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दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 ( Delhi Special Police Establishment Act, 1946 )


 

दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946

(1946 का अधिनियम संख्यांक 25)

[19 नवम्बर, 1946]

[ [संघ राज्यक्षेत्रों] में कतिपय अपराधों के अन्वेषण के लिए दिल्ली में] एक विशेष पुलिस बल के

गठन के लिए, उक्त बल के अधीक्षण और प्रशासन के लिए और उक्त अपराधों

के अन्वेषण के सम्बन्ध में उक्त बल के सदस्यों की शक्तियों और

अधिकारिता के  *** अन्य क्षेत्रों पर विस्तार

के लिए उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

यह आवश्यक है कि 2[3[संघ राज्यक्षेत्रों] में कतिपय अपराधों के अन्वेषण के लिए दिल्ली में] एक विशेष पुलिस बल गठित किया जाए और उक्त बल के अधीक्षण और प्रशासन के लिए और उक्त अपराधों के अन्वेषण के सम्बन्ध में उक्त बल के सदस्यों की शक्तियों और अधिकारिता के 4*** अन्य क्षेत्रों पर विस्तार के लिए उपबन्ध किया जाए;

अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता हैः-

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) यह अधिनियम दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 कहा जा सकेगा ।

(2) इस विस्तार  *** सम्पूर्ण भारत पर है ।

 [1क. निर्वचन-खंड-उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 (2003 का 45) में परिभाषित हैं वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में हैं;]

2. विशेष पुलिस स्थापन का गठन और उसकी शक्तियां-(1) पुलिस अधिनियम, 1861 (1861 का 5) में किसी बात के होते हुए भी केन्द्रीय सरकार धारा 3 के अधीन अधिसूचित अपराधों के  [किसी  [संघ राज्यक्षेत्र]] में अन्वेषण के लिए  *** दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन कहलाया जाने वाला एक विशेष पुलिस बल गठित कर सकेगी ।

(2) किन्हीं ऐसे आदेशों के, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त करे, अधीन रहते हुए उक्त पुलिस स्थापन के सदस्यों को ऐसे अपराधों के अन्वेषण के और ऐसे अपराधों से संसक्त व्यक्तियों की गिरफ्तारी के संबंध में  [किसी भी 8[संघ राज्यक्षेत्रटट में सर्वत्र वे सब शक्तियां, कर्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व होंगे, जो  [उस संघ राज्यक्षेत्र] के पुलिस अधिकारियों को वहां किए गए अपराधों के अन्वेषण के सम्बन्ध में होते हैं ।

(3) उक्त पुलिस स्थापन का कोई सदस्य, जो उपनिरीक्षक की पंक्ति का या उससे ऊपर की पंक्ति का हो, किन्हीं ऐसे आदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त करे, 10[किसी 8[संघ राज्यक्षेत्र]] में उस क्षेत्र के, जिसमें वह तत्समय हो, पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियों में से किसी का प्रयोग कर सकेगा और ऐसी शक्तियों का इस प्रकार प्रयोग प्रयोग करते समय वह, पूर्वोक्त जैसे आदेशों के अधीन रहते हुए, पुलिस थाने का ऐसा भारसाधक अधिकारी समझा जाएगा, जो अपने स्टेशन की सीमाओं के अन्दर ऐसे अधिकारी के कत्यों का निर्वहन कर रहा है ।

3. अपराध, जिनका अन्वेषण विशेष पुलिस स्थापन द्वारा किया जाएगा-केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना  द्वारा  *** उन अपराधों या अपराधों के वर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिनका अन्वेषण दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन द्वारा किया       जाना है ।

 [4. विशेष पुलिस स्थापन का अधीक्षण और प्रशासन-(1) दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन का अधीक्षण, जहां तक इसका संबंध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49) के अधीन किए गए अभिकथित अपराधों के अन्वेषण से है, आयोग में                      निहित होगा ।

(2) जैसा उपधारा (1) में अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, अन्य सभी मामलों में उक्त पुलिस स्थापन का अधीक्षण केन्द्रीय सरकार में निहित होगा ।

(3) उक्त पुलिस स्थापन का प्रशासन केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त किए गए किसी अधिकारी में (जिसे इसमें इसके पश्चात् निदेशक कहा गया है) निहित होगा जो उस पुलिस स्थापन के संबंध में ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो किसी राज्य में पुलिस बल के संबंध में पुलिस महानिरीक्षक द्वारा प्रयोक्तव्य हैं, जो इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ।

4क. निदेशक की नियुक्ति के लिए समिति- [(1) केन्द्रीय सरकार, निम्नलिखित से मिलकर बनने वाली समिति की सिफारिश पर निदेशक की नियुक्ति करेगी,-

                (क) प्रधानमंत्री-अध्यक्षः

                 [(ख) लोक सभा में उस रूप में मान्यताप्राप्त विपक्ष का नेता या जहां विपक्ष का ऐसा नेता नहीं है, वहां उस सदन में एकल सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता-सदस्य;]

                (ग) भारत का मुख्य न्यायमूर्ति या उसके द्वारा नामनिर्दिष्ट उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश-सदस्य ।]

5[(2) निदेशक की कोई नियुक्ति, समिति में केवल किसी रिक्ति या किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण अविधिमान्य                नहीं होगी ।]

(3) समिति,-

                (क) ज्येष्ठता, सत्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार निरोधक मामलों के अन्वेषण के अनुभव के आधार पर; और

                (ख) अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 (1951 का 61) के अधीन गठित भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों में से चुनकर,

निदेशक के रूप में नियुक्ति के लिए विचार किए जाने वाले अधिकारियों के एक पैनल की सिफारिश करेगी ।

4ख. निदेशक की सेवा के निबंधन और शर्तें-(1) निदेशक, उसकी सेवा की शर्तों से संबंधित नियमों में किसी प्रतिकूल बात के होते हए भी, उस तारीख से जिसको वह पद ग्रहण करता है, दो वर्ष से अन्यून अवधि के लिए पद धारण किए रहेगा ।

(2) निदेशक को धारा 4क की उपधारा (1) में निर्दिष्ट समिति की पूर्व सहमति के सिवाय स्थानांतरित नहीं किया जाएगा ।

 [4खक. अभियोजन निदेशक-(1) इस अधिनियम के अधीन मामलों के अभियोजन का संचालन करने के लिए एक अभियोजन निदेशालय होगा जिसका प्रमुख एक निदेशक होगा जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का अधिकारी नहीं होगा ।

(2) अभियोजन निदेशक, निदेशक के समग्र अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन कृत्य करेगा ।

(3) केन्द्रीय सरकार, अभियोजन निदेशक की नियुक्ति केन्द्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर करेगी ।

(4) अभियोजन निदेशक, उसकी सेवा शर्तों से संबंधित नियमों में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, दो वर्ष से अन्यून अवधि तक अपना पद धारण करता रहेगा ।]

4ग. पुलिस अधीक्षक और उससे ऊपर के पदों के लिए नियुक्ति, उनकी पदावधि का विस्तारण और लघुकरण, आदि-4[(1) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित से मिलकर बनने वाली समिति की सिफारिश पर, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन में निदेशक के सिवाय, पुलिस अधीक्षक और ऊपर के स्तर के पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति करेगी और ऐसे अधिकारियों की सेवाधृति के विस्तारण या कम किए जाने की सिफारिश भी करेगी,-

(क) केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त-अध्यक्ष;

(ख) सतर्कता आयुक्त-सदस्य;

(ग) गृह मंत्रालय का भारसाधक भारत सरकार का सचिव-सदस्य;

(घ) कार्मिक विभाग का भारसाधक भारत सरकार का सचिव-सदस्य :

परंतु समिति, केन्द्रीय सरकार को अपनी सिफारिश प्रस्तुत करने से पूर्व निदेशक से परामर्श करेगी ।]

(2) उपधारा (1) के अधीन की गई सिफारिश की प्राप्ति पर केन्द्रीय सरकार उक्त सिफारिश को कार्यान्वित करने के लिए ऐसा आदेश पारित करेगी जो वह उचित समझे ।]

5. विशेष पुलिस स्थापन की शक्तियों और अधिकारिता का अन्य क्षेत्रों पर विस्तारण-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 3 के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किन्हीं अपराधों या अपराधों के वर्गों के अन्वेषण के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन के सदस्यों की शक्तियों और अधिकारिता का विस्तारण  [ [संघ राज्यक्षेत्र न होने वाले किसी राज्यट के] किसी क्षेत्र पर (जिसके अन्तर्गत रेल क्षेत्र भी है) आदेश  द्वारा कर सकेगी ।

(2) जब उपधारा (1) के अधीन आदेश द्वारा उक्त पुलिस स्थापन के सदस्यों की शक्तियों और अधिकारिता का विस्तारण ऐसे किसी क्षेत्र पर किया जाता है तब उसका कोई सदस्य, ऐसे किन्हीं आदेशों के, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त करे, अधीन रहते हुए उस क्षेत्र में पुलिस अधिकारी के कृत्यों का निर्वहन कर सकेगा और ऐसे कृत्यों का इस प्रकार निर्वहन करते समय वह उस क्षेत्र के पुलिस बल का सदस्य समझा जाएगा और उस पुलिस बल के सदस्य की शक्तियां, कृत्य और विशेषाधिकार उसमें निहित होंगे तथा उसके दायित्वों के वह अध्यधीन होगा ।

 [(3) जब उपधारा (1) के अधीन ऐसा कोई आदेश किसी क्षेत्र के सम्बन्ध में किया जाता है तब उपधारा (2) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन का कोई सदस्य, जो उपनिरीक्षक की पंक्ति का या उससे ऊपर की पंक्ति का हो, किन्हीं ऐसे आदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त करे, उस क्षेत्र में पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा और ऐसी शक्तियों का इस प्रकार प्रयोग करते समय वह पुलिस थाने का ऐसा भारसाधक अधिकारी समझा जाएगा, जो अपने स्टेशन की सीमाओं के अन्दर ऐसे अधिकारी के कृत्यों का निर्वहन कर रहा है ।]

 [6. शक्तियों और अधिकारिता का प्रयोग करने के लिए राज्य सरकार की सम्मति-धारा 5 की कोई बात दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन के किसी सदस्य को इसके लिए समर्थ करने वाली नहीं समझी जाएगी कि वह  [संघ राज्यक्षेत्र न होने वाले किसी राज्य के] किसी क्षेत्र 6[या रेल क्षेत्र] में शक्तियों और अधिकारिता का प्रयोग उस राज्य की सरकार की सम्मति के बिना करे ।]

 [6क. जांच या अन्वेषण करने के लिए केन्द्रीय सरकार का अनुमोदन-(1) दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन ऐसे किसी अपराध की, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के सिवाय, कोई जांच या अन्वेषण नहीं करेगा जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988                   (1988 का 49) के अधीन किया गया अभिकथित है, जहां उसका अभिकथन,-

(क) केन्द्रीय सरकार के संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के स्तर के कर्मचारियों के संबंध में है; और

(ख) ऐसे अधिकारियों के संबंध में है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, किसी केन्द्रीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगमों, सरकारी कंपनियों, सोसाइटियों और उस सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन स्थानीय प्राधिकरणों में नियुक्त किए गए हैं ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा अनुमोदन ऐसे मामलों के लिए आवश्यक नहीं होगा जिनमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49) की धारा 7 के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में निर्दिष्ट विधिक पारिश्रमिक से भिन्न कोई परितोषण स्वीकार करने या स्वीकार करने का प्रयास करने के आरोप पर घटना स्थल पर ही उस व्यक्ति की गिरफ्तारी अंतर्वलित है ।]

7. [1946 के आर्डिनेंस संख्यांक 22 का निरसन ।] निरसन तथा संशोधन अधिनियम, 1950 (1950 का 35) की धारा 2 तथा अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।

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