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संसद् में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 ( Leaders Of Opposition In Parliament (Allowances, Medical & Other Facilities) Rules, 1977 )


 

संसद् में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977

(1977 का अधिनियम संख्यांक 33)

[18 अगस्त, 1977]

संसद् में विपक्षी नेताओं के वेतन

और भत्तों का उपबन्ध

करने के लिए अधिनियम

                भारत गणराज्य के अट्ठाईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम संसद् में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 है ।

                (2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।

2. परिभाषा-इस अधिनियम में संसद् के किसी सदन के सम्बन्ध में विपक्षी नेता" से, यथास्थिति, राज्य सभा या लोक सभा का वह सदस्य अभिप्रेत है जो सरकार के विपक्ष में सबसे अधिक संख्या वाले दल का उस सदन में उस समय नेता है और जिसे, यथास्थिति, राज्य सभा के सभापति या लोक सभा के अध्यक्ष द्वारा उस रूप में मान्यता दी गई है ।

                स्पष्टीकरण-जहां राज्य सभा या लोक सभा में सरकार के विपक्ष में दो या दो से अधिक ऐसे दल हैं जिनकी संख्या एक समान है वहां, यथास्थिति, राज्य सभा का सभापति या लोक सभा का अध्यक्ष ऐसे दलों की प्रास्थिति का ध्यान रखते हुए उन दलों के नेताओं में से किसी एक को विपक्षी नेता के रूप में इस धारा के प्रयोजनों के लिए मान्यता देगा और ऐसी मान्यता अन्तिम तथा निश्चायक होगी ।

 [3. वेतन तथा दैनिक, निर्वाचन-क्षेत्र और संपचुअरी भत्ते-(1) प्रत्येक विपक्षी नेता, जब तक वह ऐसे नेता के रूप में बना रहता है, प्रतिमास वेतन और प्रत्येक दिन के लिए भत्ता उन्हीं दरों पर प्राप्त करने का हकदार होगा, जो संसद् सदस्यों की बाबत संसद् सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 (1954 का 30) की धारा 3 में विनिर्दिष्ट है ।

(2) प्रत्येक विपक्षी नेता निर्वाचन-क्षेत्र भत्ता भी उसी दर पर प्राप्त करने का हकदार होगा, जो संसद् सदस्यों की बाबत उक्त अधिनियम की धारा 8 के अधीन विनिर्दिष्ट है ।

(3) प्रत्येक विपक्षी नेता को प्रतिमास एक हजार रुपए संपचुअरी भत्ता संदत्त किया जाएगा :

 [परन्तु 17 सितंबर, 2001 से संपचुअरी भत्ता प्रत्येक विपक्षी नेता को उसी दर पर संदत्त किया जाएगा जिस पर संपचुअरी भत्ता मंत्रियों के सम्बलमों और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 (1952 का 58) की धारा 5 के अधीन प्रत्येक अन्य मंत्री को जो मंत्रिमंडल का सदस्य है, संदेय है ।]                                     

4. विपक्षी नेताओं के लिए निवास स्थान-(1) प्रत्येक विपक्षी नेता, जब तक वह ऐसे नेता के रूप में बना रहता है और उसके ठीक पश्चात् एक मास की अवधि तक, किराया दिए बिना सुसज्जित निवास स्थान का उपयोग करने का हकदार होगा और ऐसे निवास स्थान के अनुरक्षण के बारे में कोई प्रभार उस विपक्षी नेता पर वैयक्तिक रूप में नहीं पड़ेगा ।

(2) विपक्षी नेता की मृत्यु हो जाने पर उसका कुटुम्ब इस बात का हकदार होगा कि उस सुसज्जित निवास स्थान का, जो उस नेता के अधिभोग में था,-

                (क) उसकी मृत्यु के ठीक पश्चात् एक मास की अवधि के लिए, किराया दिए बिना, उपयोग करे और ऐसे निवास स्थान के अनुरक्षण के बारे में कोई प्रभार उसके कुटुम्ब पर नहीं पड़ेगा ; तथा

                (ख) एक मास की अतिरिक्त अवधि के लिए ऐसी दरों पर किराया देकर उपयोग करे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाएं और ऐसी अतिरिक्त अवधि के दौरान उस निवास स्थान में इस्तेमाल की गई बिजली और जल के लिए प्रभार भी दे ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए निवास स्थान" के अन्तर्गत कर्मचारिवृन्द के क्वार्टर और उनसे अनुलग्न कोई भवन तथा उद्यान भी है और निवास स्थान के सम्बन्ध में अनुरक्षण के अन्तर्गत स्थानीय रेटों और करों का संदाय तथा बिजली और पानी की व्यवस्था भी है ।

 

 

5. विपक्षी नेताओं को यात्रा और दैनिक भत्ते- [(1)] केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, विपक्षी नेता,-

                (क) अपने तथा अपने कुटुम्ब के सदस्यों के लिए और अपनी तथा अपने कुटुम्ब की चीजबस्त के परिवहन के लिए-

(i) उस यात्रा के बारे में, जो वह पद ग्रहण के लिए दिल्ली के बाहर अपने प्रायिक निवास स्थान से दिल्ली तक करे, और

                                (ii) उस यात्रा के बारे में, जो वह पद मुक्त होने पर दिल्ली के बाहर अपने प्रायिक निवास स्थान तक करे,

यात्रा भत्ते पाने का हकदार होगा ; और

                (ख) विपक्षी नेता के रूप में अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अपने द्वारा किए गए दौरों के बारे में, चाहे वे समुद्र, भूमि या वायुमार्ग द्वारा किए जाएं, यात्रा और दैनिक भत्ते पाने का हकदार होगा ।

 [(2) संसद् अधिकारी तथा संसद् में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2002 के प्रारंभ से ही, संसद् में विपक्षी नेता और उसका कुटुंब, चाहे वे साथ में यात्रा कर रहे हों या अलग से, यात्रा भत्ता उन्हीं दर पर प्राप्त करने और उतनी ही वापसी यात्राओं के लिए हकदार होंगे, जो दर और जितनी यात्राएं मंत्रियों के सम्बलमों और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 (1952 का 58) की धारा 6 की उपधारा (1क) के अधीन किसी मंत्री और उसके कुटुंब को अनुज्ञेय हैं ।]

6. विपक्षी नेताओं का चिकित्सीय उपचार आदि-केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, विपक्षी नेता और उसके कुटुंब के सदस्य सरकार द्वारा अनुरक्षित अस्पतालों में मुफ्त वास-सुविधा और चिकित्सा उपचार के भी हकदार होंगे ।

7. विपक्षी नेताओं द्वारा संसद् सदस्य के रूप में वेतन और भत्तों का लिया जाना-इस अधिनियम के अधीन वेतन या भत्ते प्राप्त करने वाला कोई विपक्षी नेता संसद् के किसी सदन की अपनी सदस्यता के बारे में वेतन या भत्ते के रूप में कोई धनराशि संसद् द्वारा उपबन्धित निधियों में से प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा ।

8. विपक्षी नेताओं को सुविधाएं-(1) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक विपक्षी नेता टेलीफोन और सचिवीय सुविधाएं प्राप्त करने का हकदार होगा ।

(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक विपक्षी नेता  [तीन हजार रुपए] प्रतिमास सवारी भत्ता पाने का हकदार होगा :

 [परन्तु जहां विपक्षी नेता को किसी अवधि में सुरक्षा के प्रयोजन के लिए या अन्यथा ड्राइवर सहित सवारी की सुविधा दी जाती है वहां वह उस अवधि के लिए सवारी भत्ते का हकदार नहीं होगा ।]

 [8क. मोटर-कार खरीदने के लिए विपक्षी नेता को अधिदाय-विपक्षी नेता को मोटर-कार खरीदने के लिए, प्रतिसंदेय अधिदाय के तौर पर, ऐसी धनराशि जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए, संदत्त की जा सकेगी, जिससे कि वह अपने पद के कर्तव्यों का सुविधानुसार तथा दक्षतापूर्वक निर्वहन कर सके ।]

9. विपक्षी नेता होने या रहने की तारीख के बारे में अधिसूचना उसकी निश्चायक साक्ष्य होगी-वह तारीख, जिसको कोई व्यक्ति विपक्षी नेता बना हो या जिस तारीख को उसका विपक्षी नेता रहना समाप्त हो गया हो, राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी और ऐसी कोई भी अधिसूचना इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए इस तथ्य की निश्चायक साक्ष्य होगी कि उस तारीख को वह विपक्षी नेता बना था या उसका विपक्षी नेता रहना समाप्त हो गया था ।

 [9क. किसी विपक्षी नेता द्वारा प्राप्त कुछ परिलब्धियों पर आय-कर के संदाय के दायित्व से छूट-आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) में किसी बात के होते हुए भी धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन किसी विपक्षी नेता को दिए गए किराया दिए बिना सुसज्जित निवास-स्थान का मूल्य (जिसके अन्तर्गत उसका रखरखाव भी है) आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 15 के अधीन वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य उसकी आय की संगणना में सम्मिलित नहीं किया जाएगा ।]

10. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेगें, अर्थात्: -

(क) ऐसे विपक्षी नेता के, जिसकी मृत्यु हो गई है, कुटुम्ब द्वारा उस सुसज्जित निवास स्थान के उपयोग के लिए, जो उस नेता के अधिभोग में था, धारा 4 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) के अधीन संदेय किराए की दरें ;

                (ख) विपक्षी नेता को धारा 5 के अधीन अनुज्ञेय यात्रा और दैनिक भत्ते ;

                (ग) विपक्षी नेता और उसके कुटुम्ब के सदस्यों को धारा 6 के अधीन अनुज्ञेय चिकित्सीय उपचार ;

                (घ) विपक्षी नेता को धारा 8 के अधीन अनुज्ञेय टेलीफोन और सचिवीय सुविधाएं और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए वह सवारी भत्ते का हकदार होगा ।

                 [(ड़) धारा 8क के अधीन विपक्षी नेता को संदेय अधिदाय ।]

(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

 ।                                             ।                                              ।                                              ।                                              ।

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