चूनापत्थर और डोलोमाइट खान श्रम कल्याण निधि अधिनियम, 1972
(1972 का अधिनियम संख्यांक 62)
[2 दिसंबर, 1972]
चूनापत्थर और डोलोमाइट की खानों में नियोजित व्यक्तियों
के कल्याण की अभिवृद्धि करने के क्रियाकलापों के
वित्तपोषणार्थ चूनापत्थर और डोलोमाइट पर
उपकर के उद्ग्रहण और संग्रहण का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तेईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम चूनापत्थर और डोलोमाइट खान श्रम कल्याण निधि अधिनियम, 1972 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, और विभिन्न राज्यों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकती हैं ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) अभिकर्ता" और स्वामी" के वही अर्थ हैं जो उनके खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) की धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) और खण्ड (ठ) में हैं ;
(ख) कारखाना"और अधिष्ठाता" के वही अर्थ हैं जो कारखाना अधिनियम, 1948 (1940 का 63) की धारा 2 के खण्ड (ड) और (ढ) में हैं ;
[(खख) चूनापत्थर" के अन्तर्गत ऐसे खनिज हैं, जैसे चूना कोश, चूना बालू और सारतः चूना कोश निर्मित समुद्री बालू, मार्ल, कंकड़ या चूना-कंकड़;]
(ग) प्रबन्धक" से खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) की धारा 17 में निर्दिष्ट प्रबन्धक अभिप्रेत है ;
(घ) यह कहा जाएगा कि कोई व्यक्ति किसी चूनापत्थर या डोलोमाइट की खान में नियोजित है-
(1) यदि वह ऐसी खान के परिसर में या उसके सामीप्य में, ऐसी खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा या निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक के लिए अनन्यतः किसी ठेकेदार या अन्य अभिकरण द्वारा नियोजित है, अर्थात् :-
(i) चूनापत्थर या डोलोमाइट खान संक्रिया ;
(ii) ऐसी खान में या उसके आसपास उपयोग की जाने वाली किसी मशीनरी या उसके किसी भाग की संक्रिया, सर्विसिंग, अनुरक्षण या मरम्मत ;
(iii) चूनापत्थर या डोलोमाइट या चूनापत्थर या डोलोमाइट खान से सम्बद्ध किसी अन्य सामग्री का लादना, उतारना या भेजना ;
(iv) ऐसी खान की प्रसीमाओं के अन्दर स्थित किसी कार्यालय, कैंटीन या शिशुकक्ष में कोई कार्य;
(v) ऐसे परिसर या उसके सामीप्य में स्थित किसी स्थान में जो किसी आवासी भवन द्वारा अधिभुक्त स्थान नहीं है कोई कल्याण, स्वास्थ्य, स्वच्छता या सफाई सेवा या पहरा और निगरानी का कार्य; या
(2) यदि वह ऐसे क्षेत्र में जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में इस निमित्त अधिसूचित किया जाए, ऐसी खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा या चूनापत्थर या डोलोमाइट या चूनापत्थर या डोलोमाइट खान से सम्बद्ध किसी अन्य सामग्री के लदान, उतारने या भेजने के लिए अनन्यतः किसी ठेकेदार या अन्य अभिकरण द्वारा नियोजित है ;
(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।
3. चूनापत्थर और डोलोमाइट पर उपकर का उद्ग्रहण और संग्रहण-उस तारीख से जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपकर के रूप में किसी खान में उत्पादित उतने चूनापत्थर और डोलोमाइट पर,-
(i) जितना किसी कारखाने के अधिष्ठाता को विक्रय किया जाता है या अन्यथा व्ययन किया जाता है ; या
(ii) जितना ऐसी खान के स्वामी द्वारा सीमेन्ट,[लोहा, इस्पात, लौह मिश्र धातु, मिश्र इस्पात, रसायन, चीनी कागज, उर्वरक, उच्चताप सहदृव्य, लौह अयस्क गुटिकायन या ऐसी अन्य वस्तु या माल अथवा ऐसी वस्तु या माल के किसी वर्ग के, जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे,] के विनिर्माण से सम्बन्धित किसी प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जाता है,
यथास्थिति, चूनापत्थर या डोलोमाइट पर एक रुपया प्रति मीटरी टन से अनधिक की ऐसी दर से, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर नियत करे, उत्पाद-शुल्क का उद्ग्रहण और संग्रहण किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-जहां किसी चूनापत्थर या डोलोमाइट खान का स्वामी किसी कारखाने अधिष्ठाता भी है वहां खण्ड (ii) के प्रयोजनार्थ, ऐसे सब, यथास्थिति, चूनापत्थर या डोलोमाइट के बारे में जो उस खान से उत्पादित है किन्तु किसी अन्य कारखाने के अधिष्ठाता को विक्रय या अन्यथा व्ययन नहीं किया गया है, जब तक विपरीत साबित न हो जाए, यह समझा जाएगा कि वह [खंड (ii) में निर्दिष्ट या उसके अधीन विनिर्दिष्ट किसी वस्तु या माल] के विनिर्माण से संबंधित किसी प्रयोजन के लिए ऐसे स्वामी द्वारा उपयोग में लाया गया है ।
4. उत्पाद-शुल्क का संदाय-(1) इस अधिनियम के अधीन चूनापत्थर या डोलोमाइट पर उद्ग्रहणीय उत्पाद-शुल्क ऐसी कालावधि के भीतर जो विहित की जाए,-
(क) उस व्यक्ति द्वारा जिसके द्वारा ऐसा चूनापत्थर या डोलोमाइट अधिष्ठाता को विक्रय या अन्यथा व्ययन किया जाता है, कारखाने के अधिष्ठाता को संदेय होगा ;
(ख) जहां चूनापत्थर या डोलोमाइट, चूनापत्थर या डोलोमाइट खान के स्वामी द्वारा, [धारा 3 के खंड (ii) में निर्दिष्ट या उसके अधीन विनिर्दिष्ट किसी वस्तु या माल] के विनिर्माण से सम्बन्धित किसी प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जाता है, वहां ऐसे स्वामी द्वारा केन्द्रीय सरकार को संदेय होगा ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (क) में निर्दिष्ट सभी रकमें कारखाने के अधिष्ठाता द्वारा ऐसी रीति में संगृहीत की जाएंगी और उसके द्वारा केन्द्रीय सरकार को ऐसी कालावधि के भीतर संदत्त की जाएंगी, जो विहित की जाए ।
5. उत्पाद-शुल्क के आगमों का उपयोजन-(1) इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क के आगमों के बराबर रकम उसमें से केन्द्रीय सरकार द्वारा यथाअवधारित संग्रह के खर्च को घटाकर, ऐसी रकम के विनिधान से होने वाली आय और इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार से प्राप्त अन्य धन सहित, संसद् द्वारा विधि द्वारा सम्यक् विनियोजन किए जाने के पश्चात्, चूनापत्थर और डोलोमाइट खान श्रमकल्याण निधि नामक निधि के (जिसे इसमें इसके पश्चात् निधि कहा गया है) खाते में संदत्त की जाएगी ।
(2) निधि का उपयोजन केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे उपायों के सम्बन्ध में उपगत व्यय को पूरा करने के लिए किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार की राय में चूनापत्थर या डोलोमाइट की खानों में नियोजित व्यक्तियों के कल्याण की अभिवृद्धि करने के लिए आवश्यक या समीचीन हों और विशिष्टतया,-
(क) चूनापत्थर या डोलोमाइट की खानों में नियोजित व्यक्तियों के फायदे के लिए उन उपायों का खर्च चुकाना जिनका उद्देश्य निम्नलिखित हो,-
(i) लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता का सुधार, रोग निवारण और चिकित्सीय सुविधाओं की व्यवस्था और उनमें सुधार ;
(ii) जल प्रदाय तथा नहाने-धोने की सुविधाओं की व्यवस्था और उनमें सुधार ;
(iii) शैक्षणिक सुविधाओं की व्यवस्था और उनमें सुधार ;
(iv) जीवनस्तर का, जिसके अन्तर्गत आवास और पोषण आते हैं सुधार सामाजिक दशाओं में सुधार और आमोद-प्रमोद को सुविधाओं की व्यवस्था ;
[(v) परिवार कल्याण की व्यवस्था; जिसके अन्तर्गत परिवार नियोजन शिक्षा और सेवाएं भी है;]
(ख) किसी ऐसे प्रयोजन के लिए जो चूनापत्थर या डोलोमाइट की खानों में नियोजित व्यक्तियों के कल्याण से सम्बद्ध है, केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किसी स्कीम की सहायता के लिए राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकारी या चूनापत्थर या डोलोमाइट खान के स्वामी को उधार या साहय्यिकी देना ;
(ग) चूनापत्थर या डोलोमाइट की खान के ऐसे स्वामी को प्रतिवर्ष सहायता अनुदान देना जो केन्द्रीय सरकार के समाधानपर्यन्त अपनी खान में नियोजित व्यक्तियों के फायदे के लिए विहित स्तर की कल्याण सुविधाओं की व्यवस्था करते हैं, इस प्रकार कि ऐसे स्वामी को सहायता अनुदान के रूप में संदेय रकम,-
(i) केन्द्रीय सरकार द्वारा या उस सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति द्वारा यथाअवधारित कल्याण सुविधाओं की व्यवस्था में उसके द्वारा खर्च की गई रकम से, या
(ii) ऐसी रकम से जो विहित की जाए, उनमें से जो भी कम हो, अधिक नहीं होगी :
परन्तु जहां किसी कल्याण सुविधा पर खर्च की गई यथापूर्वोक्त अवधारित रकम इस निमित्त विहित रकम से कम है वहां चूनापत्थर या डोलोमाइट खान के स्वामी द्वारा उपबन्धित कल्याण सुविधाओं की बाबत कोई सहायता अनुदान संदेय नहीं होगा ;
(घ) क्रमशः धारा 6 और धारा 7 के अधीन गठित सलाहकार समिति और केन्द्रीय सलाहकार समिति के सदस्यों के भत्ते, यदि कोई हों, चुकाने के लिए और धारा 8 के अधीन नियुक्त व्यक्तियों के वेतन और भत्ते, यदि कोई हों, चुकाने के लिए ;
(ङ) कोई अन्य व्यय जो केन्द्रीय सरकार निधि से चुकाए जाने का निदेश दे ।
6. सलाहकार समितियां-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रशासन से उद्भूत ऐसे मामलों पर जो उस सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए जाएं और जिसके अन्तर्गत निधि के उपयोजन से सम्बन्धित मामले भी हैं, केन्द्रीय सरकार को सलाह देने के लिए इतनी सलाहकार समितियां गठित कर सकेगी जितनी वह ठीक समझे, किन्तु चूनापत्थर या डोलोमाइट का उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों में से प्रत्येक के लिए एक से अधिक सलाहकार समितियां गठित नहीं की जाएंगी ।
(2) प्रत्येक सलाहकार समिति में इतने व्यक्ति होंगे जितने केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएं और सदस्यों का चयन ऐसी रीति से किया जाएगा जो विहित की जाए :
परन्तु प्रत्येक सलाहकार समिति में सरकार का, चूनापत्थर और डोलोमाइट खानों के स्वामियों का और चूनापत्थर और डोलोमाइट खानों में नियोजित व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या बराबर होगी और हर एक समिति में कम से कम एक महिला सदस्य होगी ।
(3) हर एक सलाहकार समिति का अध्यक्ष केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।
(4) केन्द्रीय सरकार प्रत्येक सलाहकार समिति के सभी सदस्यों के नाम राजपत्र में प्रकाशित करेगी ।
7. केन्द्रीय सलाहकार समिति-(1) धारा 6 के अधीन गठित सलाहकार समितियों के कार्य का समन्वय करने के लिए और इस अधिनियम के प्रशासन से उद्भूत होने वाले किसी भी मामले पर केन्द्रीय सरकार को सलाह देने के लिए, केन्द्रीय सरकार एक केन्द्रीय सलाहकार समिति गठित कर सकेगी ।
(2) केन्द्रीय सलाहकार समिति में इतने व्यक्ति होंगे जितने केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएं और सदस्यों का ऐसी रीति से चयन किया जाएगा जो विहित की जाए :
परन्तु केन्द्रीय सलाहकार समिति में सरकार का, चूनापत्थर और डोलोमाइट खानों के स्वामियों का और चूनापत्थर और डोलोमाइट खानों में नियोजित व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या बराबर होगी ।
(3) केन्द्रीय सलाहकार समिति का अध्यक्ष केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।
(4) केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय सलाहकार समिति के सभी सदस्यों के नाम राजपत्र में प्रकाशित करेगी ।
[7क. सहयोजित करने आदि की शक्ति-(1) सलाहकार समिति या केन्द्रीय सलाहकार समिति किसी भी समय और ऐसी अवधि के लिए जो वह ठीक समझे, समिति में किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों को सहयोजित कर सकेगी ।
(2) किसी समिति में उपधारा (1) के अधीन सहयोजित किया गया व्यक्ति उसके सदस्य की सभी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, किन्तु वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।]
8. निरीक्षकों, आदि की नियुक्ति और उनकी शक्तियां-(1) केन्द्रीय सरकार इतने [(2) कल्याण आयुक्त, कल्याण प्रशासक निरीक्षक] और अन्य अधिकारी और कर्मचारिवृन्द नियुक्त कर सकती है जितने वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे ।
(2) इस प्रकार नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा ।
(3) [कल्याण आयुक्त, कल्याण प्रशासक या निरीक्षक],-
(क) ऐसी सहायता से, यदि कोई हो, जो वह ठीक समझे उचित समय पर ऐसे स्थान में प्रवेश कर सकता है जहां वह इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए प्रवेश करना आवश्यक समझे ;
(ख) ऐसे स्थान के अन्दर ऐसा कार्य कर सकता है जो उसके कर्तव्यों के उचित निर्वहन के लिए आवश्यक हो; और
(ग) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग कर सकता है जो विहित की जाएं ।
9. केन्द्रीय सरकार की छूट देने की शक्ति-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि किसी राज्य में या उसके किसी भाग में चूनापत्थर या डोलोमाइट खानों में नियोजित व्यक्तियों के कल्याण की अभिवृद्धि के क्रियाकलापों का वित्तपोषण करने के लिए पर्याप्त उपबन्ध करने वाली विधि प्रवृत्त है तो वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकती है कि इस अधिनियम के सभी उपबन्ध या उनमें से कोई ऐसे राज्य या उसके भाग को अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अपवादों या उपान्तरों के अधीन रहते हुए लागू होंगे या लागू नहीं होंगे ।
10. अधिनियम के अधीन वित्तपोषित क्रियाकलापों की वार्षिक रिपोर्ट-केन्द्रीय सरकार, प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, पूर्वतन वित्तीय वर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन वित्तपोषित अपने क्रियाकलापों का वृत्तान्त देते हुए, लेखे के विवरण के साथ एक रिपोर्ट राजपत्र में प्रकाशित कराएगी ।
11. कारखानों के अधिष्ठाताओं और खानों के स्वामियों द्वारा संदेय ब्याज-यदि किसी कारखाने का अधिष्ठाता या किसी चूनापत्थर या डोलोमाइट खान का स्वामी धारा 4 के अधीन अपने द्वारा संदेय रकम उस धारा के अधीन उसके लिए विहित कालावधि के भीतर केन्द्रीय सरकार को संदत्त करने में असफल रहता है तो, यथास्थिति, ऐसा अधिष्ठाता या स्वामी उस तारीख से जिसको संदाय शोध्य हो गया था, ऐसी रकम वास्तव में संदाय किए जाने की तारीख तक संदाय की जाने वाली रकम पर बारह प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज देने का दायी होगा ।
12. विहित कालावधि के भीतर उत्पाद-शुल्क के संदाय न करने पर शास्ति-यदि कारखाने के अधिष्ठाता या चूनापत्थर या डोलोमाइट खान के स्वामी द्वारा, धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार को संदेय कोई उत्पाद-शुल्क उस सरकार को तद्धीन विहित कालावधि के भीतर संदत्त नहीं किया जाता है, तो यह समझा जाएगा कि वह बकाया है और इस निमित्त विहित प्राधिकारी, ऐसी जांच के पश्चात् जो वह ठीक समझे, यथास्थिति, कारखाने के अधिष्ठाता या चूनापत्थर या डोलोमाइट खान के स्वामी पर ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकता है जो उत्पाद-शुल्क की बकाया रकम से अधिक नहीं होगी :
परन्तु ऐसी कोई शास्ति अधिरोपित करने से पहले, यथास्थिति, ऐसे अधिष्ठाता या स्वामी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा और यदि ऐसी सुनावाई के पश्चात् उक्त प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि व्यतिक्रम किसी उचित और पर्याप्त कारणवश था तो इस धारा के अधीन कोई शास्ति अधिरोपित नहीं की जाएगी ।
13. अधिनियम के अधीन शोध्य रकम की वसूली-किसी कारखाने के अधिष्ठाता या किसी चूनापत्थर या डोलोमाइट खान के स्वामी से, इस अधिनियम के अधीन शोध्य रकम (जिसके अन्तर्गत, यथास्थिति, धारा 11 या धारा 12 के अधीन संदेय ब्याज या शास्ति भी है, यदि कोई हो), केन्द्रीय सरकार द्वारा उसी रीति से वसूल की जा सकती है जिस रीति से भू-राजस्व का बकाया वसूल किया जाता है ।
14. उत्पाद-शुल्क के अपवंचन के लिए शास्ति-(1) जो कोई अपने द्वारा केन्द्रीय सरकार को इस अधिनियम के अधीन संदेय, उत्पाद-शुल्क के संदाय की जानबूझकर या साशय अपवंचना करेगा या अपवंचना करने का प्रयत्न करेगा, वह, दोषसिद्धि पर, कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा ।
(2) कोई भी न्यायालय इस धारा के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन किए गए परिवाद पर ही करेगा अन्यथा नहीं ।
15. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया जाता है तो, प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई भी बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है ; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
16. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम बना सकती है ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकते हैं, अर्थात् :-
(क) इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहीत उत्पाद-शुल्क का निर्धारण और संग्रहण ;
(ख) वह कालावधि जिसके भीतर चूनापत्थर या डोलोमाइट का कारखाने के अधिष्ठाता को विक्रय या अन्यथा व्ययन करने वाला व्यक्ति ऐसे अधिष्ठाता को उत्पाद-शुल्क का संदाय करेगा ;
(ग) वह कालावधि जिसके भीतर चूनापत्थर या डोलोमाइट खान का स्वामी केन्द्रीय सरकार को उत्पाद-शुल्क का संदाय करेगा ;
(घ) वह रीति जिसमें कारखाने का अधिष्ठाता उत्पाद-शुल्क का संग्रह करेगा ;
(ङ) वह कालावधि जिसके भीतर कारखाने का अधिष्ठाता केन्द्रीय सरकार को अपने द्वारा संगृहीत उत्पाद-शुल्क का संदाय करेगा ;
(च) इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क के संग्रह के खर्च का अवधारण ;
(छ) वह रीति जिससे धारा 5 में विनिर्दिष्ट उपायों के लिए निधि का उपयोजन किया जा सकता है ;
(ज) धारा 5 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) के अधीन उधार या साहाय्यिकी के अनुदान पर अधिरोपित शर्तें ;
(झ) धारा 5 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के प्रयोजनों के लिए चूनापत्थर या डोलोमाइट खानों के स्वामियों द्वारा व्यवस्था की जाने वाली कल्याण सुविधाओं का स्तर ;
(ञ) धारा 5 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के उपखण्ड (ii) में और उस खण्ड के परन्तुक में निर्दिष्ट रकमों का अवधारण ;
(ट) क्रमशः धारा 6 और 7 के अधीन गठित सलाहकार समितियों और केन्द्रीय सलाहकार समिति की संरचना, वह रीति जिससे उनके सदस्यों का चयन होगा, ऐसे सदस्यों की पदावधि, उनको संदेय भत्ते, यदि कोई हों, और वह रीति जिससे उक्त सलाहकार समितियां और केन्द्रीय सलाहकार समिति अपना कार्य संचालन करेंगी ;
(ठ) धारा 8 के अधीन नियुक्त सभी व्यक्तियों की भर्ती, सेवा की शर्तें और कर्तव्य ;
(ड) धारा 8 के अधीन [कल्याण आयुक्त या कल्याण प्रशासक या निरीक्षक] द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियां ;
(ढ) कारखानों के अधिष्ठाताओं द्वारा, [चूनापत्थर या डोलोमाइट के क्रय अभिकर्ताओं या स्टाकिस्टों द्वारा] चूनापत्थर या डोलोमाइट खानों के स्वामियों, अभिकर्ताओं या प्रबन्धकों द्वारा आंकडों की या ऐसी अन्य जानकारी का केन्द्रीय सरकार को दिया जाना जिसके दिए जाने की उस सरकार द्वारा समय-समय पर अपेक्षा की जाए ;
(ण) वह प्राधिकारी जो धारा 12 के अधीन कोई भी शास्ति अधिरोपित कर सकेगा ।
(3) उपधारा (2) के खण्ड (ख) या खण्ड (ढ) के अधीन नियम बनाने में, केन्द्रीय सरकार यह निदेश दे सकती है कि उसका भंग जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(4) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पशचात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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