अन्वेषण में कार्यवाहियों की डायरी-(1) प्रत्येक पुलिस अधिकारी, जो इस अध्याय के अधीन अन्वेषण करता है, अन्वेषण में की गई अपनी कार्यवाही को दिन-प्रतिदिन एक डायरी में लिखेगा, जिसमें वह समय जब उसे इत्तिला मिली, वह समय जब उसने अन्वेषण आरंभ किया और जब समाप्त किया, वह स्थान या वे स्थान जहां वह गया और अन्वेषण द्वारा अभिनिश्चित परिस्थितियों का विवरण होगा ।
[(1क) धारा 161 के अधीन अन्वेषण के दौरान अभिलिखित किए गए साक्षियों के कथन केस डायरी में अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
(1ख) उपधारा (1) में निर्दिष्ट डायरी जिल्द रूप में होगी और उसके पृष्ठ सम्यक् रूप से संख्यांकित होंगे ।]
(2) कोई दंड न्यायालय ऐसे न्यायालय में जांच या विचारण के अधीन मामले की पुलिस डायरियों को मंगा सकता है और ऐसी डायरियों को मामले में साक्ष्य के रूप में तो नहीं किंतु ऐसी जांच या विचारण में अपनी सहायता के लिए उपयोग में ला सकता है ।
(3) न तो अभियुक्त और न उसके अभिकर्ता ऐसी डायरियों को मंगाने के हकदार होंगे और न वह या वे केवल इस कारण उन्हें देखने के हकदार होंगे कि वे न्यायालय द्वारा देखी गई हैं, किंतु यदि वे उस पुलिस अधिकारी द्वारा, जिसने उन्हें लिखा है, अपनी स्मृति को ताजा करने के लिए उपयोग में लाई जाती है, या यदि न्यायालय उन्हें ऐसे पुलिस अधिकारी की बातों का खंडन करने के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाता है तो भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की, यथास्थिति, धारा 161 या धारा 145 के उपबंध लागू होंगे ।

