में निरुद्ध है तो कारागारों के महानिरीक्षक के इस प्रमाणपत्र पर और यदि ऐसा व्यक्ति उक्त उपधारा के अधीन किसी पागलखाने में निरुद्ध है तो उस पागलखाने के परिदर्शकों में से किन्हीं दो या अधिक के इस प्रमाणपत्र पर और यदि उस उपधारा के अधीन वह किसी अन्य स्थान में निरुद्ध है तो विहित प्राधिकारी के इस प्रमाणपत्र पर कि वह अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है,

उस व्यक्ति का विचारण उस अपराध के लिए, जिसका उस पर मूलतः आरोप लगाया गया था, उसी या किसी अन्य असम राइफल्स न्यायालय द्वारा या यदि अपराध सिविल अपराध है तो, दंड न्यायालय द्वारा कराने के लिए कार्यवाही कर सकेगा ।

123. धारा 122 के अधीन आदेशों का केन्द्रीय सरकार को पारेषण-ऐसे हर आदेश की एक प्रतिलिपि जो अभियुक्त के विचारण के लिए किसी आफिसर द्वारा धारा 122 के अधीन किया गया हो, तत्काल केंद्रीय सरकार को भेज दी जाएगी ।

124. पागल अभियुक्त की निर्मुक्ति-जहां कोई व्यक्ति धारा 121 की उपधारा (4) के अधीन अभिरक्षा में या उस धारा की उपधारा (5) के अधीन निरोध में है वहां-

(क) यदि ऐसा व्यक्ति उक्त उपधारा (4) के अधीन अभिरक्षा में है तो किसी चिकित्सीय आफिसर की ऐसी रिपोर्ट पर, या 

(ख) यदि ऐसा व्यक्ति उक्त उपधारा (5) के अधीन निरुद्ध है तो धारा 122 के खंड (ख) में वर्णित प्राधिकारियों में से किसी के ऐसे प्रमाणपत्र पर कि उस आफिसर या प्राधिकारी के विचार में उस व्यक्ति की निर्मुक्ति उसके स्वयं अपने आप को या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति करने के संकट के बिना की जा सकती है,

तो केंद्रीय सरकार यह आदेश दे सकेगी कि ऐसे व्यक्ति को निर्मुक्त कर दिया जाए या अभिरक्षा में निरुद्ध रखा जाए या, यदि उसे पहले ही किसी ऐसे लोक पागलखाने में नहीं भेज दिया गया है तो उसे लोक पागलखाने में भेज दिया जाए ।

125. पागल अभियुक्त का उसके नातेदारों को परिदान-जहां कि ऐसे व्यक्ति का, जो धारा 121 की उपधारा (4) के अधीन अभिरक्षा में या उस धारा की उपधारा (5) के अधीन निरोध में है, कोई नातेदार या मित्र वांछा करे कि उसकी देखरेख और अभिरक्षा में रखे जाने के लिए उसको परिदत्त कर दिया जाए, वहां केंद्रीय सरकार, ऐसे नातेदार या मित्र के आवेदन पर और उस सरकार के समाधानप्रद रूप में उसके द्वारा ऐसी प्रतिभूति दिए जाने पर कि सौंपे गए व्यक्ति की समुचित देखरेख की जाएगी और वह अपने आप को या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति करने से निवारित रखा जाएगा तथा परिदत्त व्यक्ति को ऐसे आफिसर के समक्ष और ऐसे समयों पर और स्थान पर, जो केंद्रीय सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए जाएं, निरीक्षण के लिए पेश किया जाएगा, ऐसे व्यक्ति को ऐसे नातेदार या मित्र को परिदत्त किए जाने का आदेश दे सकेगी ।

126. विचारण के लंबित रहने तक संपत्ति की अभिरक्षा और व्ययन के लिए आदेश-जब कि कोई संपत्ति, जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है या जो कोई अपराध करने के लिए उपयोग में लाई गई प्रतीत होती है, किसी असम राइफल्स न्यायालय के समक्ष विचारण के दौरान पेश की जाएं, तब न्यायालय विचारण की समाप्ति होने तक के लिए ऐसी सम्पत्ति की उचित अभिरक्षा के लिए ऐसा आदेश कर सकेगा, जो वह ठीक समझे, और यदि संपत्ति शीघ्रतया या प्रकृत्या क्षयशील है तो, ऐसा साक्ष्य जो वह आवश्यक समझे अभिलिखित करने के पश्चात् उसे बेच देने या अन्यथा व्ययनित करने का आदेश दे सकेगा ।

127. जिस संपत्ति के बारे में अपराध किया गया है उसके व्ययन के लिए आदेश-(1) किसी असम राइफल्स न्यायालय के समक्ष विचारण की समाप्ति के पश्चात्, वह न्यायालय या उस असम राइफल्स न्यायालय के निष्कर्ष या दंडादेश की पुष्टि करने वाला आफिसर या ऐसे आफिसर से वरिष्ठ कोई प्राधिकारी या ऐसे समरी असम राइफल्स न्यायालय की दशा में, जिसके निष्कर्ष या दण्डादेश की पुष्टि अपेक्षित नहीं है, ऐसा आफिसर जो उस उप महानिरीक्षक के रैंक से नीचे का नहीं है जिसके कमान में विचारण किया गया था, उस संपत्ति या दस्तावेज के, जो उस न्यायालय के समक्ष पेश की गई है या उसकी अभिरक्षा में है या जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है या किया गया है या जो कोई अपराध करने के लिए उपयोग में लाई गई है, नाश द्वारा, समपहरण द्वारा, किसी व्यक्ति को परिदान द्वारा, जो उसके कब्जे का हकदार होने का दावा करता है या अन्यथा व्ययनित करने का ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे । 

(2) जहां कि उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश ऐसी संपत्ति के बारे में किया गया हो, जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, वहां वह आदेश करने वाले प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित और प्रमाणित उस आदेश की प्रतिलिपि, चाहे विचारण भारत के अंदर हुआ हो या न हुआ हो, ऐसे मजिस्ट्रेट को भेजी जाएगी, जिसकी अधिकारिता में वह संपत्ति उस समय स्थित हो और तब वह मजिस्ट्रेट उस आदेश को ऐसे कार्यान्वित कराएगा मानो वह दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंधों के अधीन उसके द्वारा पारित आदेश हो ।

(3) इस धारा में संपत्ति" शब्द के अंतर्गत, उस संपत्ति की दशा में जिसके बारे में अपराध किया गया प्रतीत होता है, न केवल वह सम्पत्ति आती है जो मूलतः किसी व्यक्ति के कब्जे में या नियंत्रण में रही है, वरन् वह सम्पत्ति भी आती है जिसमें या जिसके बदले में उसका संपरिवर्तन या विनिमय किया गया है और वह सब कुछ आता है जो ऐसे संपरिवर्तन या विनिमय द्वारा तुरंत या अन्यथा अर्जित किया गया है ।

128. इस अधिनियम के अधीन की कार्यवाहियों के संबंध में असम राइफल्स न्यायालय की शक्तियां-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किया गया असम राइफल्स न्यायालय द्वारा विचारण भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा और असम राइफल्स न्यायालय, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 345 और धारा 346 के अर्थ में न्यायालय समझा जाएगा ।

अध्याय 10

पुष्टि और पुनरीक्षण

129. निष्कर्ष और दंडादेश का तभी विधिमान्य होना जब उसकी पुष्टि कर दी जाए-किसी जनरल असम राइफल्स न्यायालय या पैटी असम राइफल्स न्यायालय का कोई भी निष्कर्ष या दंडादेश वहीं तक विधिमान्य होगा, जहां तक कि वह इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार पुष्ट कर दिया गया हो ।

130. जनरल असम राइफल्स न्यायालय का निष्कर्ष और दंडादेश पुष्ट करने की शक्ति-जनरल असम राइफल्स न्यायालय के निष्कर्ष और दंडादेश केन्द्रीय सरकार या किसी ऐसे आफिसर द्वारा जिसे केन्द्रीय सरकार के अधिपत्र द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया हो, पुष्ट किए जा सकेंगे ।

131. पैटी असम राइफल्स न्यायालय का निष्कर्ष और दंडादेश पुष्ट करने की शक्ति-पैटी असम राइफल्स न्यायालयों के निष्कर्ष और दंडादेश जनरल असम राइफल्स न्यायालय को संयोजित करने की शक्ति रखने वाले आफिसर द्वारा या किसी ऐसे आफिसर द्वारा जो ऐसे आफिसर के अधिपत्र द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया हो, पुष्ट किए जा सकेंगे ।

132. पुष्टिकर्ता प्राधिकारी की शक्तियों की परिसीमा-धारा 130 या धारा 131 के अधीन निकाले गए अधिपत्र में ऐसे निर्बंधन, आरक्षण या शर्तें हो सकेंगी, जो उसे निकालने वाला प्राधिकारी ठीक समझे ।

133. दंडादेशों में कमी करने, उनका परिहार करने या उनका लघुकरण करने की पुष्टिकर्ता प्राधिकारी की शक्ति-ऐसे निर्बंधनों, आरक्षणों या शर्तों के, जो धारा 130 या धारा 131 के अधीन निकाले गए किसी अधिपत्र में हों, अधीन रहते हुए पुष्टिकर्ता प्राधिकारी किसी असम राइफल्स न्यायालय के दंडादेश की पुष्टि करते समय उस दंड में, जो उसके द्वारा अधिनिर्णीत किया गया है, कमी कर सकेगा या उसका परिहार कर सकेगा या उस दंड को धारा 57 में अधिकथित मापमान में के निम्नतर दंड या दंडों में लघुकृत कर सकेगा ।

134. पोत के फलक पर के निष्कर्षों और दंडादेशों का पुष्ट किया जाना-जबकि इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति को, किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा उस समय विचारित और दंडादिष्ट किया गया है जबकि वह पोत के फलक पर है तब निष्कर्ष और दंडादेश, वहां तक जहां तक कि पोत पर उसे पुष्ट या निष्पादित न किया गया हो, ऐसी रीति से पुष्ट और निष्पादित किया जा सकेगा मानो ऐसे व्यक्ति का विचारण उसके उतरने के पत्तन पर किया गया हो ।

135. निष्कर्ष या दंडादेश का पुनरीक्षण-(1) असम राइफल्स न्यायालय का निष्कर्ष या दंडादेश जिसकी पुष्टि अपेक्षित है, पुष्टिकर्ता आफिसर के आदेश से एक बार पुनरीक्षित किया जा सकेगा और ऐसे पुनरीक्षण पर न्यायालय, यदि वह पुष्टिकर्ता आफिसर द्वारा ऐसा करने के लिए निदेशित किया गया है तो अतिरिक्त साक्ष्य ले सकेगा ।

(2) पुनरीक्षण पर, न्यायालय उन्हीं आफिसरों से, जो उस समय उपस्थित थे, जबकि मूल विनिश्चय पारित किया गया था, मिलकर गठित होगा, जब तक कि उन आफिसरों में से कोई अपरिवर्जनीय रूप से अनुपस्थित न हो ।

(3) ऐसी अपरिवर्जनीय अनुपस्थिति की दशा में उसका हेतुक कार्यवाही में सम्यक् रूप से प्रमाणित किया जाएगा और न्यायालय पुनरीक्षण करने के लिए अग्रसर होगा:

परन्तु यह तब जबकि, यदि वह जनरल असम राइफल्स न्यायालय है तो पांच आफिसरों से या यदि वह पैटी असम राइफल्स न्यायालय है तो तीन आफिसरों से मिलकर, गठित हो ।

136. समरी असम राइफल्स न्यायालय का निष्कर्ष और दंडादेश-(1) उपधारा (2) में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, समरी असम राइफल्स न्यायालय के निष्कर्ष और दंडादेश की पुष्टि अपेक्षित नहीं होगी, बल्कि उसे तत्काल कार्यान्वित किया जा सकेगा ।

(2) यदि विचारण करने वाला आफिसर उप कमांडेंट के रैंक का है या धारा 96 की उपधारा (5) के खंड (क) के अधीन उक्त रैंक के समान घोषित रैंक का है या उससे निम्नतर रैंक का है और ऐसा रैंक पांच वर्ष से कम की अवधि तक धारण कर चुका है तो वह, सक्रिय ड्यूटी पर के सिवाय, किसी दंडादेश को तब तक क्रियान्वित नहीं करेगा जब तक कि उस पर ऐसे आफिसर का अनुमोदन प्राप्त न हो गया हो, जो उप महानिरीक्षक के रैंक से नीचे का नहीं है ।

137. समरी असम राइफल्स न्यायालय की कार्यवाहियों का पारेषण-हर समरी असम राइफल्स न्यायालय की कार्यवाहियां उस आफिसर को, जो उप महानिरीक्षक के रैंक से नीचे का नहीं है और जिसकी कमान में विचारण किया गया था या विहित आफिसर को अविलंब भेजी जाएंगी और ऐसा आफिसर या महानिदेशक या उसके द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया कोई आफिसर, मामले के गुणागुण पर आधारित कारणों से, न कि केवल तकनीकी आधारों पर, कार्यवाहियों को अपास्त कर सकेगा या उस दंडादेश को किसी अन्य ऐसे दंडादेश तक  घटा सकेगा, जो कि वह न्यायालय पारित कर सकता था ।

138. कतिपय मामलों में निष्कर्ष या दंडादेश का परिवर्तित किया जाना-(1) जहां कि किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा दोषी होने का ऐसा निष्कर्ष, जिसकी पुष्टि हो चुकी है या जिसकी पुष्टि होनी अपेक्षित नहीं है, किसी कारण से अविधिमान्य पाया जाता है या साक्ष्य से उसका समर्थन नहीं होता है वहां वह प्राधिकारी जिसे, यदि निष्कर्ष विधिमान्य होता, दंडादेश द्वारा अधिनिर्णीत दंड को लघुकृत करने की शक्ति धारा 150 के अधीन होती, नया निष्कर्ष प्रतिस्थापित कर सकेगा और ऐसे निष्कर्ष में विनिर्दिष्ट या अंतर्वलित अपराध के लिए दंडादेश पारित कर सकेगा :

परंतु ऐसा कोई प्रतिस्थापन तभी किया जाएगा जब असम राइफल्स न्यायालय द्वारा उस आरोप पर ऐसा निष्कर्ष विधिमान्यतया दिया जा सकता था और जब यह प्रतीत हो कि उक्त अपराध साबित करने वाले तथ्यों के बारे में असम राइफल्स न्यायालय का समाधान अवश्य हो जाना चाहिए था, अन्यथा नहीं ।

(2) जहां कि असम राइफल्स न्यायालय द्वारा पारित ऐसा दंडादेश, जिसकी पुष्टि हो चुकी है या जिसकी पुष्टि होनी अपेक्षित नहीं है, किंतु जो उपधारा (1) के अधीन प्रतिस्थापित नए निष्कर्ष के अनुसरण में पारित दंडादेश नहीं है, किसी कारण से अविधिमान्य पाया जाता है, वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी विधिमान्य दंडादेश पारित कर सकेगा ।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन पारित दंडादेश द्वारा अधिनिर्णीत दंड, दंडों के मापमान में उस दंड से उच्चतर नहीं होगा और न उस दंड से अधिक होगा जो उस दंडादेश द्वारा अधिनिर्णीत किया गया है जिसके लिए इस धारा के अधीन नया दंडादेश प्रतिस्थापित किया गया है ।

(4) इस धारा के अधीन प्रतिस्थापित कोई निष्कर्ष या पारित कोई दंडादेश इस अधिनियम और नियमों के प्रयोजनों के लिए ऐसे प्रभावी होगा मानो वह किसी असम राइफल्स न्यायालय का, यथास्थिति, निष्कर्ष या दंडादेश हो ।

139. असम राइफल्स न्यायालय के आदेश, निष्कर्ष या दंडादेश के विरुद्ध उपचार-(1) इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश से अपने को व्यथित समझता है, उस आफिसर या प्राधिकारी को, जो उस असम राइफल्स न्यायालय के किसी निष्कर्ष या दंडादेश की पुष्टि करने के लिए सशक्त है, अर्जी दे सकेगा और पुष्टिकर्ता प्राधिकारी, पारित आदेश की शुद्धता, वैधता या औचित्य के बारे में या जिस कार्यवाही से वह आदेश संबद्ध है, उसकी नियमितता के बारे में अपना समाधान करने के लिए ऐसी कार्यवाही कर सकेगा, जैसी आवश्यक समझी जाए ।

(2) इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, जो किसी असम राइफल्स न्यायालय के ऐसे निष्कर्ष या दंडादेश से, जिसकी पुष्टि की जा चुकी है, अपने को व्यथित समझता है, केन्द्रीय सरकार, महानिदेशक या किसी विहित आफिसर को, जो कमान में उससे वरिष्ठ है, जिसने उस निष्कर्ष या दण्डादेश की पुष्टि की है, अर्जी दे सकेगा, और, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार, महानिदेशक या विहित आफिसर उस पर ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।

140. कार्यवाहियों का बातिल किया जाना-केन्द्रीय सरकार, महानिदेशक या कोई विहित आफिसर किसी असम राइफल्स न्यायालय की कार्यवाहियों को इस आधार पर बातिल कर सकेगा कि वे अवैध या अन्यायपूर्ण हैं ।

अध्याय 11

दंडादेशों का निष्पादन, क्षमा, परिहार, आदि

141. मृत्यु दंडादेश का रूप-असम राइफल्स न्यायालय मृत्यु का दंडादेश अधिनिर्णीत करने में स्वविकेकानुसार निदेश देगा कि अपराधी की मृत्यु ऐसे घटित की जाए कि जब तक वह मर न जाए तब तक उसे गर्दन में फांसी लगाकर लटकाए रखा जाए या उसे गोली से मार दिया जाए ।

142. कारावास के दंडादेश का प्रारंभ-जब कभी कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है तब उस दण्ड की अवधि, चाहे उसे पुनरीक्षित किया गया हो या नहीं, उस दिन प्रारंभ हुई मानी जाएगी जिस दिन की मूल कार्यवाही पीठासीन आफिसर द्वारा या समरी असम राइफल्स न्यायालय की दशा में, उस न्यायालय द्वारा हस्ताक्षरित की गई थी:

परन्तु जब असम राइफल्स न्यायालय द्वारा इस अधिनियम के अध्यधीन व्यक्ति को कारावास की उस अवधि के लिए, जो जुर्माने के संदाय के व्यतिक्रम में कारावास नहीं है, दंडादिष्ट किया जाता है तब उसी मामले के अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान या ऐसे दण्ड के आदेश की तारीख से पहले उसके द्वारा सिविल या बल की अभिरक्षा में बिताई गई अवधि का उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के विरुद्ध मुजरा किया जाएगा और दंड के ऐसे आदेश पर उस व्यक्ति या अधिकारी का कारावास में जाने का दायित्व, उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के शेष भाग तक, यदि कोई हो, निर्बंधित किया जाएगा ।

143. कारावास के दंडादेश का निष्पादन-(1) जब कभी कारावास का कोई दंडादेश असम राइफल्स न्यायालय द्वारा इस अधिनियम के अधीन पारित किया जाता है या जब कभी मृत्यु के दंडादेश को कारावास के रूप में लघुकृत किया जाता है, तब पुष्टिकर्ता आफिसर या समरी असम राइफल्स न्यायालय की दशा में न्यायालय अधिविष्ट करने वाला आफिसर या ऐसा अन्य आफिसर, जो विहित किया जाए, उपधारा (3) और उपधारा (4) में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसे छोड़कर, यह निदेश देगा कि दंडादेश किसी सिविल कारागार में परिरोध द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा ।

(2) जबकि कोई निदेश उपधारा (1) के अधीन दिया गया है, तब दंडादिष्ट व्यक्ति का कमांडेंट या ऐसा अन्य आफिसर, जो विहित किया जाए, उस कारागार के भारसाधक आफिसर को, जिसमें ऐसे व्यक्ति को परिरुद्ध किया जाना है, विहित प्ररूप में अधिपत्र भेजेगा और अधिपत्र के साथ उसे उस कारावास को भेजने की व्यवस्था करेगा ।

(3) तीस मास से अनधिक की कालावधि के कारावास के और असम राइफल्स न्यायालय द्वारा इस अधिनियम के अधीन पारित दंडादेश की दशा में, उपधारा (1) के अधीन समुचित आफिसर निदेश दे सकेगा कि दंडादेश किसी सिविल कारागार के बजाय बल की अभिरक्षा में परिरोध करके कार्यान्वित किया जाए ।

(4) सक्रिय ड्यूटी की दशा में, कारावास का दंडादेश ऐसे स्थान में परिरोध द्वारा कार्यान्वित किया जा सकेगा जिसे वह उप महानिरीक्षक, जिसकी कमान में दंडादिष्ट व्यक्ति सेवारत है या कोई विहित आफिसर समय-समय पर नियत करे ।

144. अपराधी की अस्थायी अभिरक्षा-जहां कि यह निदेश दिया गया है कि कारावास का दंडादेश सिविल कारागार में भोगा जाए, वहां अपराधी उस समय तक, जब तक कि उसे किसी सिविल कारागार में भेजना संभव हो, बल की अभिरक्षा में या किसी अन्य उचित स्थान में रखा जा सकेगा ।

145. विशेष दशाओं में कारावास के दंडादेश का निष्पादन-जब कभी किसी ऐसे आफिसर की राय में, जो उस उप महानिरीक्षक के रैंक से नीचे का नहीं है जिसकी कमान में विचारण किया गया है, कारावास का कोई दंड या कारावास के दंडादेश का कोई भाग धारा 143 के उपबंधों के अनुसार, बल की अभिरक्षा में विशेष कारणों से सुविधापूर्वक कार्यान्वित नहीं किया जा सकता तब वह आफिसर निदेश दे सकेगा कि वह दंडादेश या उस दंडादेश का वह भाग किसी सिविल कारागार या अन्य उचित स्थान में परिरोध द्वारा कार्यान्वित किया जाए ।

146. कैदी का स्थान-स्थान को प्रवहण-जो व्यक्ति कारावास के दंडादेश के अधीन है, वह एक स्थान से दूसरे स्थान को अपने प्रवहण के दौरान या उस दशा में, जिसमें वह पोत या वायुयान के फलक पर या अन्यथा है, ऐसे अवरोध के अध्यधीन किया जा सकेगा जो उसके सुरक्षित रूप से ले जाए जाने और अपसारण के लिए आवश्यक हो ।

147. कतिपय आदेशों का कारागार आफिसरों को संसूचित किया जाना-जब कभी किसी दंडादेश, आदेश या अधिपत्र को, जिसके अधीन कोई व्यक्ति सिविल कारागार में परिरुद्ध है, अपास्त करने या उसमें फेरफार करने का कोई आदेश इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से किया जाता है तब ऐसे आदेश के अनुसार एक अधिपत्र, उस आदेश को करने वाले आफिसर या उसके स्टाफ आफिसर या ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा, जो विहित किया जाए, उस कारागार के भारसाधक आफिसर को भेजा जाएगा, जिसमें वह व्यक्ति परिरुद्ध है ।

148. जुर्माने के दंडादेश का निष्पादन-जबकि जुर्माने का दंडादेश असम राइफल्स न्यायालय द्वारा धारा 55 के अधीन अधिरोपित किया जाता है तब ऐसे दंडादेश की पुष्टिकर्ता आफिसर द्वारा या जहां पुष्टि की आवश्यकता नहीं है वहां विचारण करने वाले आफिसर द्वारा हस्ताक्षरित और प्रमाणित एक प्रति भारत के किसी मजिस्ट्रेट को भेजी जा सकेगी और वह मजिस्ट्रेट उस जुर्माने को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंधों के अनुसार, ऐसे वसूल कराएगा मानो वह उस मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित जुर्माने का दंडादेश हो ।

149. आदेश या अधिपत्र में अप्ररूपिता या गलती-जब कभी किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है और वह उस दंडादेश को किसी ऐसे स्थान या रीति में भोग रहा है, जिसमें कि वह इस अधिनियम के अनुसरण में किसी विधिपूर्ण आदेश या अधिपत्र के अधीन परिरुद्ध किया जा सकता है, तब ऐसे व्यक्ति का परिरोध केवल इस कारण अवैध नहीं समझा जाएगा कि उस आदेश, अधिपत्र या अन्य दस्तावेज या उस प्राधिकार में या उसके संबंध में, जिसके द्वारा या जिसके अनुसरण में वह व्यक्ति ऐसे स्थान में लाया गया था या परिरुद्ध है, कोई अप्ररूपिता या गलती है और ऐसे किसी आदेश, अधिपत्र या दस्तावेज को तद्नुसार संशोधित किया जा सकेगा ।

150. क्षमा और परिहार-जबकि इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति असम राइफल्स न्यायालय द्वारा किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, तब केंद्रीय सरकार या महानिदेशक या ऐसे दंडादेश की दशा में, जिसे वह पुष्ट कर सकता था या जिसकी पुष्टि अपेक्षित नहीं थी, ऐसा आफिसर जो उप महानिदेशक के रैंक से नीचे का न हो और जिसकी कमान में वह व्यक्ति दोषसिद्धि के समय सेवा कर रहा था या विहित आफिसर-

(क) या तो उन शर्तों के सहित या उनके बिना, जिन्हें दंडादिष्ट व्यक्ति प्रतिगृहीत करता है, उस व्यक्ति को क्षमा कर सकेगा या अधिनिर्णीत संपूर्ण दंड या उसके किसी भाग का परिहार कर सकेगा; या

(ख) अधिनिर्णीत दंड में कमी कर सकेगा; या

(ग) ऐसे दंड को इस अधिनियम में वर्णित किसी कम लघुतर दंड या दंडों में लघुकृत कर सकेगा;

(घ) या तो उन शर्तों के सहित या उनके बिना, जिन्हें दंडादिष्ट व्यक्ति प्रतिगृहीत करता है, उस व्यक्ति को पैरोल पर निर्मुक्त कर सकेगा ।

151. सशर्त क्षमा, पैरोल पर निर्मुक्ति या परिहार को रद्द करना-(1) यदि कोई शर्त, जिस पर किसी व्यक्ति को क्षमा या पैरोल पर निर्मुक्ति किया गया है या जिस पर किसी दंड का परिहार किया गया है, उस प्राधिकारी की राय में जिसने क्षमा, निर्मुक्ति या परिहार अनुदत्त किया था, पूरी नहीं की गई है तो वह प्राधिकारी उस क्षमा, निर्मुक्ति या परिहार को रद्द कर सकेगा और तब न्यायालय का दंडादेश ऐसे क्रियान्वित किया जाएगा, मानो ऐसी क्षमा, निर्मुक्ति या परिहार अनुदत्त नहीं किया गया था ।

(2) वह व्यक्ति, जिसके कारावास का दंडादेश उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन क्रियान्वित किया जाता है, अपने दंडादेश का केवल अनवसित भाग ही भोगेगा ।

152. कारावास के दंडादेश का निलंबन-(1) जहां कि इस अधिनियम के अध्यधीन कोई व्यक्ति, किसी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है, वहां केंद्रीय सरकार, महानिदेशक या जनरल असम राइफल्स न्यायालय संयोजित करने के लिए सशक्त कोई आफिसर दंडादेश को निलंबित कर सकेगा, चाहे अपराधी को कारागार में या बल की अभिरक्षा में पहले ही सुपुर्द कर दिया गया हो या नहीं ।

(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या आफिसर ऐसे दंडादिष्ट अपराधी की दशा में निदेश दे सकेगा कि जब तक ऐसे प्राधिकारी या आफिसर के आदेश अभिप्राप्त न कर लिए जाएं तब तक अपराधी को कारागार में या बल की अभिरक्षा में सुपुर्द नहीं किया जाएगा ।

(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किसी ऐसे दंडादेश की दशा में किया जा सकेगा, जिसकी पुष्टि की जा चुकी है या जो घटा दिया गया है या लघुकृत कर दिया गया है ।

153. निलंबन के लंबित रहने तक आदेश-(1) जहां कि धारा 152 में निर्दिष्ट दंडादेश, समरी असम राइफल्स न्यायालय से भिन्न असम राइफल्स न्यायालय द्वारा अधिरोपित किया जाता है वहां पुष्टिकर्ता आफिसर दंडादेश की पुष्टि करते समय निदेश दे सकेगा कि अपराधी को कारागार के या बल की अभिरक्षा के सुपुर्द तब तक न किया जाए जब तक कि धारा 152 में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या आफिसर के आदेश अभिप्राप्त न कर लिए जाएं ।

(2) जहां कारावास का दंडादेश किसी समरी असम राइफल्स न्यायालय द्वारा अधिरोपित किया जाता है वहां विचारण करने वाला आफिसर या दंडादेश को धारा 136 की उपधारा (2) के अधीन अनुमोदित करने के लिए प्राधिकृत आफिसर उपधारा (1) में निर्दिष्ट निदेश दे सकेगा ।

154. निलंबन पर निर्मुक्ति-जहां कि कोई दंडादेश धारा 152 के अधीन निलंबित किया जाता है वहां अपराधी को अभिरक्षा से तत्काल निर्मुक्त कर दिया जाएगा ।

155. निलंबन की कालावधि की संगणना-वह कालावधि, जिसके दौरान दंडादेश निलंबनाधीन है, उस दंडादेश की अवधि का भाग मानी जाएगी ।

156. निलंबन के पश्चात् आदेश-धारा 152 में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या आफिसर किसी भी समय जिस दौरान दंडादेश निलंबित है आदेश दे सकेगा कि-

(क) अपराधी उस दंडादेश के अनवसित प्रभाग को भोगने के लिए सुपुर्द किया जाए; या

(ख) दंडादेश का परिहार किया जाए ।

157. निलंबन के पश्चात् मामले पर पुनर्विचार-(1) जहां कि कोई दंडादेश निलंबित किया गया है, वहां धारा 152 में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या आफिसर द्वारा अथवा धारा 152 में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या आफिसर द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी ऐसे आफिसर द्वारा, जो उप महानिदेशक की रैंक से नीचे का नहीं है, मामले पर पुनर्विचार किसी भी समय किया जा सकेगा और चार मास से अनधिक अंतरालों पर किया जाएगा ।

(2) जहां ऐसे प्राधिकृत आफिसर द्वारा किसी ऐसे पुनर्विचार पर उसे यह प्रतीत होता है कि अपराधी का आचरण दोषसिद्धि के पश्चात् ऐसा रहा है कि दंडादेश का परिहार करना न्यायोचित होगा, वहां वह मामले को धारा 150 में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या आफिसर को निर्देशित करेगा ।

158. निलंबन के पश्चात् नया दंडादेश-जहां कि किसी अपराधी को, उस समय के दौरान जब कि उसका दंडादेश इस अधिनियम के अधीन निलंबित है, किसी अन्य अपराध के लिए दंडादिष्ट किया जाता है, वहां-

(क) यदि अतिरिक्त दंडादेश भी इस अधिनियम के अधीन निलम्बित किया जाता है तो वे दोनों दंडादेश साथ-साथ भोगे जाएंगे;

(ख) यदि अतिरिक्त दंडादेश तीन मास या अधिक की अवधि के लिए है और इस अधिनियम के अधीन निलंबित नहीं किया जाता है, तो अपराधी पूर्वतर्ती दंडादेश के अनवसित प्रभाग के लिए भी कारागार या बल की अभिरक्षा के सुपुर्द किया जाएगा, किन्तु दोनों दंडादेश साथ-साथ भोगे जाएंगे; और

(ग) यदि अतिरिक्त दंडादेश तीन मास से कम की कालावधि के लिए है और इस अधिनियम के अधीन निलंबित नहीं किया जाता है, तो अपराधी केवल उसी दंडादेश पर ऐसे सुपुर्द किया जाएगा और पूर्वतर्ती दंडादेश किसी ऐसे आदेश के अध्यधीन रहते हुए, जो धारा 156 या धारा 157 के अधीन पारित किया जाए, निलंबित बना रहेगा ।

159. निलंबन की शक्ति की परिधि-धारा 152 और धारा 156 द्वारा प्रदत्त शक्तियां, कमी करने, परिहार करने और लघुकरण की शक्ति के अतिरिक्त, न कि उनके अल्पीकरण में होंगी ।

160. निलंबन और परिहार का पदच्युति पर प्रभाव-(1) जहां कि किसी अन्य दंडादेश के अतिरिक्त पदच्युति का दंड असम राइफल्स न्यायालय द्वारा अधिनिर्णीत किया गया है ऐसा अन्य दंडादेश धारा 152 के अधीन निलंबित किया गया है वहां ऐसी पदच्युति या हटाया जाना तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि धारा 152 में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या आफिसर द्वारा वैसा आदेश नहीं कर दिया जाता ।

(2) यदि धारा 156 के अधीन ऐसे अन्य दंडादेश का परिहार किया जाता है तो पदच्युति या हटाए जाने के दंड का भी परिहार कर दिया जाएगा ।

अध्याय 12

प्रकीर्ण

161. बल के सदस्यों की संपत्ति का व्ययन-केन्द्रीय सरकार या उस सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त कोई अन्य प्राधिकारी, साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति की निजी या रेजिमेंट संपत्ति के व्ययन या किन्हीं अन्य ऐसे बकायों, जिसमें उस व्यक्ति की भविष्य निधि भी सम्मिलित है, जिसकी मृत्यु हो चुकी है या जिसने अधित्यजन किया है या जिसे विकृतचित्त अभिनिश्चित किया गया है या जिसको सक्रिय कर्तव्य के दौरान शासकीय रूप से लापता रिपोर्ट किया गया है, के लिए उपबंध कर सकेगा । 

162. बल के सदस्यों को प्रदान किए जाने योग्य शक्तियां और उन पर अधिरोपित किए जाने योग्य कर्तव्य-(1) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित साधारण या विशेष आदेश द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए और भारत की सीमाओं के समीप के ऐसे क्षेत्र की स्थानीय सीमाओं के भीतर, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, बल का कोई सदस्य-

(क) पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 (1920 का 34), विदेशियों का रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1939 (1939 का 16), केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क अधिनियम, 1944 (1944 का 1), विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946 (1946 का 31), सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52), पासपोर्ट अधिनियम, 1967 (1967 का 15), या विदेशी मुद्रा प्रंबध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) के अधीन दंडनीय किसी अपराध को या किसी अन्य केन्द्रीय अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के प्रयोजन के लिए; या

(ख) किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ने के प्रयोजन के लिए, जिसने खंड (क) में निर्दिष्ट कोई अपराध किया है,

उस अधिनियम या किसी ऐसे अन्य केन्द्रीय अधिनियम के अधीन, जो उक्त आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, ऐसी शक्तियों का प्रयोग या कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेगा जो शक्तियां और कर्तव्य ऐसे हैं जिनका उक्त प्रयोजनों के लिए प्रयोग या निर्वहन करने के लिए, केन्द्रीय सरकार की राय में उस अधिनियम द्वारा या ऐसे अन्य अधिनियम द्वारा तत्समान या निम्नतर रैंक के आफिसर को सशक्त किया गया है ।

(2) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित साधारण या विशेष आदेश द्वारा, संबधित राज्य सरकार की सहमति से उन शक्तियों या कर्तव्यों में से, जिनका प्रयोग या निर्वहन किसी पुलिस आफिसर द्वारा राज्य के किसी अधिनियम के अधीन किया जा सकता है, कोई शक्ति या कर्तव्य बल के किसी ऐसे सदस्य को, जो केन्द्रीय सरकार की राय में तत्समान या उससे उच्चतर रैंक का है, प्रदान या उस पर अधिरोपित कर सकेगी ।

(3) इस धारा के अधीन निकाला गया प्रत्येक आदेश, निकाले जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी, यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह आदेश नहीं निकाला जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

163. बल के सदस्यों के कार्यों के लिए सरंक्षण-(1) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 125 का उपबंध बल के ऐसे सदस्यों को लागू होगा, जो धारा 162 की उपधारा (1) के अधीन किसी शक्ति का प्रयोग करता है या किसी कर्तव्य का निर्वहन करता है या जिस पर उस धारा की उपधारा (2) के अधीन ऐसी रीति से, जो पुलिस अधिकारी को लागू होती है, कोई शक्ति प्रदत्त की गई है या कर्तव्य अधिरोपित किए गए हों ।

(2) किसी सक्षम प्राधिकारी के वारंट या आदेश के अनुसरण में बल के किसी सदस्य द्वारा किए गए किसी कार्य के लिए उसके विरुद्ध किसी वाद या कार्यवाही में उसके लिए यह अभिवाक् करना विधिपूर्ण होगा कि उसने ऐसा कार्य ऐसे वारंट या आदेश के प्राधिकार के अधीन किया था ।

(3) ऐसा कोई अभिवाक् उस कार्य का निदेश देने वाले अधिपत्र या आदेश को पेश करके साबित किया जा सकेगा और यदि उसे इस प्रकार साबित कर दिया जाता है तो बल के सदस्य को, उसके द्वारा इस प्रकार किए गए कार्य के बारे में दायित्व से, उस प्राधिकारी की अधिकारिता में, जिसने ऐसा अधिपत्र या आदेश जारी किया है, कोई त्रुटि होते हुए भी उन्मोचित कर दिया जाएगा ।

(4) उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई विधिक कार्यवाही (चाहे सिविल हो या दांडिक) जो बल के किसी सदस्य के विरुद्ध इस अधिनियम या नियमों के किसी उपबंध द्वारा या उसके अनुसरण में प्रदत्त शक्तियों के अधीन किए गए या किए जाने के लिए आशयित कार्य के लिए विधिपूर्वक लाई जाए, उस कार्य के, जिसकी शिकायत की गई है, किए जाने के पश्चात् तीन तास के भीतर प्रारंभ की जाएगी, अन्यथा नहीं और ऐसी कार्रवाही की और उसके हेतुक की लिखित सूचना प्रतिवादी को या उसके वरिष्ठ अधिकारी को ऐसी कार्यवाही के प्रारंभ के कम से कम एक मास पूर्व दी जाएगी ।

164. केन्द्रीय सरकार की कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो केंद्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध बना सकेगी जो कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों और इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों:

परन्तु इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् इस धारा के अधीन कोई आदेश नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात्, यथासंभव शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

165. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगेः-

(क) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन बल के पुनर्गठन की रीति और बल के सदस्यों की सेवा की शर्तें;

(ख) धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन अभ्यावेशन का ढंग और अभ्यावेशन के लिए प्रक्रिया;

(ग) वह प्राधिकारी, जिसकी धारा 8 के अधीन नियुक्ति से त्यागपत्र देने या किसी अथवा सभी कर्तव्यों से अलग होने के लिए लिखित पूर्व अनुज्ञा अपेक्षित है;

(घ) धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन निर्दिष्ट किसी आफिसर या अधीनस्थ आफिसर का रैंक;

(ङ) वह प्राधिकारी जो धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन लिखित पूर्व मंजूरी देगा;

(च) धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन संसूचना या प्रकाशन की प्रकृति;

(छ) धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन अधिवेशन या प्रदर्शन के अन्य प्रयोजन;

(ज) धारा 31 के अधीन नामांकन का प्ररूप;

(झ) धारा 57 की उपधारा (1) के खंड (ज) के अधीन कोई अन्य प्रयोजन;

(ञ) वह अधिकारी, जो निदेश दे सकेगा कि किसी ऐसे अभ्यावेशित व्यक्ति को, जिसे पदच्युति या कारावास की सजा दी गई है, चाहे पदच्युति के साथ या अन्यथा धारा 60 के अधीन सामान्य सैनिकों में सेवा करने के लिए प्रतिधृत रखा जाए;

(ट) धारा 62 के अधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाहियों की रीति और दण्ड देने का परिमाण;

(ठ) धारा 64 की उपधारा (1) के अधीन उप कमांडेंट की रैंक और अधीनस्थ आफिसर के रैंक से नीचे के किसी आफिसर और वारंट आफिसर के रैंक के किसी आफिसर के विरुद्ध कार्यवाही की रीति;

(ड) धारा 64 की उपधारा (2) के अधीन कार्यवाहियों की प्रमाणित सत्य प्रतियां अग्रेषित करने की रीति और वह उच्चतर प्राधिकारी, जिसे ऐसी प्रतियां अग्रेषित की जाएंगी;

(ढ) धारा 65 की उपधारा (1) के अधीन कमांडेंट के रैंक और अधीनस्थ आफिसर के रैंक से नीचे के और वारंट आफिसर के रैंक के किसी आफिसर के विरुद्ध कार्यवाही की रीति;

(ण) धारा 66 के अधीन किसी अधीनस्थ आफिसर या वारंट आफिसर के विरुद्ध कार्यवाही की रीति;

(त) धारा 69 के खंड (i) के अधीन किसी आफिसर से भिन्न आफिसर, जिसके आदेश से किसी व्यक्ति की पत्नी या धर्मज या अधर्मज संतान के भरण-पोषण के लिए कोई राशि दी जानी अपेक्षित है;

(थ) वह आफिसर जो यह निदेश दे सकेगा कि इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति के संपूर्ण वेतन और भत्ते या उनका कोई भाग धारा 71 के अधीन विधारित रखा जाएगा;

(द) वेतन और भत्ते में से इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत कटौतियों के परिहार की रीति और विस्तार और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा धारा 75 के अधीन ऐसा परिहार किया जाएगा;

(ध) वे प्राधिकारी, जिनके द्वारा इस अधिनियम के अध्यधीन सभी व्यक्तियों के वेतन और भत्तों से जो युद्ध बन्दी हैं, उनके आश्रितों के लिए धारा 76 के अधीन उचित व्यवस्था की जानी है;

(न) वे प्राधिकारी, जो इस अधिनियम के अध्यधीन ऐसे किसी व्यक्ति के वेतन और भत्तों में से समुचित उपबंध करेंगे जो धारा 77 के अधीन युद्धबंदी हैं या लापता हैं;

(प) वह रीति, जिसमें और वह अवधि, जिसके लिए इस अधिनियम के अध्यधीन किसी व्यक्ति को धारा 80 की उपधारा (4) के अधीन बल की अभिरक्षा में लिया जा सकेगा और निरुद्ध रखा जा सकेगा;

(फ) धारा 81 के अधीन विलंब के लिए कारण देते हुए विशेष रिपोर्ट तैयार करने की रीति;

(ब) जांच न्यायालय नियुक्त करने के लिए प्राधिकारी और नियुक्ति की रीति; ऐसे जांच न्यायालय द्वारा शपथ या संज्ञान दिलाने की रीति और धारा 84 की उपधारा (1) के अधीन अभिलेख तैयार करने की रीति;

(भ) वह अधिकारी जो धारा 85 की उपधारा (1) के अधीन पुलिस बल नियुक्त कर सकेगा;

(म) यह विनिश्चित करने का विवेकाधिकार रखने वाला अन्य अधिकारी कि किस न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियां धारा 102 के अधीन संस्थित की जाएंगी;

(य) धारा 106 की उपधारा (3) के अधीन अन्य अधिकारी द्वारा सदस्य की रिक्ति भरने की रीति; 

(यक) विचारण के प्रारंभ के पूर्व, यथास्थिति, असम राइफल्स न्यायालय के प्रत्येक सदस्य और विधि अधिकारी को या धारा 105 के अधीन अनुमोदित अधिकारी को धारा 107 की उपधारा (1) के अधीन शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने की रीति;

(यख) धारा 107 की उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने का प्ररूप;

(यग) वह अधिकारी, जिसके द्वारा वह पत्र, विवरणी या अन्य दस्तावेज, जो उन तथ्यों के साक्ष्य के रूप में हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है, जो धारा 118 की उपधारा (1) के अधीन ऐसे पत्र, विवरणी या अन्य दस्तावेज में कथित हैं;

(यघ) धारा 120 की उपधारा (1) के अधीन अतिरिक्त जांच किए जाने और अभिलिखित किए जाने के लिए अन्य मामले;

(यङ) धारा 120 की उपधारा (3) के अधीन अभिलिखित किए जाने वाले अन्य मामले;

(यच) धारा 121 की उपधारा (4) के अधीन अभियुक्त व्यक्ति को अभिरक्षा में रखने की रीति;

(यछ) अधिकारी, जो धारा 122 के अधीन कतिपय व्यक्तियों का विचारण किए जाने के लिए उपाय कर सकेगा;

(यज) धारा 122 के खंड (ख) के अधीन किसी अन्य स्थान में निरोध की दशा में प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्राधिकारी;

(यझ) वह अधिकारी, जिसको धारा 137 के अधीन प्रत्येक समरी असम राइफल्स न्यायालय की कार्यवाहियां अग्रेषित की जाएंगी;

(यञ) वह अधिकारी, जो उससे कमान में वरिष्ठ होगा जिसने धारा 139 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट निष्कर्षों या दंडादेश की पुष्टि की थी, जिसको उस उपधारा के अधीन अर्जी प्रस्तुत की जा सकेगी; 

(यट) वह अधिकारी, जो धारा 140 के अधीन किसी असम राइफल्स न्यायालय की कार्यवाहियों को बातिल कर सकेगा;

(यठ) अन्य अधिकारी, जो निदेश देगा कि दंडादेश धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन किसी सिविल कारागार में निरोध द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा;

(यड) वह अधिकारी जो धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन अधिपत्र अग्रेषित करेगा और ऐसे अधिपत्र का प्ररूप; 

(यढ) वह अधिकारी जो धारा 143 की उपधारा (4) के अधीन समय-समय पर परिरोध के लिए स्थान नियत कर सकेगा;

(यण) अन्य व्यक्ति, जिसके द्वारा अधिपत्र धारा 147 के अधीन कारागार के भारसाधक आफिसरों को अग्रेषित किया जाएगा;

(यत) वह अधिकारी जो धारा 150 के खंड (क) से खंड (ग) तक के अधीन विनिर्दिष्ट रूप में क्षमा कर सकेगा या अन्य शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा;

(यथ) कोई अन्य विषय, जो नियमों द्वारा विहित किया जाना है या किया जा सकेगा या जिसके संबंध में उपबंध किया जाना है या किया जा सकेगा ।

166. विनियम बनाने की शक्ति-महानिदेशक, धारा 165 में विनिर्दिष्ट को छोड़कर, इस अधिनियम के सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन के अधीन रहते हुए विनियम बना सकेगा ।

167. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम या विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी, यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किंतु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

168. निरसन और व्यावृत्ति-(1) असम राइफल्स अधिनियम, 1941 (1941 का 5) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी-

(क) इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान और इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन गठित असम राइफल्स को इस अधिनियम के अधीन पुनर्गठित समझा जाएगा;

(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान और इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन नियुक्त असम राइफल्स के सदस्यों को इस अधिनियम के अधीन, यथास्थिति, नियुक्त या अभ्यावेशित समझा जाएगा;

(ग) इस अधिनियम के प्रारंभ से ठीक पूर्व लंबित किसी अपील, आवेदन, विचारण, जांच या अन्वेषण को असम राइफल्स अधिनियम, 1941 (1941 का 5) के उपबंधों के अनुसार, यथास्थिति, ऐसे निपटाया जाएगा, चालू रखा जाएगा या किया जाएगा मानो यह अधिनियम प्रवृत्त न हुआ हो;

(घ) इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व नियुक्त या अभ्यावेशित किसी व्यक्ति के संबंध में की गई कोई बात या कार्रवाई विधि में वैसे ही विधिमान्य और प्रभावी होगी मानो वह बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई थी ।

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