छोटे मामलों में अपील न होना-धारा 374 में किसी बात के होते हुए भी, दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा कोई अपील निम्नलिखित में से किसी मामले में न होगी, अर्थात् :-
(क) जहां उच्च न्यायालय केवल छह मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का अथवा ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है ;
(ख) जहां सेशन न्यायालय या महानगर मजिस्ट्रेट केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का अथवा ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है ;
(ग) जहां प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है ; अथवा
(घ) जहां संक्षेपतः विचारित किसी मामले में, धारा 260 के अधीन कार्य करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है :
परन्तु यदि ऐसे किसी दंडादेश के साथ कोई अन्य दंड मिला दिया गया है तो ऐसे दंडादेश के विरुद्ध अपील की जा सकती है किन्तु वह केवल इस आधार पर अपीलनीय न हो जाएगा कि-
(i) दोषसिद्ध व्यक्ति को परिशान्ति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है ; अथवा
(ii) जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास के निदेश को दंडादेश में सम्मिलित किया गया है ; अथवा
(iii) उस मामले में जुर्माने का एक से अधिक दंडादेश पारित किया गया है, यदि अधिरोपित जुर्माने की कुल रकम उस मामले की बाबत इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं है ।

