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आरोविल प्रतिष्ठान अधिनियम, 1988 ( Auroville Foundation Act, 1988 )


 

आरोविल प्रतिष्ठान अधिनियम, 1988

(1988 का अधिनियम संख्यांक 54)

[29 सितंबर, 1988]

आरोविल के मूल चार्टर के अनुसार आरोविल के बेहतर प्रबंध

तथा और अधिक विकास के लिए दीर्घकालिक प्रबंध करने

की दृष्टि से आरोविल के उपक्रमों के अर्जन और अंतरण

तथा ऐसे उपक्रमों को इस प्रयोजन के लिए स्थापित

प्रतिष्ठान में निहित करने और उससे

संबंधित या उसके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

                आरोविल को ‘मां’ द्वारा 28 फरवरी, 1968 को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक नगरी के रूप में स्थापित किया गया था ;

                और उन गंभीर कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए जो आरोविल के प्रबंध की बाबत उत्पन्न हुई थी, उसका प्रबंध आरोविल (आपात उपबंध) अधिनियम, 1980 (1980 का 59) द्वारा एक सीमित अवधि के लिए केंद्रीय सरकार में निहित किया गया था ;

                और केन्द्रीय सरकार के प्रबंध के अधीन तथा पूर्वोक्त अधिनियम के अधीन स्थापित अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के समग्र मार्गदर्शन के अधीन, आरोविल का पिछले आठ वर्षों के दौरान अनेक महत्वपूर्ण दिशाओं में विकास हो पाया है और आरोविल के निवासियों ने भी आरोविल के विकास के लिए क्रियाकलाप किए हैं जिन्हें और प्रोत्साहन देने और समेकित करने की आवश्यकता है ;

                और आरोविल का भारत और भारत के बाहर के विभिन्न संगठनों से प्राप्त निधियों और केन्द्रीय सरकार तथा राज्य सरकारों से प्राप्त पर्याप्त अनुदानों की सहायता से एक सांस्कृतिक नगरी के रूप में विकास किया गया था तथा संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ने भी समय-समय पर अपने संकल्पों में ऐसा उल्लेख किया था कि आरोविल परियोजना अंतरराष्ट्रीय सद्भाव और शांति के संप्रवर्तन में योगदान कर रही है ;

                और आरोविल के पूर्वोक्त क्रियाकलापों को प्रोत्साहित करने, चालू रखने और समेकित करने के प्रयोजन से लोक हित में यह आवश्यक है कि आरोविल के उपक्रमों को अर्जित किया जाए और उन्हें इस प्रयोजन के लिए स्थापित निगमित निकाय में निहित किया जाए ;

                भारत गणराज्य के उनतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम आरोविल प्रतिष्ठान अधिनियम, 1988 है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

                (क) नियत दिन" से इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख अभिप्रेत है ;

(ख) आरोविल" से उपक्रमों का उतना भाग अभिप्रेत है जो आरोविल नामक सांस्कृतिक नगरी का भागरूप है या उससे संबंधित है और जिसके चार्टर की उद्घोषणा ‘मां’ ने 28 फरवरी, 1968 को की थी ;

(ग) परिषद्" से धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन गठित आरोविल अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद् अभिप्रेत है ;

(घ) अभिरक्षक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे उपक्रमों के संबंध में धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन अभिरक्षक नियुक्त किया गया है ;

(ङ) प्रतिष्ठान" से धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित आरोविल प्रतिष्ठान अभिप्रेत है ;

(च) शासी बोर्ड" से धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन गठित प्रतिष्ठान का शासी बोर्ड अभिप्रेत है ;

(छ) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;

(ज) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

(झ) निवासी सभा" से प्रतिष्ठान की निवासी-सभा अभिप्रेत है ;

(ञ) सोसाइटी" से श्री अरविंद सोसाइटी अभिप्रेत है जो वैस्ट बंगाल सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन ऐक्ट, 1961(1961 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 26) में यथा परिभाषित एक सोसाइटी है और जिसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पश्चिमी बंगाल राज्य में कलकत्ता में है ;

(ट) विनिर्दिष्ट तारीख" से वह तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार धारा 9 के प्रयोजन के लिए, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ;

(ठ) न्यास" या निकाय" से अनुसूची में विनिर्दिष्ट न्यास या निकाय अभिप्रेत है ;

(ड) उपक्रम" से सोसाइटी, न्यास या निकाय के ऐसे उपक्रम अभिप्रेत हैं जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हुए थे ।

अध्याय 2

आरोविल के उपक्रमों का अर्जन और अंतरण

3. सोसाइटी, न्यास और निकायों के कतिपय उपक्रमों का केन्द्रीय सरकार को अंतरण और उसमें निहित होना-नियत दिन को, सोसाइटी, न्यास और निकाय के उपक्रमों का उतना भाग जो आरोविल का भागरूप है या उससे संबंधित है, और ऐसे उपक्रमों के संबंध में सोसाइटी, न्यास और निकाय के अधिकार, हक और हित, इस अधिनियम के आधार पर, केन्द्रीय सरकार को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगे ।

4. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) धारा 3 के अधीन निहित उपक्रमों के बारे में यह समझा जाएगा कि उनके अंतर्गत उस सोसाइटी, न्यास या निकाय की वे सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सभी   (जंगम और स्थावर) संपत्ति, जिसके अंतर्गत भूमि, भवन, संकर्म, कर्मशालाएं, परियोजनाएं, स्टोर, उपकरण, मशीनरी, मोटरगाड़ी और अन्य यान, नकद अतिशेष, निधियां, जिनके अंतर्गत आरक्षित निधियां हैं, विनिधान और बही ऋण जो आरोविल का भागरूप हैं, या उससे संबंधित हैं, और ऐसी संपत्तियों से उत्पन्न होने वाले वे सभी अन्य अधिकार और हित हैं, जो चाहे भारत में या भारत के बाहर, सोसाइटी, न्यास या निकाय के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में नियत दिन से ठीक पूर्व थे, और सभी लेखा बहियां, रजिस्टर, नक्शे, रेखांक तथा उससे संबंधित अन्य सभी दस्तावेजें हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार के हों ।

(2) पूर्वोक्त सभी संपत्तियां और आस्तियां जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित हो जाने के बल पर किसी भी न्यास, बाध्यता, बंधक, भार, धारणाधिकार और उन्हें प्रभावित करने वाले सभी अन्य विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएंगी अथवा किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण की किसी कुर्की, व्यादेश, डिक्री या आदेश के बारे में, जो ऐसी संपत्तियों या आस्तियों के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बंधित करता है, या ऐसी संपूर्ण संपत्ति या आस्ति या उनके किसी भाग के संबंध में रिसीवर की नियुक्ति करता है, यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है ।

(3) किसी ऐसे उपक्रम के संबंध में, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है, सोसाइटी, न्यास या निकाय को नियत दिन के पूर्व किसी भी समय अनुदत्त कोई अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत, जो नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त है, ऐसे उपक्रम के संबंध में और उसके प्रयोजनों के लिए ऐसे दिन को और उसके पश्चात्, उसके तात्पर्य के अनुसार प्रवृत्त बनी रहेगी या जहां ऐसे उपक्रम को धारा 6 के अधीन प्रतिष्ठान में निहित होने का निदेश दिया गया है, वहां प्रतिष्ठान के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में इस प्रकार प्रतिस्थापित हो गया है मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत ऐसे प्रतिष्ठान को दी गई थी और ऐसा प्रतिष्ठान उसे उस शेष अवधि के लिए धारण करेगा जिसके लिए ऐसी सोसाइटी, न्यास या निकाय उसके निबंधनों के अधीन उसे   धारण करता ।

(4) यदि, नियत दिन को, किसी संपत्ति या आस्ति के संबंध में, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, सोसाइटी, न्यास या निकाय द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित किसी भी प्रकार का कोई वाद, की गई अपील या अन्य कार्यवाही, लंबित है तो सोसाइटी, न्यास या निकाय के उपक्रमों के अंतरण या इस अधिनियम की किसी बात के कारण उसका उपशमन नहीं होगा, वह बंद नहीं होगी या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, किन्तु उस वाद, अपील या अन्य कार्यवाही को केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध या जहां सोसाइटी, न्यास या निकाय के उपक्रमों को धारा 6 के अधीन प्रतिष्ठान में निहित होने के लिए निदेश दिया गया है, वहां प्रतिष्ठान द्वारा या उसके विरुद्ध, चालू रखा जा सकेगा, चलाया जा सकेगा या प्रवर्तित किया जा सकेगा ।

5. कतिपय पूर्व दायित्वों के लिए केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान का दायी होना-नियत दिन के पूर्व किसी अवधि की बाबत किसी उपक्रम के संबंध में प्रत्येक दायित्व, केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध, न कि सोसाइटी, न्यास या निकाय के विरुद्ध, या जहां उक्त उपक्रम को धारा 6 के अधीन प्रतिष्ठान में विहित होने का निदेश दिया गया है वहां प्रतिष्ठान के विरुद्ध, प्रवर्तनीय होगा ।

6. उपक्रमों के प्रतिष्ठान में निहित होने का निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) धारा 3 और धारा 4 में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, अधिसूचना द्वारा निदेश देगी कि उपक्रम और ऐसे उपक्रमों के संबंध में सोसाइटी, न्यास या निकाय के अधिकार, हक और हित, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हुए थे, केन्द्रीय सरकार में निहित बने रहने के स्थान पर, या तो अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख को या ऐसी पूर्वतर या पश्चात्वर्ती तारीख को, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, प्रतिष्ठान में निहित होंगे ।

(2) जहां उपक्रमों के संबंध में सोसाइटी, न्यास या निकाय के अधिकार, हक और हित, उपधारा (1) के अधीन, प्रतिष्ठान में निहित होते हैं, वहां वह प्रतिष्ठान ऐसे निहित होने की तारीख से ही ऐसे उपक्रमों के संबंध में स्वामी बन गया समझा जाएगा और ऐसे उपक्रमों के संबंध में केंद्रीय सरकार के अधिकारों और दायित्वों के बारे में, ऐसे निहित होने की तारीख से ही, यह समझा जाएगा कि वे क्रमशः प्रतिष्ठान के अधिकार और दायित्व बन गए हैं ।

7. उपक्रमों का प्रबंध, आदि-(1) ऐसे उपक्रमों के, जिनके संबंध में अधिकार, हक और हित धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, कार्यकलापों का साधारण अधीक्षण, निदेशन, नियंत्रण और प्रबंध,-

                (क) जहां धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश दिया गया है, वहां प्रतिष्ठान में निहित होगा ; या

                (ख) जहां केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसा कोई निदेश नहीं दिया गया है, वहां केन्द्रीय सरकार द्वारा उपधारा (2) के अधीन नियुक्त अभिरक्षक में निहित होगा,

और, तदुपरि प्रतिष्ठान या इस प्रकार नियुक्त अभिरक्षक ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करने और ऐसी सभी बातों को करने का हकदार होगा जिनका प्रयोग करने और जिन्हें करने के लिए सोसाइटी, न्यास या निकाय अपने उपक्रमों के संबंध में प्राधिकृत है ।

                (2) केन्द्रीय सरकार किसी व्यक्ति को ऐसे उपक्रमों का अभिरक्षक नियुक्त कर सकेगी जिनके संबंध में उसने धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन कोई निदेश नहीं दिया है ।

                (3) इस प्रकार नियुक्त अभिरक्षक उतना पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जितना केन्द्रीय सरकार नियत करे और केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा ।

8. उपक्रमों के प्रबंध के भारसाधक व्यक्तियों का सभी आस्तियां परिदत्त करने का कर्त्तव्य-(1) उपक्रमों का प्रबंध प्रतिष्ठान में निहित हो जाने पर या धारा 7 के अधीन अभिरक्षक की नियुक्ति हो जाने पर, इस प्रकार निहित हो जाने या नियुक्ति के ठीक पूर्व उपक्रमों के प्रबंध के भारसाधक सभी व्यक्ति प्रतिष्ठान या अभिरक्षक को उपक्रमों से संबंधित सभी आस्तियां, लेखा बहियां, रजिस्टर तथा अन्य दस्तावेज, जो उनकी अभिरक्षा में हों, परिदत्त करने के लिए आबद्ध होंगे ।

(2) केन्द्रीय सरकार, अभिरक्षक को उसकी शक्तियों और कर्तव्यों के बारे में ऐसे निदेश जारी कर सकेगी, जैसे वह मामले की परिस्थितियों में वांछनीय समझे और ऐसा अभिरक्षक भी, यदि ऐसा करना आवश्यक समझता है तो, केन्द्रीय सरकार को किसी भी समय ऐसी रीति के बारे में जिससे उपक्रमों का प्रबंध चलाया जाएगा, या ऐसे प्रबंध के दौरान उद्भूत होने वाले किसी अन्य विषय के संबंध में, अनुदेशों के लिए आवेदन कर सकेगा ।

(3) ऐसा कोई भी व्यक्ति, जिसके कब्जे में या जिसके नियंत्रणाधीन, नियत दिन को उपक्रमों से संबंधित बहियां, दस्तावेजों या अन्य कागज-पत्र हैं, उक्त बहियों, दस्तावेजों या अन्य कागज-पत्रों के बारे में, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान को लेखा-जोखा देने के लिए दायी होगा, और वह उन्हें केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान को या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को, जो केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, परिदत्त करेगा ।

(4) केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान ऐसे सभी उपक्रमों का, जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान में निहित हो गए हैं, कब्जा प्राप्त करने के लिए, सभी आवश्यक कदम उठा सकेगा या उठवा सकेगा ।

(5) सोसाइटी, न्यास या निकाय केन्द्रीय सरकार को उन सभी संपत्तियों और आस्तियों की, जो नियत दिन को ऐसे उपक्रमों से संबंधित हैं, एक पूर्ण सूची ऐसी अवधि के भीतर देगा जो वह सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, और इस प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान, सोसाइटी, न्यास या निकाय को सभी युक्तियुक्त सुविधाएं प्रदान करेगा ।

9. केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान की कतिपय शक्तियां-केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान ऐसा कोई धन जो, सोसाइटी, न्यास या निकाय को उसके उन उपक्रमों के संबंध में शोध्य है जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान में निहित हो गए हैं, और जो नियत दिन के पश्चात् वसूल किया गया है, अन्य सभी व्यक्तियों का अपवर्जन करके, इस बात के होते हुए भी कि ऐसी किसी वसूली नियत दिन के पूर्व की अवधि के संबंध में है, विनिर्दिष्ट तारीख तक प्राप्त करने का हकदार होगा ।

अध्याय 3

आरोविल प्रतिष्ठान

10. प्रतिष्ठान की स्थापना और निगमन-(1) ऐसी तारीख से जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए, एक प्रतिष्ठान की स्थापना की जाएगी जो आरोविल प्रतिष्ठान कहलाएगा ।

(2) प्रतिष्ठान पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा जिसे स्थावर और जंगम, दोनों संपत्तियों के अर्जन, धारण और व्ययन करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और वह उस नाम से वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।

(3) इस प्रतिष्ठान में निम्नलिखित प्राधिकरण होंगे, अर्थात् :-

                (क) शासी बोर्ड ;

                (ख) निवासी-सभा ;

                (ग) आरोविल अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद् ।

11. शासी बोर्ड-(1) शासी बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-

                (i) केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से नामनिर्दिष्ट सात से अनधिक सदस्य, जिन्होंने,-

                                (क) आरोविल की बहुमूल्य सेवा की है ;

                (ख) जीवन पर्यन्त शिक्षा, सांसारिक और आध्यात्मिक अनुसंधानों के संश्लेषण या मानव एकता के आदर्शों के प्रति स्वयं को समर्पित किया है ;

                (ग) उन क्रियाकलापों में, जिनके अंतर्गत पर्यावरण, वनरोपण, कला और शिल्प, उद्योग, कृषि, मानविकी, विज्ञान और समेकित योग से संबंधित क्रियाकलाप भी हैं, महत्वपूर्ण योगदान दिया है जिनको आरोविल में किया जा रहा है या जिनकी आरोविल में अभिवृद्धि प्रकल्पित है ;

(ii) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट उसके दो प्रतिनिधि ।

                (2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन उसके द्वारा नामनिर्दिष्ट सदस्यों में से शासी बोर्ड का एक अध्यक्ष नामनिर्दिष्ट करेगी ।

                (3) प्रतिष्ठान के कार्यों का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंध, शासी बोर्ड में निहित होगा जो उन सभी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन कर सकेगा जिनका प्रयोग या निर्वहन प्रतिष्ठान द्वारा किया जा सकता है ।

                (4) शासी बोर्ड ऐसी रीति से और ऐसे प्रयोजनों के लिए जो विहित किए जाएं, अपने साथ किन्हीं ऐसे व्यक्तियों को सहयोजित कर सकेगा जिनकी सहायता या सलाह की इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी का पालन करने के लिए वह अपेक्षा करे और इस प्रकार सहयोजित व्यक्ति को शासी बोर्ड के उस विचार-विमर्श में, जो उन प्रयोजनों से सुसंगत है जिनके लिए वह सहयोजित किया गया है, भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

                (5) शासी बोर्ड या उसके द्वारा धारा 16 के अधीन नियुक्त किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण से अविधिमान्य नहीं होगी कि-

                                (क) शासी बोर्ड या ऐसी समिति के गठन में कोई रिक्ति या त्रुटि है ; या

                (ख) शासी बोर्ड या ऐसी समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के नामनिर्देशन में कोई त्रुटि है ; या

(ग) शासी बोर्ड या ऐसी समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है, जो मामले के गुणागुण को प्रभावित नहीं करती है ।

12. सदस्यों की पदावधि-(1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अध्यक्ष सहित शासी बोर्ड के सदस्यों की पदावधि उनके नामनिर्देशन की तारीख से चार वर्ष होगी ।

(2) शासी बोर्ड का पदावरोही सदस्य पुनःनामनिर्देशन का पात्र होगा ।

(3) शासी बोर्ड में किसी आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए नामनिर्दिष्ट सदस्य की पदावधि उस सदस्य की शेष पदावधि तक जारी रहेगी, जिसके स्थान पर उसे नामनिर्दिष्ट किया गया है ।

(4) कोई सदस्य, केन्द्रीय सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा, अपना पद त्याग सकेगा, किंतु वह अपने पद पर तब तक बना रहेगा जब तक उसका त्यागपत्र उस सरकार द्वारा स्वीकार नहीं कर लिया जाता ।

13. अध्यक्ष का वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें-शासी बोर्ड का अध्यक्ष ऐसे वेतन और भत्तों का तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि और ऐसे अन्य विषयों के बारे में सेवा की ऐसी शर्तों का हकदार होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर नियत  की जाएं ।

14. शासी बोर्ड अधिवेशन-(1) शासी बोर्ड वर्ष में कम से कम एक बार आरोविल में ऐसे समय पर, जो शासी बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा नियत किया जाए, अधिवेशन करेगा ।

(2) शासी बोर्ड के किसी अधिवेशन में सभी विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा किए जाएंगे :

परंतु मत बराबर होने की दशा में, बोर्ड के अध्यक्ष का निर्णायक मत होगा ।

15. प्रतिष्ठान का सचिव और अन्य अधिकारी-(1) केन्द्रीय सरकार शासी बोर्ड के अध्यक्ष के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने और ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिए, जो अध्यक्ष द्वारा विहित किए जाएं या जो उसे प्रत्यायोजित किए जाएं, प्रतिष्ठान का एक सचिव नियुक्त करेगी ।

(2) सचिव ऐसे वेतन और भत्तों का तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि और अन्य विषयों के बारे में सेवा की ऐसी शर्तों का हकदार होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर नियत की जाएं ।

(3) शासी बोर्ड, ऐसे नियंत्रण, निर्बंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, उतने अन्य अधिकारी और कर्मचारी जितने उसके कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए आवश्यक हों, नियुक्त कर सकेगा ।

(4) प्रतिष्ठान का अध्यक्ष, सचिव और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी, केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा के सिवाय, ऐसे किसी कार्य का भार अपने ऊपर नहीं लेंगे जो इस अधिनियम के अधीन उनके कर्तव्यों से संबद्ध नहीं है ।

16. शासी बोर्ड की समितियां-(1) शासी बोर्ड उतनी समितियां जितनी इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन और उसके कृत्यों के पालन के लिए आवश्यक हों, स्थापित कर सकेगा ।

(2) शासी बोर्ड को यह शक्ति होगी कि वह उपधारा (1) के अधीन स्थापित किसी समिति में सदस्यों के रूप में ऐसे व्यक्तियों को जो शासी बोर्ड के सदस्य नहीं हैं, उतनी संख्या में जितनी वह ठीक समझे, सहयोजित करे और इस प्रकार सहयोजित किए गए व्यक्तियों को समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने का और समिति की कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा, किंतु मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

17. शासी बोर्ड की शक्तियां और कृत्य-शासी बोर्ड की शक्तियां और कृत्य निम्नलिखित होंगे-

(क) आरोविल के आदेशों का संवर्धन करना और आरोविल की समग्रता और एकीकरण के प्रयोजनों के लिए निवासी सभा के परामर्श से, आरोविल के क्रियाकलापों और सेवाओं का समन्वय करना ;

(ख) आरोविल की मूल नीतियों और कार्यक्रमों का पुनर्विलोकन करना और आरोविल के भावी विकास के लिए आवश्यक निदेश देना ;

(ग) निवासी सभा द्वारा बनाए गए आरोविल के कार्यक्रमों का अनुमोदन करना ;

(घ) आरोविल के क्रियाकलापों का प्रवीक्षण तथा पुनर्विलोकन करना और धारा 6 के अधीन प्रतिष्ठान में निहित संपत्तियों और आरोविल से संबंधित अन्य संपत्तियों का समुचित प्रबंध सुनिश्चित करना ;

(ङ) निवासी सभा के परामर्श से आरोविल का एक मास्टर प्लान तैयार करना और उसके अनुसार आरोविल के विकास को सुनिश्चित करना ;

(च) आरोविल के लिए निधि-संग्रह को प्राधिकृत तथा उसका समन्वय करना और आरोविल की निधियों की प्राप्तियों और संवितरण के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना ।

18. निवासी सभा-(1) निवासी सभा में आरोविल के ऐसे सभी निवासी होंगे जिनके नाम तत्समय इस धारा के अधीन रखे गए निवासियों के रजिस्टर में प्रविष्ट किए जा चुके हैं ।

(2) शासी बोर्ड का सचिव, ऐसी रीति से जैसी विहित की जाए, निवासियों का एक रजिस्टर रखेगा और ऐसे सभी व्यक्ति जो आरोविल के निवासी हैं तथा अठारह वर्ष और उससे अधिक की आयु के हैं, सचिव को, ऐसे प्ररूप में जो विहित किया जाए, आवेदन करने पर रजिस्टर में अपने नाम प्रविष्ट कराने के हकदार होंगे ।

(3) निवासियों के वे सभी नाम जो नियत दिन के ठीक पूर्व आरोविल (आपात उपबंध) अधिनियम, 1980 (1980 का 59) की धारा 5 के अधीन नियुक्त प्रशासक द्वारा बनाए रखे गए रजिस्टर में सम्मिलित किए जा चुके हैं, इस अधिनियम के अधीन रखे गए रजिस्टर में सम्मिलित किए गए समझे जाएंगे ।

19. निवासी सभा के कृत्य-(1) निवासी सभा ऐसे कृत्य करेगी जो इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित हैं और शासी बोर्ड को आरोविल के निवासियों से संबंधित सभी क्रियाकलापों के बारे में सलाह देगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निवासी सभा,-

(क) धारा 32 के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसार निवासियों के रजिस्टर में व्यक्तियों का नाम प्रविष्ट करने की अनुज्ञा दे सकेगी या उससे नाम हटवा सकेगी ;

                (ख) आरोविल से संबंधित विभिन्न क्रियाकलाप आयोजित कर सकेगी ;

                (ग) आरोविल का मास्टर प्लान बना सकेगी और शासी बोर्ड के अनुमोदन के लिए आरोविल से संबंधित क्रियाकलापों में लगे संगठनों को मान्यता देने के लिए आवश्यक सिफारिशें कर सकेगी ;

                (घ) आरोविल के लिए निधियां जुटाने के प्रस्तावों की शासी बोर्ड के अनुमोदन के लिए सिफारिश कर सकेगी ।

(3) निवासी सभा अपने कृत्यों का पालन करने के प्रयोजन के लिए उतनी समितियां जितनी वह आवश्यक समझे, स्थापित कर सकेगी, जो शासी बोर्ड द्वारा किए जाने वाले कृत्यों के बारे में उसका प्रतिनिधित्व करेंगी ।

20. निवासी सभा की कार्य समिति-(1) निवासी सभा की एक कार्य समिति होगी जो, यथास्थिति, निवासी सभा, या शासी बोर्ड की, इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के निर्वहन में, सहायता करेगी ।

(2) कार्य समिति में सात से अनधिक सदस्य होंगे जो निवासी सभा द्वारा अपने में से चुने जाएंगे ।

(3) कार्य समिति के सदस्यों के चुने जाने की रीति और उनकी पदावधि वह होगी जो निवासी सभा द्वारा विनिश्चित किया जाए ।

(4) कार्य समिति, शासी बोर्ड के अनुमोदन से, आरोविल से संबंधित अन्य संगठन, न्यास, सोसाइटियां या संगम सृजित या गठित कर सकेगी, यदि कार्य समिति का यह समाधान हो जाता है कि ऐसे संगठन, न्यास, सोसाइटियां, या संगम,-

                (क) के मुख्यालय आरोविल में हैं ;

                (ख) यह घोषित कर चुके हैं कि वे आरोविल से संबद्ध सभी मामलों में शासी बोर्ड के विनिश्चयों के अनुरूप कार्य करेंगे और उनका मुख्य उद्देश्य मां" द्वारा 28 फरवरी, 1968 को उद्घोषित आरोविल के चार्टर में अधिकथित आदर्शों का संवर्धन है ।

21. सलाहकार परिषद्-(1) आरोविल अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद् में केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट पांच से अनधिक सदस्य होंगे ।

(2) केन्द्रीय सरकार ऐसे व्यक्तियों में से परिषद् के सदस्य नामनिर्दिष्ट कर सकेगी जो उसकी राय में मानव एकता, शांति और प्रगति के आदर्शों के प्रति समर्पित हैं ।

(3) परिषद् स्वप्रेरणा से या शासी बोर्ड द्वारा उसको किए गए किसी निर्देश पर, शासी बोर्ड को आरोविल के विकास और प्रबंध से संबंधित किसी विषय पर सलाह दे सकेगी ।

(4) शासी बोर्ड को कोई सलाह देते समय परिषद् यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि-

                (क) उन आदर्शों को, जिनके लिए आरोविल की स्थापना की गई है, बढ़ावा मिलता है ; और

                (ख) आरोविल के निवासियों को, आरोविल के उक्त चार्टर में परिकल्पित आकांक्षाओं और कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए क्रियाकलापों और संस्थाओं को प्रारंभ करने और विकसित करने की स्वतंत्रता है ।

(5) परिषद् का एक अध्यक्ष होगा जिसका निर्वाचन परिषद् के सदस्यों द्वारा अपने में से किया जाएगा ।

(6) परिषद् के सदस्यों की पदावधि, उनमें आकस्मिक रिक्तियों को भरने की पद्धति तथा उन्हें संदेय भत्ते और अन्य पारिश्रमिक, यदि कोई हैं, ऐसे होंगे जो केंद्रीय सरकार द्वारा अवधारित किए जाएं ।

(7) परिषद् को अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी ।

22. प्रतिष्ठान का विघटन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, और उसमें विनिर्दिष्ट कारणों से, यह निदेश दे सकेगी कि प्रतिष्ठान ऐसी तारीख से और ऐसी अवधि के लिए, जैसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, विघटित किया जाएगा :

परंतु ऐसी कोई अधिसूचना जारी करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार प्रतिष्ठान को प्रस्थापित विघटन के विरुद्ध अभ्यावेदन करने का उचित अवसर देगी और प्रतिष्ठान के अभ्यावेदन पर, यदि कोई है, विचार करेगी ।

(2) जब उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन प्रतिष्ठान विघटित कर दिया जाता है तब,-

(क) शासी बोर्ड के सभी सदस्य, इस बात के होते हुए भी कि उनकी पदावधि समाप्त नहीं हुई है, विघटन की तारीख से ऐसे सदस्य के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे ;

(ख) विघटन की अवधि के दौरान, प्रतिष्ठान की सभी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा जिन्हें केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे ;

(ग) विघटन की अवधि के दौरान, प्रतिष्ठान में निहित सभी संपत्ति केन्द्रीय सरकार में निहित होंगी ; और

(घ) जैसे ही विघटन की अवधि समाप्त होती है, प्रतिष्ठान इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार पुनः गठित किया जाएगा ।

23. प्रतिष्ठान को केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान-प्रतिष्ठान को इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार संसद् की विधि द्वारा इस निमित्त सम्यक् विनियोग के पश्चात् प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, प्रतिष्ठान को ऐसी धनराशि जो वह सरकार आवश्यक समझती है अनुदान, ऋण के रूप में या अन्यथा संदाय करेगी ।

अध्याय 4

प्रकीर्ण

24. विवरणियां, आदि देने का कर्तव्य-(1) शासी बोर्ड, केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर तथा ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जैसी विहित की जाए, या जैसा केन्द्रीय सरकार निदेश करे, ऐसी विवरणियां और ऐसे विवरण तथा ऐसी विशिष्टियां, जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे, देगा ।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, शासी बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत के पश्चात् यथासंभव शीघ्र एक रिपोर्ट ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख से पूर्व, जो विहित की जाए, पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान, अपने क्रियाकलापों, नीति और कार्यक्रमों का सही और पूर्ण विवरण देते हुए, केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त रिपोर्ट की एक प्रति उसके प्राप्त होने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।

25. शासी बोर्ड की उधार लेने की शक्तियां-शासी बोर्ड को आरोविल की संपत्तियों की या किसी अन्य आस्ति की प्रतिभूति पर, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त बनाए जाएं, उधार लेने की शक्ति होगी ।

26. लेखा और लेखा परीक्षा-(1) शासी बोर्ड समुचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का वार्षिक विवरण जिसके अंतर्गत आय और व्यय लेखा तथा तुलनपत्र भी है, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक-महा लेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए ।

(2) प्रतिष्ठान के लेखाओं की, भारत के नियंत्रक-महा लेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अंतरालों पर जो उसके द्वारा विहित किए जाएं, लेखा परीक्षा की जाएगी और ऐसी लेखा परीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय प्रतिष्ठान द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होंगे ।

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को और प्रतिष्ठान के लेखाओं की लेखा परीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी लेखा परीक्षा के संबंध में वही अधिकार तथा विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की लेखा परीक्षा के संबंध में होते है और विशिष्टितया, उसे बहियों, लेखाओं, संबद्ध वाउचरों और अन्य दस्तावेजों तथा कागजपत्रों को प्रस्तुत करने की मांग करने और प्रतिष्ठान के कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणिक, प्रतिष्ठान के लेखे और उस पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रतिवर्ष केन्द्रीय सरकार को भेजी जाएगी और सरकार उसे संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

27. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में, या इस अधिनियम से भिन्न किसी अन्य विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे । 

28. संविदाओं का तब तक प्रभावी रहना जब तक उनका प्रतिष्ठान द्वारा अनुसमर्थन नहीं कर दिया जाता है-किसी सेवा, विक्रय या प्रदाय के लिए किसी सोसाइटी, न्यास या निकाय द्वारा अपने उपक्रमों के संबंध में की गई प्रत्येक ऐसी संविदा जो नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त है, उस दिन से एक सौ अस्सी दिन की अवधि की समाप्ति से ही प्रभावी नहीं रहेगी जब तक ऐसी संविदा का उक्त अवधि की समाप्ति के पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान द्वारा लिखित रूप में अनुसमर्थन नहीं कर दिया जाता है और यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान ऐसी संविदा का अनुसमर्थन करने के लिए उसमें ऐसे परिवर्तन या उपांतरण कर सकेगा जो वह ठीक समझे :

परन्तु, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान किसी संविदा का अनुसमर्थन करने में लोप और उनमें कोई परिवर्तन या उपांतरण तभी करेगी जब-

(क) उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसी संविदा असम्यक् रूप से दुर्भर है या असद्भावपूर्वक की गई है या केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान के हितों के लिए अपायकर है ; और

(ख) उसने संविदा के पक्षकारों को सुनवाई का उचित अवसर दे दिया है और संविदा का अनुसमर्थन करने से इंकार करने का या उसमें कोई परिवर्तन या उपांतरण करने के कारणों को लेखबद्ध कर दिया है ।

29. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति,-

(क) सोसाइटी, न्यास या निकाय के उपक्रमों के भागरूप किसी संपत्ति को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान से या उस सरकार या प्रतिष्ठान द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय से सदोष विधारित करेगा ; या

(ख) सोसाइटी, न्यास या निकाय के किसी उपक्रम के भागरूप किसी संपत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या रखेगा या, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान को या उस सरकार या प्रतिष्ठान द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को ऐसे उपक्रमों से संबंधित किन्हीं ऐसे दस्तावेजों को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में हो सकते हैं, जानबूझकर विधारित करेगा या देने में, असफल रहेगा या सोसाइटी, न्यास या निकाय के उपक्रमों से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखा बहियों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान को या उस सरकार या प्रतिष्ठान द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को परिदत्त करने में असफल रहेगा ; या

                (ग) सोसाइटी, न्यास या निकाय के उपक्रमों के भागरूप किसी संपत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा,

वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

30. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या उस सरकार के किसी अधिकारी या अभिरक्षक या उस सरकार या प्रतिष्ठान द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।

31. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इन नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

(क) वह रीति जिससे और वह प्रयोजन जिसके लिए कोई व्यक्ति धारा 11 की उपधारा (4) के अधीन शासी बोर्ड के साथ सहयुक्त किया जा सकेगा ;

                (ख) वे शक्तियां और कर्तव्य जिनका शासी बोर्ड का सचिव धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन पालन कर सकेगा ;

                (ग) वे नियंत्रण, निर्बंधन और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, शासी बोर्ड धारा 15 की उपधारा (3) के अधीन अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा ;

                (घ) वह रीति, जिससे निवासियों का रजिस्टर धारा 18 की उपधारा (2) के अधीन रखा जा सकेगा ;

                (ङ) वह समय जिसके भीतर और वह प्ररूप जिसमें तथा वह रीति जिससे शासी बोर्ड धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन विवरणियां और रिपोर्टें दे सकेगा ;

(च) वह प्ररूप और तारीख जिसके पूर्व शासी बोर्ड धारा 24 की उपधारा (2) के अधीन विवरणियां और रिपोर्टें केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा ;

                (छ) वे नियम जिनके अधीन रहते हुए शासी बोर्ड को धारा 25 के अधीन उधार लेने की शक्ति होगी ;

                (ज) कोई अन्य विषय जिसे विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।

32. विनियम बनाने की शक्ति-(1) शासी बोर्ड, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में स्वयं को समर्थ बनाने के लिए, ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।

(2) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

(क) शासी बोर्ड के अधिवेशनों या उसके द्वारा स्थापित समितियों के अधिवेशनों में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया और सदस्यों की ऐसी संख्या जो ऐसे अधिवेशनों में गणपूर्ति गठित करेगी ;

(ख) शासी बोर्ड के अध्यक्ष, अन्य सदस्यों, सचिव या अन्य अधिकारियों को इस अधिनियम के अधीन शासी बोर्ड की शक्तियों और कर्तव्यों से किसी शक्ति या कर्तव्य का प्रत्यायोजन ;

(ग) धारा 11 की उपधारा (4) के अधीन सहयुक्त व्यक्तियों का या धारा 16 की उपधारा (2) के अधीन सहयोजित व्यक्तियों को संदेय यात्रा भत्ते और अन्य भत्ते ;

(घ) प्रतिष्ठान के अधिकारियों (उनसे भिन्न जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हैं) और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा छुट्टी और सेवा की अन्य शर्तें ;

(ङ) प्रतिष्ठान के लेखाओं को बनाए रखना ;

(च) प्रतिष्ठान और उसकी विभिन्न समितियों के रजिस्टरों और अन्य अभिलेखों को बनाए रखना ;

(छ) शासी बोर्ड द्वारा उसकी ओर से अपने किन्हीं कृत्यों का निर्वहन करने के लिए अभिकर्ताओं की नियुक्ति ;

(ज) निवासियों के रजिस्टर में व्यक्तियों के नाम प्रविष्ट करना या हटाना ।

                (3) शासी बोर्ड द्वारा बनाए गए किसी विनियम का तब तक प्रभाव नहीं होगा जब तक उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित और राजपत्र में प्रकाशित नहीं कर दिया जाता और केन्द्रीय सरकार विनियम को अनुमोदित करते समय उसमें ऐसा परिवर्तन कर सकेगी जो उसे आवश्यक प्रतीत हो ।

33. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम या विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि यह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

34. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, कठिनाई को दूर कर सकेगी :

परन्तु ऐसा कोई आदेश नियत दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

अनुसूची

[धारा 2(5) देखिए]

न्यास और निकाय

1. आरोविल ट्रस्ट, आरोविल ।

2. आर्टिसन ट्रस्ट, आरोविल ।

3. आरोसर्विस दी आरोविल ट्रस्ट, पांडिचेरी ।

4. आरेलेक ट्रस्ट, आरोविल ।

5. आरोमित्र, आरोविल ।

6. सेंटर फॉर साईंटिफिक रिसर्च, आरोविल ।

7. श्री अरविंद इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशनल रिसर्च, आरोविल ।

8. एलटैक्स ट्रस्ट, आरोविल ।

9. न्यू इंजीनियरिंग ट्रस्ट, आरोविल ।

10. आरोट्रस्ट, पांडिचेरी ।

11. सर्विस ट्रस्ट, पांडिचेरी ।

12. आरो प्रेस ट्रस्ट, पांडिचेरी ।

13. न्यू ट्रस्ट, पांडिचेरी ।

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