छावनी अधिनियम, 2006
(2006 का अधिनियम संख्यांक 41)
[13 सितंबर, 2006]
छावनियों के प्रशासन से संबंधित विधि का, उसका और अधिक लोकतंत्रीकरण करने,
विकास संबंधी क्रियाकलापों के लिए छावनियों के वित्तीय आधार का
सुधार करने की दृष्टि से, समेकन और संशोधन करने
तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक
विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सतावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम छावनी अधिनियम, 2006 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और किसी ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रारंभ होने के प्रति निर्देश है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या सन्दर्भ से कोई बात प्रतिकूल न हो,-
(क) सहायक स्वास्थ्य अधिकारी" से वह चिकित्सा अधिकारी अभिप्रेत है, जो कमान के मुख्य महा समादेशक अधिकारी द्वारा छावनी के लिए सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है;
(ख) बोर्ड" से इस अधिनियम के अधीन गठित छावनी बोर्ड अभिप्रेत है;
(ग) सीमा दीवाल" से वह दीवाल अभिप्रेत है, जो सड़क से लगी हुई है और जिसकी ऊंचाई ढाई मीटर से अधिक नहीं है;
(घ) भवन" से कोई गृह, उपगृह, अस्तबल, शौचालय, सायबान, झोपड़ी या अन्य छत वाली संरचना, भले ही वह पत्थर की हो, ईंटों की हो, लकड़ी की हो, मिट्टी की हो, धातु की हो या किसी अन्य पदार्थ से बनी हो, और उसका कोई भाग अभिप्रेत है, तथा उसके अन्तर्गत कुंआ और सीमा दीवाल से भिन्न दीवाल आती हैं, किन्तु इसके अन्तर्गत तम्बू या अन्य वहनीय तथा अस्थायी आश्रय स्थल नहीं आते हैं;
(ङ) आकस्मिक निर्वाचन" से वह निर्वाचन अभिप्रेत है जो आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए किया जाता है;
(च) आकस्मिक रिक्ति" से ऐसी रिक्ति अभिप्रेत है जो बोर्ड के निर्वाचित सदस्य के पद में समय के व्यतीत हो जाने से अन्यथा हुई है और इसके अंतर्गत धारा 16 की उपधारा (2) के अधीन ऐसे पद में होने वाली रिक्ति भी है;
(छ) मुख्य कार्यपालक अधिकारी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे इस अधिनियम के अधीन छावनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है;
(ज) सिविल क्षेत्र" से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 46 की उपधारा (1) के अधीन सिविल क्षेत्र घोषित किया गया है;
(झ) सिविल क्षेत्र समिति" से धारा 47 के अधीन नियुक्त समिति अभिप्रेत है;
(ञ) कमान" से उन कमानों में से कोई कमान अभिप्रेत है, जिसमें सैनिक प्रयोजनों के लिए भारत तत्समय विभाजित है तथा इसके अन्तर्गत ऐसा कोई क्षेत्र भी है जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए कमान के रूप में घोषित करे;
(ट) डेरी" के अन्तर्गत कोई फार्म, पशुओं के लिए सायबान, दुग्ध भण्डार, दुग्धशाला या कोई ऐसा अन्य स्थान है, जिससे दुग्ध का प्रदाय किया जाता है अथवा जिसमें दुग्ध विक्रय के प्रयोजनों के लिए रखा जाता है अथवा जिसमें दुग्ध से विक्रय के लिए मक्खन, घी, पनीर या दही तैयार किया जाता है तथा ऐसे डेरी वाले के सम्बन्ध में, जिसका दुग्ध के विक्रय के लिए किसी परिसर पर अधिभोग नहीं है, जिसके अंतर्गत ऐसा स्थान भी है, जिसमें वह दुग्ध के भण्डारकरण या विक्रय के लिए अपने द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले कोई बर्तन रखता है;
(ठ) डेरी वाला" के अन्तर्गत गाय, भैंस, बकरी, गधी या अन्य ऐसे पशु का रखवाला है, जिसका दुग्ध मानव उपभोग के लिए विक्रय किए जाने के लिए प्रस्थापित किया जाता है अथवा प्रस्थापित किए जाने के लिए आशयित है तथा इसके अन्तर्गत दूध का प्रदाय करने वाला और डेरी का कोई अधिभोगी भी है;
(ड) भयंकर रोग" से हैज़ा, कुष्ठ रोग, आंत्र ज्वर, चेचक, क्षय रोग, डिप्थीरिया, प्लेग, इनफ्लुएंजा, रतिज रोग, हैपेटाइटिस, एड्स और ऐसी कोई अन्य महामारी, स्थानिक, संक्रामक या संचारी रोग अभिप्रेत है; जिसे बोर्ड सार्वजनिक सूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी संक्रामक, सांसर्गिक या संचारी रोग के रूप में घोषित करे;
(ढ) रक्षा सम्पदा सर्किल" से सर्किलों में से कोई ऐसा सर्किल अभिप्रेत है जिसमें भारत तत्समय रक्षा सम्पदा प्रबन्ध के प्रयोजनों के लिए विभाजित है और इसके अन्तर्गत कोई ऐसा क्षेत्र भी है, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के सभी या किसी प्रयोजन के लिए रक्षा सम्पदा सर्किल के रूप में घोषित करे;
(ण) रक्षा संपदा अधिकारी" से ऐसा अधिकारी अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए रक्षा संपदा अधिकारी के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया गया है;
(त) महानिदेशक" से भारतीय रक्षा संपदा सेवा का, ऐसा अधिकारी अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए महानिदेशक, रक्षा संपदा के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया गया है और इसके अन्तर्गत ज्येष्ठ अपर महानिदेशक और अपर महानिदेशक भी हैं;
(थ) निदेशक" से ऐसा अधिकारी अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए निदेशक, रक्षा संपदा, कमान के कर्तव्यों का अनुपालन करने के लिए नियुक्त किया गया है;
(द) हकदार उपभोक्ता" से छावनी में का ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसे रक्षा सेवा प्राक्कलनों में से वेतन संदत्त किया जाता है और जो केन्द्रीय सरकार के साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस बात के लिए प्राधिकृत किया गया है कि वह घरेलू प्रयोजनों के लिए जल का प्रदाय सैनिक इंजीनियर सेवाओं से अथवा लोक निर्माण विभाग से ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर पाने के लिए प्राधिकृत है, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की गई हों;
(ध) कार्यपालक इंजीनियर" से अभिप्रेत है उस श्रेणी का सैनिक इंजीनियरी सेवाओं का अधिकारी जो छावनी में सैनिक संकर्मों का भारसाधन कर रहा है अथवा उस दशा में, जिसमें कि छावनी में सैनिक संकर्मों का भारसाधन एक से अधिक अधिकारी कर रहे हैं उन अधिकारियों में से ऐसा कोई एक अधिकारी जो उस स्टेशन के कमान अधिकारी द्वारा इस निमित्त नामनिर्दिष्ट किया गया है तथा इसके अन्तर्गत किसी भी श्रेणी का वह अधिकारी भी है, जो छावनी में कार्यपालक इंजीनियरी का अव्यवहित भारसाधन कर रहा है;
(न) कारखाना" से कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 2 के खण्ड (ड) में यथा परिभाषित कारखाना अभिप्रेत है;
(प) बल" से नियमित सेना, नौसेना और वायुसेना या उनमें से किसी एक या अधिक का कोई भाग अभिप्रेत है;
(फ) कमान का मुख्य महा समादेशक अधिकारी" से किसी कमान का समादेशक अधिकारी अभिप्रेत है ।
(ब) क्षेत्र का महा समादेशक अधिकारी" से ऐसे क्षेत्रों में से किसी एक क्षेत्र का जिनमें सैनिक प्रयोजनों के लिए तत्समय भारत विभाजित है या ऐसे किसी उपक्षेत्र का, जो किसी ऐसे क्षेत्र का भाग नहीं है या ऐसे किसी क्षेत्र का, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के सभी या किसी प्रयोजन के लिए क्षेत्र घोषित करे, समादेशक अधिकारी अभिप्रेत है;
(भ) समूह आवास" से निवास के प्रयोजनों के लिए गृह समूह अभिप्रेत है और इसमें निम्नलिखित सभी या कोई समाविष्ट हो सकेगा, अर्थात् (क) कोई निवास एकक, (ख) आमोद-प्रमोद और संवातन के लिए आशयित खुले स्थान, (ग) सड़क, पथ, मल नालियां, नालियां, जल आपूर्ति और सहायक प्रतिष्ठापन, मार्ग प्रकाशन और अन्य सुविधाएं, (घ) सुविधाजनक क्रय-विक्रय स्थान, विद्यालय, समाज सदन या सामान्य प्रयोग के लिए अन्य सुविधाएं;
(म) सरकार" से इस अधिनियम के संबंध में केन्द्रीय सरकार अभिप्रेत है;
(य) स्वास्थ्य अधिकारी" से सैनिक नियोजन में का वह ज्येष्ठ कार्यपालक चिकित्सा अधिकारी अभिप्रेत है जो छावनी में कर्तव्यारूढ़ है;
(यक) अस्पताल" के अंतर्गत परिवार कल्याण केन्द्र, शिशु कल्याण केन्द्र, प्रसूति केन्द्र तथा स्वास्थ्य केन्द्र हैं;
(यख) झोपड़ी" से ऐसी कोई इमारत अभिप्रेत है जिसका कोई तात्त्विक प्रभाग जो कुर्सी की सतह से ऊपर का है, पक्की चिनाई का अथवा इमारती लकड़ी के चौकोर तख्तों का अथवा लोहे के पंजर का बना हुआ नहीं है;
(यग) निवासी" से, छावनी या स्थानीय क्षेत्र के सम्बन्ध में ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जो उसमें मामूली तौर से निवासी है या कारबार करता है या स्थावर सम्पत्ति का स्वामी या अधिभोगी है या मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा उस रूप में घोषित किया गया है और विवाद की दशा में जैसा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा विनिश्चित किया गया है;
(यघ) मादक ओषधि" के अंतर्गत समय-समय पर उपांतरित स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61) में यथापरिभाषित कोई स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ है;
(यङ) बाजार" के अन्तर्गत ऐसा कोई स्थान है जहां व्यक्ति मांस, मछली, फल, सब्जी, मानवीय भोजन के लिए आशयित जीवजन्तु या मानवीय भोजन की किसी भी प्रकार की अन्य वस्तुएं, विक्रय के लिए अथवा विक्रय के लिए रखने के प्रयोजनों के लिए ऐसे स्थान के स्वामी की सहमति से या उसके बिना इस बात के होते हुए भी एकत्रित होते हैं कि वहां क्रेताओं और विक्रेताओं के जमाव के लिए कोई सामान्य विनियम नहीं है और चाहे उस स्थान के स्वामी द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस बाजार के कारोबार पर या वहां आने-जाने वाले व्यक्तियों पर किसी नियंत्रण का प्रयोग किया जाता है अथवा नहीं, किन्तु इसके अन्तर्गत एकल दुकान या दुकानों का, जो संख्या में छह से अधिक न हों, समूह और ऐसी दुकान, जो यूनिट लाइनों के भीतर है, नहीं है;
(यच) सेना" के अंतर्गत वायु सेना, नौ सेना और अन्य रक्षा से संबद्ध स्थापन भी हैं;
(यछ) सैनिक अधिकारी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46), नौसेना अधिनियम, 1957 (1957 का 62) या वायुसेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45) के अर्थान्तर्गत अधिकारी होते हुए सेना, नौसेना या वायुसेना में सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक कर्तव्य करने के लिए अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त है, राजपत्रित है या वेतन पाता है अथवा उन बलों के किसी अंग, शाखा या भाग में ऐसा कर्तव्य करने वाला अधिकारी है; या
(यज) न्यूसेंस" के अन्तर्गत ऐसा कोई कार्य, लोप, स्थान, जीव-जन्तु या चीज है जिससे दृष्टि इन्द्रिय, घ्राणेन्द्रिय या श्रवणेन्द्रिय को क्षति, खतरा, क्षोभ या क्लेश होता है अथवा विश्राम या निद्रा में विघ्न पड़ता है या पड़ना संभाव्य है अथवा जो जीवन के लिए खतरनाक है या खतरनाक हो सकती है या स्वास्थ्य या संपत्ति के लिए क्षतिकर है या क्षतिकर हो सकती है;
(यझ) अधिभोगी" के अन्तर्गत ऐसा स्वामी है जो अपनी भूमि या इमारत के अधिभोग में है या अन्यथा उसका उपयोग कर रहा है;
(यञ) स्टेशन समादेशक अधिकारी या स्टेशन समादेष्टा" से किसी छावनी में तत्समय बलों का समादेशन करने वाला कोई सेना अधिकारी अभिप्रेत है और यदि ऐसे अधिकारी के तीस दिन से अधिक के लिए अनुपस्थित रहने की संभावना है तो मुख्य महा समादेशक अधिकारी, आदेश द्वारा, किसी अन्य सेना अधिकारी को स्टेशन समादेशक अधिकारी या स्टेशन कमांडर के रूप में नामनिर्दिष्ट कर सकेगा;
(यट) मामूली निर्वाचन" से ऐसा निर्वाचन अभिप्रेत है जो अवधि समाप्त हो जाने के कारण बोर्ड के किसी निर्वाचित सदस्य के पद में हुई रिक्ति को भरने के लिए किया जाता है;
(यठ) स्वामी" के अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति है, जो किसी इमारत या भूमि का भाटक, चाहे अपने ही निमित्त अथवा अपने और अन्यों के अथवा अभिकर्ता या न्यासी के निमित्त प्राप्त कर रहा है या करने का हकदार है, अथवा जो भाटक ऐसे प्राप्त करता या करने का हकदार होता मानो वह इमारत या भूमि अभिधारी को पट्टे पर दी गई हो;
(यड) मध्य भित्ति" से ऐसी दीवाल अभिप्रेत है जो इमारत का भाग है तथा ऐसी लगी हुई इमारतों को, जो विभिन्न स्वामियों की हैं अथवा विभिन्न व्यक्तियों द्वारा अधिभोग में लिए जाने के लिए बनाई गई या अनुकूलित की हुई हैं, समर्थन देने के लिए अथवा पृथक् करने के लिए काम में लाई जाती हैं अथवा काम में लाए जाने के लिए बनाई गई हैं;
(यढ) प्रधान निदेशक" से इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रधान निदेशक, रक्षा संपदा के कर्तव्यों का अनुपालन करने के लिए नियुक्त अधिकारी अभिप्रेत है;
(यण) प्राइवेट बाजार" से ऐसा बाजार अभिप्रेत है जो बोर्ड द्वारा नहीं चलाया जाता तथा इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन बोर्ड द्वारा अनुज्ञापित है;
(यत) प्राइवेट वधशाला" से ऐसी वधशाला अभिप्रेत है जो बोर्ड द्वारा नहीं चलाई जाती तथा इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन बोर्ड द्वारा अनुज्ञापित है;
(यथ) सार्वजनिक बाजार" से ऐसा बाजार अभिप्रेत है जो बोर्ड द्वारा चलाया जाता है;
(यद) सार्वजनिक स्थान" से ऐसा कोई स्थान अभिप्रेत है जो सर्वसाधारण के उपयोग और उपभोग के लिए खुला है भले ही उसका वास्तव में उपयोग या उपभोग सर्वसाधारण द्वारा किया जाता हो या न किया जाता हो;
(यध) सार्वजनिक वधशाला" में ऐसी वधशाला अभिप्रेत है जो बोर्ड द्वारा चलाई जाती है;
(यन) किसी छावनी के संबंध में निवासी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो उसमें गृह या किसी गृह का कोई भाग बनाए रखता है, जो उसके या उसके कुटुंब के अधिभोग के लिए हर समय उपलब्ध रहता है भले ही वह स्वयं कहीं और निवास करता हो, परंतु यह तब जब कि उसने ऐसे गृह को फिर से अपने या अपने कुटुंब के अधिभोग में लेने के अपने आशय का बिल्कुल त्याग न कर दिया हो;
(यप) विनियम" से किसी छावनी बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बनाया गया कोई विनियम अभिप्रेत है;
(यफ) नियम" से केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बनाया गया कोई नियम अभिप्रेत है;
(यब) सायबान" से छांह या आश्रय के लिए छोटी-मोटी या अस्थायी संरचना अभिप्रेत है;
(यभ) वधशाला" से ऐसा कोई स्थान अभिप्रेत है जो पशुओं का मांस मानव उपभोग के लिए बेचने के प्रयोजन से उन पशुओं का वध करने के लिए मामूली तौर पर काम में लाया जाता है;
(यम) सैनिक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो, यथास्थिति, सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46), नौसेना अधिनियम, 1957 (1957 का 62) या वायुसेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45) के अधीन सैनिक या नाविक या वैमानिक है, और जो सैनिक अधिकारी नहीं है;
(यय) आसव लिकर" से कोई किण्वित लिकर, कोई सुरा या मद्य सारिक पेय अभिप्रेत है जो आसवन द्वारा या किसी प्रकार के ताड़ वृक्ष के रस से अभिप्राप्त किया गया है तथा इसके अन्तर्गत मद्य सार रखने वाला ऐसा कोई अन्य पेय आता है जिसकी बाबत केन्द्रीय सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित किया हो कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आसव लिकर है;
(ययक) पथ" के अन्तर्गत छावनी में कोई मार्ग, सड़क, गली, चौक, कटरा, वीथी या रास्ता है, चाहे वह आम रास्ता हो या न हो तथा उस पर कोई ऐसा निर्माण हो या न हो जिसमें सर्वसाधारण को मार्गाधिकार प्राप्त है तथा इसके अन्तर्गत किसी पुल या उपसेतु के ऊपर का सड़क मार्ग या पैदल मार्ग भी है;
(ययख) उपक्षेत्र" से उन उपक्षेत्रों में से कोई एक उपक्षेत्र अभिप्रेत है जिसमें सैनिक प्रयोजनों के लिए भारत तत्समय विभाजित है और इसके अन्तर्गत इस अधिनियम के सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए ऐसा कोई राज्यक्षेत्र भी है, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे प्रयोजनों के लिए उपक्षेत्र घोषित करे;
(ययग) व्यापार या वाणिज्यिक परिसर" से कोई व्यापार या वाणिज्यिक उद्योग चलाने के लिए प्रयुक्त या प्रयोग किए जाने के लिए आशयित कोई परिसर अभिप्रेत है;
(ययघ) यान" से किसी प्रकार का पहिएदार वाहन अभिप्रेत है जो पथ पर काम में लाए जाने के योग्य है तथा उसके अन्तर्गत मोटर कार, मोटर लारी, मोटर आमनीबस, ठेला, चलित्र, ट्रामकार, हथठेला, ट्रक, मोटरसाईकल, बाइसिकल, ट्राइसिकल और रिक्शे भी हैं;
(ययङ) जल संकर्म" के अन्तर्गत सभी झीलें, टैंक, सरिताएं, हौजें, चश्मे, पम्प, कुएं, जलाशय, जलसेतु, जलद्वार, पानी वाले ट्रक, मुख्य प्रणाल (मेन), पाइपें, पुलिया, बम्बा, खड़ा पाइप और नलिकाएं तथा सभी मशीनरी, भूमि, इमारतें, पुल और चीजें आती हैं जो छावनी में जल का प्रदाय करने के प्रयोजन के लिए काम में लाई जाती हैं अथवा जल का प्रदाय करने के प्रयोजन के लिए आशयित हैं; और
(ययच) वर्ष" से पहली अप्रैल को प्रारम्भ होने वाला वर्ष अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
छावनियों की परिभाषा और उनका परिसीमन
3. छावनियों की परिभाषा-(1) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा सीमाओं सहित ऐसे किसी स्थान या स्थानों को, जिसमें या जिनमें बलों का कोई भाग आवासित है, अथवा जो ऐसे किसी स्थान या स्थानों के सन्निकट होते हुए ऐसे बलों की सेवा के लिए अपेक्षित है या हैं, इस अधिनियम तथा तत्समय प्रवृत्त सभी अन्य अधिनियमितियों के प्रयोजनों के लिए छावनी घोषित कर सकेगी, तथा वैसी ही अधिसूचना द्वारा किसी छावनी की बाबत घोषित कर सकेगी कि वह छावनी नहीं है ।
(2) केन्द्रीय सरकार, वैसी ही अधिसूचना द्वारा पूर्वोक्त प्रयोजनों के लिए किसी छावनी की सीमाएं परिभाषित कर सकेगी ।
(3) जब कोई स्थान उपधारा (1) के अधीन छावनी घोषित किया जाता है तब केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार एक वर्ष की अवधि के भीतर एक बोर्ड का गठन करेगी:
परन्तु केन्द्रीय सरकार, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से एक वर्ष की उक्त अवधि को एक बार में छह मास की और अवधि के लिए विस्तारित कर सकेगी:
परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार, बोर्ड का गठन किए जाने तक, आदेश द्वारा छावनी के दक्ष प्रशासन के लिए आवश्यक उपबंध बना सकेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि जो स्थान उपधारा (1) के अधीन छावनी घोषित किया गया है उसमें स्थानीय स्वशासन सम्बन्धी किसी ऐसी अधिनियमिति के उपबन्ध, जो इस अधिनियम से भिन्न हैं इतने विस्तार तक ही अथवा ऐसे उपान्तरों के अधीन रहते हुए ही प्रभावी होंगे अथवा किसी ऐसी अधिनियमिति के अधीन गठित कोई प्राधिकरण ऐसे विस्तार तक ही प्राधिकार का प्रयोग करेगा, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ।
4. छावनियों की सीमाओं का परिवर्तन-(1) केन्द्रीय सरकार संबंधित राज्य सरकार और बोर्ड से परामर्श करने के पश्चात्, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा छावनी के सन्निकट स्थित किसी स्थानीय क्षेत्र को सम्मिलित करने अथवा छावनी में से ऐसा कोई स्थानीय क्षेत्र, जो उसमें समाविष्ट है, अपवर्जित करने के अपने आशय की घोषणा कर सकेगी ।
(2) ऐसी किसी छावनी या स्थानीय क्षेत्र जिसकी बाबत उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना प्रकाशित की गई है, का कोई निवासी, उस अधिसूचना की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर उस कमान के मुख्य महा-समादेशक अधिकारी के माध्यम से केन्द्रीय सरकार को उस अधिसूचना के बारे में लिखित रूप में आक्षेप कर सकेगा तथा केन्द्रीय सरकार ऐसे आक्षेप पर विचार करेगी ।
(3) अधिसूचना की तारीख से आठ सप्ताह की समाप्ति पर केन्द्रीय सरकार उन आक्षेपों पर, यदि कोई हों, जो उपधारा (2) के अधीन उसको दिए गए हैं, विचार करने के पश्चात् राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यथास्थिति, किसी स्थानीय क्षेत्र को, जिसकी बाबत उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना प्रकाशित की गई थी या उसके किसी भाग को छावनी में सम्मिलित कर सकेगी अथवा, ऐसे किसी क्षेत्र या उसके किसी भाग को छावनी से अपवर्जित कर सकेगी ।
5. क्षेत्र को छावनी में सम्मिलित करने का प्रभाव-जब धारा 4 के अधीन अधिसूचना द्वारा कोई स्थानीय क्षेत्र छावनी में सम्मिलित किया गया है तदुपरान्त ऐसा क्षेत्र इस अधिनियम के अधीन तथा छावनी में सर्वत्र तत्समय प्रवृत्त अन्य सभी अधिनियमितियों तथा उसके अधीन जारी की गई अधिसूचनाओं, या बनाए गए नियमों, विनियमों, उपविधियों, किए गए आदेशों और निदेशों के अधीन हो जाएगा ।
6. जब क्षेत्र छावनी नहीं रह जाता तब छावनी निधि और छावनी विकास निधि का व्ययन-(1) जब धारा 3 के अधीन अधिसूचना द्वारा कोई छावनी, छावनी नहीं रह जाती तथा उसमें समाविष्ट स्थानीय क्षेत्र तुरन्त स्थानीय प्राधिकरण के नियन्त्रण के अधीन रख दिया जाता है तब छावनी निधि या छावनी विकास निधि का अतिशेष तथा बोर्ड में निहित अन्य सम्पत्ति ऐसे स्थानीय प्राधिकरण में निहित हो जाएगी तथा बोर्ड के दायित्व ऐसे स्थानीय प्राधिकरण को अन्तरित हो जाएंगे ।
(2) जब उसी रीति से कोई छावनी, छावनी नहीं रह जाती तथा उसमें समाविष्ट स्थानीय क्षेत्र तुरन्त स्थानीय प्राधिकरण के नियन्त्रण के अधीन नहीं कर दिया जाता तब छावनी निधि या छावनी विकास निधि का अतिशेष और बोर्ड में निहित अन्य सम्पत्ति केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएगी तथा बोर्ड के दायित्व उस सरकार को अंतरित हो जाएंगे ।
7. जब कोई क्षेत्र छावनी में सम्मिलित नहीं रह जाता तब छावनी निधि और छावनी विकास निधि का व्ययन-(1) जब धारा 4 के अधीन अधिसूचना द्वारा ऐसा कोई स्थानीय क्षेत्र, जो छावनी का भाग है, किसी विशिष्ट बोर्ड के नियन्त्रण के अधीन नहीं रह जाता तथा किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण के नियन्त्रण के अधीन तुरन्त कर दिया जाता है, तब छावनी निधि या छावनी विकास निधि का ऐसा भाग और ऐसी अन्य संपत्ति, जो बोर्ड में निहित है और बोर्ड के दायित्वों का ऐसा भाग, जो केंद्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट करे, उस अन्य स्थानीय प्राधिकरण को अंतरित हो जाएगा ।
(2) जब उसी रीति से ऐसा कोई स्थानीय क्षेत्र, जो छावनी का भाग है, विशिष्ट बोर्ड के नियन्त्रण के अधीन नहीं रह जाता तथा किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण के नियन्त्रण के अधीन तुरन्त नहीं कर दिया जाता, तब छावनी निधि या छावनी विकास निधि का ऐसा भाग और अन्य सम्पति, जो बोर्ड में निहित है, सरकार में निहित हो जाएगी तथा बोर्ड के दायित्वों का ऐसा भाग, जो केन्द्रीय सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट करे, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित हो जाएगा ।
8. धारा 6 और धारा 7 के अधीन अंतरित निधियों और सम्पत्ति का उपयोजन-किसी छावनी निधि या छावनी विकास निधि या उसके किसी भाग या बोर्ड की अन्य सम्पत्ति, जो धारा 6 और धारा 7 के उपबन्धों के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित है, का उपयोग सर्वप्रथम बोर्ड के ऐसे किन्हीं दायित्वों की पूर्ति करने के लिए किया जाएगा, जो ऐसे उपबन्धों के अधीन उस सरकार को अन्तरित हुए हैं, तथा उसके पश्चात् उसका उपयोग उस स्थानीय क्षेत्र के जो, यथास्थिति, छावनी या छावनी का भाग नहीं रह गया है, निवासियों के फायदे के लिए किया जाएगा ।
9. अधिनियम के प्रवर्तन की परिसीमा-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के किसी भाग के प्रवर्तन से किसी संपू्र्ण छावनी या उसके भाग को अपवर्जित कर सकेगी अथवा यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम का कोई उपबन्ध ऐसी किसी छावनी की दशा में-
(क) जो महानगर क्षेत्र की सीमाओं के भीतर स्थित है; या
(ख) जिसमें बोर्ड धारा 60 के अधीन अतिष्ठित कर दिया गया है, ऐसे उपान्तरों के साथ लागू होगा, जो इस प्रकार विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
अध्याय 3
छावनी बोर्ड
बोर्ड
10. छावनी बोर्ड-(1) प्रत्येक छावनी के लिए एक छावनी बोर्ड होगा ।
(2) प्रत्येक बोर्ड, संविधान के अनुच्छेद 243त के खंड (ङ) के अधीन, निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए, नगरपालिका समझा जाएगा, -
(क) अनुदान और आबंटन प्राप्त करना; या
(ख) केंद्रीय सरकार की समाज कल्याण, लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, जल प्रदाय, सफाई, शहरी, नवीकरण और शिक्षा की स्कीमों को लागू करना ।
11. छावनी बोर्ड का निगमन-प्रत्येक बोर्ड, उस स्थान के नाम से, जिसके प्रति निर्देश से वह छावनी ज्ञात है, निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे जंगम और स्थावर दोनों प्रकार की सम्पत्ति अर्जित करने और धारण करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी तथा उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।
12. छावनी बोर्डों का गठन-(1) छावनियां चार प्रवर्गों में विभाजित की जाएंगी, अर्थात्ः-
(i) प्रवर्ग 1 छावनियां, जिनमें जनसंख्या पचास हजार से अधिक है;
(ii) प्रवर्ग 2 छावनियां, जिनमें जनसंख्या दस हजार से अधिक है, किन्तु पचास हजार से अधिक नहीं है;
(iii) प्रवर्ग 3 छावनियां, जिनमें जनसंख्या दो हजार पांच सौ से अधिक है, किन्तु दस हजार से अधिक नहीं है; तथा
(iv) प्रवर्ग 4 छावनियां, जिनमें जनसंख्या दो हजार पांच सौ से अधिक नहीं है ।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए जनसंख्या की संगणना अन्तिम सरकारी जनगणना के अनुसार अथवा उस दशा में, जिसमें केन्द्रीय सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा ऐसा निदेश देती है, इस प्रयोजन के लिए की गई विशेष जनगणना के अनुसार की जाएगी ।
(3) प्रवर्ग 1 छावनियों में, बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-
(क) स्टेशन का समादेशक अधिकारी पदेन या यदि केन्द्रीय सरकार किसी छावनी की बाबत ऐसा निदेश देती है तो ऐसा अन्य सेना अधिकारी जो उस कमान के मुख्य समादेशक अधिकारी द्वारा उसके स्थान पर नामनिर्दिष्ट किया जाए;
(ख) जिला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा नामनिर्दिष्ट अपर जिला मजिस्ट्रेट की पंक्ति से अनिम्न पंक्ति का कार्यपालक मजिस्ट्रेट;
(ग) मुख्य कार्यपालक अधिकारी;
(घ) स्वास्थ्य अधिकारी पदेन;
(ङ) कार्यपालक इंजीनियर पदेन;
(च) तीन सेना अधिकारी, जो स्टेशन के समादेशक अधिकारी द्वारा लिखित आदेश द्वारा नामनिर्दिष्ट किए गए हों;
(छ) इस अधिनियम के अधीन निर्वाचित आठ सदस्य ।
(4) प्रवर्ग 2 छावनियों में, बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-
(क) स्टेशन का समादेशक अधिकारी पदेन या यदि केन्द्रीय सरकार किसी छावनी की बाबत ऐसा निदेश देती है तो ऐसा अन्य सेना अधिकारी जो उस कमान के मुख्य समादेशक अधिकारी द्वारा उसके स्थान पर नामनिर्दिष्ट किया जाए;
(ख) जिला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा नामनिर्दिष्ट अपर जिला मजिस्ट्रेट की पंक्ति से अनिम्न पंक्ति का कार्यपालक मजिस्ट्रेट;
(ग) मुख्य कार्यपालक अधिकारी;
(घ) स्वास्थ्य अधिकारी पदेन;
(ङ) कार्यपालक इंजीनियर पदेन;
(च) दो सेना अधिकारी जो स्टेशन के समादेशक अधिकारी द्वारा लिखित आदेश द्वारा नामनिर्दिष्ट किए गए हों;
(छ) इस अधिनियम के अधीन निर्वाचित सात सदस्य ।
(5) प्रवर्ग 3 छावनियों में, बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-
(क) स्टेशन का समादेशक अधिकारी पदेन या यदि केन्द्रीय सरकार किसी छावनी की बाबत ऐसा निदेश देती है तो ऐसा अन्य सेना अधिकारी जो उस कमान के मुख्य समादेशक अधिकारी द्वारा उसके स्थान पर नामनिर्दिष्ट किया जाए;
(ख) जिला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा नामनिर्दिष्ट कोई कार्यपालक मजिस्ट्रेट;
(ग) मुख्य कार्यपालक अधिकारी;
(घ) स्वास्थ्य अधिकारी पदेन;
(ङ) कार्यपालक इंजीनियर पदेन;
(च) स्टेशन के कमान अधिकारी द्वारा लिखित में आदेश द्वारा नामनिर्दिष्ट एक सेना अधिकारी;
(छ) इस अधिनियम के अधीन निर्वाचित छह सदस्य ।
(6) प्रवर्ग 4 छावनियों में, बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-
(क) स्टेशन का कमान अधिकारी पदेन या यदि केन्द्रीय सरकार किसी छावनी की बाबत ऐसा निदेश देती है तो ऐसा अन्य सेना अधिकारी, जो कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी द्वारा उसके स्थान पर नामनिर्दिष्ट किया जाए;
(ख) मुख्य कार्यपालक अधिकारी;
(ग) इस अधिनियम के अधीन निर्वाचित दो सदस्य ।
(7) यदि स्टेशन का समादेशक अधिकारी ठीक समझता है तो वह कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी की मंजूरी से किसी सेना अधिकारी के स्थान पर, जिसे वह उपधारा (3) के खंड (च), उपधारा (4) के खण्ड (च) या उपधारा (5) के खण्ड (च) के अधीन नामनिर्दिष्ट करने के लिए सशक्त है, ऐसे किसी व्यक्ति को, चाहे वह सरकार की सेवा में हो या न हो, नामनिर्दिष्ट कर सकेगा, जो उस छावनी में अथवा उसके आसपास मामूली तौर पर निवासी है ।
(8) बोर्ड के सदस्य का प्रत्येक निर्वाचन या नामनिर्देशन तथा उसकी निर्वाचित सदस्यता में हुई हर रिक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित की जाएगी ।
(9) उन निर्वाचन-क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले संसद् सदस्य और विधान सभा सदस्य, जिनमें छावनी क्षेत्र पूर्णतः या भागतः समाविष्ट हैं, बोर्ड की बैठकों में विशेष आमंत्रिती होंगे किन्तु उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा ।
13. विशेष परिस्थितियों में बोर्डों के गठन में फेरफार करने की शक्ति-(1) धारा 12 में किसी बात के होते हुए भी यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है, -
(क) कि किन्हीं सैनिक संक्रियाओं के कारण यह आवश्यक है; अथवा
(ख) कि छावनी के प्रशासन के लिए, इस धारा के अधीन किसी छावनी में बोर्ड के गठन में फेरफार करना वांछनीय है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उस आशय की घोषणा कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन घोषणा के किए जाने पर छावनी में का बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-
(क) स्टेशन का समादेशक अधिकारी;
(ख) मुख्य कार्यपालक अधिकारी; और
(ग) कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी के परामर्श से केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट एक सदस्य, जो सरकार की सेवा में का व्यक्ति नहीं है ।
(3) इस धारा के अधीन गठित बोर्ड के सदस्य का नामनिर्देशन तथा उसकी सदस्यता में हुई रिक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित की जाएगी ।
(4) उपधारा (1) के अधीन घोषणा द्वारा गठित बोर्ड की कालावधि सामान्यतया एक वर्ष से अधिक की नहीं होगी:
परन्तु केन्द्रीय सरकार समय-समय पर वैसी ही घोषणा द्वारा बोर्ड की कालावधि को एक समय पर एक वर्ष से अनधिक कालावधि के लिए बढ़ा सकेगी:
परन्तु यह भी कि केन्द्रीय सरकार ऐसे बोर्ड की कालावधि की बाबत तत्काल यह निदेश देगी कि वह समाप्त हो गई है, यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि उस घोषणा में कथित कारण, जिससे ऐसा बोर्ड गठित किया गया था या उसकी कालावधि बढ़ाई गई थी, अब विद्यमान नहीं रह गया है ।
(5) जब इस धारा के अधीन गठित बोर्ड की कालावधि का अवसान हो गया है या उसका अंत हो गया है तब उस बोर्ड के स्थान पर वह पूर्ववर्ती बोर्ड, जो उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन की गई घोषणा के अभाव में बना रहता अथवा यदि ऐसे पूर्ववर्ती बोर्ड की कालावधि का अवसान हो गया है तो धारा 12 के अधीन गठित बोर्ड आ जाएगा ।
14. सदस्यों की पदावधि-(1) इस धारा में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, बोर्ड के किसी सदस्य की पदावधि पांच वर्ष होगी और वह, -
(क) किसी निर्वाचित सदस्य की दशा में, धारा 12 की उपधारा (8) के अधीन उसके निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से या उस तारीख से, जिसको वह रिक्ति हुई है, जिसके लिए वह निर्वाचित हुआ है, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, प्रारंभ होगी; और
(ख) नामनिर्दिष्ट सदस्य की दशा में, धारा 12 की उपधारा 3 के खंड (ख) और खंड (च), उपधारा (4) के खंड (ख) और खंड (च) और उपधारा (5) के खंड (ख) और खंड (च) के अधीन नामनिर्देशन की तारीख से या धारा 18 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन रिक्ति की तारीख से, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, प्रारंभ होगी और इस प्रकार नामनिर्दिष्ट सदस्य बोर्ड की कार्यवाहियों में भाग लेने के लिए समर्थ होगा:
परन्तु केन्द्रीय सरकार, जब उसका यह समाधान हो जाता है कि किसी प्रशासनिक कठिनाई को दूर करने के लिए यह आवश्यक है, तो बोर्ड के सभी निर्वाचित सदस्यों की पदावधि एक वर्ष से अनधिक की ऐसी कालावधि के लिए बढ़ा सकेगी, जैसी वह ठीक समझे:
परन्तु यह और कि ऐसा सदस्य, जिसकी पदावधि इस प्रकार बढ़ाई गई है धारा 12 की उपधारा (8) के अधीन अपने उत्तरवर्ती के निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख को, पद पर नहीं रहेगा ।
(2) बोर्ड के पदेन सदस्य की पदावधि तब तक बना रहेगी जब तक वह उस पद को धारण करता है, जिसके आधार पर वह ऐसा सदस्य है ।
(3) आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित सदस्य की पदावधि उसके निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से प्रारम्भ होगी तथा तब तक ही बनी रहेगी जब तक वह सदस्य, जिसके स्थान पर वह निर्वाचित हुआ है, अपना पद धारण करने का हकदार उस दशा में होता, यदि वह रिक्ति न हुई होती ।
(4) जब तक केन्द्रीय सरकार अन्यथा निदेश न दे, पद छोङने वाला सदस्य अपने पद पर तब तक बना रहेगा, जब तक, धारा 12 की उपधारा (8) के अधीन यथास्थिति, उसके उत्तरवर्ती का निर्वाचन या उसके उत्तरवर्ती का नामनिर्देशन अधिसूचित नहीं कर दिया जाता है ।
(5) यदि कोई पद छोड़ने वाला सदस्य अर्हित है तो उसे पुनर्निर्वाचित या पुनर्नामनिर्दिष्ट किया जा सकेगा ।
15. रिक्तियों का भरा जाना-(1) किसी बोर्ड के निर्वाचित सदस्य के पद की अवधि खत्म हो जाने के कारण हुई रिक्तियां साधारण निर्वाचन द्वारा भरी जाएंगी, जो ऐसी तारीख को किया जाएगा जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे ।
(2) कोई आकस्मिक रिक्ति आकस्मिक निर्वाचन द्वारा भरी जाएगी, जिसकी तारीख केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत की जाएगी तथा वह रिक्ति होने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र की होगी:
परन्तु कोई आकस्मिक निर्वाचन ऐसी किसी तारीख के छह मास के भीतर होने वाली रिक्ति को भरने के लिए नहीं किया जाएगा जिसको वह रिक्ति अवधि खत्म हो जाने के कारण होगी, किन्तु ऐसी रिक्ति अगले साधारण निर्वाचन में भरी जाएगी
16. विशेष दशाओं में रिक्तियां-(1) यदि किसी कारण से, किसी निर्वाचन में कोई सदस्य निर्वाचित नहीं होता है या यदि निर्वाचित सदस्य बोर्ड में कार्य करने का इच्छुक नहीं है तो उस रिक्ति को भरने के लिए नया निर्वाचन कराया जाएगा ।
(2) यदि कोई व्यक्ति, बोर्ड में एक से अधिक स्थानों के लिए निर्वाचित होता है, तो जब तक वह ऐसी तारीख से, जिसको वह निर्वाचित घोषित किया गया है या जहां ऐसी तारीखें, जिनको वह विभिन्न स्थानों के लिए निर्वाचित घोषित किया गया है, भिन्न-भिन्न हैं, वहां ऐसी तारीखों में से अंतिम तारीख से चौदह दिन के भीतर एक स्थान के सिवाय सभी अन्य स्थानों के लिए त्यागपत्र नहीं दे देता है, सभी स्थान रिक्त हो जाएंगे ।
(3) निम्नलिखित दशाओं में से किसी में होने वाली रिक्तियां केन्द्रीय सरकार द्वारा कमान के मुख्य समादेशक अधिकारी से परामर्श करने के पश्चात् नामनिर्देशन द्वारा भरी जाएंगी, अर्थात्ः-
(क) जहां आकस्मिक निर्वाचन में कोई भी सदस्य निर्वाचित नहीं होता है;
(ख) जहां ऐसे निर्वाचन में, जो बोर्ड के प्रथम बार गठित किए जाने के लिए किया जाता है, कोई भी सदस्य निर्वाचित नहीं होता या अपर्याप्त संख्या में सदस्य निर्वाचित होते हैं या कोई निर्वाचित सदस्य बोर्ड में सेवा करने के लिए इच्छुक नहीं है ।
(4) धारा 15 की उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए वह सदस्य, जो इस धारा की उपधारा (3) के अनुसरण में नामनिर्दिष्ट किया गया है, जहां छावनी का वार्डों में विभाजन किया गया है, ऐसे वार्ड द्वारा निर्वाचित किया गया समझा जाएगा, जिसे केन्द्रीय सरकार नामनिर्देशन करने के समय या तत्पश्चात् किसी समय घोषित करे ।
(5) इस धारा के अधीन नामनिर्दिष्ट किसी सदस्य की पदावधि उस समय समाप्त हो जाएगी, जब वह तब समाप्त होती यदि वह आकस्मिक निर्वाचन में निर्वाचित हुआ होता ।
17. शपथ या प्रतिज्ञान-प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो बोर्ड का सदस्य अपने पद के आधार पर है या उस रूप में नामनिर्दिष्ट या निर्वाचित हुआ है अपना स्थान ग्रहण करने से पूर्व बोर्ड के अधिवेशन में भारत के संविधान के प्रति अपनी निष्ठा की शपथ या प्रतिज्ञान निम्नलिखित रूप में लेगा और हस्ताक्षरित करेगा, अर्थात्: -
मैं ............................................ जो इस बोर्ड का सदस्य हो गया हूं/निर्वाचित किया गया हूं/नामनिर्दिष्ट किया गया हूं, ईश्वर की शपथ लेता हूं/सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूं उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूंगा ।" ।
18. त्यागपत्र-(1) (क) किसी बोर्ड का कोई निर्वाचित सदस्य, जो अपने पद को त्यागना चाहता है, अपना त्यागपत्र लिखित रूप में बोर्ड के अध्यक्ष को दे सकेगा, जो उसे कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी को सूचना देते हुए केन्द्रीय सरकार को मंजूर किए जाने और अधिसूचना के लिए अग्रेषित करेगा ।
(ख) किसी बोर्ड का कोई नामनिर्दिष्ट सदस्य, जो अपने पद को त्यागना चाहता है, अपना त्यागपत्र लिखित रूप में बोर्ड के अध्यक्ष के माध्यम से कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी को आदेश के लिए भेज सकेगा ।
(2) यदि यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या कमान का मुख्य महासमादेशक अधिकारी त्यागपत्र मंजूर करता है तो ऐसी मंजूरी बोर्ड को संसूचित की जाएगी और तदुपरांत त्यागपत्र देने वाले सदस्य का स्थान रिक्त हो जाएगा ।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा दिया गया त्यागपत्र, जो बोर्ड में एक से अधिक स्थानों के लिए निर्वाचित हुआ है, धारा 16 की उपधारा (2) के अनुसरण में एक स्थान के सिवाय अन्य सभी स्थानों के बारे में तभी प्रभावी होगा, जब ऐसा त्यागपत्र बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा प्राप्त कर लिया जाता है ।
19. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष-(1) स्टेशन समादेशक अधिकारी यदि बोर्ड का सदस्य है तो वह बोर्ड का अध्यक्ष होगा:
परन्तु जब अध्यक्ष का पद धारण करने वाला सेना अधिकारी स्टेशन से ऐसी अवधि के लिए अस्थायी अनुपस्थिति के कारण, जो लगातार तीस दिन से अधिक की न हो, स्टेशन समादेशक अधिकारी नहीं रह जाता तब वह अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं करेगा ।
(2) जहां स्टेशन समादेशक अधिकारी बोर्ड का सदस्य नहीं है वहां उसके स्थान पर धारा 12 की उपधारा (3) के खण्ड (क), उपधारा (4) या उपधारा (5) के अधीन नामनिर्दिष्ट सेना अधिकारी बोर्ड का अध्यक्ष होगा ।
(3) ऐसे प्रत्येक बोर्ड में, छावनी प्रवर्ग 4 के अंतर्गत आने वाले किसी बोर्ड की दशा को छोङकर, एक उपाध्यक्ष होगा जो केवल निर्वाचित सदस्यों द्वारा उनमें से, ऐसी प्रक्रिया के अनुसार, जो केन्द्रीय सरकार नियम द्वारा विहित करे, निर्वाचित किया जाएगा ।
(4) छावनी प्रवर्ग 4 के अंतर्गत आने वाले किसी बोर्ड की दशा में, उपाध्यक्ष, बोर्ड के अध्यक्ष के पर्यवेक्षण के अधीन लॉट के द्वारा ऐसी रीति में निर्वाचित किया जाएगा, जो वह विनिश्चित करे ।
20. उपाध्यक्ष की पदावधि-(1) उपाध्यक्ष की पदावधि पांच वर्ष होगी अथवा सदस्य के रूप में उसकी अवशिष्ट पदावधि की, इनमें से जो भी कम हो, होगी ।
(2) उपाध्यक्ष अध्यक्ष को लिखित सूचना द्वारा अपना पद त्याग सकेगा तथा बोर्ड द्वारा उसका त्यागपत्र मंजूर कर लिए जाने पर वह पद रिक्त हो जाएगा ।
(3) कोई उपाध्यक्ष बोर्ड में पद धारण करने वाले निर्वाचित सदस्यों के कम से कम आधे सदस्यों की अध्यपेक्षा पर, उस प्रयोजन के लिए बुलाए गए विशेष अधिवेशन में, कुल निर्वाचित सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के, जो उस समय पद धारण कर रहे हों और उपस्थित हों, बहुमत द्वारा पारित संकल्प द्वारा, अपने पद से हटाया जा सकेगा और निर्वाचित सदस्य से भिन्न किसी सदस्य को संकल्प पर मत देने का अधिकार नहीं होगा:
परन्तु प्रवर्ग 4 छावनियों की दशा में, उपाध्यक्ष को, बोर्ड द्वारा इस भाव के पारित एक संकल्प द्वारा हटाया जा सकेगा और अन्य निर्वाचित सदस्य उपाध्यक्ष बन जाएगा ।
21. अध्यक्ष के कर्तव्य-(1) प्रत्येक बोर्ड के अध्यक्ष का यह कर्तव्य होगा कि वह-
(क) जब तक युक्तियुक्त हेतुक से निवारित किया गया हो, बोर्ड के सभी अधिवेशनों को आयोजित करे और उनकी अध्यक्षता तथा उनमें सभी कारबार के संचालन का विनियमन करे;
(ख) बोर्ड के वित्तीय और कार्यपालक प्रशासन का नियंत्रण करे, निदेश दे और पर्यवेक्षण करे;
(ग) उन सभी कर्तव्यों का पालन करे और उन सभी शक्तियों का प्रयोग करे, जो इस अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन अध्यक्ष पर विनिर्दिष्ट रूप में अधिरोपित किए गए हैं या उसे प्रदत्त की जाएं;
(घ) इस अधिनियम द्वारा अधिरोपित किन्हीं निर्बन्धनों, परिसीमाओं और शर्तों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के प्रयोजन के लिए कार्यपालक शक्ति का प्रयोग करे तथा इस अधिनियम के प्रयोजनों की पूर्ति के लिए प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी हो; और
(ङ) अधिवेशन के दौरान घोर अवचार की दशा में, किसी मुख्य कार्यपालक अधिकारी से भिन्न किसी सदस्य को, बोर्ड के अधिवेशन के शेष भाग में उपस्थित होने से निलम्बित करे ।
(2) अध्यक्ष लिखित आदेश द्वारा उपाध्यक्ष को उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट उन सभी शक्तियों और कर्तव्यों का या उनमें से किसी का प्रयोग करने के लिए सशक्त करेगा जो ऐसी किसी शक्ति, कर्तव्य या कृत्य से भिन्न है, जिसकी बाबत बोर्ड के संकल्प द्वारा अभिव्यक्ततः यह निषेध किया गया है कि वह उसका प्रत्यायोजन न करे ।
(3) अध्यक्ष द्वारा इस धारा के अधीन प्रत्यायोजित की गई किन्हीं शक्तियों का प्रयोग या ऐसे किन्हीं कर्तव्यों या कृत्यों का निर्वहन, ऐसे निर्बन्धनों, सीमाओं और शर्तों के, यदि कोई हों, जो अध्यक्ष द्वारा अधिकथित की जाएं और अध्यक्ष के नियन्त्रण और उसके द्वारा पुनरीक्षण के अधीन होगा ।
(4) उपधारा (2) के अधीन दिया गया प्रत्येक आदेश तुरंत बोर्ड को तथा कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी को संसूचित किया जाएगा ।
22. उपाध्यक्ष के कर्तव्य-(1) प्रत्येक बोर्ड के उपाध्यक्ष का यह कर्तव्य होगा कि वह-
(क) अध्यक्ष की अनुपस्थिति में और तब के सिवाय जब कि ऐसा करने से युक्तियुक्त कारण से निवारित किया गया हो, बोर्ड के अधिवेशनों की अध्यक्षता करे तथा इस प्रकार अध्यक्षता करते समय धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन अध्यक्ष के प्राधिकार का प्रयोग करे;
(ख) अध्यक्ष की असमर्थता या अस्थायी अनुपस्थिति के दौरान अथवा उसकी नियुक्ति या उत्तरवर्तन के लम्बित रहने के दौरान अध्यक्ष के किसी अन्य कर्तव्य का पालन और किसी अन्य शक्ति का प्रयोग करे;
(ग) अध्यक्ष की ऐसी किसी शक्ति का प्रयोग तथा ऐसे किसी कर्तव्य का पालन करे जो धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन उसे प्रत्यायोजित किया जाए ।
23. उपाध्यक्ष और सदस्यों को भत्ते-बोर्ड का उपाध्यक्ष और प्रत्येक निर्वाचित सदस्य, ऐसे भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे, जो केन्द्रीय सरकार नियम द्वारा विहित करे ।
24. मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति-(1) प्रत्येक छावनी के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा या ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त प्राधिकृत करे, नियुक्त एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी होगा:
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नब्बे दिन से अनधिक की अस्थायी अनुपस्थिति की दशा में प्रधान निदेशक, ऐसी अवधि के दौरान मुख्य कार्यपालक अधिकारी के कर्तव्यों के अनुपालन के लिए अपनी अधिकारिता के अधीन किसी अधिकारी को पदाभिहित करेगा ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी के वेतन का कम से कम आधा भाग केन्द्रीय सरकार द्वारा और अतिशेष छावनी की निधि में से संदत्त किया जाएगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी बोर्ड का और बोर्ड की प्रत्येक समिति का सदस्य सचिव होगा ।
25. मुख्य कार्यपालक अधिकारी के कर्तव्य-धारा 21 की उपधारा (1) के खंड (ग) और खंड (घ) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, मुख्य कार्यपालक अधिकारी-
(क) ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे सभी कर्तव्यों का अनुपालन करेगा, जो इस अधिनियम द्वारा या इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उसे प्रदत्त या उस पर अधिरोपित किए गए हैं;
(ख) इस अधिनियम द्वारा अधिरोपित किन्हीं निर्बन्धनों, परिसीमाओं और शर्तों के अधीन रहते हुए, कार्यपालक शक्तियों का यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयोग करेगा कि बोर्ड का प्रशासन इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार कार्यान्वित किया जाता है;
(ग) बोर्ड के अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों के कर्तव्यों को विहित करेगा और उनके कार्यों और कार्यवाहियों का पर्यवेक्षण करेगा तथा उन पर नियंत्रण रखेगा;
(घ) बोर्ड के सभी अभिलेखों की अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी होगा;
(ङ) बोर्ड या बोर्ड की किन्हीं समितियों या इस अधिनियम के अधीन गठित माध्यस्थम् समिति की कार्यवाहियों से संबंधित ऐसे कर्तव्यों के पालन के लिए व्यवस्था करेगा, जो ऐसे निकाय क्रमशः उस पर अधिरोपित करें; और
(च) छावनी के प्रशासन से संबंधित किसी विषय पर बोर्ड की प्रत्येक अध्यपेक्षा का अनुपालन करेगा ।
26. मुख्य कार्यपालक अधिकारी की विशेष शक्ति-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी, लोकहित में और इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अनुसार किसी कार्य के निष्पादन या किसी कार्रवाई को करने के निदेश दे सकेगा और ऐसा व्यय उपगत कर सकेगा, जो ऐसी वित्तीय परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, जो बोर्ड, महानिदेशक, रक्षा सम्पदा द्वारा, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से जारी किए गए साधारण मार्गदर्शन सिद्धान्तों के अधीन रहते हुए, संकल्प द्वारा अवधारित करे, यथास्थिति, ऐसे काम का निष्पादन करने या ऐसी कार्रवाई करने में आवश्यक हो ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी, आपात की दशा में, ऐसे किसी कार्य के निष्पादन या किसी कार्रवाई का निदेश दे सकेगा जिसके लिए साधारणतः बोर्ड की मंजूरी अपेक्षित है और जिसका तत्काल निष्पादन या किया जाना उसकी राय में जनता की सेवा या सुरक्षा के लिए अनिवार्य है और वह यह निदेश दे सकेगा कि ऐसे कार्य के निष्पादन या ऐसी कार्रवाई को करने का व्यय छावनी निधि से संदत्त होगा:
परन्तु वह-
(क) इस धारा के अधीन अध्यक्ष की अथवा उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष की पूर्व मंजूरी के बिना कार्य नहीं करेगा;
(ख) बोर्ड के ऐसे किसी आदेश के उल्लघंन में इस धारा के अधीन कार्य नहीं करेगा, जिससे किसी विशिष्ट काम के निष्पादन का अथवा किसी विशिष्ट कार्य के किए जाने का प्रतिषेध किया गया है; और
(ग) इस धारा के अधीन की गई किसी कार्रवाई की तथा उसके कारणों की रिपोर्ट तत्काल बोर्ड को देगा ।
निर्वाचन
27. निर्वाचक नामावली-(1) बोर्ड या जहां ऐसे किसी स्थान के लिए बोर्ड गठित नहीं किया गया है, जिसे धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना द्वारा छावनी घोषित किया गया है, स्टेशन समादेशक अधिकारी एक निर्वाचक नामावली तैयार कराएगा और प्रकाशित करेगा जिसमें उन व्यक्तियों के नाम दर्शित होंगे जो बोर्ड के निर्वाचनों में मतदान करने के लिए अर्हित हैं और ऐसी नामावली ऐसी रीति से तथा हर वर्ष ऐसी तारीख को, जिसे केन्द्रीय सरकार नियम द्वारा विहित करे, तैयार की जाएगी, पुनरीक्षित की जाएगी और अन्तिम रूप से प्रकाशित की जाएगी ।
(2) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसका नाम अन्तिम निर्वाचक नामावली में दर्शित है, जब तक वह नामावली प्रवृत्त रहती है, तब तक बोर्ड के किसी निर्वाचन में मतदान के लिए हकदार होगा तथा कोई भी अन्य व्यक्ति इस प्रकार हकदार न होगा ।
(3) जब कोई छावनी वार्डों में विभाजित कर दी गई है तब निर्वाचक नामावली प्रत्येक वार्ड के लिए पृथक् सूचियों में विभाजित की जाएगी ।
(4) यदि नई निर्वाचक नामावली किसी वर्ष में विहित तारीख को, प्रकाशित नहीं की जाती तो केन्द्रीय सरकार यह निदेश दे सकेगी कि जब तक नई नामावली प्रकाशित नहीं कर दी जाती तब तक पुरानी नामावली प्रवृत्त बनी रहेगी ।
28. निर्वाचकों की अर्हता-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो उस तारीख को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियत की जाए (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् अर्हता की तारीख कहा गया है) अठारह वर्ष की आयु से कम आयु का नहीं है और अर्हता की तारीख से ठीक पहले वाले छह मास से अन्यून कालावधि के लिए छावनी में निवासी रहा है, उस दशा में निर्वाचक के रूप में नामावली में दर्ज किए जाने का हकदार होगा जिसमें कि वह अन्यथा निरर्हित नहीं कर दिया गया है ।
स्पष्टीकरण-जब कोई स्थान प्रथम बार छावनी घोषित किया गया है अथवा जब कोई स्थानीय क्षेत्र प्रथम बार छावनी में सम्मिलित किया गया है तब पूर्वोक्त तारीख को छावनी में समाविष्ट स्थान या क्षेत्र में निवास के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए छावनी में निवास है ।
(2) कोई भी व्यक्ति इस बात के होते हुए भी कि वह अन्यथा अर्हित है निर्वाचक के रूप में नामावली में दर्ज किए जाने का हकदार नहीं होगा, यदि वह अर्हता की तारीख को-
(i) भारत का नागरिक नहीं है; या
(ii) सक्षम न्यायालय द्वारा विकृतचित न्यायनिर्णीत किया गया है; या
(iii) अनुन्मोचित दिवालिया है; या
(iv) किसी दण्ड न्यायालय द्वारा ऐसे किसी अपराध के लिए, जिसकी बाबत केन्द्रीय सरकार द्वारा घोषित किया गया है कि वह ऐसा है कि उससे वह निर्वाचक होने के लिए अयोग्य हो जाएगा, उसे दो वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दंडादिष्ट किया गया है या दण्ड न्यायालय द्वारा भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 9क के अधीन किसी अपराध के लिए उसे दण्डादिष्ट किया गया है :
परन्तु खण्ड (iv) के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा उपगत कोई निरर्हता, दण्डादेश या आदेश की समाप्ति से तीन वर्ष के व्यपगत होने पर समाप्त हो जाएगी ।
(3) यदि ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी निर्वाचक नामावली में निर्वाचक के रूप में दर्ज किए जाने के पश्चात् उन निरर्हताओं में से किसी के अधीन हो जाता है जो उपधारा (2) में निर्दिष्ट है तो उसका नाम निर्वाचक नामावली से तब के सिवाय हटा दिया जाएगा जब कि खण्ड (iv) में निर्दिष्ट दशा में केन्द्रीय सरकार द्वारा निरर्हता हटा दी गई है ।
29. बोर्ड का सदस्य होने के लिए अर्हता-(1) इसमें इसके पश्चात् उपबंधित के सिवाय, ऐसा हर व्यक्ति, जो सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण करने वाला व्यक्ति नहीं है, जिसका नाम छावनी की निर्वाचक नामावली में दर्ज है, उस छावनी में बोर्ड के सदस्य के रूप में निर्वाचन के लिए अर्हित होगा ।
(2) कोई भी व्यक्ति बोर्ड के सदस्य के रूप में नामनिर्देशन के लिए उस दशा में अर्हित नहीं होगा जिसमें वह धारा 28 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट निरर्हताओं में से किसी के अधीन है ।
(3) कोई भी व्यक्ति बोर्ड के सदस्य के रूप में चुने जाने के लिए (चाहे निर्वाचन द्वारा या नामनिर्देशन द्वारा) और सदस्य के रूप में बने रहने के लिए अर्हित नहीं होगा यदि वह-
(क) सरकार की सेवा से पदच्युत किया गया है और उस सेवा में पुनर्नियोजन के लिए विवर्जित है अथवा वह बोर्ड का पदच्युत सेवक है, या
(ख) किसी सक्षम प्राधिकारी के आदेश द्वारा अपनी वृत्ति या आजीविका का व्यवसाय करने से विवर्जित है, या
(ग) ऐसा कोई लाभ का पद धारण करता है जो बोर्ड द्वारा दिया जा सकता है या जिस पर बोर्ड का नियन्त्रण है या पुलिस अधिकारी है या बोर्ड के किसी सदस्य का सेवक या नियोजक है, या
(घ) किसी निगमित कम्पनी में निदेशक से भिन्न शेयरधारक के रूप में हितबद्ध होने के सिवाय बोर्ड से की गई किसी विद्यमान संविदा में या बोर्ड के लिए किए गए किसी कार्य में हितबद्ध है, या
(ङ) बोर्ड या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण का स्थायी या अस्थायी अधिकारी या कर्मचारी है, या
(च) किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण का सदस्य है, या
(छ) धारा 31 के खंड (च) में निर्दिष्ट किसी प्राधिकरण द्वारा धारा 30 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट भ्रष्ट आचरणों में से किसी भ्रष्ट आचरण का दोषी पाया गया है, जब तक कि प्राधिकरण के विनिश्चय की तारीख से पांच वर्ष की अवधि व्यपगत न हो गई हो, या
(ज) उस पर इस निमित्त तामील की गई सूचना के पश्चात् तीस दिन के भीतर बोर्ड को, किसी अभिकर्ता, रिसीवर न्यासी या निष्पादक की हैसियत से भिन्न हैसियत में उसके द्वारा शोध्य किसी भी प्रकार के बकाया का संदाय करने में असफल रहता है, या
(झ) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के अधीन निरर्हित है:
परन्तु किसी व्यक्ति को खण्ड (घ) में यथानिर्दिष्ट ऐसी किसी संविदा या कार्य में केवल इस कारण से हितबद्ध होना नहीं समझा जाएगा कि उसका निम्नलिखित में शेयर या हित हैः-
(क) स्थावर सम्पत्ति के किसी पट्टे या उसके विक्रय या क्रय में अथवा उसके लिए किसी करार में; अथवा
(ख) धन उधार देने के लिए किसी करार में अथवा केवल धन के भुगतान के लिए किसी प्रतिभूति में; अथवा
(ग) ऐसे किसी समाचारपत्र में, जिसमें बोर्ड के क्रियाकलापों से संबंधित कोई भी विज्ञापन सम्मिलित किया जाता है; अथवा
(घ) संविदा या काम की कालावधि के दौरान किसी वर्ष में कुल मिलाकर पच्चीस हजार रुपए से अनधिक मूल्य की ऐसी किन्हीं वस्तुओं का, जिनका वह नियमित रूप से व्यापार करता है, बोर्ड को विक्रय करने में अथवा किन्हीं वस्तुओं को बोर्ड से क्रय करने में ।
30. निर्वाचन-(1) धारा 27, धारा 28 और धारा 29 के प्रयोजनों के लिए, व्यक्ति" से कोई व्यष्टिक मानव अभिप्रेत है ।
(2) धारा 29 की उपधारा (3) के खण्ड (छ) के अर्थांतर्गत निम्नलिखित भ्रष्ट आचरण समझे जाएंगे, -
(1) रिश्वत", अर्थात्: -
(अ) किसी अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता द्वारा अथवा किसी अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की सहमति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी भी व्यक्ति को, वह चाहे जो कोई हो, किसी परितोषण का ऐसा दान, प्रस्थापना या वचन, जिसका प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः यह उद्देश्य हो कि-
(क) किसी व्यक्ति को किसी निर्वाचन में अभ्यर्थी के रूप में खड़े होने या खड़े न होने के लिए या अभ्यर्थिता वापस लेने या न लेने के लिए उत्प्रेरित किया जाए; या
(ख) किसी निर्वाचक को किसी निर्वाचन में मत देने या मत देने से विरत रहने के लिए, या निम्नलिखित के लिए उत्प्रेरित किया जाए, -
(i) किसी व्यक्ति के लिए इस बात के लिए कि वह इस प्रकार खड़ा हुआ है या नहीं हुआ या उसने अपनी अभ्यर्थिता वापस ले ली या नहीं ली है, इनाम के रूप में हो, अथवा
(ii) किसी निर्वाचक के लिए इस बात के लिए कि उसने क्या मत दिया था या मत देने से विरत रहा; इनाम के रूप में हो;
(आ) (क) किसी व्यक्ति द्वारा अभ्यर्थी के रूप में खड़े होने या खड़े न होने या अभ्यर्थिता वापस लेने या न लेने के लिए; या
(ख) किसी व्यक्ति द्वारा, वह चाहे जो कोई हो, स्वयं अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए, मतदान करने या मतदान करने से विरत रहने या किसी अभ्यर्थी को अभ्यर्थिता वापस लेने या न लेने के लिए उत्प्रेरित करने या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करने के लिए, चाहे हेतु के रूप में या इनाम के रूप में कोई परितोषण प्राप्त करना या प्राप्त करने के लिए करार करना ।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए परितोषण" पद धनीय परितोषणों या धन में प्राक्कलनीय परितोषणों तक ही सीमित नहीं है और इसके अन्तर्गत सभी प्रकार के मनोरंजन और इनाम के लिए, सभी प्रकार के नियोजन आते हैं, किन्तु किसी निर्वाचन में या निर्वाचन के प्रयोजन के लिए सद्भावपूर्वक उपगत व्ययों के संदाय इसके अन्तर्गत नहीं आते हैं ।
(2) असम्यक् प्रभाव डालना, अर्थात् किसी निर्वाचन अधिकार के स्वतंत्र प्रयोग में अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की या अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की सहमति से किसी अन्य व्यक्ति की ओर से किया गया कोई प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः हस्तक्षेप या हस्तक्षेप का प्रयत्नः
परन्तु यह कि-
(क) इस खंड के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उसमें निर्दिष्ट ऐसे किसी व्यक्ति की बाबत जो-
(i) किसी अभ्यर्थी या किसी निर्वाचक या ऐसे किसी व्यक्ति को, जिसमें अभ्यर्थी या निर्वाचक हितबद्ध है, किसी प्रकार की क्षति, जिसके अन्तर्गत सामाजिक बहिष्कार और किसी जाति या समुदाय से बाहर करना या निष्कासन आता है, पहुंचाने की धमकी देता है,
(ii) किसी अभ्यर्थी या निर्वाचक को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करता है या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करता है कि वह या कोई ऐसा व्यक्ति जिसमें वह हितबद्ध है, दैवी अप्रसाद या आध्यात्मिक परिनिन्दा का भाजन हो जाएगा या बना दिया जाएगा, यह समझा जाएगा कि वह ऐसे अभ्यर्थी या निर्वाचक के निर्वाचन अधिकार के स्वतन्त्र प्रयोग में इस खण्ड के अर्थांतर्गत हस्तक्षेप करता है;
(ख) लोक नीति की घोषणा या लोक कार्यवाही का वचन या किसी वैध अधिकार का प्रयोग मात्र, जो किसी निर्वाचन अधिकार में हस्तक्षेप करने के आशय के बिना है, इस खंड के अर्थांतर्गत हस्तक्षेप करना नहीं समझा जाएगा ।
(3) किसी व्यक्ति के धर्म, मूलवंश, जाति, समुदाय, या भाषा के आधार पर किसी व्यक्ति के लिए मत देने या मत देने से विरत रहने की अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता द्वारा या अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की सहमति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपील या उस अभ्यर्थी के निर्वाचन की सम्भाव्यताओं को अग्रसर करने के लिए या किसी अभ्यर्थी के निर्वाचन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए धार्मिक प्रतीकों का उपयोग या उनकी दुहाई या राष्ट्रीय प्रतीक जैसे राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय संप्रतीक का उपयोग या दुहाई ।
(4) किसी अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता या अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की सहमति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस अभ्यर्थी के निर्वाचन की सम्भाव्यताओं को अग्रसर करने के लिए या किसी अभ्यर्थी के निर्वाचन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए शत्रुता या घृणा की भावनाओं का भारत के नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच धर्म, मूलवंश, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर संप्रवर्तन या संप्रवर्तन का प्रयत्न करना ।
(5) किसी अभ्यर्थी के वैयक्तिक शील या आचरण के संबंध में या किसी अभ्यर्थी की अभ्यर्थिता या अभ्यर्थिता वापस लेने के संबंध में या अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता द्वारा या अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की सम्मति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, किसी ऐसे तथ्य के कथन का प्रकाशन जो मिथ्या है और या तो जिसके मिथ्या होने का उसको विश्वास है या जिसके सत्य होने का वह विश्वास नहीं करता है और जो उस अभ्यर्थी के निर्वाचन की सम्भाव्यताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए, युक्तियुक्त रूप से परिकलित कथन है ।
(6) किसी मतदान केन्द्र या मतदान के लिए नियत स्थान को या से (स्वयं अभ्यर्थी, उसके कुटुम्ब से सदस्य या उसके अभिकर्ता से भिन्न) किसी निर्वाचक के मुफ्त प्रवहण के लिए किसी यान या जलयान को अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता द्वारा या अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की सहमति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संदाय करके या अन्यथा, भाड़े पर लेना या उपाप्त करना:
परन्तु यदि निर्वाचक या कई निर्वाचकों द्वारा अपने संयुक्त खर्चे पर अपने किसी ऐसे मतदान केन्द्र या मतदान के लिए नियत स्थान को या से प्रवहण किए जाने के प्रयोजन के लिए यान या जलयान भाड़े पर लिया गया है, तो यदि यान या जलयान यांत्रिक शक्ति से प्रचालित न होने वाला है तो ऐसे यान या जलयान के भाड़े पर लिए जाने की बाबत यह न समझा जाएगा कि वह भ्रष्ट आचरण है:
परन्तु यह और भी कि किसी ऐसे मतदान केन्द्र या मतदान के लिए नियत स्थान को जाने या वहां से आने के प्रयोजन के लिए अपने ही खर्च पर किसी निर्वाचक द्वारा किसी लोक परिवहन यान या जलयान या किसी ट्राम या रेलगाड़ी के उपयोग की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह इस खंड के अधीन भ्रष्ट आचरण है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड में यान" पद से ऐसा कोई यान अभिप्रेत है जो सङक परिवहन के लिए उपयोग में लाया जाता है या उपयोग में लाए जाने के योग्य है चाहे वह यांत्रिक शक्ति से या अन्यथा प्रचालित हो और चाहे अन्य यानों को खींचने के लिए या अन्यथा उपयोग में लाया जाता हो ।
(7) सरकार की या बोर्ड की सेवा में के किसी ऐसे व्यक्ति से अभ्यर्थी के निर्वाचन की सम्भाव्यताओं को अग्रसर करने के लिए (मत देने से अन्यथा) कोई सहायता अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता द्वारा या अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की सम्मति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अभिप्राप्त या उपाप्त किया जाना या अभिप्राप्त या उपाप्त करने का दुष्प्रेरण या प्रयत्न करना:
परन्तु जहां सरकार की या बोर्ड की सेवा में का कोई व्यक्ति किसी अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता या उस अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की सम्मति से कार्य करने वाले किसी अन्य व्यक्ति के लिए या उसके संबंध में अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन या तात्पर्यित निर्वहन में (चाहे अभ्यर्थी द्वारा धारित पद के कारण या किसी अन्य कारणवश) कोई इन्तजाम करता है या कोई सुविधा देता है या कोई अन्य कार्य या बात करता है तो ऐसा इन्तजाम, सुविधा या कार्य या बात उस अभ्यर्थी के निर्वाचन की सम्भाव्यताओं को अग्रसर करने के लिए सहायता नहीं समझी जाएगी ।
स्पष्टीकरण-कोई व्यक्ति जिसकी बाबत यह ठहराया जाए कि उसने अभ्यर्थी की सम्मति से निर्वाचन के संबंध में अभिकर्ता के रूप में कोई कार्य किया है, इस धारा में के अभिकर्ता" पद के अन्तर्गत आता है ।
31. निर्वाचनों के विनियमन के लिए नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन निर्वाचन कराने के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों का विनियमन करने के लिए ऐसे नियम, जो इस अधिनियम से संगत हों साधारणतः या विशेषतः किसी छावनी या छावनियों के समूह के लिए पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बना सकेगी, अर्थात्ः-
(क) छावनी का वार्डों में विभाजन;
(ख) इस बात का अवधारण कि प्रत्येक वार्ड द्वारा कितने सदस्य निर्वाचित किए जाने हैं;
(ग) निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण और अन्तिम प्रकाशन;
(घ) अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के निर्वाचन के लिए वार्डों का आरक्षण;
(ङ) निर्वाचकों का रजिस्ट्रीकरण, अभ्यर्थियों का नामनिर्देशन, निर्वाचनों के किए जाने का समय और रीति तथा वह रीति जिससे मत अभिलिखित किए जाएंगे;
(च) वह प्राधिकारी जो राज्य सरकार का अधिकारी हो सकेगा जिसके द्वारा तथा वह रीति जिससे निर्वाचक नामावलियों संबंधी या निर्वाचनों से उद्भूत विवाद विनिश्चित किए जाएंगे तथा ऐसे प्राधिकारियों की शक्तियां और कर्तव्य तथा वे परिस्थितियां जिनमें ऐसा प्राधिकारी यह घोषित कर सकेगा कि आकस्मिक रिक्ति हो गई है अथवा कोई अभ्यर्थी निर्वाचित हो गया है;
(छ) निर्वाचन या निर्वाचन-विवादों से संबंधित कोई आवेदन ग्रहण किए जाने या उस पर विचार किए जाने के लिए संदत्त की जाने वाली फीस;
(ज) निर्वाचनों या निर्वाचन-विवादों से संबंधित कोई अन्य विषय जिसकी बाबत केन्द्रीय सरकार को नियम बनाने की शक्ति इस अध्याय के अधीन प्राप्त है अथवा जिसकी बाबत इस अधिनियम में कोई उपबंध नहीं किया गया है अथवा अपर्याप्त उपबंध किया गया है तथा केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि उनकी बाबत उपबंध करना आवश्यक है ।
सदस्य
32. जिस बात में सदस्य हितबद्ध है उस पर उसके द्वारा मत न दिया जाना-(1) बोर्ड का कोई सदस्य, बोर्ड या बोर्ड की समिति के किसी अधिवेशन में अपने आचरण से संबंधित किसी प्रश्न पर अपना मत नहीं देगा अथवा, छावनी के निवासियों पर साधारणतः प्रभाव डालने वाली बात से भिन्न ऐसी किसी बात पर, जिससे उसके अपने धनीय हित पर या ऐसी किसी सम्पत्ति के, जिसमें वह प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः हितबद्ध है अथवा ऐसी किसी सम्पत्ति के, जिसका या जिसके लिए वह प्रबंधक या अभिकर्ता है, मूल्यांकन पर प्रभाव पङता है, मत नहीं देगा या किसी विचार-विमर्श में भाग नहीं लेगा ।
(2) जहां बोर्ड के अधिवेशन या बोर्ड की किसी समिति में उपस्थित बोर्ड के किसी सदस्य का यह विश्वास है कि ऐसे अधिवेशन का सभापतित्व करने वाले व्यक्ति का, विचाराधीन किसी विषय में, आर्थिक या अन्य हित है, और वह इस प्रभाव का कोई प्रस्ताव रखता है, वहां सभापतित्व करने वाला व्यक्ति-
(क) ऐसे प्रस्ताव के संबंध में मत देने का हकदार नहीं होगा; और
(ख) यदि, ऐसे प्रस्ताव की कार्यवाही चल रही है, तो वह ऐसे विचार-विमर्श के दौरान, अधिवेशन में अनुपस्थित रहेगा ।
33. सदस्यों का दायित्व-बोर्ड का हर सदस्य बोर्ड के किसी धन का या अन्य सम्पत्ति की, जो बोर्ड की हैं, उसमें निहित है या उसके प्रबन्ध में सौंपी गई है, किसी हानि, दुर्व्यय या दुरुपयोजन उस समय, जब वह ऐसा सदस्य था, उसकी उपेक्षा या अवचार का प्रत्यक्ष परिणाम है तथा उसके लिए प्रतिकर के लिए वाद या तो बोर्ड द्वारा या केन्द्रीय सरकार द्वारा उसके विरुद्ध संस्थित किया जा सकेगा ।
34. सदस्यों का हटाया जाना-(1) केन्द्रीय सरकार बोर्ड से उसके ऐसे किसी सदस्य को हटा सकेगी-
(क) जो धारा 28 की उपधारा (2) में या धारा 29 में विनिर्दिष्ट निरर्हताओं में से किसी के अधीन हो जाता है या उसकी बाबत यह निष्कर्ष निकलता है कि वह अपने निर्वाचन या नामनिर्देशन के समय उन निरर्हताओं में से किसी के अधीन था; या
(ख) जो बोर्ड के तीन क्रमवर्ती अधिवेशनों से अधिक या तीन मास के लिए इनमें से जो पश्चात्वर्ती हो अनुपस्थित रहा है तथा अपनी अनुपस्थिति के लिए ऐसा स्पष्टीकरण, जिससे बोर्ड का समाधान हो जाए, देने में असमर्थ है ।
स्पष्टीकरण-तीन क्रमवर्ती मासों की पूर्वोक्त कालावधि की संगणना करने में बोर्ड की इजाजत से हुई अनुपस्थिति की कोई कालावधि सम्मिलित न की जाएगी; या
(ग) जिसने धारा 32 के उपबन्धों का उल्लंघन जानते हुए किया है; या
(घ) जो विधि व्यवसायी होते हुए किसी विधिक कार्यवाही में बोर्ड के विरुद्ध अथवा किसी ऐसी कार्यवाही में, जो ऐसे किसी विषय में हो जिससे बोर्ड सम्बन्धित है या रहा है, सरकार के विरुद्ध किसी अन्य व्यक्ति की ओर से कार्य करता है या हाजिर होता है अथवा ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से संस्थित किसी दाण्डिक कार्यवाही में या उस व्यक्ति की ओर से कार्य करता है या हाजिर होता है;
(ङ) उसने स्वयं इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों या उप-विधियों के उपबन्धों के उल्लंघन में रक्षा भूमि पर अतिक्रमण किए हैं या उनमें सहायता की है या उनमें उत्प्रेरण किया है ।
(2) केन्द्रीय सरकार किसी ऐसे सदस्य को बोर्ड से हटा सकेगी जिसकी बाबत केन्द्रीय सरकार की राय है कि उसने बोर्ड के सदस्यों के रूप में अपनी पदीय स्थिति का किसी रीति से इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि सदस्य के रूप में उसका बना रहना लोकहितों के लिए अपायकर हो गया है ।
(3) कमान का मुख्य महा समादेशक अधिकारी बोर्ड के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट ऐसे किसी सैनिक अधिकारी को, जिसकी बाबत स्टेशन समादेशक अधिकारी की राय है कि बोर्ड के सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में वह असमर्थ है और अपने पद का त्याग करने में असफल हो गया है, तो स्टेशन समादेशक अधिकारी से रिपोर्ट की प्राप्ति पर बोर्ड उसे हटा सकेगा ।
(4) कोई भी सदस्य इस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन बोर्ड से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि हटाए जाने के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उसे युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
35. हटाए जाने के परिणाम-(1) कोई सदस्य, जो धारा 34 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन अथवा उपधारा (3) के अधीन हटाया गया है यदि वह अन्यथा अर्हित है, तो पुनर्निर्वाचन या पुनर्नामनिर्देशन के लिए पात्र होगा ।
(2) कोई सदस्य, जिसे धारा 34 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) या खंड (घ) के अधीन हटाया गया है, उस कालावधि तक, जिसके दौरान ऐसे हटाए जाने के अभाव में वह अपने पद पर बना रहा होता, पुनर्निर्वाचन या नामनिर्देशन के लिए पात्र नहीं होगा ।
(3) कोई भी सदस्य, जो धारा 34 की उपधारा (2) के अधीन हटाया गया है अपने हटाए जाने की तारीख से तीन वर्ष के अवसान तक पुनर्निर्वाचन या नामनिर्देशन के लिए पात्र नहीं होगा ।
36. बोर्ड के सदस्य का लोक सेवक समझा जाना-बोर्ड का प्रत्येक सदस्य भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49) की धारा 2 के खण्ड (ग) के अर्थांन्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा ।
कर्मचारी
37. बोर्ड के कर्मचारी के रूप में व्यक्ति की निरर्हता-(1) कोई व्यक्ति, जिसका बोर्ड के कर्मचारी के रूप में होने से, अन्यथा प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः अपना या अपने भागीदार के द्वारा कोई शेयर या हित बोर्ड के द्वारा या इस निमित्त की गई संविदा में अथवा बोर्ड के अधीन, द्वारा या इस निमित्त किसी नियोजन में है ऐसे बोर्ड का कर्मचारी न तो होगा और न रहेगा ।
(2) बोर्ड के ऐसे कर्मचारी की बाबत, जो बोर्ड के कर्मचारी के रूप में ऐसा करने से अन्यथा प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः स्वयं या अपने भागीदार के द्वारा कोई शेयर या हित बोर्ड के द्वारा या निमित्त की गई संविदा में अथवा बोर्ड के अधीन, द्वारा या निमित्त किसी नियोजन में जानते हुए अर्जित करता है या बनाए रखता है, यह समझा जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 168 के अधीन अपराध किया है ।
(3) इस धारा की कोई भी बात बोर्ड के द्वारा या इस निमित्त की गई किसी संविदा में या बोर्ड के अधीन, द्वारा या की ओर से नियोजन में किसी शेयर या हित को उस दशा में लागू न होगी जिसमें कि वह बोर्ड के साथ या बोर्ड की ओर से संविदा करने वाली या नियोजन करने वाली कम्पनी में शेयर है या भूमि या भवनों के बोर्ड को किए गए किसी पट्टे या विक्रय में अथवा भूमियों या भवनों के बोर्ड द्वारा किए गए किसी क्रय में अथवा उसके लिए किसी करार में ऐसा शेयर या हित है जो कमान के मुख्य महा समादेशक अधिकारी की अनुज्ञा से अर्जित किया गया है या प्रतिधृत रखा गया है ।
(4) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो बोर्ड के कर्मचारी के रूप में नियोजन के लिए आवेदन करता है, यदि वह बोर्ड के किसी सदस्य से या निम्न श्रेणी कर्मचारी न होने वाले ऐसे किसी व्यक्ति से, जो बोर्ड से पारिश्रमिक पा रहा है, रक्त या विवाह के द्वारा नातेदारी रखता है, ऐसी नातेदारी का तथ्य और स्वरूप नियुक्ति प्राधिकारी को, इसके पूर्व कि उसे नियुक्त किया जाए, अधिसूचित करेगा और यदि वह ऐसा नहीं करता तो उसकी नियुक्ति अविधिमान्य होगी, किन्तु उसने जो कुछ उसके पूर्व किया है, उसकी विधिमान्यता पर इससे प्रतिकूल प्रभाव न पड़ेगा ।
38. छावनी के कर्मचारियों को लोक सेवक समझा जाना-बोर्ड का प्रत्येक अधिकारी या कर्मचारी, स्थायी या अस्थायी भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49) की धारा 2 के खण्ड (ग) के अर्थांन्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा ।
प्रक्रिया
39. अधिवेशन-(1) प्रत्येक बोर्ड मास में कम से कम एक बार अपने कारबार का संव्यवहार ऐसे दिन करेगा जो अध्यक्ष और उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा नियत किया जाए और उसकी सूचना ऐसी रीति में दी जाएगी जो इस अध्याय के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों में उपबन्धित की जाए ।
(2) अध्यक्ष जब कभी वह ऐसा करना ठीक समझता है, तथा बोर्ड के सदस्यों के चतुर्थांश से अन्यून सदस्यों द्वारा लिखित रूप में की गई अध्यपेक्षा पर विशेष अधिवेशन, संयोजित कर सकेगा ।
(3) कोई भी अधिवेशन अगले या किसी पश्चात्वर्ती दिन तक के लिए स्थगित किया जा सकेगा तथा कोई भी स्थगित अधिवेशन उसी रीति से आगे, किन्तु लोक आपात की दशा के सिवाय दो बार से अनधिक के लिए स्थगित किया जा सकेगा ।
40. संव्यवहृत किया जाने वाला कामकाज-ऐसे किसी विनियम के अधीन रहते हुए, जो इस अध्याय के अधीन बोर्ड द्वारा बनाया गया हो, किसी अधिवेशन में कोई भी कामकाज संव्यवहृत किया जा सकेगा:
परन्तु किसी कर के अधिरोपण, उत्सादन या उपांतरण से संबंधित कोई कामकाज किसी अधिवेशन में तब तक नहीं किया जाएगा जब तक उसकी और उसके लिए नियत तारीख की सूचना उस तारीख से कम से कम सात दिन पूर्व प्रत्येक सदस्य को नहीं भेज दी जाती है ।
41. गणपूर्ति-(1) बोर्ड के किसी अधिवेशन में कारबार का संव्यवहार करने के लिए आवश्यक गणपूर्ति, बोर्ड में पद धारण करने वाले सदस्यों की संख्या की आधी होगी:
परन्तु यह कि यदि किसी विशिष्ट समय पर पद धारण करने वाले बोर्ड के सदस्यों की संख्या विषम है तो गणपूर्ति ऐसे सदस्यों की संख्या में एक जोड़कर प्राप्त संख्या की आधी होगी ।
(2) यदि गणपूर्ति नहीं हुई है तो अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष या दोनों की अनुपस्थिति में सदस्य-सचिव अधिवेशन को स्थगित कर देगा तथा यदि गणपूर्ति मूल अधिवेशन में हुई होती तो जो कामकाज उस अधिवेशन के समक्ष लाया जाता, वह स्थगित अधिवेशन के समक्ष लाया जाएगा और उसमें संव्यवहृत किया जा सकेगा, भले ही गणपूर्ति हुई हो या न हुई हो ।
42. पीठासीन अधिकारी-(क) जिस बोर्ड में एक से अधिक निर्वाचित सदस्य हैं उसके किसी अधिवेशन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष इन दोनों की,
(ख) धारा 12 की उपधारा (6) अथवा धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन गठित बोर्ड के अधिवेशन में अध्यक्ष की,
अनुपस्थिति में वे सदस्य जो उपस्थित हैं, अपने में से किसी एक को सभापतित्व करने के लिए निर्वाचित करेंगे ।
43. कार्यवृत्त-(1) ऐसे प्रत्येक अधिवेशन की कार्यवाहियों के कार्यवृत्त एक पुस्तिका में अभिलिखित किए जाएंगे और अधिवेशन का सभापतित्व करने वाले व्यक्ति और मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा, अधिवेशन के समाप्त होने से पूर्व हस्ताक्षरित किए जाएंगे और ऐसे समयों पर और ऐसे स्थान पर जो बोर्ड द्वारा नियत किया जाए, छावनी के किसी निवासी द्वारा बिना प्रभार के निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे और उसकी अधिप्रमाणित प्रतियां अनुरोध पर, बोर्ड द्वारा विनिश्चित की जाने वाली नाममात्र की लागत पर उसे उपलब्ध कराई जा सकेंगी ।
(2) कार्यवृत्त की प्रतियां प्रत्येक अधिवेशन के पश्चात्, यथासम्भव शीघ्र बोर्ड के प्रत्येक सदस्य, कमान के मुख्य समादेशक अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट को तथा रक्षा संपदा अधिकारी को और ऐसी छावनियों में, जहां नौसेना या वायु सेना स्टेशन स्थित हों, वहां कार्यवृत्त की प्रतियां, यथास्थिति, नौसेना या वायु सेना के कमान मुख्यालयों की जानकारी के लिए भेजी जाएंगी ।
44. अधिवेशनों का सार्वजनिक होना-बोर्ड का प्रत्येक अधिवेशन लोक साधारण के लिए तब के सिवाय खुला होगा जबकि किसी दशा में अधिवेशन का सभापतित्व करने वाला व्यक्ति ऐसे कारणों के लिए जो कार्यवृत्त में अभिलिखित किए जाएंगे, अन्यथा निर्दिष्ट करे ।
45. प्रश्नों पर विनिश्चय करने की रीति-(1) अधिवेशन के समक्ष आने वाले सब प्रश्न उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के मतों की बहुसंख्या से विनिश्चित किए जाएंगे ।
(2) मतों की समानता की दशा में अधिवेशन का सभापतित्व करने वाले व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा ।
(3) बोर्ड के किसी विनिश्चय से किसी सदस्य की विसम्मति उस दशा में, जिसमें कि सदस्य ऐसा अनुरोध करता है, ऐसी विसम्मति के आधारों के संक्षिप्त कथन सहित कार्यवृत्त में दर्ज की जाएगी ।
46. सिविल क्षेत्र-(1) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी छावनी में सिविल क्षेत्र घोषित कर सकेगी जिसमें इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए बड़ी संख्या में सिविल जनसंख्या निवास करती है ।
(2) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड के परामर्श से जब कभी अपेक्षित हो और प्रत्येक जनगणना के पश्चात् प्रत्येक छावनी में सिविल क्षेत्र की सीमाओं का पुनर्विलोकन कर सकेगी ।
47. सिविल क्षेत्रों के लिए समितियां-(1) किसी छावनी में धारा 12 के अधीन गठित प्रत्येक बोर्ड, एक समिति को नियुक्त करेगा जो, बोर्ड के निर्वाचित सदस्यों, इस अधिनियम की धारा 46 के अधीन यथा अधिसूचित छावनी में सिविल क्षेत्र के प्रशासन के लिए स्वास्थ्य अधिकारी और कार्यपालक इंजीनियर से मिलकर बनेगी तथा धारा 48 की उपधारा (1) के खण्ड (ङ) में उपबन्धित रीति में अपनी शक्तियों और कर्तव्यों को ऐसी समिति को प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
(2) बोर्ड का उपाध्यक्ष उपधारा (1) के अधीन नियुक्त समिति का अध्यक्ष होगा ।
(3) किसी सिविल क्षेत्र के संबंध में धारा 137 की उपधारा (1), धारा 143, धारा 147, धारा 149 और धारा 262 के अधीन बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग या उसके कर्तव्यों और कृत्यों का निर्वहन सिविल क्षेत्र समिति द्वारा किया जाएगा:
परन्तु यदि स्वास्थ्य अधिकारी, समिति द्वारा धारा 137 की उपधारा (1), धारा 143, धारा 147, और धारा 149 के अधीन किए गए किसी विनिश्चय से स्वास्थ्य के आधार पर विसम्मत होता है, तो वह मामला अध्यक्ष द्वारा विनिश्चय के लिए बोर्ड को निर्दिष्ट किया जा सकेगा ।
48. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों से संगत, निम्नलिखित में सभी या उनमें से किन्हीं के लिए विषयों का उपबन्ध करने के लिए विनियम बना सकेगा, अर्थात्ः-
(क) उसके अधिवेशनों का समय और स्थान;
(ख) वह रीति, जिससे अधिवेशन की सूचना दी जाएगी;
(ग) अधिवेशनों में कार्यवाहियों का संचालन तथा अधिवेशनों का स्थगन;
(घ) बोर्ड की सामान्य मुद्रा की अभिरक्षा तथा वे प्रयोजन जिसके लिए वह काम में लाई जाएगी; तथा
(ङ) किसी प्रयोजन के लिए समितियों की नियुक्ति तथा ऐसी समितियों के गठन और प्रक्रिया से संबंधित सब विषयों का अवधारण तथा इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की शक्तियों या कर्तव्यों में से विनियमों या उपविधियों को बनाने की शक्तियों के सिवाय किन्हीं का, ऐसी किन्हीं शर्तों पर जो बोर्ड अधिरोपित करना ठीक समझता है ऐसी समितियों को प्रत्यायोजन ।
(2) उपधारा (1) के खंड (ङ) के अधीन बनाया गया कोई भी विनियम तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि वह केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित न कर दिया गया हो ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया कोई भी विनियम तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि वह ऐसी रीति से प्रकाशित न कर दिया गया हो जैसा केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे ।
49. अन्य स्थानीय प्राधिकारी के साथ संयुक्त कार्रवाई-(1) बोर्ड-
(क) किसी अन्य प्राधिकारी के साथ-
(i) किसी प्रयोजन के लिए, जिसमें वे संयुक्ततः हितबद्ध हैं, संयुक्त समिति नियुक्त करने में तथा ऐसी समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने में;
(ii) किसी संयुक्त संकर्म के निर्माण तथा भावी अनुरक्षण की बाबत ऐसे निबंधन, जो बोर्ड पर तथा ऐसे अन्य स्थानीय प्राधिकारी पर आबद्धकर हैं; तैयार करने की शक्ति ऐसी समिति को प्रत्यायोजित करने में अथवा ऐसी किसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए, जो बोर्ड द्वारा अथवा ऐसे अन्य प्राधिकारी द्वारा प्रयुक्त की जा सकती है; तथा
(iii) उन प्रयोजनों संबंधी, जिनके लिए ऐसी समिति की नियुक्ति की गई है कार्यवाहियों का विनियमन करने के लिए नियम बनाने में, सम्मिलित हो सकेगा, अथवा
(ख) कमान के मुख्य समादेशक अधिकारी और संबंधित राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से, किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी से किसी कर या चुंगी कर के उद्ग्रहण की बाबत जहां उक्त कर या चुंगी कर क्रमशः बोर्ड द्वारा या ऐसे अन्य स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उद्ग्रहणीय है, कोई करार कर सकेगा और बोर्ड और ऐसे अन्य स्थानीय प्राधिकारी के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, इस धारा में निर्दिष्ट औसत क्षेत्र के रूप में क्षेत्र की सीमाओं के भीतर पृथक् रूप से उद्ग्रहण करने के स्थान ऐसे अन्य स्थानीय प्राधिकारी द्वारा एकत्र रूप से उद्गृहीत किए जा सकेंगे ।
(2) यदि इस धारा के अधीन मिलकर कार्य करने वाले बोर्ड और अन्य स्थानीय प्राधिकारी के बीच कोई मतभेद उद्भूत होता है तो केन्द्रीय सरकार का या उस अधिकारी का, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त किया गया हो, उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा ।
(3) जब कि ऐसा कोई करार, जैसा उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट किया गया है-
(क) जहां करार चुंगी या सीमा कर या पथकर से संबंधित है, वहां करार के उस पक्षकार की, (यथास्थिति, बोर्ड या ऐसा अन्य स्थानीय प्राधिकारी) जो इस निमित्त करार में विनिर्दिष्ट है-
(i) संकलित क्षेत्र के भीतर चुंगी सीमाएं और चुंगी चौकियां तथा चुंगी, सीमा कर और पथकर के संग्रह के लिए स्थान स्थापित करने के बारे में वही शक्तियां होंगी जो, अपने नियंत्रण के अधीन वाले क्षेत्र में उसकी मामूली तौर पर हैं;
(ii) संकलित क्षेत्र के भीतर ऐसा चुंगी कर, कर या सीमा कर या पथकर संग्रह करने की वही शक्तियां होंगी और ऐसे चुंगी कर, कर या सीमा कर या पथकर के उद्ग्रहण से संबंधित प्रवृत्त किसी अधिनियमिति के उपबंध उसी रीति से लागू होंगे जिसमें वे उस दशा में लागू होते जिसमें वह संकलित क्षेत्र उस क्षेत्र में समाविष्ट होता जो उसके अपने नियंत्रण के अधीन मामूली तौर पर है;
(ख) संकलित क्षेत्र में संगृहीत ऐसे चुंगी कर, कर या पथकर की कुल रकम तथा ऐसा करने में उपगत खर्च को छावनी निधि तथा अन्य ऐसे स्थानीय प्राधिकारी के नियंत्रणाधीन निधि के बीच उस अनुपात में विभाजित किया जाएगा जो करार द्वारा अवधारित किया गया हो ।
50. प्रशासन विषयक रिपोर्ट-(1) प्रत्येक बोर्ड, पूर्वगामी, वित्तीय वर्ष के दौरान छावनी के प्रशासन पर ऐसे प्ररूप में और ऐसे ब्यौरों सहित, जो केन्द्रीय सरकार निदेशित करे, वित्तीय वर्ष के समापन के यथासंभव शीघ्र पश्चात् और केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियत तारीख के अपश्चात् केन्द्रीय सरकार को कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी की मार्फत् रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ।
(2) ऐसी रिपोर्ट पर कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी की टिप्पणियां, यदि कोई हों, उसके द्वारा बोर्ड को संसूचित की जाएंगी तथा उसका उत्तर भेजने के लिए युक्तियुक्त समय अनुज्ञात किया जाएगा और उत्तर को, टिप्पणियों सहित, यदि कोई हों, रिपोर्ट के साथ-साथ केन्द्रीय सरकार को अग्रेषित किया जाएगा ।
नियंत्रण
51. दस्तावेजों के पेश किए जाने की अपेक्षा करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार या ऐसा अधिकारी या प्राधिकारी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, बोर्ड से किसी समय यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह-
(क) ऐसा कोई अभिलेख, पत्राचार, योजना या अन्य दस्तावेज, जो उसके कब्जे में या उसके नियंत्रण के अधीन है, पेश करे;
(ख) अपनी कार्यवाहियों, कर्तव्यों या संकर्मों के विषय से संबंधित कोई विवरणी, योजना, प्राक्कलन, विवरण, लेखा या आंकड़े दे;
(ग) कोई रिपोर्ट दे या अभिप्राप्त करे और दे ।
52. निरीक्षण-केन्द्रीय सरकार या कमान का मुख्य महासमादेशक अधिकारी या महानिदेशक या प्रधान निदेशक सरकार की सेवा में के किसी व्यक्ति को बोर्ड के कार्यालय के किसी विभाग का अथवा उसके द्वारा हाथ में ली गई सेवा या काम का अथवा बोर्ड की किसी चीज का निरीक्षण करने अथवा उसकी परीक्षा करने के लिए तथा उस पर रिपोर्ट देने के लिए प्रतिनियुक्ति कर सकेगा तथा बोर्ड और उसके अधिकारी और सेवक इस बात के लिए आबद्धकर होंगे कि ऐसे प्रतिनियुक्त व्यक्ति की पहुंच बोर्ड के परिसर और सम्पत्ति में तथा उन सब अभिलेखों, लेखाओं और अन्य दस्तावेजों तक होने दें जिनका निरीक्षण करना वह अपने कर्तव्यों के निर्वहन करने के लिए स्वयं को समर्थ करने के लिए आवश्यक समझे ।
53. दस्तावेज मांगने की शक्ति-कमान का मुख्य महासमादेशक अधिकारी या प्रधान निदेशक लिखित आदेश द्वारा-
(क) ऐसी कोई पुस्तक या दस्तावेज मांग सकेगा जो बोर्ड के कब्जे में या नियंत्रण के अधीन है;
(ख) बोर्ड से यह अपेक्षा कर सकेगा कि बोर्ड अपनी कार्यवाहियों, कर्तव्यों या संकर्मों से संबंधित ऐसे कथनों, रिपोर्टों और ऐसी दस्तावेजों की प्रतियां दे जैसा वह ठीक समझता है ।
54. संकर्म आदि का निष्पादन अपेक्षित करने की शक्ति-यदि धारा 51 या धारा 52 या धारा 53 के अधीन किसी जानकारी की या अभिप्राप्त रिपोर्ट की प्राप्ति पर, केन्द्रीय सरकार या कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी या महानिदेशक या प्रधान निदेशक की यह राय है-
(क) कि इस अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन बोर्ड पर अधिरोपित किसी कर्तव्य का पालन नहीं किया गया है अथवा उसे त्रुटिपूर्ण, अदक्ष या असमुचित रीति से किया गया है, या
(ख) कि ऐसे किसी बोर्ड के कर्तव्य के पालन के लिए पर्याप्त वित्तीय उपबंध नहीं किया गया है,
तो वह बोर्ड को यह निदेश दे सकेगा कि बोर्ड के कर्तव्य के समुचित पालन के लिए ऐसे प्रबंध या, यथास्थिति, उस कर्तव्य के पालन के लिए ऐसा वित्तीय उपबंध, जिससे केन्द्रीय सरकार या कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी का समाधान हो जाता है, ऐसी अवधि के भीतर करे जितना वह सरकार या वह अधिकारी ठीक समझता है:
परन्तु जब तक यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार अथवा कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी, महानिदेशक या प्रधान निदेशक की यह राय न हो कि ऐसे आदेश का अविलम्ब निष्पादन आवश्यक है, वह सरकार या अधिकारी इस धारा के अधीन कोई निदेश देने के पूर्व बोर्ड को इस बात का हेतुक दर्शित करने का अवसर देगा कि ऐसा निदेश क्यों न किया जाए ।
55. धारा 54 के अधीन दिए गए निदेश का प्रवर्तन करने के लिए उपबन्ध करने की शक्ति-यदि धारा 54 के अधीन दिए गए निदेश द्वारा नियत अवधि के भीतर ऐसी कोई कार्रवाई, जिसके किए जाने का निदेश उस धारा के अधीन दिया गया है, सम्यक् रूप से नहीं की जाती है तो यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या कमान का मुख्य महासमादेशक अधिकारी या महानिदेशक या प्रधान निदेशक ऐसी कार्रवाई के किए जाने के लिए प्रबंध कर सकेगा तथा वह निदेश दे सकेगा कि उससे संबंधित सभी व्यय छावनी निधि में से चुकाए जाएंगे ।
56. बोर्ड के विनिश्चय को अध्यारोही करने की शक्ति-(1) यदि अध्यक्ष की बोर्ड के किसी ऐसे विनिश्चय से विसम्मति है, जिसकी बाबत उसका यह विचार है कि उससे छावनी में बलों के स्वास्थ्य, कल्याण, अनुशासन या सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तो वह उस पर कार्रवाई किए जाने का निलंबन एक मास से अनधिक किसी कालावधि के लिए उन कारणों से, जो कार्यवृत्त में अभिलिखित किए जाएंगे, लिखित आदेश द्वारा कर सकेगा और यदि वह ऐसा करता है तो वह कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी के पास उस मामले को निर्देशित करेगा ।
(2) यदि जिला मजिस्ट्रेट का यह विचार है कि बोर्ड के किसी विनिश्चय से लोक स्वास्थ्य, सुरक्षा अथवा सुविधा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तो वह अपने आशय की लिखित सूचना बोर्ड को देने के पश्चात् वह मामला केन्द्रीय सरकार को निर्देशित कर सकेगा तथा केन्द्रीय सरकार को दिए गए निर्देश का निपटारा लम्बित रहने तक उस विनिश्चय पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी ।
(3) यदि ऐसा कोई मजिस्ट्रेट, जो बोर्ड का सदस्य है, अधिवेशन में उपस्थित होते हुए ऐसे किसी विनिश्चय से सहमत नहीं है जिसकी बाबत उसका विचार है कि उससे लोक स्वास्थ्य, सुरक्षा या सुविधा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तो वह जिला मजिस्ट्रेट को वह मामला ऐसे कारणों से, जो कार्यवृत्त में अभिलिखित किए जाएंगे, तथा अपने आशय की लिखित सूचना अध्यक्ष को देने के पश्चात् निर्दिष्ट कर सकेगा तथा अध्यक्ष ऐसी सूचना की प्राप्ति पर यह निदेश दे सकेगा कि उस विनिश्चय पर कार्रवाई का निलंबन इतनी कालावधि के लिए कर दिया जाए जितनी इस बात के लिए पर्याप्त हो कि जिला मजिस्ट्रेट को संसूचना दी जाए तथा वह जिला मजिस्ट्रेट उपधारा (2) में उपबंधित कार्यवाहियां कर सके ।
(4) यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी, किसी अधिवेशन में बोर्ड के किसी विनिश्चय को इस अधिनियम, उसके अधीन बनाए गए नियमों, विनियमों या उप विधियों के उपबन्धों और इस बाबत समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए साधारण मार्गदर्शक सिद्धान्तों के उल्लंघन में समझता है तो वह अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से और इस निमित्त अध्यक्ष को सूचित करने के पश्चात् विषय को तुरन्त प्रधान निदेशक को निर्देशित करेगा जो यदि वह समुचित समझे, एक मास से अनधिक की अवधि के लिए उक्त विनिश्चय पर कार्रवाई को निलम्बित करने का निदेश देगा ।
(5) प्रधान निदेशक, उपधारा (4) के अधीन किए गए निर्देश पर अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से विषय को इस सिफारिश के साथ कि बोर्ड के उक्त विनिश्चय को प्रतिसंहृत किया जाना चाहिए, कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी को निर्देशित करेगा और इस विषय की सूचना महानिदेशक, रक्षा सम्पदा को देगा ।
57. केन्द्रीय सरकार की पुनर्विलोकन की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, किसी भी समय, बोर्ड या कमान के मुख्य महासमादेशक, अधिकारी के किसी विनिश्चय या आदेश का पुनर्विलोकन कर सकेगी और उस पर ऐसे आदेश कर सकेगी जो वह ठीक समझे:
परन्तु जहां बोर्ड के किसी विनिश्चय या आदेश को उपांतरित करने का प्रस्ताव है वहां बोर्ड को इस बात का हेतुक दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा कि प्रश्नगत विनिश्चय या आदेश क्यों न उपांतरित कर दिया जाए ।
58. धारा 56 के अधीन या अन्यथा किए गए निर्देश के बारे में कमान के मुख्य समादेशक अधिकारी की शक्ति-(1) कमान का मुख्य महासमादेशक अधिकारी किसी समय-
(क) यह निदेश दे सकेगा कि ऐसे किसी मामले या किसी विनिर्दिष्ट प्रस्थापना पर, जो ऐसे मामले या प्रस्थापना से भिन्न है जो धारा 56 की उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया गया है या की गई है, बोर्ड द्वारा विचार या पुनर्विचार किया जाए; या
(ख) यह निदेश दे सकेगा कि बोर्ड के ऐसे किसी विनिश्चय पर कार्रवाई जो उस विनिश्चय से भिन्न है जो धारा 56 की उपधारा (1) के अधीन उसे निर्दिष्ट किया गया है, ऐसी अवधि के लिए निलंबित रखी जाए जो उस आदेश में कथित की जाए तथा तत्पश्चात् उस निलंबन को रद्द कर सकेगा या बोर्ड को इस बात के लिए हेतुक दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् कि ऐसा निदेश क्यों न दिया जाए, यह निदेश दे सकेगा कि उस विनिश्चय को क्रियान्वित न किया जाए, अथवा उसे ऐसे उपांतरों सहित क्रियान्वित किया जाए जैसा वह विनिर्दिष्ट करे ।
(2) जबकि बोर्ड का कोई विनिश्चय धारा 56 की उपधारा (1) और उपधारा (4) के अधीन उसे निर्दिष्ट किया गया है तब कमान का मुख्य महासमादेशक अधिकारी लिखित आदेश द्वारा-
(क) कार्रवाई के निलंबन का निदेश देने वाले उस आदेश को जो अध्यक्ष द्वारा दिया गया है, रद्द कर सकेगा; या
(ख) उस आदेश की अवधि को उतने समय के लिए बढ़ा सकेगा जितना वह ठीक समझता है;
(ग) इस बात के लिए हेतुक दर्शित करने का कि ऐसा निदेश क्यों न दिया जाए युक्तियुक्त अवसर बोर्ड को देने के पश्चात् यह निदेश दे सकेगा कि वह विनिश्चय क्रियान्वित न किया जाए अथवा वह ऐसे उपांतरों सहित बोर्ड द्वारा क्रियान्वित किया जाए जैसे वह विनिर्दिष्ट करे ।
59. धारा 56 के अधीन किए गए निर्देश के बारे में केन्द्रीय सरकार की शक्ति-जब बोर्ड का कोई विनिश्चय केन्द्रीय सरकार को धारा 56 की उपधारा (2) के अधीन निर्देशित किया गया है तब केन्द्रीय सरकार कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी से परामर्श के पश्चात् लिखित आदेश द्वारा-
(क) यह निदेश दे सकेगी कि उस विनिश्चय पर कोई कार्रवाई न की जाए, या
(ख) यह निदेश दे सकेगी कि वह विनिश्चय या तो उपान्तर के बिना अथवा ऐसे उपांतरों सहित, जो वह विनिर्दिष्ट करे, क्रियान्वित किया जाए ।
60. बोर्ड का अधिक्रमण-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि कोई बोर्ड इस अधिनियम अन्यथा किसी विधि के द्वारा या अधीन लगातार उस पर अधिरोपित कर्तव्यों का पालन करने के लिए सक्षम नहीं है, अथवा पालन करने में लगातार व्यतिक्रम करता रहा है अथवा अपनी शक्तियों का अतिक्रमण या दुरुपयोग करता है, तो केन्द्रीय सरकार उसके कारणों के कथन सहित राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, यथास्थिति, यह घोषित कर सकेगी कि वह बोर्ड सक्षम नहीं है अथवा वह व्यतिक्रम करता रहा है या उसने अपनी शक्तियों का अतिक्रमण या दुरुपयोग किया है तथा उसे ऐसी अवधि के लिए अतिष्ठित कर सकेगी जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए :
परन्तु कोई भी बोर्ड तब तक अतिष्ठित न किया जाएगा जब तक कि अतिष्ठित किए जाने के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उसे युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
(2) जब कोई बोर्ड उपधारा (1) के अधीन आदेश द्वारा अतिष्ठित किया गया है तब-
(क) बोर्ड के सभी सदस्य अपने पद उस तारीख को, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए किन्तु खंड (ग) के अधीन निर्वाचन या नामर्देशन के लिए अपनी पात्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, रिक्त कर देंगे;
(ख) बोर्ड के अधिक्रमण के दौरान उन सभी शक्तियों का प्रयोग और उन कर्तव्यों का पालन, जो इस अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन बोर्ड को प्रदत्त की गई हैं और बोर्ड पर अधिरोपित किए गए हैं, स्टेशन समादेशक अधिकारी या ऐसे अधिकारी द्वारा जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत किया जाए ऐसे प्रतिबंध पर, यदि कोई हो, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विहित करे, किया जाएगा; तथा
(ग) अधिक्रमण की अवधि के अवसान के पूर्व बोर्ड के पुनर्गठन के प्रयोजन के लिए निर्वाचन किए जाएंगे और नामनिर्देशन कर दिए जाएंगे ।
कार्यवाहियों की विधिमान्यता
61. कार्यवाहियों आदि की विधिमान्यता-(1) बोर्ड या बोर्ड की किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही बोर्ड या समिति में किसी रिक्ति के विद्यमान होने के कारण ही अविधिमान्य न होगी ।
(2) बोर्ड या ऐसी किसी समिति के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति के निर्वाचन, नामनिर्देशन या नियुक्ति में किसी निरर्हता या त्रुटि से बोर्ड या समिति का कोई कार्य या कार्यवाही उस दशा में दूषित नहीं होगी जिसमें कि उस समय, जब कार्य किया जा रहा है या कार्यवाही की जा रही है, उपस्थित व्यक्तियों में से अधिकांश व्यक्ति उसके सम्यक् रूप से अर्हित सदस्य थे ।
(3) ऐसा कोई दस्तावेज या कार्यवृत्त, जो बोर्ड, या बोर्ड की किसी समिति की कार्यवाहियों का अभिलेख होना तात्पर्यित है, यदि ऐसी कार्यवाहियों के अभिलेख बनाने और उसे हस्ताक्षरित करने के लिए विहित रीति में सारवान् रूप से बनाया गया है या हस्ताक्षरित किया गया है, तो यथास्थति, किसी सम्यक्तः रूप से गठित बोर्ड या समिति, जिसके सभी सदस्य सम्यक्तः अर्हित थे, द्वारा सम्यक्तः बुलाए गए, किए गए अधिवेशन कार्यवाहियों का सही उल्लेख समझा जाएगा ।
अध्याय 4
बोर्ड के कर्तव्य और वैवेकिक कृत्य
62. बोर्ड के कर्तव्य-प्रत्येक बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि जहां तक उसके व्ययनाधीन निधियां अनुज्ञात करें, छावनी के भीतर निम्नलिखित के लिए युक्तियुक्त उपबन्ध करे-
(i) पथों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी करना;
(ii) पथों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जल छिड़कना;
(iii) पथों, सार्वजनिक स्थानों और प्रणालों को साफ करना, न्यूसेन्स खत्म करना तथा अनिष्टकर उद्भिवर्ग हटाना;
(iv) क्लेशकर, खतरनाक या घृणाजनक व्यापार, उपजीविका और व्यवसाय विनियमित करना;
(v) पथों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से अवांछनीय बाधाओं और निकले हुए भागों को लोक सुरक्षा, स्वास्थ्य या सुविधा के आधार पर हटाना;
(vi) खतरनाक भवनों और स्थानों को सुरक्षित करना या हटाना;
(vii) मृतकों की अन्तिम क्रिया के लिए स्थान अर्जित करना, बनाए रखना, परिवर्तन करना और विनियमित करना;
(viii) पथों, पुलियाओं, पुलों, काजवेओं, बाजारों, वधशालाओं, शौचालयों, संडासघरों, मूत्रालयों, प्रणालों, जल निकासी संकर्मों और मलवाही संकर्मों को निर्मित करना, परिवर्तित करना और बनाए रखना और उनके उपयोग को विनियमित करना;
(ix) सड़क के किनारे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर वृक्षों को लगाना और उनका अनुरक्षण करना;
(x) पेयजल के पर्याप्त प्रदाय का प्रबंध या इंतजाम करना जहां ऐसा प्रदाय विद्यमान नहीं है, मानव उपभोग के लिए प्रयोग में आने वाले जल को प्रदूषित होने से निवारण के लिए व्यवस्था करना तथा प्रदूषित जल के ऐसे प्रयोग का निवारण करना;
(xi) जीवन और मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण;
(xii) खतरनाक रोगों के निवारण और उन्हें फैलने से रोकना, उक्त उद्देश्यों के लिए लोक टीकाकरण और इनोकुलेशन के लिए कोई पद्धति स्थापित करना और उसे बनाए रखना ।
(xiii) सार्वजनिक अस्पताल, प्रसूति और बाल कल्याण गृह और औषधालय स्थापित करना और उन्हें बनाए रखना और उनको सहायता देना तथा सर्वसाधारण को चिकित्सीय सहायता के लिए उपबन्ध करना;
(xiv) प्राथमिक पाठशालाएं स्थापित करना और बनाए रखना या उन्हें सहायता देना;
(xv) अग्नि शमन में सहायता करना और आग लगने पर जीवन और सम्पत्ति की संरक्षा करना;
(xvi) बोर्ड में निहित या बोर्ड के प्रबन्ध के लिए उसे सौंपी गई सम्पत्ति का मूल्य बनाए रखना और उसमें अभिवृद्धि करना;
(xvii) सिविल रक्षा सेवाएं स्थापित करना और उन्हें बनाए रखना;
(xviii) नगर योजना स्कीमों को तैयार करना और उन्हें कार्यान्वित करना;
(xix) आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना और उन्हें कार्यान्वित करना;
(xx) पथों और परिसरों का नामांकन और संख्यांकन करना;
(xxi) भवन परिनिर्मित या पुनः परिनिर्मित करने की अनुज्ञा देना या अनुज्ञा देने से इंकार करना;
(xxii) सांस्कृतिक और खेलकूद क्रियाकलापों का आयोजन करना, संवर्धन करना या उन्हें सहायता देना;
(xxiii) स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाना और उसके संबंध में व्यय उपगत करना;
(xxiv) इस अधिनियम या अन्य तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के द्वारा या उसके अधीन उस पर अधिरोपित किसी अन्य बाध्यता को पूरा करना ।
63. सम्पत्ति का प्रबन्ध करने की शक्ति-बोर्ड, केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिरोपित किन्हीं शर्तों के अधीन रहते हुए, किसी सम्पत्ति का प्रबन्ध, जो उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा उसके प्रबन्ध के लिए सौंपी गई हैं, ऐसी सम्पत्ति से प्रोद्भूत भाटकों और लाभों में हिस्सा बटाने सम्बन्धी ऐसे निबन्धनों पर कर सकेगा जो धारा 346 के अधीन बनाए गए नियम द्वारा अवधारित किए जाएं ।
64. बोर्ड के वैवेकिक कृत्य-(1) बोर्ड छावनी के भीतर निम्नलिखित उपबन्ध कर सकेगा, -
(i) किन्हीं क्षेत्रों में भले ही उनमें पहले से कोई निर्माण हुआ या नहीं, नए पथ बनाना तथा ऐसे पथों से अनुलग्न भवनों के निर्माण और भवनों के अहातों के निर्माण के लिए भूमि का अर्जन करना;
(ii) सार्वजनिक पार्क, बाग, कार्यालयों, डेरियों, स्नानघर, या धोबी घाट, पीने के पानी के स्रोत, तालाब, कुएं और लोक उपयोगिता के अन्य संकर्मों का निर्माण करना, उन्हें स्थापित करना या बनाए रखना;
(iii) अस्वास्थ्यकर परिक्षेत्रों का सुधार;
(iv) प्राथमिक पाठशालाओं की स्थापना करने और उन्हें बनाए रखने से भिन्न उपायों द्वारा शैक्षणिक उद्देश्यों को अग्रसर करना;
(v) उच्चतर विद्यालयों, महाविद्यालयों और व्यावसायिक, वृत्तिक और विशेष शिक्षा स्थापित करना या उन्हें सहायता देना;
(vi) संकर्मों और सन्निर्माणों का निर्माण करना और उन्हें बनाए रखना जिसके अन्तर्गत लोक और प्राइवेट प्रयोजनों के लिए जल पूर्ति के लिए वर्षा के जल का संचयन भी है;
(vii) विद्युत प्रदाय और वितरण का गठन, अनुरक्षण और प्रबंधन जिसके अन्तर्गत अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत का दोहन करके सार्वजनिक और प्राइवेट परिसरों का वितरण भी है;
(viii) जनगणना करना तथा ऐसी जानकारी के लिए पुरस्कार देना जिससे जीवन-मृत्यु सम्बन्धी सांख्यिकी का सही रजिस्ट्रीकरण सुनिश्चित हो सके;
(ix) सर्वेक्षण कराना;
(x) अन्य स्थानीय महामारी, बाढ़, दुर्भिक्ष या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के होने पर राहत कार्य स्थापित करके या उन्हें करते रहकर राहत देना;
(xi) क्लेशकर, खतरनाक अथवा घृणोत्पादक व्यापार, आजीविका या व्यवसाय किए जाने के लिए समुचित स्थान अभिप्राप्त करना या अभिप्राप्त करने में सहायता करना;
(xii) मल के व्ययन के लिए फार्म या अन्य स्थान की स्थापना करना और उसका अनुरक्षण करना;
(xiii) ट्राम वे या अन्य लोकोमोटिव साधन तथा विद्युत प्रकाश या विद्युत शक्ति संकर्म का सन्निर्माण, उसके लिए सहायता देना या उनके लिए गारंटी देना;
(xiv) पशु बाड़े स्थापित करना तथा उन्हें बनाए रखना;
(xv) स्टेशन के समादेशक अधिकारी के पूर्व अनुमोदन से नागरिक स्वागत-समारोह के लिए व्यवस्था करना;
(xvi) किसी भी वर्ग के निवासियों के लिए आवासन सुविधा का उपबन्ध करना;
(xvii) प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातत्वीय स्थलों और अवशेषों या छावनी में लोक महत्व के स्थान का संरक्षण और अनुरक्षण करना;
(xviii) बोर्ड के प्रबन्ध के अधीन भूमि संसाधनों को विकसित करना;
(xix) सामूहिक आवासन स्कीमें तैयार करना और उनको क्रियान्वित करना;
(xx) लाभकारी परियोजनाएं स्थापित करना और उनका उत्तरदायित्व लेना;
(xxi) लघु और कुटीर उद्योगों का विकास करना;
(xxii) शहरी शासन और स्थानीय स्वशासन के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करना और अन्य नगरपालिक और विकास प्राधिकारियों को परामर्श देने में सक्षम होना;
(xxiii) धारा 62 में अथवा इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों में विनिर्दिष्ट उपाय से भिन्न ऐसा कोई उपाय करना जिससे छावनी के निवासियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य या सुविधा का संवर्धन होना सम्भाव्य हो ।
(xxiv) पुस्तकालयों, संग्रहालयों, कला दीर्घाओं, वनस्पति या प्राणी संग्रह को स्थापित करना और उन्हें बनाए रखना या उनकी सहायता करना;
(xxv) स्टेडियम, जिमनेजियम, अखाड़ों और क्रीड़ाओं और खेलकूद के लिए स्थानों को स्थापित करना, उन्हें बनाए रखना और उनकी सहायता करना;
(xxvi) थिएटर और सिनेमागृह स्थापित करना;
(xxvii) मेलों और प्रदर्शनियों को आयोजित करना और उनका प्रबन्ध करना;
(xxviii) निम्नलिखित का सन्निर्माण करना और उन्हें बनाए रखना-
(क) विश्राम गृह,
(ख) निर्धन गृह,
(ग) रुग्णावास,
(घ) बाल गृह,
(ङ) बधिर और मूक तथा निःशक्त और विकलांग बालकों के लिए गृह;
(च) दीनहीनों और निःशक्त व्यक्तियों के लिए आश्रय;
(छ) विकृत्तचित्त व्यक्तियों के लिए पागलखाने;
(ज) वृद्धाश्रम;
(झ) कामकाजी महिलाओं के लिए होस्टल;
(xxix) रोगों का पता लगाने या लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा सहायता से संबंधित अनुसंधान के लिए जल, खाद्य और ओषधियों की परीक्षा और विश्लेषण के लिए रासायनिक या जीवाणु विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित करना और उनका प्रबन्ध करना;
(xxx) दीनहीनों और निःशक्त व्यक्तियों को सहायता उपलब्ध करना;
(xxxi) पशु चिकित्सा अस्पतालों को स्थापित करना और उन्हें बनाए रखना;
(xxxii) भाण्डागारों और गोदामों का निर्माण करना और उन्हें बनाए रखना;
(xxxiii) यानों के लिए गैरेज, शेड, स्टैंड तथा अस्तबलों का निर्माण करना और उन्हें बनाए रखना;
(xxxiv) सामुदायिक केन्द्रों और कन्वेंशन केन्द्रों का निर्माण करना और उन्हें बनाए रखना;
(xxxv) लोकप्रिय विषयों पर सेमिनार, कार्यशालाएं, लोक वाद-विवाद और उसी प्रकार के कार्यकलाप करना और नागरिक महत्व के लिए विनियम बनाना ।
स्पष्टीकरण-खंड (xvii) के प्रयोजनों के लिए, -
(क) संरक्षण" से किसी स्थान का उसकी ऐतिहासिक, स्थापत्यकला, सौंदर्य संबंधी या उसके सांस्कृतिक महत्व या पर्यावरण को बनाए रखने के लिए पर्यवेक्षण, प्रबंध और अनुरक्षण अभिप्रेत है और जिसमें रक्षण, सुधार, परिरक्षण, प्रत्यावर्तन, पुनर्निर्माण और अनुकूलन या इन क्रियाकलापों में से एक से अधिक का कोई संयोजन सम्मिलित है और ऐसे स्थान का उपयोग ऐसा है जो सामाजिक के साथ-साथ आर्थिक फायदों को सुनिश्चित करता है;
(ख) प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातत्वीय स्थलों और अवशेषों या लोक महत्व के स्थानों" में भवन, शिल्पतथ्य, संरचना, क्षेत्र या ऐतिहासिक या सौंदर्य संबंधी या शैक्षिक या वैज्ञानिक या सांस्कृतिक या पर्यावरणीय महत्ता के परिक्षेत्र और पर्यावरणीय महत्ता के दृश्यात्मक सौंदर्य की प्राकृतिक आकृतियां सम्मिलित हैं, जो बोर्ड द्वारा घोषित की जाएं ।
(2) बोर्ड या तो छावनी के अन्दर या बाहर ऐसी कोई बात करने के लिए उपबन्ध कर सकेगा जिसके लिए व्यय की बाबत केन्द्रीय सरकार द्वारा या केन्द्रीय सरकार की मंजूरी से बोर्ड द्वारा यह घोषित किया गया है कि वह छावनी निधि या छावनी विकास निधि पर समुचित भार है ।
65. छावनी के बाहर शैक्षिक, स्वास्थ्य संबंधी और अन्य प्रयोजनों के लिए व्यय करने की शक्ति-बोर्ड निधियों की उपलब्धता के अधीन रहते हुए-
(i) किसी छावनी में शैक्षिक उद्देश्य;
(ii) लोक स्वास्थ्य और चिकित्सीय देखभाल के उद्देश्य;
(iii) जल प्रदाय, जल निकास और प्रकाश से संबंधित कार्य;
(iv) पर्यावरण, संरक्षण, सुधार और उसके उन्नयन, के लिए छावनी से बाहर व्यवस्था कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसा करना छावनी के निवासियों के हित में है ।
अध्याय 5
कर और फीस
कराधान का अधिरोपण
66. कराधान की साधारण शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित कर अधिरोपित करेगा-
(क) संपत्ति कर, और
(ख) व्यापार, वृत्तिक उपजीविकाओं और नियोजन पर कर ।
(2) बोर्ड, उपधारा (1) में निर्दिष्ट करों के अतिरिक्त, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए कोई कर अधिरोपित कर सकेगा जो तत्समय प्रवृत्त किसी अधिनियमिति के अधीन उस राज्य की किसी नगरपालिका में अधिरोपित किया जा सकता है जिसमें छावनी अवस्थित है:
परन्तु बोर्ड उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन अधिरोपित करों की दरों को प्रत्येक पांच वर्ष में पुनरीक्षित करेगा:
परन्तु यह और कि बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी कर को उत्सादित नहीं करेगा या केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना बोर्ड के वित्तीय अलाभ के लिए उसमें परिवर्तन नहीं करेगा तथा उपधारा (2) में उल्लिखित कर संविधान के अनुच्छेद 276 के खण्ड (2) द्वारा इस निमित्त विहित अधिकतम सीमा से अधिक नहीं होगा ।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट कर इस अधिनियम के उपबन्धों, उसके अधीन बनाए गए नियमों और उपविधियों के अनुसार अधिरोपित, निर्धारित और संगृहीत किए जाएंगे ।
(4) इस धारा के अधीन अधिरोपित कोई कर राजपत्र में उसकी अधिसूचना की तारीख से या जहां अधिसूचना में इस निमित्त कोई पश्चात्वर्ती तारीख विनिर्दिष्ट है, वहां ऐसी पश्चात्वर्ती तारीख से प्रभावी होगा ।
67. फीस का प्रभारण-बोर्ड, इस अधिनिमय के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित फीसें प्रभारित करेगा, अर्थात्ः-
(क) यानों और पशुओं पर अनुज्ञप्ति फीस;
(ख) समाचारपत्रों में विज्ञापनों से भिन्न विज्ञापनों पर अनुज्ञप्ति फीस;
(ग) सम्पति अभिलेख बनाए रखने से संबंधित फीस;
(घ) भवन निर्माण योजना की मंजूरी के लिए आवेदन के साथ संदेय भवनों पर आदेशिका फीस;
(ङ) यानों के प्रवेश पर अनुज्ञप्ति फीस;
(च) किसी विकास कार्य के निष्पादन द्वारा भूमि के मूल्य में हुई वृद्धि पर सुधार फीस;
(छ) ऐसी अन्य फीस जो बोर्ड विनियम द्वारा विहित करे:
परन्तु इस धारा के खण्ड (छ) के अधीन प्रभारित फीस, बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट सेवा के संबंध में, जिससे फीस संबंधित है, उपगत लागत से कम नहीं होगी ।
68. सम्पत्ति कर के मानदंड-इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, सम्पत्ति कर, छावनी में भूमि और भवनों पर उद्गृहीत किया जाएगा और इसमें भूमि और भवनों के वार्षिक आनुपातिक मूल्य के दस प्रतिशत से कम और तीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा:
परन्तु बोर्ड उस दर को नियत करते समय, जिस पर सम्पत्ति कर किसी वर्ष के दौरान उद्गृहीत किया जाएगा, यह अवधारित करेगा कि भूमि और भवनों या भूमि और भवनों के भागों के संबंध में जिनमें कोई विशिष्ट वर्ग का व्यापार या कारबार चलाया जाता है, उद्गृहीत दर अन्य भूमि और भवनों या अन्य भूमि और भवनों के भागों के संबंध में अवधारित दर से इस प्रकार नियत दर के आधे से अनधिक राशि तक अधिक होगी:
परन्तु यह और कि कर क्रमांकित मापमान पर उद्गृहीत किया जा सकेगा यदि बोर्ड ऐसा अवधारित करे ।
स्पष्टीकरण-जहां किसी भूमि या भवन का कोई भाग कर की किसी उच्चतर दर का दायी है वहां ऐसा भाग केवल नगरपालिक कराधान के प्रयोजन के लिए एक पृथक् सम्पत्ति समझा जाएगा ।
69. प्रारंभिक प्रस्थापनाओं का तैयार किया जाना-जहां धारा 66 के अधीन कर अधिरोपित करने से वाला संकल्प बोर्ड द्वारा पारित कर दिया गया है वहां बोर्ड निम्नलिखित बातें विनिर्दिष्ट करते हुए धारा 319 में विहित रीति से सूचना प्रकाशित करेगा-
(क) वह कर, जिसका अधिरोपण करने की प्रस्थापना है;
(ख) ऐसे व्यक्ति या ऐसे व्यक्तियों के वर्ग, जिन्हें दायी बनाया जाना है और ऐसी सम्पत्ति या अन्य कराधेय वस्तु या परिस्थिति का विवरण जिनकी बाबत उन्हें दायी बनाया जाना है; और
(ग) वह दर जिस पर कर उद्गृहीत किया जाना है ।
70. आक्षेप और उनका निपटारा-(1) छावनी का कोई निवासी धारा 69 के अधीन सूचना के प्रकाशन से तीस दिन के भीतर बोर्ड से सूचना में अन्तर्विष्ट सभी प्रस्थापनाओं या उनमें से किन्हीं पर लिखित रूप से आक्षेप कर सकेगा, और बोर्ड ऐसे आक्षेप पर विचार करेगा तथा उस पर विशेष संकल्प द्वारा आदेश पारित करेगा ।
(2) जब तक बोर्ड धारा 69 के अधीन प्रकाशित सूचना में अन्तर्विष्ट अपनी प्रस्थापनाओं का परित्याग करने का विनिश्चय नहीं करता है, तब तक वह कमान के मुख्य महा समादेशक अधिकारी की मार्फत ऐसी सभी प्रस्थापनाओं को उनके संबंध में प्राप्त आक्षेपों, यदि कोई हों, उन पर अपनी राय और उस राय के अनुसार प्रस्तावित उपांतरणों और उक्त धारा के अधीन प्रकाशित सूचना सहित, केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
71. कर का अधिरोपण-केन्द्रीय सरकार बोर्ड को वह कर या तो मूल रूप में या उस दशा में, जिसमें कि उस पर कोई आक्षेप किया गया है, उस रूप में या किसी ऐसे उपांतरित रूप में, जैसा कि वह ठीक समझे, अधिरोपित करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी ।
72. केन्द्रीय सरकार की बोर्ड को निर्देश जारी कराने की शक्ति-(1) जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि बोर्ड के कर्तव्यों और कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए पर्याप्त वित्तीय उपबंध सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करना आवश्यक है, वहां वह बोर्ड से यह अपेक्षा करते हुए यह निदेश जारी कर सकेगी कि वह छावनी क्षेत्र के भीतर निदेश में विनिर्दिष्ट ऐसा कोई कर अधिरोपित करे जिसके लिए वह इस अधिनियम के अधीन कर अधिरोपित करने के लिए सशक्त है और जो उक्त क्षेत्र में पहले से ही अधिरोपित नहीं है या किसी विद्यमान कर की ऐसी रीति से या ऐसी सीमा विस्तार तक जिसे केन्द्रीय सरकार उचित समझे और बोर्ड, निदेश के अनुसार इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार ऐसा कर तत्काल अधिरोपित करेगा या उसमें वृद्धि करेगा :
परन्तु-
(क) बोर्ड और छावनी क्षेत्र के निवासियों को इस बात का हेतुक दर्शित करने का अवसर दिए बिना कि ऐसा निदेश क्यों नहीं जारी किया जाना चाहिए, ऐसा कोई निदेश जारी नहीं किया जाएगा;
(ख) केन्द्रीय सरकार, ऐसे कर के अधिरोपण या वृद्धि के विरुद्ध ऐसे किसी आक्षेप पर जो बोर्ड या छावनी क्षेत्र का कोई निवासी करे, विचार करेगी;
(ग) बोर्ड के लिए, यह विधिपूर्ण नहीं होगा कि वह किसी ऐसे कर में उपांतरण करे या उसका उत्सादन करे जब ऐसे कर अधिरोपित या उसमें वृद्धि केन्द्रीय सरकार की मंजूरी के बिना की जाती है ।
(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा जारी किए गए किसी निदेश को, ऐसी तारीख से, जो निदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, किसी भी समय रद्द या उपांतरित कर सकेगी और इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख से ही ऐसे कर का अधिरोपण या वृद्धि समाप्त हो जाएगी या तदनुसार उपांतरित हो जाएगी ।
73. वार्षिक आनुपातिक मूल्य" की परिभाषा-इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए वार्षिक आनुपातिक मूल्य" से-
(क) होटलों, कालेजों, स्कूलों, अस्पतालों, कारखानों तथा किन्हीं अन्य इमारतों की दशा में, जिन पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने इस खंड के अधीन कर निर्धारण का विनिश्चय किया है, उस राशि का एक बटा बीसवां भाग अभिप्रेत है जो भवन के निर्माण के प्राक्कलित विद्यमान खर्चे को उससे अनुलग्न भूमि के प्राक्कलित मूल्य में जोड़ कर आई है, और
(ख) उस भवन या भूमि की दशा में, जिस पर खंड (क) के अधीन कर का निर्धारण नहीं किया गया है, वह सकल वार्षिक भाटक अभिप्रेत है जिस पर ऐसे भवन, उसमें के फर्नीचर या मशीनरी का अपवर्जन करके अथवा ऐसी भूमि वास्तव में पट्टे पर दी गई है या जिस पर वहां, जहां कि वह भवन या भूमि पट्टे पर नहीं दी गई है या इतनी राशि पर पट्टे पर उठाई हुई है जिसकी बाबत मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि वह उसके उचित पट्टा मूल्य से कम है, वर्षानुवर्ष उसके पट्टे पर दिए जाने की युक्तियुक्ततः रूप से प्रत्याशा की जा सकती है :
परंतु जहां छावनी बोर्ड के अध्यक्ष की यह राय है कि किसी भवन का पूर्वोक्त रीति से संगणित वार्षिक मूल्य आपवादिक परिस्थितियों के कारण अत्यधिक है वहां छावनी बोर्ड का अध्यक्ष वार्षिक आनुपातिक मूल्य को ऐसी किसी कम रकम पर नियत कर सकेगा जो उसे न्यायसंगत प्रतीत होती है ।
74. करों का भार-(1) कर अधिरोपित करने वाली अधिसूचना में अन्यथा अभिव्यक्ततः उपबंधित के सिवाय प्रत्येक कर, जो भवनों या भूमि या दोनों के वार्षिक आनुपातिक मूल्य के आधार पर निर्धारित किया गया है, उस सम्पत्ति के, जिस पर उक्त कर निर्धारित किया गया है, वास्तविक अधिभोगी से उस दशा में मुख्य रूप से उद्ग्रहणीय होगा जिसमें कि वह उन भवनों या भूमि का स्वामी है या उन्हें सरकार के या बोर्ड की ओर से या उसके दिए गए भवन पट्टे या अन्य पट्टे पर अथवा किसी अन्य व्यक्ति से भवन पट्टे पर धृत किए हुए है ।
(2) किसी अन्य दशा में कर निम्नवत रूप से, -
(क) यदि सम्पत्ति पट्टे पर उठाई हुई है तो पट्टादाता से,
(ख) यदि सम्पत्ति उप-पट्टे पर उठाई हुई है तो वरिष्ठ पट्टादाता से,
(ग) यदि सम्पत्ति पट्टे पर नहीं दी गई है तो उस व्यक्ति से, जिसमें उसे पट्टे पर देने का अधिकार निहित है,
मुख्य रूप से उद्ग्रहणीय होगा ।
(3) किसी ऐसे भवन के, जिसके भागों या फ्लैटों या कमरों या पृथक् कक्षों का स्वामित्व अलग-अलग है या होना तात्पर्यित है, भिन्न स्वामियों का ऐसे स्वामित्व की अवधि के दौरान संदेय ऐसे कर या उसकी किसी किस्त के संदाय के लिए दायित्व, संयुक्त या पृथक् होगा ।
(4) मुख्य रूप से दायी व्यक्ति से ऐसे कर मद्दे शोध्य कोई राशि वसूल न कर सकने पर उन भवनों या भूमि के, जिनकी बाबत वह कर शोध्य है, किसी भाग के अधिभोगी से उस धनराशि का, जो शोध्य है, ऐसा प्रभाग वसूल किया जा सकेगा जिसकी कुल शोध्य रकम से वह अनुपात है, जो ऐसे अधिभोगी द्वारा देय वार्षिक रूप से संदेय भाटक का उक्त पूरे भवन या भूमि की बाबत इस प्रकार संदेय भाटक की संकलित रकम से अथवा अधिप्रमाणित निर्धारित सूची में कथित उसके पट्टा मूल्यों की, यदि कोई हो, संकलित रकम से है ।
(5) कोई अधिभोगी जो ऐसा कोई संदाय करता है जिसके लिए वह इस धारा के अधीन मुख्य रूप से दायी नहीं है, वह तत्प्रतिकूल किसी संविदा के अभाव में इस बात का हकदार होगा कि वह संदाय करने के लिए मुख्य रूप से दायी व्यक्ति द्वारा प्रतिपूर्ति का हकदार होगा तथा यदि वह इस प्रकार हकदार है तो वह इस प्रकार संदत्त रकम की ऐसे व्यक्ति को जो उससे समय-समय पर शोध्य होने वाली किसी भाटक की रकम से कटौती कर सकेगा ।
निर्धारण सूची
75. निर्धारण सूची-जब भवनों या भूमि या दोनों के वार्षिक आनुपातिक मूल्य पर निर्धारित कर अधिरोपित किया जाता है, तब मुख्य कार्यालय अधिकारी, यथास्थिति, छावनी के सभी भवनों या भूमि की या दोनों की कर निर्धारण सूची ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से तैयार कराएगा जो केन्द्रीय सरकार नियम द्वारा विहित करे ।
76. निर्धारण सूची का पुनरीक्षण-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उसी समय, किसी तारीख की सार्वजनिक सूचना जो उसके पश्चात् एक मास से अन्यून की हो, देगा जब वह निर्धारण सूची में प्रविष्ट मूल्यांकन और निर्धारणों पर विचार करने के लिए अग्रसर होगा और सभी मामलों में जिनमें कोई सम्पत्ति प्रथम बार निर्धारित की जाती है या निर्धारण में वृद्धि की जाती है, सम्पत्ति के स्वामी को और उसके पट्टेदार या अधिभोगी को लिखित सूचना देगा ।
(2) मूल्यांकन या कर निर्धारण के बारे में कोई आक्षेप सूचना में नियत तारीख से पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी को लिखित रूप में किया जाएगा तथा उसमें यह कथित होगा कि मूल्यांकन या कर निर्धारण किस बाबत विवादित है तथा ऐसे किए गए सभी आक्षेप मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा उस प्रयोजन के लिए रखे रजिस्टर में अभिलिखित किए जाएंगे ।
(3) आक्षेपों की जांच की जाएगी और उनका अन्वेषण किया जाएगा तथा जिन व्यक्तियों ने वे आक्षेप किए हैं उन्हें इस बात का अवसर दिया जाएगा कि स्वयं उनकी अथवा प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा उनकी सुनवाई मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा की जाए ।
77. निर्धारण सूची का अधिप्रमाणीकरण-(1) जब धारा 76 के अधीन किए गए सभी आक्षेपों का निपटारा कर दिया गया हो और मूल्यांकन और निर्धारण के पुनरीक्षण का कार्य पूरा हो गया हो तब निर्धारण सूची को मुख्य कार्यपालक अधिकारी के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित किया जाएगा और छावनी बोर्ड का अध्यक्ष, उन मामलों के सिवाय, यदि कोई हों, जिनमें संशोधन कर दिए गए हैं, वार्षिक आनुपातिक मूल्य में या उक्त सूची में प्रविष्ट किसी अन्य मामले में कोई विधिमान्य आक्षेप नहीं होगा, अधिप्रमाणित करेगा:
परन्तु जब कभी कमान का मुख्य महा समादेशक अधिकारी या प्रधान निदेशक, इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि निर्धारण सूची या उसमें कोई प्रविष्टि ठीक से तैयार नहीं की गई है और बोर्ड या केन्द्रीय सरकार के हितों के प्रतिकूल है तब वे ऐसे निर्धारण को स्वप्रेरणा से पुनः खोल सकेंगे और ऐसे निदेश जारी कर सकेंगे जो उपयुक्त समझे ।
(2) ऐसी अधिप्रमाणित कर निर्धारण सूची बोर्ड के कार्यालय में निक्षिप्त की जाएगी तथा उसमें समाविष्ट सम्पत्ति के सभी स्वामियों, पट्टेदारों और अधिभोगियों के अथवा ऐसे व्यक्तियों के प्राधिकृत अभिकर्ताओं के लिए वह कार्यालय समय के दौरान प्रभार रहित निरीक्षण के लिए खुली रहेंगी तथा इस बात की लोक सूचना कि वह ऐसे खुली हुई है, तत्काल प्रकाशित की जाएगी ।
78. निर्धारण सूची का साक्ष्यिक महत्व-ऐसे परिवर्तनों के अधीन रहते हुए, जो इस अध्याय के उपबंधों के अधीन निर्धारण सूची में तत्पश्चात् किए जाएं और उसके अधीन की गई किसी अपील के परिणाम के अधीन रहते हुए वे प्रविष्टियां, जो धारा 77 में यथा उपबंधित रूप में अधिप्रमाणित और निक्षिप्त हैं, कर निर्धारण सूची में हैं-
(क) इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी कर के निर्धारण के प्रयोजन के लिए उन सब भवनों और भूमि के वार्षिक मूल्य या अन्य मूल्यांकन का, जिनसे ऐसी प्रविष्टियां क्रमशः संबंधित हैं, और
(ख) भवनों या भूमि पर अधिरोपित किसी कर के प्रयोजनों के लिए ऐसे प्रत्येक कर की रकम का, जो उस वर्ष में उन पर उद्ग्रहणीय है, जिससे ऐसी सूची संबंधित है, निर्णायक साक्ष्य मानी जाएगी ।
79. निर्धारण सूची का संशोधन-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी, छावनी बोर्ड के अध्यक्ष का अनुमोदन अभिप्राप्त करने के पश्चात् किसी समय कर निर्धारण सूची का संशोधन-
(क) ऐसे किसी व्यक्ति का नाम उसमें प्रविष्ट करके या उसे हटाकर जिसका नाम उसमें प्रविष्ट होना चाहिए था या हटा दिया जाना चाहिए था, या
(ख) किसी सम्पत्ति को प्रविष्ट करके या उसे हटाकर जो उसमें प्रविष्ट होनी चाहिए थी या हटा दी जानी चाहिए थी, या
(ग) ऐसी किसी सम्पत्ति पर कर निर्धारण में परिवर्तन करके, जिसका चाहे प्रशासन की ओर से, या निर्धारिती की ओर से, कपट, दुर्घटना या भूल के कारण गलत मूल्यांकन हुआ है या गलत निर्धारण हुआ है, या
(घ) ऐसी किसी सम्पत्ति का पुनर्मूल्यांकन करके अथवा पुनः कर निर्धारण करके जिसका मूल्य बढ़ गया है, या
(ङ) अधिभोगी के द्वारा संदेय कर की दशा में, अधिभोगी का नाम बदलकर, कर सकेगा:
परन्तु कोई भी व्यक्ति, ऐसे किसी संशोधन के कारण, ऐसी किसी अवधि की बाबत किसी कर का संदाय उस वर्ष के प्रारंभ से पूर्व जिसमें निर्धारण किया जाता है किसी अवधि की बाबत किसी कर या कर में वृद्धि का संदाय करने का दायी नहीं होगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई संशोधन करने से पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी संशोधन द्वारा प्रभावित व्यक्ति को एक मास से अन्यून अवधि की सूचना देगा कि यह संशोधन करने की प्रस्थापना है ।
(3) ऐसे संशोधन में हितबद्ध कोई व्यक्ति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी को लिखित रूप में आक्षेप उस सूचना में नियत समय के पूर्व कर सकेगा और उसके समर्थन में उस व्यक्ति को स्वयं या उस व्यक्ति के प्राधिकृत अभिकर्ता को सुनवाई का अवसर अनुज्ञात किया जाएगा ।
80. नई निर्धारण सूची तैयार करना-मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रत्येक तीन वर्ष में कम से कम एक बार नई कर-निर्धारण सूची तैयार करेगा और इस प्रयोजन के लिए धारा 75 से लेकर 79 तक के उपबंध उसी रीति में लागू होंगे जैसे वे प्रथम बार कर-निर्धारण सूची तैयार करने के प्रयोजन के लिए लागू होते हैं ।
81. अन्तरणों की सूचना-(1) जब कभी किसी भवन या भूमि के या ऐसे भवन या ऐसी भूमि पर, जिसका अन्तरण किया गया है, वार्षिक आनुपातिक मूल्य पर कर के संदाय के लिए मुख्य रूप से दायी किसी व्यक्ति का हक, ऐसा व्यक्ति जिसका हक अन्तरित कर दिया गया है और ऐसा व्यक्ति जिसको उसे अन्तरित कर दिया जाता है, ऐसे अन्तरण की लिखत के पश्चात् तीन मास के भीतर या इसके रजिस्ट्रीकरण के पश्चात्, यदि उसे रजिस्ट्रीकृत कर दिया जाता है, या अन्तरण कर दिए जाने के पश्चात्, यदि कोई लिखत निष्पादित नहीं की जाती है तो ऐसे अन्तरण की सूचना मुख्य कार्यपालक अधिकारी को देगा ।
(2) यथा पूर्वोक्त मुख्य रूप से दायी किसी व्यक्ति की मृत्यु की दशा में, वह व्यक्ति, जिसे मृतक का हक न्यागत हुआ है, ऐसे न्यागत की सूचना मृतक की मृत्यु से छह मास के भीतर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को देगा ।
(3) इस धारा के अधीन दी जाने वाली सूचना ऐसे प्ररूप में होगी जो धारा 346 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा अवधारित की जाए और अन्तरिती या वह अन्य व्यक्ति, जिसे हक न्यागत हुआ है, यदि ऐसी अपेक्षा की जाए तो अन्तरण या न्यागत का अंतरण करने का साक्ष्यांकन करने वाला कोई दस्तावेज मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समक्ष पेश करने के लिए आबद्ध होगा ।
(4) प्रत्येक व्यक्ति जो पूर्वोक्त जैसा अन्तरण मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ऐसी सूचना दिए बिना करता है जब तक वह सूचना नहीं दे देता अथवा जब तक वह अन्तरण बोर्ड के रजिस्टरों में अभिलिखित नहीं कर लिया जाता तब तक वैसा प्रत्येक व्यक्ति अन्तरित सम्पत्ति पर निर्धारित सभी करों का संदाय करने का दायी बना रहेगा, किन्तु इस धारा की कोई बात वह उक्त कर के संदाय के लिए अन्तरिती के दायित्व पर प्रभाव डालने वाली नहीं होगी ।
(5) मुख्य कार्यपालक अधिकारी उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अपने को अधिसूचित हक का प्रत्येक अन्तरण या न्यागत कर निर्धारण सूची में तथा बोर्ड के अन्य कर-रजिस्टरों में अभिलिखित करेगा ।
(6) उपधारा (1) से उपधारा (3) में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुपालन में कोई असफलता, जुर्माने से दंडनीय होगी जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा ।
82. भवनों के परिनिर्माण की सूचना-(1) यदि कोई भवन धारा 235 के अर्थान्तर्गत निर्मित या पुनः निर्मित किया जाता है, तो उसका स्वामी उसके पूरा होने की या उसके अधिभोग की तारीख से, जो भी पहले हो, उस तारीख से तीस दिन के भीतर उसकी सूचना कार्यपालक अधिकारी को देगा ।
(2) कोई व्यक्ति उपधारा (1) द्वारा अपेक्षित सूचना न दे सकने पर, जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, यथास्थिति, निर्मित या पुनः निर्मित उक्त भवन पर तीन मास की अवधि लेखे देय कर की रकम के दस गुनी रकम से, इनमें से जो भी अधिक हो, दण्डनीय होगा ।
परिहार और प्रतिदाय
83. भवनों का तोड़ा जाना आदि-यदि कोई भवन पूर्णतः या भागतः तोड़ा जाता है या नष्ट कर दिया जाता है या अन्यथा उसे मूल्य से वंचित कर दिया जाता है, तो बोर्ड उसके वार्षिक आनुपातिक मूल्य पर निर्धारित किसी कर के ऐसे प्रभाग का, जैसा वह ठीक समझता है, परिहार या प्रतिदाय स्वामी या अधिभोगी के लिखित आवेदन पर कर सकेगा किन्तु कोई परिहार या प्रतिदाय ऐसे आवेदन के परिदान से पूर्व दो मास से अधिक से प्रारंभ होने वाली किसी अवधि की बाबत प्रभावी नहीं होगा ।
84. कर का परिहार-किसी छावनी में साठ या उससे अधिक क्रमवर्ती दिनों के लिए कोई भवन या भूमि खाली रह जाती है और उसका कोई भाटक नहीं मिला है, तब मुख्य कार्यपालक अधिकारी उसके वार्षिक आनुपातिक मूल्य पर निर्धारित किसी कर के ऐसे प्रभाग के आधे का, यथास्थिति, परिहार या प्रतिदाय करेगा जो उन दिनों की संख्या के समानुपाती हो जिनके दौरान उक्त भवन या भूमि खाली रही है तथा उसका भाटक नहीं मिला है :
परन्तु ऐसी किसी छावनी में, जिसकी बाबत केन्द्रीय सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह घोषित किया है कि वह पहाड़ी छावनी है या वैसी ही अधिसूचना द्वारा वर्ष के किसी प्रभाग की बाबत यह घोषित किया है कि वह उस छावनी के लिए अनुकूल सीजन है-
(क) जब कोई भवन या भूमि केवल अनुकूल सीजन के दौरान अधिभोग के लिए पट्टे पर दी गई है, किन्तु प्रभारित भाटक सम्पूर्ण वार्षिक भाटक है, तब उस अनुकूल सीजन के बाहर के ऐसे किसी समय की बाबत कोई परिहार या प्रतिदाय इस धारा के अधीन अनुज्ञेय न होगा जिसके दौरान वह भवन या भूमि खाली रह जाती है,
(ख) जब साठ क्रमवर्ती दिनों से अन्यून किसी समय की बाबत, जिसके दौरान ऐसा भवन या भूमि अनुकूल सीजन में खाली रह जाती है और उसके लिए भाटक नहीं मिला है, मुख्य कार्यपालक अधिकारी उसके वार्षिक आनुपातिक मूल्य पर निर्धारित किसी कर के ऐसे प्रभाग के आधे का परिहार या प्रतिदाय करेगा जिसका ऐसे निर्धारित कुल कर से वही अनुपात है जो उन दिनों की संख्या का, जिनकी बाबत वह भवन या भूमि खाली रह जाती है और उसका भाटक नहीं मिलता है, इस अनुकूल सीजन की कुल अवधि से है ।
85. भवनों के ब्यौरे को निर्धारण-सूची में प्रविष्टि की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) कर का आंशिक परिहार या प्रतिदाय अभिप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए, उस भवन का स्वामी, जिसमें पृथक् आवास कक्ष हैं, उस भवन पर कर-निर्धारण के समय मुख्य कार्यपालक अधिकारी से यह अनुरोध कर सकेगा कि वह पूरे भवन के वार्षिक आनुपातिक मूल्य के अतिरिक्त प्रत्येक पृथक् आवास कक्ष के वार्षिक मूल्य का विस्तृत टिप्पण अभिलिखित करते हुए कर-निर्धारण सूची में दर्ज कर दे ।
(2) जब कोई आवास कक्ष, जिसका वार्षिक मूल्य ऐसे पृथक्तः अभिलिखित किया गया है, साठ या अधिक क्रमवर्ती दिनों के लिए खाली रहा है और उसका भाटक नहीं मिला है, तब उस सम्पूर्ण भवन के वार्षिक मूल्य पर निर्धारित किसी कर के ऐसे प्रभाग के आधे का परिहार या प्रतिदाय किया जाएगा जिसका परिहार या प्रतिदाय उस दशा में किया गया होता जिसमें उस आवास कक्ष पर पृथक्तः कर निर्धारित किया गया होता ।
86. उन परिस्थितियों की सूचना का दिया जाना जिनके आधार पर परिहार या प्रतिदाय का दावा किया जाता है-धारा 84 या धारा 85 के अधीन कोई परिहार या प्रतिदाय तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि इस तथ्य की लिखित सूचना कि भवन, भूमि या आवास कक्ष खाली रहा है और उसका भाटक नहीं मिला है, मुख्य कार्यपालक अधिकारी को न दे दी गई हो तथा ऐसी सूचना के परिदान से पन्द्रह दिन से अधिक प्रारम्भ होने वाली किसी अवधि की बाबत कोई परिहार या प्रतिदाय प्रभावी नहीं होगा ।
87. किन भवनों आदि को खाली समझा जाएगा-(1) धारा 84 और धारा 85 के प्रयोजनों के लिए, किसी भी भवन, आवास कक्ष या भूमि की बाबत यह बात कि वह खाली है, उस दशा में न समझी जाएगी, जिसमें कि वह आमोद स्थल अथवा नगरी या देहात के बंगले के रूप में बनाकर रखी गई है और उसकी बाबत यह बात कि उसका भाटक नहीं मिला है, उस दशा में न समझी जाएगी जिसमें कि वह ऐसे अभिधारी को पट्टे पर दी हुई है जिसका उस पर अधिभोग रखने का निरन्तर अधिकार है, भले ही उसका उस पर वास्तविक अधिभोग हो या नहीं ।
(2) उन सब तथ्यों को साबित करने का भार उस व्यक्ति पर होगा जो धारा 83 या धारा 84 या धारा 85 के अधीन अनुतोष का दावा करने का हकदार हो जाता है ।
88. खाली भवन या गृह के प्रत्येक अधिभोग की सूचना का दिया जाना-(1) किसी भवन, आवास, कक्ष या भूमि का स्वामी, जिसकी बाबत धारा 84 या धारा 85 के अधीन कर का परिहार या प्रतिदाय किया गया है, उस भवन, आवास कक्ष पर पुनः लिए गए अधिभोग की सूचना ऐसे पुनः अधिभोग के लिए जाने के पन्द्रह दिन के भीतर देगा ।
(2) ऐसा कोई स्वामी उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित सूचना देने में असफल रहता है, वह जुर्माने से, जो ऐसे भवन, आवास कक्ष या भूमि पर उस अवधि की बाबत जिसके दौरान वह फिर से अधिभोग में रही है, देय कर की रकम की दुगुनी से अन्यून रकम तक का हो सकेगा तथा दो हजार पांच सौ रुपए या उक्त कर की रकम के दस गुने तक का हो सकेगा, इनमें से जो भी अधिक हो, दण्डनीय होगा ।
स्थावर सम्पत्ति पर प्रभार
89. भवनों और भूमि पर कर जिसे उन पर प्रभारित किया जाना है-किसी भवन या भूमि के वार्षिक आनुपातिक मूल्य पर निर्धारित कर, उस भवन या भूमि पर सरकार की शोध्य भू-राजस्व की, यदि कोई हो, पूर्व संदाय के अधीन रहते हुए प्रथम प्रभार होगा ।
चुंगी, सीमा कर और पथ कर
90. आयातित माल, चुंगी, सीमा कर और पथ कर आदि, का निरीक्षण-प्रत्येक व्यक्ति जो छावनी की किसी ऐसी सीमाओं के भीतर, जिसमें चुंगी या सीमा कर या पथ कर उद्गहणीय है, कोई माल, यान या पशु लाता है या प्राप्त करता है, मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत अधिकारी द्वारा यह अपेक्षित किए जाने पर वहां तक जहां तक कि प्रभार्य कर की रकम अभिनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक हो-
(क) उस अधिकारी को ऐसे माल, यान या पशुओं का निरीक्षण, परीक्षण या तौल करने देगा, तथा
(ख) उस अधिकारी को ऐसी कोई जानकारी संसूचित करेगा तथा ऐसा कोई विपत्र, बीजक या वैसे ही स्वरूप की दस्तावेज प्रदर्शित करेगा जो ऐसे व्यक्ति के पास ऐसे माल, यान या पशुओं के सम्बन्ध में है ।
91. अधिग्रहण, आदि करने की शक्ति-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो चुंगी, सीमा कर या पथ कर के संग्रहण के लिए छावनी के भीतर नियत किसी चुंगी, चौकी अथवा किसी अन्य स्थान का अतिक्रमण करके उसके आगे कोई माल, यान या पशु जिनकी बाबत चुंगी, सीमा कर अथवा पथ कर उद्गहणीय है, ले जाएगा या ले जाने का प्रयत्न करेगा और वैसा करके ऐसी चुंगी, सीमा कर अथवा पथ कर के संदाय से बच जाएगा या बचने का प्रयत्न करेगा तथा जो कोई व्यक्ति ऐसे बच जाने या बच जाने के प्रयत्न का दुष्प्रेरण करेगा, वह जुर्माने से, जो या तो ऐसी चुंगी, सीमा कर अथवा पथ कर के मूल्य के दस गुने के बराबर तक का अथवा दो हजार पांच सौ रुपए तक का, इनमें से जो भी अधिक हो, दण्डनीय होगा तथा, यथास्थिति, वह जुर्माना ऐसी चुंगी, सीमा कर अथवा पथ कर के मूल्य से दुगुने से कम न होगा ।
(2) मांग किए जाने पर किसी चुंगी या सीमा कर अथवा पथ कर का संदाय न किए जाने की दशा में, वह अधिकारी जो उसे संगृहीत करने के लिए सशक्त है, ऐसे कोई माल, यान या पशु, जिन पर वह चुंगी, सीमा कर या पथ कर प्रभार्य है या उनका ऐसा कोई भाग या संदाय, जो उस मांग की पूर्ति के लिए पर्याप्त मूल्य का है, अभिगृहीत कर सकेगा और अभिगृहीत वस्तुओं या पशुओं को विनिर्दिष्ट करते हुए रसीद देगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी या बोर्ड का कोई अधिकारी जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्राधिकृत किया गया हो, अभिग्रहण से पांच दिन व्यतीत हो जाने के पश्चात् तथा उस व्यक्ति को लिखित सूचना दिए जाने के पश्चात्, जिसके कब्जे में वे माल, यान या पशु अभिग्रहण के समय थे, उनके विक्रय के लिए समय और स्थान नियत करके ऐसी अभिगृहीत सम्पत्ति को या उसके उतने भाग हो, जो आवश्यक हो, नीलामी द्वारा इस दृष्टि से कि उस मांग की तथा उनके अभिग्रहण, अभिरक्षा और विक्रय के कारण हुए किन्हीं व्ययों की पूर्ति हो जाए तब के सिवाय विक्रय कराएगा जब तक कि मांग की रकम और व्यय उस बीच संदत्त कर दिए गए हों :
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी मामले में यह आदेश दे सकेगा कि क्षयशील प्रकृति की ऐसे कोई वस्तु, जो नुकसान के गम्भीर जोखिम के बिना पांच से अधिक दिनों के लिए नहीं रखी जा सकती या जो ऐसे खर्च के बिना नहीं रखी जा सकती जो चुंगी, सीमा कर या पथ कर की रकम सहित उसके मूल्य से अधिक हो, इतने लघुतर समय के पश्चात् बेच दी जाए जो उस वस्तु के स्वरूप को ध्यान में रखते हुए वह उचित समझे ।
(4) यदि विक्रय प्रारम्भ होने के पूर्व किसी समय वह व्यक्ति जिसकी सम्पत्ति अभिगृहीत की गई है, सभी उपगत व्ययों की रकम तथा चुंगी, सीमा कर अथवा पथ कर की रकम मुख्य कार्यपालक अधिकारी को निविदत्त कर देता है, तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी अभिगृहीत सम्पत्ति को निर्मुक्त कर देगा ।
(5) विक्रय आगमों का अधिशेष, यदि कोई हो, छावनी निधि में जमा किया जाएगा तथा विक्रय के पश्चात् एक वर्ष के भीतर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को आवेदन किए जाने पर उस व्यक्ति को दे दिया जाएगा जिसके कब्जे में वह सम्पत्ति अभिग्रहण के समय थी तथा यदि ऐसा कोई आवेदन नहीं किया जाता तो वह, बोर्ड की सम्पत्ति होगी ।
92. चुंगी, सीमा कर या पथ कर को पट्टे पर देना-मुख्य कार्यपालक अधिकारी के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह बोर्ड की पूर्व मंजूरी से एक वर्ष से अनधिक किसी अवधि के लिए चुंगी, सीमा कर अथवा पथ कर के संग्रहण का पट्टा दे दे तथा पट्टेदार और चुंगी, सीमा कर अथवा पथ कर के प्रबन्ध और संग्रहण के लिए उसके द्वारा नियोजित सभी व्यक्ति उसकी बाबत-
(क) ऐसे किन्हीं आदेशों से आबद्ध होंगे जो उनके मार्गदर्शन के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा दिए जाएं;
(ख) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के अधिकारियों द्वारा या उसके सेवकों द्वारा प्रयोक्तव्य ऐसी शक्तियों से युक्त होंगे जो बोर्ड उन्हें प्रदत्त करे; तथा
(ग) उन्हीं उपचारों के हकदार होंगे और उन्हीं दायित्वों के अधीन होंगे जिनके वे उस दशा में हकदार या अधीन होते जिसमें कि वे, यथास्थिति, चुंगी, सीमा कर या पथ कर के प्रबन्ध और संग्रहण के लिए बोर्ड द्वारा नियोजित होते:
परन्तु कोई वस्तु जिसका करस्थम् किया गया है मुख्य कार्यपालक अधिकारी के आदेशों के अधीन बेचे जाने के सिवाय न बेची जा सकेगी ।
अपीलें
93. निर्धारण के विरुद्ध अपीलें-(1) इस अधिनियम के अधीन किसी कर के निर्धारण या उसके उद्ग्रहण के विरुद्ध अथवा उसके प्रतिदाय से इन्कार करने के विरुद्ध अपील जिला न्यायालय को होगी ।
(2) यदि जिला न्यायालय को, इस धारा के अधीन अपील की सुनवाई में कर संबंधी दायित्व के बारे में या कर निर्धारण के सिद्धांत के बारे में, किसी प्रश्न के संबंध में युक्तियुक्त संदेह है, तो न्यायालय या तो स्वप्रेरणा से या अपीलार्थी के आवेदन पर उस मामले के तथ्यों का तथा उस प्रश्न का जिसकी बाबत शंका है, कथन तैयार करेगा और उस प्रश्न पर अपनी राय सहित उस कथन को उच्च न्यायालय के विनिश्चय के लिए, निर्देशित करेगा ।
(3) कोई निर्देश उपधारा (2) के अधीन किए जाने पर उस मामले में पश्चात्वर्ती कार्यवाहियां, जहां तक हो सके वहां तक, उन नियमों के अनुरूप होंगी जो उच्च न्यायालय को किए जाने वाले निर्देशों के सम्बन्ध में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की प्रथम अनुसूची के आदेश 46 में अंतर्विष्ट है ।
स्पष्टीकरण-इस धारा और धारा 94, धारा 95, धारा 96, धारा 97 और धारा 102 के प्रयोजनों के लिए किसी छावनी के संबंध में, जिला न्यायालय" से ऐसे क्षेत्र पर, जिसमें वह छावनी स्थित है, अधिकारिता रखने वाला आरम्भिक अधिकारिता का प्रधान सिविल न्यायालय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत उस क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाला ऐसा अन्य सिविल न्यायालय है, जिसे उस क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाले उच्च न्यायालय के परामर्श से इस निमित्त केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
94. अपील के खर्चे-प्रत्येक अपील में खर्चों की बाबत आदेश अपील सुनने वाले जिला न्यायालय के विवेकानुसार होगा ।
95. खर्चों की बोर्ड से वसूली-(1) यदि बोर्ड अपीलार्थी को अधिनिर्णीत किसी खर्चे का संदाय आदेश की तारीख के पश्चात् दस दिन के भीतर नहीं करता है, तो खर्चे अधिनिर्णीत करने वाला जिला न्यायालय उस व्यक्ति को, जिसकी अभिरक्षा में छावनी निधि का अतिशेष है, उस रकम का संदाय करने का आदेश दे सकेगा ।
(2) जहां अपीलार्थी, बोर्ड को अधिनिर्णीत खर्चे उनके संदाय आदेश की तारीख के पश्चात् दस दिन के भीतर नहीं करता है, वहां वे बोर्ड द्वारा उसी रीति से वसूल किए जाएंगे जैसे बोर्ड द्वारा धारा 329 के अधीन धनराशि वसूलनीय है ।
96. अपील करने के अधिकार संबंधी शर्तें-इस अध्याय के अधीन कोई अपील तब तक सुनी या अवधारित नहीं की जाएगी जब तक कि-
(क) भवनों या भूमि या दोनों के वार्षिक मूल्य पर निर्धारित कर की दशा में वह अपील धारा 77 के अधीन कर-निर्धारण सूची के अधिप्रमाणन की तारीख के पश्चात् (उसमें सुसंगत प्रविष्टियों की प्रति अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय का अपवर्जन करके) अगले तीस दिन के भीतर अथवा, यथास्थिति, उस तारीख के, जिसको धारा 79 के अधीन संशोधन अन्तिम रूप से किया गया है, तीस दिन के भीतर तथा किसी अन्य कर की दशा में कर-निर्धारण की सूचना अथवा कर-निर्धारण के परिवर्तन की सूचना की तारीख के पश्चात् अगले तीस दिन के भीतर अथवा उस दशा में, जिसमें कि कोई सूचना नहीं दी गई है, उसकी बाबत प्रथम बिल के उपस्थित किए जाने की तारीख के पश्चात् अगले तीस दिन के भीतर लाई गई है :
परन्तु कोई अपील इस धारा द्वारा उसके लिए विहित अवधि के अवसान के पश्चात् उस दशा में ग्रहण की जा सकेगी जिसमें कि अपीलार्थी उस जिला न्यायालय का समाधान कर देता है; जिसके यहां अपील की गई है उस अवधि के भीतर उसे न करने के लिए उसके पास पर्याप्त हेतुक था,
(ख) अपील में विवादग्रस्त कोई रकम, यदि कोई हो, जिसमें निर्धारित कर या शुल्क भी है बोर्ड के कार्यालय में देय तारीख को या इसके पूर्व प्रत्येक वर्ष अपीलार्थी द्वारा तब तक जमा नहीं की जाएगी जब तक कि अपील जिला न्यायाल द्वारा विनश्चित नहीं कर दी जाती है ।
97. अपीलीय आदेशों की अंतिमता-जिला न्यायालय का वह आदेश, जिससे किसी मूल्यांकन या कर-निर्धारण के बारे में अथवा कर-निर्धारण या कराधान सम्बन्धी दायित्व के बारे में आदेश की पुष्टि की गई या उसे अपास्त या उपांतरित किया गया है, अंतिम होगा:
परन्तु जिला न्यायालय के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि आवेदन पर या स्वप्रेरणा से वह ऐसे किसी आदेश का पुनर्विलोकन, जो अपील में उसके द्वारा पारित किया गया है, उस दशा में करे जिसमें कि इस निमित्त आवेदन मूल आदेश की तारीख से तीन मास के भीतर किया गया है ।
करों का संदाय और वसूली
98. करों के संदाय करने का समय और रीति-इस अधिनियम के अधीन अन्यथा अभिव्यक्त उपबन्धित के सिवाय कोई कर, जो इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अधिरोपित किया गया है, उन तारीखों को और ऐसी रीति में, जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोक सूचना द्वारा निदिष्ट करे, संदेय होगा ।
99. शोध्य करों के लिए लोक सूचना-(1) जब कोई कर शोध्य हो गया है तब मुख्य कार्यपालक अधिकारी उस कर और उस अवधि को जिसके लिए संदाय शोध्य हो जाता है, विनिर्दिष्ट करते हुए पृथक् बिल और लोक सूचना जारी कराएगा और किसी स्थानीय समाचरपत्र में प्रकाशित कराएगा ।
(2) कर, उपरोक्त उपधारा (1) के अधीन लोक सूचना के जारी करने की तारीख से संदाय के लिए, शोध्य हो जाएगा ।
(3) किसी व्यक्ति द्वारा किसी बिल का प्राप्त न किया जाना उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित कर के असंदाय का कारण नहीं होगा ।
100. मांग की सूचना-(1) यदि कर की रकम, जिसके लिए लोक सूचना जारी कर दी गई है या कोई बिल पेश कर दिया गया है, यथास्थिति, लोक सूचना के जारी करने या बिल पेश करने के तीस दिन के भीतर बोर्ड को संदत्त नहीं की जाती है, तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी पहली अनुसूची में उपदर्शित प्ररूप में मांग की सूचना उसके संदाय के लिए दायी व्यक्ति पर तामील करवाएगा ।
(2) मांग की प्रत्येक सूचना के लिए, जिसकी तामील मुख्य कार्यपालक अधिकारी इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति पर कराता है, दो सौ रुपए से अनधिक की ऐसी रकम की फीस, जो प्रत्येक मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा नियत की जाए, उक्त व्यक्ति द्वारा संदेय होगी अथवा वसूली के खर्चों में, सम्मिलित की जाएगी ।
101. कर की वसूली-(1) यदि किसी कर के संदाय के लिए दायी कोई व्यक्ति मांग की सूचना की तामील के तीस दिन के भीतर उस रकम का संदाय नहीं करता है जो शोध्य है या उसके संदाय न करने के लिए पर्याप्त हेतुक मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समाधानप्रद रूप में दर्शित कर देता है, तो वसूली के सभी खर्चों सहित ऐसी राशि, दूसरी अनुसूची में दिए हुए प्ररूप में निकाले गए वारंट के अधीन व्यतिक्रमी की जंगम सम्पत्ति के करस्थम् और विक्रय द्वारा या स्थावर संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा वसूल की जा सकेगी :
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसी कोई राशि वसूल नहीं करेगा जिसके दायित्व का परिहार इस अध्याय के अधीन अपील में कर दिया गया है:
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन कुर्क की गई स्थावर संपत्ति का विक्रय, बोर्ड के आदेशों के अधीन ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(2) इस धारा के अधीन निकाला गया प्रत्येक वारंट मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा ।
102. शोध्य करों पर संदेय ब्याज-(1) यदि कोई व्यक्ति, जिस पर धारा 100 के अधीन मांग की सूचना की तामील की गई है, ऐसी सूचना की तामील से तीस दिन के भीतर सूचना में मांगी गई राशि का संदाय नहीं करता है तो वह उस राशि और शोध्य अन्य प्रभारों के अतिरिक्त ब्याज के रूप में यथापूर्वोक्त तीस दिन की अवधि की समाप्ति की तारीख से प्रत्येक संपूर्ण मास के लिए शोध्य राशि के अतिरिक्त शोध्य राशि के एक प्रतिशत का संदाय करेगा ।
(2) ब्याज की रकम उसी रीति से वसूल की जाएगी जिससे कि धारा 324 के अधीन बोर्ड द्वारा धनराशि वसूलनीय है:
परन्तु-
(क) जहां कोई अपील नहीं की गई है, वहां बोर्ड की पूर्व मंजूरी से मुख्य कार्यपालक अधिकारी; और
(ख) किसी अन्य मामले में, धारा 93 के अधीन अपील की सुनवाई करने वाला जिला न्यायालय,
किसी अवधि की बाबत संदेय संपूर्ण ब्याज या उसके किसी भाग का परिहार कर सकेगा ।
103. करस्थम्-(1) बोर्ड के ऐसे किसी अधिकारी के लिए, जिसे धारा 101 के अधीन निकाला गया वारंट संबोधित है, यह विधिपूर्ण होगा कि उसमें जिस व्यक्ति का नाम व्यतिक्रमी के रूप में दिया हुआ है उसकी ऐसी किसी जंगम संपत्ति का अथवा उसके किसी खड़ी इमारती लकड़ी, उसकी उगती फसलों या घास का, छावनी के भीतर जहां कहीं भी पाई जाए, करस्थम् निम्नलिखित शर्तों, अपवादों और छूटों के अधीन रहते हुए कर ले, अर्थात्ः-
(क) निम्नलिखित सम्पत्ति का करस्थम् न किया जाएगा-
(i) व्यतिक्रमी, उसकी पत्नी और बच्चों के पहनने के आवश्यक वस्त्र और बिस्तर;
(ii) शिल्पियों के औजार;
(iii) लेखा बहियां; अथवा
(iv) जब व्यतिक्रमी कृषक है तब उसके खेती के उपकरण, बीज के लिए अनाज और ऐसे पशु, जो व्यतिक्रमी को अपनी आजीविका उपार्जित करने के लिए समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों;
(ख) करस्थम् अत्यधिक नहीं होगा अर्थात् जिस सम्पत्ति का करस्थम् हो गया है वह यथासम्भव उस रकम के बराबर होगी जो वारंट के अधीन वसूल की जानी है तथा यदि ऐसी किसी सम्पत्ति का करस्थम् किया गया है जिसकी बाबत मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि उसका करस्थम् नहीं किया जाना चाहिए था तो वह तत्काल लौटा दी जाएगी ।
(2) करस्थम् के वारंट के निष्पादन का भार जिस व्यक्ति पर डाला गया है वह उस सम्पत्ति की तालिका तत्काल तैयार करेगा जो उसने वारंट के अधीन अभिगृहीत की है तथा तीसरी अनुसूची में दिए हुए प्ररूप में यह लिखित सूचना उसी समय उस व्यक्ति को देगा जिसके कब्जे में वह अभिग्रहण के समय थी कि उक्त सम्पत्ति का उस समय उल्लिखित रूप में विक्रय कर दिया जाएगा ।
104. करस्थम् सम्पत्ति का व्ययन-(1) जब अभिगृहीत सम्पत्ति शीघ्रता और प्राकृतिक रूप से क्षयशील है अथवा जबकि अभिरक्षा में उसे रखने के व्यय वसूल की जाने वाली रकम में जोड़े जाने पर उसके मूल्य से अधिक होने सम्भाव्य हैं, तब मुख्य कार्यपालक अधिकारी उस व्यक्ति को, जिसके कब्जे में वह सम्पत्ति अभिग्रहण के समय थी, यह सूचना देगा कि वह सम्पत्ति तुरंत बेच दी जाएगी तथा उसका तद्नुसार लोक नीलामी द्वारा तब के सिवाय विक्रय कर देगा जब वारंट में उल्लिखित रकम तत्काल दे दी गई है ।
(2) यदि वारंट मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा इस बीच निलंबित नहीं कर दिया गया है या प्रभावहीन नहीं किया गया है, तो अभिगृहीत सम्पत्ति का मुख्य कार्यपालक अधिकारी के आदेश से लोक नीलामी द्वारा उस अवधि के अवसान के पश्चात् विक्रय कर दिया जाएगा जो धारा 103 की उपधारा (2) के अधीन तामील की गई सूचना में दी हुई है ।
(3) इस अध्याय के अधीन किए गए प्रत्येक करस्थम् के लिए दो सौ रुपए से अनधिक इतनी रकम की फीस, जितनी प्रत्येक मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा नियत की जाए, प्रभारित की जाएगी तथा उक्त फीस वसूली के खर्चों में सम्मिलित की जाएगी ।
105. स्थावर संपत्ति की कुर्की और विक्रय-(1) जब किसी स्थावर संपत्ति की कुर्की और उसके विक्रय के लिए वारंट जारी किया जाता है, तब कुर्की का आदेश व्यतिक्रमी को, संपत्ति को किसी भी प्रकार से अन्तरित या भारित करने से और सभी व्यक्तियों को, ऐसे अन्तरण या भार से फायदा लेने से प्रतिषिद्ध करते हुए और यह घोषित करते हुए किया जाएगा कि ऐसी संपत्ति बेच दी जाएगी जब तक कि शोध्य कर का उसके वसूल किए जाने में हुए खर्चों सहित, कुर्की की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर बोर्ड के कार्यालय में संदाय नहीं कर दिया जाता है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी आदेश को ऐसी संपत्ति के पार्श्व में सहज-दृश्य स्थान पर चिपकाकर और उसे किसी ऐसे क्षेत्र में परिचालित समाचारपत्र में, जिसमें संपत्ति अवस्थित है, प्रकाशित करके या किसी अन्य उपाय या ढंग से प्रदर्शित किया जाएगा जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा समुचित समझा जाए ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना, कुर्क की गई संपत्ति का किया गया कोई अन्तरण या उस पर प्रभार या उसमें कोई हित कुर्की के अधीन प्रवर्तनीय बोर्ड के सभी दावों के विरुद्ध शून्य होगा ।
(4) जहां बोर्ड को शोध्य कोई राशि, संपत्ति के विक्रय में बोर्ड द्वारा उपगत खर्च सहित, जिसके अंतर्गत समाचारपत्र में सूचना का प्रकाशन भी है और क्रेता को संदाय के लिए क्रय धन के पांच प्रतिशत के बराबर की राशि व्यतिक्रमी द्वारा, उपधारा (5) के अधीन विक्रय की पुष्टि के पूर्व, संदत्त कर दी जाती है, वहां स्थावर संपत्ति की कुर्की को, यदि कोई है, हटा दिया गया समझा जाएगा ।
(5) यथा पूर्वोक्त नीलामी द्वारा संपत्ति के विक्रय के पश्चात् मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा इसकी लिखित रूप में पुष्टि कर दी जाएगी जो क्रेता के रूप में घोषित व्यक्ति के कब्जे में संपत्ति को देगा और उसे इस प्रभाव का एक प्रमाणपत्र भी देगा कि उसने उस संपत्ति का क्रय किया है जिसके संबंध में प्रमाणपत्र निर्दिष्ट है ।
(6) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के संबंध में नियम बना सकेगी, अर्थात्ः-
(क) स्थावर संपत्ति की कुर्की और विक्रय के लिए वारंट के निष्पादन की रीति को विनियमित करना;
(ख) शोध्य कर की वसूली के खर्चों में सम्मिलित की जाने वाली स्थावर संपत्ति की कुर्की और विक्रय के लिए फीस का प्रभारण;
(ग) इस धारा के अधीन वारंट के निष्पादन में कुर्क की गई संपत्ति के संबंध में किसी कर के संदाय के लिए दायी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी दावे का संक्षिप्त अवधारण करना ।
106. छावनी छोड़ने वाले व्यक्ति से वसूली और अधिशेष विक्रय आगमों, यदि कोई हों, का प्रतिदाय-(1) यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति जिससे कोई राशि शोध्य है या किसी कर के मद्दे शोध्य होने वाली है छावनी को छोड़कर जाने वाला है, तो वह इस प्रकार शोध्य राशि या शोध्य होने वाली राशि का ऐसे व्यक्ति द्वारा तत्काल संदाय करने का निदेश दे सकेगा और ऐसे व्यक्ति पर उसकी मांग की सूचना की तामील करा सकेगा ।
(2) यदि ऐसी सूचना की तामील पर ऐसा व्यक्ति ऐसे शोध्य या ऐसे शोध्य होने वाली राशि का तत्काल संदाय नहीं करता है, तो वह रकम इस अध्याय में इसमें इसके पूर्व उपबन्धित रीति से जंगम संपत्ति के करस्थम् और विक्रय या स्थावर संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा उद्ग्रहणीय होगी और ऐसे करस्थम् और विक्रय या कुर्की और विक्रय का वारंट अविलम्ब जारी और निष्पादित किया जा सकेगा ।
(3) धारा 104, धारा 105 और इस धारा से उद्भूत आगमों का अधिशेष, यदि कोई हो, संपत्ति के विक्रय के ठीक पश्चात् छावनी निधि में जमा किया जाएगा और ऐसे जमा की सूचना ऐसे व्यक्ति जिसकी संपत्ति का विक्रय किया गया है या उसके विधिक प्रतिनिधि को तुरंत दी जाएगी, और यदि ऐसी धनराशि का, सूचना की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर दावा किया जाता है तो उक्त व्यक्ति या उसके प्रतिनिधि को उसका प्रतिसंदाय किया जाएगा ।
(4) विक्रय आगमों के अधिशेष जो यथा उपर्युक्त एक वर्ष की अवधि के भीतर अदावाकृत, विक्रय आगमों का कोई अधिशेष बोर्ड की संपत्ति होगा ।
107. वसूली के लिए वाद संस्थित करने की शक्ति-इस अध्याय में इसमें इसके पूर्व उपबन्धित रीति से जंगम संपत्ति के करस्थम् और विक्रय या स्थावर संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा किसी व्यतिक्रमी के विरुद्ध कार्यवाही करने के स्थान पर या उसके पश्चात् व्यतिक्रमी के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही असफल रहने पर या किसी आंशिक सफलता के कारण, यथास्थिति, ऐसी किसी शोध्य राशि की या किसी शोध्य राशि के अतिशेष की, जो ऐसे व्यतिक्रमी से शोध्य है, उससे कर की बाबत वसूली सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय में वाद द्वारा की जा सकेगी ।
कराधान आदि से संबंधित विशेष उपबंध
108. बोर्ड का कराधान प्रयोजनों के लिए नगरपालिका होना-बोर्ड को, नगरपालिका कराधान अधिनियम, 1881 (1881 का 11) के अनुसार कराधान के प्रयोजनों के लिए नगरपालिका समिति समझा जाएगा ।
109. केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा सेवा प्रभारों के रूप में किसी बोर्ड को किए जाने वाले संदाय-यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, बोर्ड को किसी छावनी में एकीकृत नगरपालिक सेवा उपलब्ध कराने या विकास कार्य के लिए वार्षिक रूप से सेवा प्रभार संदत्त करेगी, जहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धान्तों पर आधारित बोर्ड द्वारा तय की गई केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की संपत्तियां अवस्थित हैं ।
110. कतिपय मामलों में सफाई के लिए विशेष उपबंध करने की शक्ति-बोर्ड किसी ऐसे कारखाने, होटल, क्लब या भवनों के समूहों या भूमि के लिए जो किसी एक प्रयोजन के लिए और एक ही प्रबंधन के अधीन उपयोग किए जाते हैं, सफाई के लिए विशेष उपबंध कर सकेगा तथा उसके लिए विशेष दर तथा उसके कालिक संदाय के लिए तारीखें और अन्य ऐसी शर्तें नियत कर सकेगा, जो ऐसे कारखाने, होटल, क्लब, भवनों के समूह या भूमि की बाबत सफाई या झाडूबुहारु कर के संदाय के लिए दायी व्यक्ति से लिखित करार द्वारा अवधारित की जाएगी :
परंतु उस रकम को नियत करने में, उस संभाव्य खर्च का समुचित ध्यान रखा जाएगा जो की जाने वाली सेवाओं के लिए बोर्ड का होगा ।
111. भवनों की दशा में छूट-(1) जब धारा 110 के अनुसार बोर्ड ने किसी कारखाने की, होटल की, क्लब की, या भवनों के समूहों या भूमि की सफाई के लिए विशेष दर नियत की है तब ऐसे परिसरों को छावनी में अधिरोपित सफाई या झाडूबुहारु कर की अदायगी से छूट दी जाएगी ।
(2) निम्नलिखित भवनों और भूमियों की संपत्ति पर किसी कर से, जो बोर्ड द्वारा दी जाने वाली विशिष्ट सेवाओं के खर्चों की पूर्ति के लिए अधिरोपित कर से भिन्न है, छूट मिली हुई होगी, अर्थात्ः-
(क) सार्वजानिक पूजा के लिए अलग रखे गए तथा या तो वास्तव में ऐसे उपयोग में लाए गए हैं या किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं किया गया है और बिना किसी आय प्राप्त के जो भी हो, निःशुल्क सेवा की है;
(ख) शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए, लोक पुस्तकालयों के लिए, खेल के मैदानों के लिए और धर्मशालाओं के लिए उपयोग में लाए जा रहे भवन जो जनता के लिए खुले हैं और जिनसे कोई आय नहीं होती;
(ग) खैराती अभिदायों से पूर्णतः पोषित अस्पताल और औषधालय;
(घ) श्मशान और कब्रिस्तान, जो सरकार की या बोर्ड की संपत्ति नहीं हैं किन्तु इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन नियंत्रित होते हैं;
(ङ) किसी बोर्ड में निहित भवन और भूमियां; तथा
(च) ऐसा कोई भवन या भूमि या ऐसे भवन या भूमि का भाग, जो सरकार की सम्पत्ति है ।
112. छूट देने की साधारण शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी कर की अदायगी से किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को अथवा किसी संपत्ति या माल को या किसी वर्ग की संपत्ति या माल को पूर्णतः या भागतः छूट दे सकेगी ।
113. गरीब व्यक्तियों को छूट-बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी कर की अथवा किसी कर के किसी प्रभाग की अदायगी से एक समय पर एक वर्ष से अनधिक कालावधि के लिए छूट ऐसे किसी व्यक्ति को दे सकेगा जिसकी बाबत उसकी यह राय है कि गरीबी के कारण वह उसे देने में असमर्थ है ।
114. समझौता-(1) बोर्ड, मुख्य महा समादेशक अधिकारी, कमान की पूर्व मंजूरी से किसी व्यक्ति को किसी कर के लिए समझौता करने की अनुज्ञा दे सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कर के समझौते के कारण शोध्य हर राशि ऐसी वसूली योग्य होगी मानो वह कर हो ।
115. वसूल न किए जा सकने वाले ऋण-बोर्ड किसी कर या रेट लेखे शोध्य कोई राशि अथवा किसी कर या रेट की वसूली के खर्चों की राशि उस दशा में अपलिखित कर सकेगा जिसमें कि उसकी यह राय है कि ऐसी राशि की वसूली नहीं की जा सकती:
परन्तु जहां किसी एक व्यक्ति के बारे में अपलिखित राशि" दो हजार पांच सौ रुपए से अधिक है वहां कमान का मुख्य महा-समादेशक अधिकारी की मंजूरी पहले अभिप्राप्त की जाएगी ।
116. दायित्व प्रकट करने की बाध्यता-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी के किसी निवासी से लिखित सूचना द्वारा यह मांग कर सकेगा कि वह निवासी ऐसी जानकारी दे जो यह अभिनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक हो कि-
(क) क्या ऐसा निवासी इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी कर का संदाय करने के लिए दायी है या उसने उसका सही-सही संदाय कर दिया है;
(ख) किस रकम पर उसकी बाबत कर-निर्धारण किया जाना चाहिए; अथवा
(ग) उस भवन या भूमि का वार्षिक मूल्य क्या है जो उसके दखल में है तथा उसके स्वामी या पट्टेदार का नाम और पता क्या है ।
(2) यदि कोई व्यक्ति जानकारी देने की मांग उपधारा (1) के अधीन अपने से किए जाने पर वह जानकारी मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट कालावधि के अंदर देने में उपेक्षा करेगा अथवा ऐसी जानकारी देगा जो उसके सर्वोत्तम ज्ञान या विश्वास के अनुसार सही नहीं है तो वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा तथा कर लेखे ऐसी रकम का कर-निर्धारण किए जाने के दायित्व के अधीन भी होगा जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी ठीक समझे तथा ऐसा किया गया कर-निर्धारण इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए अन्तिम होगा ।
117. अतात्विक गलती से दायित्व पर प्रभाव न पड़ना-ऐसे किसी व्यक्ति के नाम में, जो कर या फीस देने के लिए दायी है, अथवा किसी संपत्ति या वस्तु के विवरण में किसी भूल के कारण ही, अथवा किसी निर्धारित कर, प्रभार या मांग की रकम में किसी भूल के कारण ही न तो कोई अधिक्षेप किसी भी कर निर्धारण पर तथा किसी कर या फीस लेखे किसी प्रभार या मांग पर उस दशा में अधिरोपित किया जाएगा और न उस पर कोई प्रभाव उस दशा में पड़ेगा जिसमें कि इस अधिनियम में तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों और उपविधियों में अन्तर्विष्ट निदेशों का सारतः और प्रभावी रूप से अनुपालन किया गया है, किन्तु जो कोई व्यक्ति किसी ऐसी भूल के कारण कोई विशेष नुकसान उठाता है तो वह उसके लिए ऐसे प्रतिकर की वसूली करने के लिए हकदार होगा, जो बोर्ड विनिश्चित करे ।
118. तत्वहीन त्रुटि के कारण करस्थम् का अविधिमान्य न होना-इस अध्याय के अधीन किया गया कोई करस्थम् या की गई कोई कुर्की अविधिपूर्ण, उसे करने वाला कोई व्यक्ति अतिचारी केवल इस कारण नहीं समझा जाएगा कि मांग की सूचना, करस्थम् या कुर्की या विक्रय के वारंट में अथवा उससे संबंधित अन्य कार्यवाही में कोई प्रारूपिक त्रुटि है और कोई व्यक्ति ऐसा उनके द्वारा बाद में की गई किसी अनियमितता के कारण प्रारम्भ से अतिचारी समझा जाएगा, किन्तु ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी ऐसी अनियमितता के कारण कोई विशेष नुकसान उठाता है, उसके लिए ऐसा प्रतिकर वसूल करने का हकदार होगा जो बोर्ड विनिश्चित करे ।
अध्याय 6
छावनी निधि और सम्पत्ति
छावनी निधि और छावनी विकास निधि
119. छावनी निधि और छावनी विकास निधि-(1) प्रत्येक छावनी के लिए एक छावनी निधि स्थापित की जाएगी तथा निम्नलिखित राशियां उसमें जमा की जांएगी, अर्थात्ः-
(क) छावनी अधिनियम, 1924 (1924 का 2) के अधीन छावनी के लिए स्थापित छावनी निधि का अतिशेष, यदि कोई हो;
(ख) बोर्ड के द्वारा या निमित्त प्राप्त सब धनराशियां ।
(2) प्रत्येक छावनी के लिए एक छावनी विकास निधि स्थापित की जाएगी और निम्नलिखित राशियां उसमें जमा की जाएंगी, अर्थात्ः-
(i) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार से किसी विनिर्दिष्ट स्कीम के कार्यान्वयन या किसी विनिर्दिष्ट परियोजना के निष्पादन के लिए अभिदान, अनुदान, सहायकी या किसी अन्य रूप में प्राप्त कोई राशि;
(ii) किसी व्यष्टि या व्यष्टियों के संगम से दान या निक्षेप के रूप में प्राप्त कोई राशि;
(iii) विनिर्दिष्ट विकास परियोजनाओं के निष्पादन के लिए धारा 121 के अधीन उगाही गई या उधार ली गई कोई राशि ।
120. छावनी निधि और छावनी विकास निधि की अभिरक्षा-(1) छावनी निधि और छावनी विकास निधि पृथक् लेखाओं में रखी जाएगी जो भारतीय स्टेट बैंक या उसके किसी समनुषंगी बैक या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में जिसकी शाखाएं छावनी में या छावनी से संसक्त नगरपालिका क्षेत्र में हैं, रखी जाएंगी ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में-
(i) राष्ट्रीयकृत बैंक" से बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) या बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट तत्स्थानी नया बैंक अभिप्रेत है;
(ii) भारतीय स्टेट बैंक" से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक अभिप्रेत है;
(iii) समनुषंगी बैंक" से भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में परिभाषित समनुषंगी बैंक अभिप्रेत है ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी बोर्ड के अध्यक्ष की पूर्व मंजूरी से छावनी निधि या छावनी विकास निधि के किसी भाग को केन्द्रीय सरकार की प्रतिभूतियों या ऐसी प्रतिभूतियों में जिनके अंतर्गत बैंकों में नियतकालिक निक्षेप भी है, बोर्ड के सर्वोत्तम हित में विनिधान कर सकेगा और ऐसे विनिधानों का व्ययन या उनमें फेरफार उसी स्वरूप की अन्य प्रतिभूतियों में कर सकेगा ।
(3) किसी नियतकालिक निक्षेप से अथवा ऐसी किसी प्रतिभूति से जैसा उपधारा (2) में निर्दिष्ट है अथवा किन्हीं ऐसी प्रतिभूतियों के विक्रय के आगमों से हुई आय, यथास्थिति, छावनी निधि या छावनी विकास निधि में जमा की जाएगी ।
(4) उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन की गई प्रत्येक कार्रवाई बोर्ड के अगले अधिवेशन में रखी जाएगी ।
121. बोर्ड की धन उधार लेने की शक्ति-बोर्ड समय-समय पर इस निमित्त पारित किसी संकल्प के द्वारा किसी अन्य बोर्ड से धन की ऐसी कोई रकम जो इस अधिनियम के अधीन समाविष्ट स्कीमों या परियोजनाओं के लिए अपेक्षित है, पारस्परिक करार किए जाने योग्य निबंधनों पर उधार ले सकेगा ।
संपत्ति
122. संपत्ति-केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए विशेष प्रतिबंध के अधीन रहते हुए इस धारा में इसके पश्चात् विनिर्दिष्ट स्वरूप की सब संपत्ति, जो बोर्ड द्वारा अर्जित की गई है या उपबन्धित है या बनाए रखी जाती है, उस बोर्ड में निहित होगी तथा उस बोर्ड की होगी तथा वह उसके निदेशन, प्रबंध और नियन्त्रण के अधीन होगी, अर्थात्ः-
(क) सभी बाजार, वधशालाएं, खाद और मल डिपो तथा हर किस्म के भवन;
(ख) लोक प्रयोजनों के लिए जल प्रदाय, भण्डारकरण या वितरण के लिए सभी जल संकर्म तथा सब पुल, भवन, इंजिन, सामग्रियां और अन्य चीजें जो उनसे संसक्त या अनुलग्न हैं;
(ग) सभी मल नालियां, प्रणाल, पुलिया और जलधाराएं तथा सभी संकर्म सामग्रियां और चीजें जो उनसे अनुलग्न हैं;
(घ) सभी धूल, गंध, गोबर, राख, कचरा, पशु पदार्थ, गन्दगी और हर प्रकार का कूड़ा तथा पशुओं के मृत शरीर जो बोर्ड द्वारा पथों, गृहों, संडासों, गन्ध नालियों, चहबच्चों से या अन्यत्र से इकट्ठा किया गया या की गई हैं अथवा इस प्रयोजन के लिए बोर्ड द्वारा नियत स्थानों में निक्षिप्त की गई या की गई हैं;
(ङ) सभी लैम्प और लैम्प पोस्ट और साधित्र जो उनसे संसक्त या उनसे अनुलग्न हैं;
(च) सभी भूमि या अन्य सम्पत्ति जो स्थानीय लोक प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा अथवा दान के जरिए, क्रय के जरिए या अन्यथा बोर्ड को अन्तरित हुई हैं;
(छ) सभी पथ तथा उनके सभी खड़ंजे, पत्थर और अन्य सामग्रियां तथा सभी वृक्ष, निर्माण सामग्रियां, उपकरण और वस्तुएं जो पथ पर विद्यमान हैं या उनसे अनुलग्न हैं ।
123. छावनी निधि, छावनी विकास निधि और सम्पत्ति का उपयोजन-छावनी निधि, छावनी विकास निधि और बोर्ड में निहित सब सम्पत्ति उन प्रयोजनों के लिए उपयोजित की जाएगी, भले ही वे अभिव्यक्त या विवक्षित हों, जिनके लिए इस अधिनियम अथवा किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के द्वारा या अधीन बोर्ड को शक्तियों का प्रदान किया गया है अथवा बोर्ड पर कर्तव्य या बाध्यताएं अधिरोपित की गई हैं:
परन्तु बोर्ड छावनी की सीमाओं के बाहर अथवा ऐसी सीमाओं के बाहर किसी संकर्म के निर्माण के लिए भूमि अर्जित करने या भाटक पर लेने के लिए कोई व्यय-
(क) केन्द्रीय सरकार की मंजूरी से, तथा
(ख) ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, जो केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करे, उपगत करने के सिवाय उपगत न करेगा:
परन्तु यह और कि निम्नलिखित दायित्वों और बाध्यताओं को उस क्रम में, जो इसमें इसके पश्चात् दिया हुआ है, अग्रता दी जाएगी, अर्थात्ः-
(क) बोर्ड पर विधितः अधिरोपित अथवा उस द्वारा विधितः प्रतिगृहीत न्यास से उद्भूत दायित्व और बाध्यताएं;
(ख) स्थानीय प्राधिकरण उधार अधिनियम, 1914 (1914 का 9) या इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन उपगत किसी उधार का चुकाया जाना और उसके ब्याज की अदायगी;
(ग) स्थापन प्रभारों के संदाय;
(घ) ऐसी किसी धनराशि के संदाय के लिए, जिसका संदाय किया जाना इस अधिनियम अथवा इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या उपविधि के उपबन्धों द्वारा अभिव्यक्ततः अपेक्षित है ।
124. स्थावर सम्पत्ति का अर्जन-जबकि इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए बोर्ड द्वारा अपेक्षित किसी भूमि का स्थायी या अस्थायी अर्जन संदाय कर के किए जाने में कोई प्रतिबाधा विद्यमान है, तब केन्द्रीय सरकार बोर्ड की सिफारिश पर उसका अर्जन, भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) के उपबन्धों के अधीन करवा सकेगी तथा उस अधिनियम के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर की तथा कार्यवाहियों के सम्बन्ध में सरकार द्वारा उपगत प्रभारों की अदायगी कर देने पर वह भूमि बोर्ड में निहित हो जाएगी ।
125. छावनी निधि, छावनी विकास निधि और सम्पत्ति की बाबत नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम से संगत नियम निम्नलिखित सब बातों या उनमें से किसी का उपबन्ध करने के लिए बना सकेगी, अर्थात्ः-
(क) वे शर्तें, जिन पर कोई सम्पत्ति बोर्डों द्वारा अर्जित की जा सकेगी, अथवा जिन पर वह सम्पत्ति, जो बोर्ड में निहित है, विक्रय, बन्धक, पट्टे, या विनिमय द्वारा या अन्यथा अन्तरित की जा सकेगी; तथा
(ख) छावनी निधि या छावनी विकास निधि या छावनी सम्पत्ति से सम्बन्धित कोई अन्य बात, जिसकी बाबत इस अधिनियम के द्वारा या अधीन कोई भी उपबन्ध नहीं किया गया है या अपर्याप्त उपबन्ध किया गया है तथा केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि उसके लिए उपबन्ध करना आवश्यक है ।
अध्याय 7
संविदाएं
126. संविदाएं किसके द्वारा निष्पादित की जानी है-इस अध्याय के उपबन्धों के अधीन रहते हुए प्रत्येक बोर्ड इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक कोई संविदा करने और उसका पालन करने के लिए सक्षम होगा ।
127. मंजूरी-(1) प्रत्येक संविदा के लिए-
(क) जिसके लिए बजट उपबन्ध विद्यमान नहीं है, अथवा
(ख) जिसमें पचास हजार रुपए से अधिक का मूल्य या रकम अन्तर्वलित है, बोर्ड की मंजूरी अपेक्षित होगी ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट जैसी संविदा से भिन्न प्रत्येक संविदा बोर्ड द्वारा या बोर्ड की ओर से मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा मंजूर की जाएगी ।
128. संविदा का निष्पादन-(1) बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से की गई प्रत्येक ऐसी संविदा, जिसका मूल्य या कीमत पचास हजार रुपए से अधिक है, लिखित रूप में होगी तथा प्रत्येक ऐसी संविदा दो सदस्यों द्वारा जिनमें से अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष एक होगा, हस्ताक्षरित की जाएगी, तथा वह मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित की जाएगी तथा उस पर बोर्ड की सामान्य मुद्रा लगाई जाएगी ।
(2) जहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी बोर्ड की ओर से धारा 127 की उपधारा (2) के अधीन मंजूर की गई संविदा का निष्पादन करता है तो वहां वह, संविदा के निष्पादन पर, बोर्ड को उसके अगले अधिवेशन में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ।
129. अनुचित रूप से की गई संविदाओं का बोर्ड पर आबद्धकर न होना-यदि बोर्ड के द्वारा या उसकी ओर से कोई संविदा इस अध्याय के उपबन्धों के अनुकूल किए जाने से अन्यथा की गई है तो वह बोर्ड पर आबद्धकर न होगी ।
अध्याय 8
स्वच्छता तथा रोगों का निवारण और उपचार
स्वच्छता प्राधिकारी
130. स्वच्छता के लिए उत्तरदायित्व-स्वच्छता के प्रयोजनों के लिए छावनी के उन-उन भागों को स्वच्छ दशा में बनाए रखने के लिए निम्नलिखित अधिकारी उत्तरदायी होंगे, जिनमें से प्रत्येक के लिए वे विनिर्दिष्ट हैं, अर्थात्ः-
(क) छावनी में सेना का समादेशक अधिकारी-वे सब भवन और भूमि जो सेना के प्रयोजनों के लिए अधिभोग या उपयोग में हैं;
(ख) छावनी में नौसेना का समादेशक अधिकारी-वे सब भवन और भूमि जो नौसेना के प्रयोजनों के लिए अधिभोग या उपयोग में हैं;
(ग) छावनी में वायुसेना का समादेशक अधिकारी-वे सब भवन और भूमि जो वायुसेना के प्रयोजनों के लिए अधिभोग या उपयोग में हैं;
(घ) छावनी में स्टेशन का समादेशक अधिकारी-खण्ड (क), खण्ड (ख) और खण्ड (ग) में निर्दिष्ट वे सभी भवन और भूमि जो किसी रक्षा प्रयोजन के लिए अधिभोग या उपयोग में हैं;
(ङ) छावनी के किसी भाग को अधिभोग में रखने वाले किसी सिविल विभाग या रेल प्रशासन का प्रधान, उस विभाग या प्रशासन के प्रधान के रूप में उसके भारसाधन में सभी भवन और भूमि;
(च) छावनी में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के किसी स्थापन या अधिष्ठापन का कोई अध्यक्ष-भवन और भूमि में जो रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के प्रयोजनों के लिए अधिभोग में या उपयोग में हैं;
(छ) पब्लिक सेक्टर उपक्रम का अध्यक्ष-छावनी में ऐसे उपक्रम के भवन और भूमि ।
(ज) मुख्य कार्यपालक अधिकारी-छावनी के सिविल क्षेत्र में भवन और भूमि तथा खंड (क) से खंड (छ) के अंतर्गत न आने वाले अन्य सभी भवन और भूमि ।
131. स्वास्थ्य अधिकारी के साधारण कर्तव्य-(1) स्वास्थ्य अधिकारी स्वच्छता से संबंधित सभी मामलों में बोर्ड का सलाहकार होगा और छावनी के ऊपर साधारण स्वच्छता पर्यवेक्षण करेगा तथा बोर्ड को प्रत्येक मास में कम से कम एक बार आवधिक रूप से सिफारिशों सहित रिपोर्ट करेगा ।
(2) सहायक स्वास्थ्य अधिकारी छावनी में स्वच्छता सम्बन्धी ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो बोर्ड के नियंत्रण के अधीन रहते हुए स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा उसे आबंटित किए गए हैं ।
सफाई और स्वच्छता
132. सार्वजनिक शौचालय, मूत्रालय और सफाई स्थापन-वे सब सार्वजानिक शौचालय और मूत्रालय, जो बोर्ड द्वारा व्यवस्थित या अनुरक्षित किए जाते हैं, इस प्रकार निर्मित किए जाएंगे कि उनमें पुरुष और महिलाओं के लिए पृथक् कक्ष हों और इस प्रकार निर्मित कक्ष निःशक्त व्यक्तियों के लिए पहुंच योग्य होंगे तथा उनमें उनके लिए कोई बाधा नहीं होगी तथा उनमें सब आवश्यक सफाई साधन लगे होंगे और वे नियमित रूप से साफ किए जाएंगे और उचित हालत में रखे जाएंगे ।
133. कूड़ा करकट आदि इकट्ठा करने तथा उसे जमा करने का अधिभोगी का कर्तव्य-(1) किसी भवन या भूमि के अधिभोगी का यह कर्तव्य होगा कि वह-
(क) भवन या भूमि की झाडू-बुहारू के लिए पर्याप्त इन्तजाम करे;
(ख) ऐसे भवन या भूमि से गंदगी, कूडा-करकट और अन्य दुर्गन्धयुक्त पदार्थों को उसमें एकत्रित करने के लिए ऐसे प्रकार के पात्रों का और ऐसी रीति से उपबन्ध करे जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी विहित करे और ऐसे पात्रों को अच्छी हालत में रखे तथा उनकी मरम्मत करवाए;
(ग) धारा 135 की उपधारा (1) के अधीन सभी गन्दगी, कचरे और अन्य दुर्गन्धयुक्त पदार्थों को पात्रों में एकत्रित करवाए और हटवाए तथा उपबन्ध कराए गए या नियत सार्वजनिक पात्रों, डिब्बों या स्थानों में जमा करवाए ।
(2) इस धारा और धारा 134 के प्रयोजनों के लिए झाडू-बुहारू" से संडास, शौचालय, मूत्रालय, प्रणाल, चहबच्चा या ऐसे पदार्थों के लिए अन्य सामान्य पात्र से गंदगी या कूड़े या अन्य दुर्गन्धयुक्त पदार्थ का हटाना अभिप्रेत है ।
134. प्राइवेट सफाई का इंतजाम अपने हाथ में रखने की बोर्ड की शक्ति-(1) किसी भवन या भूमि के अधिभोगी के आवेदन पर या उसकी सहमति से अथवा जहां कि किसी भवन या भूमि का अधिभोगी इस धारा में निर्दिष्ट बातों के लिए प्रबन्ध मुख्य कार्यपालक अधिकारी को समाधानप्रद रूप में करने में असफल रहता है, वहां ऐसी सहमति के बिना तथा अधिभोगी को लिखित सूचना देने के पश्चात् बोर्ड छावनी में के किसी भवन के अन्दर या भूमि की झाडू-बुहारू का काम इतनी कालावधि के लिए जितनी वह ठीक समझता है, ऐसे निबंधनों पर अपने हाथ में ले सकेगा जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी इस निमित्त विनिर्दिष्ट करें ।
(2) जहां कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने इस धारा में निर्दिष्ट कर्तव्यों को अपने हाथ में लिया है वहां ऐसे कर्तव्यों के पालन में हटाई गई सभी वस्तुएं आदि बोर्ड की सम्पत्ति होंगी ।
135. कचरे आदि को जमा करना और उसका व्ययन-(1) प्रत्येक बोर्ड घरेलू कचरे, दुर्गन्धयुक्त पदार्थ आदि मृत पशुओं के लोथों तथा मल के अस्थायी जमा या व्ययन के लिए सार्वजनिक पात्र, डिपो या अन्य स्थान समुचित और सुविधापूर्ण जगहों पर उपबन्धित करेगा या नियत करेगा ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोक सूचना द्वारा उस समय की बाबत, जिस पर, उस रीति की बाबत, जिससे और उन शर्तों की बाबत, जिन पर उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई पदार्थ किसी पथ विशेष से होकर ले जाया जाएगा अथवा निक्षिप्त किया जाएगा अथवा अन्यथा व्ययनित किया जाएगा ।
(3) पात्रों, डिपुओं या स्थानों में जो इस अधिनियम के अधीन उपबन्धित हैं या नियत हैं, निक्षिप्त सब सामग्री बोर्ड की सम्पत्ति होगी ।
136. गन्दगी आदि के लिए चहबच्चे, पात्र-किसी छावनी का मुख्य कार्यपालक अधिकारी लिखित सूचना द्वारा-
(क) छावनी में की किसी भूमि या भवन पर स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी के रूप में नियंत्रण रखने वाले किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति-
(i) उस भूमि या भवन से अनुलग्न किसी चहबच्चे का जिसकी बाबत मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि वह न्यूसेंस है, उपयोग करना बन्द कर दे, अथवा
(ii) उस भूमि या भवन में इकट्ठी हुई गन्दगी या मल के लिए काम में आने वाले किसी पात्र को ऐसी रीति से, जैसी सूचना द्वारा विहित की गई हो, साफ हालत में रखे, अथवा
(iii) प्राइवेट शौचालय, मूत्रालय, हौदी या स्नानघर से किसी पानी अथवा किसी अन्य दुर्गन्धयुक्त पदार्थ का भूमि या भवन से किसी पथ या अन्य सार्वजनिक स्थान में अथवा किसी जलसरणी या ऐसी किसी नाली में, जो उस प्रयोजन के लिए उदिष्ट नहीं है, रिसना या बहना निवारित करे, अथवा
(iv) कोई दुर्गन्धयुक्त पदार्थ या कचरा, जिसे किसी व्यक्ति ने ऐसे भवन या भूमि में इकट्ठा होने दिया है या उसके नीचे या उसमें या उसके ऊपर रहने दिया है, इतने समय के अन्दर तथा ऐसे पात्र या स्थान में, जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, इसलिए संगृहीत और निक्षिप्त करे कि उसे बोर्ड के सफाई स्थापन द्वारा वहां से हटा कर ले जाया जा सके; अथवा
(ख) किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति सार्वजनिक प्रणाल में जाने वाली कोई नाली बनाने या किसी नाली में परिवर्तन करने से प्रतिविरत रहे; अथवा
(ग) ऐसे किसी व्यक्ति से, जिसका नियंत्रण छावनी में की किसी नाली पर है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति उसे इतने समय के अन्दर साफ कर दे, निर्मल कर दे, उसकी मरम्मत कर दे या उसमें परिवर्तन कर दे अथवा अन्यथा उसको अच्छी हालत में रखे जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया है ।
137. तालाब आदि का भरा जाना-(1) जहां कि छावनी में का ऐसा कोई कुआं, तालाब, होज, जलाशय, पात्र, डेजर्ट कूलर या कोई ऐसा अन्य पात्र या अन्य स्थान, जिसमें पानी संगृहीत किया जाता है या इकट्ठा होता है, भले ही वह किसी प्राइवेट अहाते में हो या न हो, ऐसी हालत में है कि वह न्यूसेंस हो जाता है अथवा ऐसी हालत में है, जिसकी बाबत स्वास्थ्य अधिकारी की यह राय है कि यह मच्छरों के प्रजनन का स्थान है या होना सम्भाव्य है, वहां बोर्ड उसके स्वामी पट्टेदार या अधिभोगी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि इतनी कालावधि के अन्दर, जितनी सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हो, यथास्थिति, उस कुएं, होज, जलाशय या पात्र को या तो भर दे या ढक दे, अथवा उस तालाब को भर दे अथवा पानी को वहां से बहा कर निकाल दे या हटा दे ।
(2) बोर्ड, समय-समय पर, बोर्ड के नियंत्रण या प्रबंधन के अधीन सार्वजनिक स्थानों में मच्छरों, कीटों या किन्हीं बैक्टीरिया या वायरल वाहकों की वृद्धि को रोकने के लिए ऐसे उपाय करेगा जो उसकी राय में आवश्यक हों ।
(3) बोर्ड, यदि ठीक समझे, इस धारा की उपधारा (1) और उपधारा (2) में वर्णित कार्यों के निष्पादन में उपगत संपूर्ण व्ययों या उसके किसी भाग को पूरा करेगा ।
138. शौचालयों आदि का उपबन्ध-मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी में के किसी भवन या भूमि के स्वामी या पट्टेदार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह शौचालय, मूत्रालय, चहबच्चा धूलिभाण्ड या गन्दगी, मल या कचरे के लिए अन्य पात्र का अथवा किसी अतिरिक्त शौचालय, मूत्रालय, चहबच्चे या पूर्वोक्त जैसे अन्य पात्र का ऐसी रीति से जो सूचना में विनिर्दिष्ट हो, उपबन्ध करे, जिसकी बाबत उसकी राय में भवन या भूमि के लिए उसका उपबन्ध किया जाना चाहिए ।
139. कारखानों आदि में स्वच्छता-प्रत्येक व्यक्ति, जो छावनी में चाहे सरकार के निमित्त या अन्यथा दस से अधिक कर्मकार या श्रमिकों को नियोजित करता है, तथा प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो छावनी में बाजार, स्कूल, नाट्यशाला या लोक समागम के अन्य स्थान का प्रबन्ध करता है या उस पर नियंत्रण रखता है, उस तथ्य की सूचना मुख्य कार्यपालक अधिकारी को देगा तथा उनमें इतने शौचालय और मूत्रालयों का उपबन्ध करेगा तथा इतने झाडू कशों को नियोजित करेगा जितने कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी ठीक समझता है तथा शौचालयों और मूत्रालयों को साफ-सुथरा और समुचित दशा में रखवाएगा :
परन्तु इस धारा की कोई बात उस कारखाने की दशा में लागू न होगी जिसे कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) लागू है ।
140. प्राइवेट शौचालय-सफाई कर्मचारी नियोजन और शुष्क शौचालय सन्निर्माण प्रतिबंध अधिनियम, 1993 (1993 का 46) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या उसके द्वारा प्राधिकृत बोर्ड का पदाधिकारी लिखित में सूचना देकर, -
(क) छावनी में के किसी प्राइवेट शौचालय या मूत्रालय के स्वामी से या अन्य व्यक्ति से, जिसका उस प्राइवेट शौचालय या मूत्रालय पर नियंत्रण है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि उसे सार्वजनिक उपयोग के लिए काम में न लाया जाए; अथवा
(ख) उस दशा में, जिसमें कि प्राइवेट शौचालयों या मूत्रालयों के निर्माण के लिए कोई नक्शा अनुमोदित कर दिया गया है तथा उसकी प्रतियां आवेदन करने पर निःशुल्क अभिप्राप्त की जा सकती हैं-
(i) ऐसे किसी व्यक्ति से, जो उस प्राइवेट शौचालय या मूत्रालय की मरम्मत कर रहा है या उसे बना रहा है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि जब तक उसका निरीक्षण मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्राधिकृत बोर्ड के किसी पदाधिकारी द्वारा या स्वास्थ्य अधिकारी के निदेशन के अधीन नहीं कर लिया जाता तथा उसकी बाबत उस अधिकारी द्वारा यह अनुमोदित नहीं कर दिया जाता कि वह ऐसी योजना के अनुरूप है, उसे काम में न लाने दे; अथवा
(ii) ऐसे किसी व्यक्ति से, जिसका किसी प्राइवेट शौचालय या मूत्रालय पर नियंत्रण है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि उसे ऐसी योजना के अनुसार पुनः बनाया जाए या परिवर्तित किया जाए; अथवा
(ग) ऐसे प्राइवेट शौचालय या मूत्रालय के स्वामी से या ऐसे अन्य व्यक्ति से, जिसका वैसे शौचालय या मूत्रालय पर नियंत्रण है जिसकी बाबत मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि वह न्यूसेंस है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह शौचालय या मूत्रालय हटा दिया जाए; अथवा
(घ) ऐसे किसी व्यक्ति से, जिसका छावनी में की किसी भूमि या इमारत पर चाहे तो स्वामी के रूप में चाहे पट्टेदार या अधिभोगी के रूप में नियंत्रण है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि-
(i) उस भूमि या भवन के लिए जो कोई शौचालय है उनमें पर्याप्त छत तथा दीवार या बाड़ लगा कर ऐसी आड़ कर दे कि वे पड़ोस में होकर जाने वाले या पड़ोस में रहने वाले व्यक्तियों को नजर न आए,
(ii) उस भूमि या भवन में, जो कोई शौचालय या मूत्रालय है, उन्हें ऐसी रीति से साफ रखे जैसी मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने उस सूचना में विनिर्दिष्ट की हो;
(ङ) ऐसे किसी व्यक्ति से, जो छावनी में किसी नाली का स्वामी है या जिसका वैसी नाली पर नियंत्रण है, यह अपेक्षा करेगा कि वह सूचना की तामील से दस दिन के अन्दर उस पर ऐसा ढक्कन लगा दे जैसा उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो ।
141. कूड़ा करकट संग्रहण करने और ठोस अपशिष्ट के प्रंबध के लिए विशेष उपबंध-(1) किसी छावनी में उत्पन्न सभी ठोस अपशिष्ट सामग्रियां बोर्ड द्वारा हटाई जाएंगी और कंपोस्ट स्थलों या स्वच्छता भूमि स्थलों या इस प्रयोजन के लिए निर्धारित किए गए गड्ढों में लाई जाएंगी ।
(2) बोर्ड छावनी में प्रत्येक घर में कूड़ा करकट और कूड़ेदानों के संग्रहण के लिए स्कीमें बनाएगा और यदि आवश्यक समझे तो संबंधित निवासी कल्याण संगमों या ऐसे अन्य गैर सरकारी संगठनों को इस प्रयोजन के लिए सहबद्ध करेगा ।
(3) बोर्ड यथासंभव यह सुनिश्चित करने के लिए समुचित प्रणाली बनाएगा कि सभी कंपोस्ट योग्य जैव उत्पन्न अपशिष्ट छावनी में पुनःचक्रित किया जाता है और खाद, बायो गैस या किसी अन्य प्रकार की ऊर्जा के लिए उपयोग किया गया है ।
142. अतिभिड़े भवनों को तोड़ देना-(1) जहां बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि छावनी में के भवनों का कोई ब्लाक उन भवनों के एक दूसरे से अत्यन्त भिड़े होने के कारण अथवा पथ के संकरे होने या तंग होने के कारण अथवा पर्याप्त जलनिकास या संवातन के अभाव के अथवा भवनों की सफाई करने की अव्यवहारिकता के कारण अथवा वैसे तद्दृश्य अन्य हेतुक से अस्वास्थ्यकर दशा में है, वहां वह उसका निरीक्षण एक समिति द्वारा करा सकेगा जो-
(क) स्वास्थ्य अधिकारी;
(ख) जिले के सिविल सर्जन, अथवा उस दशा में, जिसमें कि उसकी सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं, सरकार की सेवा में कोई अन्य चिकित्सा अधिकारी,
(ग) कार्यपालक अभियन्ता अथवा कार्यपालक अभियन्ता द्वारा इस निमित्त प्रतिनियुक्त व्यक्ति; तथा
(घ) बोर्ड के दो गैर सरकारी सदस्य, से मिलकर बनेगी ।
(2) समिति उस ब्लाक की स्वच्छता सम्बन्धी दशा की बाबत लिखित रिपोर्ट बोर्ड को देगी तथा यदि उसका विचार है कि उसकी हालत ऐसी है कि यह सम्भाव्यता है कि भवन के या पड़ोस के निवासियों के बीमार होने की जोखिम पैदा हो अथवा उससे लोक स्वास्थ्य अन्यथा खतरे में पड़ जाए तो वह कार्यपालक अभियन्ता द्वारा अथवा उस व्यक्ति द्वारा जिसे समिति की सेवा करने के लिए उसके द्वारा प्रतिनियुक्त किया जाए, सत्यापित नक्शे पर स्पष्टतः वे भवन उपदर्शित कर देगी जिनकी बाबत उसकी यह राय है कि ब्लाक की अस्वास्थ्यकर दशा को दूर करने की दृष्टि से उनको पूर्णतः या भागतः तोड़ दिया जाए ।
(3) यदि ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर बोर्ड की यह राय है कि उसमें उपदर्शित सब भवन या उनमें से कोई तोड़ दिया जाना चाहिए तो वह उनके स्वामियों से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे उन्हें तोड़ दें :
परन्तु बोर्ड ऐसे तोड़े गए उन किन्हीं भवनों के स्वामियों को, जो समुचित प्राधिकार के अधीन बनाए गए हों, प्रतिकर देगा:
परन्तु यह और कि यदि बोर्ड का यह विचार है कि उन परिस्थतियों में यह बात करना साम्यापूर्ण होगा तो वह ऐसे तोड़े गए उन किन्हीं भवनों के लिए, जो समुचित प्राधिकार के अधीन नहीं बनाए गए थे, प्रतिकर के रूप में इतनी धनराशि दे सकेगा जितनी वह ठीक समझता है ।
(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए भवनों के अन्तर्गत भवनों से अनुलग्न अहाते की दीवारें और बाड़े भी आते हैं ।
143. आवास गृहों का अति जन संकुलित होना-(1) जहां कि बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि छावनी में के किसी भवन में या भवन के भाग में, जो आवास गृहों के रूप में काम में लाया जा रहा है, इतना अति जन संकुलन है कि उसमें रहने वालों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाए तो वह ऐसी जांच के पश्चात् जैसी वह ठीक समझता है, लिखित सूचना द्वारा, यथास्थिति, उस भवन या उसके उस भाग के स्वामी या अधिभोगी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि एक मास से अन्यून इतने समय के अन्दर जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो, उसके रहने वालों, अभिधारियों या अन्य रहने वालों की संख्या को इतनी संख्या तक घटाकर जितनी सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हो, उस अतिसंकलन को दूर कर दे ।
(2) जो कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन अपने से की गई अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में युक्ति-युक्त हेतुक के बिना असफल रहेगा, वह जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, तथा चालू रहने वाले अपराध की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम दिन के पश्चात् वाले हर दिन के लिए, जिसके दौरान वह असफलता चालू रहती है, दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
144. भवन की मरम्मत या उसमें परिवर्तन करने की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) जहां कि छावनी में का कोई भवन इतनी बुरी तरह बना हुआ है या इतनी जर्जर दशा में है कि उसकी बाबत बोर्ड की यह राय है कि वह अस्वास्थ्यकर दशा में है, वहां बोर्ड उसके स्वामी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह इतने समय के अन्दर, जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया है, ऐसी मरम्मत अथवा उसमें ऐसे परिवर्तन कर दे जैसे बोर्ड उन त्रुटियों को दूर करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक समझता है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निकाली गई प्रत्येक सूचना की प्रति उस भवन पर, जिससे वह सम्बन्धित है, सहजदृश्य रूप में चिपका दी जाएगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन निकाली गई सूचना की बाबत यह बात कि उसका अनुपालन कर दिया गया है उस दशा में समझी जाएगी जिसमें कि उस भवन का स्वामी जिससे वह सम्बन्धित है, उस सूचना द्वारा निर्दिष्ट मरम्मत या परिवर्तन करने के बदले उस भवन को तोड़ देता है ।
145. भूमि या भवन को साफ किए जाने की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) यदि कोई भवन या भूमि चाहे वह किराए पर देने योग्य है या अन्यथा-
(i) अस्वास्थ्यकर, गंदी या अस्वास्थ्यप्रद स्थिति में है; या
(ii) मुख्य कार्यपालक अधिकारी की राय में पड़ौस में रहने वाले व्यक्तियों के लिए कोई न्यूसेंस है; या
(iii) जिससे कंटीली बेलें या झाड़ियां अधिक बढ़ गई हैं और हानिकारक वनस्पति है, तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसे भवन या भूमि के स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी की लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे भवन को ऐसी कालावधि के भीतर, जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, साफ, कराए, उस पर अंदर और बाहर से चूने की सफेदी कराए, उसे स्वच्छ रखे या अन्यथा उचित स्थिति में रखे ।
(2) कोई व्यक्ति जो उपधारा (1) के अधीन जारी की गई सूचना के अनुपालन में असफल रहता है, वह जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा और चालू रहने वाले अपराध की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से जो, प्रथम दिन के पश्चात् वाले हर दिन के लिए, जिसके दौरान वह अपराध चालू रहता है दो सौ पचास रुपए तक का ही हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
146. वायु प्रदूषकों के संबंध में प्रतिषेध-परिसर का कोई स्वामी, अधिभोगी, पट्टेदार या कोई अन्य अधिभोगी वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (1981 का 14) की धारा 17 की उपधारा (1) के खंड (छ) के अधीन अधिकथित मानकों से ऊपर किसी वायु प्रदूषक को अनुज्ञात नहीं करेगा या अनुज्ञात नहीं कराएगा ।
147. यह आदेश देने की शक्ति कि गृह का उपयोग बन्द कर दिया जाए-यदि बोर्ड का समाधान हो जाता है कि छावनी में का कोई भवन या भवन का कोई भाग, जो आवास स्थान के रूप में आशयित है या काम में लाया जाता है, मानव निवास के लिए अनुपयुक्त है तो वह उस भवन के किसी सहजदृश्य भाग पर यह प्रतिषिद्ध करने वाली सूचना लगवा देगा कि उसका स्वामी या अधिभोगी न तो उस भवन को या उस कमरे को मानव निवास के लिए काम में तब तक लाएगा और न तब तक उसे ऐसे काम में लाए जाने की अनुज्ञा देगा, जब तक कि वह बोर्ड का समाधान कर देने वाले रूप में ऐसे उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं कर दिया गया है ।
148. अनिष्टकर वनस्पति का हटाया जाना-कार्यपालक अधिकारी छावनी में की किसी भूमि के स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे किसी घनी या अनिष्टकर वनस्पति को या झाड़झंखाड़ को साफ कर दे और हटा दे जिसकी बाबत उसको यह प्रतीत होता है कि वह स्वास्थ्य के लिए क्षतिकर है अथवा पड़ोस के निवासी व्यक्तियों के लिए क्लेषकर है ।
149. कृषि और सिंचाई-जहां कि बोर्ड की यह राय है कि छावनी में किसी प्रकार की फसल की खेती अथवा उसमें किसी प्रकार के उर्वरक का उपयोग अथवा उसमें की किसी भूमि की विनिर्दिष्ट रीति से सिंचाई से पड़ोस में रहने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य को क्षति होनी सम्भाव्य है, वहां बोर्ड लोक सूचना द्वारा ऐसी तारीख के पश्चात्, जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हो, ऐसी खेती के किए जाने का, ऐसे उपयोग के किए जाने का अथवा ऐसी सिंचाई के किए जाने का प्रतिषेध कर सकेगा अथवा वैसी ही सूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगा कि वह ऐसी शर्तों पर की जाएगी जैसी बोर्ड ठीक समझता है :
परन्तु यदि उस समय, जब इस धारा के अधीन सूचना निकाली गई है, ऐसी कोई भूमि, जिससे वह सम्बन्धित है, खेती के लिए विधिसम्मत रूप से तैयार कर ली गई है या उसमें कोई फसल बो दी गई है अथवा उसमें कोई फसल खड़ी है तो बोर्ड उस दशा में, जिसमें कि वह यह निदेश देता है कि वह सूचना उस तारीख से पहले की तारीख से प्रभावी होगी जिसको वह फसल, यथास्थिति, मामूली तौर से बो दी गई होती या काट ली गई होती, उस भूमि में या फसल में हितबद्ध सब व्यक्तियों को उस हानि के लिए, यदि कोई हो, जो उन्हें उस सूचना का अनुपालन करने के कारण उठानी पड़ी है, प्रतिकर देगा ।
कब्रिस्तान और श्मशान
150. कब्रिस्तान और श्मशानों की बाबत जानकारी मांगने की शक्ति-मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी में के किसी कब्रिस्तान और श्मशान के स्वामी या भारसाधक व्यक्ति से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे स्थान की दशा, प्रबन्ध या अवस्थिति सम्बन्धी ऐसी जानकारी दे जैसी उस सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हो ।
151. नए कब्रिस्तान और नए श्मशानों का उपयोग करने के लिए अनुज्ञा-(1) छावनी में के जिस स्थान का उपयोग कब्रिस्तान या श्मशान के रूप में इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व नहीं किया गया है, उसका ऐसा उपयोग बोर्ड की लिखित अनुज्ञा के बिना न किया जाएगा ।
(2) ऐसी अनुज्ञा ऐसी शर्तों के अधीन दी जा सकेगी जिन्हें बोर्ड पड़ोस के निवासी व्यक्तियों को क्षोभ या उनके स्वास्थ्य को खतरा निवारित करने के प्रयोजन के लिए अधिरोपित करना ठीक समझे ।
152. कब्रिस्तान या श्मशान का उपयोग बन्द कर देने की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) जहां कि बोर्ड की यह राय स्थानीय जांच करने या कराने के पश्चात् है कि छावनी में का कोई कब्रिस्तान या श्मशान पड़ोस में रहने वाले व्यक्तियों के लिए क्लेषकर अथवा उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो गया है, वहां वह उस स्थान के स्वामी या भारसाधक व्यक्ति से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से कर सकेगा कि वह ऐसी तारीख से, जो सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हो, उसका उपयोग बन्द कर दे ।
(2) जहां कि केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन किसी सूचना के निकाले जाने के लिए, मंजूरी देती है वहां वह वे शर्तें घोषित करेगी जिन पर कब्रिस्तान या श्मशान पुनः उपयोग में लाया जा सकेगा तथा ऐसी घोषणा की प्रति उस सूचना के साथ उपाबद्ध की जाएगी ।
(3) जहां कि केन्द्रीय सरकार ऐसी सूचना के निकाले जाने के लिए मंजूरी दे देती है, वहां वह यह अपेक्षा करेगी कि छावनी निधि के व्यय पर नए कब्रिस्तान या श्मशान की व्यवस्था की जाए अथवा उस दशा में, जिसमें कि सम्पृक्त समुदाय नए कब्रिस्तान या श्मशान की व्यवस्था करने के लिए रजामन्द है, वहां केन्द्रीय सरकार यह अपेक्षा करेगी कि उसके खर्चें के लिए छावनी निधि से अनुदान दिया जाए ।
(4) कोई भी शव ऐसे किसी कब्रिस्तान या श्मशान में, जिसकी बाबत इस धारा के अधीन निकाली गई सूचना तत्समय प्रवृत्त है, न तो दफन किया जाएगा और न दहन किया जाएगा ।
153. धारा 150 से लेकर धारा 152 तक की धाराओं के प्रवर्तन से छूट-धारा 150, 151 और 152 के उपबन्ध ऐसे किसी कब्रिस्तान की दशा में लागू न होंगे जिसका तत्समय प्रबन्ध सरकार के द्वारा या निमित्त किया जा रहा है ।
154. शर्वों का हटाया जाना-बोर्ड लोक सूचना द्वारा छावनी में वे मार्ग विहित कर सकेगा जिनसे ही शव कब्रिस्तानों या श्मशानों को ले जाए जा सकेंगे ।
संक्रामक, सांसर्गिक या संचारी रोगों का निवारण
155. संक्रामक, सांसर्गिक या संचारी रोगों के संबंध में बाध्यता-(1) जो कोई व्यक्ति, चाहे तो चिकित्सा व्यवसायी के रूप में या अन्यथा छावनी में के ऐसे किसी व्यक्ति का भारसाधक है या उपचार कर रहा है जिसकी बाबत यह जानता है या यह विश्वास करने का कारण रखता है कि वह सांसर्गिक संक्रामक या संचारी रोग से पीड़ित है अथवा किसी छावनी में के ऐसे किसी भवन का पट्टेदार या अधिभोगी होते हुए, जिसकी बाबत वह जानता है कि उसमें ऐसा कोई व्यक्ति इस प्रकार के रोग से पीड़ित है, ऐसे रोग के विद्यमान होने की बाबत बोर्ड को तत्काल जानकारी देगा ।
(2) कोई भी व्यक्ति-
(क) यह जानते हुए कि वह किसी सांसर्गिक, संक्रामक या संचारी रोग से पीड़ित है, किसी सार्वजनिक मार्ग या सार्वजनिक स्थान में अपनी उपस्थिति या आचरण द्वारा अन्य व्यक्तियों को संक्रमण के जोखिम में नहीं डालेगा;
(ख) ऐसे व्यक्ति की देख-रेख करते हुए, जिसके बारे में वह यह जानता है कि वह सांसर्गिक, संक्रामक या संचारी रोग से पीड़ित है, पूर्वोक्त ऐसे किसी मार्ग या स्थान में उसकी उपस्थिति या आचरण द्वारा अन्य व्यक्तियों को संक्रमण के जोखिम में नहीं डलवाएगा या ऐसा करने की उसे अनुज्ञा नहीं देगा;
(ग) किसी कूड़ेदान या कूड़े-करकट जमा करने के अन्य पात्र में किसी ऐसी वस्तु को, जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह सांसर्गिक, संक्रामक या संचारी रोग से संक्रमित है, और उचित रूप से उसका विसंक्रामण नहीं किया गया है, नहीं डालेगा या नहीं डालने देगा;
(घ) किसी शौचालय या मूत्रालय में ऐसी कोई वस्तु, जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह सांसर्गिक, संक्रामक या संचारी रोग से संक्रमित है, और उचित रूप से उसका विसंक्रमण नहीं किया गया है, नहीं फेंकेगा या नहीं फिंकवाएगा ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में अन्तर्विष्ट कोई भी बात रतिज रोग की दशा में, जहां उससे पीड़ित किसी व्यक्ति का विशेष और पर्याप्त उपचार हो रहा है और उसकी आदतों और जीवन की दशाओं तथा निवास के कारण उसके रोग फैलाने की संभावना नहीं है, लागू नहीं होगी ।
(4) जो कोई-
(क) ऐसे रोग के, जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट है, विद्यमान होने के संबंध में बोर्ड को कोई जानकारी देने में असफल रहेगा या मिथ्या जानकारी देगा, या
(ख) उपधारा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा:
परन्तु कोई भी व्यक्ति जानकारी देने में असफल रहने पर उस दशा में दंडनीय नहीं होगा जिसमें कि उसके पास यह विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण है कि जानकारी सम्यक् रूप से पहले ही दे दी गई है ।
156. रक्त बैंक-इस संबंध में बनाए गए किसी अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों, विनियमों और उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी रक्त बैंक या किसी ऐसे अन्य स्थापन का भारसाधक, जो किसी रोगी या किसी अन्य चिकित्सीय उपयोग के लिए रक्त, प्लाज्मा, मैरो या कोई अन्य पदार्थ संचरण या उपचार के लिए संगृहीत करता है या प्रदाय करता है, पर्याप्त पूर्वावधानी या पर्याप्त पर्यवेक्षण करने में असफल रहता है जिसके कारण संक्रमणित या संदूषित रक्त, प्लाज्मा, मैरो या कोई अन्य पदार्थ प्राप्त होता है तो वह ऐसे कारावास से जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा या ऐसे जुर्माने से जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा ।
157. संक्रामक या महामारी रोगों के फैलने की दशा में विशेष उपाय-(1) उस दशा में, जिसमें कि छावनी के निवासियों में कोई संक्रामक या सांसर्गिक रोग छावनी में हो गया है या होने का खतरा है अथवा वहां के किन्हीं पशुओं में कोई महामारी रोग छावनी में हो गया है या होने का खतरा है स्टेशन का समादेशक अधिकारी उस दशा में, जिसमें कि उसका विचार है कि इस धारा के अथवा छावनी में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबन्ध लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपर्याप्त हैं, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से-
(क) ऐसे विशेष उपाय कर सकेगा; तथा
(ख) सर्व साधारण या सर्व साधारण के किसी वर्ग या अनुभाग द्वारा अनुपालन किए जाने वाले ऐसे अस्थायी विनियम लोक सूचना द्वारा बना सकेगा, जैसे वह उस रोग के आक्रमण या फैलने का निवारण करने के लिए आवश्यक समझता है:
परन्तु जहां स्टेशन के समादेशक अधिकारी की यह राय है कि अविलम्ब उपाय करने आवश्यक हैं, वहां वह पूर्वोक्त जैसी मंजूरी के बिना कार्रवाई कर सकेगा तथा यदि वह ऐसा करता है तो वह उस कार्रवाई की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को तत्काल देगा ।
(2) जो कोई उपधारा (1) के अधीन बनाए गए किसी अस्थायी विनियम को भंग करेगा उसकी बाबत यह समझा जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 188 के अधीन अपराध किया है ।
158. डेरीवाले के ग्राहकों के नामों की अपेक्षा किए जाने कि शक्ति-जहां कि चिकित्सीय व्यवसायी द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी को यह प्रमाणित किया गया है कि ऐसे चिकित्सीय व्यवसायी की यह राय है कि किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग के होने या फैलने का कारण किसी डेरीवाले द्वारा प्रदाय किया गया दूध है, वहां कार्यपालक अधिकारी, डेरीवाले से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि इतने समय के अन्दर जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो वह डेरीवाले छावनी में के अपने ग्राहकों के नाम और पतों की विस्तृत और पूरी सूची दे अथवा ऐसी जानकारी दे जिससे वह उन व्यक्तियों का पता चलाने के लिए समर्थ हो जाए जिन्हें डेरीवाले ने दूध बेचा है ।
159. धोबी के ग्राहकों के नामों की अपेक्षा किए जाने की शक्ति-जहां कि स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी को यह प्रमाणित किया गया है कि छावनी में किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग का फैलना निवारित करने की दृष्टि से वांछनीय है कि स्वास्थ्य अधिकारी को किसी धोबी के ग्राहकों की सूची दी जाए, वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी धोबी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि इतने समय के अन्दर, जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो वह छावनी में उन कपड़ों और अन्य चीजों के सब स्वामियों के नामों की विस्तृत और पूरी सूची स्वास्थ्य अधिकारी को दे जिनके कपड़े या चीजें वह धोबी धोता है या उस धोबी ने सूचना की तारीख से अव्यवहित पूर्ववर्ती छह सप्ताह के दौरान धोए हैं ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए धोबी" पद से ऐसा व्यक्ति, निगमित निकाय, व्यक्तियों का संगम अभिप्रेत है, जो किसी छावनी में कपड़ों की धुलाई करने में लगे हैं ।
160. किसी चिकित्सा व्यवसायी के या पराचिकित्सीय कर्मचारों के रोगियों या ग्राहकों के नामों की अपेक्षा किए जाने की शक्ति-जहां बोर्ड के नियोजन में किसी स्वास्थ्य अधिकारी या किसी डॉक्टर द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी को यह प्रमाणित कर दिया है कि छावनी में संदूषित सुइयों, सिरिंजों या किन्हीं अन्य ऐसे उपकरणों के उपयोग से जो किसी चिकित्सा व्यवसायी या किसी पराचिकित्सीय कर्मकार द्वारा उपयोग में लाए गए हैं, किसी संक्रामक या सांसर्गिक या संचारी रोग के होने या फैलने की आशंका है, वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी लिखित सूचना द्वारा चिकित्सा व्यवसायी या पराचिकित्सीय कर्मकारों से ऐसे समय के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, छावनी के भीतर अपने सभी ग्राहकों या रोगियों के नाम और पतों सहित सूची प्रस्तुत करने या उसे ऐसी जानकारी देने, जो उसे सूचना जारी करने की तारीख से गत छह सप्ताहों के भीतर ऐसे व्यक्तियों का पता लगाने में समर्थ बना सके, जिनका पराचिकित्सीय व्यवसायी या पराचिकित्सीय कर्मकारों द्वारा उपचार किया गया है या उनकी देखभाल की गई है, अपेक्षा कर सकेगा ।
161. डेरी या धोबी या चिकित्सा व्यवसायी के कारबार के स्थान का निरीक्षण करने के पश्चात् रिपोर्ट-जहां स्वास्थ्य अधिकारी की निरीक्षण के पश्चात् यह राय है कि छावनी में कोई संक्रामक या सांसर्गिक या संचारी रोग उस दूध के उपभोग से पैदा हुआ है या पैदा होना संभाव्य है जिसका प्रदाय किसी डेरी से किया गया है अथवा उन कपड़ों या अन्य चीजों की किसी स्थान में धुलाई से अथवा धोबी द्वारा काम में लाई जाने वाली किसी प्रक्रिया या चिकित्सा व्यवसायी या पराचिकित्सीय कर्मचारीवृंद द्वारा उपयोग की गई संदूषित-सुइयों, सिरिंजों या अन्य ऐसे ही उपकरण से हुआ है या होना संभाव्य है, वहां वह उस बात की रिपोर्ट मुख्य कार्यपालक अधिकारी को देगा ।
162. स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा दी गई रिपोर्ट पर कार्रवाई-स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा धारा 161 के अधीन दी गई रिपोर्ट की प्राप्ति पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी लिखित सूचना द्वारा-
(क) किसी डेरी से दूध का प्रदाय तब तक के लिए प्रतिषिद्ध कर सकेगा, जब तक वह सूचना वापस न ले ली जाए, अथवा
(ख) किसी ऐसे स्थान में या किसी ऐसी प्रक्रिया से, जैसा या जैसी पूर्वोक्त है, कपड़ों या अन्य चीजों की धुलाई करने से धोबी को तब तक के लिए प्रतिषिद्ध कर सकेगा जब तक कि वह सूचना वापस न ले ली जाए, अथवा जब तक कि वह उस स्थान का प्रयोग ऐसी रीति से न करे अथवा ऐसी प्रक्रिया से धुलाई न करे जैसी मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने उस सूचना में निर्दिष्ट की हो, या
(ग) ऐसे चिकित्सा व्यवसायी या पराचिकित्सा कर्मकार को ऐसी सुइयों, सिरिंजों या अन्य ऐसे उपकरणों का प्रयोग करने से तब तक प्रतिषिद्ध करेगा, जब तक कि सूचना वापस न ले ली जाए या सूचना में अपेक्षित परिशोधन नहीं कर लिया जाता ।
163. दूध या धुले कपड़ों या सुइयों, सिरिंजों आदि की परीक्षा-बोर्ड के नियोजन में स्वास्थ्य अधिकारी या कोई चिकित्सा अधिकारी ऐसे दूध, कपड़ों या अन्य वस्तुओं को, जो ऐसे किसी डेरीवाले के कब्जे में हैं या हाल में रही है जिस पर धारा 158 के अधीन सूचना की तामील की गई है या ऐसे किन्हीं कपड़ों या अन्य वस्तुओं को जो किसी धोबी के कब्जे में हैं या हाल में रही है जिस पर धारा 159 के अधीन सूचना की तामील की गई है या ऐसी सुइयों, सिरिंजों या ऐसे अन्य उपकरणों को जो चिकित्सा व्यवसायी या पराचिकित्सा कर्मकार के कब्जे में है या हाल ही में रहे हैं, जिस पर धारा 160 के अधीन सूचना की तामील की गई, अपने कब्जे में ले सकेगा और उन पर ऐसी रासायनिक या अन्य प्रक्रिया करेगा या करवाएगा जैसी वह आवश्यक समझे; और बोर्ड छावनी निधि में से उस प्रक्रिया के सब खर्चे देगा तथा दूध, कपड़ों या अन्य वस्तुओं के स्वामियों को भी ऐसी किसी हानि के प्रतिकर के लिए जो ऐसी प्रक्रिया के कारण हुई है, प्रतिकर के रूप में उतनी रकम देगा जितनी उसे युक्तियुक्त प्रतीत हो ।
164. लोक प्रवहण का प्रदूषित होना-जो कोई भी छावनी में-
(क) किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित होने के दौरान लोक प्रवहण का उपयोग करता है; अथवा
(ख) ऐसे किसी व्यक्ति का वहन करने के लिए ऐसे लोक प्रवहण का उपयोग करता है जो किसी ऐसे रोग से पीड़ित है; अथवा
(ग) ऐसे किसी व्यक्ति के शव का वहन करने के लिए ऐसे लोक प्रवहण का उपयोग करता है जो किसी ऐसे रोग से मरा है,
वह ऐसे अन्य व्यक्तियों को उस रोग के लग जाने के विरुद्ध समुचित पूर्वावधानियां बरतने के लिए, जो उस प्रवहण का उपयोग करते हैं या जो उसके पश्चात् उसका उपयोग करें तथा उस प्रवहण के स्वामी, चालक या भारसाधक व्यक्ति को ऐसा उपयोग अधिसूचित करने के लिए आबद्ध होगा तथा उस प्रवहण का संख्यांक और ऐसे अधिसूचित व्यक्ति के नाम की रिपोर्ट मुख्य कार्यपालक अधिकारी को अविलम्ब देने के लिए भी आबद्ध होगा ।
165. लोक प्रवहण का विसंक्रामण-(1) जहां कि संक्रामक, संचारी या सांसर्गिक रोग से पीड़ित किसी व्यक्ति को अथवा ऐसे किसी व्यक्ति के शव को, जो वैसे रोग से मरा है, ऐसे किसी लोक प्रवहण से ले जाया गया है जो मामूली तौर पर छावनी में चलता है वहां उसका चालक उस तथ्य की रिपोर्ट मुख्य कार्यपालक अधिकारी को तत्काल देगा जो अधिकारी उस प्रवहण का विसंक्रामण उस दशा में, जिसमें कि वह पहले ही विसंक्रमित नहीं कर दिया गया है, तत्काल करवाएगा ।
(2) ऐसा कोई भी प्रवहण तब तक उपयोग में फिर न लाया जाएगा जब तक मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने यह कथन करने वाला प्रमाणपत्र न दे दिया हो कि संक्रमण की जोखिम के बिना उसका उपयोग किया जा सकता है ।
166. रिपोर्ट देने में असफल रहने के लिए शास्ति-जो कोई मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ऐसी कोई रिपोर्ट, जिसे देने के लिए वह धारा 164 व धारा 165 द्वारा अपेक्षित है, नहीं देगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
167. प्रवहण का चालक संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित व्यक्ति को वहन करने के लिए आबद्ध न होगा-किसी तत्समय प्रवृत्त विधि में किसी बात के होते हुए भी लोक प्रवहण का कोई स्वामी, चालक या भारसाधक व्यक्ति संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीडित किसी व्यक्ति को अथवा ऐसे किसी व्यक्ति के शव को, जो ऐसे रोग से मरा है, ऐसे प्रवहण में अथवा छावनी के सामीप्य में उस दशा के सिवाय और तब के सिवाय वहन करने के लिए और वहन करने की अनुज्ञा देने के लिए आबद्ध न होगा जिस दशा में और जब कि ऐसा व्यक्ति उस किसी हानि और व्यय की पूर्ति के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा समय-समय पर नियत धनराशि दे देता है या देने की निविदा करता है जो मामूली तौर पर उस प्रवहण के विसंक्रामण में उपगत होगी ।
168. भवन या उसमें की चीजों का विसंक्रामण-जहां कि बोर्ड की यह राय स्वास्थ्य अधिकारी की सलाह पर है कि छावनी में के किसी भवन या ऐसे भवन के किसी भाग की अथवा ऐसे भवन या भाग में की किन्हीं चीजों की, जिनमें संक्रामण रह जाना सम्भाव्य है, सफाई और विसंक्रामण करने से तथा ऐसे किसी भवन या ऐसे भवन के भाग के फर्श का नवीकरण करने से कोई संक्रामक या सांसर्गिक रोग फैलना निवारित होगा या रुकेगा वहां बोर्ड, स्वामी या अधिभोगी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह, यथास्थिति, उक्त भवन, भाग या वस्तुओं की सफाई और विसंक्रामण अथवा उक्त फर्श का नवीकरण उतने समय के अन्दर करे जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया है :
परन्तु जहां कि बोर्ड की यह राय है कि वह स्वामी या अधिभोगी गरीबी या किसी अन्य हेतुक से ऐसी अध्यपेक्षा को प्रभावी रूप से पूरा करने में असमर्थ रहा है, वहां बोर्ड, यथास्थिति, उस भवन, भाग या वस्तुओं की सफाई और विसंक्रामण अथवा उस फर्श का नवीकरण छावनी निधि के व्यय पर करा सकेगा ।
169. संक्रामक झोंपड़ी या शेड का नष्ट किया जाना-(1) जहां कि छावनी में की किसी झोंपड़ी या शेड की बाबत बोर्ड की यह राय है कि कोई संक्रामक या सांसर्गिक रोग फैलने का निवारण करने के लिए उसका नष्ट किया जाना आवश्यक है, वहां बोर्ड झोंपड़ी या शेड तथा उसकी सामग्रियों के स्वामी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसे इतने समय के अन्दर, जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो, नष्ट कर दे ।
(2) जहां कि बोर्ड के प्रधान का समाधान हो गया है कि छावनी में की किसी झोंपड़ी या शेड का नष्ट किया जाना इस प्रयोजन से अव्यवहित रूप से आवश्यक है कि किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग का फैलना निवारित किया जाए, वहां वह उस झोंपड़ी या शेड के स्वामी या अधिभोगी को यह आदेश दे सकेगा कि उसे वह तत्काल नष्ट कर दे अथवा उसके स्वामी या अधिभोगी को दो घण्टे से अन्यून समय की सूचना देने के पश्चात् नष्ट करा सकेगा ।
(3) बोर्ड इस धारा के अधीन नष्ट की गई झोंपड़ी या शेड के स्वामी को प्रतिकर देगा ।
170. विसंक्रामिक या नष्ट किए गए भवन या शेड के निवासियों के अस्थायी आश्रयस्थल-बोर्ड ऐसे किसी कुटुम्ब के, जिसमें संक्रामक या सांसर्गिक रोग शुरू हो गया है, उन सदस्यों के लिए, जो धारा 168 या धारा 169 के अधीन की गई किन्हीं कार्यवाहियां के कारण अपना आवास स्थान छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं तथा जिनकी यह वांछा है कि पूर्वोक्त जैसा आश्रयस्थल या वास सुविधा हमें दी जाए, मुक्त रूप से अस्थायी आश्रयस्थल या गृह वास सुविधा देगा ।
171. किराए पर देने से पूर्व भवन का विसंक्रामण-(1) जहां कि छावनी में ऐसा कोई भवन या भवन का भाग पट्टे पर उठाए जाने के लिए आशयित है जिसमें कोई व्यक्ति पूर्ववर्ती छह सप्ताह के अन्दर संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित रहा है, वहां वह व्यक्ति, जो उस भवन या भाग को पट्टे पर उठा रहा है, ऐसा करने से पूर्व उसे उसमें की उन सब वस्तुओं सहित, जिनमें संक्रामण रह जाना सम्भव है, ऐसी रीति से विसंक्रामित करेगा जैसी मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोक या विशेष सूचना द्वारा निर्दिष्ट करे ।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए किसी होटल, वासा या सराय के स्वामी की बाबत यह समझा जाएगा कि उसने ऐसे किसी व्यक्ति को जिसे उसमें अतिथि के रूप में प्रवेश कर लेने दिया गया है, उस भवन का वह भाग पट्टे पर दे दिया गया है जिसमें ऐसा व्यक्ति निवास करने के लिए अनुज्ञात किया गया है ।
172. संक्रामित वस्तु का विसंक्रामण किए बिना उसका व्ययन-कोई भी व्यक्ति ऐसी किसी वस्तु या चीज को, जिसकी बाबत वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग द्वारा प्रदूषित हो सकने के लिए उच्छिन्न रही है तथा यह सम्भाव्य है कि छावनी में काम में लाई जाए या छावनी में को वह ले जाई जाए, उसे पहले ही विसंक्रामित किए बिना न तो किसी अन्य व्यक्ति को देगा, न उधार देगा, न बेचेगा, न पारेषित करेगा और न अन्यथा व्ययनित करेगा ।
173. विसंक्रामण के साधन-(1) हर बोर्ड-
(क) ऐसे प्रवहणों, कपड़ों, बिस्तरों या अन्य वस्तुओं के विसंक्रामण के लिए आवश्यक परिचारक और साधित्र सहित समुचित स्थानों का उपबंध करेगा जो संक्रामण के लिए उच्छिन्न रहे हैं;
(ख) विसंक्रामण के लिए लाए गए प्रवहणों, कपड़ों या अन्य वस्तुओं का विसंक्रामण या तो मुफ्त कराएगा या ऐसे प्रभारों की अदायगी पर कराएगा जैसे मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियत करे ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी उन स्थानों को अधिसूचित कर सकेगा जिनमें परिधान वस्तुएं, बिस्तरे, प्रवहण या अन्य चीजें जो संक्रामण के लिए उच्छिन्न रही हैं, धोई जाएंगी तथा यदि वह ऐसा करता है, तो कोई भी व्यक्ति ऐसे किसी स्थान में, जो ऐसे अधिसूचित नहीं किया गया है, ऐसी चीज को उसे पहले ही विसंक्रामित किए बिना न धोएगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी में के ऐसे किसी कपड़े, बिस्तर या अन्य वस्तु के नष्ट किए जाने का निदेश दे सकेगा जिसके बारे में यह सम्भाव्यता है कि उसमें संक्रमण रहा है तथा ऐसे नष्ट की गई किसी वस्तु के लिए इतना प्रतिकर देगा जितना वह ठीक समझता है ।
174. संक्रामणग्रस्त व्यक्ति द्वारा खाद्य आदि का तैयार किया जाना या बेचा जाना अथवा कपड़ों का धोया जाना-जो कोई किसी संक्रामक या सांसर्गिक रूप से पीड़ित होते हुए अथवा ऐसी परिस्थतियों में होते हुए जिनमें कि यह संभाव्यता है कि उसके कारण कोई संक्रामक या सांसर्गिक रोग फैलेगा-
(क) मानव उपभोग के लिए कोई खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ या कोई दवाई या औषधि या वैयक्तिक उपयोग के लिए या पहनने के लिए कोई परिधान वस्तु या बिस्तर छावनी में विक्रय के लिए तैयार करेगा, ले जाएगा या पेश करेगा अथवा उसमें विक्रय करने के वास्ते उसे तैयार करने, ले जाने या पेश करने के कारबार में कोई भाग लेगा; अथवा
(ख) कपड़ों की धुलाई या ले जाने के कारबार में कोई भाग लेगा,
वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
175. खाद्य या पेय का विक्रय निर्बन्धित या प्रतिषिद्ध करने की शक्ति-जबकि छावनी में कोई संक्रामक या सांसर्गिक रोग शुरू हो गया है या उसके फैल जाने का खतरा है, तब मुख्य कार्यपालक अधिकारी बोर्ड की ओर से लोक सूचना द्वारा मानव उपभोग के लिए ऐसी किसी खाद्य या पेय वस्तु का विक्रय या तैयारी, जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट है, अथवा किसी भी प्रकार के पशुओं के मांस का विक्रय, जो ऐसे विनिर्दिष्ट किए गए हैं, ऐसी रीति से निर्बन्धित कर सकेगा अथवा इतनी कालावधि के लिए प्रतिषिद्ध कर सकेगा जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट हो ।
176. कुओं, तालाब आदि पर नियंत्रण-(1) यदि स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा सलाह दिए जाने पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि किसी कुंए, तालाब या अन्य स्थान का पानी ऐसा है कि यह संभाव्यता है कि यदि वह पीने के लिए काम में लाया गया तो उससे कोई रोग होने का खतरा पैदा होगा अथवा कोई रोग फैल जाएगा तो वह, -
(क) लोक सूचना द्वारा पीने के लिए ऐसे पानी का लाया जाना या प्रयोग किया जाना प्रतिषिद्ध कर सकेगा;
(ख) ऐसे कुएं, तालाब या स्थान के स्वामी से अथवा उस व्यक्ति से, जिसका ऐसे कुएं, तालाब या स्थान पर नियंत्रण है, लोक सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि ऐसे पानी तक सर्व साधारण की पहुंच होने से या उन्हें ऐसा पानी प्रयोग करने से रोकने के लिए वह व्यक्ति ऐसे कदम उठाए जैसे सूचना द्वारा निर्दिष्ट हों; अथवा
(ग) ऐसे अन्य कदम उठा सकेगा जैसे वह किसी ऐसे रोग के शुरू होने या फैलने को रोकने के लिए समीचीन समझे ।
(2) छावनी में या उसके किसी भाग में किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग के शुरू होने या शुरू होने का खतरा होने की दशा में स्वास्थ्य अधिकारी अथवा ऐसा कोई व्यक्ति, जिसे उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है सूचना के बिना और किसी भी समय पर ऐसे किसी अन्य कुंए, तालाब या स्थान का निरीक्षण कर सकेगा और उनका विसंक्रामण करा सकेगा जिसका पानी पीने के प्रयोजनों के लिए लिया जाता है अथवा लिया जाना संभाव्य है तथा पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए अथवा पीने के प्रयोजनों के लिए उसका काम में लाया जाना रोकने के लिए ऐसे अतिरिक्त कदम उठा सकेगा जैसे वह ठीक समझता है ।
177. संक्रामणयुक्त शवों की अन्तिम क्रिया-जहां कि कोई व्यक्ति छावनी में किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग से मर गया है वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी लिखित सूचना द्वारा-
(क) उस व्यक्ति से, जिसके पास वह शव है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि उसे इस वास्ते शवगृह ले जाया जाए कि तत्पश्चात् विधि के अनुसार उसकी अन्तिम क्रिया कर दी जाए; अथवा
(ख) उस स्थान से, जहां मृत्यु हुई है, उस शव को दफनाए जाने के अथवा जलाए जाने के अथवा शवगृह को ले जाने के प्रयोजन से हटाए जाने के सिवाय उस शव का हटाया जाना प्रतिषिद्ध कर सकेगा ।
अस्पताल और औषधालय
178. अस्पताल या औषधालय चलान या उनकी सहायता करना-(1) बोर्ड-
(क) उस छावनी के अन्दर या बाहर इतने अस्पताल और औषधालय कायम कर सकेगा और चला सकेगा जितने वह ठीक समझता है; अथवा
(ख) उस द्वारा न चलाए जाने वाले किसी अस्पताल या औषधालय या पशुओं के अस्पताल को भले ही वह छावनी के अन्दर हो या बाहर हो, ऐसे निबन्धनों पर, जिन्हें वह अधिरोपित करना ठीक समझता है, सहायता-अनुदान दे सकेगा ।
(2) ऐसे हर अस्पताल या औषधालय से, जो उपधारा (1) के अधीन उस द्वारा चलाया जा रहा है या जिसकी सहायता की जा रही है, संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उपचार के वास्ते एक कक्ष या कई कक्ष संलग्न रहेंगे ।
(3) बोर्ड द्वारा नियुक्त चिकित्सा अधिकारी इस धारा के अधीन अनुरक्षित या सहायता प्राप्त प्रत्येक अस्पताल और औषधालय का भारसाधक होगा और स्वास्थ्य अधिकारी के प्रति चिकित्सीय क्रियाकलापों के लिए और मुख्य कार्यपालक अधिकारी के प्रति अस्पताल के संपूर्ण प्रशासनिक क्रियाकलापों के लिए उत्तरदायी होगा ।
179. चिकित्सा सामग्री, साधित्र, आदि-(1) ऐसा हर अस्पताल या औषधालय, जो धारा 178 के अधीन चलाया जा रहा है या जिसकी उस धारा के अधीन सहायता की जा रही है, अस्पतालों या औषधालयों के संचालन के लिए केन्द्रीय सरकार के किन्हीं साधारण या विशेष आदेशों के अनुसार अथवा उक्त आदेशों को ऐसी रीति से उपान्तरित किए जाने पर, जिसे केन्द्रीय सरकार ठीक समझती है, उक्त आदेशों के अनुसार चलाया जाएगा ।
(2) बोर्ड यह प्रबन्ध कर सकेगा कि हर ऐसे अस्पताल या औषधालयों को सब औषधियां, उपकरण, साधित्र, फर्नीचर और आले तथा अन्तः रोगियों के लिए पर्याप्त खाटें, बिस्तर और कपड़े उपलब्ध होते रहें ।
180. प्रभार मुक्त रोगी-हर ऐसे अस्पताल या औषधालय में, जो धारा 178 के अधीन चलाया जा रहा है या जिसकी सहायता धारा 178 के अधीन की जा रही है, छावनी के निर्धन रोगियों का तथा छावनी के अन्य ऐसे निवासियों का जो संक्रामक, संचारी या सांसर्गिक रोग से पीड़ित है तथा बोर्ड की मंजूरी से किन्हीं अन्य रोगी व्यक्तियों का चिकित्सीय या शल्यकर्मीय उपचार मुफ्त किया जा सकेगा तथा यदि उनका उपचार अन्तः रोगी के रूप में किया जाता है तो उन्हें मुफ्त भोजन दिया जाएगा अथवा उस दशा में, जिसमें कि भारसाधक चिकित्सक अधिकारी ऐसा निदेश देता है, ऐसे मापमान पर निर्वाह भत्ता भी दिया जाएगा जैसा बोर्ड नियत करे ।
181. संदाय रोगी-ऐसा कोई रोगी व्यक्ति जो किसी अस्पताल या औषधालय में मुफ्त चिकित्सीय या शल्यकर्मीय उपचार धारा 180 के अधीन कराने के लिए अपात्र है, ऐसे उपचार के लिए ऐसे निबन्धनों पर दाखिल किया जा सकेगा जैसा बोर्ड ठीक समझे ।
182. अस्पताल या औषधालय में हाजिर होने के लिए व्यक्ति को आदेश देने की शक्ति-(1) यदि स्वास्थ्य अधिकारी अथवा ऐसे अस्पताल या औषधालय का भारसाधक चिकित्सा अधिकारी जो धारा 178 के अधीन चलाया जा रहा है या जिसकी सहायता उस धारा के अधीन की जा रही है, यह विश्वास करने का कारण रखता है कि छावनी में रहने वाला कोई व्यक्ति संक्रामक, संचारी या सांसर्गिक रोग से पीड़ित है, तो वह लिखित सूचना द्वारा ऐसे व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति किसी ऐसे अस्पताल या औषधालय में परीक्षा के लिए ऐसे समय पर हाजिर हो जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो तथा वहां से भारसाधक चिकित्सा अधिकारी की अनुज्ञा के बिना न जाए तथा अस्पताल या औषधालय में ऐसे व्यक्ति के आने पर उस अस्पताल या औषधालय का भारसाधक चिकित्सा अधिकारी अपना इस बारे में समाधान करने के प्रयोजन के लिए उस व्यक्ति की परीक्षा कर सकेगा कि क्या वह किसी संक्रामक, संचारी या सांसर्गिक रोग से पीड़ित है या नहीं :
परन्तु यदि रोग की प्रकृति को अथवा उस रोग से पीड़ित व्यक्ति की हालत को अथवा ऐसे व्यक्ति के साधारण वातावरण और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, यथास्थिति, स्वास्थ्य अधिकारी अथवा चिकित्सा अधिकारी का यह विचार है कि यह संभाव्यता है कि अस्पताल या औषधालय में ऐसे व्यक्ति की हाजिरी अनावश्यक या असमीचीन सिद्ध होगी, तो वह उस व्यक्ति की परीक्षा उस व्यक्ति के घर पर ही करेगा ।
(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन परीक्षा किए जाने पर संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित पाया जाता है, तो, यथास्थिति, स्वास्थ्य अधिकारी या चिकित्सा अधिकारी उसे अस्पताल में तब तक रोके रखेगा, जब तक कि वह संक्रामक दोष या सांसर्गिक दोष से मुक्त न हो जाए:
परन्तु यदि रोग की प्रकृति को अथवा उस रोग से पीड़ित व्यक्ति की इस हालत को अथवा ऐसे व्यक्ति के साधारण वातावरण और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसका यह विचार है कि अस्पताल या औषधालय में ऐसे व्यक्ति को रोके रखना अनावश्यक या असमीचीन है तो वह ऐसे व्यक्ति को छुट्टी देगा तथा उस विषय में ऐसे उपाय करेगा और ऐसे निदेश देगा जैसे वह आवश्यक समझता है ।
183. अस्पताल या औषधालय में हाजिर होने से इंकार करने वाले व्यक्तियों को छावनी में से निकाल देने की शक्ति-(1) यदि स्वास्थ्य अधिकारी अथवा उस अस्पताल या औषधालय का भारसाधक चिकित्सा अधिकारी जो धारा 178 के अधीन चलाया जा रहा है या जिसकी सहायता धारा 178 के अधीन की जा रही है, स्टेशन समादेशक अधिकारी से लिखित रूप में यह रिपोर्ट करता है कि उस व्यक्ति ने, जिसे धारा 182 के अधीन सूचना की प्राप्ति हो चुकी है, उस अस्पताल या औषधालय में हाजिर होने से इंकार किया है या हाजिर नहीं हुआ है जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया था अथवा ऐसे व्यक्ति उस अस्पताल या औषधालय में हाजिर होने के पश्चात् वहां से ऐसे चिकित्सा अधिकारी की अनुज्ञा के बिना चला गया है अथवा कोई ऐसा व्यक्ति अपने को धारा 182 के अधीन दिए गए किसी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहा है तो स्टेशन समादेशक अधिकारी लिखित आदेश द्वारा ऐसे व्यक्ति को निदेश दे सकेगा कि वह व्यक्ति चौबीस घंटे के अन्दर छावनी को छोड़कर चला जाए और उसकी लिखित अनुज्ञा के बिना उसमें पुनः प्रवेश न करे ।
(2) ऐसा कोई भी व्यक्ति, जिसे उपधारा (1) के अधीन छावनी को छोड़कर चले जाने और उसमें पुनः प्रवेश न करने का आदेश दिया गया है, स्टेशन समादेशक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना किसी अन्य छावनी में प्रवेश न करेगा ।
आरोग्य सम्बन्धी प्रयोजनों के लिए यातायात का नियंत्रण
184. तीर्थयात्रियों और अन्य के लिए मार्ग-(1) बोर्ड उन व्यक्तियों के उपयोग के लिए उचित मार्ग उपबन्धित या विहित कर सकेगा जो-
(क) मेले या तीर्थस्थानों से अथवा अन्य लोक समागम के अन्य स्थानों को जाते या उनसे आते हुए, अथवा
(ख) उन समयों के दौरान जब संक्रामक या सांसर्गिक रोग फैला हुआ है, छावनी में से होकर जाते हैं तथा उपरोक्त जैसे व्यक्तियों से लोक सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे व्यक्ति ऐसे ही मार्गों का उपयोग करें, अन्यों का नहीं ।
(2) उपधारा (1) के अधीन उपबन्धित या विहित सभी मार्ग बोर्ड द्वारा साफ-साफ और पर्याप्त रूप से उपदर्शित कर दिए जाएंगे ।
आवश्यक सेवाओं के बारे में विशेष शर्तें
185. सफाई कर्मचारियों और अन्यों की सेवा की शर्तें-(1) किसी छावनी क्षेत्र में किसी बोर्ड के अधीन सार्वजनिक सफाई या स्वच्छता या जल प्रदाय या अस्पतालों या औषधालय या विद्युत प्रदाय या सार्वजनिक परिवहन सेवाओं या ऐसी अन्य आवश्यक सेवाओं से संबंधित सेवाओं में नियोजित या नियोजित किए जाने वाला कोई व्यक्ति किसी संविदा के अभाव में समुचित प्राधिकार के बिना युक्तियुक्त कारण के बिना त्यागपत्र नहीं देगा या ड्यूटी से स्वयं अनुपस्थित नहीं होगा और ऐसे त्यागपत्र या ड्यूटी से अनुपस्थिति की दशा में, वह ऐसे कारबार से जो एक मास तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा; और इसमें विनिर्दिष्ट सेवा की शर्तें उक्त सेवाओं में नियोजित व्यक्तियों के नियुक्ति पत्र में सदैव वर्णित की जाएंगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगी कि ऐसी तारीख को और से, जिसे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो, इस धारा के उपबन्ध बोर्ड द्वारा नियोजित ऐसे सेवकों के ऐसे किसी विनिर्दिष्ट वर्ग की दशा में लागू होंगे जिनके कृत्यों का घनिष्ठ सम्पर्क लोक स्वास्थ्य या सुरक्षा से है ।
अध्याय 9
जल प्रदाय, जल निकासी और मल संग्रहण
जल प्रदाय
186. जल प्रदाय का कायम रखना-(1) प्रत्येक ऐसी छावनी में, जिसमें घरेलू उपयोग के लिए पेय जल का पर्याप्त प्रदाय विद्यमान नहीं है, बोर्ड ऐसे प्रदाय की व्यवस्था करेगा या ऐसे प्रदाय करने के लिए इंतजाम करेगा ।
(2) बोर्ड, जहां तक साध्य हो, इस बात का यथेष्ट उपबन्ध करेगा कि ऐसा प्रदाय पूरे वर्ष भर बराबर होता रहे तथा वह जल सब समयों पर मानव उपभोग के लिए उपयुक्त बना रहे ।
(3) प्रत्येक बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह छावनी के परिक्षेत्र में जल संचयन की वैज्ञानिक प्रणाली को व्यवहार में लाए और उसका प्रचार करे । जिसके अंतर्गत उपयोग के लिए वर्षा जल का संचयन भी है और भूमिगत जल के पुनः उपयोग के लिए व्यवस्था करे जिसके अंतर्गत भूमिगत जल स्रोत भी हैं, और नदियां, झरनों, स्रोतों और जल के अन्य प्राकृतिक स्रोतों को संरक्षित करे ।
187. जल प्रदाय शब्दावली-इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, जल प्रदाय के संबंध में निम्नलिखित शब्दों और पदों के वे अर्थ होंगे जो नीचे दिए गए हैं अर्थात्ः-
(1) योजक नल" से निम्नलिखित अभिप्रेत है, अर्थात्ः-
(क) जहां वे परिसर जिनमें जल का प्रदाय किया जाता है, उस पथ के भाग से सटे हुए हैं जिसमें मुख्य प्रणाल डाला गया है और सर्विस पाइप पथ से लगे भवन की बाहरी दीवार के बीच से न जाकर अन्य प्रकार से उन परिसरों में जाता है और उसकी रोक काक (स्टाप काक) उन परिसरों के अन्दर और उस पथ की सीमा से उतनी निकट लगी है जितना उचित रूप से साध्य है वहां सर्विस पाइप का उतना भाग जितना मुख्य प्रणाल और उस रोक काक के बीच में है;
(ख) किसी अन्य दशा में, सर्विस पाइप का उतना भाग जो मुख्य प्रणाल और उस पथ की, जिसमें मुख्य प्रणाल डाला गया है, सीमा के बीच है और इसके अन्तर्गत मुख्य प्रणाल और सर्विस पाइप के जोड़ पर लगा फैरूल भी है और-
(i) जहां रोक काक योजक नल के छोर पर हो वहां वह रोक काक भी है, और
(ii) योजक नल के छोर और मुख्य प्रणाल के बीच योजक नल में लगी रोक काक भी है ।
(2) मुख्य प्रणाल" से वह पाइप अभिप्रेत है जो बोर्ड ने व्यष्टि उपभोक्ताओं को जल प्रदाय के लिए नहीं अपितु साधारण जल प्रदाय के लिए डाला है और इसके अन्तर्गत ऐसे पाइप के संबंध में प्रयुक्त कोई साधित्र भी है ।
(3) सर्विस पाइप" से किसी परिसर को मुख्य प्रणाल से जल प्रदाय करने के लिए लगे किसी पाइप का उतना भाग अभिप्रेत है जो उस मुख्य प्रणाल से जल की पूर्ति के लिए है या जहां तक किसी टोंटी के बन्द न किए जाने की दशा में पहुंचता ।
(4) प्रदाय पाइप" से किसी सर्विस पाइप का उतना भाग अभिप्रेत है जो योजक नल नहीं है ।
(5) ट्रंक मुख्य प्रणाल" से ऐसा मुख्य प्रणाल अभिप्रेत है जो प्रदाय के स्रोत से फिल्टर या जलाशय तक या एक फिल्टर या जलाशय से दूसरे फिल्टर या जलाशय तक जल ले जाने के प्रयोजन के लिए या प्रदाय की सीमाओं के एक भाग से उन सीमाओं के दूसरे भाग तक थोक मात्रा में जल ले जाने के प्रयोजन के लिए या थोक मात्रा में जल प्रदाय करने या जल लेने के प्रयोजन के लिए निर्मित किया गया है ।
(6) जल फिटिंग" के अन्तर्गत (मुख्य प्रणालों से भिन्न) पाइप, टोंटियों, काक, वाल्व, फैरूल, मीटर, हौज, कुण्ड और वैसे ही अन्य साधित्र हैं जो जल के प्रदाय और उपयोग के लिए काम में लाए जाते हैं ।
188. बोर्ड द्वारा सर्वेक्षण किया जाना और प्रस्ताव तैयार करना-(1) बोर्ड, जब अपेक्षित हो-
(क) छावनी में जल प्रदाय के विद्यमान उपभोग और मांग तथा छावनी में उपलब्ध तथा संभाव्यतः उपलब्ध जल स्रोतों का सर्वेक्षण कर सकेगा;
(ख) छावनी की भावी जल प्रदाय संबंधी आवश्यकताओं का प्राक्कलन तैयार करा सकेगा;
(ग) मल संग्रह की विद्यमान मात्रा का सर्वेक्षण कर सकेगा; और
(घ) (i) छावनी की विद्यमान या भावी जल प्रदाय संबंधी आवश्यकताओं के बारे में प्रस्ताव तैयार कर सकेगा;
(ii) छावनी में विद्यमान या भावी मल संग्रह संबंधी आवश्यकताओं के बारे में प्रस्ताव तैयार कर सकेगा जिसके अंतर्गत उस रीति की बाबत जिससे और उस स्थान या उन स्थानों की बाबत प्रस्ताव भी है जहां मल ले जाया जाएगा और उसका संग्रह किया जाएगा ।
(2) यदि बोर्ड की यह राय है कि बोर्ड में तत्समय निहित संकर्म या कोई अन्य संपत्ति इस अधिनियम के अधीन पर्याप्त जल प्रदाय या मल के दक्ष संग्रह के प्रयोजनों के लिए अपर्याप्त है तो वह प्रधान निदेशक के अनुमोदन से छावनी के भीतर या उससे बाहर अतिरिक्त संकर्मों के सन्निर्माण और ऐसे संकर्मों के लिए अतिरिक्त संपत्ति के अर्जन के लिए कदम उठा सकेगा ।
189. लोक जल प्रदाय के स्रोतों पर नियंत्रण-(1) बोर्ड, जल प्रदाय के ऐसे स्रोत से भिन्न, जो सैनिक अभियन्ता सेवाओं या लोक निर्माण विभाग के नियन्त्रण के अधीन है चाहे छावनी की सीमा में या उसके बाहर ऐसी किसी झील, सरिता, चश्मे, कुंए, तालाब, जलाशय या अन्य स्रोत की बाबत, जिससे लोक साधारण के उपयोग के लिए जल छावनी में उपलभ्य है या उपलभ्य किया जा सकता है, यह घोषणा केन्द्रीय सकरार की पूर्व मंजूरी से लोक सूचना द्वारा कर सकेगा कि वह लोक जल प्रदाय का स्रोत है ।
(2) प्रत्येक ऐसा स्रोत बोर्ड के नियन्त्रण के अधीन रहेगा और बोर्ड का यह दायित्व होगा कि वह ऐसे स्रोतों को परिरक्षित और अनुरक्षित रखे ।
190. लोक साधारण के पीने के जल के प्रदाय के हर प्राइवेट स्रोत को कायम रखने को या बंद कर देने की अपेक्षा करने की शक्ति-मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसे किसी लोक जल प्रदाय के किसी स्रोत के, जिसका पानी पीने के प्रयोजन के काम में आता है, स्वामी से या उस पर कब्जा रखने वाले किसी व्यक्ति से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह-
(क) उसे अच्छी हालत में बनाए रखे और गाद, कचरे या सड़ी-गली वनस्पतियों को समय-समय पर वहां से निकाल कर उसे साफ करे, अथवा
(ख) उसे प्रदूषित होने से ऐसी रीति से बचाए रखे जैसी मुख्य कार्यपालक अधिकारी निदिष्ट करे, अथवा
(ग) उस दशा में, जिसमें कि उसमें के पानी की बाबत मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया गया है कि वह पीने के प्रयोजनों के लिए अनुपयुक्त है, लोक साधारण की उस तक पंहुच निवारित करने तथा उन द्वारा ऐसे पानी का उपयोग निवारित करने के लिए ऐसे उपाय करे जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट हों:
परंतु कुंए की दशा में पूर्वोक्त जैसा व्यक्ति सूचना का अनुपालन करने के बदले में लिखित रूप में अपनी यह इच्छा संज्ञापित कर सकेगा कि वह कुंए का समुचित अनुरक्षण करने के सब दायित्व से अवमुक्त होना चाहता है तथा वह लोक साधारण के उपयोग के लिए उसे बोर्ड के नियन्त्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रख देने के लिए तैयार है, तथा यदि वह ऐसा करता है तो वह उस अध्यपेक्षा का पालन करने के लिए आबद्ध न होगा तथा बोर्ड उस कुंए का नियन्त्रण और पर्यवेक्षण अपने हाथ में ले लेगा ।
191. जल प्रदाय-(1) इस संबंध में बोर्ड द्वारा बनाए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों के अधीन रहते हुए मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी भवन या भूमि के स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी को अनुज्ञा दे सकेगा कि वह घरेलू उपयोग के लिए जल अभिप्राप्त करने के प्रयोजन से ऐसे आकार और किस्म के योजक पाइपों के जरिए, जैसे वह विहित करे, उस भवन या भूमि का कनेक्शन लोक जल प्रदाय के स्रोत से कर ले ।
(2) ऐसे प्रत्येक भवन का अधिभोगी, जिसका ऐसे कनैक्शन जल प्रदाय से किया गया है, इस बात का हकदार होगा कि जल कर के, यदि कोई हो, बदले में इतनी मात्रा में जल घरेलू उपयोग के लिए ले जितना मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवधारित करे ।
(3) उस मात्रा से, जिस तक उपधारा (2) के अधीन ऐसा प्रदाय परिसीमित है, आधिक्य में प्रदाय किए गए सब जल के लिए तथा ऐसी छावनी में, जिसमें जल कर अधिरोपित नहीं किया गया है, इस धारा के अधीन प्रदाय किए गए सब जल के लिए अदायगी ऐसी दर से की जाएगी जैसी बोर्ड उसकी वित्तीय सामर्थ्यता को ध्यान में रखते हुए नियत करे ।
(4) घरेलू उपयोग के लिए जल प्रदाय के अंतर्गत ऐसा कोई जल प्रदाय नहीं समझा जाएगा जो-
(क) ऐसे पशुओं के लिए या यानों के धोने के लिए है, जो पशु या यान विक्रय या भाड़े के लिए रखे जाते हैं,
(ख) किसी व्यापार, विनिर्माण या कारबार के लिए है,
(ग) फव्वारों, तैरने के हौजों या किसी सजावटी या यांत्रिक प्रयोजन के लिए है,
(घ) बागों के लिए है या सिंचाई के प्रयोजनों के लिए है,
(ङ) सड़क या रास्ते बनाने या उन पर पानी छिड़कने के लिए है, अथवा
(च) निर्माण के प्रयोजन के लिए है ।
192. जल प्रदाय किए जाने की अपेक्षा करने की शक्ति-यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि छावनी में किसी भवन या भूमि में पेय जल का समुचित प्रदाय नहीं है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी उस भवन या भूमि के स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति लोक जल प्रदाय के स्रोत से जल की इतनी मात्रा अभिप्राप्त करे जितनी उन व्यक्तियों की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हो जो उस भवन या भूमि पर प्रायः अधिभोग रखते हैं या वहां नियोजित रहते हैं तथा विहित आकार और किस्म के योजक पाइप लगाए तथा ऊपर वर्णित प्रयोजनों के लिए सब आवश्यक कदम उठाए ।
193. करार के अधीन जल का प्रदाय-(1) इस संबंध में बोर्ड द्वारा बनाए गए मार्गनिर्देशों के अधीन रहते हुए मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी में के किसी भवन या भूमि के स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी को करार के जरिए लोक जल प्रदाय के किसी स्रोत से घरेलू प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए कितने ही जल का प्रदाय इस अधिनियम से और इसके अधीन बनाए गए नियमों और उपविधियों से संगत ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर कर सकेगा जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी और ऐसे स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी के बीच करार पाई जाएं ।
(2) यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि छावनी के निवासियों के घरेलू उपयोग के लिए जल का पर्याप्त प्रदाय कायम रखने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है, तो वह किसी समय ऐसा प्रदाय रोक सकेगा या उसकी मात्रा कम कर सकेगा ।
194. जल प्रदाय के न होने के लिए बोर्ड का दायी न होना-बोर्डों पर इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी बाध्यता के होते हुए भी बोर्ड जल प्रदाय न कर पाने के लिए अथवा उसकी मात्रा कम कर देने के लिए उस दशा में, जिसमें कि, यथास्थिति, वह असफलता या कमी किसी दुर्घटनावश या सूखा के कारण या अन्य अपरिहार्य हेतुक के कारण हुई है, किसी समपहरण, शास्ति या नुकसानी के दायित्व के अधीन तब के सिवाय न होगा, जब कि धारा 193 के अधीन जल प्रदाय के लिए करार की दशा में बोर्ड ने ऐसी असफलता या कमी होने की दशा में समपहरण, शास्ति या नुकसानी के लिए स्पष्ट उपबन्ध किया है ।
195. सर्वव्यापी प्रयोग की शर्तें-इसमें इसके पूर्व अथवा धारा 193 के अधीन वाले किसी करार में किसी बात के होते हुए भी बोर्ड द्वारा किसी भवन या भूमि को जल प्रदाय निम्नलिखित शर्तों पर किया जाएगा तथा किया गया समझा जाएगा, अर्थात्ः -
(क) उस भवन या भूमि का स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी, जिसमें या जिस पर वह जल, जिसका बोर्ड द्वारा प्रदाय किया जा रहा है, पाइपों, नालियों या अन्य संकर्मों के अच्छी हालत में न होने के कारण बरबाद हो रहा है, उसकी सूचना उस दशा में जिसमें कि उसको जानकारी है, ऐसे अधिकारी को देगा जिसे मुख्य कार्यपालक अधिकारी इस निमित्त नियुक्त करे,
(ख) मुख्य कार्यपालक अधिकारी या बोर्ड का कोई अन्य अधिकारी या कर्मचारी, जिसे लिखित रूप में इसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है, ऐसे किसी परिसर में या पर, जिसे बोर्ड द्वारा जल का प्रदाय किया जा रहा है, इस प्रयोजन से प्रवेश कर सकेगा कि जिन पाइपों, टोंटियों, संकर्मों और फिटिंगों जिनका कनेक्शन जल प्रदाय से है, उनकी परीक्षा करे तथा यह अभिनिश्चित करे कि क्या ऐसा जल बरबाद जा रहा है या उसका दुरुपयोग किया जा रहा है,
(ग) मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोक जल प्रदाय के किसी स्रोत के तथा ऐसे किसी भवन या भूमि के, जिसे उससे जल का प्रदाय किसी भी प्रयोजन के लिए किया जा रहा है, बीच का कनेक्शन लिखित सूचना के बाद उस दशा में काट सकेगा या ऐसा प्रदाय उस दशा में बन्द कर सकेगा जिसमें कि-
(i) उस भवन या भूमि का स्वामी या अधिभोगी उस जल प्रदाय से सम्बन्धित जल कर या जल के रेट या अन्य प्रभार उस तारीख से, जिसको ऐसा कर या प्रभार अदायगी के लिए शोध्य हो गया या, एक मास के अन्दर जमा कर देने में उपेक्षा करता है;
(ii) अधिभोगी बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी या अन्य प्राधिकृत अधिकारी या कर्मचारी को खण्ड (ख) द्वारा प्राधिकृत कोई परीक्षा या जांच करने के प्रयोजन से उस भवन में या भूमि पर प्रवेश करने की इजाजत नहीं देता या ऐसी परीक्षा या जांच का किया जाना निवारित करता है;
(iii) अधिभोगी जानबूझकर या उपेक्षा से जल का दुरुपयोग करता है या अपव्यय करता है;
(iv) अधिभोगी जल संकर्म से जल प्रवाहित करने वाले किसी अपने मीटर या किसी पाइप या टोंटी को जानबूझकर या उपेक्षा से क्षतिग्रस्त करता है या नुकसान पहुंचाता है;
(v) उस भवन या भूमि को जल प्रदाय का कनेक्शन जिन किन्हीं नलों, टोंटियों, संकर्मों और फिटिंगों से है वे बोर्ड के किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा लिखित रूप से इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है, परीक्षा किए जाने पर इतने बेमरम्मत हालत में पाए जाते हैं कि उस कारण जल की बरबादी हो रही है,
(घ) जल के कनेक्शन काट दिए जाने या जल के बन्द कर दिए जाने का जिसके प्रति निर्देश खण्ड (ग) में किया गया है, व्यय भवन या भूमि के स्वामी या अधिभोगी द्वारा संदत्त किया जाएगा,
(ङ) खण्ड (ग) के अधीन या अनुसरण में की गई किसी कार्रवाई से कोई भी व्यक्ति ऐसी किसी शास्ति या दायित्व से अवमुक्त न हो जाएगा जो उसने अन्यथा उपगत कर ली हो ।
196. छावनी के बाहर के व्यक्तियों को प्रदाय-बोर्ड ऐसे किसी व्यक्ति को, जो छावनी की सीमाओं के अन्दर निवासी नहीं है इस बात की अनुज्ञा दे सकेगा कि लोक जल प्रदाय के किसी स्रोत से किसी प्रयोजन के लिए ऐसे निबन्धनों पर, जैसे बोर्ड विहित करे, जल ले ले या उसे जल का प्रदाय किया जाए तथा किसी समय ऐसे जल प्रदाय को काट सकेगा या कम कर सकेगा
197. शास्ति-जो कोई-
(क) घरेलू उपयोग के लिए बोर्ड द्वारा प्रदाय किए गए किसी जल का उपयोग घरेलू प्रयोजनों से भिन्न प्रयोजनों के लिए करेगा, अथवा
(ख) उस दशा में, जिसमें कि जल का प्रदाय बोर्ड से हुए करार के जरिए विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए किया जाता है उस जल का उपयोग किसी अन्य प्रयोजन के लिए करेगा,
वह जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा, तथा इसके अतिरिक्त बोर्ड ऐसे दुरुपयुक्त जल की कीमत उससे वसूल करने का हकदार होगा ।
जल, जल निकास और अन्य कनेक्शन
198. तार, कनेक्शन आदि बिछाने की बोर्ड की शक्ति-बोर्ड कोई केबल, तार, पाइप, नाली, मलनाल या किसी किस्म की सरणी-
(क) जल प्रदाय, रोशनी, जल निकास या मलनाल प्रणाली को बिछाने, स्थापित करने या कायम रखने के प्रयोजन से किसी सड़क या पथ के अथवा ऐसे किसी स्थान के, जो सड़क या पथ के रूप में विन्यस्त किया गया है या सड़क या पथ के रूप में उदृष्ट है, आर-पार, नीचे या ऊपर अथवा किसी भूमि या भवन के स्वामी या अधिभोगी को युक्तियुक्त लिखित सूचना देने के पश्चात् उस भूमि या भवन में या उसके बीच होकर या आर-पार या नीचे या ऊपर अथवा किसी भवन के पार्श्व पर, जो छावनी में स्थित है, बिछा सकेगा, अथवा
(ख) जल का प्रदाय करने अथवा जल प्रवेश के अथवा जल निर्गमन के वितरण के अथवा मल के हटाए जाने या मल के निर्गम के प्रयोजन से किसी भूमि या भवन में या उसके बीच होकर, आर-पार, नीचे या ऊपर अथवा किसी भवन के पार्श्व पर जो छावनी के बाहर स्थित है, उस भूमि या भवन के स्वामी या अधिभोगी को युक्तियुक्त लिखित सूचना देने के पश्चात् बिछा सकेगा और सभी समय ऐसे सभी कृत्य और बातें जो किसी ऐसे केबल, तार, पाइप, नाले, सीवर या सरणी की मरम्मत के या अनुरक्षण के लिए आवश्यक या समीचीन हो, उस प्रयोजन के लिए जिसके लिए उनका उपयोग किया जा सकेगा या उपयोग किया जाना आशयित है, कर सकेगा :
परन्तु उससे अधिक कोई न्यूसेंस न किया जाएगा, जो संकर्म के समुचित निष्पादन के लिए युक्तियुक्तः आवश्यक है:
परन्तु यह और कि स्वामी या अधिभोगी को उसके द्वारा उठाए गए ऐसे किसी नुकसान के लिए प्रतिकर देय होगा जो किसी ऐसी संक्रिया के किए जाने से प्रत्यक्षतः हुआ है ।
199. भूमि की सतह के ऊपर बिछाए गए तार, आदि-किसी भूमि की सतह के ऊपर अथवा किसी भवन के बीच होकर उसके ऊपर अथवा उसके पार्श्व पर, केबल, तार, पाइप, नाली, मलनाल या सरणी के बिछाए जाने या ले जाए गए होने की दशा में ऐसी कोई केबल, तार, पाइप, नाल, मलनाल या सरणी इस प्रकार बिछाई या ले जाई जाएगी कि उस भूमि या भवन के सम्यक् उपभोग सम्बन्धी उसके स्वामी या अधिभोगी के अधिकारों में यथासम्भव कम से कम विघ्न हो, तथा किसी ऐसे उपभोग के अधिकार में किसी सारभूत विघ्न की बाबत बोर्ड द्वारा प्रतिकर देय होगा ।
200. अनुज्ञा के बिना मेन से कनेक्शन का न किया जाना-कोई भी व्यक्ति किसी केबल, तार, पाइप, नाल, मलनाल अथवा सरणी से, जो बोर्ड द्वारा बनाया गया है या कायम रखा जाता है अथवा बोर्ड में निहित है, किसी समय पर किसी भी प्रयोजन के लिए कोई कनेक्शन या योजन बोर्ड की अनुज्ञा के बिना न तो करेगा और न कराएगा ।
201. फेरूल विहित करने तथा मीटर लगाने आदि की शक्ति-मुख्य कार्यपालक अधिकारी गैस के प्रदाय के लिए काम में लाए जाने वाले फेरूलों का, यदि कोई हों, आकार विहित कर सकेगा तथा ऐसे किसी जल या गैस की, जिसका प्रदाय बोर्ड द्वारा किसी परिसर को किया जा रहा है, मात्रा को मापने या उसकी क्वालिटी का परीक्षण करने के प्रयोजन के लिए मीटर या अन्य साधित्र लगा सकेगा ।
202. निरीक्षण करने की शक्ति-जल मेन से या पाइपों, मलनालों या सरणियों से ऐसे किसी गृह या भूमि में को, जिसे जल या गैस या प्रदाय बोर्ड द्वारा किया जा रहा है, जाने वाले नलों पर उस या उनसे फेरूलों, योजक पाइपों, कनेक्शनों, मीटरों, स्टेण्ड पाइपों और उन पर या उनसे संसक्त सब फिटिंगों को तथा ऐसे किसी गृह के अन्दर या किसी ऐसी भूमि की सीमाओं के अन्दर के पाईप फिटिंग और संकर्मों को सब दशाओं में मुख्य कार्यपालक अधिकारी के निरीक्षण के अधीन और उसके समाधानप्रद रूप में लगाया या निष्पादित किया जाएगा ।
203. रेट और प्रभार नियत करने की शक्ति-बोर्ड जल या गैस के प्रदाय के लिए मेन या पाइपों से कोई योजक तथा कनेक्शन अथवा उसके प्रदाय की मात्रा को मापने या उसकी क्वालिटी का परीक्षण करने के लिए मीटर या अन्य साधित्र उसके द्वारा या उसके अभिकरण के माध्यम से लगाए जाने वाले प्रभार नियत कर सकेगा, तथा तद्नुकूल ऐसे प्रभार उद्गृहीत कर सकेगा ।
इस अध्याय का सरकारी जल प्रदायों को लागू होना
204. सरकारी जल प्रदाय-(1) जहां कि किसी छावनी में सैनिक अभियन्ता सेवाओं अथवा लोक निर्माण विभाग के नियन्त्रण के अधीन जल प्रदाय (बोर्ड के नियंत्रणाधीन लोक जल प्रदाय से भिन्न) प्रणाली है वहां, यथास्थिति, सैनिक इंजीनियरी सेवाओं का अथवा लोक निर्माण विभाग का वह अधिकारी, जो ऐसी जल प्रदाय व्यवस्था का भारसाधन करता है (जिसे इस अध्याय में इसके पश्चात् अधिकारी कहा गया है) छावनी के अन्दर ऐसी रीति से, जैसी वह ठीक समझता है, यह घोषणा करने वाली सूचना प्रकाशित कर सकेगा कि जल प्रदाय के स्रोत से भिन्न कोई झील, सरिता, चश्मा, कुंआ, तालाब, जलाशय या अन्य स्रोत, भले ही वह छावनी की सीमाओं के अन्दर हों या बाहर हों, जो बोर्ड के नियन्त्रण के अधीन है, लोक जल प्रदाय का स्रोत है, तथा ऐसे स्रोत को ठीक हालत में रखने के अथवा उसे प्रदूषण से बचाने के अथवा उसका उपयोग किए जाने से उसकी संरक्षा करने के प्रयोजन से बोर्ड से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह धारा 190 द्वारा अपने को प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग करे ।
(2) ऐसे किसी जल प्रदाय की दशा में, जैसा उपधारा (1) में निर्दिष्ट है, इस अध्याय के निम्नलिखित उपबन्ध, अर्थात् धारा 191, 193, 194, 195, 197, 198, 199, 200, 201, 202 और 203 के उपबन्ध छावनी को जल प्रदाय की बाबत यावत्शक्य लागू होंगे, तथा ऐसे लागू होने के प्रयोजन के लिए उन निर्देशों का जो बोर्ड के प्रति हैं यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे अधिकारी के प्रति निर्देश है तथा बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अथवा अन्य अधिकारी या कर्मचारी के प्रतिनिर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वे ऐसे व्यक्ति के प्रतिनिर्देश है जो उस अधिकारी द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया हो ।
(3) धारा 193 के उपबन्ध उस अधिकारी द्वारा बोर्ड को घेरलू प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए काम में लाए जाने के लिए जल का प्रदाय करार के जरिए करने की बाबत उसी तरह लागू होंगे जैसे वे छावनी में के किसी भवन या भूमि के स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी को किए जाने वाले ऐसे प्रदाय की बाबत लागू है ।
(4) बोर्ड, भूमिगत जल स्तर को संरक्षित रखने के लिए छावनी में खुदाई या बोर कुंओं के प्रयोग के लिए विनियम बना सकेगा
205. घरेलू खपत के लिए जल प्रदाय-(1) जहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि छावनी में कोई निवासी घरेलू खपत के लिए जल प्रदाय रहित है और ऐसा जल प्रदाय ऐसे मुख्य प्रणाल से किया जा सकता है कि जो ऐसे गृह निवास से सौ फुट से अनधिक की दूरी पर हैं वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी सूचना द्वारा स्वामी से प्रदाय अभिप्राप्त करने और ऐसे सभी कार्यों का निष्पादन करने की, जो इस प्रयोजन के लिए आवश्यक हो, अपेक्षा कर सकेगा ।
(2) किन्हीं ऐसे परिसरों के स्वामी के लिए जो सन्निर्मित या पुनर्सनिर्मित की जा सकती है, उसे अधिभोग में लेना या उसे अभियोग में लिए जाने की अनुज्ञा देना तब तक विधिपूर्ण नहीं होगा जब तक कि उसने मुख्य कार्यपालक अधिकारी से कोई ऐसा प्रमाणपत्र प्राप्त न कर लिया हो कि उसके गृह के भीतर या गृह से युक्तियुक्त दूरी के भीतर व्यवस्था की गई है जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी को घरेलू उपभोग के लिए तथा उस गृह के रहने वालों के लिए जल का संपूर्ण प्रदाय पर्याप्त प्रतीत होता है ।
206. प्रभारों की वसूली-ऐसी किसी दशा में, जिसमें कि धारा 204 के उपबन्ध लागू हैं तथा जिसमें कि बोर्ड को धारा 207 के अधीन जल का प्रपुंज प्रदाय नहीं प्राप्त हो रहा है, छावनी में अधिरोपित जल कर, यदि कोई हो, तथा जल के प्रदाय से उद्भूत अन्य सब प्रभार जो धारा 204 द्वारा यथा लागू किए गए रूप में इस अध्याय के उपबन्धों के अधीन अधिरोपित किए जा सकते हैं, बोर्ड द्वारा वसूल किए जाएंगे तथा ऐसे वसूल की गई सब धनराशियां या उनका ऐसा प्रभाग, जैसा केन्द्रीय सरकार हर एक दशा में अवधारित करे, बोर्ड द्वारा उस अधिकारी को दिया जाएगा ।
207. सरकारी जल प्रदाय से बोर्ड को जल का प्रदाय-(1) जहां कि किसी छावनी में ऐसी जल प्रणाली है जैसी धारा 204 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट है, वहां बोर्ड तब तक, जब तक बोर्ड अपनी ही जल प्रदाय प्रणाली कायम करने में असमर्थ है, यथास्थिति, सैनिक इंजीनियर सेवाओं अथवा लोक निर्माण विभाग से हकदार उपभोगियों से भिन्न छावनी में के सब व्यक्तियों के घरेलू उपयोग की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए यथेष्ट जल प्रदाय ऐसे स्थान या स्थानों पर प्राप्त कर सकेगा जैसा बोर्ड और सैनिक इंजीनियर सेवाएं या लोक निर्माण विभाग के बीच करार पाई जाएं ।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्राप्त कोई जल प्रदाय प्रपुंज प्रदाय होगा तथा बोर्ड ऐसे प्राप्त सब जल के लिए इतनी रकमों की अदायगी सैनिक इंजीनियर सेवाएं या लोक निर्माण विभाग को करेगा जो बोर्ड और सैनिक इंजीनियर सेवाएं या लोक निर्माण विभाग के बीच करार पाई जाएं अथवा ऐसे करार के अभाव में जिसकी बाबत छावनी में जल के प्रदाय के वास्तविक खर्चे को तथा किसी पार्श्वस्थ नगरपालिका में जल के लिए प्रभारित की जाने वाली रेट को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार द्वारा यह अवधारित किया जाए कि वह उचित है :
परन्तु इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी बोर्ड छावनी में व्यक्तियों को जल के प्रदाय के लिए, जो इस धारा के अधीन बोर्ड को प्राप्त हुआ है, ऐसी रेट न लगाई जाएगी जिससे प्राप्त जल के लिए, सैनिक इंजीनियर सेवाओं या लोक निर्माण विभाग को अदा की गई रकमें तथा उपभोगियों को बोर्ड द्वारा उसके प्रदाय के वास्तविक खर्च के योग से अधिक आमदनी होनी प्रकल्पित है ।
(3) यदि हकदार उपभोगियों से भिन्न छावनी में के व्यक्तियों की आवश्यकताओं के लिए यथेष्ट जल की मात्रा की बाबत कोई विवाद बोर्ड और सैनिक इंजीनियर सेवाओं या लोक निर्माण विभाग के अधिकारी के बीच पैदा होता है तो वह विवाद केन्द्रीय सरकार को निर्देशित किया जाएगा जिसका उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा ।
208. प्रपुंज प्रदाय के वितरण के संबंध में बोर्ड के कृत्य- जहां कि धारा 207 की उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन प्रपुंज जल प्रदाय बोर्ड को प्राप्त होता है, वहां बोर्ड हकदार उसभोगियों से भिन्न छावनी में के सब व्यक्तियों को जल का प्रदाय करने के लिए एकमात्र रूप में उत्तरदायी होगा, तथा इस अधिनियम के उपबन्ध ऐसे लागू होंगे मानो ऐसा प्रपुंज प्रदाय बोर्ड के नियंत्रण के अधीन लोक जल प्रदाय का स्रोत हो तथा ऐसे व्यक्तियों को जल प्रदाय के करने के प्रयोजन के लिए ऐसे प्रपुंज प्रदाय से सब योजक और कनेक्शन बोर्ड द्वारा स्थापित और बनाई रखी जाने वाली जल प्रदाय प्रणाली हो ।
209. नालियों और मल नालियों से संबंधित विशेष उपबंध-(1) किसी सार्वजनिक पथ में या उसके किनारे या उसके साथ-साथ या उसके नीचे स्थित सभी सार्वजनिक नालियां, सभी नालियां उनके सिवाय जो मिलिट्री इंजीनियरी सेवा या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग या केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी स्वशासी निकाय में निहित है और सभी मल संग्रहण संकर्म चाहे वे छावनी निधि से या अन्यथा सन्निर्मित हैं या नहीं और उनसे संबंधित सभी संकर्म और वस्तुएं जो छावनी में स्थित हैं बोर्ड में निहित होंगे ।
(2) सभी सार्वजनिक और अन्य नालियां जो बोर्ड में निहित हैं, जो इस अधिनियम में इसके पश्चात् छावनी नाली कही गई है (3) किसी ऐसी नाली या मल संग्रहण संकर्म से अनुलग्न उतनी अवमृदा भी, जितनी उक्त नाली या मल संग्रहण संकर्म को बड़ा करने, गहरा करने या अन्यथा उसकी मरम्मत या अनुरक्षण करने के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हो, बोर्ड में निहित समझी जाएगी ।
(4) छावनी निधि में से किसी ऐसे परिसर में या उस पर जो परिषद् का नहीं है-
(क) चाहे इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व या इसके पश्चात्, और
(ख) चाहे वह ऐसे परिसर के स्वामी या अधिभोगी के उपयोग के लिए है या नहीं,
निर्मित या बनाए गए या लगाए गए जल निकास संकर्म से सम्बन्धित सभी नालियों और संवातन, नाले, पाइप तथा सभी साधित्र और फिटिंगें तब तक परिषद् में निहित होंगे और सदैव से निहित समझे जाएंगे जब तक कि परिषद् ने अन्यथा अवधारित नहीं किया हो या परिषद् किसी समय अन्यथा अवधारित नहीं कर देती ।
210. नालियों और मल संग्रहण और निपटान संकर्मों का सन्निर्माण और नियंत्रण-(1) सभी छावनी नालियां, सभी मल संग्रहण और उनसे अनुलग्न सभी संकर्म, सामग्रियां और चीजें, बोर्ड के नियंत्रण में होंगी ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जब बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किया जाए सभी छावनी नालियों और मल संग्रहण संकर्मों का अनुरक्षण करेगा और उनकी मरम्मत करेगा ।
(3) बोर्ड उतनी नई नालियां और मल संग्रहण संकर्म निर्मित करेगा जितना प्रभावी रूप से जल निकास या मल संग्रहण के लिए समय-समय पर आवश्यक हों ।
(4) बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि मल बहिःस्राव का, उन्हें नदी, जलधारा, झील या खुली भूमि पर बहने दिए जाने से पूर्व, प्रदूषण से संबंधित सुसंगत विधियों के अधीन अधिकथित मानकों के अनुसार उपचार किया जाता है ।
211. कतिपय पदार्थों का छावनी नालियों में न डाला जाना-कोई भी व्यक्ति किसी छावनी नाली में या छावनी नाली से जोड़ने वाली किसी नाली में निम्नलिखित पदार्थ नहीं फैंकेगा, गिराएगा या उलटेगा, -
(क) कोई ऐसा पदार्थ जिससे नाली को नुकसान हो सकता है या उसकी अन्तर्वस्तु के निर्बाध प्रवाह में बाधा पड़ सकती है या उसकी अन्तर्वस्तु की अभिक्रिया और व्ययन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है; अथवा
(ख) कोई रसायन, कचरा या स्टीम अपशिष्ट या पैंतालीस डिग्री सेन्टीग्रेड से उच्चतर तापमान वाला कोई द्रव्य जो ऐसा कचरा या स्टीम है या ऐसा द्रव्य है जो गर्म किए जाने पर या तो स्वयं ही या नाली के अन्तर्वस्तु के साथ मिलकर खतरनाक है या न्यूसेंस का कारण है, या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है; अथवा
(ग) कोई खतरनाक पेट्रोलियम ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में खतरनाक पेट्रोलियम" पद का वही अर्थ है जो पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 (1934 का 30) में है ।
212. स्वामियों और अधिभोगियों द्वारा छावनी नाली से नाली जोड़ने के लिए आवेदन-(1) उन शर्तों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाई गई उपविधियों में विहित की जाएं, किसी ऐसे परिसर का स्वामी या अधिभोगी जिसमें प्राइवेट नाली है, या छावनी के भीतर किसी प्राइवेट नाली का स्वामी अपनी नाली को छावनी नालियों से जोड़ने के लिए और उस परिसर से या उस प्राइवेट नाली से दूषित जल और भूतल जल को निस्सारित करने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी को आवेदन कर सकेगा:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी व्यक्ति को निम्नलिखित का हकदार नहीं बनाएगी, -
(क) किसी छावनी नाले में प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से निम्नलिखित का निस्सारण करने के लिए-
(i) इस निमित्त बनाई गई उपविधियों के अनुसार, न कि अन्यथा किसी व्यापार परिसर से कोई व्यापार बहिःस्राव; अथवा
(ii) कोई ऐसा द्रव या ऐसा अन्य पदार्थ जिसका छावनी नालियों में निस्सारण इस अधिनियम या किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन प्रतिषिद्ध है; अथवा
(ख) जहां दूषित जल और भूतल जल के लिए पृथक् छावनी नालियों की व्यवस्था है वहां प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से निम्नलिखित का निस्सारण करने के लिए-
(i) भूतल जल के लिए बनाई गई नाली में दूषित जल; अथवा
(ii) मुख्य कार्यपालक अधिकारी की अनुज्ञा के बिना, दूषित जल के लिए बनाई गई नाली में भूतल जल; अथवा
(ग) बरसाती जल वाली नाली के साथ सीधे ही अपनी नाली को जोड़ने के लिए ।
(2) जो व्यक्ति उपधारा (1) के उपबन्धों का फायदा उठाने की वांछा करता है, वह अपनी प्रस्थापनाओं की सूचना मुख्य कार्यपालक अधिकारी को देगा, और ऐसी सूचना प्राप्त होने के पश्चात् एक मास के भीतर मुख्य कार्यपालक अधिकारी नालियों को इस प्रकार से जोड़ने की अनुज्ञा देने से इंकार कर सकेगा यदि उसे ऐसा प्रतीत होता है कि नाली के निर्माण का ढंग या नाली की स्थिति ऐसी है कि उसे जोड़ने से जल निकास प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, और वह नाली के निर्माण के ढंग और उसकी स्थिति के परीक्षण के प्रयोजन के लिए, यदि आवश्यक हो तो, यह अपेक्षा कर सकेगा कि उसे निरीक्षण के लिए खोला जाए ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यदि ऐसा ठीक समझे तो वह संकर्म के उतने भाग को जितना छावनी नाली के साथ प्राइवेट नाली को जोड़ने के लिए आवश्यक है और किसी सार्वजनिक पथ में या उसके नीचे है, निर्मित करवा सकेगा और ऐसी दशा में मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा उपगत व्यय, यथास्थिति, परिसर के स्वामी या अधिभोगी द्वारा या प्राइवेट नाली के स्वामी द्वारा संदत्त किया जाएगा और वह स्वामी या अधिभोगी से इस अधिनियम के अधीन कर की बकाया के रूप में वसूलीय होगा ।
213. नाली रहित परिसरों से जल की निकासी-(1) जहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी की राय में किसी परिसर में प्रभावशील जल निकास का पर्याप्त साधन नहीं है और उक्त परिसर के किसी भाग से तीस मीटर से अनधिक की दूरी पर कोई छावनी नाली या गन्दगी और अन्य प्रदूषित और घृणाजनक पदार्थ के निस्सारण के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा अनुमोदित कोई स्थान है, वहां वह अधिकारी लिखित सूचना द्वारा, उक्त परिसर के स्वामी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह-
(क) ऐसी छावनी नाली में या स्थान में गिरने वाली नाली बनाए;
(ख) ऐसे सभी साधित्रों और फिटिंगों की व्यवस्था करे और उन्हें लगाए जो उक्त परिसर की गन्दगी और अन्य प्रदूषित और घृणाजनक पदार्थ को एकत्रित और ग्रहण करने तथा उसे वहां से प्रवाहित करने के लिए और ऐसी नाली को प्रभावशील ढंग से फ्लश करने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी को आवश्यक प्रतीत हो;
(ग) किसी ऐसी विद्यमान नाली या अन्य साधित्र या चीज को हटाए जो जल निस्सारण के लिए प्रयुक्त है या प्रयोग में लाए जाने के लिए आशयित है, जो स्वास्थ्य के लिए क्षतिकर है;
(घ) खुली नाली के स्थान पर बन्द नाली की व्यवस्था करे या किसी अन्य साधित्र या चीज की, नए रूप से या किसी विद्यमान साधित्र या चीज के स्थान पर, व्यवस्था करे या विद्यमान खुली नाली और साधित्र या चीज के स्थान पर, जो स्वास्थ्य के लिए क्षतिकर है या हो सकती है, बन्द नाली और ऐसे अन्य साधित्र या चीज की या दोनों की, व्यवस्था करे;
(ङ) ऐसे सभी साधित्र और फिंटिग की व्यवस्था करे और उन्हें लगाए जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भवन के फर्शों और गैलरियों से, तब जब उन्हें धोया जाए, बेकार जल को एकत्रित करने और ग्रहण करने और उन्हें नालियों से होकर अधोगामी पाइपों द्वारा प्रवाहित करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक प्रतीत हो जिससे कि ऐसे बेकार जल को सीधे ही पथ में या परिसर के किसी निम्नतर भाग में गिरने से रोका जा सके;
(च) किसी ऐसी विद्यमान नाली को, जो अनुपयुक्त, अपर्याप्त या त्रुटिपूर्ण है, सुधारने या पुनः रूप देने का कोई कार्य पूरा करे
(2) जहां किसी ऐसी दशा में, जिसके लिए उपधारा (1) में उपबंध नहीं किया गया है, किसी परिसर की बाबत मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि उसमें प्रभावशील जल निकास का पर्याप्त साधन नहीं है, वहां वह परिसर के स्वामी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह-
(क) ऐसी सूचना में विहित किन्तु परिसर के किसी भाग से तीस मीटर से अनधिक दूरी तक नाली निर्मित करे; अथवा
(ख) ढका हुआ मलकुण्ड या सिक्तनगर्त तथा ऐसे मलकुंड या सिक्तनगर्त में गिरने वाली नाली या नालियां निर्मित करे ।
(3) उपधारा (2) के अधीन किसी नाली के निर्माण के लिए किसी अध्यपेक्षा में उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट ब्यौरों में से कोई ब्यौरा हो सकेगा ।
214. नए परिसरों का नालियों के बिना न बनाया जाना-(1) किसी छावनी में कोई परिसर बनाना या पुनः बनाना या ऐसे परिसर का अधिभोग करना तब तक विधिपूर्ण नहीं होगा जब तक-
(क) उसमें ऐसे आकार, साम्रगी और वर्णन की तथा ऐसे स्तर पर और ऐसी ढाल वाली नाली का निर्माण नहीं कर कर दिया जाए जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ऐसे परिसर से प्रभावशील जल निकास के लिए आवश्यक प्रतीत हो;
(ख) ऐसे परिसर में ऐसे साधित्रों और फिटिंगों की व्यवस्था न कर दी गई हो और न लगा दिए गए हों जो उक्त परिसर में से गंदगी और अन्य प्रदूषित और घृणाजनक पदार्थों को एकत्रित या ग्रहण करने और वहां वे प्रवाहित करने के लिए तथा उक्त परिसर की नाली और उससे संबद्ध प्रत्येक फिक्सचर को प्रभावशील रूप से फ्लश करने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी को आवश्यक प्रतीत हो ।
(2) इस प्रकार निर्मित नाली परिसर से तीस मीटर से अनधिक दूरी पर स्थित छावनी नाली में गिरेगी; किन्तु यदि उतनी दूरी के भीतर कोई छावनी नाली स्थित नहीं है तो ऐसी नाली उतनी दूरी के भीतर स्थित किसी मलकुंड में गिरेगी जो दूरी मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा इस प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट की जाए ।
215. परिसरों के समूह या ब्लाक से संयुक्त संक्रियाओं द्वारा जल निकास करने की शक्ति-(1) यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि परिसरों के किसी समूह या ब्लाक में से जल का निकास पृथक्तः करने की अपेक्षा संयुक्त रूप से करना अधिक मितव्ययितापूर्ण या लाभप्रद हो सकता है, और पर्याप्त आकार की छावनी नाली पहले से ही विद्यमान है या परिसरों के किसी समूह या ब्लाक के किसी भाग के तीस मीटर के भीतर निर्मित होने वाली है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी परिसरों के समूह या ब्लाक का जल निकास संयुक्त संक्रियाओं द्वारा करा सकेगा ।
(2) परिसरों के किसी समूह या ब्लाक की बाबत उपधारा (1) के अधीन किसी संकर्म को पूरा करने में किया गया व्यय ऐसे परिसरों के स्वामियों द्वारा ऐसे अनुपात में संदत्त किया जाएगा जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवधारित करे और वह उनसे इस अधिनियम के अधीन कर की बकाया के रूप में वसूलीय होगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसे किसी संकर्म के प्रारम्भ होने के पन्द्रह दिन से अन्यून पूर्व प्रत्येक ऐसे स्वामी को-
(क) प्रस्थापित संकर्म के स्वरूप की लिखित सूचना; और
(ख) उसके सम्बन्ध में उपगत किए जाने वाले व्यय का और ऐसे व्ययों का, जो अनुपात उसके द्वारा संदेय है, प्राक्कलन, देगा ।
(4) मुख्य कार्यपालक अधिकारी परिसरों के ऐसे समूह के या ब्लाक के स्वामियों से इस धारा के अधीन निष्पादित संकर्म को बनाए रखने की अपेक्षा कर सकेगा ।
216. कतिपय दशाओं में प्राइवेट नालियों को बन्द करने या उनका उपयोग सीमित करने की शक्ति-जहां किसी परिसर को छावनी नाली से जोड़ने वाली नाली ऐसे परिसरों से जल के प्रभावशील निकास के लिए पर्याप्त है और अन्यथा आपत्ति रहित है किन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी की राय में छावनी की साधारण जल निकास प्रणाली के अनुकूल नहीं है तो वह परिसर के स्वामी को संबोधित लिखित सूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगा कि-
(क) ऐसी नाली को बन्द कर दिया जाए, काम में न लाया जाए या नष्ट कर दिया जाए और उस प्रयोजन के लिए आवश्यक कोई कार्य पूरा किया जाए; अथवा
(ख) ऐसी नाली का उपयोग उस तारीख से, जो इस निमित्त सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, केवल गन्दगी और प्रदूषित जल के लिए या केवल वर्षा जल और अप्रदूषित अवमृदा जल के लिए किया जाए:
परन्तु-
(i) मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा कोई नाली खंड (क) के अधीन इस शर्त पर ही बन्द की जा सकेगी, रोकी जा सकेगी या नष्ट की जा सकेगी, अन्यथा नहीं कि वह परिसर से जल निकास के लिए वैसी ही प्रभावशील और किसी छावनी नाली से जुड़ने वाली नाली की व्यवस्था करे, जैसी वह ठीक समझे; और
(ii) बोर्ड द्वारा इस प्रकार व्यवस्था की गई किसी नाली के और खंड (क) के अधीन किए गए किसी संकर्म के निर्माण का व्यय छावनी निधि में से सदंत्त किया जा सकेगा ।
217. स्वामी से भिन्न व्यक्ति द्वारा नाली का उपयोग-(1) जहां किन्हीं परिसरों के स्वामी से आवेदन प्राप्त होने पर या अन्यथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी की राय है कि परिसरों से छावनी नाली में प्रभावशील जल निकास का एकमात्र या सर्वाधिक सुविधापूर्ण उपाय अन्य व्यक्ति की नाली से होकर ही है वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी लिखित सूचना द्वारा, ऐसी नाली के स्वामी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह सूचना में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर यह हेतुक दर्शित करे कि इस धारा के अधीन आदेश क्यों न किया जाए ।
(2) जहां विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर कोई हेतुक दर्शित नहीं किया जाता है या दर्शित किया गया हेतुक मुख्य कार्यपालक अधिकारी को अविधिमान्य या अपर्याप्त प्रतीत होता है वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी लिखित आदेश द्वारा या तो परिसर के स्वामी को नाली का उपयोग करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा या उसको उसका संयुक्त स्वामी घोषित कर सकेगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन किए गए आदेश में निम्नलिखित की बाबत निदेश अन्तर्विष्ट किए जा सकेंगेः-
(क) परिसर के स्वामी द्वारा भाटक या प्रतिकर का संदाय;
(ख) पूर्वोक्त नाली से परिसर को जोड़ने के प्रयोजन के लिए परिसरों के लिए नाली का निर्माण;
(ग) सहायकों और कर्मकारों के साथ सभी उचित समयों पर उस भूमि में प्रवेश जिसमें पूर्वोक्त नाली स्थित है;
(घ) पूर्वोक्त नाली को बनाए रखने, उसकी मरम्मत करने, उसे फ्लश, साफ करने तथा खाली करने के लिए पक्षकारों के तत्संबंधी उत्तरदायित्व ।
218. मल नालियों और वर्षा जल नालियों का पृथक्-पृथक् होना-इस अध्याय में जहां भी यह उपबन्धित है कि किसी परिसर से जल के प्रभावशील निकास के लिए कदम उठाए जाएंगे या उठाए जा सकते हैं वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी यह अपेक्षा करने के लिए सक्षम होगा कि गन्दगी और प्रदूषित जल के लिए एक नाली हो और वर्षा जल तथा अप्रदूषित अवमृदा जल के लिए सर्वथा पृथक्-पृथक् नाली हो या वर्षा जल और अप्रदूषित अवमृदा जल, दोनों के लिए एक पृथक् नाली हो और उनमें से प्रत्येक पृथक् छावनी नालियों में या अन्य उपयुक्त स्थानों में गिरती हो ।
219. संतोषप्रद जल निकास के लिए कतिपय संकर्मों का निष्पादन करने की स्वामी से अपेक्षा करने की शक्ति-मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी परिसर से जल के पर्याप्त निकास के प्रयोजन के लिए लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा, कि-
(क) दो या अधिक भवनों के बीच का कोई प्रांगण, वीथि या रास्ता ऐसे भवनों के स्वामी या स्वामियों द्वारा ऐसी सामग्रियों से और ऐसी रीति से, जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा अनुमोदित की जाए, पटवा दिया जाए, और
(ख) ऐसे पटाव की उचित मरम्मत की जाती रहे ।
220. नालियों के गिरने और मल संग्रह के स्थान नियत करना-मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिस स्थान या जिन स्थानों को उपयुक्त समझता है वहां पर सभी छावनी नालियों या उनमें से किन्हीं को गिरवा सकेगा और ऐसा मल वहां संग्रह करा सकेगा:
परन्तु ऐसा कोई स्थान, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व इस धारा में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों में से किसी के लिए प्रयुक्त नहीं हुआ है, ऐसे प्रारंभ के पश्चात् बोर्ड के अनुमोदन के बिना प्रयोग नहीं किया जाएगा:
परन्तु यह और कि उस तारीख को और उसके पश्चात् जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियत करे, कोई मल किसी जलमार्ग में तब तक नहीं छोड़ा जाएगा जब तक कि उसका इस प्रकार अभिक्रियान्वयन न कर लिया जाए कि उससे उस जल की, जिसमें उसे छोड़ा जाता है, शुद्धता और क्वालिटी पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ेगा ।
प्रकीर्ण
221. अनुज्ञा के बिना किसी जल संकर्म और नालियों से कनेक्शन न दिया जाना-मुख्य कार्यपालक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना कोई व्यक्ति किसी भी प्रयोजन के लिए किसी समय ऐसी किसी नाली से, जो धारा 210 में निर्दिष्ट है या किसी जल संकर्म से जिसका निर्माण बोर्ड ने किया है या जिसका अनुरक्षण बोर्ड करता है या जो बोर्ड में निहित है, न तो कोई कनेक्शन या संयोजन करेगा और न कराएगा ।
222. नालियों या जल संकर्मों के ऊपर किसी भवन, रेल और प्राइवेट पथ का अनुज्ञा के बिना बनाया या निर्मित न किया जाना-(1) (क) केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा के बिना किसी छावनी नाली या किसी जल संकर्म के ऊपर जो बोर्ड द्वारा निर्मित या अनुरक्षित है या उसमें निहित हैं, कोई रेल संकर्म नहीं किया जाएगा ।
(ख) यदि केन्द्रीय सरकार की लिखित अनुज्ञा के बिना पूर्वोक्त रूप में किसी नाली या जल संकर्म के ऊपर कोई रेल संकर्म किया जाता है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी उसे हटा सकेगा या उसकी बाबत अन्यथा ऐसी कार्रवाई कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(2) (क) बोर्ड के अनुमोदन के बिना किसी छावनी नाली पर या बोर्ड के द्वारा सन्निर्मित या उसके द्वारा अनुरक्षित या उसमें निहित किसी जल संकर्म पर किसी प्राइवेट पथ का सन्निर्माण और भवन, दीवार, बाड़ या अन्य संरचना खड़ी नहीं की जाएगी ।
(ख) यदि बोर्ड की लिखित अनुज्ञा के बिना यथा पूर्वोक्त किसी नाली या जल संकर्म पर कोई प्राइवेट पथ सन्निर्मित किया जाता है या कोई भवन, दीवार या बाड़ या सरंचना खड़ी की जाती है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी उसे हटा सकेगा या उसकी बाबत अन्यथा ऐसी कार्रवाई कर सकेगा जो ठीक समझे ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा ऐसा करने में उपगत व्यय प्राइवेट पथ या भवन, बाड़ या दीवार या अन्य संरचना के, यथास्थिति, स्वामी द्वारा या रेल प्रशासन द्वारा या अपराध करने वाले व्यक्ति द्वारा संदत्त किया जाएगा और इस अधिनियम के अधीन कर की बकाया के रूप में वसूलीय होगा ।
223. जलवाही सेतुओं, लाइनों, आदि के लिए सम्पत्ति के उपयोग के अधिकार-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी स्थावर सम्पत्ति के ऊपर से, नीचे से, साथ-साथ या आर-पार, चाहे वह सम्पत्ति छावनी की स्थानीय सीमाओं के भीतर है या बाहर उस संपत्ति का अर्जन किए बिना, जलवाही सेतु, नलिका या मुख्य प्रणाल की लाइनें या पाइप या नालियां डाल सकेगा और उनका अनुरक्षण कर सकेगा, तथा किन्हीं जलवाही सेतुओं, नलिकाओं या मुख्य प्रणाल की लाइनों या पाइपों या नालियों के परीक्षण, मरम्मत, परिवर्तन या हटाने के प्रयोजन के लिए किसी भी समय किसी ऐसी संपत्ति पर प्रवेश कर सकेगा जिसके ऊपर से, नीचे से, साथ-साथ या आर-पार कोई जलवाही सेतु, नलिकाएं या मुख्य प्रणाल की लाइनें या पाइप या नलियां डाली गई हैं :
परन्तु बोर्ड को उस संपत्ति में, जिसके ऊपर, नीचे, साथ-साथ या आर-पार कोई जलवाही सेतु, नलिका या मुख्य प्रणाल की लाइन या पाइप या नाली डाली गई है, उपयोग के अधिकार से भिन्न कोई अन्य अधिकार अर्जित नहीं होगा ।
(2) उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियां, संघ में निहित या केन्द्रीय सरकार या रेल प्रशासन के नियंत्रण या प्रबन्ध के अधीन या किसी स्थानीय प्राधिकारी में निहित किसी संपत्ति के संबंध में, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या रेल प्रशासन या स्थानीय प्राधिकारी की अनुज्ञा से ही और इस निमित्त बनाई गई किन्हीं उपविधियों के अनुसार ही प्रयोक्तव्य होंगी, अन्यथा नहीं:
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसी अनुज्ञा के बिना किसी ऐसे विद्यमान संकर्म में, जिसकी प्रकृति या स्थिति में कोई फेरफार नहीं किया जाना है, मरम्मत, नवीकरण या संशोधन कर सकेगा, यदि ऐसी मरम्मत, नवीकरण या संशोधन जल प्रदाय, जल निकास या मल संग्रहण को निर्विघ्न रूप से बनाए रखने के लिए अत्यावश्यक है अथवा वह इस प्रकार का है कि उसमें कोई विलम्ब स्वस्थ मानव जीवन या संपत्ति के लिए खतरनाक होगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी इस धारा द्वारा उसे प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग करने में जहां तक संभव हो सके कम से कम नुकसान और असुविधा पहुंचाएगा और यदि कोई नुकसान या असुविधा उसके द्वारा पहुंचाई जाती है तो उसके लिए पूर्ण प्रतिकर देगा ।
224. अन्य व्यक्तियों की भूमि से होकर पाइप और नालियां डालने की परिसर के स्वामी की शक्ति-(1) यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ऐसा प्रतीत होता है कि किसी परिसर में जल प्रदाय करने और उससे जल का निकास करने का एकमात्र, या सर्वाधिक सुविधापूर्ण उपाय अन्य व्यक्ति की स्थावर संपत्ति के ऊपर से, नीचे से, साथ-साथ या आर-पार कोई पाइप या नाली डालना या ले जाना ही है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी लिखित आदेश द्वारा, परिसर के स्वामी को ऐसी स्थावर संपत्ति के ऊपर से, नीचे से, साथ-साथ या आर-पार ऐसा पाइप या ऐसी नाली डालने या लगाने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा :
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसा कोई आदेश करने के पूर्व स्थावर संपत्ति के स्वामी को, ऐसे समय के भीतर जो इस निमित्त बनाई गई उपविधियों द्वारा विहित किया जाए, यह हेतुक दर्शित करने का कि ऐसा आदेश क्यों न किया जाए, उचित अवसर देगा:
परन्तु यह और कि परिसर का स्वामी उस संपत्ति में जिसके ऊपर से, नीचे से, साथ-साथ या आर-पार कोई पाइप या नाली डाली जाती है या लगाई जाती है, उपयोग के अधिकार से भिन्न कोई अन्य अधिकार अर्जित नहीं करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन आदेश किए जाने पर, परिसर का स्वामी ऐसी स्थावर सम्पत्ति के ऊपर से, नीचे से, साथ-साथ या आर-पार पाइप या नाली डालने या उसकी मरम्मत करने के प्रयोजन के लिए, ऐसा करने के अपने आशय की युक्तियुक्त सूचना देने के पश्चात्, सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच किसी भी समय अपने सहायकों और कर्मकारों के साथ ऐसी स्थावर सम्पत्ति पर प्रवेश कर सकेगा ।
(3) इस धारा के अधीन कोई पाइप या नाली डालने या लगाने में स्थावर सम्पत्ति को, जहां तक संभव हो सके, कम से कम नुकसान पहुंचाया जाएगा और परिसर का स्वामी-
(क) पाइप या नाली यथासाध्य न्यूनतम समय में डलवाएगा या बनवाएगा;
(ख) ऐसा पाइप डालने या ऐसी नाली बनाने के प्रयोजन के लिए खोदी गई, तोड़ी गई या हटाई गई किसी भूमि को अपने खर्चे पर, और यथासाध्य न्यूनतम समय में भरेगा, पूर्वस्थिति में लाएगा और ठीक करेगा; और
(ग) स्थावर सम्पत्ति के स्वामी और किसी अन्य व्यक्ति को, जिसे ऐसा पाइप या नाली के बनाने या डालने के कारण नुकसान हुआ हो, प्रतिकर देगा ।
(4) यदि किसी ऐसी स्थावर सम्पत्ति का स्वामी, जिस सम्पत्ति के ऊपर से, नीचे से, साथ-साथ या आर-पार कोई पाइप या नाली इस धारा के अधीन उस समय डाली गई या बनाई गई थी जब ऐसी सम्पत्ति पर कोई निर्माण नहीं हुआ था, उस पर कोई भवन बनाने की वांछा करता है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी परिसर के स्वामी से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस पाइप या नाली को ऐसी रीति से, जो उसके द्वारा अनुमोदित की जाए, बन्द कर दे, हटा दे या उसका मार्ग बदल दे और उस स्थावर सम्पत्ति को इस प्रकार भर दे, पूर्वस्थिति में ला दे और ठीक कर दे मानो उस सम्पत्ति के ऊपर से या नीचे से या साथ-साथ या आर-पार कोई पाइप या नाली डाली या लगाई नहीं गई हो :
परन्तु तब तक कोई भी अध्यपेक्षा नहीं की जाएगी जब तक मुख्य कार्यपालक अधिकारी की राय में, प्रस्थापित भवन के निर्माण या निरापद उपभोग के लिए ऐसे पाइप या नाली को बन्द करना, हटाना या उसका मार्ग बदलना आवश्यक या समीचीन न हो ।
225. रेल की सतह, आदि को ऊंचा या नीचा करने की अपेक्षा करने की शक्ति-यदि बोर्ड किसी रेल लाइन के आर-पार पाइप या नाली डालता या लगाता है या जल प्रदाय या जल निकास से संबंधित कोई अन्य कार्य करता है तो वह, केन्द्रीय सरकार की मंजूरी से और छावनी निधि के खर्चे पर, रेल प्रशासन से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह रेल की सतह को ऊँचा या नीचा करे ।
226. दायित्वाधीन व्यक्ति को सूचना देने के पश्चात् कार्य का निष्पादन करने की शक्ति-(1) जब किसी व्यक्ति से इस अध्याय के उपबन्धों के अधीन कोई कार्य निष्पादित करने की अपेक्षा की जाए या वह उसे निष्पादित करने के दायित्वाधीन हो तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसे व्यक्ति को, ऐसे समय के भीतर जो इस प्रयोजन के लिए उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, ऐसे कार्य को निष्पादित करने का अवसर देने के पश्चात्, ऐसे कार्य को इस अधिनियम और इस निमित्त बनाई गई किन्हीं उपविधियों के उपबंधों के अनुसार निष्पादित करा सकेगा ।
(2) किसी ऐसे कार्य के निष्पादन में मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा उपगत या उपगत किए जाने के लिए सम्भावित व्यय उक्त व्यक्ति द्वारा संदेय होगा तथा ऐसे कार्य के अनुसरण या ऐसे कार्य के कारण संभव किन्हीं सुख-सुविधाओं और सुविधाओं का उपभोग किए जाने के संबंध में मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा उपगत व्यय ऐसी सुख-सुविधाओं का उपभोग करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा संदेय होगा ।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यय उसके लिए दायी व्यक्ति या व्यक्तियों से इस अधिनियम के अधीन कर की बकाया के रूप में वसूलीय होंगे ।
227. नालियों या मल-कुंडों के संवातन के लिए शाफ्ट आदि लगाने की शक्ति-मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी भी नाली या मलकुंड के संवातन के प्रयोजन के लिए, चाहे वह बोर्ड में निहित हो या नहीं, किसी परिसर या किसी भवन के बाहर या किसी पेड़ के साथ कोई शाफ्ट या ऐसा पाइप, खड़ा कर सकेगा या लगा सकेगा जो उसे आवश्यक प्रतीत हो ।
228. ऐसी नालियों, आदि की जांच और परीक्षण करने की शक्ति, जिनकी बाबत यह विश्वास है कि वे त्रुटिपूर्ण हैं-(1) जहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि ऐसा विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हैं कि कोई प्राइवेट नाली या मलकुंड ऐसी दशा में है जो स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल न्यूसेन्स है या छावनी नाली में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः जुड़ने वाली कोई प्राइवेट नाली इतनी त्रुटिपूर्ण है कि उसमें अवमृदा जल प्रवेश कर सकता है वहां वह इसकी स्थिति की जांच कर सकेगा, और उस प्रयोजन के लिए दबावाधीन जल द्वारा परीक्षण से भिन्न कोई परीक्षण कर सकेगा और यदि वह आवश्यक समझे तो, जमीन को खुदवा सकेगा ।
(2) यदि जांच किए जाने पर कोई नाली या मलकुंड उचित दशा में पाया जाता है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी अपने द्वारा खुदवाई गई किसी भूमि को, यथाशीघ्र पूर्वस्थिति में लाएगा और यदि उसके द्वारा नुकसान हुआ है तो उसे पूरा करेगा ।
229. बोर्ड द्वारा मल का थोक परिदान-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा विहित प्राधिकारी को छावनी क्षेत्र के मल का थोक में परिदान करने के लिए, ऐसे प्रभारों के अधीन रहते हुए, जो अन्य प्राधिकारी और बोर्ड के बीच हुए करार द्वारा अवधारित किए जाएं, सभी मल का थोक परिदान प्राप्त करेगा ।
(2) उपधारा (1) में वर्णित करार उसमें इस अनुबंध के लिए भी उपबंध करेगा कि बोर्ड द्वारा उस अन्य प्राधिकरण को किए जाने वाले संदायों के बारे में किसी विवाद की दशा में मामला केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा जिसका विनिश्चय अन्तिम और दोनों पक्षकारों पर आबद्धकर होगा ।
230. मरम्मत, आदि के लिए सरकारी अभिकरणों का नियोजन-केन्द्रीय सरकार, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह निदेश दे सकेगी कि ऐसा कोई विनिर्दिष्ट संकर्म, मरम्मत, नवीकरण या प्रतिस्थापन जो बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से इस अध्याय के अधीन अपने ऊपर लिया जाता है, बोर्ड की ओर से केन्द्रीय सरकार द्वारा निष्पादित किया जाएगा तथा बोर्ड उसके प्रभारों का संदाय ऐसी दरों पर और ऐसे निबन्धनों के अधीन रहते हुए करेगा जो किसी स्थानीय प्राधिकारी की ओर से उस सरकार द्वारा निर्मित संकर्मों की दशा में तत्समय लागू हों ।
231. कार्य का अनुज्ञप्त नलसाज द्वारा किया जाना-(1) इस अध्याय में वर्णित कोई संकर्म अनुज्ञप्त नलसाज से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा निष्पादित नहीं किया जाएगा और कोई व्यक्ति अनुज्ञप्त नलसाज के सिवाय किसी अन्य व्यक्ति को किसी ऐसे संकर्म के निष्पादन की अनुज्ञा नहीं देगा:
परन्तु, यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी की राय में कोई संकर्म तुच्छ प्रकृति का है तो, वह ऐसे कार्य के अनुज्ञप्त नलसाज से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा निष्पादन के लिए अनुज्ञा लिखित रूप में दे सकेगा ।
(2) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो किसी संकर्म के निष्पादन के लिए किसी अनुज्ञप्त नलसाज को नियोजित करता है, ऐसी अपेक्षा किए जाने पर, मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ऐसे नलसाज का नाम भेजेगा ।
(3) यदि कोई संकर्म उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार किए जाने से अन्यथा निष्पादित किया जाता है तो ऐसा संकर्म, इस अधिनियम के अधीन उस व्यक्ति को, जिसकी प्रेरणा पर ऐसा संकर्म निष्पादित किया गया है, अभियोजित करने के बोर्ड के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, मुख्य कार्यपालक अधिकारी के विवेकानुसार, विखंडित किए जाने के लिए दायी होगा ।
(4) बोर्ड अनुज्ञप्त नलसाजों के मार्गदर्शन के लिए उपविधियां बना सकेगा और ऐसी सभी उपविधियों की प्रति बोर्ड द्वारा नलसाज को मंजूर की गई प्रत्येक अनुज्ञप्ति के साथ संलग्न की जाएगी ।
(5) बोर्ड समय-समय पर इस अध्याय के अधीन या उसके प्रयोजनों में से किसी के लिए अनुज्ञप्त नलसाज द्वारा किए गए किसी कार्य के लिए उसको संदत्त प्रभार विहित कर सकेगा ।
(6) कोई भी अनुज्ञप्त नलसाज, उपधारा (5) में निर्दिष्ट किसी संकर्म के लिए, उस उपधारा के अधीन विहित प्रभारों से अधिक प्रभार की न तो मांग करेगा और न लेगा ।
(7) बोर्ड-
(क) सभी अनुज्ञप्त नलसाजों पर पर्याप्त नियंत्रण रखने के लिए;
(ख) उनके द्वारा किए गए सभी संकर्म के निरीक्षण के लिए; और
(ग) किसी अनुज्ञप्त नलसाज द्वारा किए गए कार्य और उपयोग में लाई गई सामग्री की क्वालिटी, कार्य के निष्पादन में हुए विलम्ब और उसके द्वारा मांगे गए प्रभारों की बाबत परिसर के स्वामी या अधिभोगियों द्वारा किए गए परिवादों की सुनवाई और निपटारे के लिए,
उपबन्ध करने के लिए उपविधियां बनाएगा ।
(8) कोई भी अनुज्ञप्त नलसाज इस धारा के अधीन बनाई गई उपविधियों में से किसी का उल्लंघन नहीं करेगा या इस अधिनियम के अधीन किसी संकर्म का असावधानीपूर्वक या उपेक्षापूर्वक निष्पादन नहीं करेगा अथवा खराब सामग्री, साधित्र या फिटिंगों का प्रयोग नहीं करेगा ।
(9) यदि कोई अनुज्ञप्त नलसाज उपधारा (8) का उल्लंघन करता है तो, चाहे उसका इस अधिनियम के अधीन अभियोजन किया जाए या नहीं, उसकी अनुज्ञप्ति निलंबित या रद्द की जा सकेगी ।
232. कतिपय कार्यों का प्रतिषेध-(1) कोई भी व्यक्ति-
(क) बोर्ड या मुख्य कार्यपालक अधिकारी के प्राधिकार के अधीन कार्य कर रहे किसी व्यक्ति द्वारा किसी संकर्म की लाइन डालने में जानबूझकर बाधा नहीं डालेगा या ऐसे संकर्म की लाइन डालने के प्रयोजन के लिए भूमि में लगाए गए किसी स्तम्भ, खंबे या खूंटी को नहीं उखाड़ेगा या नहीं हटाएगा, या इसी प्रयोजन के लिए बनाए गए किसी संकर्म को विकृत या नष्ट नहीं करेगा; अथवा
(ख) बोर्ड के किसी ताले, काक, वाल्व, पाइप, मीटर या अन्य संकर्म या साधित्र को जानबूझकर या उपेक्षापूर्वक नहीं तोड़ेगा, क्षति नहीं पहुंचाएगा, चालू नहीं करेगा, नहीं खोलेगा, बन्द नहीं करेगा या उसमें अन्यथा हस्तक्षेप नहीं करेगा; अथवा
(ग) बोर्ड के किसी जल संकर्म से बहाव में अवैध रूप से बाधा नहीं डालेगा या उसे फ्लश नहीं करेगा या नहीं निकालेगा या उसकी दिशा में परिवर्तन नहीं करेगा या उसमें से जल नहीं लेगा; अथवा
(घ) बोर्ड के किसी मल संकर्म में से मल के बहाव में अवैध रूप से बाधा नहीं डालेगा या उसे फ्लश नहीं करेगा, नहीं निकालेगा या उसकी दिशा में परिवर्तन नहीं करेगा या उसे नहीं लेगा अथवा बोर्ड द्वारा अनुरक्षित किसी विद्युत पारेषण लाइन को नहीं तोड़ेगा या नुकसान नहीं पहुंचाएगा; अथवा
(ङ) बोर्ड के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अध्याय के अधीन उसके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा नहीं डालेगा या किसी जल या मल संकर्म की बाबत प्रवेश करने, निरीक्षण करने, परीक्षण करने या जांच करने के लिए उसे आवश्यक साधन देने से इंकार नहीं करेगा या जानबूझकर उपेक्षा नहीं करेगा; अथवा
(च) किसी जल संकर्म में या उस पर स्नान नहीं करेगा या उसमें किसी जीव-जन्तु को नहीं धोएगा या नहीं छोड़ेगा या प्रवेश नहीं कराएगा या किसी जल संकर्म में कोई कूड़ा, रेत या गंदगी नहीं फेंकेगा या उसमें कोई वस्त्र, ऊन या चमड़ा या किसी जीव-जन्तु की खाल नहीं धोएगा या साफ नहीं करेगा या किसी सिंक या नाली या किसी वाष्प इंजन या बायलर के जल को या किसी प्रदूषित जल को किसी जल संकर्म की ओर नहीं मोड़ेगा या लाएगा या ऐसा कोई अन्य कार्य नहीं करेगा जिससे किसी जल संकर्म का जल गंदा हो जाए या उसके गंदे हो जाने की संभावना हो ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (ख) की कोई बात किसी उपभोक्ता को उसके परिसर को जल का प्रदाय करने वाले सर्विस पाइप पर लगी स्टाप काक को बन्द करने की बाबत वहां लागू नहीं होगी, जहां उसने ऐसे किसी अन्य उपभोक्ता की सहमति अभिप्राप्त कर ली है जिसका जल प्रदाय स्टाप काक बन्द करने से प्रभावित होगा ।
अध्याय 10
नगर योजना और भवनों आदि पर नियंत्रण
233. भूमि उपयोग योजना तैयार करना-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी बोर्ड के अनुमोदन से छावनी में आने वाली भूमि के उपयोग के लिए एक स्थानिक योजना तैयार कराएगा जिसके अंतर्गत निम्नलिखित होगा-
(क) आवासीय, संस्थागत, वाणिज्यिक और अन्य क्रियाकलापों के लिए जोनों को निश्चित करना; और
(ख) किसी पथ में गलियों के संकुचन, कम प्रकाश, कम संवातन या नियमित या भवनों की अनियमित कतार के कारण घटिया समझे गए क्षेत्रों के लिए सुधार स्कीमें ।
(2) बोर्ड उपधारा (1) के अधीन तैयार की गई भूमि के उपयोग की योजना को स्थानीय समाचार पत्र में उसका सारांश प्रकाशित करके प्रचार करेगा ।
234. भवन बनाने के लिए मंजूरी-कोई भी व्यक्ति छावनी में की किसी भूमि पर कोई भवन-
(क) सिविल क्षेत्र से भिन्न क्षेत्र में, बोर्ड की पूर्व मंजूरी के बिना;
(ख) सिविल क्षेत्र में, मुख्य कार्यपालक अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना, न तो बनाएगा या न तो पुनः बनाएगा; और इस अध्याय में दिए गए उपबंधों और इस अधिनियम के अधीन भवनों के बनाने और पुनः बनाने के सम्बन्ध में बनाए गए नियमों और उपविधियों के अनुसार ही बनाएगा या पुनः बनाएगा, अन्यथा नहीं:
परन्तु यदि कोई परिनिर्मित या पुनःपरिनिर्मित भवन लोक प्रयोजनों के लिए आशयित है तो वह निःशक्त व्यक्तियों के लिए पहुंच योग्य और बाधा मुक्त होगी ।
235. नए भवनों संबंधी सूचना-(1) जो कोई किसी छावनी में कोई भवन बनाने या पुनः बनाने का आशय रखता है, वह अपने आशय की लिखित सूचना-
(क) जहां ऐसा बनाना या पुनः बनाना ऐसे क्षेत्र में है, जो सिविल क्षेत्र से भिन्न है, वहां बोर्ड को देकर;
(ख) जहां ऐसा बनाना या पुनः बनाना ऐसे क्षेत्र में है, जो सिविल क्षेत्र है, वहां कार्यपालक अधिकारी को देकर,
मंजूरी के लिए आवेदन करेगा ।
(2) इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए वह व्यक्ति भवन बनाने वाला या पुनः बनाने वाला समझा जाएगा जो-
(क) किसी भवन में कोई तात्त्विक परिवर्तन या वृद्धि करता है, अथवा
(ख) किसी भवन को मानव निवास के लिए स्थान के रूप में संपरिवर्तित करता है, जो मूलतः मानव निवास के लिए नहीं बनाई गई थी, अथवा
(ग) किसी भवन को मानव निवास के लिए एक से अधिक स्थानों में संपरिवर्तन करता है जो मूलतः एक ऐसे स्थान के रूप में बनाई गई थी, अथवा
(घ) मानव निवास के दो या अधिक स्थानों को उतने से अधिक स्थानों में परिवर्तित करता है, अथवा
(ङ) ऐसे किसी भवन को अस्तबल, पशुओं के लिए सायबान या गाय बांधने के स्थान के रूप में संपरिवर्तित करता है जो मूलतः मानव निवास के लिए बनाई गई थी; अथवा
(च) ऐसे किसी भवन को औषधालय, स्टाल, दुकान, भांडागार, गोदाम, कारखाना या गैरेज के रूप में संपरिवर्तित करता है जो मूलतः मानव निवास के लिए बनाई गई थी; अथवा
(छ) कोई ऐसा परिवर्तन करता है जिसकी बाबत यह विश्वास करने का कारण है कि यह संभाव्यता है कि किसी भवन की मजबूती या सुरक्षा पर अथवा जल निकासी, सफाई या आरोग्यता के बारे में किसी भवन की हालत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, अथवा
(ज) किसी भवन में ऐसा परिवर्तन करता है जिससे उस भवन की ऊंचाई अथवा उस द्वारा घिरा हुआ क्षेत्र या उसका घनक्षेत्र घट जाता है या बढ़ जाता है अथवा जिससे उस भवन के किसी कमरे का घनक्षेत्र उस न्यूनतम से कम हो जाता है जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों में किसी उपविधि द्वारा नियत है ।
236. विधिमान्य सूचना की शर्तें-(1) धारा 235 द्वारा अपेक्षित सूचना देने वाला व्यक्ति वह प्रयोजन विनिर्दिष्ट करेगा जिसके लिए उस भवन का उपयोग उद्दिष्ट है जिससे ऐसी सूचना सम्बन्धित है ।
(2) कोई भी सूचना तब तक विधिमान्य न होगी जब तक उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित जानकारी तथा ऐसी कोई अतिरिक्त जानकारी और नक्शे, जो इस अधिनियम के अधीन बनाई गई उपविधियों द्वारा अपेक्षित हों, उस सूचना के साथ मुख्य कार्यपालक अधिकारी का समाधान कर देने वाले रूप में न दिए गए हों ।
237. कुछ धाराओं के अधीन बोर्ड की शक्तियों का मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्रयोग किया जाना-धारा 238, धारा 241 की उपधारा (1), धारा 243, धारा 245 और धारा 248 के अधीन, उक्त धारा 248 की उपधारा (1) के उपबंध और उपधारा (2) के परन्तुक को अपवर्जित करते हुए बोर्ड की शक्तियों, कर्तव्यों और कृत्यों का प्रयोग या निर्वहन सिविल क्षेत्र में मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा किया जाएगा ।
238. मंजूरी देने या नामंजूर करने की बोर्ड की शक्ति-(1) बोर्ड, यथास्थिति, किसी भवन के बनाए जाने या पुनः बनाए जाने के लिए मंजूरी देने से इंकार कर सकेगा या उसके लिए मंजूरी बिना शर्त अथवा ऐसे निदेशों पर जैसे वह निम्नलिखित सब बातों या उनमें से किसी की बाबत लिखित रूप में देना ठीक समझे, दे सकेगा, अर्थात्ः-
(क) भवन के सामने छोड़ा जाने वाला खुला रास्ता या मार्ग,
(ख) वायु के अबाध संचरण और सफाई तथा आग लगने को रोकने को सुकर बनाने के लिए भवन के आस-पास छोड़ी जाने वाली खुली जगह,
(ग) भवन का संवातन, कमरों का न्यूनतम घनक्षेत्र तथा भवन जितनी मंजिलों की होना है उन मंजिलों की संख्या और ऊंचाई,
(घ) नालियों, शौचालयों, मूत्रालयों, चहबच्चों या गंदगियों के लिए अन्य पात्रों के लिए उपबन्ध और उनकी स्थिति,
(ङ) नींव की सतह और चौड़ाई, सबसे निचले फर्श की सतह तथा भवन की सरंचना की मजबूती,
(च) यदि भवन पथ से लगा हुआ है तो आस-पास के भवनों से उसकी अग्रभाग रेखा,
(छ) आग लगने की दशा में, भवन से बाहर निकलने के लिए प्रतिविहित साधन,
(ज) कमरों की बाहरी और बीच की दीवारों के लिए, फर्शों, अंगीठी और चिमनियों के लिए काम में लाई जाने वाली सामग्रियों और उसके निर्माण की रीति,
(झ) उस सबसे ऊंची मंजिल के ऊपर की छत की ऊंचाई और ढलान जिसमें मानव प्राणी रहते हैं अथवा रसोई का काम किया जाना है, और
(ञ) भवनों के संवातन और स्वच्छता पर असर डालने वाली कोई अन्य बात, तथा भवन का निर्माण या पुनःनिर्माण करने वाला कोई व्यक्ति हर विवरण की बाबत ऐसे सब लिखित निदेशों का अनुपालन करेगा ।
(2) बोर्ड, किसी ऐसे आधार पर, जो बोर्ड की राय में किसी विशिष्ट भवन पर प्रभाव डालने वाला है किसी भवन के निर्माण या पुनः निर्माण की मंजूरी देने से इंकार कर सकेगा:
परन्तु बोर्ड, किसी भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के लिए मंजूरी देने से इंकार करेगा, यदि ऐसा निर्माण या पुनः निर्माण धारा 240 के अधीन मंजूर की गई किसी सामान्य स्कीम के अनुरूप नहीं है ।
(3) बोर्ड उस भूमि पर, जो रक्षा संपदा अधिकारी के प्रबन्ध के अधीन है, भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के लिए मंजूरी देने के पूर्व उसके लिए आवेदन को यह अभिनिश्चित करने के लिए रक्षा संपदा अधिकारी को निर्देशित करेगा कि क्या ऐसे निर्माण या पुनः निर्माण के बारे में सरकार की ओर से कोई आक्षेप किया गया है तथा रक्षा संपदा अधिकारी उस आवेदन पर अपनी रिपोर्ट सहित उसे बोर्ड को उस तारीख के पश्चात् तीस दिन के अन्दर लौटा देगा जिसको वह आवेदन उसे प्राप्त हुआ है
(4) बोर्ड निम्नलिखित दशा में किसी भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के लिए मंजूरी देने से इंकार कर सकेगा-
(क) जब वह भूमि, जिस पर भवन के निर्माण या पुनः निर्माण की प्रस्थापना है, सरकार से पट्टे पर धृत है, यदि निर्माण या पुनः निर्माण से उस पट्टे के निबन्धनों के भंग का गठन होता है; अथवा
(ख) जब वह भूमि, जिस पर भवन का निर्माण या पुनः निर्माण करने की प्रस्थापना है, सरकार द्वारा प्रबंध के लिए बोर्ड को सौंप दी जाती है और यदि भवन के निर्माण या पुनः निर्माण करने से प्रबंध के लिए सौंपे जाने के निबन्धनों का भंग होता है या बोर्ड द्वारा, भूमि प्रबंध के सम्बन्ध में सरकार द्वारा जारी किए गए निदेशों में से किसी का, उल्लंघन होता है; अथवा
(ग) जब वह भूमि, जिस पर भवन निर्माण या पुनः निर्माण करने की प्रस्थापना है, सरकार से पट्टे पर धृत नहीं है यदि ऐसी भूमि पर निर्माण का अधिकार मंजूरी के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति और सरकार के बीच विवादग्रस्त है ।
(5) यदि बोर्ड भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के लिए मंजूरी देने से इंकार करने का विनिश्चय करता है, तो वह ऐसी इंकारी के कारण उस व्यक्ति को लिखित रूप से संसूचित करेगा जिसके द्वारा सूचना दी गई थी ।
(6) जहां कि बोर्ड इस धारा में विनिर्दिष्ट प्रकार का कोई आदेश विधिमान्य सूचना की प्राप्ति के पश्चात् एक मास के अन्दर पारित करने और उस व्यक्ति को, जिसने सूचना दी है, परिदत्त करने में उपेक्षा करता है या वैसा आदेश इतने समय के अन्दर पारित नहीं करता या उस व्यक्ति को परिदत्त नहीं करता तथा ऐसा व्यक्ति उस उपेक्षा या लोप की बाबत बोर्ड का ध्यान बोर्ड को रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजी गई लिखित संसूचना द्वारा तत्पश्चात् आकर्षित करता है, वहां यदि ऐसी उपेक्षा या लोप ऐसी संसूचना की तारीख से पन्द्रह दिन की अतिरिक्त कालावधि के लिए चालू रहता है, तो बोर्ड की बाबत यह समझा जाएगा कि उसने, यथास्थिति, भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के लिए मंजूरी दे दी है :
परन्तु ऐसे किसी मामले में, जिसको उपधारा (3) के उपबन्ध लागू होते हैं, उसमें विनिर्दिष्ट एक मास की अवधि की गणना उस तारीख से की जाएगी जिसको उस उपधारा में निर्दिष्ट बोर्ड को वह रिपोर्ट प्राप्त हुई है ।
239. कतिपय मामलों में भवन निर्माण या संकर्म को रोकने या हटाई गई चीजों के व्ययन का आदेश-(1) जहां किसी भवन का निर्माण या किसी संकर्म का निष्पादन धारा 238 में निर्दिष्ट मंजूरी के बिना या उसके प्रतिकूल या जिस शर्त के अधीन ऐसी मंजूरी दी गई है उसके उल्लंघन में या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाई गई उपविधियों के किन्हीं उपबंधों के उल्लंघन में प्रारम्भ किया गया है या किया जा रहा है वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी, ऐसी अन्य किसी कार्रवाई के अतिरिक्त जो इस अधिनियम के अधीन की जा सकती है, आदेश द्वारा उस व्यक्ति से जिसकी प्रेरणा पर भवन का निर्माण या संकर्म प्रारम्भ किया गया है, या किया जा रहा है, उसे तत्क्षण रोक देने की अपेक्षा कर सकेगा ।
(2) यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश का, जिसमें किसी व्यक्ति को भवन का निर्माण या संकर्म का निष्पादन रोकने का निदेश दिया गया है, अनुपालन नहीं किया जाता है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी पुलिस अधिकारी से अपेक्षा कर सकेगा कि वह परिसर से ऐसे व्यक्ति और उसके सभी सहायकों और कर्मकारों को ऐसे समय के भीतर जो उस अध्यपेक्षा में विनिर्दिष्ट किया जाए, हटा दे या किसी भवन के निर्माण या किसी कार्य के निष्पादन में प्रयोग की गई निर्माण सामग्री, औजार, मशीनरी, पाड़ या अन्य चीजों को अभिगृहीत कर ले और ऐसा पुलिस अधिकारी उस अध्यपेक्षा का तद्नुसार अनुपालन करेगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा अभिगृहीत कराई जाने वाली चीजों में से किसी का उसके द्वारा इस धारा की उपधारा (6) और उपधारा (7) में विनिर्दिष्ट रीति से व्ययन किया जाएगा ।
(4) उपधारा (2) के अधीन अध्यपेक्षा का अनुपालन हो जाने के पश्चात् यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी ठीक समझे तो वह किसी पुलिस अधिकारी या बोर्ड के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को परिसर की निगरानी यह सुनिश्चित करने की दृष्टि से करने के लिए, लिखित आदेश द्वारा, तैनात कर सकेगा कि भवन का निर्माण या संकर्म का निष्पादन जारी नहीं रखा जा रहा है ।
(5) जहां कोई पुलिस अधिकारी या बोर्ड का कोई अधिकारी या कर्मचारी उपधारा (4) के अधीन परिसर की निगरानी करने के लिए तैनात किया गया है वहां ऐसे तैनात किए जाने का खर्च उस व्यक्ति द्वारा संदत्त किया जाएगा जिसकी प्ररेणा पर ऐसा निर्माण या निष्पादन जारी रखा गया है या जिसे उपधारा (1) के अधीन सूचना दी गई थी, और वह ऐसे व्यक्ति से इस अधिनियम के अधीन कर के बकाया के रूप में वसूलीय होगा ।
(6) इस धारा के अधीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा हटवाई जाने वाली किन्हीं चीजों का जब तक कि उनका स्वामी उन्हें वापस लेने के लिए नहीं आता है और मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ऐसी चीजों के हटाने और भंडारण के लिए प्रभारों का संदाय नहीं करता है मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा सार्वजनिक नीलामी द्वारा या ऐसी अन्य रीति में जो वह ठीक समझे, व्ययन किया जाएगा:
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा ऐसी चीजों का व्ययन अभिग्रहण की तारीख और समय से, अविनश्वर चीजों की दशा में, पन्द्रह दिन की समाप्ति के पश्चात् और विनश्वर चीजों की दशा में, चौबीस घंटे के पश्चात् ही किया जाएगा ।
(7) उपधारा (6) के अधीन चीजों को हटाने और उनके भंडारण और उनके विक्रय के लिए प्रभार उनके विक्रय के आगमों में से संदत्त किए जाएंगे और अतिशेष, यदि कोई हो, ऐसे विक्रय की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर उनके लिए दावा किए जाने पर विक्रीत चीजों के स्वामी को संदत्त किया जाएगा और यदि ऐसा कोई दावा उक्त अवधि के भीतर नहीं किया जाता है तो उसे छावनी निधि में जमा कर दिया जाएगा ।
240. अतिसंकुलन आदि की साधारण स्कीम की मंजूरी देने की शक्ति-कमान का मुख्य महासमादेशक अधिकारी, प्रधान निदेशक के परामर्श से ऐसी सीमाओं के अन्दर जो मंजूरी में विनिर्दिष्ट की जाएं, भवन के निर्माण या पुनः निर्माण किए जाने में अतिसंकुलन को रोकने या सफाई के प्रयोजन के लिए या उन सीमाओं के अन्दर निवासी व्यक्तियों के हितों में या किसी अन्य प्रयोजन के लिए, सामान्य स्कीम की मंजूरी दे सकेगा और ऐसी स्कीम के अनुसरण में उन सीमाओं के अन्दर भवन के निर्माण या पुनःनिर्माण किए जाने पर निर्बन्धन अधिरोपित कर सकेगा :
परन्तु ऐसी किसी स्कीम को कमान का मुख्य महासमादेशक अधिकारी द्वारा तब तक मंजूरी नहीं दी जाएगी जब तक कि ऐसी लोक सूचना द्वारा, जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा स्थानीय रूप से प्रकाशित की जाए, ऐसे व्यक्तियों का, जिन पर प्रस्तावित स्कीम द्वारा प्रभाव पड़ा है या प्रभाव पड़ने की सम्भावना है, ऐसी सूचना के प्रकाशन के तीस दिन के भीतर, सूचना में विनिर्दिष्ट रीति से अपने आक्षेपों या सुझावों को फाइल करने का अवसर न दे दिया गया हो और मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसे आक्षेपों या सुझावों पर, यदि कोई हों, विचार करने के पश्चात् उन्हें अपनी सिफारिशों के साथ प्रधान निदेशक को भेजेगा ।
241. प्रतिकर-(1) किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे किसी नुकसान या हानि के लिए, जो किसी व्यक्ति को किसी भवन के निर्माण या पुनः निर्माण की मंजूरी देने से बार्ड के इंकार करने के परिणामस्वरूप अथवा धारा 238 की उपधारा (1) के अधीन बोर्ड द्वारा दिए गए किसी निदेश के सम्बन्ध में उठानी पड़ी है, किसी प्रतिकर का दावा नहीं किया जा सकेगा ।
(2) बोर्ड किसी भवन के स्वामी को ऐसे किसी वास्तविक नुकसान या हानि के लिए प्रतिकर देगा जो किसी भवन के पुनः निर्माण को प्रतिषिद्ध किए जाने के परिणामस्वरूप उस व्यक्ति को उठानी पड़ी है अथवा बोर्ड द्वारा की गई इस अपेक्षा के परिणामस्वरूप उस व्यक्ति को उठानी पड़ी है कि उस व्यक्ति की कोई भूमि पथ में जोड़ दी जाए:
परन्तु बोर्ड ऐसे किसी भवन के पुनः निर्माण का प्रतिषेध किए जाने की बाबत कोई प्रतिकर देने के लिए जिम्मेदार न होगा जो ऐसे इंकार से ठीक पूर्ववर्ती तीन या उससे अधिक वर्षों की कालावधि के लिए अस्तित्व में नहीं रही है अथवा मानव निवास के लिए उपयुक्त नहीं रहा है ।
242. पूरा करने की सूचना-प्रत्येक व्यक्ति जिसे, यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या बोर्ड द्वारा धारा 237 या धारा 238 के अधीन छावनी के किसी क्षेत्र में किसी भवन का निर्माण या पुनः निर्माण किए जाने की मंजूरी दी गई है, भवन का निर्माण या पुनः निर्माण किए जाने का काम पूरा करने के तीस दिन के भीतर, यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या बोर्ड को लिखित रूप में भवन निर्माण का काम पूरा करने की सूचना देगा, और, यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, या बोर्ड ऐसी सूचना की प्राप्ति पर, भवन का निरीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए कराएगा कि उक्त भवन, यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या बोर्ड द्वारा दी गई मंजूरी के अनुसार ही पूरा किया गया है ।
243. मंजूरी का व्यपगत होना-भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के लिए हर ऐसी मंजूरी, जो बोर्ड द्वारा इसमें इसके पूर्व उपबन्धित रीति से दी गई है या दी गई समझी जाती है, उस तारीख से दो वर्ष के लिए उपलब्ध रहेगी जिसको वह दी गई है तथा यदि ऐसे मंजूर किए गए भवन का बनाया जाना उस व्यक्ति द्वारा, जिसने वह मंजूरी अभिप्राप्त की थी अथवा उससे व्युत्पन्न अधिकार के अधीन विधिपूर्णतः दावा करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा उस कालावधि के अन्दर शुरू नहीं किया जाता तो उसका बनाया जाना तत्पश्चात् तब के सिवाय शुरू न किया जाएगा जबकि मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने उसके लिए आवेदन किए जाने पर उस कालावधि का बढ़ाया जाना मंजूर कर दिया है ।
244. भवनों के उपयोग पर निर्बंधन-(1) कोई व्यक्ति, बोर्ड की लिखित अनुज्ञा के बिना या ऐसी अनुज्ञा की शर्तों, यदि कोई हों, के अनुरूप से अन्यथा, -
(क) ऐसे भवन के किसी भाग को, जो मूलतः मानव-निवास के लिए प्रयुक्त या उक्त प्रयोजन के लिए निर्मित या प्राधिकृत नहीं था या इस अधिनियम के और इसके अधीन बनाई गई उपविधियों के उपबंधों के अनुसार निष्पादित किसी संकर्म द्वारा कोई परिवर्तन किए जाने से पूर्व उस प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नहीं किया जाता था, मानव-निवास के लिए प्रयोग नहीं करेगा और न करने की अनुज्ञा देगा;
(ख) किसी भूमि या भवन के प्रयोग में परिवर्तन नहीं करेगा या परिवर्तन नहीं करने देगा;
(ग) एक प्रकार के वासगृह को दूसरे प्रकार के वासगृह में परिवर्तन नहीं करेगा या परिवर्तित नहीं करने देगा ।
(2) कोई व्यक्ति जो उपधारा (1) का उल्लंघन करता है, सिद्धदोष ठहराए जाने पर ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा और उल्लंघन जारी रहने की दशा में जानकारी में आने की तारीख के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए जिसके लिए उल्लंघन जारी रहता है दस हजार रुपए के अतिरिक्त जुर्माने से दण्डनीय होगा ।
245. भवन को पूरा करने के लिए कालावधि-बोर्ड भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के लिए मंजूरी इसमें इसके पूर्व उपबन्धित रूप में देते हुए वह युक्तियुक्त कालावधि विनिर्दिष्ट करेगा जिसके अन्दर भवन का निर्माण या पुनः निर्माण किया जाना उसके बनाए जाने का काम शुरू होने के पश्चात् पूरा कर लेना होगा तथा यदि भवन का निर्माण या पुनः निर्माण ऐसी नियत कालावधि के अन्दर पूरा नहीं कर दिया जाता तो निर्माण या पुनः निर्माण का काम तत्पश्चात् नई मंजूरी के बिना, जो इसमें यहां के पूर्व उपबन्धित रीति से अभिप्राप्त की गई होगी, तब के सिवाय आगे चालू न रखा जाए जबकि बोर्ड ने आवेदन किए जाने पर उस कालावधि की अभिवृद्धि के लिए मंजूरी दे दी हो :
परन्तु दो से अधिक अभिवृद्धियां किसी हालत में भी बोर्ड द्वारा मंजूर न की जाएंगी ।
246. पूरा होने का प्रमाणपत्र-मुख्य कार्यपालक अधिकारी इस अधिनियम की धारा 242 के अधीन सूचना प्राप्त होने पर यह सुनिश्चित करने के लिए कि मंजूर किए गए अनुसार यह भवन पूर्ण हो गया है, भवन का स्वयं उसके द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा निरीक्षण किया जाएगा और पूर्णता प्रमाणपत्र चाहने वाला व्यक्ति ऐसे भवन का निरीक्षण करने में मुख्य कार्यपालक अधिकारी को सहायता देगा:
परन्तु यह भी कि भवन को रहने के लिए तब तक अधिभोग में नहीं लिया जाएगा जब तक कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र जारी न कर दिया गया हो:
परन्तु यह और भी कि यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी पूर्णता की सूचना की प्राप्ति के पश्चात् तीस दिन की अवधि के भीतर ऐसा प्रमाणपत्र जारी करने से इंकार करने में असफल रहता है तो ऐसा प्रमाणपत्र अनुदत्त किया गया समझा जाएगा ।
247. अवैध निर्माण और पुनः निर्माण-जो कोई भवन का निर्माण या पुनःनिर्माण-
(क) धारा 235 और धारा 236 द्वारा यथा अपेक्षित विधिमान्य सूचना दिए बिना या इसके पूर्व कि उस भवन, इमारत, के लिए मंजूरी दे दी गई है अथवा दे दी गई समझी जाती है; अथवा
(ख) धारा 238 की उपधारा (1) के अधीन दिए गए किसी निदेश का अनुपालन किए बिना; अथवा
(ग) मंजूरी दिए जाने से इंकार किए जाने पर अथवा मंजूरी के प्रभावी न रहने पर अथवा मंजूरी धारा 58 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन कमान के मुख्य महानिदेशक अधिकारी द्वारा निलंबित कर दिए जाने पर,
शुरू करेगा, चालू रखेगा, या पूरा करेगा, तो वह जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा और अवैध सन्निर्माण को सील करने और उसको गिराए जाने की लागत से, दण्डनीय होगा ।
248. भवन निर्माण या पुनः निर्माण रोकने या उसे ढा देने की शक्ति-(1) बोर्ड किसी भी समय, छावनी में किसी भूमि के स्वामी, पट्टेदार या दखलकार को लिखित सूचना द्वारा यह निदेश कि भवन का निर्माण या पुनः निर्माण रोक दे, ऐसी किसी दशा में दे सकेगा जिसमें कि बोर्ड का यह विचार है कि ऐसा निर्माण या पुनः निर्माण, धारा 247 के अधीन अपराध है या ऐसी किसी दशा में दे सकेगा अथवा ऐसी किसी अन्य दशा में, जिसमें कि बोर्ड का यह विचार है कि भवन का निर्माण या पुनः निर्माण धारा 247 के अधीन अपराध है, उस भवन के या उसके किसी भाग को जिसका ऐसे निर्माण या पुनः निर्माण किया गया है, परिवर्तित करने या ढा देने में से जो भी कोई वह आवश्यक समझता है वैसा करने का निदेश ऐसा निर्माण या पुनः निर्माण के पूरा होने के बारह मास के अन्दर उसी रीति से दे सकेगा :
परन्तु बोर्ड ऐसे भवन या उसके भाग को परिवर्तित कर देने या ढा देने की अपेक्षा करने के बदले में समझौते के रूप में इतनी धनराशि प्रतिगृहीत कर सकेगा जितनी वह युक्तियुक्त समझता है:
परन्तु यह और कि बोर्ड उस भूमि पर, जो बोर्ड के प्रबन्धाधीन नहीं है, किसी भवन की बाबत पूर्वगामी परन्तुक के अधीन समझौते के रूप में कोई धनराशि कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी की पूर्व सहमति के बिना प्रतिगृहीत नहीं करेगा ।
(2) बोर्ड, छावनी में की किसी भूमि के स्वामी, पट्टेदार या दखलकार को लिखित सूचना द्वारा यह निदेश कि वह व्यक्ति भवन का निर्माण या पुनः निर्माण रोक दे, ऐसी किसी दशा में देगा जिसमें कि उस भवन के निर्माण या पुनः निर्माण की मंजूरी देने वाला धारा 238 के अधीन दिया गया आदेश धारा 58 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी द्वारा निलंबित कर दिया गया है तथा किसी ऐसी दशा में उस भवन या उसके किसी भाग को, जिसका ऐसे सन्निर्माण या पुनः निर्माण किया गया है, यथास्थिति, ढा देने या परिवर्तित कर देने का निदेश वहां उसी रीति से देगा, जहां कि कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी ने तत्पश्चात् यह निदेश दिया है कि उस भवन के निर्माण या पुनः निर्माण की मंजूरी देने वाला बोर्ड का आदेश क्रियान्वित नहीं किया जाएगा अथवा उसके द्वारा विनिर्दिष्ट उपान्तर सहित क्रियान्वित किया जाएगा :
परन्तु बोर्ड, भवन के स्वामी को ऐसी हानि के लिए प्रतिकर देगा जो ऐसे किसी भवन के ढा दिए या परिवर्तित कर दिए जाने के परिणामस्वरूप उस स्वामी को वस्तुतः उठानी पड़ी है जो जिसका निर्माण या पुनः निर्माण उस तारीख से पहले हुआ था जिसको कमान के जनरल आफिसर कमाडिंग-इन-चीफ का आदेश उसे संसूचित किया गया है ।
249. अप्राधिकृत संरचनाओं को सील बंद करने की शक्ति-(1) धारा 248 के अधीन किसी भवन को गिराए जाने या किसी भवन के निर्माण को रोकने या किसी संकर्म का निष्पादन करने का कोई आदेश पारित करने से पूर्व या उसके पश्चात् किसी समय मुख्य कार्यपालक अधिकारी के लिए यह विधिसम्मत होगा कि वह ऐसे निर्माण या संकर्म या परिसर को सील बंद करने का निदेश देने वाला आदेश करे जिसमें ऐसा कोई निर्माण या संकर्म अपराधी की लागत पर ऐसी रीति से किया जा रहा है या पूरा किया गया है जो इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए या ऐसे किसी निर्माण या संकर्म की प्रकृति या उसके विस्तार के बारे में किसी विवाद को रोकने के लिए नियमों द्वारा विहित की जाए ।
(2) जहां ऐसे किसी निर्माण या संकर्म या किसी परिसर को, जिसमें कोई निर्माण या संकर्म किया जा रहा है या किया गया है, सील बंद कर दिया गया है वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार ऐसे निर्माण या संकर्म को गिराने के प्रयोजन के लिए आदेश कर सकेगा कि ऐसी सील को हटाया जाए ।
(3) कोई व्यक्ति-
(क) मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा उपधारा (2) के अधीन किए गए किसी आदेश के अधीन; या
(ख) इस अधिनियम के अधीन की गई किसी अपील में अपील प्राधिकारी के किसी आदेश के अधीन,
के सिवाय ऐसी सीले को नहीं हटाएगा ।
(4) ऐसा कोई व्यक्ति, जो उपधारा (3) में अन्तर्विष्ट उपबंधों का उल्लंघन करेगा, कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
250. कतिपय मामलों में न्यायालयों द्वारा कार्यवाहियों का ग्रहण न किया जाना-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् कोई भी न्यायालय किसी आदेश या सूचना के संबंध में कोई वाद, आवेदन या अन्य कार्यवाहियां तब तक ग्रहण नहीं करेगा जब तक कि इस अधिनियम की धारा 340 के अधीन कोई अपील नहीं कर दी जाती और उसका निपटारा धारा 343 की उपधारा (3) के अधीन अपील प्राधिकारी द्वारा नहीं कर दिया जाता ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पहले किसी न्यायालय में लंबित प्रत्येक वाद, आवेदन या अन्य कार्यवाही में उसी न्यायालय द्वारा कार्यवाही जारी रखी जाएगी और उसका निपटारा इस प्रकार किया जाएगा मानो यह धारा प्रवर्तन में नहीं आई हो ।
251. उपविधियां बनाने की शक्ति-बोर्ड निम्नलिखित बातें विहित करने वाली उपविधियां बना सकेगा-
(क) वह रीति जिससे छावनी में भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के आशय की सूचना, यथास्थिति, बोर्ड, या मुख्य कार्यपालक अधिकारी को दी जाएगी तथा वह जानकारी और नक्शे जो उस सूचना के साथ दिए जाएंगे;
(ख) वह रीति और प्ररूप जिसमें छावनी में किसी भवन के निर्माण या पुनः निर्माण के पूरा हो जाने की सूचना, यथास्थिति, बोर्ड या मुख्य कार्यपालक अधिकारी को दी जाएगी और वह जानकारी और नक्शे, जो उस सूचना के साथ दिए जाएंगे;
(ग) भवनों की वे किस्में या प्रकार जिन किस्मों या प्रकार के भवन तथा वह प्रयोजन जिसके लिए किसी भवन का छावनी या उसके किसी भाग में निर्माण या पुनः निर्माण किया जाएगा या निर्माण या पुनः निर्माण नहीं किया जा सकेगा;
(घ) उस भवन में, जिसका निर्माण या पुनः निर्माण किया जाना है किसी कमरे या किन्हीं कमरों का न्यूनतम घनक्षेत्र;
(ङ) छावनी में या उसके किसी भाग में जिस किस्म के भवन बनाए जा सकेंगे बोर्ड द्वारा उनके रेखांकनों या निर्देशों के उपबंध के संबंध में संदेय फीसें;
(च) वे परिस्थितियां, जिनमें मस्जिद, मंदिर या गिरजाघर या कोई अन्य पवित्र भवन का निर्माण या पुनः निर्माण किया जा सकेगा; तथा
(छ) भवनों या किसी अन्य वर्ग के भवनों के निर्माण या पुनः निर्माण में निम्नलिखित में से किन्हीं बातों के संदर्भ में, अर्थात्ः-
(i) जहां कि भवन पथ से लगा हुआ है वहां उसकी अग्ररेखा;
(ii) भवन के आसपास छोड़ी जाने वाली खुली जगह जिससे हवा अबाध रूप से आ जा सके तथा झाडू-बुहारू के लिए और आग लगना रोकने के लिए सुविधाएं;
(iii) बाहरी और बीच की दीवारों के लिए, छत के लिए और फर्शों के लिए काम में लाई जाने वाली सामग्री और उनके निर्माण की रीति;
(iv) सीढ़ियों, अंगीठियों, चिमनियों, नालियों, शौचालयों, सण्डासों, मूत्रालयों और चहबच्चों की स्थिति और उनको बनाए जाने के लिए सामग्री और बनाए जाने की रीति;
(v) जिस सबसे ऊंची मंजिल पर मानव प्राणी रहते हैं या रसोई का काम किया जाना है उसके ऊपर की छत की ऊंचाई और ढलान;
(vi) नींव की सतह और चौड़ाई सबसे निचले फर्श की सतह तथा संरचना की मजबूती और अवमृदा से उत्पन्न सीलन से भवन का संरक्षण;
(vii) भवन कितनी मंजिलों का होना है उन मंजिलों की संख्या और ऊंचाई;
(viii) आग लगने की दशा में भवन से बाहर निकलने के लिए उपबन्धित किए जाने वाले साधन;
(ix) कुंओं के प्रदूषण को रोकने के लिए किए गए उपाय; या
(x) अठारह क्विंटल से अधिक खाद्यान्नों को रखने के लिए आशयित गोदामों के बनाए जाने के लिए इस दृष्टि से काम में लाई जाने वाली सामग्री और बनाने की रीति कि उनमें चूहे न जा सकें ।
252. ऐसी संरचनाओं या फिक्सरों का प्रतिषेध जो गलियों में बाधा करती है-(1) ऐसा कोई व्यक्ति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी की अनुज्ञा के सिवाय, किसी गली में या उसके ऊपर कोई दीवार, झाड़, नेल, पोस्ट, स्टॉप, बूथ या अन्य संरचना, चाहे वह स्थिर हो या जंगम या चाहे वह स्थायी प्रकृति की हो या अस्थायी प्रकृति की अथवा कोई फिक्सर निर्मित या स्थापित नहीं करेगा जिससे कि ऐसी किसी गली, चेनल, नाले, कुंए या तालाब के किसी भाग पर कोई बाधा या अतिक्रमण का भाग न हो या उसके ऊपर कोई प्रक्षेपण न हो या उसके किसी भाग पर अधिभोग न हो पाए ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसे किसी भवन के स्वामी या दखलकार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा करेगा कि वह यथा पूर्वोक्त किसी ऐसे प्रलम्बन को या अधिक्रमण को, परिवर्तित करे या हटा दे:
परन्तु जो कोई प्रलम्बन या अधिक्रमण इस अधिनियम के प्रारंभ पर विधिपूर्णतः विद्यमान है उसके हटाए जाने या परिवर्तित किए जाने से हुई किसी हानि के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रतिकर देगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी विशिष्ट पथ में के भवन के स्वामियों या दखलकारों को लिखित आदेश द्वारा इस बात की अनुज्ञा दे सकेगा कि उसी कुर्सी या तलघर की दीवार की रेखा से आगे की समतल भूमि या पथ से इतनी ऊंचाई पर, जितनी उस आदेश में विनिर्दिष्ट की गई हो, उसकी किसी ऊपरी मंजिल से आगे को निकले खुल बरामदे, बालकनी या कमरे बना ले ।
253. नालियों आदि पर अनाधिकृत भवन-मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसे किसी व्यक्ति से, जिसने छावनी में की किसी सार्वजनिक मलनाली, नाली, पुलिया, जलसरणी या पानी के पाइप पर कोई संरचना नई तरह से बना ली है या पुनः बना ली है, लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति उसे गिरा दे या उसके बारे में अन्यथा ऐसी कार्रवाई करे जैसी वह ठीक समझे ।
254. नाली और मल नालियों से कनेक्शन-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी पथ में के किसी भवन या भूमि के स्वामी या पट्टेदार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति अपने ही व्यय पर और ऐसी रीति से, जैसी वह ठीक समझता है, समुचित कुण्डियां और पाइप उस भवन या भूमि से बरसाती पानी के एकत्र और बहाने के लिए तथा उसे निस्सारित्र करने के लिए लगाए और अच्छी हालत में बनाए रखे, अथवा किसी भवन या भूमि के और किसी नाली या मलनाली के बीच कोई अन्य कनेक्शन या संचार साधन कायम करे और बनाए रखे ।
(2) छावनी में के किसी भवन या भूमि में से पानी की कारगर निकासी के प्रयोजन के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी उस भवन या भूमि के स्वामी या पट्टेदार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति-
(क) दो या अधिक भवनों के बीच के किसी चौक, गली या रास्ते को ऐसी सामग्री से और ऐसी रीति से पाट दे, जैसी वह ठीक समझता है; या
(ख) ऐसे पटाव को अच्छी मरम्मत की हुई हालत में रखे; या
(ग) ऐसी व्यवस्थाएं करना जो बोर्ड द्वारा उपविधियों के अधीन बोर्ड की छतों से वर्षा का पानी बोर्ड द्वारा बनाई गई या व्यवस्था की गई जलकृषि की सुविधाओं में डालने के लिए बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
255. लैम्पों और अन्य उपसाधनों के लिए ब्रैकिट लगाने की शक्ति-मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी में के किसी भवन के बाहर या किसी पेड़ से लैम्पों के लिए ब्रैकिट या ऊर्जा के अपारम्परिक स्रोतों के लिए कोई उपसाधन ऐसी रीति से लगा सकेगा कि उससे उसको कोई क्षति न हो या कोई असुविधा न हो ।
256. सड़क का रख-रखाव-(1) छावनी के सिविल क्षेत्र में की सभी सड़कों का रख-रखाव बोर्ड द्वारा किया जाएगा ।
(2) सिविल क्षेत्र से बाहर की ऐसी सभी सड़कों का, जो बोर्ड में विहित की गई हों, रख-रखाव भी बोर्ड द्वारा किया जाएगा ।
पथ
257. पथ, भूमि आदि का अस्थायी दखल-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी पथ या किसी भूमि पर, जो बोर्ड में निहित है, कोई भवन निर्माण सामग्री एकत्रित करने के प्रयोजन के लिए अथवा उसमें कोई अस्थायी उत्खात बनाने के लिए अथवा उस पर कोई निर्माण करने के लिए उसका अस्थायी रूप से दखल किए जाने की अनुज्ञा लिखित आदेश द्वारा ऐसी शर्तों के अध्यधीन दे सकेगा जैसा वह लोक साधारण की सुरक्षा या सुविधा के लिए बोर्ड विहित करे तथा ऐसी अनुज्ञा के लिए फीस प्रभारित कर सकेगा तथा ऐसी अनुज्ञा स्वविवेकानुसार प्रत्याहृत कर सकेगा ।
(2) जहां बोर्ड या रक्षा संपदा अधिकारी के प्रबंध के अधीन किसी मार्ग या भूमि पर कोई वस्तु या चीज इस रूप में रखी जाती है, जिससे कि उस पर बाधा पहुंचती है या अधिक्रमण होता है, वहां, यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या रक्षा संपदा अधिकारी ऐसी वस्तु या चीज़ को हटवा सकेगा और उस निमित्त हुए व्यय को, ऐसे व्यक्ति से जिसने ऐसी वस्तु या चीज़ रखी थी, ऐसी रीति से वसूल कर सकेगा जैसे कि धारा 324 के अधीन बोर्ड द्वारा धन वसूलीय होता है और यदि ऐसा व्यक्ति संतोषप्रद रूप में स्पष्टीकरण देने में असफल रहता है, तो ऐसी वस्तु या चीज़ के अधिहरण के लिए आदेश भी कर सकेगा ।
258. पथों को बन्द करना और खोलना-(1) बोर्ड किसी पथ को सार्वजनिक उपयोग के लिए खोल सकेगा ।
(2) बोर्ड किसी पथ को, जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ या प्रधान निदेशक की पूर्व अनुमति के बिना स्थायी रूप से बन्द नहीं करेगा:
परन्तु ऐसा कोई पथ सुरक्षा के कारणों से भिन्न कारणों के लिए और आम जनता से आक्षेप और सुझाव आमंत्रित करते हुए लोक सूचना दिए बिना बंद नहीं किया जाएगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी मरम्मत के लिए अथवा जल निकासी, जल प्रदाय या रोशनी से सम्बन्धित कोई काम या कोई अन्य काम, जिसे करने के लिए वह इस अधिनियम के द्वारा या अधीन अपेक्षित या अनुज्ञात है, करने के लिए किसी पथ या पथ के किसी भाग को लोक सूचना द्वारा अस्थायी रूप से बन्द कर सकेगा:
परन्तु जहां कि कोई काम करने या किसी अन्य हेतुक से किसी पथ की अथवा किसी जल संकर्म, नाली, पुलिया या परिसर की जो बोर्ड में निहित हैं दशा ऐसी है कि उससे लोक साधारण को खतरा होना सम्भाव्य है वहां बोर्ड-
(क) पार्श्वस्थ भवनों और भूमि की संरक्षा के लिए सब युक्तियुक्त तरीके अपनाएगा तथा उसमें जाने या उससे आने के युक्तियुक्त रास्ते के लिए भी उपबन्ध करेगा,
(ख) जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए पर्याप्त रोध या बाड़ लगवाएगा तथा ऐसे रोधों या बाड़ों को पर्याप्त रूप से सूर्यास्त से सूर्योदय तक प्रकाशयुक्त रखेगा ।
259. पथों के नाम और भवनों की संख्या-(1) बोर्ड उस नाम या संख्या का अवधारण कर सकेगा जिसके द्वारा छावनी में किसी क्षेत्र, पथ या सार्वजनिक स्थान को जाना जाएगा, छावनी के किसी भवन के किसी ऐसे स्थान पर, जो वह ठीक समझे, उस नाम या संख्या को लगवा सकेगा और किसी ऐसे भवन पर भी संख्या लगवा सकेगा ।
(2) जो कोई ऐसा नाम या संख्या नष्ट करेगा, गिरा देगा, विरूपित कर देगा या परिवर्तित कर देगा अथवा उस नाम या संख्या से भिन्न कोई नाम या संख्या लगवाएगा जो बोर्ड के आदेश द्वारा लगाया गया है, वह जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(3) जब किसी भवन पर उपधारा (1) के अधीन कोई नाम या संख्या लगा दिया गया है, तब उस भवन का स्वामी उसे ठीक हालत में रखेगा तथा यदि वह हटा दिया गया है या विरूपित कर दिया गया है तो उसके स्थान में वह नाम या संख्या पुनः लगा देगा और यदि वह ऐसा नहीं करता तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी लिखित सूचना द्वारा उससे यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसे पुनः लगाए ।
260. सामूहिक आवास स्कीमें-बोर्ड, इस प्रयोजन के लिए बनाई गई उपविधियों के अनुसार, घर निर्माण के लिए सामूहिक आवास स्कीमों को अनुज्ञात कर सकेगा ।
261. सीमा दीवारें, झाड़बन्दी और बाड़ें-(1) छावनी में किसी सामग्री या प्रकार की कोई भी सीमा दिवार, झाड़बन्दी अथवा बाड़ मुख्य कार्यपालक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना न बनाई जाएगी ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी में की किसी भूमि के स्वामी या पट्टेदार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति-
(क) भूमि में से कोई ऐसी सीमा दीवार, झाड़बन्दी या बाड़ हटा दे जिसकी बाबत उसकी राय है कि वह अनुपयुक्त है, असुन्दर है या अन्यथा जो आक्षेपयोग्य है, अथवा
(ख) भूमि पर ऐसी सामग्री, वर्णन या आकार की पर्याप्त सीमा दीवारें, झाड़बन्दी, या बाड़ें बनाएं जैसी उस सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हों, अथवा
(ग) ऐसी भूमि की सीमा दीवारों, झाड़बन्दी, या बाड़ों को अच्छी हालत में बनाए रखे:
परन्तु ऐसी किसी सीमा दीवार, झाड़बन्दी या बाड़ की दशा में, जिसका निर्माण मुख्य कार्यपालक अधिकारी की सम्मति से या उसके आदेशों के अधीन किया गया था अथवा जो इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान थी, बोर्ड उसके हटाए जाने से हुए किसी नुकसान के लिए प्रतिकर देगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी ऐसी भूमि के स्वामी, पट्टेदार या दखलकार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति उस भूमि में की किसी झाड़बन्दी को ऐसी रीति से और इतने समय के अन्दर काट दे या छांट दे जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट हो ।
262. वृक्षों का गिराया जाना, शाखों का काटा जाना और उनकी छंटाई करना-(1) जहां कि बोर्ड की यह राय है कि किसी कारणवश यह आवश्यक है कि छावनी में किसी निजी अहाते में खड़े पूरे बढ़े हुए पेड़ को गिरा दिया जाए, वहां बोर्ड उस भूमि के स्वामी, पट्टेदार या दखलकार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति ऐसे पेड़ को इतने समय के अन्दर गिरा दे जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट हो ।
(2) बोर्ड-
(क) छावनी में की ऐसी भूमि पर, जो सरकार की है, खड़े किसी वृक्ष की शाखाएं कटवा सकेगा या उन्हें छंटवा सकेगा, अथवा
(ख) छावनी में की भूमि के सब स्वामियों, पट्टेदारों या दखलकारों से लोक सूचना द्वारा अथवा किसी ऐसी भूमि के स्वामी, पट्टेदार या दखलकार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि ऐसी रीति से जैसी उस सूचना में विनिर्दिष्ट की गई है, वे या वह ऐसी भूमि पर खड़े सब या किन्हीं वृक्षों की शाखाएं कटवा दे और उन्हें छंटवा दे अथवा ऐसी भूमि से किन्हीं सूखे वृक्षों को हटवा दे ।
263. सार्वजनिक भूमि की खुदाई-जो कोई छावनी में की ऐसी किसी खुली जगह को, जो उसकी प्राइवेट सम्पत्ति नहीं है, मुख्य कार्यपालक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना खुदवाएगा, वह जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का होगा, तथा चालू रहने वाले अपराध की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से जो पहले दिन के पश्चात् वाले हर ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान वह अपराध चालू रहता है, पांच सौ रुपए तक का हो सकगा, दण्डनीय होगा ।
264. भूमि का अनुचित उपयोग-(1) यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि छावनी में किसी खदान का खनन अथवा छावनी में के किसी स्थान में की मुद्रा से पत्थर, मिट्टी या अन्य सामग्री का हटाया जाना ऐसी खदान या स्थान के पड़ोस में निवासी या वहां आने-जाने वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक है अथवा वह न्यूसेंस है या न्यूसेंस हो जाना सम्भाव्य है, तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसी खदान या खनन के स्वामी, पट्टेदार या दखलकार को अथवा ऐसे खनन या हटाए जाने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को लिखित सूचना द्वारा ऐसे खदान में खनन किए जाने या हटाए जाने के लिए अनुज्ञा देने से प्रतिषिद्ध कर सकेगा अथवा इस मामले में ऐसे कदम उठाने की उससे अपेक्षा कर सकेगा जैसे मुख्य कार्यपालक अधिकारी उससे पैदा हुए या सम्भाव्यतः पैदा होने वाले खतरे का निवारण करने के प्रयोजन में अथवा उससे हुए या सम्भाव्यतः पैदा होने वाले न्यूसेंस को दूर करने के प्रयोजन से निर्दिष्ट करे ।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी दशा में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि आसन्न खतरा रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक है तो वह लिखित आदेश द्वारा राहगीरों के संरक्षण के लिए उचित रूप से तख्तों का घेरा या बाड़ लगवाने की अपेक्षा कर सकेगा ।
अध्याय 11
बाजार, वधशालाएं, व्यापार और व्यवसाय
265. लोक बाजार और वधशालाएं-(1) बोर्ड अपने नियंत्रणाधीन भूमि पर इतने लोक बाजार और इतनी लोक वधशालाएं, जितनी वह ठीक समझता है, उन व्यक्तियों के उपयोग के लिए, जो ऐसे बाजारों या वधशालाओं में व्यापार या कारबार करते हैं या आते-जाते हैं, स्टालों, दुकानों, सायवानों, बाड़ों और अन्य भवनों या सुविधाओं सहित कायम कर सकेगा और चला सकेगा तथा किसी ऐसे बाजार के भवन, स्थान, मशीनें, बाट, तराजू और नाम वहां बेचे जाने वाली वस्तुओं के तोलने या मापने के लिए कायम कर सकेगा और बनाए रखेगा ।
(2) जबकि ऐसा बाजार या वधशाला छावनी की सीमाओं से बाहर स्थित है, तब बोर्ड को उसके निरीक्षण करने और समुचित विनियमन के लिए वही शक्ति प्राप्त होगी जैसी यदि वह उन सीमाओं के अन्दर स्थित होती, तो उसको प्राप्त होती ।
(3) बोर्ड किसी लोक बाजार या लोक वधशाला को या उसके किसी भाग को लोक सूचना द्वारा किसी भी समय बन्द कर सकेगा ।
(4) इस धारा की किसी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह बोर्ड से भिन्न किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा प्रशासित किसी क्षेत्र की सीमाओं के अन्दर लोक बाजार या लोक वधशाला की स्थापना ऐसे स्थानीय प्राधिकरण की अनुज्ञा के बिना अथवा ऐसी शर्तों पर जैसी वह स्थानीय प्राधिकारी अनुमोदित करे, ऐसा करने से अन्यथा करने को प्राधिकृत करती है ।
266. लोक बाजार का उपयोग-(1) कोई भी व्यक्ति किसी लोक बाजार में किसी पशु या वस्तु को मुख्य कार्यपालक अधिकारी की साधारण या विशेष लिखित अनुज्ञा के बिना न तो बेचेगा और न बेचने के लिए अभिदर्शित करेगा ।
(2) इस धारा के उपबन्धों का उल्लंघन करने वाला कोई भी व्यक्ति तथा ऐसे व्यक्ति द्वारा विक्रय के लिए अभिदर्शित कोई पशु या वस्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी के द्वारा अथवा बोर्ड के ऐसे किसी अधिकारी या सेवक के द्वारा, जो इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है अथवा उसके आदेशों के अधीन संक्षिप्त रूप से बाजार से हटवा दी जा सकेगी ।
267. लोक नीलाम आदि द्वारा अन्तरण करने की शक्ति-(1) बोर्ड लोक बाजार में या लोक वधशाला में किसी स्टाल, दुकान, स्टैंडिंग, सायबान या बाड़े पर दखल का या उसे काम में लाने का अधिकार अथवा लोक बाजार में विक्रय के लिए माल अभिदर्शित करने का अधिकार अथवा उसमें बेचे जाने वाले माल को तोलने या मापने का अधिकार अथवा किसी लोक वधशाला में पशुओं का वध करने का अधिकार को लोक नीलामी द्वारा एक समय पर तीन वर्ष से अनधिक कालावधि के लिए अन्तरित कर सकेगा:
परन्तु जहां कि बोर्ड की राय है कि पूर्वोक्त अधिकारियों का लोक नीलामी द्वारा ऐसा अन्तरण वांछनीय या समीचीन नहीं है, वहां वह कमान के मुख्य महा समादेशक अधिकारी या उसकी अनुपस्थिति में प्रधान निदेशक की पूर्व मंजूरी से-
(क) या तो ऐसी तहबाजारी, भाटक या फीस उद्गृहीत कर सकेगा जैसा वह ठीक समझता है, अथवा
(ख) खण्ड (क) के अधीन उद्ग्रहणीय तहबाजारी, भाटक और फीस संग्रहण करने का एक समय पर एक वर्ष से अनधिक कालावधि के लिए ठेका दे सकेगा:
परन्तु यह और कि किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे पूर्वोक्त किसी अधिकार के किसी भी समयावधि के लिए उपभोग के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह उपभोग ऐसे स्टाल, दुकान, स्टैंडिंग, सायबान, बाड़े, लोक बाजार या लोक वधशाला में किसी अभिधृति अधिकार को सृजित या प्रदत्त करता है ।
(2) बोर्ड किसी सार्वजनिक परिसर में स्थावर संपत्ति से भिन्न किसी बाजार या लोक वधशाला को लोक नीलामी द्वारा या अन्यथा अंतरण कर सकेगा यदि ऐसी संपत्ति ऐसी अवधि के लिए और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो कमान के मुख्य महा समादेशक अधिकारी या उसकी अनुपस्थिति में प्रधान निदेशक द्वारा अनुमोदित की जाए, लाभकारी उपयोग के लिए रखे जाने में सक्षम है ।
268. तहबाजारी, भाटक आदि का प्रकाशित किया जाना-लोक बाजार में या लोक वधशाला में उद्ग्रहणीय तहबाजारी, भाटकों और फीसों की, यदि कोई हों, सारणी तथा ऐसे बाजार या वधशाला का उपयोग विनियमन करने के प्रयोजन के लिए इस अधिनियम के अधीन बनाई गई उपविधियों की प्रतियां अंग्रेजी भाषा में तथा ऐसी अन्य भाषा या भाषाओं में, जैसी बोर्ड निर्दिष्ट करे, मुद्रित कराकर उस बाजार या वधशाला में किसी सहजदृश्य स्थान में लगाई जाएंगी ।
269. प्राइवेट बाजार और वधशालाएं-(1) छावनी में लोक बाजार से भिन्न कोई भी स्थान बाजार के रूप में तब के सिवाय उपयोग में नहीं लाया जाएगा और न छावनी में लोक वधशाला से भिन्न कोई स्थान वधशाला के रूप में तब के सिवाय उपयोग में लाया जाएगा जबकि ऐसे स्थान को, यथास्थिति, बाजार या वधशाला के रूप में काम में लाए जाने के लिए बोर्ड द्वारा अनुज्ञप्ति दे दी गई है:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा स्थापित और चलाई जाने वाली वधशाला की दशा में लागू नहीं होगी ।
(2) उपधारा (1) की किसी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह-
(क) किसी त्यौहार या धार्मिक क्रिया के अवसर पर किसी स्थान में किसी पशु का वध करना निर्बन्धित करती है किन्तु वैसा वध करने के लिए शर्तें लगाई जा सकेंगी जैसी उस वध की पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती सूचना देने के संबंध में मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से लोक या विशेष सूचना द्वारा इस निमित्त अधिरोपित करे, अथवा
(ख) धार्मिक रूढ़ि के अनुसार पशुओं का वध करने के लिए स्थान, बोर्ड की मंजूरी से मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा अलग रख दिए जाने से रोकती है ।
(3) जो कोई उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा लागू की गई किसी शर्त का अनुपालन नहीं करेगा वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा चालू रहने वाले अपराध की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो पहले दिन के पश्चात् हर ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान वह अपराध चालू रहता है, एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
270. प्राइवेट बाजार या वधशाला के लिए अनुज्ञप्ति के दिए जाने की शर्तें-(1) बोर्ड छावनी में प्राइवेट बाजार या प्राइवेट वधशाला खोलने के लिए किसी व्यक्ति को अनुज्ञप्ति देने के वास्ते ऐसी फीसें प्रभारित कर सकेगा जैसा प्रभारित करना वह ठीक समझता है तथा ऐसी अनुज्ञप्ति इस अधिनियम से तथा इसके अधीन बनाई गई किन्हीं उपविधियों से संगत ऐसी शर्तों पर दे सकेगा जैसी शर्तें लगाना वह ठीक समझता है ।
(2) बोर्ड कोई ऐसी अनुज्ञप्ति देने से इंकार उस इंकारी के लिए कारण दिए बिना कर सकेगा ।
271. अनुज्ञप्ति आदि के बिना बाजार या वधशाला चलाने के लिए शास्ति-(1) जो कोई व्यक्ति ऐसा कोई बाजार या वधशाला, जिसकी बाबत इस अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन अनुज्ञप्ति का होना अपेक्षित है, उसके लिए अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त किए बिना अथवा उस समय, जबकि अनुज्ञप्ति निलंबित कर दी गई है अथवा उसके रद्द कर दिए जाने के पश्चात् उपयोग के लिए चालू रखेगा, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा अपराध चालू रहने की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम दिन के पश्चात् हर ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान अपराध चालू रहता है, पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) जबकि प्राइवेट बाजार या प्राइवेट वधशाला के चलाने के लिए अनुज्ञप्ति मंजूर की गई है या नामंजूर की गई है या निलंबित की गई है या रद्द कर दी गई है, तब बोर्ड उसकी मंजूरी, नामंजूरी, निलंबित करने या रद्द करने की सूचना अंग्रेजी में तथा ऐसी अन्य भाषा या भाषाओं में, जैसे वह आवश्यक समझता है, उस स्थान के प्रवेश पर या उसके निकट किसी सहजदृश्य स्थान में लगवाएगा, जिससे वह सूचना सम्बन्धित है ।
272. अननुज्ञप्त बाजार या वधशाला का उपयोग करने के लिए शास्ति-जो कोई, यह जानते हुए कि उसके लिए इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अनुज्ञप्ति अपेक्षित है, अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त किए बिना कोई बाजार या वधशाला लोक साधारण के लिए खोला गया है अथवा यह जानते हुए कि उसके लिए मंजूर की गई अनुज्ञप्ति तत्समय निलंबित है अथवा यह अनुज्ञप्ति रद्द कर दी गई है, ऐसे बाजार में कोई वस्तु बेचेगा या विक्रय के लिए अभिदर्शित करेगा अथवा ऐसी वधशाला में किसी पशु का वध करेगा, वह जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा चालू रहने वाले अपराध की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो पहले दिन के पश्चात् हर ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान वह अपराध चालू रहता है, पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
273. वधशाला के उपयोग का प्रतिषेध और निर्बन्धन-(1) जहां कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि स्वच्छता संबंधी कारणों से यह बात करना आवश्यक है वहां वह लोक सूचना द्वारा किसी प्राइवेट वधशाला का उपयोग अथवा ऐसे विनिर्दिष्ट किसी प्रकार के किसी पशु का उसमें वध एक मास से अनधिक इतनी कालावधि के लिए, जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट हो, अथवा एक मास से अनधिक इतनी अतिरिक्त कालावधि के लिए, जिसे वह तत्समय सूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, प्रतिषिद्ध कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निकाली गई हर सूचना की प्रति उस वधशाला में सहजदृश्य स्थान में लगाई जाएगी, जिससे वह सम्बन्धित है ।
274. वधशालाओं का निरीक्षण करने के शक्ति-(1) बोर्ड का कोई भी पदधारी, जो मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा इस निमित्त लिखित रूप में आदेश द्वारा प्राधिकृत किया गया है अथवा स्वास्थ्य अधिकारी उस दशा में, जिसमें कि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी पशु का वध इस अध्याय के उपबन्धों के उल्लंघनों में किसी स्थान में किया गया है, किया जा रहा है या किया जाने वाला हे, चाहे दिन में, चाहे रात्रि में किसी ऐसे स्थान में प्रवेश कर सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा ।
(2) हर ऐसे आदेश में वह स्थान, जिसमें प्रवेश किया जाना है, तथा वह परिक्षेत्र, जिसमें वह स्थान स्थित है, और सात दिन से अनधिक, वह कालावधि, जिसके लिए वह आदेश प्रवृत्त रहना है, विनिर्दिष्ट किए जाएंगे ।
275. कतिपय क्रियाकलापों को विनियमित करने की शक्ति-बोर्ड, आदेश द्वारा, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों को विनियमित कर सकेगा, अर्थात्ः-
(क) वे दिन जिनमें, तथा वह समय, जिसके दौरान कोई प्राइवेट बाजार या प्राइवेट वधशाला उपयोग के लिए खुला रखा जा सकेगा;
(ख) ऐसे बाजारों या वधशालाओं के डिजाइन, संवातन और जल निकास का विनियमन तथा उनके बनाने में काम में लाई जाने वाली सामग्री;
(ग) ऐसे बाजारों और वधशालाओं को तथा उनसे अनुलग्न भूमियों और भवनों को साफ और स्वच्छ दशा में बनाए रखना, वहां से गंदगी और कचरे को हटाया जाना तथा वहां शुद्ध जल का प्रदाय तथा उसे काम में लाने वाले या वहां आने-जाने वाले व्यक्तियों के उपयोग के लिए पर्याप्त संख्या में शौचालयों और मूत्रालयों का उपबन्ध किया जाना;
(घ) वह रीति, जिससे वधशाला में पशु रखे जाएंगे;
(ङ) वह रीति, जिससे पशुओं का वध किया जा सकेगा;
(च) वध के लिए पेश किए गए जो पशु रोग के कारण या किसी अन्य हेतुक से मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त हैं, उनका व्ययन या उनका नष्ट किया जाना;
(छ) वध के पश्चात् जो लोथ रोग के कारण या किसी अन्य हेतुक से मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाए गए हैं, उनका नष्ट किया जाना; और
(ज) ऐसे बाजारों और वधशालाओं के विनियमन के संबंध में कोई अन्य विषय ।
व्यापार और व्यवसाय
276. कपड़े धोने के स्थानों का उपबन्ध-(1) बोर्ड धोबियों द्वारा अपनी आजीविका चलाए जाने के वास्ते समुचित स्थानों का उपबन्ध करेगा तथा उनको उपयोग में लाए जाने के लिए इतनी फीस की अदायगी अपेक्षित कर सकेगा, जितनी वह ठीक समझता है ।
(2) जहां कि बोर्ड ने पूर्वोक्त जैसे स्थानों का उपबन्ध किया है, वहां छावनी में किसी अन्य स्थान में धोबियों द्वारा कपड़ों का धोया जाना लोक सूचना द्वारा प्रतिबद्ध कर सकेगा:
परन्तु ऐसे किसी प्रतिषेध की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह धोबी द्वारा अपने कपड़ों को अथवा किसी अन्य व्यक्ति के कपड़ों को उस स्थान में धोने के सम्बन्ध में लागू है, जो व्यक्ति उस स्थान का दखलकार है, जिसमें वे धोए जा रहे हैं ।
(3) जो कोई उपधारा (2) के अधीन निकाली गई सूचना में अन्तर्विष्ट किसी प्रतिषेध का उल्लंघन करेगा वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
277. कतिपय व्यवसाय चलाए जाने के लिए अनुज्ञप्तियों का आवश्यक होना-(1) निम्नलिखित वर्गों का कोई भी व्यक्ति अर्थात्-
(क) कसाई और कुक्कुट, शिकार का मांस या मछली के विक्रेता;
(ख) लाभ के लिए सुअरों को रखने वाले व्यक्ति तथा उन सुअरों के मांस में व्यौहार करने वाले, जिनका छावनी के भीतर या बाहर वध किया गया है;
(ग) लाभ के लिए दुधारू पशु और दुधारू बकरियां रखने वाले व्यक्ति;
(घ) सुअरों, दुधारू पशुओं तथा दुधारू बकरियों से भिन्न किन्हीं जानवरों को लाभ के लिए रखने वाले व्यक्ति;
(ङ) डेरीवाला, मक्खन के विक्रेता तथा घी के बनाने वाले और विक्रेता;
(च) डबल रोटी, बिस्कुट या केक के निर्माता तथा छावनी के भीतर या बाहर में बनी डबल रोटी, बिस्कुट या केक के विक्रेता;
(छ) फल या सब्जी के विक्रेता;
(ज) एरिएटेड या अन्य पेय जल के अथवा बर्फ या आइसक्रीम के विनिर्माता और उनके विक्रेता;
(झ) दवाइयों, औषधियों या (सुअर के मांस, दूध, मक्खन, डबल रोटी, बिस्कुट, केक, फल, सब्जी, एरिएटेड या अन्य पेय जल या बर्फ या आइसक्रीम से भिन्न) मानव उपयोग के लिए किन्हीं खाद्य या पेय वस्तुओं के, जो विनश्वर प्रकृति की हैं, विक्रेता;
(ञ) स्पिरिटयुक्त शराब के विक्रेता;
(ट) पीने के प्रयोजनों के लिए काम में लाए जाने वाले पानी के विक्रेता;
(ठ) धोबी;
(ड) सूखी घास, भूस, लकड़ी, कोयला या अन्य ज्वलनशील सामग्री के व्यौहारी;
(ढ) आतिशबाजी, मिट्टी का तेल, पैट्रोलियम या किसी अन्य ज्वलनशील तेल या स्प्रिट के विक्रेता;
(ण) चमड़ा रंगने वाले और रंगरेज;
(त) ऐसा कोई व्यापार या व्यवसाय करने वाले व्यक्ति जिससे बुरी लगने वाली या अस्वास्थ्यकर गंध निकलती है;
(थ) गेहूं, चावल या अन्य अनाज या आटे के विक्रेता;
(द) चीनी या मिठाई के निर्माता और विक्रेता;
(ध) नाई और हजामत बनाने के सैलून;
(न) ऐसा अन्य व्यवसाय, आजिविका या उपजीविका, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, चलाने वाला कोई अन्य व्यक्ति,
छावनी के किसी भाग में अपना व्यापार, आजीविका या व्यवसाय तब के सिवाय न चलाएगा जबकि उसने बोर्ड से उसके लिए आवेदन किया है और अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त कर ली है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति उस वर्ष के अंत के लिए विधिमान्य होगी जिसमें वह दी गई है तथा ऐसी अनुज्ञप्ति की मंजूरी बोर्ड द्वारा तब के सिवाय विधारित न रखी जाएगी जबकि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है जो कारबार स्थापित करने या चलाने का आशय है वह लोक साधारण के लिए क्लेशकर या खतरनाक होगा अथवा वह परिसर जिनमें वह कारबार स्थापित करने या चलाने का आशय है, उस प्रयोजन के लिए ठीक नहीं है या अनुपयुक्त है ।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी-
(क) कोई भी व्यक्ति, जो छावनी के किसी भाग में अपना व्यापार, आजीविका या व्यवसाय इस अधिनियम के प्रारम्भ पर चला रहा था, उस भाग में वह व्यापार या व्यवसाय चलाने के लिए अनुज्ञप्ति के वास्ते तब तक आबद्ध न होगा, जब तक कि उसे ऐसा करने की अपनी बाध्यता की लिखित रूप में तीन से अन्यून मास की सूचना बोर्ड से प्राप्त न हो गई हो तथा यदि बोर्ड उसे अनुज्ञप्ति देने से इंकार करता है तो वह ऐसी इंकारी के कारण हुई किसी हानि के लिए उसे प्रतिकर देगा,
(ख) कोई भी व्यक्ति पैट्रोलियम के विक्रय या भंडारकरण के लिए अथवा विषों या सफेद संखिए के विक्रय अथवा विक्रय के लिए उस पर कब्जा रखने के लिए अनुज्ञप्ति लेने के लिए ऐसी किसी दशा में अपेक्षित न होगा जिसमें कि ऐसे विक्रय, भंडारकरण तथा विक्रय के लिए कब्जे में रखने के लिए अनुज्ञप्ति लेने के वास्ते वह पैट्रोलियम अधिनयम, 1934 (1934 का 30), अथवा विष अधिनियम, 1919 (1919 का 12) के द्वारा या अधीन अपेक्षित है ।
(4) बोर्ड इस धारा के अधीन अनुज्ञप्तियां मंजूर करने के लिए उतनी युक्तियुक्त फीस प्रभारित कर सकेगा, जितनी वह उस राज्य में जहां ऐसी छावनी स्थित है, नगरपालिका में इस संबंध में उद्गृहीत फीसों को दृष्टिगत करते हुए नियत करे ।
278. अनुज्ञप्तियों के उल्लंघन में उपयोग किए जाने वाले परिसरों के उपयोग को रोकने की शक्ति-यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि कोई भोजनालय, आवासगृह, होटल, बोर्डिंग हाऊस, चाय की दुकान, कॉफी हाऊस, कैफे, रेस्तरां, जलपान गृह या अन्य स्थान, जहां जनता को विश्राम करने या कोई खाद्य या पेय उपभोग करने के लिए अनुज्ञात किया जाता है या जहां खाना विक्रय किया जाता है या विक्रय के लिए तैयार किया जाता है या कोई थियेटर, सिनेमा हॉल, सर्कस, नृत्य हॉल, या इसी प्रकार का जनता के विश्राम के लिए कोई अन्य स्थान, मनोरंजन या आमोद-प्रमोद का स्थान अनुज्ञप्ति के बिना खुला रखा जाता है या उसके संबंध में अनुदत्त की गई अनुज्ञप्ति के निबंधनों के अनुसार से भिन्न रूप में खुला रखा जाता है तो वह ऐसे परिसर के ऐसे प्रयोजन के लिए उपयोग को विनिर्दिष्ट अवधि के लिए ऐसे स्थायित्व से बंद कर सकेगा जिसे वह आवश्यक समझे ।
279. वे शर्तें जो अनुज्ञप्तियों से संलग्न की जा सकेंगी-धारा 277 के अधीन किसी व्यक्ति को मंजूर की गई अनुज्ञप्ति में छावनी का वह भाग विनिर्दिष्ट होगा, जिसमें अनुज्ञप्तिधारी अपना व्यापार, आजीविका या व्यवसाय चला सकेगा तथा उससे छावनी में ऐसी किन्हीं विनिर्दिष्ट वस्तुओं के परिवहन का समय और रीति, जो मानव उपभोग के लिए आशयित हैं, विनियमित की जा सकेंगी तथा उसमें ऐसी कोई अन्य शर्तें हो सकेंगी, जिन्हें बोर्ड इस अधिनियम के अधीन बनाई गई उपविधियों के अनुसार लगाना ठीक समझता है ।
साधारण उपबन्ध
280. अनुज्ञप्ति में फेरफार करने की शक्ति-यदि बोर्ड का समाधान हो गया है कि इस अध्याय के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति के अधीन काम में लाए जाने वाले कोई स्थान न्यूसेंस हैं अथवा यह संभाव्यता है कि जीवन स्वास्थ्य या संपत्ति के लिए खतरनाक हो जाएगा तो बोर्ड उसके स्वामी, पट्टेदार या दखलकार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यक्ति ऐसे स्थान का उपयोग बन्द कर दे अथवा उनमें ऐसे परिवर्तन, अभिवृद्धियां या सुधार कर दे जिनसे बोर्ड की राय में वह आगे न्यूसेंस या खतरनाक न रह जाएगा ।
281. अनुज्ञप्ति के बिना अथवा धारा 280 के उल्लंघन में व्यापार आदि का किया जाना-जो कोई ऐसा व्यापार, आजीविका या व्यवसाय, जिसके लिए अनुज्ञप्ति का लिया जाना अपेक्षित है, उसके लिए अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त किए बिना अथवा उस समय जबकि उसके लिए अनुज्ञप्ति निलंबित है अथवा अनुज्ञप्ति के रद्द किए जाने के पश्चात् करेगा तथा जो कोई धारा 280 के अधीन सूचना के मिलने के पश्चात् किसी भवन या स्थान को उसके उल्लंघन में काम में लाएगा या काम में लाए जाने देगा वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा चालू रहने वाले अपराध की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम दिन के पश्चात् हर ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान वह अपराध चालू रहता है, पांस सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
282. पशुओं को कूड़ा करकट आदि पर चराना-जो कोई ऐसे किसी पशु को, जो छावनी के निवासियों के लिए दूध देने के प्रयोजन के लिए रखा जाता है अथवा जो उनके भोजन के लिए काम में लाए जाने के लिए आशयित है, कोई गंदा या हानिकारक पदार्थ खिलाएगा या खिलाया जाने देगा अथवा उसे ऐसे स्थान में चरने देगा जिसमें स्वच्छता सम्बन्धी कारणों से उसका चरना बोर्ड द्वारा लोक सूचना द्वारा प्रतिषिद्ध कर दिया गया है, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
प्रवेश, निरीक्षण और अभिग्रहण
283. प्रवेश और अभिग्रहण की शक्तियां-(1) अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी या बोर्ड का कोई अन्य पदधारी, जो उस द्वारा इस निमित्त लिखित रूप में प्राधिकृत किया गया है-
(क) मानव भोजन या पेय के लिए अथवा दवाई के लिए उद्दिष्ट किन्हीं पशुओं, वस्तु या चीज का, भले ही वे विक्रय के लिए अभिदर्शित हों या आवाज लगाकर पेश किए जा रहे हों या की जा रहीं हों अथवा विक्रय के या विक्रय की तैयारी करने के प्रयोजन से किसी स्थान में निक्षिप्त हों या हो या लाई हों या जिनमें हो अथवा ऐसे बरतन या पात्र का, जो किसी ऐसी वस्तु या चीज को तैयार करने के लिए हैं, विनिर्मित करने के लिए हैं अथवा जिनमें ऐसी वस्तु या चीज रखी है, निरीक्षण करने के लिए छावनी में के किसी बाजार, भवन, दुकान, स्टाल या अन्य स्थान में प्रवेश तथा ऐसे पशुओं, वस्तु या चीज का निरीक्षण कर सकेगा, तथा वधशाला के रूप में काम में लाए जाने वाले किसी स्थान में प्रवेश कर सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा तथा उसमें के किसी पशु या वस्तु की परीक्षा कर सकेगा;
(ख) ऐसे किसी पशु, वस्तु या चीज को अभिगृहीत कर सकेगा, जिसकी बाबत उसे यह प्रतीत होता है कि वह यथास्थिति, रोग युक्त है, अस्वास्थ्यकर है या मानव भोजन या पेय या दवाई के लिए अनुपयुक्त है, अथवा अपमिश्रित है अथवा वैसा नहीं है जैसा वह जाहिर किया जा रहा है अथवा किसी ऐसे बरतन या पात्र को, जो इस किस्म का है या ऐसी हालत है कि उसमें तैयार की गई, विनिर्मित या रखी गई कोई वस्तु, यथास्थिति, अस्वास्थ्यकर हो जाती है अथवा मानव भोजन या पेय के लिए या दवाई के लिए अनुपयुक्त हो जाती है, अभिगृहीत कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन अभिगृहीत ऐसी कोई वस्तु, जो क्षयशील प्रकृति की है, स्वास्थ्य अधिकारी अथवा सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अथवा सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के आदेशों से तत्काल नष्ट कर दी जाएगी, यदि उसकी यह राय है कि यथास्थिति, वह रोगयुक्त है, अस्वास्थ्यकर है अथवा मानव भोजन, पेय या दवाई के लिए अनुपयुक्त है ।
(3) उपधारा (1) के अधीन अभिगृहीत हर पशु, वस्तु, बरतन, पात्र या अन्य चीज उस दशा में, जिसमें कि वह उपधारा (2) के अधीन नष्ट नहीं की गई है, मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाई जाएगी जो उसके व्ययन के बारे में आदेश देगा ।
(4) ऐसे किसी पशु या पशु शव का, जो रोगयुक्त है, अथवा ऐसी किसी वस्तु या चीज का, जो यथास्थिति, अस्वास्थ्यकर है या मानव भोजन, पेय या दवाई के लिए अनुपयुक्त है अथवा जो अपमिश्रित है अथवा जो वैसी नहीं है जैसी वह जाहिर की जा रही है अथवा ऐसे किसी बरतन या पात्र का, जो इस किस्म का है या ऐसी हालत में है जो उपधारा (1) के खण्ड (ख) में वर्णित है, उस समय स्वामी या कब्जा रखने वाला व्यक्ति, जिस समय पर उपधारा (1) के अधीन उसका अधिग्रहण किया गया है, जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का होगा, दण्डनीय होगा, तथा वह पशु, वस्तु, बरतन, पात्र या अन्य चीज बोर्ड के हक में समपहरणीय होगी अथवा इस दृष्टि से नष्टकरणीय या ऐसे व्ययनीय होगी कि वह यथास्थिति, विक्रय के लिए अभिदर्शित न की जा सके अथवा भोजन, पेय या दवाई की तैयारी के लिए काम में न लाई जा सके ।
स्प्ष्टीकरण 1-यदि घी जैसी किसी वस्तु में, जो विक्रय के लिए उपधारा (1) में वर्णित किसी स्थान में अभिदर्शित या भण्डारकृत की गई है या वहां लाई गई है, ऐसा कोई पदार्थ है, जो दूध से अनन्यतः व्युत्पन्न नहीं है, तो इस धारा के प्रयोजनों के लिए वह ऐसी वस्तु समझी जाएगी जो वैसी नहीं है जैसे वह जाहिर की जा रही है ।
स्प्ष्टीकरण 2-जिस मांस में फूलने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है, वह मानव भोजन के लिए अनुपयुक्त समझा जाएगा ।
स्प्ष्टीकरण 3-भोजन वस्तु या पेय वस्तु को केवल इस तथ्य के कारण से कि उसमें स्वास्थ्य के लिए क्षतिकर न होने वाला कोई पदार्थ मिला दिया गया है, यह नहीं समझा जाएगा कि वह उससे भिन्न है जैसा उसका होना जाहिर किया जा रहा है:
परन्तु यह तब जबकि-
(क) ऐसा पदार्थ उस वस्तु में इस कारण मिलाया गया है कि वहन करने के लिए ठीक हालत में उसे वाणिज्य वस्तु के रूप में तैयार या उत्पादित करने के लिए या उसका उपभोग करने के लिए वह अपेक्षित है तथा वह इस कारण नहीं मिलाया गया है कि कपटपूर्ण भोजन या पेय के रूप में उसका आकार, वजन या माप बढ़ा दिया जाए या उसकी घटिया क्वालिटी को छिपा दिया जाए, अथवा
(ख) भोजन वस्तु या पेय वस्तु के रूप में उसके उत्पादन, उसे तैयार करने या उसके प्रवहण की प्रक्रिया में वह बाहरी पदार्थ उससे अपरिवर्जनीय रूप से मिश्रित हो गया है, अथवा
(ग) उस वस्तु के स्वामी या कब्जा रखने वाले व्यक्ति ने उस पर या उससे साथ लगे स्पष्टतः और सुपाठ्यतः लिखित या मुद्रित लेबल के जरिए या प्रकट प्रकार के अन्य साधन के जरिए या पर्याप्त सूचना दे दी है कि उसमें ऐसा पदार्थ मिलाया गया है, अथवा
(घ) ऐसे स्वामी या व्यक्ति ने वह वस्तु इस लिखित वारण्टी के सहित खरीदी है कि वह निश्चित प्रकृति, पदार्थ और क्वालिटी की है और उसके पास यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं था कि वह ऐसी प्रकृति, पदार्थ और क्वालिटी की नहीं है तथा उसने उसी हालत में तथा उसी वर्णन सहित, जिसमें और जिस सहित उसने उसे खरीदा था, विक्रय के लिए अभिदर्शित किया है या विक्रय के लिए आवाज लगाकर पेश किया है या विक्रय के लिए उसे वहां लाया है ।
पशु और मांस का आयात
284. पशु और मांस का आयात-(1) कोई व्यक्ति मानव उपभोग के लिए उद्दिष्ट किसी पशु को अथवा ऐसे किसी पशु के मांस को, जिसका केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या बोर्ड द्वारा चलाई जाने वाली वधशाला में वध किए जाने से अन्यथा छावनी के बाहर वध किया गया है, मुख्य कार्यपालक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना छावनी के अन्दर नहीं लगाएगा:
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी तब तक ऐसी अनुज्ञा नहीं देगा, जब तक कि वह इस निमित्त स्वास्थ्य अधिकारी की सिफारिश पर विचार न कर ले ।
(2) जो कोई पशु या जो मांस उपधारा (1) के उल्लंघन में छावनी के अन्दर लाया गया है, वह मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा अथवा बोर्ड के किसी पदधारी द्वारा अभिगृहीत किया जा सकेगा तथा बोर्ड का प्रधान जैसा निर्दिष्ट करे वैसे यह बेचा जा सकेगा या अन्यथा व्ययनित किया जा सकेगा तथा यदि वह बेचा जाता है तो विक्रय आगम छावनी निधि में जमा किए जा सकेंगे ।
(3) जो कोई उपधारा (1) के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा, वह जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(4) इस धारा की कोई बात संसाधित या परिरक्षित मांस को अथवा छावनी के बाहर उपभोग के लिए छावनी में होकर या हांक कर ले जाए जाने वाले पशुओं को या ले जाने वाले मांस को अथवा ऐसे मांस को, जो किसी व्यक्ति द्वारा अपने अविलम्ब घरेलू उपभोग के लिए छावनी में लाया गया है, लागू नहीं समझी जाएगी:
परन्तु बोर्ड लोक सूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगा कि इस धारा के उपबन्ध ऐसे संसाधित या परिरक्षित मांस को लागू होंगे, जो किसी विनिर्दिष्ट प्रकार का है या किसी विनिर्दिष्ट स्थान से लाया या है ।
अध्याय 12
आसव लिकर और मादक औषधि
285. आसव लिकर और मादक द्रव्य का अप्राधिकृत विक्रय-यदि छावनी के अन्दर अथवा छावनी से लगी ऐसी सीमाओं के अन्दर, जिन्हें केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा परिनिश्चित करे, कोई व्यक्ति, जो सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक विधि के अधीन नहीं है, अथवा कोई व्यक्ति, जो सैनिक अधिकारी या सैनिक के रूप में ऐसा होने से अन्यथा सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक विधि के अधीन है, जानते हुए किसी आसव लिकर का या मादक द्रव्य का वस्तु विनिमय, विक्रय या प्रदाय अथवा वस्तु विनिमय विक्रय या प्रदाय पेशकश या प्रयत्न स्टेशन समादेशक अधिकारी की अनुज्ञा के बिना अथवा ऐसी अनुज्ञा देने के लिए स्टेशन समादेशक अधिकारी द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति की लिखित अनुज्ञा के बिना किसी सैनिक या अनुचर या सैनिक की स्त्री या अवयस्क बालक को अथवा उसके उपयोग के लिए करेगा तो वह जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
286. आसव लिकर का अप्राधिकृत कब्जा- यदि किण्वित द्रव्य लिकर से भिन्न किसी आसव लिकर की एक क्वार्ट से अधिक मात्रा छावनी के अन्दर या धारा 285 के अधीन परिभाषित किन्हीं सीमाओं के अन्दर केन्द्रीय सरकार के निमित्त अथवा सैनिक अधिकारी के निजी उपयोग के लिए होने के सिवाय-
(क) ऐसे किसी व्यक्ति के, जो सैनिक अधिकारी या सैनिक के रूप में ऐसा होने से अन्यथा सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक विधि के अधीन है, अथवा
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति या ऐसे सैनिक की पत्नी या सेवक के, अपने कब्जे में स्टेशन समादेशक अधिकारी की अथवा ऐसे किसी व्यक्ति की, जो ऐसी अनुज्ञा देने के लिए में स्टेशन समादेशक अधिकारी द्वारा प्राधिकृत है, लिखित अनुज्ञा के बिना है तो वह प्रथम अपराध की दशा में जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, तथा पश्चात्वर्ती अपराध की दशा में कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
287. दो अंतिम पूर्वगामी धाराओं के विरुद्ध अपराधों के लिए व्यक्तियों की गिरफ्तारी तथा वस्तुओं का अभिग्रहण और अधिहरण-(1) कोई भी पुलिस अधिकारी अथवा उत्पादन-शुल्क अधिकारी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना तथा वारंट के बिना ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा, जिसे वह धारा 285 या धारा 286 के अधीन वाला अपराध करते हुए पाता है तथा ऐसा कोई आसव लिकर या मादक द्रव्य जिसकी बाबत ऐसा अपराध किया गया है, तथा ऐसे कोई बर्तन और परिवेष्ठन जिनमें वह लिकर या मादक द्रव्य रखा है अभिगृहीत कर सकेगा और निरुद्ध कर सकेगा ।
(2) जहां कि धारा 285 के अधीन वाले अपराध के लिए अभियुक्त व्यक्ति उस धारा के अधीन वाले अपराध के लिए पहले दोषसिद्ध किया जा चुका है वहां पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी न्यायिक मजिस्ट्रेट की लिखित अनुज्ञा से छावनी के अन्दर अथवा उस धारा के अधीन परिनिश्चित किन्हीं सीमाओं के अन्दर ऐसा कोई आसव लिकर या मादक द्रव्य अभिगृहीत कर सकेगा और निरुद्ध कर सकेगा जो पश्चात्वर्ती अपराध के अभिकथित किए जाने के समय ऐसे व्यक्ति का था अथवा उसके कब्जे में था ।
(3) वह न्यायालय, जो किसी व्यक्ति को धारा 285 या धारा 286 के अधीन अपराध के लिए दोषसिद्ध करता है, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अभिगृहीत किसी पूरी वस्तु या उसके भाग के समपहरण का आदेश दे सकेगा ।
(4) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के अध्याय 34 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए ऐसी कोई वस्तु, जो उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अभिगृहीत की गई है, किंतु उपधारा (3) के अधीन समपहृत नहीं की गई है, उस व्यक्ति को लौटा दी जाएगी जिससे वह ली गई थी ।
288. चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए बेची गई या प्रदाय की गई वस्तुओं की व्यावृत्ति-इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंध ऐसे चिकित्सा व्यवसायी, रसायन या ओषधि विक्रेता द्वारा जो स्टेशन समादेशक अधिकारी के साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत है, चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए सद्भाव से किसी वस्तु के विक्रय या प्रदाय को लागू नहीं होंगे ।
अध्याय 13
सार्वजनिक सुरक्षा तथा न्यूसेंसों का दमन
साधारण न्यूसेंस
289. न्यूसेंस कारित करने के लिए शास्ति-(1) जो कोई-
(क) छावनी के अन्दर किसी पथ या अन्य सार्वजनिक स्थान में-
(i) नशे में और विच्छृंखल अवस्था अथवा नशे में तथा अपनी देखभाल करने में असमर्थ होने की अवस्था में होगा, अथवा
(ii) किन्हीं धमकी भरे, गाली भरे या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग अथवा धमकाने वाली या अपमानजनक रीति से आचरण इस आशय से कि प्रकोपन करके परिशांति-भंग कराई जाए, करेगा अथवा ऐसे करेगा कि उससे परिशांति भंग होना सम्भाव्य है, अथवा
(iii) स्वयं मलमूत्र करेगा अथवा जानबूझकर या अशिष्टतापूर्वक अपने गुप्तांग प्रदर्शित करेगा, अथवा
(iv) भिक्षा के लिए इधर-उधर घूमेगा, अथवा पीछे पड़कर याचना करेगा, अथवा
(v) दानवृत्ति प्रदीप्त करने के उद्देश्य से अपने अंगविकार या रोग या किसी जुगुप्सावह व्रण या घाव को उच्छन्न करेगा या प्रदर्शित करेगा, अथवा
(vi) सबको दिखने वाले रूप में उघड़ा हुआ मांस लाएगा, अथवा
(vii) जुआ खेलता हुआ पाया जाएगा, अथवा
(viii) पशुओं को रखेगा या यान इकट्ठे करेगा, अथवा
(ix) विष्ठा या अन्य दुर्गन्धयुक्त पदार्थ या कूड़ा हटाने में लगे होने पर जानबूझकर या उपेक्षापूर्वक उसका कोई भाग बिखर या गिर जाने देगा अथवा उसका ऐसा कोई भाग झाडू से साफ कर देने में अथवा अन्यथा प्रभावी रूप से हटा देने में उपेक्षा करेगा जो ऐसे पथ या स्थान में बिखरे या गिरे हैं, अथवा
(x) समुचित प्राधिकार के बिना किसी भवन, स्मारक, खम्बे, दीवार, बाड़, वृक्ष या अन्य चीज़ पर कोई बिल, सूचना या अन्य दस्तावेज लगाएगा, अथवा
(xi) समुचित प्राधिकार के बिना किसी भवन, स्मारक, खम्बे, दीवार, बाड़, वृक्ष या अन्य चीज् को विरूपित करेगा या उस पर लिखेगा या अन्यथा उस पर चिह्न लगाएगा, अथवा
(xii) समुचित प्राधिकार के बिना ऐसी कोई सूचना या अन्य दस्तावेज, जो इस अधिनियम के अधीन लगाई गई या प्रदर्शित की गई है, हटाएगा, नष्ट करेगा, विरूपित करेगा या अन्यथा मिटाएगा, अथवा
(xiii) समुचित प्राधिकार के बिना किसी ऐसे पथ की पटरी, नाली, बरसाती पानी की नाली, ऐसे पथ के पटिया या पत्थर या अन्य सामग्री अथवा किसी ऐसे पथ या लोक स्थान में बोर्ड द्वारा कायम रखे जाने वाले किसी लैम्प, दीवारगीर, मार्ग-प्रदर्शन खम्बा, बम्बा या अन्य पानी के नल को विस्थापित करेगा, नुकसान पहुंचाएगा या उसमें कोई परिवर्तन करेगा या अन्यथा उसमें छेड़छाड़ करेगा अथवा कोई सार्वजनिक बत्ती बुझाएगा, अथवा
(xiv) भलीभांति न ढके हुए अथवा संक्रमण की जोखिम का अथवा लोक स्वास्थ्य को क्षति का अथवा रास्ता चलने वालों को या पड़ोस में रहने वाले व्यक्तियों को क्षोभ का निवारण करने के लिए सम्यक् पूर्वावधानियां बरते बिना किसी शव को ले जाएगा, अथवा
(xv) विष्ठा या अन्य दुर्गन्धयुक्त पदार्थ या कूड़ा ऐसे किसी समय पर, जिस पर उसका ले जाना मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा लोक सूचना के जरिए प्रतिषिद्ध किया हुआ है अथवा ऐसे किसी पैटर्न के यान या पात्र में, जो उस प्रयोजन के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है, ले जाएगा अथवा ऐसे यान या पात्र, जब प्रयोग में है तब उसको बन्द न करेगा; अथवा
(ख) विष्ठा या अन्य दुर्गन्धयुक्त पदार्थ या कूड़ा किसी मार्ग से ऐसे प्रतिषेध के उल्लंघन में ले जाएगा जो कार्यपालक अधिकारी ने सार्वजनिक सूचना द्वारा इस निमित्त किया है; अथवा
(ग) मिट्टी या किसी प्रकार की सामग्रियां या कोई दुर्गन्धयुक्त पदार्थ या कूड़ा ऐसे किसी पथ में ऐसी जगह पर, जो उस प्रयोजन के लिए उद्दिष्ट नहीं है, अथवा अन्य सार्वजनिक स्थान में या उजाड़ या दखल न की हुई भूमि में, जो बोर्ड के प्रबन्धाधीन है, निक्षिप्त करेगा या कराएगा या करने देगा; अथवा
(घ) शव ले जाने के लिए जिम्मेदार होते हुए मृत्यु के पश्चात् चौबीस घण्टे के अन्दर उसे दफन नहीं करेगा, नहीं जलाएगा या अन्यथा विधिपूर्वक उसका व्ययन नहीं करेगा; अथवा
(ङ) ऐसे किसी स्थान में कोई कब्र खोदेगा या किसी शव को दफनाएगा या जलाएगा जो उस प्रयोजन के लिए अलग रखा हुआ नहीं है; अथवा
(च) किसी स्थान को सामान्य जुआघर के रूप में चलाएगा या प्रयुक्त करेगा या जानते हुए चलाने या प्रयुक्त करने की अनुज्ञा देगा अथवा किसी सामान्य जुआघर के कारोबार के संचालन में सहायता देगा, अथवा
(छ) किसी ऐसे समय पर या स्थान में जहां उसके बजाने के लिए लोक सूचना या विशेष सूचना द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा निषिद्ध किया गया है, ढोल या घंटा, घड़ियाल या शंख या हार्न बजाएगा या कोई बर्तन बजाएगा, अथवा कोई झांझ, मंजीरा या अन्य उपकरण बजाएगा या कोई गाना-बजाना करेगा; अथवा
(ज) लोक शांति या व्यवस्था को गाने से, चीखने से या चिल्लाने से या मेगाफोन या लाउडस्पीकर का प्रयोग करके भंग करेगा; अथवा
(झ) किसी पशु को ऐसे खुला छोड़ देगा कि किसी व्यक्ति को क्षति, खतरा, या त्रास या क्षोभ हो अथवा किसी पशु को उपेक्षापूर्वक किसी व्यक्ति को क्षति, खतरा, त्रास या क्षोभ करने देगा; अथवा
(ञ) ऐसे किसी भवन या भूमि का दखलकार होते हुए, जिसमें या जिस पर कोई पशु मरा है, उस पशु की मृत्यु के तीन घण्टे के अन्दर, या, उस दशा में जिसमें कि वह मृत्यु रात को हुई है सूर्योदय के तीन घण्टे के अन्दर या तो-
(i) उस घटना की रिपोर्ट मुख्य कार्यपालक अधिकारी को अथवा ऐसे किसी अधिकारी को, यदि कोई हो, जो उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किया गया हो, लोक सफाई स्थापन विभाग द्वारा शव को हटाए जाने और उसके व्ययन कर दिए जाने की दृष्टि से करने में उपेक्षा करेगा, अथवा
(ii) उस शव को ऐसे किन्हीं साधारण निदेशों के अनुसार, जो बोर्ड ने लोक सूचना द्वारा दिए हुए हों, अथवा ऐसे किन्हीं विशेष निदेशों के अनुसार, जो पूर्वोक्त जैसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने दिए हों, हटाने और उसके व्ययन करने में उपेक्षा करेगा; अथवा
(ट) मुख्य कार्यपालक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा से और ऐसी रीति से, जैसी वह प्राधिकृत करे, ऐसा करने के सिवाय मल, पशुविष्ठा, कूड़े या किसी अन्य पदार्थ को, जिससे दुर्गन्ध निकल रही है, जमा करेगा या काम में लाएगा; अथवा
(ठ) किसी स्थान को, जो उस प्रयोजन के लिए आशयित नहीं है, शौचालय के रूप में काम में लाएगा या काम में लाए जाने की अनुज्ञा देगा; अथवा
(ड) मुख्य कार्यपालक अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना किसी परिसर को ऐसे व्यवसाय के लिए जिसमें दुर्गन्धयुक्त वास या धुंआ हो काम में लाएगा या काम में लाए जाने की अनुज्ञा देगा,
वह जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) जो कोई बारह वर्ष से कम आयु के किसी ऐसे बालक को, जो उसके भारसाधन में है, छावनी के अन्दर किसी पथ में अथवा अन्य लोक स्थान में मल-मूत्र करने से रोकने के लिए युक्तियुक्त उपाय नहीं करेगा, वह जुर्माने से जो दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(3) ऐसे किसी पशु का स्वामी या रखवाला, जो छावनी के अन्दर किसी पथ में अथवा अन्य सार्वजनिक स्थान में बंधा या रखवाले के बिना घूमता हुआ पाया जाता है, जुर्माने से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(4) ऐसा कोई भी पशु, जो पूर्वोक्त रूप से बंधा हुआ या घूमता हुआ पाया गया है, बोर्ड के किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा कांजी हाउस को ले जाया जा सकेगा ।
(5) जो कोई छावनी में, पैकेजिंग के लिए या गैर जैव-अवकरणीय प्रकृति की सामग्री का, जिसके अन्तर्गत पालीथिन के थैले भी हैं, विनिर्माण करेगा, प्रदाय करेगा, उसे ले जाएगा, या उसका उपयोग करेगा तो वह जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा या कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
कुत्ते
290. कुत्तों का रजिस्ट्रीकरण और उन पर नियंत्रण-(1) बोर्ड छावनी में रखे जाने वाले सभी कुत्तों के रजिस्ट्रीकरण का उपबन्ध करने के लिए उपविधियां बना सकेगा ।
(2) ऐसी उपविधियों द्वारा-
(क) छावनी में रखे गए उन सभी कुत्तों का, इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा रजिस्ट्रीकरण की अपेक्षा की जाएगी;
(ख) यह अपेक्षा की जाएगी की हर रजिस्ट्रीकृत कुत्ते के गले में एक पट्टा होगा जिससे धात्विक टोकन, जो रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा दिया गया है, लगा हुआ होगा, तथा उसके दिए जाने के लिए संदेय फीस नियत की जाएगी;
(ग) यह अपेक्षा की जाएगी कि जिस कुत्ते का रजिस्ट्रीकरण नहीं हुआ है अथवा जिस पर टोकन नहीं लगा हुआ है यदि वह किसी सार्वजनिक स्थान में पाया जाए तो उसे उस प्रयोजन के लिए अलग रखे गए स्थान में निरुद्ध रखा जाएगा; तथा
(घ) ऐसे निरुद्ध रखने के लिए प्रभारित की जाने वाली फीस नियत की जाएगी, तथा यह उपबन्धित होगा कि जब तक उसकी बाबत किसी द्वारा यह प्रकट न कर दिया जाए कि वह मेरा है और उसकी बाबत फीस एक सप्ताह के अन्दर न दे दी जाए, वह मार दिया जाएगा अथवा अन्यथा उसका व्ययन कर दिया जाएगा; तथा ऐसी अन्य बातों के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा जैसी बोर्ड ठीक समझता है ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी-
(क) ऐसे किसी कुत्ते या पशु को, जो अलर्क से पीड़ित है या जिसकी बाबत युक्तियुक्ततः यह संदेह किया जाता है कि वह अलर्क से पीड़ित है अथवा जिसे ऐसे किसी कुत्ते या अन्य पशु ने काट लिया है जो अलर्क से पीड़ित है, मरवा सकेगा अथवा उतनी कालावधि के लिए परिरुद्ध करवा सकेगा जितनी वह निदिष्ट करे;
(ख) लोक सूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगा कि उस तारीख के पश्चात्, जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हो, वे कुत्ते, जिनके पट्टे नहीं लगे हुए हैं अथवा जिन पर ऐसे कोई पहचान करने वाले चिन्ह नहीं हैं जिनसे यह प्रकट हो जाए कि वह किसी की प्राइवेट सम्पत्ति है तथा जो पथों पर अथवा उनके स्वामियों के, यदि कोई हों, गृहों के अहातों के बाहर पाए जाते हैं, मार दिए जाएं तथा उन्हें तद्नुकूल मरवा सकेगा ।
(4) इस धारा के अधीन मार दिए गए या अन्यथा व्ययन कर दिए गए किसी कुत्ते या अन्य पशु की बाबत कोई नुकसानी देय नहीं होगी ।
(5) जो कोई किसी कुत्ते का स्वामी या भारसाधक व्यक्ति होते हुए उसे इस प्रकार अवरुद्ध करने में उपेक्षा कि वह थुथनी लगे बिना तथा जंजीर के बन्धे हुए बिना किसी पथ पर स्वच्छन्द न घूम पाए, ऐसी किसी दशा में करेगा जिसमें कि-
(क) वह जानता है कि यह सम्भाव्यता है कि वह कुत्ता किसी व्यक्ति को क्षुब्ध या अभित्रस्त करे; अथवा
(ख) बोर्ड ने अलर्क रोग के फैले होने के दौरान लोक सूचना द्वारा यह निदेश दिया है कि थुथनी तथा जंजीर के बिना कुत्तों को खुला न छोडा जाए,
वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(6) जो कोई छावनी में-
(क) किसी हिंस्र कुत्ते को, जिसका वह स्वामी है अथवा जिसका भारसाधन उसके हाथ में है, थुथनी के बिना खुला रहने देगा; अथवा
(ख) किसी कुत्ते या अन्य पशु को किसी व्यक्ति पर आक्रमण करने अथवा किसी व्यक्ति को परेशान या अभित्रस्त करने के लिए पीछे लगा देगा या ललकार देगा; अथवा
(ग) ऐसे किसी कुत्ते या पशु को, जिसका वह स्वामी है अथवा जिसका भारसाधन उसके हाथ में है, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि उसे ऐसी किसी पशु ने काट दिया है जो अलर्क रोग से पीड़ित है अथवा जिसकी बाबत यह युक्तियुक्त सन्देह है कि वह अलर्क रोग से पीड़ित है उस तथ्य की अविलम्ब सूचना मुख्य कार्यपालक अधिकारी को देने में अपेक्षा करेगा अथवा ऐसी इत्तिला देगा जो मिथ्या है,
वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
यातायात
291. सड़क मार्ग के यातायात के नियम-जो कोई पथ यान चलाते हुए, ले जाते हुए या नोदित करते हुए वास्तविक आवश्यकता की दशा में ऐसा करने के सिवाय, -
(क) उस समय जब वह अन्य यान के सामने की ओर से आते हुए उस अन्य यान की बगल से होकर निकल रहा है, बाईं ओर को न रहेगा; अथवा
(ख) उस दिशा में, जिसमें वह स्वयं जा रहा है, जाने वाले यान की बगल से होकर निकलते हुए उसके दाएं न रहेगा,
वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
अग्नि, आदि का रोकना
292. ज्वलनशील सामग्रियों का निर्माण प्रयोजनों के लिए उपयोग-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोक सूचना द्वारा निदेश दे सकेगा कि छावनी में ऐसी सीमाओं के अन्दर, जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हो, झोंपड़ियों या अन्य भवनों की छतें और बाहरी दीवार मुख्य कार्यपालक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना घास, चटाइयों, पत्तों या अन्य ज्वलनशील सामग्रियों से न तो बनाई जाएं और न नवीकृत की जाएं तथा लिखित सूचना द्वारा ऐसे किसी व्यक्ति से जिसने पूर्वोक्त जैसे किसी निदेश की अवज्ञा की है यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे बनाई गई या नवीकृत छतों को हटा दे या परिवर्तित कर दे ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी छावनी में के ऐसे किसी भवन के स्वामी से, जिसकी बाहरी छत या दीवार ऐसी किसी सामग्री की बनी हुई है जैसी पूर्वोक्त है, लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह स्वामी ऐसी छत या दीवार इस बात के होते हुए भी कि उपधारा (1) के अधीन लोक सूचना नहीं निकाली गई है अथवा ऐसी छत या दीवार मुख्य कार्यपालक अधिकारी की सहमति से बनाई गई थी अथवा लोक सूचना के निकलने के पहले ऐसे बनाई गई थी, इतने समय के अन्दर हटा दे जितना उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया गया हो :
परन्तु ऐसी किसी लोक सूचना के निकाले जाने से पूर्व विद्यमान या मुख्य कार्यपालक अधिकारी की पूर्व सहमति से बनाई गई किसी छत पर या दीवार की दशा में बोर्ड द्वारा उस छत या दीवार के निर्माण की मूल लागत से अनधिक प्रतिकर किसी ऐसे नुकसान के लिए दिया जाएगा जो ऐसे हटाए जाने के कारण हुआ है ।
293. ज्वलनशील सामग्रियों का ढेर लगाना या संग्रह करना-बोर्ड लोक सूचना द्वारा छावनी के अन्दर अथवा उसमें की ऐसी किन्हीं सीमाओं के अन्दर, जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट की गई हो, किसी स्थान में लकड़ी, सूखी घास, भूसा या अन्य ज्वलनशील सामग्रियों के ढेर लगाने या संग्रहण का अथवा चटाइयों या भूसों की छत वाली झोंपड़ियों के कायम किए जाने का अथवा आग के प्रज्वलित किए जाने का प्रतिषेध ऐसी किसी दशा में कर सकेगा जिसमें कि ऐसा प्रतिषेध जीवन या सम्पति को खतरा होने का निवारण करने के लिए उसे आवश्यक प्रतीत होता है :
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी, लोक जीवन या संपत्ति को आसन्न संकट की दशा में, अध्यक्ष के या अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष के परामर्श से ऐसे प्रतिषेध आदेश को प्रवृत्त कर सकेगा ।
294. खुली बत्तियों की देखभाल-कोई भी व्यक्ति छावनी में अथवा अन्य सार्वजनिक स्थान में के किसी भवन में या उसके निकट कोई खुली बत्ती ऐसी रीति से नहीं रखेगा कि आग लग जाने का खतरा पैदा हो जांए:
परन्तु इस धारा की किसी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि किसी उत्सव या लोक या प्राइवेट मनोरंजन के अवसर पर रोशनी करने के प्रयोजनों के लिए बत्तियों का उपयोग करना प्रतिषिद्ध है ।
295. चलचित्रों और नाटकों के प्रस्तुतीकरण का विनियमन-(1) प्रदर्शन के लिए चलचित्र फिल्मों को मंजूरी देने से संबंधित अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी न तो चलचित्र यन्त्र या अन्य तत्समान साधित्र के जरिए, जिसके प्रयोजन के लिए ज्वलनशील फिल्म काम में लाई जाती हैं, चित्रों का या अन्य आंखों के सामने दृश्यों और न किन्हीं सार्वजनिक नाटकों के प्रस्तुतीकरण, सार्वजनिक आमोद-प्रमोद या मनोरंजन के लिए मूकाभिनय, सर्कस, आनन्दोत्सव, प्रदर्शन, नृत्य या उसी प्रकार के अन्य प्रदर्शन ऐसे परिसर से, जिसके लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति मंजूर की गई है, अन्यत्र किसी छावनी में नहीं किया जाएगा ।
(2) यदि चलचित्र यंत्र या अन्य साधित्र का स्वामी इस धारा के उपबन्धों के उल्लंघन में उसका उपयोग करेगा या करने देगा या कोई व्यक्ति सार्वजनिक नाटक के प्रस्तुतीकरण या सार्वजनिक आमोद-प्रमोद या मनोरंजन के लिए मूकाभिनय, सर्कस, आनन्दोत्सव, प्रदर्शन, नृत्य या उसी प्रकार के अन्य प्रदर्शन में भाग लेगा या यदि किसी परिसर का दखलकार इस धारा के उपबन्धों के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति की किसी शर्त के उल्लंघन में उनका उपयोग करने की अनुज्ञा देगा तो वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा चालू रहने वाले अपराध की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे हर दिन के लिए, जिसके दौरान पहले दिन के पश्चात् वह अपराध चालू रहता है दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(3) इस धारा की किसी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह कोई प्रदर्शन अथवा सार्वजनिक आमोद-प्रमोद या मनोरंजन के लिए कोई नाटक, मूकाभिनय, सर्कस, आनन्दोत्सव, प्रदर्शन, नृत्य या उसी प्रकार का अन्य प्रदर्शन ऐसी किसी नाट्यशाला या संस्थान में करने का प्रतिषेध करती है जो सरकार की सम्पत्ति है तथा जहां सार्वजनिक आमोद-प्रमोद या मनोरंजन के लिए वह नाटक, मूकाभिनय, सर्कस, आनन्दोत्सव, प्रदर्शन, नृत्य या उसी प्रकार का अन्य प्रदर्शन प्राधिकारियों की अनुज्ञा से तथा उनके नियंत्रणाधीन किया जाता है ।
296. आतिशबाजी, अग्न्यायुध आदि को छोड़ना-जो कोई छावनी में कोई अग्न्यायुध या आतिशबाजी या अग्निगुब्बारे या अधिस्फोटक चलाएगा या छोड़ेगा या किसी खेल में ऐसी रीति से लगेगा अथवा खदान, स्फोटन, लकड़ी काटने या निर्माण संक्रिया जैसे संक्रिया ऐसी रीति से करेगा कि पड़ोस में होकर जाने वाले या रहने वाले या काम करने वाले व्यक्तियों को खतरा हो, या खतरा होना सम्भाव्य हो अथवा सम्पत्ति को क्षति का जोखिम हो, वह जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
297. भवनों, कुओं आदि को सुरक्षित रखने की अपेक्षा करने की शक्ति-जहां कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि छावनी में कोई भवन या दीवार या उनसे लगी हुई चीज अथवा कोई कुआं, तालाब, जलाशय, सरोवर, गड्ढा या उत्खात अथवा कोई किनारा या वृक्ष जर्जर हालत में है अथवा पर्याप्त मरम्मत, संरक्षण या बाड़े के अभाव में न्यूसेंस है अथवा पड़ोस में होकर जाने वाले या रहने वाले या काम करने वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक है, वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी उसके स्वामी अथवा भागिक स्वामी अथवा उसका स्वामी या भागिक स्वामी होने का दावा करने वाले व्यक्ति से अथवा उनके न होने की दशा में उसके दखलकार से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि उन्हें हटाया जाए अथवा उससे यह अपेक्षा कर सकेगा कि उनकी मरम्मत या संरक्षा या उनमें बाड़ ऐसी रीति से की जाए या लगाई जाए जैसी वह आवश्यक समझे तथा यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी की यह राय है कि खतरा आसन्न है तो वह तत्काल ऐसे कदम उठा सकेगा जैसे वह खतरे को टालने के लिए आवश्यक समझता है ।
298. जो उजाड़ भूमि अनुचित प्रयोजनों के लिए काम में लाई जा रही है उसमें बाड़ लगाना-छावनी में के ऐसे किसी भवन या भूमि के स्वामी अथवा भागिक स्वामी या स्वामी अथवा भागिक स्वामी होने का दावा करने वाले व्यक्ति से अथवा किसी ऐसी भूमि के पट्टेदार होने का दावा करने वाले व्यक्ति से, जो निष्प्रयोग के कारण अथवा विवादगत स्वामित्व के कारण अथवा किसी अन्य कारण से दखल की हुई नहीं है तथा निकम्मे और विच्छृंखल व्यक्तियों के अथवा ऐसे व्यक्तियों के, जिनके जीवन निर्वाह के दृश्यमान साधन नही हैं अथवा जो अपनी बाबत समाधानप्रद लेखा-जोखा नहीं दे सकते, इकट्ठा होने का स्थान हो गई है अथवा जुए के लिए या अनैतिक प्रयोजनों के लिए काम में लाई जा रही है अथवा अन्यथा उसके कारण न्यूसेंस होता है या होना सम्भाव्य है, मुख्य कार्यपालक अधिकारी यह अपेक्षा कर सकेगा कि इतने समय के अन्दर, जितना सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, उसे अच्छी तरह से बन्द कर दे और उसमें बाड़ लगा दे ।
अध्याय 14
छावनियों में से निकालना और अपवर्जित करना तथा लैंगिक दुराचार का दमन
299. वेश्यागृहों को बन्द कर देने और वेश्याओं को निकाल देने की शक्ति-स्टेशन समादेशक अधिकारी अथवा बोर्ड यह इत्तिला मिलने पर कि छावनी में कोई भवन वेश्यागृह के रूप में या वेश्यावृत्ति के प्रयोजनों के लिए काम में लाया जा रहा है, मिली सूचना का सार लिखित रूप में देकर आदेश द्वारा उस भवन के स्वामी, पट्टेदार, अभिधारी या दखलकार को, यथास्थिति, अपने समक्ष या बोर्ड के समक्ष या तो स्वयं अथवा प्राधिकृत अभिकर्ता के माध्यम से उपस्थित होने के लिए समन कर सकेगा तथा यदि स्टेशन समादेशक अधिकारी अथवा बोर्ड का तब उस इत्तिला के सही होने की बाबत समाधान हो जाता है तो, यथास्थिति, स्टेशन समादेशक अधिकारी अथवा बोर्ड लिखित आदेश द्वारा, यथास्थिति, स्वामी, पट्टेदार, अभिधारी या दखलकार को निदेश दे सकेगा कि वह ऐसे भवन का ऐसे काम में लाया जाना उतनी कालावधि के अन्दर बन्द कर दे जितनी उस आदेश में निर्दिष्ट हो ।
300. वेश्यावृत्ति के प्रयोजनों के लिए चक्कर काटना और अतियाचना करना-(1) जो कोई वेश्यावृत्ति के प्रयोजन से छावनी में चक्कर काटेगा या लैंगिक दुराचार करने के लिए किसी व्यक्ति से अतियाचना करेगा, वह कारावास से, जो तीन मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, और पश्चात्वर्ती अपराध की दशा में, कारावास से जो एक वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) इस धारा के अधीन वाले अपराध के लिए कोई अभियोजन उस व्यक्ति के, जिससे अतियाचना की गई है, अथवा उस सैनिक अधिकारी के, जिसकी उपस्थिति में वह अपराध किया गया है, अथवा छावनी में नियोजित तथा स्टेशन समादेशक अधिकारी द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत है, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक पुलिस के ऐसे सदस्य के, जिसकी उपस्थिति में वह अपराध किया गया है अथवा सहायक उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न होने वाले पुलिस अधिकारी के, जो छावनी में अभिनियोजित है तथा उस स्टेशन समादेशक अधिकारी द्वारा जिला मजिस्ट्रेट की सहमति से इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है किए गए परिवाद पर संस्थित किए जाने के सिवाय संस्थित न किया जाएगा ।
301. व्यक्तियों का छावनी से निकाल दिया जाना-(1) यदि स्टेशन समादेशक अधिकारी अथवा बोर्ड का समाधान ऐसी जांच के पश्चात्, जैसी वह आवश्यक समझता है, हो जाता है कि छावनी में निवासी या बार-बार आने-जाने वाला कोई व्यक्ति वेश्या है या धारा 300 के अधीन वाले अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, अथवा ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण के लिए दोषसिद्ध हुआ है, तो, यथास्थिति, वह या बोर्ड ऐसे व्यक्ति पर उससे यह अपेक्षा करने वाले कि ऐसा व्यक्ति छावनी में से इतने समय के अन्दर जितना उस आदेश में विनिर्दिष्ट हो, निकल जाए तथा स्टेशन समादेशक अधिकारी अथवा बोर्ड की लिखित अनुज्ञा के बिना उसमें पुनः प्रवेश करने से ऐसे व्यक्ति को प्रतिषिद्ध करने वाले लिखित आदेश की तामील करा सकेगा ।
302. विच्छृंखल व्यक्तियों का छावनी से निकाला जाना और अपवर्जन-(1) वह प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसकी छावनी में अधिकारिता है, या इत्तिला प्राप्त होने पर कि छावनी में निवासी अथवा वहां बार-बार आने-जाने वाला कोई व्यक्ति-
(क) ऐसा विच्छृंखल व्यक्ति है जो एक से अधिक बार जुए के लिए दोषसिद्ध हुआ है अथवा जो जुआघर या विच्छृंलतायुक्त मदिरालय या किसी अन्य प्रकार का विच्छृंलतायुक्त गृह चलाता है या उसमें बार-बार आता-जाता है; अथवा
(ख) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 17 के अधीन दण्डनीय अपराध के लिए छावनी में या अन्यत्र एक से अधिक बार दोषसिद्ध किया गया है; अथवा
(ग) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के अध्याय 8 के अधीन छावनी के अन्दर या अन्यत्र अपने सदाचार के लिए बन्धपत्र निष्पादित करने के लिए आदिष्ट किया गया है;
प्राप्त इत्तिला के सार को लिखित रूप में अभिलिखित करेगा तथा ऐसे व्यक्ति से यह अपेक्षा करते हुए ऐसे व्यक्ति के नाम समन निकाल सकेगा कि वह व्यक्ति हाजिर हो और यह हेतुक दर्शित करे कि उससे यह अपेक्षा क्यों न की जाए कि वह छावनी में से निकल जाए और उसमें पुनः प्रवेश करने से उसे प्रतिषिद्ध क्यों न कर दिया जाए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निकाले गए हर समन के साथ पूर्वोक्त अभिलेख की प्रति होगी तथा समन के साथ उस प्रति की तामील उस व्यक्ति पर की जाएगी जिसके नाम निकाला गया है ।
(3) मजिस्ट्रेट उस समय, जब ऐसे समन किया गया व्यक्ति उसके समक्ष हाजिर होता है, प्राप्त इत्तिला के सत्य होने के बारे में जांच करने के लिए अग्रसर होगा तथा ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य लेकर जैसा वह ठीक समझे और ऐसी जांच पर उसे जब यह प्रतीत होता है कि ऐसा व्यक्ति उपधारा (1) में वर्णित किस्म का व्यक्ति है तथा छावनी में व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि ऐसे व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाए कि वह निकल जाए और उसे छावनी में पुनः प्रवेश करने से प्रतिषिद्ध किया जाए तो मजिस्ट्रेट उस मामले की सूचना स्टेशन समादेशक अधिकारी को देगा तथा स्टेशन समादेशक अधिकारी ऐसे व्यक्ति पर उससे यह अपेक्षा करने वाले कि तुम छावनी में से इतने समय के अन्दर, जितना उस आदेश में विनिर्दिष्ट हो, निकल जाओ और स्टेशन समादेशक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना उसे उसमें पुनः प्रवेश करने से प्रतिषिद्ध करने वाले लिखित आदेश की तामील कराएगा ।
303. राजद्रोही व्यक्तियों का छावनी में से निकाला जाना और छावनी से अपवर्जन-(1) छावनी में यदि कोई व्यक्ति बल के किसी प्रभाग में अभक्ति, अप्रीति या अनुशासन भंग कराता है या कराने का प्रयत्न करता है या ऐसा कोई कार्य करता है जिसकी बाबत वह जानता है कि संभाव्यता है कि उससे संघ के सशस्त्र बलों के किसी प्रभाग में अभक्ति, अप्रीति या अनुशासन भंग होगा अथवा ऐसा व्यक्ति है जिसकी बाबत स्टेशन समादेशक अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि संभाव्यता है कि वह ऐसा कोई कार्य करे, तो स्टेशन समादेशक अधिकारी ऐसी बात करने के लिए कारणों को उपवर्णित करते हुए तथा ऐसे व्यक्ति से यह अपेक्षा करने वाला कि वह छावनी में से इतने समय के अन्दर, जितना उस आदेश में विनिर्दिष्ट हो, निकल जाए और स्टेशन समादेशक अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना उसमें पुनः प्रवेश करने से उसे प्रतिषिद्ध करने वाला लिखित आदेश दे सकेगा :
परंतु इस धारा के अधीन कोई भी आदेश किसी व्यक्ति के विरुद्ध तब के सिवाय न दिया जाएगा, जबिक उसे उन आधारों की जानकारी पा लेने का, जिन पर वह आदेश करने की प्रस्थापना है तथा यह हेतुक दर्शित करने का कि एक ऐसा आदेश क्यों न दिया जाए, युक्तियुक्त अवसर न दे दिया हो ।
(2) उपधारा (1) के अधीन दिए गए प्रत्येक आदेश जिले के पुलिस अधीक्षक को भेजा जाएगा जो उसकी प्रति की तामील संपृक्त व्यक्ति पर करवाएगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश देने पर स्टेशन समादेशक अधिकारी उसकी प्रति केन्द्रीय सरकार को तत्काल भेजेगा ।
(4) केन्द्रीय सरकार स्वप्रेरणा से तथा उस व्यक्ति द्वारा, जिसके विरुद्ध वह आदेश दिया गया है, उस आदेश की तारीख से एक मास के अन्दर इस निमित्त अपने से किए गए आवेदन पर जिला मजिस्ट्रेट से यह अपेक्षा कर सकेगी कि उस आदेश के न्यायसंगत होने की बाबत तथा उसकी आवश्यकता की बाबत रिपोर्ट ऐसी जांच करने के पश्चात्, जैसी केन्द्रीय सरकार विहित करे, दे:
परन्तु ऐसी हर जांच में उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध वह आदेश दिया गया है, अपनी प्रतिरक्षा में अपनी सुनवाई किए जाने का अवसर दिया जाएगा ।
(5) केन्द्रीय सरकार उपधारा (3) के अधीन भेजी गई आदेश की प्रति की प्राप्ति के पश्चात् किसी समय अथवा उस सूरत में, जिसमें उपधारा (4) के अधीन रिपोर्ट दिए जाने की अपेक्षा की गई है, उस रिपोर्ट की प्राप्ति पर उस दशा में, जिसमें कि उसकी यह राय है कि उस आदेश में फेरफार किया जाना चाहिए, या उसे विखण्डित किया जाना चाहिए, उस पर ऐसा आदेश दे सकेगी जैसा वह ठीक समझती है ।
(6) ऐसा कोई व्यक्ति, जो इस धारा के अधीन दिए गए आदेश द्वारा छावनी से अपवर्जित किया गया है उस आदेश की तारीख से एक मास के अवसान के पश्चात् किसी समय कमान के मुख्य महा समादेशक अधिकारी से उसके विखण्डन के लिए आवेदन कर सकेगा तथा ऐसा आवेदन किए जाने पर उक्त अधिकारी ऐसी जांच करने के पश्चात् यदि कोई हो, जैसी वह ठीक समझता है या तो आवेदन को खारिज कर सकेगा या आदेश को विखण्डित कर सकेगा ।
304. शास्ति-जो कोई
(क) इस अध्याय के अधीन निकाले गए किसी आदेश का अनुपालन इतनी कालावधि के अंदर, जितनी उसमें विनिर्दिष्ट हो, असफल रहता है अथवा उस समय के दौरान जब अनुज्ञा के बिना छावनी में पनुः प्रवेश करने से उसे प्रतिषिद्ध करने वाला आदेश को भंग कर, ऐसी अनुज्ञा के बिना छावनी में पुनः प्रवेश करेगा, अथवा
(ख) यह जानते हुए कि किसी व्यक्ति से इस अध्याय के अधीन यह अपेक्षा की गई है कि वह छावनी में से निकल जाए तथा उससे उसमें पनुः प्रवेश करने के लिए अपेक्षित अनुज्ञा अभिप्राप्त नहीं की है, उस व्यक्ति को छावनी में संश्रय देगा, या छिपाए रखेगा,
वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा चालू रहने वाले अपराध की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम दिन के पश्चात् हर ऐसे दिन के लिए जिसके दौरान वह ऐसा अपराध करता रहता है, पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
अध्याय 15
शक्तियां, प्रक्रिया, शास्तियां और अपीलें
प्रवेश और निरीक्षण
305. प्रवेश करने की शक्तियां-बोर्ड के प्रधान या उपप्रधान या मुख्य कार्यपालक अधिकारी या स्वास्थ्य अधिकारी या मुख्य कार्यपालक अधिकारी या स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा विशेषतः प्राधिकृत किसी व्यक्ति के लिए अथवा बोर्ड द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के लिए यह बात विधिपूर्ण होगी कि वह सहायकों या कर्मकारों के सहित या बिना किसी भवन या भूमि में या पर इसलिए प्रवेश करे कि ऐसी कोई जांच, निरीक्षण, पैमाइश, मूल्यांकन या सर्वेक्षण करे या ऐसा कोई काम निष्पादित करे जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन प्राधिकृत है अथवा इस अधिनियम के अथवा उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या उपविधि के लिए या दिए गए किसी आदेश के उपबन्धों में से किसी के प्रयोजनों के लिए अथवा अनुसरण में जिसका किया जाना या निष्पादन आवश्यक है :
परन्तु इस धारा की किसी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह किसी व्यक्ति को ऐसी कोई शक्ति, जैसी धारा 274 या धारा 283 में निर्दिष्ट है, प्रदत्त करती है अथवा किसी व्यक्ति को किसी ऐसी शक्ति का प्रदत्त किया जाना प्राधिकृत करती है ।
306. निरीक्षण करने की बोर्ड के सदस्य की शक्ति-बोर्ड विशेष आदेश द्वारा किसी सदस्य को इस बात के लिए प्राधिकृत कर सकेगा या आदेश दे सकेगा कि वह ऐसे किसी संकर्म या ऐसी किसी संस्था का, जो पूर्णतः या भागतः बोर्ड के व्यय पर बनाया गया या बनाई गई है अथवा बनाया रखा जाता या बनाई रखी जाती है, तथा किसी ऐसे रजिस्टर, पुस्तक, लेखाओं या अन्य दस्तावेज का, जो बोर्ड की है या बोर्ड के कब्जे में है, निरीक्षण करे ।
307. निरीक्षण आदि की शक्ति-(1) बोर्ड या मुख्य कार्यपालक अधिकारी, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकेगा कि वह व्यक्ति-
(क) छावनी में के किसी भवन या भूमि में या पर की कोई नाली, संडास, शौचालय, मूत्रालय, चहबच्चे, पाइप, मलनाल या सरणी का निरीक्षण करे तथा स्वविवेकाधिकार से यथापरिस्थिति, नाली, संडास, शौचालय, मूत्रालय, चहबच्चे, पाइप, मलनाल या सरणी से उद्भूत कोई न्यूसेंस निवारित करने या दूर करने के प्रयोजन के लिए किसी भूमि को खुदवा दे;
(ख) छावनी में निर्माणाधीन संकर्मों की परीक्षा करे, उनके लिए तलमापन करे अथवा किसी मीटर को हटा दे, उसका परीक्षण करे, जांच करे, उसके बदले में दूसरे लगा दे या कोई मीटर पढ़े ।
(2) यदि ऐसे निरीक्षण पर यह पाया जाता है कि न्यूसेंस का निवारण करने के लिए या उसे दूर करने के लिए भूमि को खोदा जाना आवश्यक है तो उस भूमि या भवन के स्वामी या दखलकार द्वारा वे खर्च दिए जाएंगे जो ऐसा करने में हों, किन्तु यदि यह पाया जाता है कि ऐसा कोई न्यूसेंस विद्यमान नहीं है अथवा ऐसी खुदाई करने के अभाव में पैदा न हुआ होता तो जो भूमि या भवन का प्रभाग नाली या अन्य संकर्म ऐसे निरीक्षण के लिए खोदा गया, क्षत किया गया या हटाया गया है, वह, यथास्थिति, बोर्ड या मुख्य कार्यपालक अधिकरी द्वारा भर दिया जाएगा, पुनः अपनी पहली हालत में ला दिया जाएगा या ठीक हालत में कर दिया जाएगा ।
308. जिस भूमि में काम चल रहा है उसकी पार्श्वस्थ भूमि में प्रवेश करने की शक्ति-(1) छावनी का मुख्य कार्यपालक अधिकारी, सहायकों या कर्मकारों के सहित या उनके बिना ऐसी किसी भूमि में, जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन प्राधिकृत किसी संकर्म के पचास गज दूरी के अंदर है, उसमें कोई मिट्टी, बजरी, पत्थर या अन्य सामग्री जमा करने के लिए अथवा ऐसे संकर्म तक पहुंच अभिप्राप्त करने के लिए अथवा उसके लिए जाने से सम्बन्धित किसी अन्य प्रयोजन के लिए प्रवेश कर करेगा ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी उपधारा (1) के अधीन किसी भूमि पर प्रवेश करने के पूर्व उसके दखलकार को या यदि कोई दखलकार नहीं है तो उसके स्वामी को ऐसा प्रवेश करने के अपने आशय की तीन से अन्यून दिनों की लिखित पूर्व सूचना देगा तथा उसका प्रयोजन कथित करेगा तथा उस दशा में, जिसमें कि दखलकार या स्वामी द्वारा यह अपेक्षा की जाती है, उस भूमि के इतने भाग के चारों ओर बाड़ लगा देगा जितना भाग ऐसे प्रयोजन के लिए अपेक्षित हो ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी इस धारा द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग करने में, यथाशक्य कम से कम नुकसान पहुंचाएगा तथा किसी ऐसे नुकसान के लिए भले ही वह स्थायी हो या अस्थायी हो, ऐसी भूमि के स्वामी या दखलकार को या दोनों को बोर्ड द्वारा प्रतिकर देय होगा ।
309. परिसर में बलपूर्वक प्रवेश करना-किसी भी व्यक्ति के लिए, जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन किसी स्थान में प्रवेश करने के लिए प्राधिकृत है, किसी द्वार, फाटक या अन्य रोध को खोलना या खुलवा लेना उस दशा में विधिसम्मत होना-
(क) यदि उसका यह विचार है कि उसका ऐसा खोला जाना ऐसे प्रवेश के प्रयोजन के लिए आवश्यक है, और
(ख) यदि स्वामी या दखलकार अनुपस्थित है या उपस्थित तो है किन्तु ऐसे द्वार, फाटक या रोध को खोलने से इंकार करता है ।
310. दिन के समय प्रवेश का किया जाना-इस अधिनियम में स्पष्टतः अन्यथा उपबन्धित के सिवाय किसी भी प्रवेश, जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन प्राधिकृत है, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के बीच किए जाने के सिवाय न किया जाएगा ।
311. स्वामी की सम्मति का मामूली तौर पर अभिप्राप्त किया जाना-इस अधिनियम में स्पष्टतः अन्यथा उपबन्धित के सिवाय किसी भी भवन या भूमि में दखलकार की अथवा यदि कोई दखलकार नहीं है तो उसके स्वामी की सम्मति के बिना प्रवेश न किया जाएगा तथा कोई भी ऐसा प्रवेश, यथास्थिति, उक्त दखलकार या स्वामी को ऐसा प्रवेश करने के आशय की चार से अन्यून घंटे की लिखित सूचना दिए बिना न किया जाएगा:
परन्तु यह और कि यदि वह स्थान, जिसका निरीक्षण किया जाना है, कोई कारखाना या कर्मशाला या व्यवसाय परिसर है या धारा 277 में विनिर्दिष्ट किसी व्यापार, आजीविका या उपजीविका चलाने के लिए उपयोग में लाया गया स्थान है या घोड़ों के लिए अस्तबल है या पशुओं के लिए सायबान है या शौचालय, संडास या मूत्रालय या निर्माणाधीन संकर्म है या यह अभिनिश्चित करने के लिए है कि क्या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाई गई किसी उपविधि के उल्लंघन में उस स्थान पर मानव उपभोग के लिए, आशयित किसी पशु का वध किया जाता है, तो ऐसी सूचना देना आवश्यक नहीं होगा ।
312. सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं का ध्यान रखा जाना-जब मानव आवास के लिए काम में आ रहे किसी स्थान में इस अधिनियम के अधीन प्रवेश किया जाता है, तब जिस स्थान में प्रवेश किया जाना है उसके दखलकारों की धार्मिक रूढ़ियों और प्रथाओं का सम्यक् ध्यान रखा जाएगा तथा स्त्री के वास्तविक दखल के किसी क्षेत्र में तब तक प्रवेश नहीं किया जाएगा या उसे बलपूर्वक खोलकर प्रवेश नहीं किया जाएगा जब तक उसे यह जानकारी न दे दी गई हो कि वहां से वह स्त्री हट जाने के लिए स्वतन्त्र है तथा उसे वहां से हट जाने के लिए हर युक्तियुक्त सुविधा न दे दी गई हो ।
313. बाधा डालने के लिए शास्ति-जो कोई भी बोर्ड की ओर से कार्य करते हुए किसी ऐसे व्यक्ति को, जो भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक नहीं है, अथवा ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे बोर्ड ने विधिपूर्वक संविदा की है, अपने कर्तव्य के निष्पादन में अथवा ऐसी किसी बात के निष्पादन में जिसे वह व्यक्ति इस अधिनियम के अथवा इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या उपविधि या दिए गए आदेश के उपबन्धों में से किसी आधार पर या परिणामस्वरूप अथवा, यथास्थिति, अपनी संविदा को पूरा करने के लिए सशक्त या अपेक्षित है, बाधित करेगा या दिक् करेगा, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्नीय होगा ।
पुलिस अधिकारियों की शक्तियां और कर्तव्य
314. वारंट के बिना गिरफ्तारी-पुलिस बल का कोई सदस्य, जो छावनी में नियोजित है, वारंट के बिना ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा, जो उसकी दृष्टि में इस अधिनियम के उन उपबन्धों में से किसी का भंग कर रहा है जो चौथी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है:
परन्तु-
(क) ऐसे किसी उपबन्ध के भंग की दशा में, जो चौथी अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट है, कोई भी व्यक्ति, जो अपना नाम और पता दे देने के लिए सहमत है, तब के सिवाय ऐसे गिरफ्तार न किया जाएगा जबकि ऐसे दिए गए नाम या पते के सही होने के सम्बन्ध में संदेह करने के लिए युक्तियुक्त आधार विद्यमान है जिसको साबित करने का भार गिरफ्तार करने वाले अधिकारी पर होगा तथा ऐसे गिरफ्तार किया गया कोई भी व्यक्ति उसका नाम और पता अभिनिश्चित कर लिए जाने के पश्चात् निरुद्ध नहीं रखा जाएगा, और
(ख) धारा 300 के अधीन किसी अपराध के लिए किसी भी व्यक्ति की ऐसी गिरफ्तारी-
(i) उस व्यक्ति के अनुरोध पर, जिससे ऐसी अतियाचना की गई है अथवा उस सैनिक अधिकारी के अनुरोध पर, जिसकी उपस्थिति में वह अपराध किया गया है, किए जाने के सिवाय न की जाएगी; अथवा
(ii) सेना, नौसेना या वायुसेना पुलिस के सदस्य के द्वारा या अनुरोध पर, जो छावनी में नियोजित है तथा स्टेशन समादेशक अधिकारी के द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है, तथा जिसकी उपस्थिति में वह अपराध किया गया है अथवा सहायक उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे के ऐसे किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या के अनुरोध पर जो छावनी में नियोजित है तथा स्टेशन समादेशक अधिकारी द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत है, की जाने के सिवाय न की जाएगी ।
315. पुलिस अधिकारियों के कर्तव्य-सभी पुलिस अधिकारियों का यह कर्तव्य होगा कि इस अधिनियम के अथवा इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या बनाई गई किसी उपविधि के उपबन्धों के विरुद्ध किसी अपराध के किए जाने या उसके किए जाने के प्रयत्न की जानकारी तुरन्त बोर्ड को दें तथा छावनी के अधिकारियों और सेवकों की सहायता उनके द्वारा अपने विधिपूर्ण प्राधिकारों का प्रयोग किए जाने में करें ।
सूचनाएं
316. सूचनाओं में युक्तियुक्त समय का नियत किया जाना-जहां किसी सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा से, जो इस अधिनियम के अथवा इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किसी उपविधि के अधीन दी गई या की गई है, यह अपेक्षित है कि कोई बात की जाए, किन्तु जिसके किए जाने के लिए कोई समय इस अधिनियम में या उस उपविधि में नियत नहीं है, वहां उस सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा में उसके किए जाने के लिए युक्तियुक्त समय विनिर्दिष्ट किया जाएगा ।
317. बोर्ड द्वारा निकाली गई सूचना का अधिप्रमाणीकरण और विधिमान्यता-(1) इस अधिनियम के अथवा इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या बनाई गई उपविधि के अधीन बोर्ड द्वारा निकाली गई हर सूचना, आदेश अथवा अध्यपेक्षा-
(क) या तो बोर्ड के प्रधान अथवा मुख्य कार्यपालक अधिकारी के द्वारा, अथवा
(ख) बोर्ड द्वारा इस निमित्त विशिष्टतः प्राधिकृत किसी समिति के सदस्यों द्वारा, हस्ताक्षरित होगी ।
(2) जब कभी इस अधिनियम के अधीन अथवा उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या बनाई गई उपविधि के अधीन किसी बात का किया जाना या किए जाने का लोप किया जाना या किसी बात की विधिमान्यता बोर्ड के अनुमोदन, मंजूरी, सम्मति, सहमति, घोषणा, राय या समाधान पर आधारित है, तब ऐसे अनुमोदन, मंजूरी, सम्मति, सहमति, घोषणा, राय या समाधान की जानकारी देने या उपवर्णित करने के लिए तात्पर्यित कोई लिखित दस्तावेज, जो उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट किसी अधिकारी या सदस्य द्वारा हस्ताक्षरित है, उसका पर्याप्त साक्ष्य होगा ।
(3) प्रत्येक ऐसी अनुज्ञप्ति, लिखित अनुज्ञा, सूचना, बिल, समन या अन्य दस्तावेज के बारे में, जिस पर इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या बनाई गई उपविधि द्वारा प्रधान, उपप्रधान या मुख्य कार्यपालक अधिकारी या ऐसी किसी समिति के ऐसे किसी सदस्य के बारे में, जो इन निमित्त विशेषतः प्राधिकृत किया गया हो, हस्ताक्षर होने अपेक्षित हैं, यह समझा जाएगा कि वह समुचित रूप से हस्ताक्षरित है, यदि उस पर, यथास्थिति, ऐसे अधिकारी या सदस्य के हस्ताक्षर की अनुमति मुद्रित है ।
318. सूचना, आदि की तामील-(1) इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या बनाई गई किसी उपविधि के अधीन निकाली गई हर सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा की तामील या उपस्थापन वहां के सिवाय जहां कि स्पष्टतः अन्यथा उपबन्धित है-
(क) वह सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा, उस व्यक्ति को, जिसके लिए वह आशयित है, देकर या निविदत्त करके अथवा डाक द्वारा उसे भेजकर की जाएगी या किया जाएगा, अथवा
(ख) उस दशा में, जिसमें कि ऐसा व्यक्ति पाया नहीं जा सकता, सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा उसके अंतिम ज्ञात आवास या कारबार स्थान के, यदि वह छावनी में हो, सहजदृश्य भाग पर लगाकर अथवा वह सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा उसके कुटुम्ब के किसी वयस्क सदस्य पर या सेवक को देकर या निविदत्त करके अथवा उस भवन या भूमि के, यदि कोई हो, जिससे वह सम्बन्धित है, किसी सहजदृश्य भाग पर उसे लगवाकर की जाएगी या किया जाएगा ।
(2) जब कि किसी ऐसी सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा की तामील का किसी भवन या भूमि के स्वामी या पट्टेदार या दखलकार पर किया जाना अपेक्षित या अनुज्ञात है तब उसमें उस स्वामी, पट्टेदार या दखलकार का नाम देना आवश्यक न होगा तथा उसकी तामील वहां के सिवाय, जहां कि स्पष्टतः अन्यथा उपबन्धित है, या तो-
(क) वह सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा स्वामी, पट्टेदार या दखलकार को या यदि एक से अधिक स्वामी, पट्टेदार या दखलकार हैं तो उनमें से किसी को देकर या निविदत्त करके अथवा डाक द्वारा उसे भेजकर की जाएगी, अथवा
(ख) उस दशा में जिसमें कि ऐसा स्वामी, पट्टेदार, दखलकार पाया नहीं जा सकता ऐसे स्वामी, पट्टेदार या दखलकार के प्राधिकृत अभिकर्ता को, यदि कोई हो, अथवा ऐसे किसी स्वामी, पट्टेदार या दखलकार के कुटुम्ब के किसी वयस्क सदस्य या सेवक को वह सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा देकर या निविदत्त करके अथवा उस भवन या भूमि के, जिससे वह सम्बन्धित है, किसी सहजदृश्य भाग पर उसे लगवाकर की जाएगी ।
(3) जब कि वह व्यक्ति, जिस पर सूचना आदेश या अध्यपेक्षा की तामील की जानी है अवयस्क है तब उसके संरक्षक पर अथवा उसके कुटुम्ब के वयस्क सदस्य या सेवक पर की गई उसकी तामील अवस्यक पर उसकी तामील समझी जाएगी ।
319. सूचना देने की रीति-लोक सूचना के रूप में अथवा ऐसी सूचना के रूप में, जिसको उस सूचना में विनिर्दिष्ट किसी व्यष्टि को दिया जाना अपेक्षित नहीं है, इस अधिनियम के द्वारा या अधीन दी जाने वाली या तामील की जाने वाली हर सूचना की बाबत वहां के सिवाय जहां कि स्पष्टतः या अन्यथा उपबन्धित है यह बात कि वह पर्याप्त रूप से दे दी गई है या तामील कर दी गई है, उस दशा में समझी जाएगी जिसमें कि उसकी प्रति बोर्ड के कार्यालय के ऐसे सहजदृश्य भाग में अथवा किसी अन्य ऐसे लोक स्थान में ऐसी अवधि के दौरान लगा दी गई है अथवा ऐसे स्थानीय समाचारपत्र में अथवा ऐसी अन्य रीति से प्रकाशित कर दी गई है जैसी बोर्ड निर्दिष्ट करे ।
320. सूचना आदि के अननुपालन की दशा में बोर्ड की शक्ति-जो सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा इस अधिनियम के अथवा इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या बनाई गई उपविधि के अधीन किसी व्यक्ति के नाम जारी की गई है उसके ऐसे निबन्धनों के, जिनसे ऐसे व्यक्ति से कोई संकर्म निष्पादित करने अथवा कोई कार्य करने की अपेक्षा की गई है, बोर्ड अननुपालन की दशा में बोर्ड या सिविल क्षेत्र समिति या मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिसकी प्रेरणा पर ऐसी सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा जारी की गई है, के लिए यह बात भले ही व्यतिक्रमकर्ता व्यक्ति ऐसे व्यतिक्रम के लिए दण्डनीय हो या नहीं अथवा उसके लिए अभियोजित या किसी दण्ड से दण्डादिष्ट किया गया हो या नहीं, विधिसम्मत होगी कि ऐसे व्यक्ति को लिखित सूचना देने के पश्चात् वह ऐसी कार्यवाही करे या कदम उठाए जो उस कार्य या संकर्म की पूर्ति के लिए, जिसका उस द्वारा किया जाना या निष्पादित किया जाना अपेक्षित है, आवश्यक हों, तथा उस मद्दे उपगत सब व्यय मांग किए जाने पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा वसूलनीय होंगे और यदि ऐसी मांग के पश्चात् दस दिन के भीतर संदाय नहीं किया जाता है तो उसी रीति से वसूलनीय होंगे जैसे कि धारा 324 के अधीन बोर्ड द्वारा धनराशि वसूलनीय होती है :
परंतु जहां यह कार्रवाई या कदम धारा 248 के अधीन किसी निर्माण या पुनर्निर्माण ढा देने से या धारा 252 के अधीन किसी प्रलम्बन के हटाने या अधिक्रमण से संबंधित है, वहां बोर्ड या सिविल क्षेत्र समिति या मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी पुलिस अधिकारी से ऐसी सहायता के लिए अनुरोध कर सकेगा जो इस निमित्त किसी शक्ति के विधिपूर्ण प्रयोग के लिए आवश्यक समझी जाए और ऐसे पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी अध्यपेक्षा पर ऐसी सहायता तत्काल दे ।
321. दखलकार द्वारा स्वामी को, जब वह सूचना का अनुपालन कर रहा हो, बाधा न पहुंचाना-यदि ऐसी संपत्ति का स्वामी जिसके संबंध में धारा 320 में यथानिर्दिष्ट सूचना दी गई है ऐसी सूचना का अनुपालन करने से दखलकार द्वारा निवारित किया जाता है, तो बोर्ड या सिविल क्षेत्र समिति या मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जिनकी प्रेरणा पर ऐसी सूचना दी गई है, उक्त दखलकार से आदेश द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसी सूचना की तामील की तारीख से आठ दिन के भीतर उक्त स्वामी को ऐसी सभी कार्रवाई करने के लिए अनुज्ञा दे, जो उक्त सूचना का अनुपालन करने के लिए आवश्यक हो, और ऐसे स्वामी को, ऐसी कालावधि के लिए जिसके दौरान वह पूर्वोक्त रूप से निवारित किया गया है, किसी प्रकार के जुर्माने या दण्ड से छूट होगी, जिसके लिए वह ऐसी सूचना के अननुपालन के कारण अन्यथा दायी होता ।
धनराशि की वसूली
322. स्वामी द्वारा व्यतिक्रम किए जाने की दशा में अदायगी करने का दखलकार का दायित्व-(1) यदि ऐसी कोई सूचना, जैसी धारा 320 में निर्दिष्ट है, किसी व्यक्ति को ऐसी सम्पत्ति की बाबत दी गई है, जिसका वह स्वामी है और वह इस प्रकार दी गई सूचना का पालन करने में असफल रहता है तो बोर्ड या सिविल क्षेत्र समिति या मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिसकी प्रेरणा पर ऐसी सूचना जारी की गई है ऐसी संपत्ति या उसके किसी भाग के किसी दखलकार से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह संपत्ति की बाबत उस द्वारा देय कोई भाटक जैसे-जैसे वह शोध्य होता है, उस रकम तक जो धारा 320 के अधीन स्वामी से वसूलीय है, स्वामी के बजाय उसे दे :
परन्तु यदि दखलकार, बोर्ड या सिविल क्षेत्र समिति या मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा, जिसकी प्रेरणा पर ऐसी सूचना जारी की गई है, उससे किए गए आवेदन पर अपने भाटक की रकम या उस व्यक्ति का नाम या पता जिसे वह देय है, सही-सही प्रकट करने से इंकार करता है, तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी दखलकार से धारा 320 के अधीन वसूली योग्य कुल रकम उसी रीति से वसूल करेगा जैसे कि धारा 324 के अधीन बोर्ड द्वारा धनराशि वसूलीय है ।
(2) स्वामी के बजाय दखलकार से उपधारा (1) के अधीन वसूल की गई कोई रकम स्वामी और दखलकार के बीच इसके प्रतिकूल किसी संविदा के अभाव में स्वामी को दी गई रकम समझी जाएगी ।
323. अभिकर्ताओं या न्यासियों की अवमुक्ति-(1) जहां कि कोई व्यक्ति अभिकर्ता या न्यासी के रूप में अपने द्वारा स्थावर सम्पत्ति का भाटक प्राप्त करने के कारण अथवा उस व्यक्ति का अभिकर्ता या न्यासी होने के कारण जिसे यदि वह सम्पत्ति अभिधारी को पट्टे पर दी गई होती तो भाटक प्राप्त होता उस सम्पत्ति के स्वामी पर अधिरोपित ऐसी किसी बाध्यता का निर्वहन करने के लिए आबद्ध है जिसके निर्वहन के लिए धनराशि अपेक्षित है, वहां वह उस बाध्यता का निर्वहन करने के लिए तब के सिवाय आबद्ध न होगा जबकि उसके हाथ में स्वयं की ऐसी निधियां हैं जो उस प्रयोजन के लिए पर्याप्त हैं या उसके अपने अनुचित कार्य या व्यतिक्रम के अभाव में होती ।
(2) ऐसे किसी तथ्य को साबित करने का भार जिससे अभिकर्ता या न्यासी उपधारा (1) के अधीन राहत का हकदार हो जाता है, उस पर ही होगा ।
(3) जहां कि किसी अभिकर्ता या न्यासी ने इस धारा के अधीन राहत के अपने अधिकार का दावा किया है और उसे सिद्ध कर दिया है, वहां बोर्ड उससे लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस बाध्यता का निर्वहन करने के लिए, जैसी पूर्वोक्त है वे प्रथम धनराशियां, जो उसके हाथ में स्वामी के निमित्त या स्वामी के उपयोग के लिए आएं, उपयोजित करे तथा उस सूचना का अनुपालन न करने पर उसकी बाबत यह समझा जाएगा कि वह उस बाध्यता का निर्वहन करने के लिए वैयक्तिक रूप से जिम्मेदार है ।
324. वसूली की रीति-(1) इस अधिनियम में अन्यत्र किसी बात के होते हुए भी, किसी कर की बकाया और कोई अन्य वसूली योग्य धनराशि जिसमें बोर्ड या रक्षा संपदा अधिकारी द्वारा या उनके पक्ष में निष्पादित पट्टों या अनुज्ञप्तियों के अधीन भूमि और भवनों पर शोध्य भाटक या शोध्य नुकसानी और जुर्माना भी सम्मिलित है इस अधिनियम अथवा इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन वसूली योग्य है, वसूली के खर्च सहित या तो वाद द्वारा अथवा छावनी में या ऐसे किसी स्थान में, जहां कि वह व्यक्ति, जिससे ऐसा कर, भाटक या धनराशि वसूली योग्य है, तत्समय निवासी हो, अधिकारिता रखने वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट से आवेदन पर या दो ऐसे व्यक्तियों की किसी ऐसी जंगम सम्पत्ति के करस्थम् और विक्रय द्वारा या, उस व्यक्ति की ऐसी स्थावर संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा, या इन दोनों ही ढंगों से जो ऐसे न्यायिक मजिस्ट्रेट की अधिकारिता की सीमाओं के अंदर है वसूल की जाएगी तथा यदि वह ऐसी सम्पत्ति के स्वामी द्वारा उस रूप में देय है तो वह चुका दिए जाने तक उस सम्पत्ति पर भार होगी :
परन्तु शिल्पियों के औजार, पांच हजार रुपए तक के मूल्य की उगती फसलें तथा कृषि के प्रयोजनों के लिए उपयोग में आने वाले उपकरण और पशु ऐसे करस्थम् या विक्रय से छूट प्राप्त होंगे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन न्यायिक मजिस्ट्रेट से आवेदन लिखित रूप मे किया जाएगा तथा बोर्ड के प्रधान अथवा उपप्रधान द्वारा अथवा मुख्य कार्यपालक अधिकारी अथवा रक्षा संपदा अधिकारी या स्टेशन समादेशक अधिकारी या इन अधिकारियों में से प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा, किन्तु उसके लिए यह अपेक्षित न होगा कि वह स्वयं उनमें से किसी द्वारा उपस्थापित किया जाए ।
(3) आवेदन प्राप्त होने पर, उपधारा (1) में निर्दिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट कर, भाटक या धनराशि की रकम की वसूली आवेदन में विनिर्दिष्ट व्यक्ति से करने के लिए कार्रवाई कर सकेगा मानो ऐसी रकम जुर्माना हो जो उसके द्वारा पारित दंडादेश के अधीन वसूलीय हो और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 421 और धारा 422 के उपबन्ध, ऐसी रकम की वसूली में, जहां तक हो सके, लागू होंगे:
परन्तु उक्त व्यक्ति को गिरफ्तार या कारागार में निरुद्ध करके ऐसी किसी रकम की वसूली नहीं की जाएगी ।
माध्यस्थम् समितियां
325. माध्यस्थम् समिति के लिए आवेदन-इस अधिनियम के अधीन कोई प्रतिकर देने के बोर्ड के दायित्व के संबंध में अथवा ऐसे देय किसी प्रतिकर की रकम के सम्बन्ध में कोई मतभेद होने की दशा में वह व्यक्ति, जो ऐसे प्रतिकर के लिए दावा कर रहा है, बोर्ड से यह आवेदन कर सकेगा कि वह मामला माध्यस्थम् समिति को निर्दिष्ट किया जाए तथा बोर्ड विवादग्रस्त विषय का अवधारण करने के लिए माध्यस्थम् समिति संयोजित करने के लिए तत्काल कार्यवाही करेगा ।
326. माध्यस्थम् समिति संयोजित करने की प्रक्रिया-जब माध्यस्थम् समिति संयोजित की जानी है तब बोर्ड अवधारित किए जाने वाले विषय कथित करते हुए एक लोक सूचना प्रकाशित कराएगा तथा उस आदेश की प्रतियां जिला मजिस्ट्रेट को तथा संबद्ध अन्य पक्षकार को तत्काल भेजेगा तथा यथाशीघ्र समिति के ऐसे सदस्यों को नामनिर्दिष्ट करेगा जैसे वह धारा 327 के अधीन नामनिर्दिष्ट करने का हकदार है तथा लिखित सूचना द्वारा उन अन्य व्यक्तियों से, जो समिति का एक सदस्य या कई सदस्य नामनिर्दिष्ट करने के हकदार हैं यह अपेक्षा करेगा कि वह उस धारा के उपबन्धों के अनुसार ऐसा सदस्य या ऐसे सदस्य नामनिर्दिष्ट करे ।
327. माध्यस्थम् समिति का गठन-(1) हर माध्यस्थम् समिति पांच सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात्: -
(क) अध्यक्ष, वह व्यक्ति होगा जो सरकार या बोर्ड की सेवा में न हो तथा जो स्टेशन समादेशक अधिकारी द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा:
(ख) बोर्ड द्वारा नामनिर्दिष्ट दो व्यक्ति;
(ग) दूसरे पक्षकार द्वारा नामनिर्दिष्ट दो व्यक्ति ।
(2) यदि बोर्ड अथवा संबद्ध दूसरा पक्षकार या स्टेशन समादेशक अधिकारी धारा 326 में निर्दिष्ट सूचना के निकलने की तारीख से सात दिन के अन्दर ऐसा कोई नामनिर्देशन नहीं कर देता, जो वह कर देने का हकदार है अथवा यदि ऐसा कोई सदस्य, जो ऐसे नामनिर्दिष्ट किया गया है, कार्य करने में उपेक्षा करता है या कार्य करने से इंकार करता है तथा बोर्ड या वह अन्य व्यक्ति, जिस द्वारा ऐसा सदस्य नामनिर्दिष्ट किया गया था उसके बदले में कोई अन्य सदस्य उस तारीख से, जिसको उससे जिला मजिस्ट्रेट ने यह करने की अपेक्षा की हो, सात दिन के अन्दर नामनिर्दिष्ट नहीं कर देता, तो जिला मजिस्ट्रेट, यथास्थिति, एक सदस्य या कई सदस्यों को रिक्ति या रिक्तियां भरने के लिए तत्काल नियुक्त करेगा ।
328. ऐसे किसी व्यक्ति को नामनिर्दिष्ट न किया जाना जो प्रत्यक्षतः हितबद्ध है या जिसकी सेवाएं अविलम्ब उपलब्ध नहीं हैं-(1) ऐसे किसी भी व्यक्ति को, जिसका निर्देश किए जाने वाले विषय में प्रत्यक्ष हित विद्यमान है अथवा जिसकी सेवाएं समिति के प्रयोजनों के लिए अविलम्ब उपलब्ध नहीं हैं, माध्यस्थम् समिति का सदस्य नामनिर्दिष्ट नहीं किया जाएगा ।
(2) यदि जिला मजिस्ट्रेट की यह राय है कि जो व्यक्ति नामनिर्दिष्ट किया गया है उसका निर्देश किए जाने वाले विषय में प्रत्यक्ष हित विद्यमान है या वह नामनिर्देशन के लिए अन्यथा निरर्हित है अथवा यदि पूर्वोक्त ऐसे किसी व्यक्ति की सेवा पूर्वोक्त रूप में अविलम्ब उपलब्ध नहीं है तथा यदि बोर्ड या वह अन्य व्यक्ति, जिस द्वारा ऐसा कोई व्यक्ति नामनिर्दिष्ट किया गया था दूसरा सदस्य उस तारीख से, जिसको उससे जिला मजिस्ट्रेट ने ऐसा करने की अपेक्षा की हो, सात दिन के अन्दर नामनिर्दिष्ट नहीं कर देता, तो उसके ऐसा न करने की बाबत यह समझा जाएगा कि उसने धारा 329 के अर्थ के अन्दर नामनिर्दिष्ट नहीं किया ।
329. माध्यस्थम् समितियों के अधिवेशन और शक्तियां-(1) जब माध्यस्थम् समिति सम्यक् रूप से गठित कर दी गई है, तब बोर्ड सदस्यों में से हर एक को तथ्य की इत्तिला लिखित सूचना द्वारा देगा तथा तत्पश्चात् यथाशीघ्र समिति का अधिवेशन होगा ।
(2) समिति का अध्यक्ष अधिवेशनों का समय और स्थान नियत करेगा तथा अधिवेशन को समय-समय पर, जैसा भी आवश्यक हो, स्थगित कर देने की शक्ति उसे प्राप्त होगी ।
(3) समिति साक्ष्य लेगी और अभिलिखित करेगी तथा साक्षियों को शपथ ग्रहण कराने की उसे शक्ति प्राप्त होगी तथा समिति के अध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षरित लिखित अध्यपेक्षा पर जिला मजिस्ट्रेट, समिति द्वारा अपेक्षित साक्षियों की हाजिरी और दस्तावेजों की पेशी के लिए आवश्यक आदेशिकाएं निकालेगा तथा उक्त आदेशिकाओं को ऐसे प्रवृत्त करा सकेगा मानो वे स्वयं उसके समक्ष हाजिरी या पेशी के लिए आदेशिकाएं हों ।
330. माध्यस्थम् समितियों के विनिश्चय-(1) हर माध्यस्थम् समिति का विनिश्चय, उस अधिवेशन में, जिसमें अध्यक्ष और कम से कम तीन अन्य सदस्य उपस्थित हैं, लिए गए मतों की बहुसंख्या के अनुसार किया जाएगा ।
(2) यदि किसी प्रस्थापित विनिश्चय के पक्ष में मतों की बहुसंख्या नहीं है, तो अध्यक्ष की राय अभिभावी होगी ।
(3) माध्यस्थम् समिति का विनिश्चय अन्तिम होगा तथा किसी न्यायालय में वह प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
अभियोजन
331. अभियोजन-इस अधिनियम में स्पष्टतः अन्यथा उपबन्धित के सिवाय कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के द्वारा या अधीन दण्डनीय किए गए ऐसे किसी अपराध का विचारण, जो चौथी अनुसूची में विनिर्दिष्ट अपराध से भिन्न है, करने के लिए उस परिवाद पर या उस इत्तिला पर अग्रसर होने के सिवाय अग्रसर न होगा जो सम्पृक्त बोर्ड या बोर्ड द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा किया गया या दी गई है ।
332. अपराध का शमन-(1) मुख्य कार्यपालक अधिकारी या उस द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई व्यक्ति इस अधिनियम के द्वारा या अधीन दण्डनीय ऐसे किसी अपराध के बारे में, जो अध्याय 14 के अधीन वाले अपराध से भिन्न है, शमन या तो कार्यवाहियों के संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात् कर सकेगा:
परन्तु जो अपराध मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा या उसकी ओर से निकाली गई सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा का अनुपालन न करने से होता है वैसा कोई भी अपराध उस दशा के सिवाय और तब के सिवाय शमन योग्य न होगा जिसमें कि और जब उसका वहां तक अनुपालन कर दिया गया है जहां तक उसका अनुपालन करना संभव है ।
(2) जहां कि किसी अपराध का शमन करवा लिया गया है वहां यदि अपराधी अभिरक्षा में है तो वह उन्मुक्त कर दिया जाएगा और उसके विरुद्ध आगे कोई कार्यवाहियां उस अपराध की बाबत न की जाएंगी जिसका ऐसे शमन किया गया है ।
साधारण शास्ति विषयक उपबन्ध
333. साधारण शास्ति-जो ऐसे किसी मामले में जिसमें इस अधिनियम द्वारा कोई शास्ति स्पष्टतः उपबन्धित नहीं है इसके किसी उपबन्ध के अधीन निकाली गई किसी सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहेगा अथवा इस अधिनियम के उपबन्धों में से किसी का अन्यथा उल्लंघन करेगा वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा लगातार असफलता या उल्लंघन की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम दिन के बाद के ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान वह बराबर ऐसे असफल रहता है या उल्लंघन करता रहता है, पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
334. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गयाहै, वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी व्यक्ति को किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध का किया जाना रोकने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी अपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में, निदेशक" से फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
335. अनुज्ञप्तियों आदि का रद्द किया जाना या उनका निलम्बन-जहां कोई व्यक्ति जिसे इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा दी गर्इ है, या ऐसे व्यक्ति का कोई अभिकर्ता या सेवक उसकी शर्तों में से किसी शर्त का अथवा इस अधिनियम के अधीन बनाई गई किसी उपविधि को भंग करता है जो उस रीति या उन परिस्थितियों को जिनमें, अथवा वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, वह बात, जो ऐसी अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा द्वारा अनुज्ञात की गई है, की जानी है या की जा सकती है, विनियमित करने के लिए, बनाई गई है या जहां, यथास्थिति, बोर्ड या सिविल क्षेत्र समिति का समाधान हो गया है कि ऐसी अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञाधारक द्वारा दुर्व्यपदेशन या कपट द्वारा प्राप्त की गई है, वहां, यथास्थिति, बोर्ड या सिविल क्षेत्र समिति ऐसी किसी अन्य शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो इस अधिनियम के अधीन उपगत कर ली गई हो, लिखित आदेश द्वारा अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा को रद्द या इतनी कालावधि के लिए निलम्बित कर सकेगा जितनी वह ठीक समझता है;
परन्तु ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक कि अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा के धारक को यह हेतुक दर्शित करने का कि ऐसा आदेश क्यों न दिया जाए, अवसर न दे दिया गया हो ।
336. छावनी सम्पत्ति को हुए नुकसान की बाबत देय रकम की वसूली-जहां किसी व्यक्ति ने कोई शास्ित बोर्ड की सम्पत्ति को कोई नुकसान पहुंचाने के कारण उपगत कर ली है वहां वह उस नुकसान के लिए प्रतिपूर्ति करने के दायित्व के अधीन होगा तथा नुकसान लेखे देय रकम उस बारे में विवाद उठने की दशा में उस न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अवधारित की जाएगी जिसने शास्ति उपगत करने वाले व्यक्ति को दोषसिद्ध किया है तथा मांग की जाने पर उसकी रकम की अदायगी न की जाने पर वह या तो ऐसे व्यक्ति की जंगम संपत्ति करस्थम् और विक्रय द्वारा या उस व्यक्ति की स्थावर संपत्ति की कुर्की या विक्रय द्वारा, या इन दोनों ढंगों से, वसूल की जाएगी और न्यायिक मजिस्ट्रेट, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 421 और धारा 422 के उपबन्धों के अनुसार रकम को ऐसे वसूल करेगा मानो वह जुर्माना हो जो उसके द्वारा पारित दंडादेश के अधीन वसूलीय है ।
परिसीमाकाल
337. अभियोजन के लिए परिसीमाकाल-कोई न्यायालय ऐसे किसी अपराध के लिए व्यक्ति का विचारण, जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन दण्डनीय है, उस अपराध के किए जाने की तारीख से छह मास के अवसान के पश्चात् तब के सिवाय न करेगा जबकि उस अपराध की बाबत परिवाद न्यायिक मजिस्ट्रेट से पूर्वोक्त छह मास के अन्दर कर दिया गया है ।
वाद
338. बोर्ड आदि की कार्रवाई के लिए संरक्षण-कोई न्यायालय इस अधिनियम के अथवा इसके अधीन बनाए किसी नियम या बनाई गई किसी उपविधि के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद या अभियोजन, बोर्ड के अथवा मुख्य कार्यपालक अधिकारी, स्टेशन मुख्य महासमादेशक अधिकारी, रक्षा संपदा अधिकारी, प्रधान निदेशक, मुख्य महासमादेशक अधिकारी, कमांड, महानिदेशक रक्षा संपदा, के अथवा बोर्ड के किसी सदस्य के अथवा बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध ग्रहण न करेगा ।
339. वादों की सूचना का दिया जाना-(1) ऐसे किसी कार्य की बाबत, जो इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के या बनाई गई उपविधि के अनुसरण में किया गया है या किया जाना तात्पर्यित है, कोई भी वाद बोर्ड के विरुद्ध अथवा बोर्ड के किसी सदस्य या बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध तब तक संस्थित न किया जाएगा जब तक उसकी लिखित सूचना बोर्ड के कार्यालय में छोड़ दिए जाने के पश्चात् दो मास का अवसान न हो गया हो तथा ऐसे सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी की दशा में जब तक उसकी लिखित सूचना उसे परिदत्त न कर दी गई हो अथवा उसके कार्यालय या आवास स्थान में छोड़ न दी गई हो तथा जब तक कि ऐसी सूचना में वाद हेतुक, मांगे गए अनुतोष का स्वरूप, दावा की गई प्रतिकर की रकम तथा वह वाद लाने का आशय रखने वाले व्यक्ति का नाम और आवास स्थान स्पष्टतः दिया हुआ न हो तथा जब कि वादपत्र में यह कथन विद्यमान न हो कि ऐसी सूचना ऐसे परिदत्त कर दी गई है या छोड़ दी गई है ।
(2) यदि बोर्ड या सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी वाद के संस्थित किए जाने के पूर्व वादी को पर्याप्त परिमार्जन रकम निविदत्त कर देता है, तो वादी ऐसी निविदत्त रकम से अधिक कोई धनराशि वसूल न कर पाएगा तथा वे सब खर्चे भी देगा जो ऐसे निविदत्त किए जाने के पश्चात् प्रतिवादी को उठाने पड़े हों ।
(3) जब तक कि ऐसा कोई वाद, जैसा उपधारा (1) में वर्णित है, स्थावर सम्पत्ति के प्रत्युद्धरण के लिए या उस पर के हक की घोषणा के लिए कार्रवाई के रूप में न हो, वह उस तारीख से छह मास के अवसान के पश्चात् संस्थित न किया जाएगा जिसको वाद हेतुक पैदा हुआ है ।
(4) उपधारा (1) की कोई बात ऐसे किसी वाद को लागू न होगी जिसमें एकमात्र दावाकृत अनुतोष ऐसा व्यादेश है जिसका उद्देश्य सूचना के दिए जाने से अथवा वाद या कार्यवाही का संस्थित किया जाना मुल्तवी किए जाने में विफल हो जाएगा ।
अपील और पुनरीक्षण
340. कार्यपालकीय आदेशों के विरुद्ध अपीलें-(1) जो कोई व्यक्ति पांचवी अनुसूची के तीसरे स्तम्भ में वर्णित किसी आदेश से व्यथित है वह उक्त अनुसूची के चौथे स्तम्भ में इस निमित्त विनिर्दिष्ट अपील प्राधिकारी के यहां अपील कर सकेगा
(2) केन्द्रीय सरकार, लंबित अपीलों का शीघ्रता से निपटारा करने के प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, पांचवी अनुसूची का संशोधन कर सकेगी जिससे कि उक्त अनुसूची के चौथे स्तंभ में अतिरिक्त अपील प्राधिकारी को अभिहित किया जा सके ।
(3) ऐसी कोई भी अपील उस दशा में ग्रहण न की जाएगी जिसमें कि वह उक्त अनुसूची के पांचवें स्तम्भ में इस निमित्त विनिर्दिष्ट कालावधि के अवसान के पश्चात् की जाती है ।
(4) पूर्वोक्त रूप से विनिर्दिष्ट कालावधि परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36) के उन उपबन्धों के अनुसार संगणित की जाएगी जो उसके अधीन परिसीमाकाल की संगणना करने के सम्बन्ध में है ।
341. अपील की अर्जी-(1) धारा 340 के अधीन प्रत्येक अपील लिखित रूप में अर्जी द्वारा की जाएगी तथा उसके साथ उस आदेश की प्रति होगी जिसके विरुद्ध अपील की जा रही है ।
(2) ऐसी कोई अर्जी उस प्राधिकारी के यहां प्रस्तुत की जा सकेगी जिसके आदेश के विरुद्ध वह अपील की गई है तथा वह प्राधिकारी उसे अपील प्राधिकारी को भेज देने के लिए आबद्ध होगा तथा वह उसके साथ ऐसी कोई रिपोर्ट संलग्न कर सकेगा जो वह स्पष्टीकरण के रूप में करना चाहे ।
342. अपील के लम्बित रहने तक कार्रवाई का निलम्बन-धारा 144, धारा 183, धारा 238, धारा 273 या धारा 302 के अधीन जारी की गई सूचना में अन्तर्विष्ट आदेश से भिन्न आदेश के विरुद्ध अपील ग्रहण किए जाने पर, जहां अपील प्राधिकारी ऐसा निदेश देता है, वहां आदेश को प्रवर्तित करने के लिए सभी कार्यवाहियां और उसके किसी उल्लंघन के लिए सभी अभियोजन अपील पर विनिश्चय होने तक प्रास्थगित रहेंगे और यदि आदेश को, अपील किए जाने पर, अपास्त कर दिया जाता है, तो उसकी अवज्ञा को अपराध नहीं समझा जाएगा ।
343. पुनरीक्षण-(1) जहां कि बोर्ड द्वारा किए गए आदेश की अपील जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निपटा दी गई है, वहां या तो कार्यवाहियों का कोई भी पक्षकार उसकी तारीख से तीस दिन के अन्दर उस विनिश्चय के पुनरीक्षण के लिए आवेदन कमान के मुख्य महासमादेशक अधिकारी के माध्यम से केन्द्रीय सरकार से अथवा ऐसे प्राधिकारी से, जैसा केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे, कर सकेगा ।
(2) अपीलों विषयक इस अध्याय के उपबन्ध इस धारा के अधीन पुनरीक्षण के लिए किए गए, आवेदनों को यथाशक्य लागू होंगे ।
(3) अपील प्राधिकारी, इस अधिनियम की धारा 340 =के अधीन की गई अपील का निपटारा नब्बे दिन की अवधि के भीतर करने का प्रयास करेगा ।
344. अपीलीय आदेशों की अंतिमता-धारा 343 में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय अपील प्राधिकारी का हर आदेश अन्तिम होगा ।
345. अपीलार्थी का सुनवाई का अधिकार-कोई अपील इस अध्याय के अधीन तब तक विनिश्चित न की जाएगी जब तक कि अपीलार्थी की सुनवाई न हो गई हो अथवा उसे या विधि व्यवसायी के माध्यम से उसकी सुनवाई का उसे युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
अध्याय 16
नियम और उपविधियां
346. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों और उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सब बातों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) वह रीति जिससे तथा वह प्राधिकारी जिसके यहां छावनी में सरकार की भूमि का दखल कर लेने की अनुज्ञा के लिए आवेदन किया जाना है;
(ख) वह प्राधिकारी, जिस द्वारा ऐसी अनुज्ञा दी जा सकेगी, तथा किसी ऐसी अनुज्ञा के दिए जाने से उपाबद्ध की जाने वाली शर्तें;
(ग) धारा 63 के उपबंधों की अधीन उसके प्रबंध के लिए सौंपी गई संपत्ति से प्रोद्भावी भाटकों और लाभों के अंश का बोर्ड को आबंटन;
(घ) बोर्ड के कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रोन्नति, अंतरण पदावधि, वेतन और भत्ते, भविष्य निधि, पेंशन, उपदान, अनुपस्थिति छुट्टी, अनुशासन और सेवा की अन्य शर्तें;
(ङ) वे परिस्थितियां, जिसमें बोर्ड के कर्मचारियों से प्रतिभूति मांगी जा सकेगी तथा ऐसी प्रतिभूति की रकम और स्वरूप;
(च) बोर्ड द्वारा लेखाओं का रखा जाना तथा वह रीति जिससे ऐसे लेखाओं की संपरीक्षा की जाएगी और वे प्रकाशित किए जाएंगे;
(छ) उन व्यक्तियों की पहचान करना जिन द्वारा तथा वह रीति जिससे छावनी विकास निधि में से धनराशि दी जा सकेगी;
(ज) बोर्ड के आय और व्यय के प्राक्कलनों की तैयारी तथा उन व्यक्तियों को निश्चित किया जाना जिन द्वारा तथा वे शर्तें, जिन पर ऐसे प्राक्कलन मंजूर किए जा सकेंगे;
(झ) माध्यस्थम् समितियों की प्रक्रिया का विनियमन;
(ञ) उन रजिस्टरों, विवरणों और प्ररूपों का विहित किया जाना, जो किसी प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए काम में लाए जाने हैं और रखे जाने हैं;
(ट) बोर्ड के सदस्यों को छुट्टी देना;
(ठ) उन सूचनाओं का प्ररूप जो इस अधिनियम के अधीन भेजे जाने के लिए अपेक्षित हैं तथा उनकी तामील की रीति; तथा
(ड) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किया जाए ।
347. नियमों विषयक अनुपूरक उपबन्ध-(1) धारा 346 के अधीन नियम या तो साधारणतः सभी छावनियों के लिए अथवा किसी एक या अधिक छावनियों के लिए या उनके किसी भाग के लिए बनाया जा सकेगा ।
(2) धारा 346 की उपधारा (2) के खंड (ग) के अधीन नियम बनाने की शक्ति में सभी नियमों को या उनमें से किसी को, ऐसी तारीख से जो छावनी अधिनियम, 2006 के प्रारंभ की तारीख से पहले की तारीख न हो, भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति सम्मिलित है, किन्तु किसी भी ऐसे नियम को इस प्रकार भूतलक्षी प्रभाव नहीं दिया जाएगा जिससे कि किसी ऐसे व्यक्ति के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो जिसे ऐसे नियम लागू हो सकते हों:
परन्तु जहां किसी नियम को भूतलक्षी तारीख से प्रवृत्त किया जाना है, वहां उसके लिए कारण और भूतलक्षी तारीख से प्रवृत्त किए जाने का प्रभाव ऐसे नियमों के प्रारूप के साथ प्रकाशित किए जाएगा जब ऐसा प्रारूप धारा 346 की उपधारा (1) के अधीन लोक मत प्राप्त करने के लिए प्रकाशित किया जाता है ।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम राजपत्र में तथा ऐसी अन्य रीति से, यदि कोई हो, जो केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, प्रकाशित किए जाएंगे तथा ऐसे प्रकाशन पर वे ऐसे प्रभावी होंगे मानो वे इस अधिनियम में अधिनियमित कर दिए गए हों ।
(4) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
348. उपविधियां बनाने की शक्ति-इस अधिनियम के तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए बोर्ड उन किन्ही उपविधियों के अतिरिक्त जिन्हें बनाने के लिए वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के द्वारा सशक्त है, छावनी में निम्नलिखित सब बातों या उनमें से किसी के लिए उपबंध करने के लिए उपविधियां बना सकेगा, अर्थात्: -
(1) जन्म, मुत्यु और विवाह का रजिस्ट्रीकरण तथा जनगणना का किया जाना;
(2) अनिवार्य टीका लगवाना और इन्ओकुलेशन तथा फीसों का उद्ग्रहण, जहां निवासियों के निवास-स्थान पर ऐसे टीका लगाए जाते हैं और इन्ओकुलेशन किया जाता है;
(3) इस अधिनियम के अधीन वाले करों, पथ करों और फीसों के संग्रहण और वसूली का विनियमन तथा करों का प्रतिदाय;
(4) पथों पर किसी प्रकार के यातायात का विनियमन तथा उससे उत्पन्न शोर को कम करने के उपायों का प्रवर्तन या किसी प्रकार के ऐसे यातायात का प्रतिषेध;
(5) वह रीति, जिससे पथों पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच खड़े, चलाए जाने वाले, ले जाए जाने वाले या नोदित यानों में रोशनी की जाएगी;
(6) उन स्वामीहीन पशुओं का अभिग्रहण और अधिहरण जो छावनी की सीमाओं में खुले घूम रहे हों और पशुओं के बाडों का विनियमन तथा नियंत्रण;
(7) आग लगने का निवारण और उसे बुझाना;
(8) निर्माण संक्रियाओं के वास्ते लोक साधारण की तथा उन पर काम करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाड़ों का निर्माण;
(9) नालियों, संवातन कूपकों, पाइपों, फ्लश शौचालयों, सण्डासों, शौचालयों, मूत्रालयों, चहबच्चों और अन्य जल निकासी संकर्मों के निर्माण, परिवर्तन, बनाए रखने, परिरक्षण, साफ किए जाने और मरम्मत का इस अधिनियम में विनिर्दिष्टतः उपबंधित न की गई किसी रीति से विनियमन;
(10) नालियों में मल, दूषित जल और अन्य दुर्गन्धयुक्त या बाधाकर पदार्थ डालने या निक्षिप्त करने का विनियमन या प्रतिषेध;
(11) इस दृष्टि से कि लोक स्वास्थ्य को खतरा निवारित हो जाए, पशुओं या किन्हीं प्रकार के पशुओं को पशुशाला में रखने या किसी एक जगह इकट्ठा करके रखने का विनियमन या प्रतिषेध;
(12) शवों की समुचित अन्तिम क्रिया, कब्रिस्तानों और श्मशान घाटों तथा शवों की अन्तिम क्रिया के लिए अन्य स्थानों का विनियमन और प्रबंध, तथा जहां कि ऐसे स्थान सरकार अथवा छावनी निधि के व्यय पर कायम किए गए या बनाए रखे जाते हैं, वहां ऐसे स्थानों का उपयोग करने के लिए ली जाने वाली फीसें;
(13) फेरी लगा कर बेचने वालों द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा वस्तुओं के विक्रय के लिए या कोई आजीविका चलाने के लिए अथवा कोई अस्थायी बूथ या स्टाल लगा लेने के लिए किसी पथ या स्थान के उपयोग या दखल के लिए अनुज्ञा, उसका विनियमन या प्रतिषेध तथा ऐसे उपयोग या दखल के लिए ली जाने वाली फीसें;
(14) पड़ावों के मैदानों, सरायों, होटलों, डाक बंगलों, आवास भवन, छात्रावासों, भोजनालयों, अलग भागों में उठाए जाने वाले भवन, निवासिक क्लबों, उपहारगृहों, ढाबों, कैफे, अल्पाहार कक्षों, अवकाश सैरगाह, सिनेमा तथा लोक आमोद, मनोरंजन या सैरगाह के स्थानों का विनियमन और नियंत्रण;
(15) वातित या अन्य पेय जलों तथा मक्खन, दूध, मिठाई और मानव उपयोग के लिए भोजन या पेय की अन्य वस्तुओं के निर्माण या विक्रय के लिए काम में आने वाली इमारतों में संवातन, रोशनी, सफाई, जल निकासी और उनमें जल प्रदाय का विनियमन;
(16) वे बातें, जिनकी बाबत शर्तें धारा 295 या धारा 277 के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्तियों द्वारा लगाई जा सकती हैं;
(17) जिन स्थानों में खतरनाक या क्लेशकर व्यापार चलाए जाते हैं उनका इस दृष्टि से नियंत्रण और पर्यवेक्षण कि वहां सफाई रहे अथवा उन व्यापारों से पैदा हुए या संभाव्यता पैदा होने वाले क्षतिकर, क्लेशकर या खतरनाक परिणामों की मात्रा कम से कम हो जाए;
(18) छावनी के अन्दर किसी भूमि पर स्थित किसी घेरे, बाड़, तम्बू, चंदोवा या कैसी ही सामग्री या स्वरूप की किसी अन्य अस्थायी संरचना के निर्माण का विनियमन तथा उनके लिए प्रभार्य फीस;
(19) पंथों का अभिन्यासन तथा पंथों के अभिन्यासन और आस्थान के लिए किए गए यथेष्ठ उपबंध के बिना इमारतों के निर्माण का विनियमन और प्रतिषेध;
(20) किसी विकास स्कीम या किसी सुधार स्कीम का प्ररूप और वे विशिष्टियां जो उसमें विनिर्दिष्ट होंगी और वह रीति जिसमें ऐसी स्कीम बनाई या परिवर्तित की जाएगी तथा विकास प्रभार उद्ग्रहण करना;
(21) लोक उद्यानों और बागों और अन्य लोक स्थानों के प्रयोग का विनियमन तथा वीथियों, वृक्षों, घास तथा पंथों और अन्य लोक स्थानों के अन्य अनुलग्नकों का संरक्षण;
(22) पशुओं के चराने का विनियमन और उनकी बाबत प्रभार्य फीस;
(23) सार्वजनिक स्नान घाट और धोबी घाट का नियत करना और विनियमन;
(24) बिलों और विज्ञापनों के चिपकाने का तथा नाम पट्टों, संकेत पट्टों और संकेत स्तंभों की स्थिति, आकार, रूप या शैली का विनियमन;
(25) वस्तुओं का विक्रय चाहे माप द्वारा, तोल द्वारा, अदद अथवा किसी अन्य रीति में विक्रय करने की रीति का नियत करना;
(26) छावनी के अन्दर अनुज्ञप्तियों का निम्नलिखित के लिए लिया जाना आवश्यक बनाना-
(क) माल ले जाने के लिए फुटकर बोझा ढोने वाले के रूप में काम करने वाले व्यक्ति,
(ख) भाड़े पर दिए जाने वाले या फेरी लगाकर वस्तुएं बेचने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले पशु या यान,
(ग) उन यानों, नावों या अन्य प्रवहणों के अथवा उन पशुओं के, जो भाड़े पर रखे या चलाए जाते हैं, या फेरी लगाकर वस्तुएं बेचने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं, स्वत्वधारी या चालक,
(घ) ऐसे यानों या अन्य प्रवहणों को धक्का लगाने वाले या खींचने वाले व्यक्ति, अथवा
(ङ) परिचारिकाओं, प्रसाविकाओं और दाइयों का व्यवसाय करने वाले व्यक्ति;
(27) खण्ड (26) से अपेक्षित किसी अनुज्ञप्ति के लिए देय फीस का तथा उन शर्तों का विहित किया जाना, जिन पर ऐसी अनुज्ञप्तियां मंजूर की जा सकेंगी, पुनरीक्षित की जा सकेंगी, निलम्बित की जा सकेंगी और प्रत्याहृत की जा सकेंगी;
(28) ऐसे फुटकर बोझा ढोने वालों की सेवाओं के संबंध में लिए जाने वाले प्रभारों तथा ऐसे पशुओं, यानों या अन्य प्रवहणों के भाड़े का तथा ऐसे यानों या प्रवहणों को जैसे खण्ड (26) में निर्दिष्ट हैं, धक्का देने वाले या खींचने वाले व्यक्तियों के पारिश्रमिक का विनियमन;
(29) किसी अनुज्ञप्ति (इस अधिनियम में अन्यथा विनिर्दिष्ट रूप से उपबंधित के सिवाय), मंजूरी या मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा मंजूर की गई किसी लिखित अनुज्ञा के लिए संदेय फीस विहित करना;
(30) आरोग्यता के प्रयोजनों के लिए अथवा रोग का निवारण करने के लिए अथवा लोक सुरक्षा या सुविधा की वृद्धि करने के लिए ऐसे किसी कार्य का विनियमन या प्रतिषेध जिससे न्यूसेंस होता है या होना संभाव्य है तथा जिसके विनियमन या प्रतिषेध के लिए इस अधिनियम के द्वारा या अधीन अन्यत्र उपबन्ध नहीं किया गया है;
(31) वे परिस्थितियां, जिनमें और वह रीति जिससे छावनी में की इमारतों या भूमि के उन स्वामियों से, जो छावनी से अस्थायी रूप से अनुपस्थित हैं या छावनी में निवासी नहीं हैं, इस अधिनियम के अथवा इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या बनाई गई उपविधि के सब प्रयोजनों या उनमें से किसी के लिए, ऐसे व्यक्तियों को अपने अभिकर्ता के रूप में नियुक्त करने की अपेक्षा की जा सकेगी जो छावनी के अन्दर या निकट निवासी हैं;
(32) छावनी के अन्दर संक्रामक या सांसर्गिक रोगों के फैलने का निवारण;
(33) जो पशु किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित हैं या जिनके पीड़ित होने का युक्तियुक्त संदेह है उनका छावनी में पृथक्करण अथवा छावनी से निकाला जाना और अपवर्जन या मार दिया जाना;
(34) लोक जल प्रदाय के स्रोतों और साधनों का तथा जल के वितरण के लिए आलों का, भले ही वे छावनी की सीमा के अन्दर हों या बाहर हों, पर्यवेक्षण, विनियमन, समारक्षण तथा क्षति, प्रदूषण या अतिचार से संरक्षण;
(35) वह रीति, जिसमें जल संकर्मों से किए जाने वाले कनेक्शनों का निर्माण किया जा सकेगा या उन्हें बनाए रखा जा सकेगा, तथा वह अभिकरण, जो ऐसे निर्माण और बनाए रखने के लिए नियोजित किया जाएगा या किया जा सकेगा;
(36) जल के प्रदाय और उपयोग से सम्बन्धित सब विषयों और बातों का और जल के उपयोग का जिसके अन्तर्गत उनके लिए, प्रभारों का संग्रहण और वसूली भी है, विनियमन तथा उनके उपवंचन का निवारण;
(37) स्कूलों का चलाया जाना और शिक्षा का साधारणतः विकास;
(38) पेड़ों या झाड़ियों के काटने या नष्ट करने का अथवा उत्खनन करने का या मिट्टी या रोड़े आदि का निकालने का उस दशा में विनियमन या प्रतिषेध जिसमें कि ऐसा विनियमन या प्रतिषेध पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने के लिए और; जल प्रदाय बनाए रखने के लिए, मृदा के परिरक्षण के लिए, भूपरिदृश्य का निवारण करने के लिए अथवा खादर या वेग-धाराएं बनाने का निवारण करने के लिए अथवा कटाव से भूमि का संरक्षण करने के लिए अथवा उसमें रेत, बजरी या पत्थर जमा न होने देने के लिए बोर्ड को आवश्यक प्रतीत होता है;
(39) अस्तबलों, कुत्ताघरों, सुअरबाडों या गाय बांधने के स्थानों के रूप में अथवा भेड़, बकरी या कुकुट आदि के रखने के स्थान के रूप में ऐसे परिसरों का, जो छावनी के अन्दर हैं, उपयोग करने के वास्ते अनुज्ञप्तियों का लिया जाना आवश्यक करना;
(40) यान्त्रिक सीटियों, भोपुओं या तुरहियों का छावनी में प्रयोग करने का नियंत्रण;
(41) शासकीय दस्तावेजों की प्रतियों के प्रदाय का विनियमन तथा उनकी बाबत संदेय फीस विहित करना;
(42) लाउड स्पीकरों के उपयोग के लिए अनुज्ञप्ति देने की अनुज्ञा का विनियमन तथा उनकी बाबत संदेय फीस विहित करना;
(43) छावनी क्षेत्र में प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातत्व स्थलों और सार्वजनिक महत्व के अवशेषों या स्थान का संरक्षण और रख-रखाव; और
(44) साधारणतः इस अधिनियम के अधीन छावनी के प्रशासन का विनियमन ।
349. उपविधियों के भंग के लिए शास्ति-(1) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाई गई उपविधि में यह उपबन्ध हो सकेगा कि उसका उल्लंघन-
(क) जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा; अथवा
(ख) जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा चालू रहने वाले उल्लंघन की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो पहले उल्लंघन के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् ऐसे हर दिन के लिए जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन चालू रहता है, पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा; अथवा
(ग) जुर्माने से जो ऐसे हर दिन के लिए, जिसके दौरान उस व्यक्ति से जो उस उपविधि का उल्लंघन कर रहा है यह अपेक्षा करने वाली सूचना कि वह व्यक्ति ऐसे उल्लंघन का करना बन्द कर दे, बोर्ड या मुख्य कार्यपालक अधिकारी से उस व्यक्ति को प्राप्त होने के पश्चात् यह उल्लंघन चालू रहता है, एक सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) ऐसी किसी उपविधि में यह भी उपबंध हो सकेगा कि उसका उल्लंघन करने वाले किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह ऐसे उल्लंघन द्वारा किए गए नुकसान या रिष्टि का, यदि कोई हो, जहां तक उसकी शक्ति में है, उपचार करे ।
350. उपविधियां और विनियमों के संबंध में अनुपूरक उपबन्ध बनाने की शक्ति-(1) उपविधियों सम्बन्धी अनुपूरक उपबन्ध बनाने की जो शक्ति इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त है वह इस शर्त पर प्रदत्त है कि उपविधियां पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाई जाएंगी तथा वे तब तक प्रभावी न होंगी जब तक कि वे केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित और पुष्ट न कर दी गई हों तथा राजपत्र में प्रकाशित न कर दी गई हों ।
(2) केन्द्रीय सरकार उपविधियों की पुष्टि करते समय उसमें ऐसी कोई तब्दीली कर सकेगी जो उसे आवश्यक प्रतीत होती है ।
(3) केन्द्रीय सरकार अपने आशय के पूर्व प्रकाशन के पश्चात् ऐसी किसी उपविधि को रद्द कर सकेगी जिसे उसने पुष्ट किया है तथा वैसा होने पर वह उपविधि प्रभावी न रह जाएगी ।
(4) इस अधिनियम के अधीन बनाई गई प्रत्येक उपविधि और विनियम तथा उपधारा (3) के अधीन किए गए प्रत्येक आदेश को बनाए जाने और किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब यह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस उपविधि और विनियम या आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी या होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जांए कि वह उपविधि और विनियम नहीं बनाए जाने चाहिए या वह आदेश नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी या हो जाएगा । किन्तु उपविधि और विनियम या आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
351. नियमों और उपविधियों का निरीक्षण और खरीदे जाने के लिए उपलभ्य रहना-(1) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों और बनाई गई सब उपविधियों की प्रति बोर्ड के कार्यालय में रखी जाएगी तथा कार्यालय समय के दौरान छावनी में किसी भी निवासी द्वारा मुफ्त निरीक्षण के लिए खुले तौर पर उपलभ्य रहेगी ।
(2) ऐसे सब नियमों और ऐसी सब उपविधियों की प्रतियां बोर्ड के कार्यालय में रखी जाएंगी तथा विक्रेता के विकल्प पर या तो अलग-अलग एक-एक प्रति अथवा संग्रह के रूप में लागत कीमतों पर लोक साधारण को बेची जाएंगी ।
अध्याय 17
अनुपूरक उपबन्ध
352. इस अधिनियम के और नियमों के कतिपय उपबन्धों का छावनी के बाहर के स्थानों पर विस्तार-केन्द्रीय सरकार अध्याय 8 से अध्याय 15 के अथवा छावनी के लिए इस अधिनियम के अधीन बनाए गए ऐसे किसी नियम या बनाई गई किसी ऐसी उपविधि के, जो उन अध्यायों में से किसी की विषयवस्तु से सम्बन्धित है, उपबन्धों में से किसी उपबन्ध का विस्तार, निर्बन्धन या उपान्तर के सहित या बिना, छावनी के बाहर के तथा उसके आसपास में के किसी क्षेत्र पर राजपत्र में अधिसूचना द्वारा तथा प्रतिकर सम्बन्धी या अन्य बातों सम्बन्धी ऐसी किन्हीं शर्तों पर, जिन्हें वह अधिरोपित करना ठीक समझे, कर सकेगी तथा ऐसी विस्तारित की गई हर अधिनियमिति, नियम या उपविधि उस क्षेत्र को तदुपरि ऐसे लागू होगी मानो वह क्षेत्र छावनी के अन्तर्गत हो ।
353. प्रधान, आदि को कृत्यों को प्रत्यायोजित करने की शक्ति-(1) बोर्ड, इस निमित्त पारित संकल्प द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या स्वास्थ्य अधिकारी को, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो संकल्प में विनिर्दिष्ट की जाएं, धारा 290 की उपधारा (5) के खण्ड (ख), धारा 168, धारा 170, धारा 175, धारा 167, धारा 263, और धारा 264, के अधीन अपने सभी कृत्यों या उनमें से किसी को प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
(2) सिविल क्षेत्र समिति, उसी प्रकार का संकल्प पारित करके, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो ऐसे संकल्प में विनिर्दिष्ट की जाएं, अपने सभी या किन्हीं कृत्यों को उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या स्वास्थ्य अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकेगी ।
354. रजिस्ट्रीकरण-(1) सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) की धारा 54 के दूसरे और तीसरे पैरे तथा धारा 59, 107 और 123 का विस्तार रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा सम्पत्ति के अन्तरण की बाबत इस अधिनियम के प्रारम्भ से हर छावनी पर होगा ।
(2) रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 (1908 का 16) के प्रयोजनों के लिए बनाए गए जिला या उपजिला या रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार, जिसमें ऐसी कोई छावनी स्थित है, उस समय जब छावनी के अंदर की स्थावर सम्पत्ति सम्बन्धी कोई दस्तावेज रजिस्ट्रीकृत की गई है, उस रजिस्ट्रीकरण की इत्तिला मुख्य कार्यपालक अधिकारी को या रक्षा सम्पदा अधिकारी को, और ऐसे अन्य प्राधिकारी को, जैसा केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विहित करे, तत्काल भेजेगा ।
355. सूचनाओं और अन्य दस्तावेजों की विधिमान्यता-ऐसी कोई भी सूचना, आदेश, अध्यपेक्षा, अनुज्ञप्ति, लिखित रूप में अनुज्ञा या अन्य ऐसी दस्तावेज, जो इस अधिनियम के अधीन निकाली गई है उसके प्ररूप में किसी त्रुटि के कारण ही विधितः अमान्य न होगी ।
356. दस्तावेज या प्रविष्टि की साक्ष्य के रूप में ग्राह्यता-किसी रसीद, आवेदन, नक्शे, सूचना, आदेश या अन्य दस्तावेज की अथवा रजिस्टर में की किसी प्रविष्टि की, जो बोर्ड के कब्जे में है, प्रति उस दशा में, जिसमें कि वह उसके विधिकपालक या मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अन्य व्यक्ति द्वारा सम्यक् रूप से प्रमाणित है, उस दस्तावेज या प्रविष्टि के विद्यमान होने के साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगी तथा उसमें अभिलिखित बातों और संव्यवहारों के साक्ष्य के रूप में हर ऐसे मामले में वह उस दशा में तथा उसी सीमा तक गृहीत की जाएगी जिसमें तथा जिस तक मूल दस्तावेज या प्रविष्टि पेश की गई होती तो वह ऐसी बातों को साबित करने के लिए ग्राह्य होती ।
357. बोर्ड के अधिकारी या सेवक द्वारा साक्ष्य-बोर्ड का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी ऐसी किसी विधिक कार्यवाही में, जिसमें बोर्ड पक्षकार नहीं है, ऐसा कोई रजिस्टर या दस्तावेज पेश करने के लिए जिसकी अन्तर्वस्तुएं उनकी प्रमाणित प्रति द्वारा धारा 356 के अधीन साबित की जा सकती है अथवा उनमें अभिलिखित किसी बात या संव्यवहार को साबित करने के लिए साक्षी के रूप में उपसंजात होने के लिए न्यायालय के ऐसे आदेश के द्वारा जो विशेष हेतुक के लिए लिया गया है, अपेक्षित किए जाने के सिवाय अपेक्षित न होगा ।
358. 1899 के अधिनियम 4 का लागू होना-सरकारी इमारत अधिनियम, 1899 के प्रयोजनों के लिए छावनियां और बोर्ड क्रमशः नगरपालिकाएं और नगरपालिका प्राधिकारी समझे जाएंगे तथा उस अधिनियम की धारा 4 में राज्य सरकार के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह केन्द्रीय सरकार के प्रति निर्देश है ।
359. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उसे कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों:
परंतु ऐसा कोई भी आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
360. निरसन और व्यावृत्तियां-(1) छावनी अधिनियम, 1924 (1924 का 2) निरसित किया जाता है ।
(2) छावनी अधिनियम, 1924 (1924 का 2) के निरसन के होते हुए भी-
(क) उक्त अधिनियम के अधीन की गई कोई नियुक्ति, अधिसूचना, किया गया आदेश, बनाई गई स्कीम, नियम, प्ररूप, जारी की गई सूचना या बनाई गई उपविधि और अनुदत्त कोई अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंधों के असंगत नहीं है, प्रभावी बनी रहेगी और इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन की गई, किया गया, जारी की गई या अनुदत्त तब तक समझी जाएगी जब तक कि उसे उक्त उपबंधों के अधीन की गई नियुक्ति, जारी की गई अधिसूचना, किया गया आदेश, बनाई गई स्कीम, नियम, प्ररूप, जारी की गई सूचना या बनाई गई उपविधि या अनुदत्त किसी अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा द्वारा अधिक्रांत नहीं कर दिया जाता;
(ख) बोर्ड द्वारा उपगत सभी ऋण, बाध्यता और दायित्व, बोर्ड के साथ या उसके द्वारा की गई सभी सुविधाओं और बोर्ड द्वारा या उसके साथ किए जाने वाले सभी विषय और बातें इस अधिनियम के अधीन गठित बोर्ड द्वारा उपगत, उसके द्वारा या उसके साथ की गई मानी जाएगी;
(ग) बोर्ड द्वारा सभी बजट प्राक्कलन, निर्धारण, मूल्यांकन, मापतौल या प्रभाजन, जहां तक वे इस अधिनियम के उपबंधों के असंगत न हों, प्रवृत्त रहेगें जो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किए गए तब तक समझे जाएंगे जब तक उनको उक्त उपबंधों के अधीन गठित बोर्ड द्वारा किसी बजट प्राक्कलन, निरीक्षण, मूल्यांकन, मापतौल या प्रभाजन द्वारा अधिक्रांत नहीं कर दिया जाता;
(घ) बोर्ड में निहित संभी जंगम और स्थावर संपत्तियां, उनमें सभी प्रकृति और प्रकार के हित, उक्त बोर्ड द्वारा उपयोग में लिया गया, उपभोग किया गया या उत्तरदायी किसी भी प्रकार के अधिकारियों के साथ इस अधिनियम के अधीन गठित बोर्ड में निहित हो जाएंगे;
(ङ) बोर्ड को शोध्य सभी रेट, कर, फीस, भाटक और अन्य धनराशियां इस अधिनियम के अधीन गठित बोर्ड को शोध्य समझी जाएंगी;
(च) सभी रेट, कर, फीस, भाटक, भाड़े, और अन्य प्रभार, जब तक कि वे इस अधिनियम के अधीन गठित बोर्ड द्वारा परिवर्तित नहीं कर दिए जाते, उसी दर पर अधिगृहीत किए जाते रहेंगे जिस पर वे इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व बोर्ड द्वारा अधिगृहीत किए जा रहे थे;
(छ) बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित सभी वाद, अभियोजन, अन्य विधिक कार्यवाहियां या ऐसे सभी वाद, अभियोजन और विधिक कार्यवाहियां जो बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित की जा सकती थी, इस अधिनियम के अधीन गठित बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रहेंगी या संस्थित की जा सकेंगी ।
पहली अनुसूची
(धारा 100 देखिए)
मांग की सूचना
प्रेषिती
........................, जो ....................... में निवासी है यह सूचना ग्रहण कीजिए कि बोर्ड ..................... से ....................... के अधीन तारीख .............................. 200.... को प्रारंभ होने वाली तथा तारीख ..................... 200 ................... को समाप्त होने वाली .............................. की कालावधि के लिए उद्ग्रहणीय ........................... की मांग करता है जो ...................... (यहां उस सम्पत्ति, व्यवसाय, परिस्थिति या वस्तु का उल्लेख कीजिए, जिसकी बाबत यह धनराशि देय है) लेखे ................... द्वारा शोध्य है तथा यदि इस सूचना की तामील से तीस दिन के अंदर उक्त धनराशि (बोर्ड) को ..................................... में नहीं दे दी जाती है अथवा उसके न देने के लिए पर्याप्त कारण मुख्य कार्यपालक अधिकारी का समाधान करने वाले रूप में नहीं दिया जाता है तो खर्चों सहित उसकी वसूली के लिए करस्थम्/कुर्की। वांरण्ट निकाला जाएगा ।
तारीख ...................... 200 .............
(हस्ताक्षरित)
मुख्य कार्यपालक अधिकारी,
छावनी ।
(।जो लागू न हो उसे काट दीजिए ।)
दूसरी अनुसूची
(धारा 101 देखिए)
वारंट का प्ररूप
(यहां उस अधिकारी का नाम लिखिए जिसे वारण्ट का निष्पादन करने का भार सौंपा गया है ।)
यतः ................. के क, ख ने तारीख ..................... 200.... को प्रारंभ होने वाली तथा तारीख ................... 200.... को समाप्त होने वाली ..................... कालावधि के लिए। ....................... लेखे शोध्य .............. रुपए की धनराशि जो धनराशि ....................... के अधीन उद्ग्रहणीय है, नहीं दी है और उसके न देने के लिए समाधानप्रद कारण नहीं दिखाया है;
तथा यतः उसकी मांग की सूचना की उस पर तामील होने की तारीख से तीस दिन व्यतीत हो चुके हैं;
अतः तुम्हें यह समादेश दिया जाता है कि .................... रुपए की उक्त धनराशि की उक्त क, ख की (जंगम/स्थावरव्र्) सम्पत्ति छावनी अधिनियम, 2006 के उपबंधों के अधीन रहते हुए (करस्थम्/कुर्कव्र्) कर लें तथा इसके अधीन जो सम्पत्ति तुमने (अभिगृहीत/कुर्कव्र्) की हो, उसकी पूरी विशिष्टियां मुझे इस वारण्ट के सहित तत्काल प्रमाणित करें ।
तारीख ................. 200 ............
(हस्ताक्षरित)
मुख्य कार्यपालक अधिकारी,
छावनी ।
।यहां दायित्व का उल्लेख कीजिए ।
व्र्जो लागू न हो उसे काट दीजिए ।
तीसरी अनुसूची
(धारा 103 देखिए)
करस्थम् की गई सम्पत्ति की तालिका का तथा विक्रय की सूचना की प्ररूप
प्रेषिती
....................., जो ................. में निवासी हैं यह सूचना ग्रहण कीजिए कि मैंने आज तारीख .............. 200==...... को प्रारंभ होने वाली तथा तारीख .................. 200....को समाप्त होने वाली कालावधि के लिए पार्श्व में उल्लिखित । दायित्व लेखे शोध्य ........................... रकम के लिए तथा उसके साथ मांग की सूचना की तामील के लिए शोध्य ................ रुपए की धनराशि के लिए वह सम्पत्ति, जो इससे उपाबद्ध तालिका में विनिर्दिष्ट है, अभिगृहीत कर ली है तथा यदि आप वसूली के खर्चों सहित उक्त रकम, इस सूचना की तामील की तारीख से सात दिन के भीतर बोर्ड को नहीं देंगे तो उक्त सम्पत्ति सार्वजनिक नीलाम द्वारा बेच दी जाएगी ।
तारीख ........... 200 ............
(वारण्ट निष्पादित करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर)
तालिका
(अभिगृहीत सम्पत्ति के ब्यौरे यहां दीजिए ।)
।यहां दायित्व का उल्लेख कीजिए ।
चौथी अनुसूची
(धारा 314 देखिए)
वे मामले जिसमें पुलिस वारंट के बिना गिरफ्तार कर सकेगी
भाग क
|
धारा |
विषय |
|
174 |
संक्रमणग्रस्त व्यक्ति द्वारा भोजन आदि का तैयार किया जाना या बेचा जाना अथवा कपड़ों का धोया जाना । |
|
289(1) (क) (i) |
नशे की हालत में होना, आदि । |
भाग ख
|
183 (1) |
अस्पताल या औषधालय में हाजिर होने में असफल रहने के लिए निष्कासन की सूचना के पश्चात् छावनी में बना रहना या पुनः प्रवेश करना । |
|
259 |
पथ का नाम या भवन से लगे नम्बर को मिटा देना आदि । |
|
282 |
गन्दगी आदि पर पशुओं को चराना । |
|
289(1)(क)(ii) |
धमकी भरे या गाली गलौच वाले शब्दों का प्रयोग आदि । |
|
289(1)(क)(iii) |
गुप्तांग आदि को अशिष्टतापूर्वक अभिदर्शित करना । |
|
289(1)(क)(iv) |
भीख मांगना । |
|
289(1)(क)(v) |
कुरूपता आदि को अभिदर्शित करना । |
|
289(1)(क)(vii) |
जुआ । |
|
289(1)(क)(xii) |
सूचना आदि को नष्ट करना । |
|
289(1)(क)(xiii) |
पटरी, गटर, बरसाती जल के नाले को स्थानान्तरित करना, नुकसान पहुंचाना, परिवर्तित करना । |
|
289(1)(क)(च) |
सामान्य जुआधर चलाना आदि । |
|
289(1)(क)(छ) |
ढोल आदि बजाना । |
|
289(1)(क)(ज) |
इस प्रकार गाना आदि कि शान्ति या व्यवस्था भंग हो । |
|
290(6) |
हिंस्र कुत्ते को खुला छोड़ देना या किसी के पीछे लगा देना । |
|
296
|
आग्नेयास्त्र आदि ऐसे छोड़ना कि खतरा पैदा हो जाए । |
|
300
|
लैंगिक अनैतिकता के लिए चक्कर लगाना या दुराग्रह करना । |
|
304 (क) |
निष्कासन की सूचना के पश्चात् छावनी में बने रहना या लौट कर आना । |
पांचवीं अनुसूची
(धारा 340 देखिए)
कार्यपालक आदेशों से अपीलें
|
क्रम सं० |
धारा |
कार्यपालिक आदेश |
अपील प्राधिकारी |
अपील के लिए अनुज्ञात समय |
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
|
1. |
2 (यग) |
स्त्र्निवासी की घोषणा |
जिला मजिस्ट्रेट |
पन्द्रह दिन । |
|
2. |
137 |
कुंआ, तालाब, आदि को भर देने या जल को निकालने या हटाने की सूचना । |
प्रधान निदेशक |
सूचना की तामील से तीस दिन । |
|
3. |
138 |
स्वामी से शौचालय, मूत्रालय, चह-बच्चा, कूड़ेदान या अन्य पात्र की व्यवस्था करने की अपेक्षा करने वाली सूचना । |
बोर्ड |
सूचना की तामील से पन्द्रह दिन । |
|
4. |
139 |
बाजार, स्कूल, नाट्यशाला या लोक समागम के अन्य स्थान में सफाई की सुविधाओं की व्यवस्था करने की अपेक्षा करने वाली सूचना। |
बोर्ड |
सूचना की तामील से पन्द्रह दिन । |
|
5. |
142 |
अति भिड़े भवनों को तोड़ देने के लिए सूचना । |
कमान का मुख्य महा-समादेशक अधिकारी |
सूचना की तामील से तीस दिन । |
|
6.
|
144 |
भवनों की मरम्मत इस प्रकार करने या उसमें इस प्रकार परिवर्तन करने की अपेक्षा करने वाली सूचना कि जिससे उसमें स्वच्छता संबंधी त्रुटियां दूर हो जाएं |
प्रधान निदेश्क |
सूचना की तामील से तीस दिन । |
|
7.
|
147 |
स्वामी या दखलकार को किसी भवन को मानव निवास के लिए काम में लाने से प्रतिषिद्ध करने वाली सूचना। |
प्रधान निदेशक |
सूचनी की तामील से इक्कीस दिन । |
|
8. |
183 |
किसी व्यक्ति को यह निदेश देने वाला आदेश कि वह छावनी में से निकल जाए और अनुज्ञा के बिना छावनी में पुनः प्रवेश न करे । |
कमान का मुख्य महा समादेशक-अधिकारी |
सूचना की तामील से तीस दिन । |
|
9.
|
190 |
लोक साधारण के पीने के पानी के प्रदाय के प्राइवेट स्रोतों को कायम रखने की या बंद करने की अपेक्षा करने वाली सूचना । |
बोर्ड |
सूचना की तामील से पन्द्रह दिन । |
|
10
|
192 |
किसी भवन या भूमि के स्वामी, पट्टेदार या दखलकार से लोक जल प्रदाय के स्रोत से जल अभिप्राप्त करने की अपेक्षा करने वाली सूचना । |
बोर्ड |
सूचना की तामील से पन्द्रह दिन । |
|
11.
|
195
|
जल प्रदाय के किसी स्रोत के या किसी भवन या भूमि के बीच का कनेक्शन काटने वाली सूचना । |
बोर्ड |
सूचना की तामील से पन्द्रह दिन । |
|
12. |
238
|
(क) सिविल क्षेत्र में किसी भवन के बनाने या पुनः बनाने की मंजूरी देने से इंकार । |
प्रधान निदेशक |
सूचना की तामील से तीस दिन । |
|
|
|
(ख) छावनी के (सिविल क्षेत्र से भिन्न) किसी क्षेत्र में भवन के बनाने या पुनः बनाने की मंजूरी देने से इंकार । |
कमान का मुख्य महासमादेक अधिकारी
|
|
|
13.
|
239
|
कतिपय मामलों में इमारत या कार्य को रोकने का आदेश । |
बोर्ड
|
सूचना की तामील से तीस दिन ।
|
|
14.
|
248
|
(क) सिविल क्षेत्र में किसी इमारत के बनाने या पुनः बनाने के बंद करने या उसमें परिवर्तन करने या उस ढा देने की सूचना । |
प्रधान निदेशक
|
सूचना की तामील से तीस दिन ।
|
|
|
|
(ख) छावनी के (सिविल क्षेत्र से भिन्न) किसी क्षेत्र में किसी भवन के बनाने या पुनः बनाने को बंद करने या उसमें परिवर्तन करने या उसे ढा देने की सूचना । |
कमान का मुख्य महा समादेशक अधिकारी
|
सूचना की तामील से तीस दिन ।
|
|
15. |
252 |
स्वामी या दखलदार को किसी प्रलंबन या अधिक्रमण में परिवर्तन करने के लिए या उसे हटाने के लिए सूचना । |
बोर्ड |
सूचना की तामील से तीस दिन । |
|
16. |
253
|
मलनाली, नाली, पुलिया, जलसरणी या जलपाइप के ऊपर अनुज्ञा के बिना नए सिरे बनाए गए अथवा पुनः बनाए गए भवन को गिराने या उसके बारे में अन्यथा कार्रवाई करने की सूचना । |
बोर्ड |
सूचना की तामील से तीस दिन । |
|
17.
|
273
|
वधशाला का उपयोग प्रतिषिद्ध करने या निर्बन्धित करने वाली सूचना । |
बोर्ड
|
सूचना की तामील से इक्कीस दिन । |
|
18.
|
297
|
भवन, दिवार या उससे लगी हुई कोई चीज या कुंआ, तालाब, जलाशय, सरोवर, गड्ढे या उत्खात को तोड़ने, उसकी मरम्मत करने या उसकी संरक्षा करने या उसे परिवेष्टित करने की सूचना । |
बोर्ड
|
सूचना की तामील से तीस दिन ।
|
|
19.
|
302
|
उपद्रवी व्यक्ति को यह निदेश देने वाली सूचना कि वह छावनी से निकल जाए और अनुज्ञा के बिना छावनी में पुनः प्रवेश न करे । |
जिला मजिस्ट्रेट
|
सूचना की तामील से तीस दिन ।
|
-----------------

