तारयंत्र संबंधी तार (विधि-विरुद्ध कब्जा) अधिनियम, 1950
(1950 का अधिनियम संख्यांक 74)
झ्र्28 दिसम्बर, 1950ट
तारयन्त्र सम्बन्धी तारों के कब्जे को विनियमित करने और
उनके विधि-विरुद्ध कब्जे के अपराध के लिए
दण्ड उपबन्धित करने के लिए
अधिनियम
संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :श्न्
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भश्न्(1) यह अधिनियम तारयंत्र सम्बन्धी तार (विधि-विरुद्ध कब्जा) अधिनियम, 1950 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह किसी राज्य में उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उस राज्य के लिए नियत करे और विभिन्न राज्यों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएंश्न्इस अधिनियम में,श्न्
(क) विहितञ्ज् से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
झ्र्(ख) तारयंत्र सम्बन्धी तारञ्ज् से कोई ऐसा तांबे का तार अभिप्रेत है जिसका व्यास मिलीमीटरों में,श्न्
(त्) 2.43 से अन्यून और 2.53 से अनधिक है; या
(त्त्) 2.77 से अन्यून और 2.87 से अनधिक है; या
(त्त्त्) 3.42 से अन्यून और 3.52 से अनधिक है ।ट
3. तारयंत्र सम्बन्धी तारों का कब्जा घोषित करने का कर्तव्यश्न्प्रत्येक व्यक्ति जिसके कब्जे में तारयंत्र सम्बन्धी तार हों, इस अधिनियम के प्रारम्भ से छह मास के अन्दर, लिखित रूप में, ऐसे प्ररूप में और ऐसे प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, एक घोषणा करेगा जिसमें उसके कब्जे में तारयंत्र सम्बन्धी तारों का परिमाण कथित होगा ।
4. तारयंत्र सम्बन्धी तारों को संपरिवर्तित या विक्रीत कराने का कर्तव्यश्न्प्रत्येक व्यक्ति जिसके कब्जे में ऐसे तारयंत्र सम्बन्धी तार हों जिनका वजन दस पौंड से अधिक हो, इस अधिनियम के प्रारम्भ से एक वर्ष के अन्दर उस सम्पूर्ण परिमाण को, जो दस पौंड से अधिक हो, ढले हुए धातु खण्डों में सम्परिवर्तित कर लेगा :
परन्तु ऐसा व्यक्ति अपने कब्जे में के सम्पूर्ण तारयंत्र सम्बन्धी तारों या उनके किसी भाग को ऐसी कीमत पर और ऐसे प्राधिकारी को, जो विहित हो, विक्रीत करने के लिए स्वतंत्र होगा ।
झ्र्4क. तारयन्त्र सम्बन्धी तारों के विक्रय या क्रय का प्रतिषेधश्न्कोई भी व्यक्ति, तारयंत्र सम्बन्धी तार (विधि-विरुद्ध कब्जा) संशोधन अधिनियम, 1953 (1953 का 53) के प्रारम्भ के पश्चात् किसी भी परिमाण में तारयन्त्र सम्बन्धी तारों का विक्रय या क्रय ऐसे प्राधिकारी की अनुज्ञा के बिना नहीं करेगा जो विहित किया जाए ।ट
झ्र्5. तारयन्त्र सम्बन्धी तारों के विधि-विरुद्ध कब्जे के लिए शास्तिश्न्जिस किसी के भी कब्जे में तारयंत्र सम्बन्धी तार किसी भी परिमाण में पाए जाएं या साबित हो जाएं वह उस दशा के सिवाय जिसमें वह साबित कर देता है कि वे तारयंत्र सम्बन्धी तार उसके कब्जे में विधिपूर्वक आए हैं, निम्नलिखित से दण्डनीय होगाश्न्
झ्र्(क) प्रथम अपराध के लिए कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक हो सकेगी, या जुर्माना, अथवा दोनों और ऐसे विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में, जो न्यायालय के निर्णय में अभिलिखित किए जाएंगे, ऐसे कारावास की अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी और ऐसा जुर्माना एक हजार रुपए से कम नहीं होगा;ट
(ख) द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माना भी और ऐसे विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में झ्र्जो न्यायालय के निर्णय में अभिलिखित किए जाएंगे, ऐसे कारावास की अवधि दो वर्ष से कम नहीं होगीट तथा ऐसा जुर्माना दो हजार रुपए से कम नहीं होगा :
परन्तु जहां किसी व्यक्ति ने तारयंत्र सम्बन्धी तारों के किसी परिमाण के बारे में धारा 3 के अधीन घोषणा की है वहां ऐसे घोषित परिमाण के सम्बन्ध में यह साबित करने का भार कि वह उसके कब्जे में विधिपूर्वक आया, ऐसे व्यक्ति पर नहीं होगा ।ट
6. धारा 3, धारा 4 या धारा 4क के उपबन्धों के उल्लंघन के लिए शास्तिश्न्जो कोई व्यक्ति धारा 3 द्वारा यथा अपेक्षित घोषणा करने में असफल होगा या झ्र्धारा 4 या धारा 4क के उपबंधों का उल्लंघन करेगाट वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
झ्र्6क. तलाशी और अभिग्रहण की शक्तियांश्न्(1) कोई पुलिस अधिकारी, जो उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो,श्न्
(त्) किसी तारयंत्र सम्बन्धी तार का;
(त्त्) ऐसे तारयंत्र सम्बन्धी तार के परिवहन के लिए प्रयुक्त किसी प्रवहण या जीवजन्तु का,
अभिग्रहण या उसके लिए किसी स्थान की तलाशी और उसका अभिग्रहण उस दशा में कर सकेगा जिसमें यह उचित संदेह विद्यमान है कि ऐसे तारयंत्र सम्बन्धी तार के बारे में इस अधिनियम के किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है या किया ही जाने वाला है ।
(2) तलाशियों और अभिग्रहणों के सम्बन्ध में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबन्ध इस धारा के अधीन की गई तलाशियों और अभिग्रहणों को यावत्शक्य लागू होंगे ।
6ख. तारयन्त्र सम्बन्धी तारों, वाहनों आदि का अधिहरणश्न्जहां कोई व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी का उल्लंघन करने के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है वहां वह तारयंत्र सम्बन्धी तार जिनके बारे में उल्लंघन किया गया हो और कोई प्रवहण या जीवजन्तु, जिसका उपयोग ऐसे तारयंत्र सम्बन्धी तारों के परिवहन के लिए किया जाता है, न्यायालय द्वारा उस दशा के सिवाय अधिहरणीय होंगे जिसमें उस प्रवहण या जीवजन्तु का स्वामी यह साबित कर देता है कि उसका ऐसा उपयोग स्वामी की अपनी, उसके अभिकर्ता की, यदि कोई हो, और प्रवहण या जीवजन्तु के भारसाधक व्यक्ति की जानकारी या मौनानुकूलता के बिना किया गया था और उनमें से प्रत्येक ने ऐसे उपयोग के विरुद्ध सभी उचित पूर्वावधानियां बरती थी :
परन्तु जहां ऐसे किसी प्रवहण या जीवजन्तु का उपयोग भाड़े पर माल या यात्रियों के परिवहन के लिए किया जाता है वहां प्रवहण या जीवजन्तु के स्वामी को यह विकल्प दिया जाएगा कि वह उस प्रवहण या जीवजन्तु के अधिहरण के बदले में उस प्रवहण या जीवजन्तु के अभिग्रहण की तारीख को उसकी बाजार कीमत से अनधिक जुर्माने का या जिन तारयंत्र सम्बन्धी तारों के बारे में उल्लंघन किया गया है उनके मूल्य का, इनमें से जो भी कम हो उसका, संदाय करे :
परन्तु यह और कि इस प्रकार अभिगृहीत और अधिहृत कोई तारयंत्र सम्बन्धी तार न्यायालय द्वारा ऐसे प्राधिकारी को सौंप दिए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।ट
7. अपराधों का संज्ञानश्न् झ्र्(1) कोई भी न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी भी अपराध का संज्ञान ऐसा अपराध गठित करने वाले तथ्यों के विषय में किसी ऐसे व्यक्ति की लिखित रिपोर्ट के बिना नहीं करेगा जो भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक है ।ट
(2) प्रेसिडेन्सी मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट से अवर कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
8. नियम बनाने की शक्तिश्न्(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया, और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :श्न्
(क) वह प्ररूप जिसमें और वे प्राधिकारी जिनको धारा 3 के अधीन घोषणाएं की जा सकेंगी;
(ख) वे प्राधिकारी जिनको और वे कीमतें जिन पर तारयंत्र सम्बन्धी तार धारा 4 के अधीन विक्रीत किए जा सकेंगे ।
झ्र्(3) झ्र्इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।ट

