भारतीय दंड संहिता की धारा 71 के अनुसार, जहां कि कोई अपराध कार्य, ऐसे भागों से, जिनका कोई भाग स्वयं अपराध है, मिलकर बना है, वहां अपराधी अपने ऐसे अपराधों में एक से अधिक के दण्ड से दण्डित नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसा स्पष्ट रूप से उपबन्धित न हो।
जहां कि कोई बात अपराधों को परिभाषित या दण्डित करने वाली किसी तत्समय प्रवॄत्त विधि की दो या अधिक पॄथक् परिभाषाओं में आने वाला अपराध है, अथवा
जहां कि कई कार्य, जिनमें से स्वयं एक से या स्वयं एकाधिक से अपराध गठित होता है, मिलकर भिन्न अपराध गठित करते हैं;
वहां अपराधी को उससे कठोर दण्ड से दण्डित नहीं किया जाएगा, जो ऐसे अपराधों में से किसी भी एक के लिए न्यायालय, जो उसका विचारण करे, उसे दे सकता हो।

