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राष्ट्रीय जूट बोर्ड अधिनियम, 2008 ( National Jute Board Act, 2008 )


 

राष्ट्रीय जूट बोर्ड अधिनियम, 2008

(2009 का अधिनियम संख्यांक 12)

[12 फरवरी, 2009]

जूट की खेती और जूट उत्पादों के विनिर्माण और विपणन

के विकास के लिए राष्ट्रीय जूट बोर्ड की स्थापना

करने और उससे संबंधित और उसके

आनुषंगिक विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के उनसठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय जूट बोर्ड अधिनियम, 2008 है

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार धारा 3 के प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे;

(ख) बोर्ड" से धारा 3 के अधीन गठित राष्ट्रीय जूट बोर्ड अभिप्रेत है;

(ग) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;

(घ) परिषद्" से जूट विनिर्मिति विकास परिषद् अधिनियम, 1983 (1983 का 27) का धारा 3 के अधीन स्थापित जूट विनिर्मिति विकास परिषद् अभिप्रेत है;

(ङ) जूट" से जूट, केनफ और मेस्टा का पौधा अभिप्रेत है;

(च) जूट विनिर्मिति" का वही अर्थ है, जो जूट विनिर्मिति उपकर अधिनियम, 1983 (1983 का 28) में है;

(छ) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है;

(ज) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(झ) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं;

(ञ) सोसाइटी" से राष्ट्रीय जूट विविधता केन्द्र अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्थापित सोसाइटी है और सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत है;

(ट) वर्ष" से ऐसा वर्ष अभिप्रेत है जो 1 अप्रैल को प्रारंभ होकर, आगामी 31 मार्च को समाप्त होता है ।

अध्याय 2

राष्ट्रीय जूट बोर्ड

3. बोर्ड का गठन और निगमन-(1) केन्द्रीय सरकार, नियत दिन से ही, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राष्ट्रीय जूट बोर्ड के नाम एक बोर्ड का गठन करेगी ।

(2) बोर्ड पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी, जिसे जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।

(3) बोर्ड का मुख्यालय पश्चिमी बंगाल राज्य में कोलकाता में या ऐसे अन्य स्थान पर होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे और बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, भारत में या भारत के बाहर अन्य स्थानों पर कार्यालय या अभिकरण स्थापित कर सकेगा ।

(4) बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-

(क)         वस्त्र से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय का भारसाधक सचिव, जो बोर्ड का पदेन अध्यक्ष होगा;

(ख)        तीन संसद् सदस्य जिनमें से दो, लोक सभा के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित किए जाएंगे और एक, राज्य सभा के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित किया जाएगा;

(ग)         भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय का अपर सचिव तथा वित्तीय सलाहकार, पदेन;

(घ)         भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय का संयुक्त सचिव (जूट), पदेन;

(ङ) संयुक्त सचिव की पंक्ति के दो सदस्य, जो निम्नलिखित से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे, अर्थात्ः-

(i) कृषि; और

(ii) खाद्य और सार्वजनिक वितरण;

(च) तीन सदस्य, जिन्हें क्रमशः आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मेघालय, उड़ीसा, त्रिपुरा और पश्चिमी बंगाल राज्यों की सरकारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए वर्णमाला के क्रम में चक्रानुक्रम से केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । नामनिर्देशन, राज्य सरकार के उन पदधारियों में से होगा, जो उस राज्य सरकार में सचिव की पंक्ति का पद धारण कर रहे हों और जो जूट या वस्त्रों से संबंधित कार्य कर रहे हों;

(छ) जूट कृषकों के तीन सदस्य जिनमें से एक, पश्चिमी बंगाल राज्य से और दो, अन्य राज्यों से चक्रानुक्रम के आधार पर केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे;

(ज) जूट कार्मिकों के तीन सदस्य जिनमें से एक, पश्िचमी बंगाल से और दो, अन्य राज्यों से चक्रानुक्रम के आधार पर केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे;

() केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले, संबद्ध जूट प्रौद्योगिकी और संबंधित क्षेत्र से दो विशेषज्ञ;

(ञ) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले, जूट उद्योग से संबद्ध, सूक्ष्म उद्यम", लघु उद्यम" और मध्यम उद्यम" से दो सदस्य ।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजन के लिए मध्यम उद्यम", सूक्ष्म उद्यम" और लघु उद्यम" पदों के वही अर्थ हैं, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (2006 का 27) की धारा 2 के खंड (छ), खंड (ज) और खंड (ड) में हैं;

(ट) दो सदस्य, जिन्हें संगठित सेक्टर में जूट उद्योग का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

(ठ) दो सदस्य, जिन्हें विकेंद्रीकृत क्षेत्र में जूट उद्योग का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

(ड) दो सदस्य, जिन्हें जूट उत्पादों के निर्यातकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

(ढ) निदेशक, भारतीय जूट उद्योग अनुसंधान संगम, पदेन;

(ण) प्रधानाचार्य, जूट प्रौद्योगिकी संस्थान, पदेन;

(त) निदेशक, राष्ट्रीय जूट और समवर्गी फाइबर प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, पदेन;

(थ) निदेशक, केन्द्रीय जूट और समवर्गी फाइबर अनुसंधान संस्थान, पदेन;

(द) अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, भारतीय जूट निगम, पदेन;

(ध) जूट आयुक्त, पदेन;

(न) सचिव, राष्ट्रीय जूट बोर्ड, जो बोर्ड का पदेन सदस्य-सचिव, होगा ।

(5) पदेन सदस्यों से भिन्न सदस्यों की पदावधि और उनमें रिक्तियों को भरने की रीति और ऐसे सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वह होगी जो विहित की जाए ।

(6) बोर्ड के सदस्यों का पद उनके धारकों को, संसद् के किसी भी सदन का सदस्य चुने जाने से या होने से निरर्हित नहीं करेगा

(7) अध्यक्ष, बोर्ड के अधिवेशनों की अध्यक्षता करने के अतिरिक्त, बोर्ड की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो बोर्ड द्वारा उसे समनुदेशित किए जाएं तथा ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, जो विहित किए जाएं ।

(8) बोर्ड अपने सदस्यों में से एक सदस्य को उपाध्यक्ष निर्वाचित करेगा जो अध्यक्ष की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।

(9) बोर्ड ऐसे समयों और स्थानों पर अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कारबार के संचालन के संबंध में (जिसके अंतर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है), प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुसरण करेगा, जो विनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं ।

4. सचिव और अन्य अधिकारी-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए सचिव और ऐसे अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकेगी जो वह आवश्यक समझे ।

(2) बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।

अध्याय 3

बोर्ड के कृत्य

5. बोर्ड के कृत्य-(1) बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह जूट और जूट उत्पादों के विकास में, ऐसे उपायों द्वारा, जिन्हें वह ठीक समझे, अभिवृद्धि करे ।

(2) पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड निम्नलिखित के लिए उपाय कर सकेगा-

(i) स्कीमों के बनाने, विस्तारण कार्य के विषय में जूट की खेती के प्रति समेकित दृष्टिकोण विकसित करना, जूट के उत्पादन में वृद्धि और उसकी क्वालिटी में सुधार के लिए लक्षित स्कीमों का कार्यान्वयन और मूल्यांकन करना;

(ii) बेहतर क्वालिटी के कच्चे जूट के उत्पादन का संवर्धन करना;

(iii) कच्चे जूट की उत्पादकता में वृद्धि करना;

(iv) कच्चे जूट के बेहतर विपणन और कीमतों को स्थिर रखने के लिए संवर्धन करना या उसके लिए प्रबंध करना;

(v) कच्चे जूट और जूट उत्पादों के मानकीकरण का संवर्धन करना;

(vi) अपशिष्ट हटाने, अधिकतम उत्पाद प्राप्त करने, क्वालिटी में सुधार और लागत में कमी करने की दृष्टि से जूट उद्योग के लिए दक्षता मानों का सुझाव देना;

(vii) कच्चा जूट उगाने वालों और जूट उत्पादों के विनिर्माताओं के लिए उपयोगी जानकारी का प्रचार करना;

(viii) कच्चे जूट और जूट उत्पादों की क्वालिटी नियंत्रण का संवर्धन करना और उसके लिए उपाय करना;

(ix) कच्चे जूट के प्रसंस्करण, क्वालिटी, श्रेणीकरण और पैकेजिंग की तकनीकों में सुधार के लिए अध्ययन और अनुसंधान में सहायता करना और उन्हें प्रोत्साहित करना;

(x) कच्चे जूट और जूट उत्पादों के संबंध में सांख्यिकी के संग्रहण और सूत्रीकरण पर केन्द्रीत, सर्वेक्षण या अध्ययन का संवर्धन करना और उनका किया जाना;

(xi) जूट विनिर्मितियों के मानकीकरण का संवर्धन करना;

(xii) जूट उद्योग की दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि करके जूट विनिर्मितियों के उत्पादन के विकास का संवर्धन करना;

(xiii) जूट सेक्टर से संबंधित वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी, आर्थिक और विपणन अनुसंधान को प्रायोजित करना, उसमें सहायता करना, उसका समन्वय करना, उसे प्रोत्साहित करना या आरंभ करना;

(xiv) जूट विनिर्मितियों के लिए देश के भीतर और बाहर विद्यमान बाजारों को बनाए रखना और उनमें सुधार करना तथा नए बाजारों का विकास करना और देशी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऐसी विनिर्मितियों की मांग के अनुरूप विपणन युक्तियां तैयार करना;

(xv) सामग्री, उपस्कर, उत्पादन की प्रणालियों, उत्पाद विकास, जिसमें नई सामग्री, उपस्कर, पद्धतियों की खोज और जूट उद्योग में पहले से ही उपयोग में लाई जा रही प्रणालियों का विकास भी सम्मिलित है, से संबंधित विषयों के वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी और आर्थिक अनुसंधान का कार्य प्रायोजित करना, उसमें सहायता करना, उसका समन्वय करना या उसे प्रोत्साहित करना;

(xvi) उद्यमियों, कारीगरों, शिल्पकारों, डिजाइनरों, विनिर्माताओं, निर्यातकर्ताओं, गैर-सरकारी अभिकरणों की निम्नलिखित रीति में सहायता के रूप में आवश्यक अवसंरचनात्मक सुविधाओं और विभिन्न प्रकार के जूट उत्पादों के विकास के लिए सहायक परिस्थितियों का उपबंध करना और सृजन करना, अर्थात्ः-

(क) भारत में और भारत के बाहर अनुसंधान और विकास संस्थाओं तथा अन्य संगठनों से प्रौद्योगिकी का अंतरण;

(ख) उद्यमियों को उनकी परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए सहायक सेवाएं उपलब्ध कराना जिसमें तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण सम्मिलित है;

(ग) उद्यम संबंधी विकास कार्यक्रमों का आयोजन करना;

(घ) भारत में और भारत के बाहर विपणन संवर्धन नीतियों की योजना बनाना और निष्पादन करना जिनमें प्रदर्शनियां, प्रदर्शन मीडिया प्रचार सम्मिलित हैं;

(ङ) सहायिकी या बीज पूंजी के रूप में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना;

(च) जूट और जूट वस्त्र सेक्टर में लगे हुए विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभिकरणों के साथ पारस्परिक सहयोग के लिए विभिन्न जूट उत्पादों में लगे हुए या हितबद्ध व्यक्तियों के लिए एक मंच उपलब्ध कराना;

(xvii) जूट और जूट उत्पादों के संवर्धन और विकास के प्रयोजन के लिए कार्यशालाएं, सम्मेलन, व्याख्यान, सेमीनार, पुनश्चर्या पाठ्यक्रम आयोजित करना और अध्ययन समूह स्थापित करना;

(xviii) जूट की फसल की क्वालिटी का सुधार और सगर्भता अवधि को कम करने के लिए जूट के बीज पर अनुसंधान करना;

(xix) जूट सेक्टर के सतत मानव संसाधन विकास के लिए उपायों को सम्मिलित करना और उनके लिए आवश्यक निधियों की व्यवस्था करना;

(xx) जूट सेक्टर और प्रौद्योगिकी विकास का आधुनिकीकरण;

(xxi) जूट उद्योग वालों और कर्मकारों के हितों का संरक्षण करने के लिए उपाय करना और उनकी आजीविका के साधनों में सुधार करके उनके कल्याण की अभिवृद्धि करना;

(xxii) जूट उद्योग में लगे हुए कर्मकारों के लिए कार्य करने की बेहतर परिस्थितियों और सुख-सुविधाओं में सुधार सुनिश्चित करना और उनकी व्यवस्था करना;

(xxiii) वैकल्पिक आधार पर जूट उगाने वालों और जूट विनिर्माताओं को रजिस्ट्रीकृत करना;

(xxiv) संकलन और प्रकाशन के लिए जूट और जूट उत्पादों से संबंधित सांख्यिकी का संग्रह करना;

(xxv) जूट सेक्टर के संवर्धन के प्रयोजन के लिए या भारत में और भारत के बाहर जूट और जूट उत्पादों के संवर्धन और विपणन के लिए शेयर पूंजी में अभिदाय करना या किसी अन्य निगमित निकाय के साथ कोई ठहराव करना (चाहे भागीदारी, संयुक्त उद्यम के रूप में या किसी अन्य रीति में) ।

(3) बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह-

(क) कच्चे जूट और जूट उद्योग के विकास से संबंधित सभी मामलों पर जिसके अंतर्गत जूट और जूट उत्पादों का आयात और निर्यात भी है, केन्द्रीय सरकार को परामर्श दे;

(ख) जूट सेक्टर के संबंध में ऐसी रिपोर्टें तैयार करे और प्रस्तुत करे जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे

अध्याय 4

संपत्ति और संविदा

6. परिषद् और सोसाइटी का बोर्ड में निहित होना-(1) नियत दिन से ही, परिषद् और सोसाइटी धारा 3 के अधीन गठित बोर्ड को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगी ।

(2) परिषद् और सोसाइटी के बारे में, जो उपधारा (1) के अधीन बोर्ड को अंतरित और उसमें निहित हो गई हैं, यह समझा जाएगा कि उसके अंतर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा जंगम और स्थावर पूर्ण स्वामित्व या निजी, मूर्त या अमूर्त, वर्तमान या समाश्रित किसी भी प्रकार की और कहीं भी स्थित सभी संपत्तियां हैं, जिनके अंतर्गत भूमि, भवन, मशीनरी, उपस्कर, नकदी अतिशेष, पूंजी, आरक्षितियां, आरक्षित निधि, विनिधान, अभिधृतियां, पट्टे और बही ऋण और ऐसी संपत्ति से उद्भूत होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित जो नियत दिन के ठीक पूर्व, यथास्थिति, परिषद् या सोसाइटी के स्वामित्व या कब्जे में या शक्ति में थे, चाहे वे भारत में हैं या भारत के बाहर, तत्संबंधी सभी लेखा बहियां और दस्तावेज भी हैं और उनके अंतर्गत, यथास्थिति, सोसाइटी या परिषद् के तत्समय विद्यमान किसी भी प्रकार के सभी उधार, दायित्व और बाध्यताएं भी हैं

7. परिषद् और सोसाइटी का बोर्ड में निहित होने का सामान्य प्रभाव-(1) नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान और, यथास्थिति, परिषद् या सोसाइटी को प्रभावित करने वाली सभी संविदाएं, करार और काम करने के बारे में ठहराव, जहां तक उनका संबंध, यथास्थिति, परिषद् या सोसाइटी से है, यथास्थिति, परिषद् या सोसाइटी के विरुद्ध प्रभावहीन हो जाएंगे या प्रवर्तनीय नहीं रहेंगे और उस बोर्ड के विरुद्ध या उसके पक्ष में, जिसमें परिषद् और सोसाइटी इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गई हैं, पूर्णतः प्रभावी और प्रवर्तनीय होंगे, तथा इस प्रकार पूर्णतः और प्रभावी रूप से प्रवर्तनीय होंगे मानो, यथास्थिति, परिषद् या सोसाइटी के बजाय बोर्ड को उसमें नामित किया गया हो या वह उसका एक पक्षकार रहा हो ।

(2) नियत दिन के ठीक पूर्व, परिषद् या सोसाइटी द्वारा या उसके विरुद्ध लंबित या विद्यमान कोई कार्यवाही, वाद या वादहेतुक, उस दिन से ही उस बोर्ड के द्वारा या उसके विरुद्ध जिसको वह इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गया है, उसी प्रकार जारी रखा जा सकेगा और प्रवर्तित किया जा सकेगा जैसे वह परिषद् या सोसाइटी द्वारा या उसके विरुद्ध तब प्रवृत्त किया जाता, जब यह अधिनियम पारित नहीं किया गया होता और, यथास्थिति, परिषद् या सोसाइटी द्वारा या उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं रहेगा ।

8. अनुज्ञप्तियों, आदि का बोर्ड को अनुदत्त किया गया समझा जाना-नियत दिन से, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, यथास्थिति, परिषद् या सोसाइटी के क्रियाकलापों और कारबार के संबंध में परिषद् या सोसाइटी को अनुदत्त सभी अनुज्ञप्तियां, अनुज्ञापत्र, कोटा और छूटों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे उस बोर्ड को अनुदत्त की गई हैं जिसमें परिषद् और सोसाइटी, इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गए हैं ।

9. कर छूट या फायदे का निरन्तर प्रभावी बने रहना-(1) जहां आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अधीन, परिषद् या सोसाइटी को किसी कर से, या उसके संबंध में किसी निर्धारण से कोई छूट दी गई है या किसी अनामेलित अवक्षयण या विनिधान मोक या अन्य मोक या हानि के, यथास्थिति, मुजरा या अग्रनयन के रूप में कोई फायदा दिया गया है या उपलब्ध है, वहां ऐसी छूट, निर्धारण या फायदा उस बोर्ड के संबंध में, जिसमें परिषद् और सोसाइटी इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गए हैं, प्रभावी बने रहेंगे ।

(2) जहां, परिषद् या सोसाइटी द्वारा किया गया कोई संदाय आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के किसी उपबंध के अधीन स्रोत पर कर की कटौती से छूट प्राप्त है वहां कर से छूट उसी प्रकार उपलब्ध बनी रहेगी मानो परिषद् या सोसाइटी को लागू होने वाले उक्त अधिनियम के उपबंध, उस बोर्ड के संबंध में प्रवर्तनशील थे जिसमें परिषद् और सोसाइटी इस अधिनियम के आधार पर, निहित हो गए हैं ।

(3) धारा 6 के निबंधनों के अनुसार परिषद् या सोसाइटी के अंतरण और निहित हो जाने का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वे पूंजी अभिलाभ के प्रयोजनों के लिए आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अर्थांतर्गत अंतरण है

10. प्रत्याभूति का प्रभावी होना-किसी उधार या पट्टा वित्त के संबंध में परिषद् या सोसाइटी के लिए या उसके पक्ष में दी गई कोई प्रत्याभूति, उस बोर्ड के संबंध में प्रभावी बनी रहेगी जिसमें परिषद् और सोसाइटी इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गई है ।

11. परिषद् और सोसाइटी के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के संबंध में उपबंध-(1) (क) परिषद् का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो नियत दिन के ठीक पूर्व उसके नियोजन में कार्यरत है, जहां तक ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी उस परिषद् के संबंध में, नियोजित है, जो इस अधिनियम के आधार पर बोर्ड में निहित हो गई है नियत दिन से ही, बोर्ड का, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा ।

() सोसाइटी का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो नियत दिन के ठीक पूर्व उसके नियोजन में कार्यरत है, जहां तक ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी उस सोसाइटी के संबंध में, नियोजित है, जो इस अधिनियम के आधार पर बोर्ड में निहित हो गई है नियत दिन से ही, बोर्ड का, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा

(2) परिषद् या सोसाइटी का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो उपधारा (1) में यथा निर्दिष्ट बोर्ड का, यथास्थिति, अधिकारी या कर्मचारी हो जाता है, उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक पर, उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर, छुट्टी, बीमा अधिवर्षिता स्कीम, भविष्य निधि, अन्य निधियों, सेवानिवृत्ति, पेंशन, उपदान और अन्य प्रसुविधाओं के बारे में उन्हीं बाध्यताओं और अधिकारों तथा विशेषाधिकारों के साथ उसमें अपना पद धारण या सेवा करेगा जो वह, यथास्थिति, परिषद् या सोसाइटी के अधीन उस दशा में धारण करता, यदि वह बोर्ड में निहित नहीं हुई होती और यदि, ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी उस अवधि के भीतर बोर्ड का अधिकारी या अन्य कर्मचारी न होने का विकल्प लेता है तो वह बोर्ड के, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में नियत दिन से एक वर्ष की अवधि के समाप्त होने तक ऐसा करता रहेगाः

परन्तु यदि बोर्ड इस प्रकार नियत की गई अवधि को बढ़ाना समीचीन समझता है तो वह उसे एक वर्ष की अधिकतम अवधि तक बढ़ा सकेगा ।

(3) जहां, परिषद् या सोसाइटी का कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी, उपधारा (2) के अधीन उस बोर्ड के नियोजन या सेवा में नहीं रहने का विकल्प लेता है, जिसमें परिषद् और सोसाइटी निहित हो गई हैं, वहां ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपने काडर से त्यागपत्र दे दिया है ।

(4) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, परिषद् या सोसाइटी के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का बोर्ड को अन्तरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा

(5) ऐसे अधिकारी और अन्य कर्मचारी, जो नियत दिन के पूर्व परिषद् या सोसाइटी की सेवा से निवृत्त हो गए हैं और जो किन्हीं प्रसुविधाओं, अधिकारों या विशेषाधिकारों के हकदार हैं, उस बोर्ड से, जिसमें परिषद् या सोसाइटी निहित हो गई है, उन्हीं प्रसुविधाओं, अधिकारों या विशेषाधिकारों को प्राप्त करने के हकदार होंगे ।

(6) अधिकारियों या कर्मचारियों के कल्याण के लिए परिषद् या सोसाइटी की भविष्य निधि और सामूहिक बीमा तथा अधिवर्षिता स्कीम संबंधी न्यास, बोर्ड में अपने कृत्यों का निर्वहन वैसे ही करते रहेंगे जैसे वे परिषद् या सोसाइटी में किया करते थे और भविष्य निधि या सामूहिक बीमा तथा अधिवर्षिता स्कीम के संबंध में दी गई कर-छूट बोर्ड की बाबत लागू बनी रहेगी ।

(7) उपधारा (2) में यथा निर्दिष्ट एक वर्ष की अवधि या बढ़ाई गई अवधि की समाप्ति के पश्चात्, बोर्ड को अंतरित और उसमें नियुक्त सभी अधिकारी और अन्य कर्मचारी, जो उन अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों से भिन्न हैं, जो ऐसी अवधि के भीतर बोर्ड के अधिकारी या अन्य कर्मचारी होने का विकल्प नहीं लेते हैं, उक्त बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा शर्तों के बारे में बोर्ड द्वारा बनाए गए नियमों और विनियमों द्वारा शासित होंगे

अध्याय 5

केन्द्रीय सरकार की शक्तियां

12. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश-(1) बोर्ड सुसंगत परिनियम के अधीन अपने कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में, नीति संबंधी प्रश्नों के संबंध में ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा, जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर उसे लिखित में देः

परन्तु बोर्ड को, कोई निदेश दिए जाने से पूर्व अपना दृष्टिकोण व्यक्त करने का यावत्शक्य अवसर दिया जाएगा ।

(2) इस बारे में कि कोई प्रश्न नीति संबंधी है या नहीं, केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।

13. बोर्ड का अधिक्रमण-(1) यदि किसी समय केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि-

(क) गंभीर आपात के कारण, बोर्ड इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन उसे अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है; या

() बोर्ड ने इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किसी निदेश का पालन करने में या इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन, उसे अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में बार-बार व्यतिक्रम किया है और ऐसे व्यतिक्रम के परिणामस्वरूप बोर्ड की वित्तीय स्थिति या बोर्ड के प्रशासन का ह्रास हुआ है; या

(ग) ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं, जिनमें ऐसा करना लोकहित में आवश्यक हो गया है,

तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बोर्ड को, छह मास से अनधिक की ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अतिष्ठित कर सकेगी ।

(2) अधिसूचना के प्रकाशन पर-

(क)         बोर्ड के सभी सदस्य, अधिक्रमण की तारीख से, उस रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे;

(ख)        ऐसी सभी शक्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का, जिनका सुसंगत अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन प्रयोग या निर्वहन बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से किया जा सकता है, जब तक कि उपधारा (3) के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन नहीं किया जाता, प्रयोग और निर्वहन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा, जो केन्द्रीय सरकार निदेश दे; और

(ग)         बोर्ड के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन सभी संपत्ति, जब तक बोर्ड का पुनर्गठन नहीं किया जाता, केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएगी ।

(3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अधिक्रमण की अवधि के अवसान पर, केन्द्रीय सरकार नई नियुक्ति द्वारा बोर्ड का पुनर्गठन कर सकेगी और ऐसी दशा में ऐसा कोई व्यक्ति या ऐसे व्यक्ति, जिन्होंने उपधारा (2) के खंड () के अधीन अपने पद रिक्त कर दिए हैं, नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं समझे जाएंगेः

परंतु केन्द्रीय सरकार, अधिक्रमण की अवधि के अवसान के पूर्व, किसी समय, इस उपधारा के अधीन कार्रवाई कर सकेगी

(4) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी कराएगी और इस धारा के अधीन की गई किसी कार्रवाई की और उन परिस्थितियों की जिनके कारण ऐसी कार्रवाई की गई, पूरी रिपोर्ट, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।

 

अध्याय 6

वित्त, लेखा और लेखापरीक्षा

14. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-(1) केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात्, बोर्ड को, अनुदानों और उधारों के रूप में उतनी धनराशि का संदाय कर सकेगी, जितनी वह सरकार     आवश्यक समझे ।

(2) जूट बोर्ड निधि के नाम से ज्ञात होने वाली एक निधि गठित की जाएगी और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगेः-

(क)         केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को दिए गए कोई अनुदान और उधार;

(ख)        ऐसे अन्य स्रोतों से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिश्चित किए जाएं, बोर्ड को प्राप्त सभी धनराशियां ।

(3) निधि का उपयोजन निम्नलिखित के लिए किया जाएगा-

(क)         बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य पारिश्रमिक की पूर्ति;

(ख)        अपने कृत्यों का निर्वहन करने में बोर्ड के व्ययों की पूर्ति; और

(ग)         इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों और प्रयोजनों से संबंधित व्ययों की पूर्ति ।

15. बजट-बोर्ड, ऐसे प्ररूप में और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान, ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा, जिसमें बोर्ड की प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शित होंगे और उसे केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

16. वार्षिक रिपोर्ट-बोर्ड ऐसे प्ररूप में और प्रत्येक वित्तीय वर्ष, ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

17. लेखा और लेखापरीक्षा-बोर्ड के लेखे ऐसी रीति में रखे और संपरीक्षित किए जाएंगे, जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित की जाए और बोर्ड, ऐसी तारीख से पूर्व, जो विहित की जाए, अपने लेखाओं की संपरीक्षित प्रति, उस पर लेखापरीक्षक की रिपोर्ट के साथ, केन्द्रीय सरकार को देगा ।

18. वार्षिक और लेखापरीक्षक की रिपोर्ट का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार, वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षक की रिपोर्ट को, उनकी प्राप्ति के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

अध्याय 7

प्रकीर्ण

19. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार या बोर्ड या बोर्ड के किसी सदस्य या केन्द्रीय सरकार या बोर्ड के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी अथवा केन्द्रीय सरकार या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।

20. बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-बोर्ड के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में, जब वे इस अधिनियम या उसके तद्धीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबंधों के अनुसरण में कोई कार्य कर रहे हैं या उनका कार्य करना तात्पर्यित है, यह समझा जाएगा कि वे भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक हैं ।

21. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क)         धारा 3 की उपधारा (5) के अधीन बोर्ड के सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें;

(ख)        धारा 3 की उपधारा (7) के अधीन अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य;

(ग)         धारा 3 की उपधारा (8) के अधीन उपाध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य;

(घ)         वह प्ररूप जिसमें और वह समय जिस पर बोर्ड, धारा 15 के अधीन अपना बजट तैयार करेगा;

(ङ)          वह प्ररूप, जिसमें और वह समय जिस पर बोर्ड, धारा 16 के अधीन अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा;

(च)         वह रीति, जिसमें बोर्ड के लेखे रखे जाएंगे और संपरीक्षित किए जाएंगे तथा वह तारीख, जिसके पूर्व धारा 17 के अधीन लेखाओं की संपरीक्षित प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजी जा सकेगी;

(छ)         कोई अन्य विषय, जो नियमों द्वारा विहित किया जाना है या विहित किया जाए या जिसके बारे में उपबंध किया जाना है या उपबंध किया जाए ।

22. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, साधारणतया इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, इस अधिनियम के उपबंधों और नियमों से संगत, विनियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगा

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

()          वह रीति, जिसमें धारा 3 की उपधारा (9) के अधीन बोर्ड के कारबार का संचालन किया जाएगा; और

()          धारा 4 के अधीन बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें

23. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभावी हो जाएगा किंतु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभावी होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

24. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत हों और जो कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत होंः

परंतु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश, इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् नहीं   किया जाएगा

(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा

25. 1983 के अधिनियम संख्यांक 28 का संशोधन-जूट विनिर्मिति उपकर अधिनियम, 1983 में, -

() धारा 3 में, -

(i) उपधारा (1) में जूट विनिर्मिति विकास परिषद् अधिनियम, 1983" शब्दों और अंकों के स्थान पर राष्ट्रीय जूट बोर्ड अधिनियम, 2008" शब्द और अंक रखे जाएंगे;

(ii) उपधारा (2) में, और नमक" शब्दों का लोप किया जाएगा;

(iii) उपधारा (4) में, और नमक" शब्दों का लोप किया जाएगा;

() धारा 4 में, (ऐसे आगमों में से ऐसे संग्रहण खर्च को काटकर, जो ऐसे आगमों के चार प्रतिशत से अधिक नहीं होगा) समय-समय पर, ऐसी धनराशियां, जो वह उचित समझे, जूट विनिर्मिति विकास परिषद् को जूट विनिर्मिति विकास परिषद् अधिनियम, 1983 (1983 का 27) के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने के लिए संदत्त कर सकेगी" शब्दों और अंकों के स्थान पर ऐसे आगमों में से (ऐसे संग्रहण खर्च को काटकर, जो ऐसे आगमों के चार प्रतिशत से अधिक नहीं होगा) समय-समय पर, ऐसी धनराशियां, जो वह उचित समझे, राष्ट्रीय जूट बोर्ड को राष्ट्रीय जूट बोर्ड अधिनियम, 2008 (2009 का 12) के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने के लिए संदत्त कर सकेगी" शब्द और अंक रखे जाएंगे

26. निरसन और व्यावृत्ति-(1) जूट विनिर्मिति विकास परिषद् अधिनियम, 1983 (1983 का 27) नियत दिन से ही निरसित हो जाएगा

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात या कार्रवाई के, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई है

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