राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिनियम, 1948
(1948 का अधिनियम संख्यांक 31)
[16 अप्रैल, 1948]
राष्ट्रीय कैडेट कोर के गठन का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
राष्ट्रीय कैडेट कोर के गठन के लिए उपबंध करना समीचीन है ; अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है : -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और लागू होना-(1) यह अधिनियम राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिनियम, 1948 कहा जा सकता है ।
(2) इसका विस्तार *** सम्पूर्ण भारत पर है और इस अधिनियम के अधीन अभ्यावेशित या नियुक्त सभी व्यक्तियों को, जहां कहीं वे हों, लागू होता है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि कोई बात, विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो-
“कोर" से इस अधिनियम के अधीन गठित राष्ट्रीय कैडेट कोर अभिप्रेत है ;
“अभ्यावेशित" से इस अधिनियम के अधीन कोर में अभ्यावेशित अभिप्रेत है ;
“विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
“स्कूल" के अन्तर्गत इस निमित्त केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त कोई संस्था है ;
“विश्वविद्यालय" से भारत में विधि द्वारा स्थापित कोई विश्वविद्यालय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालय, मध्यवर्ती महाविद्यालय और ऐसे महाविद्यालय स्तर के तकनीकी संस्थान हैं जो इस निमित्त केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा मान्यताप्रापत हैं ।
3. राष्ट्रीय कैडेट कोर का गठन-इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति में एक कोर समुत्थापित और अनुरक्षत किया जाएगा जो राष्ट्रीय कैडेट कोर अभिहित होगा :
परन्तु केन्द्रीय सरकार कोर में, जैसा और जब आवश्यक हो, समस्त या कोई एकक स्थापित कर सकती है ।
4. एककों का गठन और भंग करना-केन्द्रीय सरकार किसी राज्य *** में कोर के एक या अधिक एकक गठित कर सकती है जिनके सदस्य किसी विश्वविद्यालय या स्कूल के छात्रों में से भर्ती किए जाएंगे और इस प्रकार गठित किसी एकक को भंग या पुनर्गठित कर सकती है ।
5. कोर का डिविजनों में विभाजन-कोर के तीन डिविजन होंगे, अर्थात् :-
(i) ज्येष्ठ डिविजन जिसके लिए भर्ती किसी विश्वविद्यालय के छात्रों में से होगी ;
(ii) कनिष्ठ डिविजन, जिसके लिए भर्ती किसी स्कूल के छात्रों में से होगी ; और
(iii) बालिका डिविजन जिसके लिए भर्ती किसी विश्वविद्यालय या स्कूल की छात्राओं में से होगी ।
6. अभ्यावेशन-(1) किसी विश्वविद्यालय का कोई पुरुष छात्र स्वयं को वरिष्ठ डिविजन में कैडेट के रूप में भर्ती के लिए प्रस्तुत कर सकता है और किसी स्कूल का कोई छात्र कनिष्ठ डिविजन में कैडेट के रूप में स्वयं को भर्ती करने के लिए प्रस्तुत कर सकता है यदि वह विहित आयु का है या उससे अधिक है ।
(2) किसी विश्विद्यालय या स्कूल की कोई छात्रा स्वयं को बालिका डिविजन में कैडेट के रूप में भर्ती करने के लिए प्रस्तुत कर सकती है :
परन्तु यह तब जब कि पश्चात्वर्ती दशा में वह विहित आयु की है या उससे अधिक है ।
7. केन्द्रीय सरकार अन्य एकक समुत्थापित कर सकती है-इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा किसी भी स्थान में कोर के किन्हीं अन्य एककों के गठन के लिए उपबंध कर सकती है और उन व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्ग को विहित कर सकती है जो उनमें भर्ती के पात्र होंगे ।
8. सेवोन्मुक्ति-इस अधिनियम के अधीन भर्ती किया गया प्रत्येक व्यक्ति उस कालावधि के, जिसके लिए वह भर्ती किया गया था, अवसान पर या जिस विश्वविद्यालय या स्कूल में वह था उसके रजिस्टर में न रहने पर कोर से सेवोन्मुक्त होने का हकदार होगा :
परन्तु भर्ती किया गया कोई व्यक्ति ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी शर्तों के अधीन जो विहित की जाएं किसी भी समय सेवोन्मुक्त किया जा सकता है ।
9. अधिकारियों की नियुक्ति-केन्द्रीय सरकार कोर के किसी भी एकक में या एकक के लिए किसी विश्वविद्यालय या स्कूल को कर्मचारिवृन्द के सदस्यों में से या अन्यथा अधिकारियों की नियुक्ति के लिए उपबंध कर सकती है और ऐसे अधिकारियों के कर्तव्य, शक्तियां और कृत्य विहित कर सकती है ।
10. इस अधिनियम के अधीन व्यक्तियों के कर्तव्य-इस अधिनियम के अधीन कोई व्यक्ति कोर का सदस्य होने के कारण सक्रिय सैनिक सेवा के लिए दायी नहीं होगा, किन्तु उसके अधीन कोई व्यक्ति ऐसे कर्तव्यों को करने और ऐसी बाध्यताओं का वहन करने के लिए दायी होगा जो विहित की जाए ।
11. इस अधिनियम के अधीन अपराधों के लिए दंड-इस अधिनियम के अधीन भर्ती किया गया कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम के उल्लंघन के लिए जुर्माने से जो पचास रुपए तक हो सकेगा और जो ऐसी रिति से और ऐसे अधिकारी द्वारा वसूल किया जा सकेगा जैसा कि विहित किया जाए, दंडनीय होगा ।
12. सलाहकार समितियां नियुक्त करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार कोर के गठन और प्रशासन से संबंधित नीति संबंधी सभी विषयों में उसे सलाह देने के प्रयोजन के लिए एक केन्द्रीय सलाहकार समिति नियुक्त कर सकती है जिसमें निम्नलिखित व्यक्ति होंगे :-
(क) रक्षा मंत्री, जो समिति का अध्यक्ष होगा ;
(ख) भारत सरकार का सचिव, रक्षा मंत्रालय, पदेन ;
(ग) भारत सरकार का सचिव, शिक्षा मंत्रालय, पदेन ;
(घ) वित्तीय सलाहकार, रक्षा, पदेन ;
[(ङ) थल सेनाध्यक्ष, भारतीय सेना, पदेन ;
(च) नौसेनाध्यक्ष, भारतीय नौसेना, पदेन ;
(छ) वायुसेनाध्यक्ष, भारतीय वायुसेना, पदेन ;]
(ज) पांच अशासकीय सदस्य जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ;
[(झ) तीन संसद् सदस्य जिनमें से दो लोक सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे और एक राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किया जाएगा ।]
[(1क) उपधारा (1) के खंड (झ) के अधीन निर्वाचित सदस्य उसके निर्वाचन की तारीख से एक वर्ष की अवधि तक या उसकी उस सदन की, जिसने उसे निर्वाचित किया, सदस्यता समाप्त होने तक, इन दोनों में से जो भी पहले हो, पद धारण करेगा ।]
(2) केन्द्रीय सरकार उसी प्रयोजन के लिए जो उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट है, ऐसी *** राज्य सलाहकार समितियां नियुक्त कर सकती है जिन्हें समय-समय पर वांछनीय समझे और उसके कर्तव्य और कृत्य विहित कर सकती है ।
13. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम
(क) वे शर्तें विहित कर सकते हैं जिनके अधीन विश्वविद्यालय या स्कूल इस अधिनियम के अधीन एकक समुत्थापित करने के लिए अनुज्ञात किए जाएंगे ;
(ख) वे व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग विहित कर सकते हैं जो धारा 7 के अधीन अभ्यावेशन के पात्र हो सकते हैं ;
(ग) वह रीति विहित कर सकते हैं जिसमें, वह कालावधि जिसके लिए और वे शर्तें जिनके अधीन कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग इसके अधीन अभ्यावेशित हो सकता है ;
(घ) इस अधिनियम के अधीन अभ्यावेशन के लिए स्वयं को प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों की स्वास्थ्य परीक्षा के लिए उपबंध कर सकते हैं ;
(ङ) इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के प्रारंभिक या नियतकालिक सैनिक शिक्षण विहित कर सकते हैं ;
(च) कोर के सदस्य जब सैनिक शिक्षण प्राप्त करते हैं तब जिनके दायित्वाधीन होंगे वे सैनिक या अन्य बाध्यताएं विहित कर सकते हैं और कोर के सदस्यों में अनुशासन बनाए रखने के लिए साधारणतया उपबंध कर सकते हैं ;
(छ) इस अधिनियम के अधीन नियुक्त अधिकारियों के कर्तव्य, शक्तियां और कृत्य विहित कर सकते हैं ;
(ज) इस अधिनियम के अधीन व्यक्तियों को संदेय भत्ते और अन्य पारिश्रमिक विहित कर सकते हैं ;
(झ) इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति के हटाए जाने और सेवोन्मुक्ति के लिए उपबंध कर सकते हैं ;
(ञ) वे अपराध विहित कर सकते हैं जिनके लिए इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति का विचारण किया जा सकता है और उनके लिए वितरण के उपबंध कर सकते हैं ;
(ट) वह रीति विहित कर सकते हैं जिसमें इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत जुर्माने वसूल किए जा सकते हैं ;
(ठ) केन्द्रीय *** और राज्य सलाहकार समितियों के कर्तव्य, शक्तियां और कृत्य विहित कर सकते हैं ; और
(ड) किसी अन्य बात के लिए जो अधिनियम के अधीन विहित की जानी है या की जाए, उपबंध कर सकते हैं ।
[(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, तीन दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
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