प्रथम अर्जित मूल प्रति का धारक सबका हकदार होता है -- एक ही संवर्ग की विभिन्न मूल प्रतियों के सम्यक्-अनुक्रम-धारकों के बीच का जहाँ तक सम्बन्ध है उनमें से वह, जिसने अपनी मूल प्रति का हक सबसे पहले अर्जित किया, अन्य मूल प्रतियों का और विनिमय-पत्र के धन का हकदार होता है ।