राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अधिनियम, 1985
(1985 का अधिनियम संख्या 2)
[9 फरवरी, 1985]
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए योजना तैयार करने और ऐसी योजना
के कार्यान्वयन को समन्वित तथा मानीटर करने और राष्ट्रीय राजधानी
क्षेत्र में भूमि के उपयोगों के नियंत्रण तथा अवसंरचना के विकास
के लिए सामंजस्यपूर्ण नीतियां बनाने के लिए, जिससे कि
उस क्षेत्र के किसी अव्यवस्थित विकास से बचा
जा सके, योजना बोर्ड के गठन का और
उससे संबंधित या उससे आनुषंगिक
विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
लोक हित में यह समीचीन है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए योजना तैयार करने और ऐसी योजना के कार्यान्वयन को समन्वित तथा मानीटर करने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भूमि के उपयोगों के नियंत्रण तथा अवसंरचना के विकास के लिए सामंजस्यपूर्ण नीतियां बनाने के लिए, जिससे कि उस क्षेत्र के किसी अव्यवस्थित विकास से बचा जा सके, योजना बोर्ड के गठन के लिए उपबंध किया जाए ;
और संसद् को पूर्वोक्त विषयों में से किसी के संबंध में, राज्यों के लिए विधियां बनाने की, संविधान के अनुच्छेद 249 और 250 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई शक्ित नहीं है ;
और संविधान के अनुच्छेद 252 के खण्ड (1) के उपबंधों के अनुसरण में हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों के विधान-मंडलों के सभी सदनों द्वारा इस आशय के संकल्प पारित कर दिए गए हैं कि पूर्वोक्त विषयों को उन राज्यों में संसद् द्वारा विधि द्वारा विनियमित किया जाना चाहिए ;
भारत गणराज्य के पैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अधिनियम, 1985 है ।
(2) यह 19 अक्तूबर, 1984 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) बोर्ड" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अभिप्रेत है ;
(ख) समिति" से धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन गठित योजना समिति अभिप्रेत है ;
(ग) प्रत्याकर्षण क्षेत्र" से धारा 8 के खण्ड (च) के अधीन बोर्ड द्वारा चयन किया गया नगरीय क्षेत्र अभिप्रेत है ;
(घ) प्रकार्य योजना" से ऐसी योजना अभिप्रेत है, जो क्षेत्रीय योजना के एक या अधिक तत्त्वों को सविस्तार प्रतिपादित करने के लिए तैयार की गई हो ;
(ङ) भूमि" के अन्तर्गत भूमि से उद्भूत होने वाले फायदे और भूबद्ध या भूबद्ध किसी चीज के साथ स्थायी रूप से जकड़ी हुई चीजें आती हैं ;
(च) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र" से अनुसूची में विनिर्दिष्ट क्षेत्र अभिप्रेत है :
परन्तु केन्द्रीय सरकार भाग लेने वाले संबद्ध राज्य की सरकार की सहमति से और बोर्ड के परामर्श से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अनुसूची में कोई क्षेत्र जोड़ सकेगी या किसी क्षेत्र को उससे अपवर्जित कर सकेगी ;
(छ) भाग लेने वाले राज्य" से हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के राज्य अभिप्रेत हैं ;
(ज) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(झ) परियोजना प्लान" से क्षेत्रीय योजना, उपक्षेत्रीय योजना या प्रकार्य योजना के एक या अधिक तत्त्वों को कार्यान्वित करने के लिए तैयार किया गया ब्यौरेवार प्लान अभिप्रेत है ;
(ञ) क्षेत्रीय योजना" से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भूमि के उपयोगों के नियंत्रण और अवसंरचना के विकास के लिए इस अधिनियम के अधीन तैयार की गई योजना अभिप्रेत है ;
(ट) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ;
(ठ) उपक्षेत्र" से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का वह भाग अभिप्रेत है जो पूर्ण रूप से भाग लेने वाले राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सीमाओं के भीतर आता है ;
(ड) उपक्षेत्रीय योजना" से प्रत्येक उपक्षेत्र के लिए तैयार की गई योजना अभिप्रेत है ; और
(ढ) संघ राज्यक्षेत्र" से दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड
3. बोर्ड का गठन और निगमन-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड के नाम से एक बोर्ड का गठन करेगी ।
(2) यह बोर्ड पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा, जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।
(3) बोर्ड इक्कीस से अनधिक इतने सदस्यों से मिलकर बनेगा, जितने विहित किए जाएं, और जब तक इस निमित्त बनाए गए नियमों में अन्यथा उपबंध नहीं किया जाता है, तब तक बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-
(क) संघ का निर्माण और आवास मंत्री, जो बोर्ड का अध्यक्ष होगा ;
(ख) हरियाणा राज्य का मुख्यमंत्री ;
(ग) राजस्थान राज्य का मुख्यमंत्री ;
(घ) उत्तर प्रदेश राज्य का मुख्यमंत्री ;
(ङ) संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक;
(च) आठ सदस्य, जो भाग लेने वाले राज्यों की और संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक की सिफारिश पर केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे :
परन्तु अधिक से अधिक दो सदस्य, यथास्थिति, किसी भाग लेने वाले राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक की सिफारिश पर नामनिर्देशित किए जाएंगे;
(छ) तीन अन्य सदस्य, जिनमें से एक ऐसा व्यक्ति होगा जिसे नगर योजना का ज्ञान और अनुभव हो, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे;
(ज) बोर्ड का एक पूर्णकालिक सदस्य-सचिव, जो ऐसा अधिकारी होगा, जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव की या उससे ऊपर की पंक्ति के अधिकारियों में से होगा और जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा :
परन्तु नियमों द्वारा बोर्ड के गठन में कोई परिवर्तन भाग लेने वाले राज्यों में से प्रत्येक की सरकार की और संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक की सहमति से ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(4) उपधारा (3) के खंड (च), खंड (छ) और खंड (ज) के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्यों के पद के निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं ।
4. योजना समिति का गठन-(1) बोर्ड इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, अपने कृत्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए, एक समिति का गठन करेगा जिसे योजना समिति कहा जाएगा ।
(2) समिति में इतने सदस्य होंगे, जितने विहित किए जाएं, और जब तक इस निमित्त बनाए गए नियमों में अन्यथा उपबंध नहीं किया जाता है तब तक समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-
(क) बोर्ड का सदस्य-सचिव, जो समिति को पदेन अध्यक्ष होगा ;
(ख) संयुक्त सचिव, निर्माण और आवास मंत्रालय, भारत सरकार, आवास और नगर विकास का भारसाधक, पदेन
(ग) भाग लेने वाले प्रत्येक राज्य और संघ राज्यक्षेत्र में नगर विकास का भारसाधक सचिव, पदेन ;
(घ) उपाध्यक्ष, दिल्ली विकास प्राधिकरण, पदेन ;
(ङ) मुख्य योजनाकार, नगर और ग्राम योजना संगठन, नई दिल्ली, पदेन ; और
(च) प्रत्येक भाग लेने वाले राज्य का मुख्य नगर योजनाकार, पदेन ।
5. सहयोजित करने की शक्ति, आदि-(1) बोर्ड या समिति, किसी भी समय और ऐसी अवधि के लिए, जो वह ठीक समझे, किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को बोर्ड या समिति के सदस्य या सदस्यों के रूप में सहयोजित कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन सहयोजित कोई व्यक्ति, यथास्थिति, बोर्ड या समिति के किसी सदस्य की सभी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करेगा, किन्तु वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।
6. रिक्तियों आदि के कारण बोर्ड या समिति की कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना-बोर्ड या समिति का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इसी कारण से अविधिमान्य नहीं होगी, कि :-
(क) बोर्ड या समिति में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है ; या
(ख) बोर्ड या समिति की प्रक्रिया में कोई अनियमितता है जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता है ।
अध्याय 3
बोर्ड और समिति के कृत्य और शक्तियां
7. बोर्ड के कृत्य-बोर्ड के निम्नलिखित कृत्य होंगे, अर्थात्: -
(क) क्षेत्रीय योजना और प्रकार्य योजना तैयार करना;
(ख) भाग लेने वाले राज्यों में से प्रत्येक द्वारा और संघ राज्यक्षेत्र द्वारा उपक्षेत्रीय योजना और परियोजना प्लान तैयार किए जाने की व्यवस्था करना;
(ग) भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र के माध्यम से क्षेत्रीय योजना, प्रकार्य योजनाओं, उपक्षेत्रीय योजनाओं और परियोजना प्लानों के प्रवर्तन और कार्यान्वयन का समन्वय करना;
(घ) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र या उपक्षेत्रों में परियोजनाएं बनाने, पूर्विकताएं अवधारित करने और क्षेत्रीय योजना में उपदर्शित प्रक्रमों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास का समंजन करने की बाबत भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र द्वारा उचित और व्यवस्थित कार्यक्रम सुनिश्चित करना;
(ङ) केन्द्रीय और राज्य योजना निधियों और राजस्व के अन्य स्रोतों के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चयन की गई विकास परियोजनाओं के वित्त पोषण की व्यवस्था करना, और उसका पर्यवेक्षण करना ।
8. बोर्ड की शक्तियां-बोर्ड की शक्तियों के अन्तर्गत निम्नलिखित के लिए शक्तियां होंगी: -
(क) प्रकार्य योजनाओं और उपक्षेत्रीय योजनाओं को तैयार करने, उनके प्रवर्तन और कार्यान्वयन की बाबत, भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र से रिपोर्टें और जानकारी मंगाना;
(ख) यह सुनिश्चित करना कि, यथास्थिति, प्रकार्य योजना और उपक्षेत्रीय योजना की तैयारी, प्रवर्तन और कार्यान्वयन क्षेत्रीय योजना के अनुरूप है;
(ग) क्षेत्रीय योजना के कार्यान्यन के लिए प्रक्रम उपदर्शित करना;
(घ) क्षेत्रीय योजना, प्रकार्य योजना, उपक्षेत्रीय योजना और परियोजना प्लान के कार्यान्वयन का पुनर्विलोकन करना;
(ङ) व्यापक परियोजनाओं का चयन और अनुमोदन करना, पूर्विकता विकास की मांग करना और उन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए ऐसी सहायता की व्यवस्था करना जो बोर्ड ठीक समझे ;
(च) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर, किसी ऐसे नगर क्षेत्र का, जिसका उसकी अवस्थिति, जनसंख्या और विकास की संभाव्यता को ध्यान में रखते हुए, क्षेत्रीय योजना के उद्देश्यों की पूर्ति की दृष्टि से विकास किया जा सके, संबंधित राज्य सरकार के परामर्श से, चयन करना;
(छ) समिति को ऐसे अन्य कृत्य सौंपना, जो वह इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे ।
9. समिति के कृत्य-(1) समिति के कृत्य-
(क) क्षेत्रीय योजना और प्रकार्य योजनाओं को तैयार करने में और उनके समन्वित कार्यान्वयन में; और
(ख) उपक्षेत्रीय योजनाओं और सभी परियोजना प्लानों की यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे क्षेत्रीय योजना के अनुरूप हैं जांच करने में,
बोर्ड की सहायता करना होगा ।
(2) समिति किसी उपक्षेत्रीय योजना या किसी परियोजना प्लान को संशोधित या उपान्तरित करने के लिए बोर्ड से ऐसी सिफारिश कर सकेगी जो वह आवश्यक समझे ।
(3) समिति ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करेगी जो बोर्ड द्वारा उसे सौंपे जाएं ।
अध्याय 4
क्षेत्रीय योजना
10. क्षेत्रीय योजना की अन्तर्वस्तुएं-(1) क्षेत्रीय योजना एक लिखित विवरण होगी और उसके साथ ऐसे नक्शे, आरेख, निदर्शचित्र और वर्णात्मक सामग्री होगी, जो बोर्ड क्षेत्रीय योजना में अन्तर्विष्ट प्रस्तावों को स्पष्ट या निदर्शित करने के प्रयोजन के लिए समुचित समझे और ऐसा प्रत्येक नक्शा, आरेख, निदर्शचित्र और वर्णनात्मक सामग्री क्षेत्रीय योजना का भाग समझी जाएगी ।
(2) क्षेत्रीय योजना में वह रीति, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भूमि का, चाहे उस पर विकास करके या संरक्षण द्वारा या अन्यथा, उपयोग किया जाएगा और ऐसे अन्य विषय उपदर्शित किए जाएंगे, जिनका राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है और ऐसी प्रत्येक योजना में निम्नलिखित बातें सम्मिलित होंगी, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की उन्नति और उसके संतुलित विकास को अग्रसर करने के लिए आवश्यक हैं, अर्थात्: -
(क) भूमि के उपयोग के संबंध में नीति और विभिन्न उपयोगों के लिए भूमि का आबंटन ;
(ख) बृहत नगर बस्ती प्रतिरूप के लिए प्रस्ताव ;
(ग) भावी विकास के लिए उपयुक्त आर्थिक आधार की व्यवस्था करने के लिए प्रस्ताव ;
(घ) परिवहन और संचार के बारे में प्रस्ताव, जिनके अन्तर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सेवारत रेलें और धमनीमार्ग भी हैं ;
(ङ) पेयजल के प्रदाय और जल निकास के लिए प्रस्ताव ;
(च) उन क्षेत्रों को, जिनका तुरंत विकास किए जाने की आवश्यकता है, पूर्विकता क्षेत्र" के रूप में उपदर्शित किया जाना ; और
(छ) ऐसे अन्य विषय, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की उन्नति और संतुलित विकास की उचित योजना बनाने के लिए, बोर्ड द्वारा, भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र की सहमति से सम्मिलित किए जाएं ।
11. सर्वेक्षण और अध्ययन-क्षेत्रीय योजना तैयार करने के लिए, बोर्ड ऐसे सर्वेक्षण और अध्ययन, जो वह आवश्यक समझे, ऐसे व्यक्ति या व्यक्ति समूह द्वारा, जिन्हें वह इस निमित्त नियुक्त करे, करा सकेगा, और ऐसे विनिर्दिष्ट विषयों के संबंध में, जो बोर्ड द्वारा अवधारित किए जाएं, अध्ययन करने के लिए, विशेषज्ञ और परामर्शी भी सहयोजित कर सकेगा ।
12. क्षेत्रीय योजना तैयार करने के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया-(1) किसी क्षेत्रीय योजना को अन्तिम रूप से तैयार करने के पूर्व बोर्ड, समिति की सहायता से क्षेत्रीय योजना का प्रारूप तैयार करेगा और उसकी एक प्रति निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराते हुए और ऐसे प्ररूप तथा रीति से जो, विहित की जाएं, एक सूचना प्रकाशित करते हुए जिसमें ऐसी तारीख के पूर्व, जो सूचना में विहित की जाए, क्षेत्रीय योजना के प्रारूप के बारे में किसी व्यक्ति से आक्षेप और सुझाव मांगे गए हों, उसे प्रकाशित करेगा ।
(2) बोर्ड ऐसे प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी को, जिसकी स्थानीय सीमाओं के भीतर क्षेत्रीय योजना में आने वाली भूमि स्थित है, क्षेत्रीय योजना के प्रारूप की बाबत कोई व्यपदेशन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर देगा ।
(3) बोर्ड, ऐसे सभी आक्षेपों, सुझावों और व्यपदेशनों पर जो बोर्ड को प्राप्त हों, विचार करने के पश्चात् अन्तिम रूप से क्षेत्रीय योजना तैयार करेगा ।
13. क्षेत्रीय योजना के प्रवर्तन में आने की तारीख-(1) योजना के अन्तिम रूप से तैयार कर लिए जाने के तुरंत पश्चात् बोर्ड ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, यह कथन करते हुए एक सूचना प्रकाशित करेगा कि उसके द्वारा क्षेत्रीय योजना अन्तिम रूप से तैयार कर ली गई है और उसमें उन स्थानों के नाम कथित होंगे, जहां क्षेत्रीय योजना की प्रतिलिपि का सभी युक्तियुक्त समयों पर निरीक्षण किया जा सकता है और पूर्वोक्त सूचना के प्रथम प्रकाशन की तारीख पर, क्षेत्रीय योजना प्रवर्तन में आएगी ।
(2) क्षेत्रीय योजना का, धारा 12 द्वारा यथा अपेक्षित, पूर्व प्रकाशन के पश्चात्, प्रकाशन इस बात का निश्चायक सबूत होगा कि क्षेत्रीय योजना सम्यक् रूप से तैयार कर ली गई है ।
14. क्षेत्रीय योजना के उपान्तर-(1) बोर्ड, उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उसके द्वारा अन्तिम रूप से तैयार की गई क्षेत्रीय योजना में ऐसे उपान्तर कर सकेगा, जो वह ठीक समझे । वे उपान्तर ऐसे होंगे जिनसे, उसकी राय में, क्षेत्रीय योजना के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होता है और जो भूमि के उपयोगों के विस्तार से या जनसंख्या की सघनता के मानकों से संबंधित नहीं है ।
(2) अन्तिम रूप से तैयार की गई क्षेत्रीय योजना में कोई उपान्तर करने के पूर्व बोर्ड ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, एक सूचना जिसमें वे उपान्तर जो अन्तिम रूप से तैयार की गई क्षेत्रीय योजना में किए जाने के लिए प्रस्थापित हैं, उपदर्शित किए गए हों, तथा जिसमें ऐसी तारीख के पूर्व, जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, प्रस्तावित उपान्तरों के संबंध में किसी भी व्यक्ति से आक्षेव और सुक्षाव मांगे गए हों, प्रकाशित करेगा और ऐसे सभी आक्षेप और सुझाव पर विचार करेगा जो उसे इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पहले प्राप्त हों ।
(3) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक उपान्तर ऐसी रीति से, जो बोर्ड विनिर्दिष्ट करे, प्रकाशित किया जाएगा और उपान्तर या तो ऐसे प्रकाशन की तारीख को या ऐसी पश्चात्वर्ती तारीख को, जिसे बोर्ड नियत करे, प्रवर्तन में आएंगे ।
(4) यदि कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या किए जाने वाले प्रस्तावित उपान्तर ऐसे उपान्तर हैं जिनसे क्षेत्रीय योजना के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं अथवा क्या वे भूमि के उपयोग के विस्तार से या जनसंख्या की सघनता के मानकों से संबंधित हैं तो उसका विनिश्चय बोर्ड द्वारा किया जाएगा, जिसका उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा ।
15. क्षेत्रीय योजना का पुनर्विलोकन और पुनरीक्षण-(1) अन्तिम रूप से तैयार की गई क्षेत्रीय योजना के प्रवर्तन की तारीख से प्रति पांच वर्ष के पश्चात्, बोर्ड ऐसी क्षेत्रीय योजना का संपूर्ण रूप से पुनर्विलोकन करेगा और ऐसे पुनर्विलोकन के पश्चात् उसको नई क्षेत्रीय योजना से प्रतिस्थापित कर सकेगा या उसमें ऐसे उपान्तर अथवा परिवर्तन कर सकेगा, जो उसके द्वारा आवश्यक पाए जाएं ।
(2) जहां उस क्षेत्रीय योजना के स्थान पर जो पहले अंतिम रूप से तैयार की गई थी एक नई क्षेत्रीय योजना को प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव है या जहां अन्तिम रूप से तैयार की गई क्षेत्रीय योजना में कोई उपान्तर या परिवर्तन करने का प्रस्ताव है वहां, यथास्थिति, ऐसी नई योजना या उपान्तर अथवा परिवर्तन प्रकाशित किए जाएंगे और उनके संबंध में उसी रीति से कार्रवाई की जाएगी मानो वह धारा 12 और धारा 13 में निर्दिष्ट क्षेत्रीय योजना हो या मानो वे धारा 14 के अधीन बनाई गई क्षेत्रीय योजना में उपान्तर या परिवर्तन हों ।
अध्याय 5
प्रकार्य योजनाएं, उपक्षेत्रीय योजनाएं और परियोजना प्लान
16. प्रकार्य योजनाओं को तैयार करना-क्षेत्रीय योजना के प्रवर्तन में आ जाने के पश्चात् बोर्ड, समिति की सहायता से, उतनी प्रकार्य योजनाएं तैयार कर सकेगा, जितनी भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र के उचित मार्गदर्शन के लिए आवश्यक हों ।
17. उपक्षेत्रीय योजनाओं को तैयार करना-(1) प्रत्येक भाग लेने वाला राज्य उस राज्य के भीतर के उपक्षेत्र के लिए एक उपक्षेत्रीय योजना तैयार करेगा और संघ राज्यक्षेत्र, संघ राज्यक्षेत्र के भीतर के उपक्षेत्र के लिए एक उपक्षेत्रीय योजना तैयार करेगा ।
(2) प्रत्येक उपक्षेत्रीय योजना एक लिखित विवरण होगी और उसके साथ ऐसे नक्शे, आरेख, निदर्शचित्र और वर्णनात्मक सामग्री होगी जो भाग लेने वाला राज्य या संघ राज्यक्षेत्र ऐसी उपक्षेत्रीय योजना में अन्तर्विष्ट प्रस्तावों को स्पष्ट या निदर्शित करने के प्रयोजन के लिए समुचित समझे, और ऐसा प्रत्येक नक्शा, दस्तावेज, निदर्शचित्र और वर्णानात्मक सामग्री उपक्षेत्रीय योजना का भाग समझी जाएगी ।
(3) किसी उपक्षेत्रीय योजना में, उपक्षेत्रीय स्तर पर क्षेत्रीय योजना के विस्तारण के लिए निम्नलिखित बातें उपदर्शित की जा सकेंगी, अर्थात्: -
(क) भूमि के ऐसे विनिर्दिष्ट उपयोगों के लिए, जो क्षेत्रीय या उपक्षेत्रीय महत्व के हैं, क्षेत्रों का आरक्षण;
(ख) भावी नगर और बृहत् ग्राम बस्तियां, जिसमें उनका क्षेत्र, परियोजित जनसंख्या, प्रमुख आर्थिक कृत्य, लगभग स्थल और अवस्थिति उपदर्शित होगी;
(ग) जिले की सड़कों और बृहत् ग्राम बस्तियों को जोड़ने वाली सड़कों तक का सड़कतंत्र;
(घ) यातायात और परिवहन के समन्वय के लिए प्रस्ताव, जिसके अन्तर्गत टर्मिनल सुविधाएं भी हैं;
(ङ) उपक्षेत्रीय स्तर पर पूर्विकता क्षेत्र, जिनके लिए तुरन्त योजनाएं आवश्यक हैं;
(च) पेयजल के प्रदाय और जल निकास के लिए प्रस्ताव; और
(छ) कोई अन्य विषय, जो उपक्षेत्र के समुचित विकास के लिए आवश्यक है ।
18. परियोजना प्लान को तैयार करना-कोई भाग लेने वाला राज्य या संघ राज्यक्षेत्र, यथास्थिति, या तो स्वयं या एक या अधिक भाग लेने वाले राज्यों या संघ राज्यक्षेत्र के सहयोग से क्षेत्रीय योजना, प्रकार्य योजना या उपक्षेत्रीय योजना की एक या अधिक बातों के लिए परियोजना प्लान तैयार कर सकेगा ।
19. उपक्षेत्रीय योजनाओं का बोर्ड को प्रस्तुत किया जाना-(1) किसी उपक्षेत्रीय योजना को प्रकाशित करने के पूर्व, यथास्थिति, प्रत्येक भाग लेने वाला राज्य और संघ राज्यक्षेत्र, ऐसी योजना को बोर्ड को निर्दिष्ट करेगा जिससे बोर्ड यह सुनिश्चित करने में समर्थ हो सके कि ऐसी योजना क्षेत्रीय योजना के अनुरूप है ।
(2) बोर्ड, उपक्षेत्रीय योजना की परीक्षा करने के पश्चात् उपक्षेत्रीय योजना की बाबत अपने संप्रेक्षण ऐसी योजना की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के भीतर उस भाग लेने वाले राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को, जिसके द्वारा ऐसी योजना उसे निर्दिष्ट की गई थी, संसूचित करेगा ।
(3) यथास्थिति, भाग लेने वाला राज्य या संघ राज्यक्षेत्र, बोर्ड द्वारा किए गए संप्रेक्षणों पर सम्यक् रूप से विचार करने के पश्चात् उपक्षेत्रीय योजना को यह सुनिश्चित करने के पश्चात् कि वह क्षेत्रीय योजना के अनुरूप है, अंतिम रूप देगा ।
20. उपक्षेत्रीय योजनाओं आदि का कार्यान्वयन-यथास्थिति, प्रत्येक भाग लेने वाला राज्य या संघ राज्यक्षेत्र अपने द्वारा धारा 19 की उपधारा (3) के अधीन अंतिम रूप से तैयार की गई उपक्षेत्रीय योजना और अपने द्वारा तैयार किए गए परियोजना प्लान के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होगा ।
अध्याय 6
वित्त, लेखा और लेखापरीक्षा
21. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-(1) केन्द्रीय सरकार संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोजन के पश्चात् बोर्ड को ऐसी धनराशि का अनुदान कर सकेगी और उधार दे सकेगी, जो वह सरकार बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक समझे ।
(2) केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोजन के पश्चात्, बोर्ड को ऐसी अन्य धनराशियों का, जो बोर्ड के सदस्य-सचिव, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य पारिश्रमिक की पूर्ति करने के लिए आवश्यक हों, और ऐसी रकमों को भी, जो बोर्ड के अन्य प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए आवश्यक हों, संदाय करेगी ।
22. निधि का गठन-(1) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड निधि के नाम से एक निधि का गठन किया जाएगा और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे: -
(क) धारा 21 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को किए गए कोई अनुदान और दिए गए कोई उधार;
(ख) भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र द्वारा बोर्ड को संदत्त सभी राशियां;
(ग) बोर्ड को ऐसे अन्य स्रोतों से प्राप्त सभी राशियां, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र के परामर्श से विनिश्चित किए जाएं ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट उक्त निधि में जमा की गई राशियों का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाएगा: -
(क) बोर्ड के सदस्य-सचिव, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य पारिश्रमिक की पूर्ति और बोर्ड के अन्य प्रशासनिक खर्चों की पूर्ति, किन्तु कुल व्यय धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन इस प्रयोजन के लिए विनियोजित रकम से अधिक नहीं होंगे;
(ख) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सर्वेक्षण और प्रारम्भिक अध्ययन का संचालन और योजनाएं बनाना;
(ग) उपक्षेत्रीय योजनाओं और परियोजना प्लान के कार्यान्वयन के लिए भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र को वित्तीय सहायता प्रदान करना; और
(घ) प्रत्याकर्षण क्षेत्र के विकास के लिए संबंधित राज्य को ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो ऐसे राज्य और बोर्ड के बीच तय पाई जाएं, वित्तीय सहायता प्रदान करना ।
23. बजट-बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा और उसे केन्द्रीय सरकार को आगामी वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ के कम से कम तीन मास पूर्व भेजेगा ।
24. वार्षिक रिपोर्ट-बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें उस वित्तीय वर्ष से, जिसमें ऐसी रिपोर्ट तैयार की जाती है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलापों का पूरा विवरण देगा और ऐसी तारीख के पूर्व, जो विहित की जाए, उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार, भाग लेने वाले राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र को भेजेगा ।
25. लेखा और लेखापरीक्षा-बोर्ड के लेखे ऐसी रीति से रखे जाएंगे और उनकी ऐसी रीति से लेखापरीक्षा की जाएगी, जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित की जाए और बोर्ड, ऐसी तारीख से पूर्व जो विहित की जाए, अपने संपरीक्षित लेखे की एक प्रति, उसकी बाबत लेखापरीक्षक की रिपोर्ट सहित, केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
26. वार्षिक रिपोर्ट और लेखा परीक्षक की रिपोर्ट का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार, वार्षिक रिपोर्ट और लेखा परीक्षक की रिपोर्ट उनकी प्राप्ति के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
27. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में अन्तर्विष्ट, उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
28. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, बोर्ड को ऐसे निदेश दे सकेगी, जो वह अधिनियम के दक्ष प्रशासन के लिए ठीक समझे, और जब कोई ऐसे निदेश दिए जाते हैं तो बोर्ड ऐसे निदेशों का पालन करेगा ।
29. क्षेत्रीय योजना का अतिक्रमण-(1) अंतिम रूप से प्रकाशित क्षेत्रीय योजना के प्रवर्तन में आने से ही उस क्षेत्र में कोई ऐसा विकास नहीं किया जाएगा जो अंतिम रूप से प्रकाशित क्षेत्रीय योजना से असंगत हो ।
(2) जहां बोर्ड का यह समाधान हो जाता है कि किसी भाग लेने वाले राज्य या संघ राज्यक्षेत्र ने कोई ऐसा क्रियाकलाप किया है या कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय योजना का अतिक्रमण होता है, वहां वह लिखित सूचना द्वारा, यथास्थिति, संबंधित भाग लेने वाले राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को क्षेत्रीय योजना के ऐसे अतिक्रमण को ऐसे समय के भीतर, जो उक्त सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, बंद करने का निदेश दे सकेगा और भाग लेने वाले संबंधित राज्य अथवा संघ राज्यक्षेत्र की ओर से ऐसे क्रियाकलाप को रोकने में किसी लोप या इंकार की दशा में, भाग लेने वाले संबंधित राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को दी जाने वाली ऐसी वित्तीय सहायता को, जो बोर्ड आवश्यक समझे, विधारित कर सकेगा ।
30. बोर्ड को तकनीकी सहायता-(1) केन्द्रीय सरकार अपने नगर और ग्राम योजना संगठन को निदेश दे सकेगी कि वह बोर्ड को ऐसी तकनीकी सहायता, जो वह सरकार आवश्यक समझे और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो परस्पर तय पाई जाएं, दे और किसी भाग लेने वाले राज्य की सरकार उस सरकार के नगर योजना विभाग को निदेश दे सकेगी कि वह बोर्ड को ऐसी तकनीकी सहायता दे जो वह सरकार, आवश्यक समझे ।
(2) बोर्ड, समिति को अपने कृत्यों का निर्वहन करने में समर्थ बनाने की दृष्टि से उपधारा (1) के अधीन अपने को प्राप्त तकनीकी सहायता में से, समिति को ऐसी तकनीकी सहायता उपलब्ध करा सकेगा जिसकी समिति अपेक्षा करे ।
31. बोर्ड के अधिकारी और कर्मचारी-(1) बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जो वह आवश्यक समझे ।
(2) बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों के निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।
32. प्रत्यायोजन की शक्ति-बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगा कि किसी ऐसे कृत्य या (क्षेत्रीय योजना का अनुमोदन करने और विनियम बनाने की शक्ति से भिन्न) ऐसी शक्ित या ऐसे कर्तव्य का, जिसका बोर्ड इस अधिनियम के अधीन निष्पादन, प्रयोग या निर्वहन करे, ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे व्यक्ति या व्यक्ितयों द्वारा भी, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, निष्पादन, प्रयोग या निर्वहन किया जा सकेगा, और जहां शक्ति का कोई ऐसा प्रत्यायोजन किया जाता है, वहां वह व्यक्ति या वे व्यक्ति, जिनको ऐसी शक्ति प्रत्यायोजित की जाती है, इन शक्तियों का निष्पादन, प्रयोग या निर्वहन उसी रीति से और उसी सीमा तक करेंगे मानो वे उन्हें अधिनियम द्वारा प्रत्यक्षतः, न कि प्रत्यायोजन के रूप में, प्रदत्त की गई हो ।
33. प्रवेश करने की शक्ति-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, कोई व्यक्ति, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त साधारणतया या विशेषतया प्राधिकृत किया गया है, किसी भूमि या परिसर में सभी युक्तियुक्त समयों पर प्रवेश कर सकेगा और वहां ऐसी बातें कर सकेगा, जो किन्हीं संकर्मों को विधिपूर्वक करने के प्रयोजन के लिए या इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा किसी शक्ति के प्रयोग या किसी कृत्य के पालन में प्रारम्भिक या आनुषंगिक कोई सर्वेक्षण, परीक्षण या अन्वेषण, करने के लिए आवश्यक हो:
परन्तु ऐसा कोई व्यक्ति किसी भवन में या निवासगृह से संलग्न किसी बंद अहाते या उद्यान में उसके अधिभोगी को उसमें प्रवेश करने के अपने आशय की कम से कम तीन दिन की लिखित पूर्व सूचना दिए बिना प्रवेश नहीं करेगा ।
34. बोर्ड के सदस्य-सचिव, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों का लोक सेवक होना-बोर्ड का सदस्य-सचिव, अधिकारी और अन्य कर्मचारी, जब वह इस अधिनियम के किसी उपबंध के अनुसरण में कार्य कर रहा हो या उसका इस प्रकार कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
35. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही बोर्ड के विरुद्ध या बोर्ड के किसी सदस्य या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध, जिसके अन्तर्गत कोई अन्य ऐसा व्यक्ति भी है जिसे बोर्ड द्वारा इसके अधीन किसी शक्ति का प्रयोग या किसी कृत्य का निर्वहन करने के लिए प्राधिकृत किया गया है, नहीं होगी ।
36. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) बोर्ड और समिति की संरचना और सदस्यों की संख्या जैसा कि, क्रमशः, धारा 3 की उपधारा (3) और धारा 4 की उपधारा (2) द्वारा विहित किए जाने की अपेक्षा है;
(ख) सदस्यों के पद के निबंधन और शर्तें, जैसा कि धारा 3 की उपधारा (4) द्वारा विहित किए जाने की अपेक्षा है;
(ग) वह प्ररूप और रीति, जिसमें धारा 12 की उपधारा (1) और धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन सूचना प्रकाशित की जाएगी;
(घ) वह रीति, जिसमें धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन सूचना प्रकाशित की जाएगी;
(ङ) वह प्ररूप, जिसमें और वह समय, जब बोर्ड धारा 23 के अधीन अपना बजट और धारा 24 के अधीन अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा और वह रीति जिसमें बोर्ड के लेखा धारा 25 के अधीन रखे जाएंगे और उनकी लेखा परीक्षा की जाएगी;
(च) धारा 33 के अधीन प्रवेश करने की शक्तियों का प्रयोग करने के संबंध में शर्तें और निर्बंधन और उससे संबंधित अन्य विषय; और
(छ) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाना है या किया जाए अथवा जिसके संबंध में नियमों द्वारा उपबन्ध किया जाना है या किया जाए ।
37. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम से और इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) वह रीति जिसमें और वह प्रयोजन जिनके लिए बोर्ड धारा 11 के अधीन किसी व्यक्ति को अपने साथ सहयोजित कर सकेगा;
(ख) धारा 31 की उपधारा (2) के अधीन बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें; और
(ग) कोई अन्य विषय जिसके संबंध में विनियमों द्वारा उपबन्ध किया जाना है या किया जाए ।
38. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, यथास्थिति, उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि, यथास्थिति, वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएग । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
39. बोर्ड का विघटन-(1) जहां केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि वे प्रयोजन, जिनके लिए इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की स्थापना की गई थी, सारतः पूरे कर लिए गए हैं, या बोर्ड अपने उद्देश्यों में असफल रहा है जिससे कि केन्द्रीय सरकार की राय में, बोर्ड का विद्यमान बना रहना अनावश्यक हो गया है तो वह सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, घोषणा कर सकेगी कि बोर्ड उस तारीख से, जो अधिसूचना में विनिदिष्ट की जाए, विघटित कर दिया जाएगा और तदनुसार बोर्ड विघटित हो गया समझा जाएगा ।
(2) उक्त तारीख से-
(क) ऐसी सभी सम्पत्ति, निधियां और शोध्य रकमें, जो बोर्ड में निहित हैं या उसके द्वारा वसूली योग्य हैं, केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएंगी या उसके द्वारा वसूली योग्य होंगी;
(ख) ऐसे सभी दायित्व, जो बोर्ड के विरुद्ध प्रवर्तनीय हैं, केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध प्रवर्तनीय होंगे;
(ग) ऐसे किसी विकास को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए, जो बोर्ड द्वारा पूर्णतः कार्यान्वित नहीं किया गया है और खण्ड (क) में निर्दिष्ट सम्पत्ति, निधियों और शोध्य रकमों को वसूल करने के प्रयोजन के लिए, बोर्ड के कृत्यों का निर्वहन केन्द्रीय सरकार द्वारा किया जाएगा ।
(3) इस धारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह केन्द्रीय सरकार को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार बोर्ड का पुनर्गठन करने से निवारित करती है ।
40. भूमि का अर्जन और भूमि के संबंध में अधिकारों का अवधारण भाग लेने वाले राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार द्वारा किया जाना-शंकाओं के निराकरण के लिए, यह घोषित किया जाता है कि भूमि का अर्जन या किसी भूमि या अन्य सम्पत्ति में या उसके संबंध में किसी अधिकार या हित का अवधारण, जहां वह किसी क्षेत्रीय योजना, प्रकार्य योजना, उपक्षेत्रीय योजना या परियोजना प्लान को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हो, यथास्थिति, भाग लेने वाले संबंधित राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार द्वारा, उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार किया जाएगा ।
41. निरसन और व्यावृत्ति-(1) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अध्यादेश, 1984 (1984 का अध्यादेश सं० 11) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
अनुसूची
[धारा 2 (च) देखिए]
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में निम्नलिखित क्षेत्र समाविष्ट होंगे: -
1. दिल्ली
सम्पूर्ण दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र ।
2. हरियाणा
(i) सम्पूर्ण गुड़गांव जिला जिसमें गुड़गांव, नूह और फिरोजपुर-झिरका तहसीलें समाविष्ट हैं;
(ii) सम्पूर्ण फरीदाबाद जिला जिसमें बल्लभगढ़, पलवल और हाथिन तहसीलें समाविष्ट हैं;
(iii) सम्पूर्ण रोहतक जिला जिसमें रोहतक, झज्जर, बहादुरगढ़, मेहम और कोसली तहसीलें समाविष्ट हैं;
(iv) सम्पूर्ण सोनीपत जिला जिसमें सोनीपत और गोहाना तहसीलें समाविष्ट हैं; और
(v) करनाल जिले की पानीपत तहसील और मोहिन्द्रगढ़ जिले की रिवाड़ी तहसील ।
3. उत्तर प्रदेश
(i) सम्पूर्ण बुलंदशहर जिला जिसमें अनूपशहर, बुलंदशहर, खुर्जा और सिकन्दराबाद तहसीलें समाविष्ट हैं;
(ii) सम्पूर्ण मेरठ जिला जिसमें मेरठ, बागपत, मवाना और सरधना तहसीलें समाविष्ट हैं; और
(iii) सम्पूर्ण गाजियाबाद जिला जिसमें गाजियाबाद और हापुड़ तहसीलें समाविष्ट हैं;
4. राजस्थान
(i) अलवर जिला की निम्नलिखित सम्पूर्ण तहसीलें, अर्थात् बेहरोड़, मंडावर, किशनगढ़ और तिजारा; और
(ii) अलवर तहसील का भाग जिसमें वह क्षेत्र समाविष्ट है जिसकी सीमा उत्तर में मंडावर और किशनगढ़ की तहसील सीमाएं, पूर्व में हरियाणा के गुड़गांव जिला की फिरोजपुर-झिरका तहसील और अलवर तहसील की सीमाएं, दक्षिण में बराह नदी, पश्चिम दिशा में उमरैन झील तक, तथा तत्पश्चात् उमरैन झील की दक्षिणी सीमाओं के साथ-साथ उस बिन्दु तक जहां उमरैन झील और अलवर से बैराट जाने वाला राजमार्ग मिलता है और वहां से पश्चिम में वायुकोण की ओर पहाड़ों के पार उस बिन्दु तक हैं जहां अलवर और बानसूर की तहसील सीमाएं मिलती हैं ।
स्पष्टीकरण-जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, इस अनुसूची में किसी जिले या तहसील के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह 27 अगस्त, 1984 को, जो लोक सभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड विधेयक, 1984 के पुरःस्थापन की तारीख है, उस जिले या तहसील में समाविष्ट क्षेत्रों के प्रति निर्देश है ।
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