माल का भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999
(1999 का अधिनियम संख्यांक 48)
[30 दिसम्बर, 1999]
माल से संबंधित भौगोलिक उपदर्शनों के रजिस्ट्रीकरण
और बेहतर संरक्षण का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पचासवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम माल का भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी, तथा किसी ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है ।
2. परिभाषाएं और निर्वचन-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) अपील बोर्ड" से व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47) की धारा 83 के अधीन स्थापित अपील बोर्ड अभिप्रेत है ;
(ख) प्राधिकृत उपयोगकर्ता" से धारा 17 के अधीन रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन का प्राधिकृत उपयोगकर्ता अभिप्रेत है ;
(ग) इतना समरूप, जिससे धोखा हो जाए"-यदि किसी भौगोलिक उपदर्शन का किसी अन्य भौगोलिक उपदर्शन से इतना निकट सादृश्य है कि उससे धोखा या भ्रम हो जाने की संभावना है तो यह माना जाएगा कि उक्त भौगोलिक उपदर्शन किसी अन्य भौगोलिक उपदर्शन के इतना समरूप है, जिससे धोखा हो जाए ;
(घ) जिला न्यायालय" का वही अर्थ है जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में उसका है ;
(ङ) माल के संबंध में, भौगोलिक उपदर्शन" से वह उपदर्शन अभिप्रेत है जिससे ऐसे माल की कृषि माल, प्राकृतिक माल या विनिर्मित माल के रूप में ऐसे पहचान होती है कि उसका उद्भव या विनिर्माण किसी देश के राज्यक्षेत्र में या उस राज्यक्षेत्र के किसी क्षेत्र या परिक्षेत्र में हुआ है, जिसमें ऐसे माल की दी गई क्वालिटी, प्रतिष्ठा या अन्य लक्षण आवश्यक रूप से उसके भौगोलिक मूल से तात्पर्यित है, और किसी ऐसी दशा में जिसमें ऐसा माल विनिर्मित माल है, संबंधित माल के उत्पादन या प्रसंस्करण या तैयार करने के क्रियाकलापों में से कोई, यथास्थिति, ऐसे राज्यक्षेत्र, क्षेत्र या परिक्षेत्र में होता है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए, किसी ऐसे नाम को भी, जो किसी देश, उस देश के क्षेत्र या परिक्षेत्र का नाम नहीं है, भौगोलिक उपदर्शन के रूप में माना जाएगा यदि वह किसी विनिर्दिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित है और, उसका उपयोग, यथास्थिति, उस देश, क्षेत्र या परिक्षेत्र से उद्भव होने वाले विशिष्ट माल पर या उसके संबंध में किया जाता है;
(च) माल" से कोई कृषि, प्राकृतिक या विनिर्मित माल या हस्तशिल्प या उद्योग का कोई माल अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत खाद्य पदार्थ भी हैं ;
(छ) उपदर्शन" के अन्तर्गत कोई नाम, भौगोलिक या प्रतीकात्मक रूपण या उनका कोई संयोजन भी है जो माल के उस भौगोलिक उद्भव को बताता है या उसका संकेत देता है जिस पर उसका उपयोजन होता है ;
(ज) नाम" के अंतर्गत उस नाम का कोई संक्षेप भी है ;
(झ) पैकेज" के अन्तर्गत कोई पेटी, बक्सा, आधान, आवरक, फोल्डर, पात्र, बर्तन संदूकची, बोतल, रैपर, लेबल, बैंड, टिकट, रील, फ्रेम, कैप्सूल, टोपी, ढक्कन, डाट और कार्क भी है ;
(ञ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ट) माल के संबंध में, उत्पादक" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो,-
(i) यदि ऐसा माल कृषि माल है तो, माल पैदा करता है और उसके अन्तर्गत वह व्यक्ति भी है जो ऐसे माल के प्रसंस्करण या पैकेज का कार्य करता है ;
(ii) यदि ऐसा माल प्राकृतिक माल है तो, उस माल का विदोहन करता है ;
(iii) यदि ऐसा माल हस्तशिल्प या औद्योगिक माल है तो, ऐसा माल बनाता है या विनिर्मित करता है,
और इसके अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति भी है जो ऐसे माल का व्यापार करता है अथवा, यथास्थिति, ऐसे माल के ऐसे उत्पादन, विदोहन, बनाने या विनिर्माण करने में व्यवहार करता है ;
(ठ) रजिस्टर" से धारा 6 में निर्दिष्ट भौगोलिक उपदर्शनों का रजिस्टर अभिप्रेत है ;
(ड) रजिस्ट्रीकृत" से (इसके व्याकरणिक रूपभेदों सहित) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत अभिप्रेत है ;
(ढ) भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी" से व्यक्तियों या उत्पादकों का ऐसा कोई संगम या कोई संगठन अभिप्रेत है जो भौगोलिक उपदर्शन के स्वत्वधारी के रूप में तत्समय रजिस्टर में प्रविष्ट है ;
(ण) रजिस्ट्रार" से धारा 3 में निर्दिष्ट भौगोलिक उपदर्शनों का रजिस्ट्रार अभिप्रेत है ;
(त) अधिकरण" से, यथास्थिति, रजिस्ट्रार या अपील बोर्ड अभिप्रेत है जिसके समक्ष संबंधित कार्यवाही लंबित है ।
(2) उन शब्दों और पदों का, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।
(3) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) किसी भौगोलिक उपदर्शन के उपयोग के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह भौगोलिक उपदर्शन के मुद्रित या अन्य दृश्यरूपण के उपयोग के प्रति निर्देश है ;
(ख) माल के संबंध में भौगोलिक उपदर्शन के उपयोग के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह भौगोलिक उपदर्शन का ऐसे माल के ऊपर या ऐसे माल के किसी भौगोलिक या किसी भी अन्य संबंध में उपयोग के प्रति निर्देश है ;
(ग) रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के प्रति निर्देश है ;
(घ) रजिस्ट्रार के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत धारा 3 की उपधारा (2) के अनुसरण में रजिस्ट्रार के कृत्यों का निर्वहन करने वाले किसी अधिकारी के प्रति निर्देश है ;
(ङ) भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री के किसी भी कार्यालय के प्रति निर्देश है ।
अध्याय 2
रजिस्टर और रजिस्ट्रीकरण के लिए शर्तें
3. भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्रार-(1) व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त पेटेंट, डिजाइन और व्यापार चिह्न महानियंत्रक भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्रार होगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, ऐसे अन्य अधिकारी ऐसे पदाभिधानों सहित, जो वह ठीक समझे, रजिस्ट्रार के अधीक्षण और निदेशन के अधीन इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रार के ऐसे कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए, जैसे वह समय-समय पर निर्वहन के लिए उन्हें प्राधिकृत करे, नियुक्त कर सकेगी ।
4. मामलों, आदि को वापस लेने या अन्तरित करने की रजिस्ट्रार की शक्ति-धारा 3 की उपधारा (2) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, रजिस्ट्रार, लिखित आदेश द्वारा और उसमें लेखबद्ध कारणों से, उक्त उपधारा (2) के अधीन नियुक्त किसी अधिकारी के समक्ष लम्बित किसी मामले को वापस ले सकेगा और ऐसे मामले पर नए सिरे से या उस प्रक्रम से जिससे उसे ऐसे वापस लिया गया था, या तो स्वयं कार्यवाही कर सकेगा या उसे इस प्रकार नियुक्त किसी अन्य अधिकारी को अन्तरित कर सकेगा जो अंतरण के आदेश में विशेष निदेशों के अधीन रहते हुए मामले पर या तो नए सिरे से या उस प्रक्रम से जिससे उसे इस प्रकार अन्तरित किया गया था, कार्यवाही कर सकेगा ।
5. भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री और उसके कार्यालय-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ एक रजिस्ट्री स्थापित की जाएगी जो भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री के नाम से ज्ञात होगी ।
(2) भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री का मुख्य कार्यालय ऐसे स्थान पर होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे और भौगोलिक उपदर्शनों के रजिस्ट्रीकरण को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ, ऐसे स्थानों पर जो केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री के शाखा कार्यालय स्थापित किए जा सकेंगे ।
(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, वह राज्यक्षेत्रीय सीमा परिनिश्चित करेगी जिसके भीतर भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री का कोई कार्यालय अपना कार्य कर सकेगा ।
(4) भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री की एक मुद्रा होगी ।
6. भौगोलिक उपदर्शन रजिस्टर-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ, भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री के मुख्य कार्यालय में एक अभिलेख रखा जाएगा जो भौगोलिक उपदर्शन रजिस्टर कहलाएगा, जिसमें स्वत्वधारियों के नाम, पते विवरणों सहित और प्राधिकृत उपयोगकर्ताओं के नाम, पते और विवरण तथा रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शनों से संबंधित ऐसे अन्य मामले प्रविष्ट किए जाएंगे जो विहित किए जाएं और ऐसे रजिस्टरों को पूर्णतः या भागतः कंप्यूटर पर बनाए रखा जा सकेगा ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, रजिस्ट्रार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह अभिलेखों को पूर्णतः या भागतः कंप्यूटर फ्लापियों या डिस्केटों या किसी अन्य इलैक्ट्रोनिक प्ररूप में ऐसे रक्षोपायों के अधीन रहते हुए रखे जो विहित किए जाएं ।
(3) जहां ऐसा रजिस्टर उपधारा (2) के अधीन पूर्णतः या भागतः कंप्यूटर फ्लापियों या डिस्केटों या किसी अन्य इलैक्ट्रोनिक प्ररूप में रखा जाता है वहां इस अधिनियम में रजिस्टर में की किसी प्रविष्टि के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह, यथास्थिति, कंप्यूटर फ्लापियों या डिस्केटों या किसी अन्य इलैक्ट्रोनिक प्ररूप में रखी गई प्रविष्टि के प्रति निर्देश है ।
(4) किसी अभिव्यक्त या विवक्षित या आन्वयिक न्यास की कोई सूचना रजिस्टर में प्रविष्ट नहीं की जाएगी और ऐसी कोई सूचना रजिस्ट्रार द्वारा प्राप्य नहीं होगी ।
(5) केन्द्रीय सरकार के अधीक्षण और निदेशन के अधीन रहते हुए, रजिस्टर को रजिस्ट्रार के नियंत्रण और प्रबंध के अधीन रखा जाएगा ।
(6) भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री के प्रत्येक शाखा कार्यालय में रजिस्टर की और धारा 78 में वर्णित ऐसे अन्य दस्तावेजों की, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निर्दिष्ट करे, एक प्रति रखी जाएगी ।
7. रजिस्टर का भाग क और भाग ख-(1) धारा 6 में निर्दिष्ट रजिस्टर को दो भागों में विभाजित किया जाएगा जिन्हें क्रमशः भाग क और भाग ख कहा जाएगा ।
(2) भौगोलिक उपदर्शनों के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित विशिष्टियां विहित रीति में रजिस्टर के भाग क में मिला दी जाएंगी और वे उसका भाग बन जाएंगी ।
(3) प्राधिकृत उपयोगकर्ताओं के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित विशिष्टियां विहित रीति में रजिस्टर के भाग ख में मिला दी जाएंगी और वे उसका भाग बन जाएंगी ।
8. रजिस्ट्रीकरण विशिष्ट माल और क्षेत्र के बारे में होगा-(1) भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण माल के ऐसे वर्ग में आने वाले किसी या सभी माल की बाबत जो रजिस्ट्रार द्वारा वर्गीकृत किया जाए, और, यथास्थिति, किसी देश के किसी निश्चित राज्यक्षेत्र या, उस राज्यक्षेत्र के किसी क्षेत्र या परिक्षेत्र की बाबत किया जा सकेगा ।
(2) रजिस्ट्रार उपधारा (1) के अधीन माल को, जहां तक हो सके, भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजन हेतु माल के अन्तरराष्ट्रीय वर्गीकरण के अनुसार वर्गीकृत करेगा ।
(3) रजिस्ट्रार उपधारा (2) में निर्दिष्ट माल के वर्गीकरण की वर्णानुक्रम में अनुक्रमणिका विहित रीति में प्रकाशित कर सकेगा ।
(4) कोई माल किस वर्ग में आते हैं, या उपधारा (1) में निर्दिष्ट निश्चित क्षेत्र, जिसकी बाबत भौगोलिक उपदर्शन रजिस्टर किया जाना है, या जहां कोई माल उपधारा (3) के अधीन प्रकाशित माल की वर्णानुक्रम में अनुक्रमणिका में विनिर्दिष्ट नहीं है, इस बाबत, उद्भूत होने वाला प्रश्न रजिस्ट्रार द्वारा अवधारित किया जाएगा जिसका इस विषय में विनिश्चय अन्तिम होगा ।
9. कतिपय भौगोलिक उपदर्शनों के रजिस्ट्रीकरण पर प्रतिषेध-(1) कोई भौगोलिक उपदर्शन-
(क) जिसके उपयोग से धोखा या भ्रम होने की संभाव्यता है ; या
(ख) जिसका उपयोग, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के विरुद्ध है ; या
(ग) जिसमें कलंकात्मक या अश्लील बातें समाविष्ट या अन्तर्विष्ट हैं ; या
(घ) जिसमें कोई ऐसी बात समाविष्ट या अन्तर्विष्ट है जिससे भारत के नागरिकों के किसी वर्ग या भाग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की संभाव्यता है ; या
(ङ) जो अन्यथा किसी न्यायालय में संरक्षण का हकदार नहीं है ; या
(च) जो माल के जातिगत नाम या उपदर्शन से अवधारित है, और अतः वह उद्भव के अपने देश में संरक्षित नहीं है या उसे संरक्षण मिलना समाप्त हो गया है या जिसका उपयोग उस देश में नहीं हो रहा है ; या
(छ) जो, यद्यपि उस राज्यक्षेत्र, क्षेत्र या परिक्षेत्र के बारे में, जिसमें माल का उद्भव होता है, शब्दशः सही है किंतु धोखे से व्यक्तियों के लिए इस प्रकार रूपित है कि माल का, यथास्थिति, किसी अन्य राज्यक्षेत्र, क्षेत्र या परिक्षेत्र में उद्भव होता है,
भौगोलिक उपदर्शन के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण 1-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी माल के संबंध में जातिगत नाम या उपदर्शन" से उस माल का नाम अभिप्रेत है जिसने, यद्यपि वह उस स्थान या क्षेत्र से संबंधित है जहां माल मूलतः उत्पादित या विनिर्मित किया गया था; अपना मूल अर्थ खो दिया है और जो ऐसे माल का सामान्य नाम हो गया है और माल की किस्म, प्रकृति, प्रकार या अन्य गुण-धर्म या लक्षण के नाम या उपदर्शन के रूप में काम आता है ।
स्पष्टीकरण 2-यह अवधारण करने में कि नाम जातिगत हो गया है, उन सभी बातों को, जिनके अन्तर्गत उस क्षेत्र या स्थान में, जिसमें नाम का उद्भव होता है, विद्यमान स्थिति भी है और माल के उपभोग के क्षेत्र को ध्यान में रखा जाएगा ।
10. श्रुतिसम भौगोलिक उपदर्शनों का रजिस्ट्रीकरण-धारा 7 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अधीन श्रुतिसम भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण किया जा सकेगा यदि रजिस्ट्रार का, ऐसी व्यावहारिक दशाओं पर जिनके अधीन प्रश्नगत श्रुतिसम उपदर्शन को अन्य श्रुतिसम उपदर्शनों से सुभिन्न किया जाएगा और संबंधित माल के उत्पादकों का साम्य उपचार सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विचार करने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि ऐसे माल के उपभोक्ता ऐसे रजिस्ट्रीकरण के परिणामस्वरूप भ्रम में नहीं पड़ेंगे या गुमराह नहीं होंगे ।
अध्याय 3
रजिस्ट्रीकरण के लिए प्रक्रिया और उसकी अवधि
11. रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन-(1) ऐसे व्यक्तियों या उत्पादकों का कोई संगम अथवा संबंधित माल के उत्पादकों के हित का प्रतिनिधित्व करने वाला तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोई संगठन या प्राधिकरण, जो ऐसे माल के संबंध में भौगोलिक उपदर्शन को रजिस्टर कराने के इच्छुक हैं, रजिस्ट्रार को लिखित रूप में ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से ऐसी फीस के साथ, जो भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए विहित की जाए, आवेदन करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन में निम्नलिखित होगा-
(क) इस बारे में एक विवरण कि भौगोलिक उपदर्शन माल को इस रूप में कि वह, यथास्थिति, उस देश के संबद्ध राज्यक्षेत्र या देश के क्षेत्र या परिक्षेत्र में उद्भूत हुआ है, उसकी विनिर्दिष्ट क्वालिटी, ख्याति या अन्य लक्षणों के संबंध में, जो उसके अन्तर्निहित प्राकृतिक और मानवीय तथ्यों सहित अनन्यतः या आवश्यकतः भौगोलिक पर्यावरण के कारण है और जिसका उत्पादन, प्रसंस्करण या तैयार किया जाना, यथास्थिति, ऐसे राज्यक्षेत्र, क्षेत्र या परिक्षेत्र में किया जाता है, नामनिर्दिष्ट करने के लिए कैसे काम में आता है;
(ख) उस माल का वर्ग, जिसको भौगोलिक उपदर्शन लागू होगा;
(ग) उस देश के राज्यक्षेत्र या देश में उस क्षेत्र या परिक्षेत्र का भौगोलिक नक्शा जिसमें माल का उद्भव होता है या उसका विनिर्माण किया जा रहा है;
(घ) भौगोलिक उपदर्शन के रूप से संबंधित विशिष्टियां कि इसमें शाब्दिक या प्रतीकात्मक तत्व या दोनों समाविष्ट हैं या नहीं;
(ङ) संबंधित माल, यदि कोई हैं, के, जो प्रारंभ में ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के, जो विहित किया जाए, रजिस्ट्रीकरण सहित रजिस्टर किए जाने के लिए प्रस्तावित था, उत्पादकों की ऐसी विशिष्टियों से युक्त एक विवरण; और
(च) ऐसे अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं ।
(3) भिन्न-भिन्न वर्गों के माल के लिए किसी भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए एकल आवेदन किया जा सकेगा और उसके लिए संदेय फीस ऐसे प्रत्येक वर्ग के माल के संबंध में होगी ।
(4) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन उस भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री के कार्यालय में फाइल किया जाएगा जिसकी राज्यक्षेत्रीय सीमाओं के भीतर देश का राज्यक्षेत्र या उस देश में क्षेत्र या परिक्षेत्र, जिससे भौगोलिक उपदर्शन संबंधित है, स्थित है:
परंतु जहां, यथास्थिति, ऐसा राज्यक्षेत्र, क्षेत्र या परिक्षेत्र भारत में स्थित नहीं है, वहां आवेदन उस भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री के कार्यालय में फाइल किया जाएगा जिसकी राज्यक्षेत्रीय सीमा के भीतर वह स्थान स्थित है जो आवेदन में प्रकट किए गए भारत में तामील के लिए पते में उल्लिखित है ।
(5) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन की जांच रजिस्ट्रार द्वारा ऐसी रीति में की जाएगी जो विहित की जाए ।
(6) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रार आवेदन को अस्वीकार कर सकेगा या उसे आत्यांतिकतः या ऐसे संशोधनों, उपांतरणों, शर्तों या निर्बंधनों के अधीन रहते हुए यदि कोई हों, जो वह ठीक समझे, स्वीकार कर सकेगा ।
(7) आवेदन के अस्वीकार किए जाने या सशर्त स्वीकार किए जाने की दशा में, रजिस्ट्रार ऐसी अस्वीकृति या सशर्त स्वीकृति के आधार और अपने विनिश्चय पर पहुंचने के लिए उपयोग की गई सामग्री के आधारों को लेखबद्ध करेगा ।
12. प्रतिग्रहण वापस लेना-जहां भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन के प्रतिग्रहण के पश्चात् किंतु उसके रजिस्ट्रीकरण के पूर्व, रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाता है कि-
(क) आवेदन भूल से स्वीकार किया गया है; या
(ख) मामले की परिस्थितियों को देखते हुए, भौगोलिक उपदर्शन को रजिस्टर नहीं किया जाना चाहिए या शर्तों या मर्यादाओं के अधीन या उन शर्तों या मर्यादाओं के, जिनके अधीन आवेदन मंजूर किया गया है, के अतिरिक्त या उनसे भिन्न शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रहते हुए रजिस्टर किया जाना चाहिए,
वहां रजिस्ट्रार, यदि आवेदक ऐसा चाहता है तो उसे सुनने के पश्चात्, प्रतिग्रहण को वापस ले सकेगा और इस प्रकार कार्रवाई करेगा मानो आवेदन प्रतिगृहीत नहीं किया गया है ।
13. आवेदन का विज्ञापन-(1) जहां भौगोलक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण का आवेदन, चाहे आत्यंतिकतः या शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रहते हुए स्वीकार किया गया है वहां रजिस्ट्रार, स्वीकृति के पश्चात् यथाशीघ्र, यथास्वीकृत आवेदन को उन शर्तों या मर्यादाओं सहित, यदि कोई हों, जिनके अधीन यह स्वीकार किया गया है, ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, विज्ञापित कराएगा ।
(2) जहां आवेदन के विज्ञापन के पश्चात्-
(क) आवेदन में कोई गलती शुद्ध की गई है; या
(ख) आवेदन को धारा 15 के अधीन संशोधित करने की अनुज्ञा दी गई है, वहां रजिस्ट्रार, स्वविवेकानुसार, आवेदन को पुनःविज्ञापित करा सकेगा या आवेदन को पुनःविज्ञापित कराने के स्थान पर आवेदन में की गई शुद्धि को विहित रीति से अधिसूचित कर सकेगा ।
14. रजिस्ट्रीकरण का विरोध-(1) कोई व्यक्ति, रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन के विज्ञापन या पुनःविज्ञापन की तारीख से तीन मास के भीतर या कुल मिलाकर एक मास से अनधिक की ऐसी अतिरिक्त कालावधि के भीतर, जो रजिस्ट्रार, उसको ऐसी रीति से और ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाए, किए गए आवेदन पर, अनुज्ञात करे, रजिस्ट्रार को रजिस्ट्रीकरण के विरोध की विहित रीति से लिखित रूप में सूचना दे सकेगा ।
(2) रजिस्ट्रार रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदक पर सूचना की एक प्रति तामील करेगा और आवेदक, उस विरोध की सूचना की ऐसी प्रति के प्राप्त होने के दो मास के भीतर रजिस्ट्रार को विहित रीति से उन आधारों का प्रतिकथन भेजेगा जिनका वह अपने आवेदन के लिए अवलंब लेता है और यदि वह ऐसी नहीं करता है तो यह समझा जाएगा कि उसने अपने आवेदन का परित्याग कर दिया है ।
(3) यदि आवेदक ऐसा प्रतिकथन भेजता है तो रजिस्ट्रार उसकी एक प्रति विरोध की सूचना देने वाले व्यक्ति पर तामील कराएगा ।
(4) ऐसा कोई साक्ष्य, जिसका अवलंब आवेदक और विरोधकर्ता ले, ऐसी रीति से और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, रजिस्ट्रार को प्रस्तुत किया जाएगा और यदि वे चाहें तो रजिस्ट्रार उन्हें सुनवाई का अवसर देगा ।
(5) रजिस्ट्रार, यदि अपेक्षित हो तो, पक्षकारों की सुनवाई के पश्चात्, और साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात् यह विनिश्चय करेगा कि रजिस्ट्रीकरण अनुज्ञात किया जाए या नहीं और किन शर्तों और निबंधनों के अधीन, यदि कोई हों, रहते हुए अनुज्ञात किया जाए और विरोध के किसी आधार पर विचार कर सकता है चाहे विरोधकर्ता ने उसका अवलंब लिया हो या नहीं ।
(6) जहां विरोध की सूचना देने वाला कोई व्यक्ति या ऐसी सूचना की प्रति की प्राप्ति के पश्चात् प्रतिकथन भेजने वाला कोई आवेदक न तो भारत में निवास करता है और न ही कारबार करता है वहां रजिस्ट्रार उससे यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह रजिस्ट्रार के समक्ष कार्यवाहियों के खर्चों की प्रतिभूति दे और ऐसी प्रतिभूति के सम्यक् रूप से दिए जाने में व्यतिक्रम होने पर, यथास्थिति, विरोध या आवेदन को परित्यक्त मान सकेगा ।
(7) रजिस्ट्रार, अनुरोध किए जाने पर, विरोध की सूचना या प्रतिकथन में किसी गलती या किसी संशोधन को ऐसे निबंधनों पर, जो वह ठीक समझे, शुद्ध करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा ।
15. शुद्धि और संशोधन-रजिस्ट्रार, ऐसे निबंधनों पर जिन्हें वह न्यायसंगत समझे, किसी भी समय, चाहे धारा 11 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन को स्वीकार करने के पहले या पश्चात्, आवेदन में या उसके संबंध में किसी गलती की शुद्धि को अनुज्ञात कर सकेगा या आवेदन में कोई संशोधन अनुज्ञात कर सकेगा:
परंतु यदि संशोधन धारा 11 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट एकल आवेदन में किया जाता है जिसमें ऐसे आवेदन का विभाजन दो या अधिक आवेदनों में किया गया है, प्रारम्भिक आवेदन करने की तारीख को इस प्रकार विभाजित आवेदन करने की तारीख समझा जाएगा ।
16. रजिस्ट्रीकरण-(1) धारा 12 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जब किसी भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन स्वीकार किया गया है और या तो, -
(क) आवेदन का विरोध नहीं किया गया है और विरोध की सूचना का समय समाप्त हो गया है; या
(ख) आवेदन का विरोध किया गया है और विरोध आवेदक के पक्ष में विनिश्चित हुआ है,
तब रजिस्ट्रार, जब तक कि केन्द्रीय सरकार अन्यथा निदेश न दे, उक्त भौगोलिक उपदर्शन और आवेदन में उल्लिखित प्राधिकृत उपयोगकर्ताओं, यदि कोई हों, को रजिस्टर करेगा और भौगोलिक उपदर्शन और प्राधिकृत उपयोगकर्ता रजिस्टर कर लिए जाने पर उक्त आवेदन करने की तारीख से रजिस्टर होगा और धारा 83 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, वही तारीख रजिस्ट्रीकरण की तारीख समझी जाएगी ।
(2) रजिस्ट्रार, किसी भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण पर, आवेदक और प्राधिकृत उपयोगकर्ताओं, प्रत्येक को, यदि वे भौगोलिक उपदर्शन के साथ रजिस्ट्रीकृत हैं, भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री की मुद्रा से मुद्रांकित ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, उसके रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र जारी करेगा ।
(3) जहां आवेदक की ओर से व्यतिक्रम के कारण आवेदन की तारीख से बारह मास के भीतर भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण पूरा नहीं किया जाता है वहां रजिस्ट्रार, आवेदक को विहित रीति से सूचना देने के पश्चात्, आवेदन को परित्यक्त मान सकेगा जब तक कि वह सूचना में इस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर पूरा न कर लिया जाए ।
(4) रजिस्ट्रार, किसी लेखन गलती या स्पष्ट भूल को शुद्ध करने के प्रयोजनार्थ रजिस्टर या रजिस्ट्रीकरण के किसी प्रमाणपत्र का संशोधन कर सकेगा ।
17. प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन-(1) ऐसे माल का, जिसकी बाबत भौगोलिक उपदर्शन धारा 16 के अधीन रजिस्टर किया गया है, उत्पादक होने का दावा करने वाला कोई व्यक्ति रजिस्ट्रार को ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में उसे रजिस्टर करने के लिए विहित रीति से लिखित रूप में आवेदन कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन के साथ तथ्यों का ऐसा एक कथन और ऐसे दस्तावेज होंगे जो रजिस्ट्रार द्वारा यह अवधारित करने के लिए विहित और अपेक्षित किए जाएं, कि ऐसा व्यक्ति उस उपधारा में निर्दिष्ट माल का उत्पादक है या नहीं और उसके साथ ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए ।
(3) (क) आवेदन फाइल करने और उसकी जांच करने;
(ख) रजिस्ट्रीकरण करने से इन्कार करने और उसे मंजूर करने;
(ग) आवेदन की मंजूरी को वापस लेने;
(घ) आवेदन के विज्ञापन;
(ङ) रजिस्ट्रीकरण के विरोध;
(च) आवेदन के संशोधन में शुद्धि या गलती; और
(छ) रजिस्ट्रीकरण,
से संबंधित इस अध्याय के उपबंध उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकृत उपयोगकर्ताओं के आवेदन और रजिस्ट्रीकरण के संबंध में उसी रीति से लागू होंगे जैसे वे भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन और रजिस्ट्रीकरण को लागू होते हैं ।
18. रजिस्ट्रीकरण की अस्तित्वावधि, उसका नवीकरण, हटाया जाना और प्रत्यावर्तन-(1) भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण दस वर्ष की अवधि के लिए होगा किंतु इस धारा के उपबंधों के अनुसार समय-समय पर नवीकरण किया जा सकेगा ।
(2) प्राधिकृत उपयोगकर्ता का रजिस्ट्रीकरण दस वर्ष की अवधि के लिए या उस तारीख तक की अवधि के लिए होगा जिसको उस भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण, जिसकी बाबत प्राधिकृत उपयोगकर्ता को रजिस्टर किया जाता है, समाप्त हो जाता है, इनमें से जो भी पहले हो ।
(3) रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा या प्राधिकृत उपयोगकर्ता द्वारा विहित रीति से किए गए आवेदन पर और विहित अवधि के भीतर तथा विहित फीस के संदाय के अधीन रहते हुए, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रजिस्ट्रीकरण को, यथास्थिति, मूल रजिस्ट्रीकरण या रजिस्ट्रीकरण के अन्तिम नवीकरण के अवसान की तारीख से (जिस तारीख को इस धारा में अन्तिम रजिस्ट्रीकरण का अवसान कहा गया है) दस वर्ष की अवधि के लिए नवीकरण करेगा ।
(4) रजिस्ट्रार, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के अन्तिम रजिस्ट्रीकरण के अवसान के पूर्व विहित समय पर, यथास्थिति, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या प्राधिकृत उपयोगकर्ता को अवसान की तारीख को और फीस के संदाय संबंधी शर्तों और अन्य बातों की सूचना भेजेगा जिस पर रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण अभिप्राप्त किया जा सकेगा और यदि उस निमित्त विहित समय के अवसान पर उन शर्तों का सम्यक्तः अनुपालन नहीं किया गया है तो रजिस्ट्रार, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता को रजिस्टर से हटा सकेगा:
परंतु रजिस्ट्रार, यदि आवेदन, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के अंतिम रजिस्ट्रीकरण के पर्यवसान के छह मास के भीतर विहित प्ररूप में किया जाता है और विहित फीस तथा अधिभार का संदाय कर दिया जाता है तो, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता को रजिस्टर से नहीं हटाएगा और, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्त्ता के रजिस्ट्रीकरण का उपधारा के अधीन दस वर्ष की अवधि के लिए नवीकरण करेगा ।
(5) जहां, यथास्थिति, किसी भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत विहित फीस का संदाय न किए जाने के कारण रजिस्टर से हटा दिया गया है वहां छह मास के पश्चात्, और, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के अन्तिम रजिस्ट्रीकरण के पर्यवसान से एक वर्ष के भीतर विहित प्ररूप में आवेदन के प्राप्त होने पर और विहित फीस का संदाय करने पर यदि रजिस्ट्रार का समाधान हो जाता है कि ऐसा करना न्यायसंगत है तो, वह, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपभोक्ता को रजिस्टर में प्रत्यावर्तित करेगा और, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रजिस्ट्रीकरण का या तो साधारणयता या ऐसी शर्त या सीमा के अधीन रहते हुए, जो वह अधिरोपित करना ठीक समझे, अन्तिम रजिस्ट्रीकरण के समाप्त होने से दस वर्ष की अवधि के लिए नवीकरण करेगा ।
19. नवीकरण के लिए फीस का संदाय करने में असफलता पर रजिस्टर से हटाए जाने का प्रभाव-जहां नवीकरण के लिए फीस का संदाय करने में असफल रहने पर भौगोलिक उपदर्शन को रजिस्टर से हटा दिया गया है वहां इस प्रकार उसे हटाए जाने की तारीख से अगले एक वर्ष के दौरान किसी अन्य भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी आवेदन के प्रयोजन के लिए उसे पहले से ही रजिस्टर में प्रविष्ट भौगोलिक उपदर्शन समझा जाएगा, जब तक कि अधिकरण का यह समाधान नहीं हो जाता है कि या तो-
(क) जो भौगोलिक उपदर्शन हटाया गया है उसका हटाए जाने के ठीक पूर्व दो वर्ष के भीतर कोई सद्भावपूर्ण उपयोग नहीं हुआ है; या
(ख) जो भौगोलिक उपदर्शन हटाया गया है उसके पूर्ववर्ती उपयोग के कारण रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का विषय है, उसके उपयोग से कोई धोखा या भ्रम उत्पन्न होने की संभावना नहीं है ।
अध्याय 4
रजिस्ट्रीकरण का प्रभाव
20. अरजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के लिए कोई कार्रवाई नहीं होगी-(1) कोई व्यक्ति किसी अरजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के निवारण के लिए या उसके लिए नुकसानी वसूल करने के लिए कोई कार्यवाही संस्थित करने का हकदार नहीं होगा ।
(2) इस अधिनियम की कोई बात माल को किसी अन्य व्यक्ति के माल के रूप में चला देने के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई के अधिकारों या तद्विषयक उपचारों को प्रभावित करने वाली नहीं समझी जाएगी ।
21. रजिस्ट्रीकरण से प्रदत्त अधिकार-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण, यदि वह विधिमान्य है तो, -
(क) भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और उसके प्राधिकृत उपयोगकर्ता या उपयोगकर्ताओं को भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के संबंध में इस अधिनियम द्वारा उपबंधित रीति से अनुतोष अभिप्राप्त करने का अधिकार प्रदान करेगा;
(ख) उसके प्राधिकृत उपयोगकर्ता को उस माल, जिसकी बाबत भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण किया जाता है, के संबंध में भौगोलिक उपदर्शन के अनन्य उपयोग का अधिकार प्रदान करेगा ।
(2) उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन दिए गए किसी भौगोलिक उपदर्शन के अनन्य उपयोग का अधिकार उसी शर्त और सीमा के अधीन होगा, जिसके अधीन रजिस्ट्रीकरण है ।
(3) जहां दो या अधिक व्यक्ति ऐसे भौगोलिक उपदर्शनों के प्राधिकृत उपयोगकर्ता हैं जो एक-दूसरे के तद्रूप हैं या निकट सदृश्य हैं, वहां उन भौगोलिक उपदर्शनों के रजिस्ट्रीकरण से यह नहीं समझा जाएगा कि उनमें से किसी एक व्यक्ति ने उनमें से किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध जहां तक उनके पृथक् अधिकार रजिस्टर में प्रविष्ट शर्तों या सीमाओं के अधीन हैं, भौगोलिक उपदर्शनों में से किसी के अनन्य उपयोग का अधिकार अर्जित कर लिया है किन्तु उनमें से हर व्यक्ति के अन्य व्यक्ति के विरुद्ध वही अधिकार होंगे जो उसके तब होते जब वह एकमात्र प्राधिकृत उपयोगकर्ता होता ।
22. रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शनों का अतिलंघन-किसी रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन का अतिलंघन ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है, जो उसका प्राधिकृत उपयोगकर्ता न होते हुए, -
(क) ऐसे भौगोलिक उपदर्शन का माल के नाम या रूपण में किसी साधन द्वारा ऐसे उपयोग करता है जो यह उपदर्शित करता है या बताता है कि ऐसे माल का ऐसे माल के वास्तविक मूल स्थान से भिन्न किसी भौगोलिक क्षेत्र में ऐसी रीति से उद्भव होता है जिससे ऐसे माल के भौगोलिक मूल के बारे में व्यक्तियों को भ्रम पैदा होता है; या
(ख) किसी भौगोलिक उपदर्शन का ऐसी रीति से उपयोग करता है जिससे अऋजु प्रतियोगिता का कार्य गठित होता है जिसके अन्तर्गत रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में चला देना भी है ।
स्पष्टीकरण 1- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, अऋजु प्रतियोगिता का कार्य" से प्रतियोगिता का कोई ऐसा कार्य अभिप्रेत है जो औद्योगिक या वाणिज्यिक विषयों में सद्भावपूर्वक व्यवहार के प्रतिकूल है ।
स्पष्टीकरण 2- शंकाओं को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि निम्नलिखित कार्य अऋजु प्रतियोगिता के कार्य समझे जाएंगे, अर्थात्: -
(i) ऐसी प्रकृति के सभी कार्य जो किसी भी साधन द्वारा किसी प्रतियोगी के स्थापन, माल या औद्योगिक या वाणिज्यिक क्रियाकलापों के बारे में भ्रम पैदा करते हों;
(ii) ऐसी प्रकृति के व्यापार के अनुक्रम में मिथ्या अभिकथन, जो किसी प्रतियोगी के स्थापन, माल या प्रौद्योगिक या वाणिज्यिक क्रियाकलापों की प्रतिष्ठा को घटाते हों;
(iii) ऐसे भौगोलिक उपदर्शन, जिनके व्यापार के अनुक्रम में उपयोग से माल की प्रकृति, विनिर्माण प्रक्रिया, उसके लक्षणों, उसके प्रयोजन के लिए उपयुक्तता या उसकी मात्रा के बारे में व्यक्तियों को भ्रम होना ही है;
(ग) माल के किसी अन्य भौगोलिक उपदर्शन का उपयोग करता है, जो, यद्यपि उस राज्यक्षेत्र, क्षेत्र या परिक्षेत्र के बारे में, जिसमें माल का उद्भव होता है अक्षरशः सही है, व्यक्तियों के समक्ष मिथ्या रूप से रूपण करता है कि माल का उस राज्यक्षेत्र, क्षेत्र या परिक्षेत्र में उद्भव हुआ है, जिससे ऐसा रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन संबंधित है ।
(2) यदि केन्द्रीय सरकार उपधारा (3) के अधीन कतिपय माल या माल के वर्गों को अतिरिक्त संरक्षण प्रदान करने के लिए ऐसा करना आवश्यक समझती है तो वह, ऐसे संरक्षण के प्रयोजनों के लिए ऐसे माल या माल के वर्ग या वर्गों को, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।
(3) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित माल या माल के किसी वर्ग या वर्गों के संबंध में इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी भौगोलिक उपदर्शन का प्राधिकृत उपयोगकर्ता नहीं है, ऐसे माल या माल के ऐसे वर्ग या वर्गों के, जिनका ऐसे अन्य भौगोलिक उपदर्शन द्वारा उपदर्शित स्थान में उद्भव नहीं है, किसी अन्य भौगोलिक उपदर्शन का उपयोग करता है या ऐसे माल का सही मूल उपदर्शित करने वाले ऐसे माल या माल के वर्ग या वर्गों के ऐसे अन्य भौगोलिक उपदर्शन का उपयोग करता है या मूल के सही स्थान के स्थानांतरण में अथवा किस्म", अभिनाम", अनुकृति" जैसी अभिव्यक्ति या ऐसी ही अभिव्यक्ति के साथ ऐसे माल या माल के वर्ग या वर्गों के ऐसे अन्य भौगोलिक उपदर्शन का उपयोग करता है, ऐसे रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन का अतिलंघन करेगा ।
(4) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, जहां ऐसा माल, जिसकी बाबत कोई भौगोलिक उपदर्शन रजिस्टर किया गया है, ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के प्राधिकृत उपयोगकर्ता से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा विधिपूर्वक अर्जित किया जाता है, वहां ऐसे व्यक्ति द्वारा उस माल में और व्यौहार से, जिसके अन्तर्गत प्रसंस्करण या पैकेजिंग भी है, ऐसे भौगोलिक उपदर्शन का कोई अतिलंघन गठित नहीं होगा, सिवाय वहां के जहां माल की दशा में उसे बाजार में लाने के पश्चात् ह्रास होता है ।
23. रजिस्ट्रीकरण विधिमान्यता का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा-(1) किसी भौगोलिक उपदर्शन से संबंधित सभी विधिक कार्यवाहियों में, रजिस्ट्रार द्वारा इस अधिनियम के अधीन इस संबंध में अनुदत्त रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र, जो भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री की मुद्रा के अधीन रजिस्टर में प्रविष्टि की प्रति है, उसकी विधिमान्यता का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा और सभी न्यायालयों में तथा अपील बोर्ड के समक्ष अतिरिक्त सबूत या मूल पेश किए बिना ग्राह्य होगा ।
(2) इस धारा की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह किसी अरजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में कार्रवाई के अधिकार को प्रभावित करती है ।
24. समनुदेशन या पारेषण, आदि का प्रतिषेध-तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन का कोई अधिकार, समनुदेशन, पारेषण, अनुज्ञापन, गिरवी, बंधक या किसी ऐसे अन्य करार की विषयवस्तु नहीं होगा:
परंतु किसी प्राधिकृत उपयोगकर्ता की मुत्यु पर, किसी रजिस्ट्रीकृत उपदर्शन में उसका अधिकार तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन उसके हक उत्तराधिकारी को न्यागत होगा ।
अध्याय 5
व्यापार चिह्न और पूर्व उपयोगकर्ताओं से संबंधित विशेष उपबंध
25. भौगोलिक उपदर्शन के व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकरण का प्रतिषेध-व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47) में किसी बात के होते हुए भी, उस अधिनियम की धारा 3 में निर्दिष्ट व्यापार चिह्न रजिस्ट्रार, स्वप्रेरणा से या किसी हितबद्ध पक्षकार के अनुरोध पर, उस व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण करने से नामंजूर कर देगा या उसे अविधिमान्य कर देगा, जिसमें-
(क) उस माल या माल के वर्ग या वर्गों की बाबत कोई भौगोलिक उपदर्शन अंतर्विष्ट है या सम्मिलित है जिसका किसी देश के राज्यक्षेत्र में या उस राज्यक्षेत्र के, जिसे ऐसा भौगोलिक उपदर्शन उपदर्शित करता है, क्षेत्र या परिक्षेत्र में उद्भव नहीं है, यदि ऐसे माल के लिए व्यापार चिह्न में ऐसे भौगोलिक उपदर्शनों का उपयोग ऐसी प्रकृति का है जिससे ऐसे माल या माल के वर्ग या वर्गों के मूल के सही स्थान के बारे में व्यक्तियों को भ्रम पैदा हो या उन्हें गुमराह करे;
(ख) धारा 22 की उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित माल या माल के वर्ग या वर्गों की पहचान करने वाला कोई भौगोलिक उपदर्शन अंतर्विष्ट है या सम्मिलित है ।
26. कतिपय व्यापार चिह्नों का संरक्षण-(1) जहां किसी व्यापार चिह्न में कोई भौगोलिक उपदर्शन अंतर्विष्ट है या सम्मिलित है और उसे तत्समय प्रवृत्त व्यापार चिह्नों से संबंधित विधि के अधीन सद्भावपूर्वक रजिस्टर करने के लिए आवेदन किया गया है, या जहां ऐसे व्यापार चिह्न के अधिकार सद्भावपूर्वक उपयोग करके या तो-
(क) इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व; या
(ख) इस अधिनियम के अधीन ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए फाइल करने की तारीख के पूर्व अर्जित किए गए हैं,
वहां इस अधिनियम की किसी बात से तत्समय प्रवृत्त व्यापार चिह्नों से संबंधित विधि के अधीन ऐसे व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की रजिस्ट्री योग्यता या विधिमान्यता या ऐसे व्यापार चिह्न का उपयोग करने के अधिकार पर इस आधार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा कि ऐसा व्यापार चिह्न ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के समान या समरूप है ।
(2) इस अधिनियम की कोई बात उस माल या माल के उस वर्ग या वर्गों की बाबत, जिनके लिए कोई भौगोलिक उपदर्शन उस शब्द के समान है जो 1 जनवरी, 1955 को या उसके पूर्व भारत के किसी भाग में ऐसे माल के सामान्य नाम के रूप में सामान्य भाषा में रूढ़िगत है, ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में लागू नहीं होगी ।
(3) इस अधिनियम की किसी बात से किसी व्यक्ति के व्यापार के अनुक्रम में उस व्यक्ति के नाम या उस व्यक्ति के कारबार में पूर्ववर्ती के नाम का प्रयोग करने के अधिकार पर किसी भी प्रकार प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, सिवाय वहां के जहां ऐसे नाम का उपयोग ऐसी रीति से किया जाता है जिससे कि उससे लोगों को भ्रम पैदा हो या वे गुमराह हो जाएं ।
(4) व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47) में या इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यापार चिह्न के उपयोग या रजिस्ट्रीकरण के संबंध में कोई कार्रवाई, उस तारीख से, जिसको ऐसा उपयोग या रजिस्ट्रीकरण, जो इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी भौगोलिक उपदर्शन का अतिलंघन करता है, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या इस अधिनियम के अधीन ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में रजिस्ट्रीकृत प्राधिकृत उपयोगकर्ता की जानकारी में आया है, पांच वर्ष की समाप्ति के पश्चात् अथवा उक्त व्यापार चिह्न अधिनियम के अधीन व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की तारीख के पश्चात् इस शर्त के अधीन रहते हुए नहीं होगी कि उक्त व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47) या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन व्यापार चिह्न उस तारीख तक प्रकाशित हो गया है, यदि ऐसी तारीख उस तारीख से पूर्वतर है जिसको ऐसा अतिलंघन ऐसे स्वत्वधारी या प्राधिकृत उपयोगकर्ता की जानकारी में आया था और ऐसे भौगोलिक उपदर्शन का उपयोग और रजिस्ट्रीकरण असद्भावपूर्वक नहीं किया गया है ।
अध्याय 6
रजिस्टर का परिशोधन और उसकी शुद्धि
27. रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने या उसमें फेरफार करने और रजिस्टर को परिशोधित करने की शक्ति-(1) किसी व्यथित व्यक्ति द्वारा अपील बोर्ड को या रजिस्ट्रार को विहित रीति से आवेदन करने पर, अधिकरण किसी उल्लंघन या उससे संबंधित रजिस्टर में प्रविष्ट शर्त का पालन करने में असफलता के आधार पर भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने या उसमें फेरफार करने के लिए ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(2) रजिस्टर में किसी प्रविष्टि के अभाव या लोप से या रजिस्टर में पर्याप्त कारण के बिना की गई किसी प्रविष्टि से या रजिस्टर में गलती से रह गई किसी प्रविष्टि से या रजिस्टर में किसी प्रविष्टि में किसी गलती या त्रुटि से व्यथित व्यक्ति अपील बोर्ड या रजिस्ट्रार को विहित रीति से आवेदन कर सकेगा और अधिकरण प्रविष्टि करने, उसे निकल देने या उसमें फेरफार करने के लिए ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(3) इस धारा के अधीन किसी कार्यवाही में अधिकरण किसी ऐसे प्रश्न का विनिश्चय कर सकेगा जिसका रजिस्टर के परिशोधन के संबंध में विनिश्चय करना आवश्यक या समीचीन है ।
(4) अधिकरण, स्वप्रेरणा से, संबद्ध पक्षकारों को विहित रीति से सूचना देने के पश्चात् और उन्हें सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट आदेश कर सकेगा ।
(5) अपील बोर्ड के रजिस्टर का परिशोधन करने वाले आदेश में यह निदेश होगा कि परिशोधन की सूचना रजिस्ट्रार पर विहित रीति से तामील की जाएगी जो ऐसी सूचना की प्राप्ति पर रजिस्टर का तद्नुसार परिशोधन करेगा ।
28. रजिस्टर की शुद्धि-रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या प्राधिकृत उपयोगकर्ता द्वारा विहित रीति से किए गए आवेदन पर, -
(क) भौगोलिक उपदर्शन के, यथास्थिति, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के नाम, पते या विवरण में किसी गलती को अथवा रजिस्टर में भौगोलिक उपदर्शन से संबंधित किसी अन्य प्रविष्टि को शुद्ध कर सकेगा;
(ख) यथास्थिति, व्यक्तियों के या उत्पादकों के संगम या किसी ऐसे संगठन या प्राधिकरण के, जो भौगोलिक उपदर्शन के स्वत्वधारी के रूप में रजिस्ट्रीकृत है, नाम, पते या विवरण में किसी परिवर्तन की रजिस्टर में प्रविष्टि कर सकेगा;
(ग) रजिस्टर में भौगोलिक उपदर्शन की प्रविष्टि को रद्द कर सकेगा;
(घ) उस माल या माल के वर्ग या वर्गों में से, जिनकी बाबत कोई भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्रीकृत है, रजिस्टर से किसी माल या माल के वर्ग या वर्गों को काट सकेगा,
और रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र में पारिणामिक संशोधन या परिवर्तन कर सकेगा तथा इस प्रयोजनार्थ रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र को अपने समक्ष पेश करने की अपेक्षा कर सकेगा ।
29. रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शनों में परिवर्तन-(1) भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी भौगोलिक उपदर्शन की अनन्यता को सारभूत रूप से प्रभावित न करने वाली रीति से उस भौगोलिक उपदर्शन में परिवर्धन या परिवर्तन करने की, इजाजत के लिए रजिस्ट्रार को विहित रीति से आवेदन कर सकेगा और रजिस्ट्रार ऐसी इजाजत देने से इंकार कर सकेगा या उसे ऐसे निबंधनों पर और ऐसी सीमाओं के अधीन रहते हुए, जो वह ठीक समझे, दे सकेगा ।
(2) रजिस्ट्रार, इस धारा के अधीन किए गए आवेदन को किसी ऐसी दशा में विहित रीति से विज्ञापित करा सकेगा जिसमें उसे यह प्रतीत हो कि ऐसा करना समीचीन है और जहां वह ऐसा करता है वहां, यदि विज्ञापन की तारीख से विहित समय के भीतर कोई व्यक्ति रजिस्ट्रार को आवेदन के विरोध की सूचना विहित रीति से देता है तो रजिस्ट्रार यदि ऐसा अपेक्षित हो, पक्षकारों को सुनने के पश्चात् मामले का विनिश्चय करेगा ।
(3) जहां इस धारा के अधीन इजाजत दी जाती है, वहां परिवर्तित रूप में भौगोलिक उपदर्शन विहित रीति से विज्ञापित किया जाएगा जब तक कि आवेदन उपधारा (2) के अधीन पहले ही विज्ञापित नहीं कर दिया गया हो ।
30. रजिस्टर की प्रविष्टियों का माल के संशोधित या प्रतिस्थापित वर्गीकरण के लिए अनुकूलन-(1) रजिस्ट्रार रजिस्टर में कोई ऐसा संशोधन नहीं करेगा जिसका प्रभाव संशोधन किए जाने के ठीक पहले उस माल या माल के वर्गों में जिनकी बाबत भौगोलिक उपदर्शन (चाहे एक या अधिक वर्गों में) रजिस्ट्रीकृत है, किसी माल या माल के वर्गों को जोड़ना होगा या जिसकी बाबत भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण को पूर्व दिनांकित करना हो:
परंतु यह उपधारा तब लागू नहीं होगी जब रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाता है कि उसके अनुपालन में असम्यक् जटिलताएं हैं और, यथास्थिति, वैसे जोड़े जाने या पूर्व दिनांकन से माल का सारभूत परिमाण प्रभावित नहीं होगा और इससे किसी व्यक्ति के अधिकारों पर सारभूत रूप से प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
(2) रजिस्टर को संशोधित करने की प्रस्थापना प्रभावित भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और प्रत्येक प्राधिकृत उपयोगकर्ता को संसूचित की जाएगी और विहित रीति से विज्ञापित की जाएगी तथा उसका किसी व्यथित व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रार के समक्ष इस आधार पर विरोध किया जा सकेगा कि प्रस्थापित संशोधन से उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन होता है ।
अध्याय 7
अपील बोर्ड को अपीलें
31. अपील बोर्ड को अपीलें-(1) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रजिस्ट्रार के किसी आदेश या विनिश्चय से व्यथित कोई व्यक्ति अपील बोर्ड को अपील उस तारीख से, जिसको ऐसा आदेश या विनिश्चय जिसके विरुद्ध अपील करने की ईप्सा की जा रही है, अपील करने वाले ऐसे व्यक्ति को सूचित किया जाता है, तीन मास के भीतर कर सकेगा ।
(2) यदि अपील उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के पर्यवसान के पश्चात् की जाती है तो ऐसी कोई अपील ग्रहण नहीं की जाएगी:
परन्तु अपील उसके लिए विनिर्दिष्ट अवधि के पर्यवसान के पश्चात् भी ग्रहण की जा सकेगी यदि अपीलार्थी अपील बोर्ड का यह समाधान कर देता है कि उसके पास विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर अपील न करने के लिए पर्याप्त कारण था ।
(3) अपील बोर्ड को अपील विहित प्ररूप में होगी और विहित रीति से सत्यापित की जाएगी तथा उसके साथ उस आदेश या विनिश्चय की, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, एक प्रति और ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए ।
32. न्यायालयों, आदि की अधिकारिता का वर्जन-किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी को धारा 31 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट विषयों के संबंध में कोई अधिकारिता, शक्ति या प्राधिकार नहीं होगा या वह उसका प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा ।
33. अपील बोर्ड की प्रक्रिया-व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47) की धारा 84 की उपधारा (2), उपधारा (3), उपधारा (4), उपधारा (5), उपधारा (6), धारा 87, धारा 92, धारा 95 और धारा 96 के उपबंध अपील बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे उसे व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन में लागू होते हैं ।
34. अपील बोर्ड के समक्ष परिशोधन, आदि के लिए आवेदन की प्रक्रिया-(1) धारा 27 के अधीन बोर्ड को रजिस्टर के परिशोधन के लिए किया गया आवेदन ऐसे प्ररूप में होगा जो विहित किया जाए ।
(2) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन से संबंधित अपील बोर्ड के प्रत्येक आदेश या निर्णय की एक प्रमाणित प्रति अपील बोर्ड द्वारा रजिस्ट्रार को संसूचित की जाएगी और रजिस्ट्रार बोर्ड के आदेश को प्रभावी करेगा तथा जब ऐसा निदेश दिया जाए तब ऐसे आदेश के अनुसार रजिस्टर में प्रविष्टियों का संशोधन करेगा या रजिस्टर का परिशोधन करेगा ।
35. विधिक कार्यवाहियों में रजिस्ट्रार का उपसंजात होना-(1) रजिस्ट्रार को, -
(क) अपील बोर्ड के समक्ष ऐसी किन्हीं विधिक कार्यवाहियों में, जिनमें ईप्सित अनुतोष में रजिस्टर का परिवर्तन या परिशोधन सम्मिलित है या जिनमें भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री की पद्धति से संबंधित कोई प्रश्न उठाया जाता है;
(ख) भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन पर रजिस्ट्रार के आदेश के विरुद्ध बोर्ड को की गई किसी अपील में, -
(i) जिसका विरोध नहीं किया जाता है और आवेदन को या तो रजिस्ट्रार द्वारा नामंजूर कर दिया जाता है या उसके द्वारा किन्हीं संशोधनों, उपांतरणों, शर्तों या सीमाओं के अधीन रहते हुए मंजूर किया जाता है, या
(ii) जिसका विरोध किया गया है और रजिस्ट्रार का विचार है कि उसका उपसंजात होना लोकहित में आवश्यक है,
उपसंजात होने और सुने जाने का अधिकार होगा तथा रजिस्ट्रार किसी मामले में यदि बोर्ड द्वारा ऐसा निदेश दिया जाए, उपसंजात होगा ।
(2) जब तक कि अपील बोर्ड अन्यथा निदेश न दे, रजिस्ट्रार, उपसंजात होने के बजाय, उसके द्वारा हस्ताक्षरित लिखित में, एक कथन प्रस्तुत कर सकेगा जिसमें ऐसी विशिष्टियां दी जाएंगी जो वह विवादग्रस्त विषय से संबंधित अपने समक्ष कार्यवाहियों या अपने द्वारा किए गए उसे प्रभावित करने वाले किसी विनिश्चय के आधारों या ऐसे ही मामलों में भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री की पद्धति या विवाद्यकों से सुसंगत अन्य बातों और रजिस्ट्रार के रूप अपनी जानकारी के लिए उचित समझे, और ऐसा कथन कार्यवाही में साक्ष्य होगा ।
36. अपील बोर्ड के समक्ष कार्यवाहियों में रजिस्ट्रार के खर्चे-इस अधिनियम के अधीन अपील बोर्ड के समक्ष सभी कार्यवाहियों में, रजिस्ट्रार के खर्चे बोर्ड के विवेकाधीन होंगे किंतु रजिस्ट्रार को पक्षकारों में से किसी के खर्चों का संदाय करने के लिए आदेश नहीं दिया जाएगा ।
अध्याय 8
अपराध, शास्तियां और प्रक्रिया
37. भौगोलिक उपदर्शनों के लगाने का अर्थ-(1) कोई व्यक्ति किसी भौगोलिक उपदर्शन को माल पर लगाने वाला समझा जाएगा, जो-
(क) माल पर ही उसे लगाता है; या
(ख) उसे किसी पैकेज पर जिसमें या जिसके साथ माल का विक्रय किया जाता है या उसे विक्रय के लिए अभिदर्शित किया जाता है या वह विक्रय के लिए अथवा व्यापार या विनिर्माण के किसी प्रयोजन के लिए कब्जे में रखा जाता है, लगाता है; या
(ग) कोई ऐसा माल, जिसका विक्रय किया जाता है, या जो विक्रय के लिए अभिदर्शित किया जाता है या विक्रय के लिए अथवा व्यापार या विनिर्माण के किसी प्रयोजन के लिए कब्जे में रखा जाता है, किसी ऐसे पैकेज या अन्य चीज में या उसके साथ, जिस पर भौगोलिक उपदर्शन लगाया जाता है, रखता है, संलग्न करता है या उपाबद्ध करता है; या
(घ) उचित रूप से किसी रीति से किसी भौगोलिक उपदर्शन का इस रीति में उपयोग करता है जिससे यह विश्वास होने की संभावना है कि वह माल, जिसके संबंध में उसका उपयोग किया जाता है, उस भौगोलिक उपदर्शन से अभिहित या वर्णित माल है; या
(ङ) माल के संबंध में किसी भौगोलिक उपदर्शन का उपयोग किसी संकेत, विज्ञापन, बीजक, सूचीपत्र, कारबार पत्र, कारबार कागज, कीमत सूची या अन्य वाणिज्यिक दस्तावेजों में करता है और इस प्रकार उपयोग किए गए भौगोलिक उपदर्शन के निर्देश में किए गए अनुरोध या आदेश के अनुसरण में किसी व्यक्ति को माल परिदत्त किया जाता है ।
(2) भौगोलिक उपदर्शन माल पर लगाया गया समझा जाएगा चाहे वह माल पर या किसी पैकेज या अन्य चीज पर बुना जाए या छापा जाए या अन्यथा बनाया जाए या उपाबद्ध किया जाए या चिपकाया जाए ।
38. भौगोलिक उपदर्शनों का मिथ्याकरण और उन्हें मिथ्या रूप में लगाना-(1) कोई व्यक्ति किसी भौगोलिक उपदर्शन को मिथ्या करने वाला समझा जाएगा जो, या तो-
(क) भौगोलिक उपदर्शन के प्राधिकृत उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना, वह भौगोलिक उपदर्शन या इतने समरूप भौगोलिक उपदर्शन बनाता है जिससे धोखा हो जाए; या
(ख) किसी असली भौगोलिक उपदर्शन को, चाहे परिवर्तन करके, या परिवर्धन करके, मिटा कर या अन्यथा मिथ्या करता है ।
(2) कोई व्यक्ति किसी भौगोलिक उपदर्शन को माल पर मिथ्या रूप से लगाने वाला समझा जाएगा, जो भौगोलिक उपदर्शन के प्राधिकृत उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना, -
(क) ऐसे भौगोलिक उपदर्शन को या इतने समरूप भौगोलिक उपदर्शन को, जिससे धोखा हो जाए, माल या माल से युक्त किसी पैकेज पर लगाता है;
(ख) ऐसे प्राधिकृत उपयोगकर्ता के भौगोलिक उपदर्शन से तद्रूप या इतने समरूप भौगोलिक उपदर्शन वाले कि धोखा हो जाए, किसी ऐसे पैकेज का उपयोग भौगोलिक उपदर्शन के प्राधिकृत उपयोगकर्ता के असली माल से भिन्न किसी माल को उसमें पैक करने, भरने या लपेटने के प्रयोजन के लिए करता है ।
(3) उस भौगोलिक उपदर्शन को जो उपधारा (1) में उल्लिखित मिथ्याकृत है या उपधारा (2) में उल्लिखित मिथ्या रूप से लगाया गया है, इस अधिनियम में मिथ्या भौगोलिक उपदर्शन के रूप में निर्दिष्ट किया गया है ।
(4) भौगोलिक उपदर्शन के मिथ्याकरण के लिए या माल पर भौगोलिक उपदर्शन मिथ्या रूप से लगाने के लिए किसी अभियोजन में, स्वत्वधारी की अनुमति साबित करने का भार अभियुक्त पर होगा ।
39. मिथ्या भौगोलिक उपदर्शन लगाने के लिए शास्ति-जो कोई-
(क) किसी भौगोलिक उपदर्शन का मिथ्याकरण करेगा; या
(ख) माल पर किसी भौगोलिक उपदर्शन को मिथ्या लगाएगा; या
(ग) किसी भौगोलिक उपदर्शन के मिथ्याकरण या मिथ्याकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन के लिए कोई डाई, ब्लाक, मशीन, प्लेट या अन्य उपकरण बनाएगा, व्ययन करेगा या अपने कब्जे में रखेगा; या
(घ) किसी ऐसे माल पर, जिस पर उस देश या स्थान का संकेत, जहां उसे बनाया गया या उत्पादित किया गया था अथवा विनिर्माता या उस व्यक्ति का, जिसके लिए माल का विनिर्माण किया गया है, नाम और पते का उपदर्शन धारा 71 के अधीन लगाना अपेक्षित है, ऐसे देश, स्थान, नाम या पते का मिथ्या उपदर्शन करेगा; या
(ङ) उद्गम से संबंधित उपदर्शन को उस माल पर लगाया गया है जिस पर धारा 71 के अधीन उपयोजित किया जाना अपेक्षित है, बिगाड़ेगा, परिवर्तित करेगा या मिटाएगा; या
(च) इस धारा में ऊपर उल्लिखित किन्हीं बातों को कराएगा,
जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने धोखा देने के आशय से नहीं किया है, कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पचास हजाए रुपए से कम का नहीं होगा किंतु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा:
परंतु न्यायालय, यथोचित और विशेष कारणों से जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, छह मास से कम की अवधि के कारावास या पचास हजार रुपए से कम के जुर्माने का दंडादेश अधिरोपित कर सकेगा ।
40. ऐसे माल का विक्रय करने के लिए शास्ति जिसे पर मिथ्या भौगोलिक उपदर्शन लगाया गया है-कोई व्यक्ति, जो किसी माल या चीजों को, जिन पर कोई मिथ्या भौगोलिक उपदर्शन लगाया गया है या जिन पर उन्हें बनाने या उत्पादित करने वाले देश या स्थान का उपदर्शन या विनिर्माता या उस व्यक्ति, जिसके माल का विनिर्माण किया गया है, के नाम और पते का धारा 71 की अपेक्षानुसार उपदर्शन लगाया जाना है या इस प्रकार अपेक्षित उपदर्शनों के बिना, विक्रय करेगा, उन्हें भाड़े पर देगा या विक्रय के लिए अभिदर्शित करेगा या भाड़े पर लेगा या विक्रय के लिए अपने कब्जे में रखेगा, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि-
(क) इस धारा के विरुद्ध अपराध करने के विरुद्ध सभी युक्तियुक्त पूर्वावधानियां बरतने के पश्चात्, उसके पास अभिकथित अपराध के किए जाने के समय इस बारे में कि भौगोलिक उपदर्शन असली है, या उस माल की बाबत कोई अपराध किया गया था, संदेह करने का कोई कारण नहीं था; या
(ख) अभियोजक द्वारा या उसकी ओर से मांग किए जाने पर उसने उस व्यक्ति की बाबत, जिससे उसने ऐसे माल या चीजें अभिप्राप्त की, वह सब जानकारी दी जो उसकी शक्ति में थी; या
(ग) उसने अन्यथा निर्दोषता से कार्य किया था,
ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पचास हजाए रुपए से कम का नहीं होगा किंतु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा:
परंतु न्यायालय, यथोचित और विशेष कारणों से जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, छह मास से कम की अवधि के कारावास या पचास हजार रुपए से कम के जुर्माने का दंडादेश अधिरोपित कर सकेगा ।
41. द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर वर्धित शास्ति-जो कोई धारा 39 या धारा 40 के अधीन किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध किए जाने पर किसी ऐसे ही अपराध के लिए पुनःदोषसिद्ध किया जाएगा, तो वह द्वितीय और प्रत्येक पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा किंतु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेाग, दंडनीय होगा:
परंतु न्यायालय, यथोचित और विशेष कारणों से जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, एक वर्ष से कम की अवधि के कारावास या एक लाख रुपए से कम के जुर्माने का दंडादेश अधिरोपित कर सकेगा:
परंतु यह और कि इस धारा के प्रयोजनों के लिए, इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व की गई किसी दोषसिद्धि का संज्ञान नहीं किया जाएगा ।
42. किसी भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकृत रूप में मिथ्या व्यपदेशन के लिए शास्ति-(1) कोई व्यक्ति निम्नलिखित व्यपदेशन नहीं करेगा-
(क) किसी ऐसे भौगोलिक उपदर्शन की बाबत, जो रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन नहीं है, इस आशय का कि वह रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन है; या
(ख) इस आशय का कि रजिस्ट्रीकृत उपदर्शन ऐसे माल की बाबत रजिस्ट्रीकृत है जिसकी बाबत वह वस्तुतः रजिस्ट्रीकृत नहीं है; या
(ग) इस आशय का कि किसी भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण से किन्हीं परिस्थितियों में उसके उपयोग का अनन्य अधिकार मिला है जबकि रजिस्टर में प्रविष्ट सीमाओं को ध्यान में रखते हुए उस रजिस्ट्रीकरण से वस्तुतः ऐसा अधिकार नहीं मिला है ।
(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उपबंधों में से किसी का उल्लंघन करेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, भारत में किसी भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में, रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन" शब्द का उपयोग या अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से रजिस्ट्रीकरण को निर्दिष्ट करने वाले किसी अन्य पद, प्रतीक या आर०जी०आई" की तरह के संकेत का उपयोग निम्नलिखित दशाओं के सिवाय रजिस्टर में रजिस्ट्रीकरण के निर्देश का द्योतन करने वाला समझा जाएगा-
(क) जहां उस शब्द या अन्य पद, प्रतीक या संकेत का अन्य शब्दों के सीधे संसर्ग में उपयोग किया जाता है जो कम से कम उतने ही बड़े अक्षरों में अंकित है जितने में वह शब्द या अन्य पद, प्रतीक या संकेत अंकित हैं और यह उपदर्शित करते हैं कि वह निर्देश भौगोलिक उपदर्शन के रूप में ऐसे रजिस्ट्रीकरण के प्रति है जो भारत के बाहर किसी ऐसे देश की विधि के अधीन है और जो ऐसा देश है जिसकी विधि के अधीन निर्दिष्ट रजिस्ट्रीकरण वास्तव में प्रवृत्त है;
(ख) जहां वह अन्य पद, प्रतीक या संकेत स्वयं ऐसा है कि उससे यह उपदर्शित होता है कि वह निर्देश ऐसे रजिस्ट्रीकरण के प्रति है जो खंड (क) में उल्लिखित है; या
(ग) जहां वह शब्द ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में उपयोग में लाया जाता है जो भारत के बाहर किसी देश की विधि के अधीन उस देश में निर्यात किए जाने वाले माल के संबंध में ही भौगोलिक उपदर्शन के रूप में रजिस्ट्रीकृत है ।
43. कारबार के स्थान को भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री से संबद्ध रूप में अनुचित रूप से वर्णित करने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति अपने कारबार के स्थान पर या उसके द्वारा जारी किए गए किसी दस्तावेज पर या अन्यथा ऐसे शब्दों का उपयोग करेगा जिनसे युक्तियुक्त रूप से यह विश्वास होगा कि उसका कारबार का स्थान भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री है या शासकीय रूप से उससे संबद्ध है, तो वह कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
44. रजिस्टर में प्रविष्टियों के मिथ्याकरण के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति रजिस्टर में मिथ्या प्रविष्टि करेगा या कराएगा अथवा मिथ्या रूप से कोई ऐसा लेखन करेगा या कराएगा जिसके बारे में यह तात्पर्यित है कि वह रजिस्टर में किसी प्रविष्टि की प्रतिलिपि है, या किसी ऐसे लेख को, यह जानते हुए कि प्रविष्टि या लेख मिथ्या है, साक्ष्य में प्रस्तुत करेगा या निविदत्त करेगा अथवा प्रस्तुत कराएगा या निविदत्त कराएगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
45. कतिपय दशाओं में कोई अपराध नहीं-धारा 39, धारा 40 और धारा 41 के उपबंध, रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन या ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के प्राधिकृत उपयोगकर्ता के संबंध में, इस अधिनियम द्वारा सृजित या मान्यताप्राप्त अधिकारों के अधीन होंगे और कोई कार्य या लोप पूर्वोक्त धारा के अधीन अपराध नहीं समझा जाएगा, यदि-
(क) अभिकथित अपराध भौगोलिक उपदर्शन से संबंधित है और उक्त कार्य या लोप इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञात है; या
(ख) अभिकथित अपराध रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन से संबंधित है और उक्त कार्य या लोप तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन अनुज्ञात है ।
46. माल का समपहरण-जहां कोई व्यक्ति धारा 39 या धारा 40 या धारा 41 के अधीन किसी अपराध के लिए सिद्धदोष है या धारा 39 या धारा 40 के अधीन अपराध से यह साबित करने पर कि उसने कपट के आशय के बिना कार्य किया था, दोषमुक्त किया गया है, अथवा धारा 40 के अधीन उस धारा के खंड (क), खंड (ख) या खंड (ग) में विनिर्दिष्ट बातों को साबित करने पर दोषमुक्त किया गया है, वहां उसे सिद्धदोष या दोषमुक्त करने वाला न्यायालय, सरकार को ऐसे सभी माल या चीजों के समपहरण का निदेश दे सकेगा, जिनके द्वारा या जिनके संबंध में अपराध किया गया था, या यदि पूर्वोक्त रूप में ऐसा सबूत नहीं होता तो उसे सिद्धदोष किया गया होता ।
(2) जब किसी दोषसिद्धि पर समपहरण का निदेश दिया जाता है और ऐसी दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील होती है तो समपहरण के विरुद्ध भी अपील होगी ।
(3) जहां दोषमुक्ति पर सपमहरण का निदेश दिया जाता है और वे माल या चीजें, जिनसे निदेश संबंधित है, पचास रुपए से अधिक मूल्य की हैं, वहां समपहरण के विरुद्ध अपील उस न्यायालय को, जिसको अपीलीय मामलों में समपहरण का निदेश देने वाले न्यायालय के दंडादेशों के विरुद्ध अपील होती है, निदेश देने की तारीख से तीस दिन के भीतर की जा सकेगी ।
(4) जहां दोषसिद्धि पर समपहरण का निदेश दिया जाता है, वहां वह न्यायालय, जिसके समक्ष उस व्यक्ति को सिद्धदोष किया गया है, किन्हीं समपहृत वस्तुओं को नष्ट करने या अन्यथा व्ययन करने का, जो न्यायालय ठीक समझे, आदेश दे सकेगा ।
47. कारबार के सामान्य अनुक्रम में नियोजित कतिपय व्यक्तियों को छूट-जहां धारा 39 के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त कोई व्यक्ति यह साबित कर देता है कि-
(क) वह अपने कारबार के सामान्य अनुक्रम में अन्य व्यक्तियों की ओर से, यथास्थिति, भौगोलिक उपदर्शन लगाने या भौगोलिक उपदर्शन बनाने या उनके बनाने में उपयोग के लिए डाइयां, ब्लाक, मशीनें, प्लेटें या अन्य उपकरण बनाने के लिए नियोजित किया गया है; और
(ख) उस मामले में, जो आरोप का विषय है, वह इस प्रकार नियोजित था, और माल या अन्य चीजों में, ऐसे माल के विक्रय पर आधारित लाभ या कमीशन के रूप में हितबद्ध नहीं था; और
(ग) आरोपित अपराध करने के विरुद्ध सभी युक्तियुक्त पूर्वावधानियां बरतते हुए, उसके पास अभिकथित अपराध के किए जाने के समय भौगोलिक उपदर्शन के असली होने के बारे में संदेह करने का कोई कारण नहीं था; और
(घ) अभियोजन द्वारा या उसकी ओर से मांग करने पर, उसने उन व्यक्तियों की बाबत जिनकी ओर से भौगोलिक उपदर्शन लगाया गया था, वह सभी जानकारी दी जो उसकी शक्ति में थीं,
वहां उसे दोषमुक्त कर दिया जाएगा ।
48. जहां अभियुक्त द्वारा रजिस्ट्रीकरण की अविधिमान्यता का अभिवचन किया जाता है वहां प्रक्रिया-(1) जहां धारा 39 या धारा 40 या धारा 41 के अधीन आरोपित अपराध किसी रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में है और अभियुक्त यह अभिवचन करता है कि भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य है वहां निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा-
(क) यदि न्यायालय का समाधान हो जाता है कि ऐसी प्रतिरक्षा प्रथमदृष्ट्या मान्य है तो वह आरोप पर आगे कार्यवाही नहीं करेगा किंतु अभियुक्त को इस अधिनियम के अधीन अपील बोर्ड के समक्ष रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन इस आधार पर कि रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य है, फाइल करने हेतु समर्थ बनाने के लिए कार्यवाही को उस तारीख से, जिसको अभियुक्त का अभिवाक् अभिलिखित किया जाता है, तीन मास के लिए स्थगित कर देगा;
(ख) यदि अभियुक्त न्यायालय के समक्ष यह साबित कर देता है कि उसने ऐसा आवेदन इस प्रकार सीमित समय के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर जिसे न्यायालय पर्याप्त कारण पर अनुज्ञात करे, कर दिया है, तो अभियोजन में आगे कार्यवाहियां तब तक के लिए रोक दी जाएंगी, जब तक परिशोधन के ऐसे आवेदन का निपटारा नहीं हो जाता;
(ग) यदि अभियुक्त, तीन मास की अवधि के भीतर या ऐसे बढ़ाए गए समय के भीतर, जो न्यायालय द्वारा अनुज्ञात किया जाए, रजिस्टर के परिशोधन के लिए अपील बोर्ड को आवेदन करने में असफल रहता है तो न्यायालय मामले में आगे कार्यवाही इस प्रकार करेगा मानो रजिस्ट्रीकरण विधिमान्य हो ।
(2) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी अपराध के लिए परिवाद संस्थित करने के पूर्व प्रश्नगत भौगोलिक उपदर्शन से संबंधित रजिस्टर के परिशोधन के लिए कोई आवेदन भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण की अविधिमान्यता के आधार पर अधिकरण को उचित रूप से किया गया है और उसके समक्ष लंबित है, वहां न्यायालय पूर्वोक्त आवेदन का निपटारा होने तक अभियोजन में आगे कार्यवाहियां रोक देगा और जहां तक परिवादी भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण का अवलंब लेता है, मजिस्ट्रेट अभियुक्त के विरुद्ध परिशोधन के लिए आवेदन के परिणाम के अनुरूप आरोप का अवधारण करेगा ।
49. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कंपनी है तो वह कंपनी और साथ ही प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:
परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
50. कतिपय अपराधों का संज्ञान और तलाशी तथा अभिग्रहण के लिए पुलिस अधिकारी-(1) कोई भी न्यायालय धारा 42 या धारा 43 या धारा 44 के अधीन किसी अपराध का संज्ञान रजिस्ट्रार या उसके द्वारा लिखित रूप में प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा लिखित परिवाद के बिना नहीं करेगा:
परंतु धारा 42 की उपधारा (1) के खंड (ख) के संबंध में, न्यायालय रजिस्ट्रार द्वारा जारी किए गए इस आशय के एक प्रमाणपत्र के आधार पर अपराध का संज्ञान करेगा कि रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन का किसी ऐसे माल की बाबत, जिसकी बाबत वह वस्तुतः रजिस्ट्रीकृत नहीं है, रजिस्ट्रीकृत के रूप में व्यपदेशन किया गया है ।
(2) महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
(3) धारा 39 या धारा 40 या धारा 41 के अधीन अपराध संज्ञेय होंगे ।
(4) कोई ऐसा पुलिस अधिकारी, जो पुलिस उपाधीक्षक या समतुल्य पंक्ति से नीचे का न हो, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उपधारा (3) में निर्दिष्ट अपराधों में से कोई अपराध किया गया है या किया जा रहा है या उसके किए जाने की संभावना है, वारंट के बिना तलाशी ले सकेगा और अपराध के किए जाने में अन्तर्वलित माल, डाई, ब्लाक, मशीन, प्लेट, अन्य उपकरणों या चीजों को, जहां कहीं पाई जाएं, अभिगृहीत कर सकेगा और इस प्रकार अभिगृहीत सभी वस्तुएं यथाशक्यशीघ्र, यथास्थिति, प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश की जाएंगी :
परंतु पुलिस अधिकारी, कोई तलाशी और अभिग्रहण करने के पूर्व, भौगोलिक उपदर्शन से संबंधित अपराध में अन्तर्वलित तथ्यों के बारे में रजिस्ट्रार की राय अभिप्राप्त करेगा और इस प्रकार अभिप्राप्त राय का पालन करेगा ।
(5) कोई ऐसा व्यक्ति, जिसका उपधारा (4) के अधीन अभिगृहीत किसी वस्तु में हित है, ऐसे अभिग्रहण के पंद्रह दिन के भीतर, यथास्थिति, प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट को ऐसी वस्तु उसे प्रत्यावर्तित किए जाने के लिए आवेदन करेगा और मजिस्ट्रेट जिन्हें न्यायालय आवेदक और अभियोजन को सुनने के पश्चात् आवेदन पर ऐसा आदेश करेगा जो वह ठीक समझे ।
51. अभियोजन की प्रतिरक्षा का खर्चा-इस अधिनियम के अधीन किसी अभियोजन में, न्यायालय अभियुक्त द्वारा परिवादी को या परिवादी द्वारा अभियुक्त को, ऐसे खर्चों का संदाय करने का आदेश दे सकेगा जिन्हें न्यायालय मामले की सभी परिस्थितियों और पक्षकारों के आचरण को ध्यान में रखते हुए युक्तियुक्त समझे और इस प्रकार दिए गए खर्चे ऐसे वसूलीय होंगे माने वे जुर्माने हों ।
52. अभियोजन की परिसीमा-इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए कोई अभियोजन आरोपित अपराध के किए जाने के ठीक तीन वर्ष या उसके अभियोजक को पता चलने के दो वर्ष के अवसान के पश्चात्, जो भी अवसान पहले हो, प्रारंभ नहीं किया जाएगा ।
53. अपराध किए जाने के बारे में इत्तिला-सरकार ऐसे अधिकारी को, जिसका कर्तव्य इस अध्याय के उपबंधों को प्रवृत्त कराने में भाग लेना है, किसी न्यायालय में यह करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा कि इस अधिनियम के विरुद्ध किसी अपराध के किए जाने के बारे में कोई इत्तिला उसे कहां से प्राप्त हुई ।
54. भारत के बाहर किए गए कार्यों के भारत में दुष्प्रेरण के लिए दंड-यदि कोई व्यक्ति, जो भारत के भीतर है, भारत के बाहर किसी कार्य के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, जो यदि भारत में किया जाता तो इस अधिनियम के अधीन अपराध होता तो उसका भारत में किसी ऐसे स्थान में, जिसमें उसे पाया जाए, ऐसे दुष्प्रेरण के लिए विचारण किया जा सकेगा और उसके लिए उसे ऐसे दंड से दंडित किया जाएगा जिसका वह भागी होता यदि उसने स्वयं उस स्थान में वह कार्य किया होता जिसका उसने दुष्प्रेरण किया है ।
अध्याय 9
प्रकीर्ण
55. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात की बाबत कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
56. कतिपय व्यक्तियों का लोक सेवक होना-इस अधिनियम के अधीन नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा ।
57. जहां भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता प्रश्नगत की जाती है वहां कार्यवाहियों का रोका जाना आदि-(1) जहां भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के किसी वाद में प्रतिवादी यह अभिवचन करता है कि वादी से संबंधित भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य है वहां वाद का विचारण करने वाला न्यायालय (जिसे इसमें इसके पश्चात् न्यायालय कहा गया है), -
(क) यदि वादी या प्रतिवादी के भौगोलिक उपदर्शन के संबंध में रजिस्टर के परिशोधन के लिए कोई कार्यवाहियां रजिस्ट्रार या अपील बोर्ड के समक्ष लंबित हैं तो ऐसी कार्यवाहियों के अन्तिम निपटारे तक वाद को रोक देगा;
(ख) यदि ऐसी कार्यावाहियां लंबित नहीं हैं और न्यायालय का समाधान हो जाता है कि वादी या प्रतिवादी से संबंधित भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण की अविधिमान्यता के बारे में अभिवचन प्रथमदृष्ट्या मान्य है तो, उसके बारे में विवाद्यक तैयार करेगा और विरचित करने की तारीख से तीन मास की अवधि के लिए वाद को स्थगित कर देगा जिससे संबद्ध पक्षकार रजिस्टर के परिशोधन के लिए अपील बोर्ड को आवेदन कर सके ।
(2) यदि संबद्ध पक्षकार न्यायालय में यह साबित कर देता है कि उसने उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट कोई ऐसा आवेदन उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे बढ़ाए गए समय के भीतर जो न्यायालय पर्याप्त हेतुक पर अनुज्ञात करे, किया है जब तक परिशोधन की कार्यवाहियों का अंतिम निपटारा न हो जाए तब तक वाद का विचारण रुका रहेगा ।
(3) यदि यथापूर्वोक्त कोई आवेदन इस प्रकार विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे बढा़ए गए समय के भीतर जो न्यायालय अनुज्ञात करे, नहीं किया गया है तो संबद्ध भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के बारे में विवाद्यक परित्यक्त समझा जाएगा और न्यायालय मामले में अन्य विवाद्यकों के संबंध में वाद में आगे कार्यवाही करेगा ।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट परिशोधन कार्यवाहियों में किया गया अंतिम आदेश पक्षकारों पर आबद्धकर होगा और न्यायालय, जहां तक वह भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के बारे में विवाद्यक से संबंधित है ऐसे आदेश के अनुरूप वाद का निपटारा करेगा ।
(5) इस धारा के अधीन भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के वाद के रोके जाने से, न्यायालय, वाद के रोके जाने की अवधि के दौरान कोई अन्तर्वर्ती आदेश (जिसके अन्तर्गत व्यादेश अनुदत्त करने वाला, लेखा रखे जाने के लिए निर्देश देने वाला, रिसीवर नियुक्त करने वाला या कोई संपत्ति कुर्की करने वाला आदेश भी है) करने से प्रवारित नहीं होगा ।
58. कतिपय मामलों में रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन अपील बोर्ड को किया जाएगा-(1) जहां किसी रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के किसी वाद में वादी से संबंधित भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता प्रतिवादी द्वारा प्रश्नगत की जाती है या जहां किसी ऐसे वाद में वादी प्रतिवादी से संबंधित भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता को प्रश्नगत करता है वहां सम्बद्ध भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के बारे में विवाद्यक रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन पर ही अवधारित किया जाएगा और धारा 27 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा आवेदन अपील बोर्ड को किया जाएगा न कि रजिस्ट्रार को ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन धारा 27 के अधीन रजिस्ट्रार को किया जाता है वहां रजिस्ट्रार, यदि वह ठीक समझे तो, कार्यवाहियों के किसी प्रक्रम पर आवेदन को अपील बोर्ड को, निर्दिष्ट कर सकेगा ।
59. उपदर्शित माल के विक्रय पर विवक्षित वारण्टी-जहां भौगोलिक उपदर्शन विक्रयार्थ या माल के विक्रय के लिए संविदा में के माल पर लगाया गया है वहां विक्रेता के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने वह वारण्टी दी है कि भौगोलिक उपदर्शन असली भौगोलिक उपदर्शन है और वह मिथ्या रूप से नहीं लगाया गया है, जब तक कि विक्रेता द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरित किसी लेख द्वारा इसके प्रतिकूल अभिव्यक्त न किया गया हो और क्रेता को संविदा पर माल के विक्रय के समय परिदत्त न किया गया हो और क्रेता द्वारा स्वीकार न किया गया हो ।
60. रजिस्ट्रार की शक्तियां-रजिस्ट्रार के समक्ष इस अधिनियम के अधीन सभी कार्यवाहियों में, -
(क) रजिस्ट्रार को साक्ष्य ग्रहण करने, शपथ दिलाने, साक्षियों को हाजिर कराने, दस्तावेजों के प्रकट और पेश किए जाने के लिए बाध्य करने और साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी;
(ख) रजिस्ट्रार धारा 87 के अधीन इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, खर्चों के बारे में ऐसे आदेश कर सकेगा जो वह उचित समझे और ऐसा कोई आदेश सिविल न्यायालय की डिक्री के रूप में निष्पादनीय होगा;
(ग) रजिस्ट्रार, विहित रीति में किए गए आवेदन पर, अपने विनिश्चय का पुनर्विलोकन कर सकेगा ।
61. रजिस्ट्रार द्वारा वैवेकिक शक्ति का प्रयोग-रजिस्ट्रार, धारा 64 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उसमें निहित किसी वैवेकिक या अन्य शक्ति का, उस शक्ति का प्रयोग करने के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के प्रतिकूल उस व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना (यदि उस व्यक्ति द्वारा विहित समय के भीतर ऐसी अपेक्षा की जाए) प्रयोग नहीं करेगा ।
62. रजिस्ट्रार के समक्ष साक्ष्य-इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रार के समक्ष किसी कार्यवाही में, साक्ष्य शपथ पत्र द्वारा दिया जाएगा:
परंतु यदि रजिस्ट्रार ठीक समझे तो वह शपथ पत्र द्वारा ऐसे साक्ष्य के बजाय या उसके अतिरिक्त मौखिक साक्ष्य ले सकेगा ।
63. कार्यवाही के पक्षकार की मृत्यु-यदि किसी ऐसे व्यक्ति की, जो इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही का पक्षकार है, (जो अपील बोर्ड या न्यायालय के समक्ष कार्यवाही नहीं है) कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो जाती है तो रजिस्ट्रार, अनुरोध पर, और मृत व्यक्ति के हित के हस्तांतरण के बारे में अपने समाधानपर्यन्त सबूत पर, कार्यवाही में उसके स्थान पर उसका हित उत्तराधिकारी प्रतिस्थापित कर सकेगा अथवा यदि रजिस्ट्रार की यह राय है कि मृत व्यक्ति के हित का प्रतिनिधित्व पर्याप्त रूप से उत्तरजीवी पक्षकारों द्वारा किया जाता है तो उसके हक उत्तराधिकारी के प्रतिस्थापन के बिना कार्यवाही को जारी रखने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा ।
64. समय का बढ़ाया जाना-(1) यदि रजिस्ट्रार का, विहित रीति से और विहित फीस के साथ उसको किए गए आवेदन पर यह समाधान हो जाता है कि कोई कार्य करने के लिए समय बढ़ाने के लिए (जो अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से उपबंधित समय नहीं है) पर्याप्त हेतुक है, चाहे इस प्रकार विनिर्दिष्ट समय समाप्त हुआ है या नहीं, तो वह, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो वह अधिरोपित करना ठीक समझे, समय को बढ़ा सकेगा और तद्नुसार पक्षकारों को सूचित कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) की किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि को वह रजिस्ट्रार से, समय बढ़ाए जाने के किसी आवेदन का निपटारा करने के पूर्व पक्षकारों को सुनने की अपेक्षा करती है और इस धारा के अधीन रजिस्ट्रार के किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी ।
65. परित्याग-जहां, रजिस्ट्रार की राय में, इस अधिनयम के अधीन फाइल किए गए किसी आवेदन पर आगे कार्यवाही करने में कोई आवेदक व्यतिक्रम करता है तो वहां रजिस्ट्रार, सूचना देकर, आवेदक से विनिर्दिष्ट समय के भीतर व्यतिक्रम का उपचार करने की अपेक्षा कर सकेगा और यदि ऐसी वांछा की जाए तो उसे सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् आवेदन को परित्यक्त किया गया मान सकेगा, जब तक कि सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर व्यतिक्रम का उपचार नहीं कर दिया जाता है ।
66. अतिलंघन आदि के लिए वाद जिला न्यायालय के समक्ष संस्थित किया जाएगा-(1) (क) रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के लिए; या
(ख) रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन में किसी अधिकार से संबंधित; या
(ग) प्रतिवादी द्वारा किसी ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के, जो वादी से संबंधित भौगोलिक उपदर्शन के, चाहे वह रजिस्ट्रीकृत हो या अरजिस्ट्रीकृत, तद्रूप या इतना समरूप है जिससे धोखा हो जाए, उपयोग से उद्भूत होने वाले के रूप में चला देने के लिए,
कोई वाद, वाद का विचारण करने की अधिकारिता रखने वाले जिला न्यायालय से अवर किसी न्यायालय में संस्थित नहीं किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के खंड (क) और खंड (ख) के प्रयोजन के लिए, अधिकारिता रखने वाले जिला न्यायालय" के अन्तर्गत, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा जिला न्यायालय भी होगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर वाद या अन्य कार्यवाही के संस्थित किए जाने के समय, वाद या कार्यवाही संस्थित करने वाला व्यक्ति या जहां एक से अधिक ऐसे व्यक्ति हैं वहां उनमें से कोई वस्तुतः और स्वेच्छया निवास करता है या कारबार करता है या अभिलाभ के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्य करता है ।
स्पष्टीकरण-उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, व्यक्ति" के अन्तर्गत रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और प्राधिकृत उपयोगकर्ता भी हैं ।
67. अतिलंघन के लिए या चला देने के लिए वाद में अनुतोष-(1) धारा 66 में निर्दिष्ट अतिलंघन या चला देने के लिए किसी वाद में न्यायालय जो अनुतोष अनुदत्त कर सकेगा उसके अंतर्गत (ऐसे निबंधनों, यदि कोई हों, के अधीन रहते हुए जिन्हें न्यायालय ठीक समझे) व्यादेश और अतिलंघनकारी लेबलों और उपदर्शनों को नष्ट करने या मिटाने के लिए उनके परिदान के आदेश सहित या उसके बिना वादी के विकल्प पर या तो नुकसानी या लाभ का लेखा भी है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन व्यादेश के आदेश के अन्तर्गत निम्नलिखित विषयों में से किसी के लिए एकपक्षीय व्यादेश या कोई अन्तर्वर्ती आदेश हो सकेगा, अर्थात्: -
(क) दस्तावेजों का पता लगाना;
(ख) अतिलंघनकारी माल, दस्तोवेजों या अन्य साक्ष्य का परिरक्षण, जो वाद की विषय-वस्तु से संबंधित हैं;
(ग) प्रतिवादी को अपनी आस्तियों का व्ययन या उसके साथ ऐसी रीति से व्यवहार करने से रोकना जो वादी की नुकसानी, खर्चों या अन्य धनीय उपचारों को वसूल करने की समर्थता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करें जो वादी को अन्तिम रूप से अधिनिर्णीत किया जाए ।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, न्यायालय किसी ऐसे मामलें में लाभ मद्दे (नाममात्र की नुकसानी से भिन्न) नुकसानी के रूप में अनुतोष अनुदत्त नहीं करेगा-
(क) जहां अतिलंघन के वाद में प्रतिवादी न्यायालय का समाधान कर देता है कि, -
(i) जब उसने वाद में परिवादित भौगोलिक उपदर्शन का, उपयोग किया था तब उसे ज्ञान नहीं था और उसके पास यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार नहीं था कि वादी का भौगोलिक उपदर्शन रजिस्टर में था; और
(ii) जब उसे भौगोलिक उपदर्शन में वादी के अधिकार की विधिमान्यता और प्रकृति का ज्ञान हुआ तब उसने उस माल के संबंध में, जिसकी बाबत भौगोलिक उपदर्शन रजिस्टर किया गया था, भौगोलिक उपदर्शन का उपयोग तत्काल बंद कर दिया था; या
(ख) जहां चला देने की वाद में प्रतिवादित न्यायालय का यह समाधान कर देता है कि, -
(i) जब उसने वाद में प्रतिवादी भौगोलिक उपदर्शन का, उपयोग प्रारंभ किया था तब उसे ज्ञान नहीं था और यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार नहीं था कि वादी से संबंधित भौगोलिक उपदर्शन उपयोग में है; और
(ii) जब उसे वादी से संबंधित भौगोलिक उपदर्शन की विद्यमानता और प्रकृति का ज्ञान हुआ तब उसने प्रतिवादित भौगोलिक उपदर्शन का, उपयोग तुरंत बंद कर दिया था ।
68. प्राधिकृत उपयोगकर्ता का कतिपय कार्यवाहियों में पक्षकार बनाया जाना-अध्याय 6 या धारा 31 के अधीन प्रत्येक कार्यवाही में, ऐसे भौगोलिक उपदर्शन जिससे वह कार्यवाही संबंधित है, के प्रत्येक प्राधिकृत उपयोगकर्ता को जो उक्त अध्याय या धारा के अधीन किसी कार्यवाही की बाबत स्वयं आवेदक नहीं है, कार्यवाही का पक्षकार बनाया जाएगा ।
(2) किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी उक्त कार्यवाही का इस प्रकार पक्षकार बनाया गया प्राधिकृत उपयोगकर्ता किसी खर्चे के लिए दायी नहीं होगा जब तक कि वह हाजिर न हो और कार्यवाही में भाग न ले ।
69. रजिस्टर में प्रविष्टियों आदि का और रजिस्ट्रार द्वारा की गई बातों का साक्ष्य-(1) रजिस्टर में किसी प्रविष्टि या धारा 78 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी दस्तावेज की प्रति जिसका रजिस्ट्रार द्वारा प्रमाणित और भौगोलिक उपदर्शन रजिस्टरी की मुद्रा से मुद्रांकित होना तात्पर्यित है, सभी न्यायालयों और सभी कार्यवाहियों में बिना किसी अतिरिक्त सबूत के या मूल पेश किए बिना साक्ष्य में ग्राह्य होगी ।
(2) किसी प्रविष्टि, विषय या बात की बाबत ऐसा प्रमाणपत्र जो रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षरित किया गया तात्पर्यित है और जिसे बनाने या करने के लिए वह इस अधिनियम या नियमों द्वारा प्राधिकृत है, उस प्रविष्टि के किए जाने या उसकी अंतर्वस्तु के या उस विषय या बात के किए जाने का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा ।
70. रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों का रजिस्टर आदि पेश करने के लिए बाध्य न होना-रजिस्ट्रार या भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री का कोई अधिकारी, किन्हीं विधिक कार्यवाहियों में जिसका वह पक्षकार नहीं है, रजिस्टर या अपनी अभिरक्षा में के किसी अन्य दस्तावेज को जिसकी अन्तर्वस्तु इस अधिनियम के अधीन जारी की गई प्रमाणित प्रति पेश करने से साबित की जा सकती हो, पेश करने या उसमें अभिलिखित विषयों के प्रमाणित करने के लिए साक्षी के रूप में उपसंजात होने के लिए तब तक बाध्य नहीं किया जाएगा जब तक कि उस विशेष कारण से न्यायालय वैसा आदेश न दे ।
71. माल पर उद्गम का उपदर्शन करने की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह अपेक्षा कर सकती है कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी वर्ग के माल पर जो भारत की सीमाओं के बाहर बनाया या उत्पादित किया जाता है और भारत में आयात किया जाता है या जो भारत की सीमाओं के भीतर बनाया या उत्पादित किया जाता है, ऐसे तारीख से जो अधिसूचना में नियत की जाए और जो जारी किए जाने से तीन मास से पूर्व की नहीं होगी, उस देश या स्थान का जहां उन्हें बनाया या उत्पादित किया गया था या विनिर्माता का अथवा उस व्यक्ति का जिसके लिए वह माल विनिर्मित किया गया है नाम और पते का उपदर्शन लगाया जाएगा ।
(2) अधिसूचना में वह रीति विनिर्दिष्ट की जाएगी जिसमें उक्त उपदर्शन लगाया जाएगा अर्थात् स्वयं माल पर या किसी अन्य रीति में और वे समय या अवसर विनिर्दिष्ट किए जा सकेंगे जिन पर उपदर्शन का होना अर्थात् केवल आयात के समय ही या विक्रय के समय पर भी, चाहे वह थोक में हो या खुदरा या दोनों में, आवश्यक होगा ।
(3) इस धारा के अधीन कोई अधिसूचना तब तक जारी नहीं की जाएगी जब तक कि संबद्ध माल के व्यवहारियों, विनिर्माताओं, उत्पादकों, या उपभोक्ताओं का सारवान् रीति से प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों या संगमों द्वारा उसके जारी करने के लिए आवेदन न किया गया हो या जब तक कि केन्द्रीय सरकार को ऐसी जांच करके जो केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे या उसके बिना अन्यथा विश्वास न हो कि अधिसूचना जारी करना लोकहित में आवश्यक है ।
(4) साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 23 के उपबंध इस धारा के अधीन अधिसूचना जारी किए जाने को उसी प्रकार लागू होंगे जैसे कि वे उस नियम या उपविधि को लागू होते हैं जिसका बनाना पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन है ।
(5) इस धारा के अधीन अधिसूचना भारत की सीमाओं के बाहर बनाए गए या उत्पादित और भारत में आयातित माल को लागू नहीं होगी यदि उस माल की बाबत सीमाशुल्क आयुक्त का आयात के समय यह समाधान हो जाए कि वे या तो भारत में यानांतरण के पश्चात् या भारत में होकर अभिवहन के पश्चात् अथवा अन्यथा निर्यात के लिए आशयित है ।
72. विधिमान्यता का प्रमाणपत्र-यदि अपील बोर्ड के समक्ष रजिस्टर के परिशोधन के लिए विधिक कार्यवाही में प्रतिवाद के पश्चात्, भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के प्रश्न पर विनिश्चय भौगोलिक उपदर्शन के, यथास्थिति, रजिस्ट्रीकृत स्वामी या प्राधिकृत उपोगकर्ता के पक्ष में दिया गया है तो अपील बोर्ड उस आशय का एक प्रमाणपत्र अनुदत्त कर सकता है और यदि ऐसा प्रमाणपत्र अनुदत्त किया जाता है तो किसी पश्चात्वर्ती विधिक कार्यवाही में जिसमें उक्त विधिमान्यता प्रश्नगत हो, यथास्थिति, उक्त भौगोलिक उपदर्शन या प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता की उसके पक्ष में पुष्टि करने वाले अंतिम आदेश या निर्णय अभिप्राप्त करके जब तक कि उक्त अंतिम आदेश या निर्णय में पर्याप्त कारणों से अन्यथा निदेशित न हो, विधि व्यवसायी और मुवक्किल के बीच के पूर्ण खर्चों, प्रभारों और व्ययों के लिए हकदार होगा ।
73. विधिक कार्यवाहियों की निराधार धमकियां-(1) जहां कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को ऐसे भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के लिए जो रजिस्ट्रीकृत है या जिसका रजिस्ट्रीकृत होना प्रथम उल्लिखित व्यक्ति द्वारा अभिकथित है, कार्य या कार्यवाही अथवा वैसी ही कोई अन्य कार्यवाही करने की परिपत्रों, विज्ञापनों के माध्यम से या अन्यथा धमकी देता है वहां व्यथित व्यक्ति, चाहे धमकी देने वाला व्यक्ति उक्त भौगोलिक उपदर्शन का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी कि या प्राधिकृत उपयोगकर्ता हो या नहीं, प्रथम उल्लिखित व्यक्ति के विरुद्ध एक वाद ला सकता हे और इस प्रभाव की घोषणा अभिप्राप्त कर सकेगा कि धमकियां न्यायोचित नहीं हैं और धमकियों के जारी रहने के विरुद्धऱ् एक व्यादेश प्राप्त कर सकता है और उसके द्वारा उठाई गई नुकसानी, यादि कोई हो, को वसूल कर सकता है, जब तक कि प्रथम उल्लिखित व्यक्ति न्यायालय का समाधान न कर दे कि भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्रीकृत है और जिन कार्यों की बाबत कार्यवाहियां चलाने की धमकी दी गई है, उनसे भौगोलिक उपदर्शन का अतिलंघन होता है या यदि वे किए जाएंगे तो होगा ।
(2) पूर्ववर्ती अंतिम उपधारा उस दशा में लागू नहीं होगी जिसमें भौगोलिक उपदर्शन या रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या उसका प्राधिकृत उपयोगकर्ता सम्यक् तत्परता से धमकी दिए गए व्यक्ति के विरुद्ध भौगोलिक उपदर्शन के अतिलंघन के लिए अभियोजन कार्यवाही प्रारंभ करता है और अभियोजित करता है ।
(3) इस धारा की किसी बात से कोई विधि व्यवसायी या रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन अभिकर्ता मुवक्किल की ओर से अपनी वृत्तिक हैसियत में किए गए किसी कार्य की बाबत इस धारा के अधीन कार्यवाही के लिए दायी नहीं होगा ।
(4) उपधारा (1) के अधीन कोई वाद जिला न्यायालय से अवर किसी न्यायालय में संस्थित नहीं किया जाएगा ।
74. तामील के लिए पता-आवेदन या विरोध की सूचना में कथित तामील के लिए पता, आवेदन या विरोध की सूचना के प्रयोजनार्थ, यथास्थिति, आवेदक या विरोधी का पता समझा जाएगा और उक्त आवेदन या विरोध की सूचना से संबंधित सभी दस्तावेजें, यथास्थिति, आवेदक या विरोधी के तामील के लिए पते पर छोड़कर या डाक से भेजकर तामील की जा सकेंगी ।
75. व्यापार की प्रथाओं आदि पर विचार किया जाना-भौगोलिक उपदर्शन से संबंधित किसी कार्यवाही में अधिकरण संबंधित व्यापार की प्रथाओं और अन्य व्यक्तियों द्वारा वैध रूप से उपयोग किए जाने वाले किसी सुसंगत भौगोलिक उपदर्शन को साक्ष्य में स्वीकार करेगा ।
76. अभिकर्ता-जहां इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन शपथ पत्र तैयार करने से भिन्न कोई कार्य किसी व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रार के समक्ष किया जाना अपेक्षित हो, तो वहां वह कार्य, इस निमित्त बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, उस व्यक्ति द्वारा स्वतः किए जाने की बजाय विहित रीति से सम्यक्तः प्राधिकृत ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जा सकेगा, जो-
(क) विधिक व्यवसायी है, या
(ख) विहित रीति से भौगोलिक उपदर्शन अभिकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति है, या
(ग) मालिक द्वारा अनन्यतः और नियमित रूप से नियोजित व्यक्ति है ।
77. अनुक्रमणिकाएं-रजिस्ट्रार के निदेशन और अधीक्षण के अधीन निम्नलिखित अनुक्रमणिकाएं रखी जाएंगी-
(क) रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शनों की अनुक्रमणिका;
(ख) उन भौगोलिक उपदर्शनों की अनुक्रमणिका जिनकी बाबत रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन लंबित हैं;
(ग) रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शनों के स्वत्वधारियों के नामों की अनुक्रमणिका; और
(घ) प्राधिकृत उपयोगकर्ताओं के नामों की अनुक्रमणिका ।
78. दस्तावेज जिनका सार्वजनिक निरीक्षण किया जा सकता है-(1) निम्निलिखित दस्तावेजों का, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री में सार्वजनिक निरीक्षण किया जा सकता है, अर्थात्: -
(क) ऐसे रजिस्टर और दस्तावेज जिस पर रजिस्टर की कोई प्रविष्टि आधारित है;
(ख) किसी भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के विरोध की प्रत्येक सूचना, रजिस्ट्रार के समक्ष परिशोधन के लिए आवेदन, उसका प्रतिकथन और रजिस्ट्रार के समक्ष किन्हीं कार्यवाहियों में पक्षकारों द्वारा फाइल किया गया कोई शपथ पत्र या दस्तावेज;
(ग) धारा 77 में वर्णित अनुक्रमणिकाएं; और
(घ) ऐसे अन्य दस्तावेज जो केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे:
परंतु जहां ऐसा रजिस्टर पूर्णतया या भागतः कंप्यूटर में रखा जाता है वहां इस धारा के अधीन ऐसे रजिस्टर का निरीक्षण, कंप्यूटर में इस प्रकार रखे गए रजिस्टर की सुसंगत प्रविष्टि के कंप्यूटर प्रिंट आउट का निरीक्षण करके किया जाएगा ।
(2) कोई भी व्यक्ति, रजिस्ट्रार को आवेदन करके और ऐसी फीस का संदाय करके जो विहित की जाए, रजिस्टर में की किसी प्रविष्टि या उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी दस्तावेज की प्रमाणित प्रति अभिप्राप्त कर सकता है ।
79. रजिस्ट्रार की रिपोर्टों का संसद् के समक्ष रखा जाना-केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन निष्पादन के संबंध में एक रिपोर्ट प्रतिवर्ष संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।
80. फीस और अधिभार-(1) इस अधिनियम के अधीन आवेदनों और रजिस्ट्रीकरण और अन्य बातों की बाबत ऐसी फीस और अधिभार का संदाय किया जाएगा जो केंद्रीय सरकार विहित करे ।
(2) जहां रजिस्ट्रार द्वारा कोई कार्य किए जाने की बाबत कोई फीस संदेय है, वहां रजिस्ट्रार, जब तक उक्त फीस संदत्त न की जाए, वह कार्य नहीं करेगा ।
(3) जहां भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री में किसी दस्तावेज के फाइल किए जाने की बाबत कोई फीस संदेय है, वहां जब तक फीस संदत्त न की जाए, दस्तावेज रजिस्ट्री में फाइल किया गया नहीं समझा जाएगा ।
81. अध्याय 8 के कतिपय विषयों की बाबत व्यावृत्ति-अध्याय 8 की किसी बात से-
(क) किसी व्यक्ति को किसी वाद या अन्य कार्यवाही से छूट नहीं मिलेगी जो इस अध्याय में किसी बात के न होने पर, उसके विरुद्ध लायी जा सकती है, या
(ख) यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि भारत में निवासी मालिक का कोई सेवक जिसने ऐसे मालिक के अनुदेशों के पालन में सद्भावपूर्वक कार्य किया है, और अभियोजक द्वारा या उसकी ओर से मांग किए जाने पर अपने मालिक के संबंध में और उन अनुदेशों के संबंध में जो उसे अपने मालिक से मिले थे, पूरी जानकारी दे दी है, जिससे वह किसी अभियोजन या दंड का भागी हो जाए ।
82. भौगोलिक उपदर्शन के हक के संबंध में घोषणा का रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 के अधीन रजिस्टर न किए जाने योग्य होना-रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) में किसी बात के होते हुए भी, रजिस्ट्रीकृत भौगोलिक उपदर्शन से भिन्न किसी भी भौगोलिक उपदर्शन पर किसी व्यक्ति के हक को घोषित करने वाली या घोषित करने के लिए तात्पर्यित कोई दस्तावेज उस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं की जाएगी ।
83. सरकार का आबद्ध होना-इस अधिनियम के उपबंध सरकार पर आबद्धकारी होंगे ।
84. अभिसमय देशों के नागरिकों से प्राप्त रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदनों के संबंध में विशेष उपबंध-(1) भारत के बाहर, किसी देश या किसी ऐसे देश, जो देशों के किसी समूह या देशों के संघ या अंतर-शासनात्मक संगठनों का सदस्य है, के साथ, जो भारत के नागरिक को वही विशेषाधिकार प्रदान करता है जो उसके अपने नागरिकों को प्रदान किए गए हैं, की गई संधि, अभिसमय या ठहराव को पूरा करने की दृष्टि से, केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे देश या देशों के समूह या देशों के संघ या अंतर-शासनात्मक संगठनों को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, यथास्थिति, अभिसमय देश या अभिसमय देशों के रूप में घोषित कर सकेगी ।
(2) इस अधिनियम या व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47) में अंतर्विष्ट कोई बात, उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित, यथास्थिति, किसी देश या किसी ऐसे देश, जो देशों के समूह या देशों के संघ का सदस्य है, या किसी अंतर-शासनात्मक संगठन से संबंधित भौगोलिक उपदर्शन के सतत और समरूप उपयोग को निवारित नहीं करेगी, जिसमें ऐसे देश के किसी नागरिक या अधिवासी द्वारा माल के संबंध में वाइन या स्पिरिट को परिलक्षित किया गया है, जिसने उस भौगोलिक उपदर्शन का, यथास्थिति, ऐसे माल या ऐसे माल से संबंधित किसी माल के संबंध में उस देश के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में,-
(क) या तो 15 अप्रैल, 1994 के पूर्ववर्ती कम से कम दस वर्षों के लिए, या
(ख) सद्भावपूर्वक खंड (क) में निर्दिष्ट तारीख से पूर्ववर्ती तारीख तक, सतत रीति में उपयोग किया है ।
85. व्यक्तिकार के संबंध में उपबंध-जहां केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट कोई देश या ऐसा देश जो देशों के समूह या देशों के संघ या अंतर-शासनात्मक संगठनों का सदस्य है, भारत के नागरिकों को भौगोलिक उपदर्शनों के रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण की बाबत वही अधिकार प्रदान नहीं करता है जो वह अपने राष्ट्रिकों को प्रदान करता है, वहां यथास्थिति, ऐसे देश या ऐसे देश का, जो देशों के समूह या देशों के संघ या अंतर-शासनात्मक संगठनों का सदस्य है, कोई राष्ट्रिक-
(क) भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने के लिए या स्वत्वधारी के रूप में उसके रजिस्ट्रीकृत होने के लिए;
(ख) भौगोलिक उपदर्शन के प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने के लिए या रजिस्ट्रीकृत होने के लिए,
हकदार नहीं होगा ।
86. कठिनाइयों को दूर करने की केन्द्रीय सरकार की शक्तियां-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो अधिनियम के उपबंधों से अंसगत न हों, जो कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों :
परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से पांच वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के यथाशक्यशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
87. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्टर में सम्मिलित किए जाने वाले विषय और उपधारा (2) के अधीन कंप्यूटर फ्लापियों या डिस्केटों में ऐसे रजिस्टर के रखे जाने के संबंध में अनुपालन किए जाने वाले रक्षोपाय;
(ख) धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन भाग क में भौगोलिक उपदर्शनों के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित विशिष्टियों को सम्मिलित किए जाने की रीति और उपधारा (3) के अधीन प्राधिकृत उपयोगकर्ताओं के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित विशिष्टियों को सम्मिलित किए जाने की रीति;
(ग) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन भौगोलिक उपदर्शनों के रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजन के लिए माल का वर्गीकरण और माल के वर्गीकरण की वर्णानुक्रमिक अनुक्रमणिका के प्रकाशन की रीति तथा निश्चित राज्यक्षेत्र या परिक्षेत्र या क्षेत्र;
(घ) वह प्ररूप और वह रीति, जिसमें भौगोलिक उपदर्शन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया जा सकेगा और वह फीस जो धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन के साथ दी जा सकेगी, माल के ऐसे उत्पादकों के कथन में दी जाने वाली विशिष्टियां, जो उपधारा (2) के खंड (च) के अधीन रजिस्ट्रीकरण में आरंभिक रूप से रजिस्ट्रीकृत किए जाने का प्रस्ताव करते हैं;
(ङ) धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन भौगोलिक उपदर्शन आदि के रजिस्ट्रीकरण के लिए स्वीकृत आवेदन के विज्ञापन के प्रकाशन की रीति और उपधारा (2) के अधीन आवेदन में की गई शुद्धियों और किए गए संशोधनों को अधिसूचित करने की रीति;
(च) वह रीति, जिसमें और वह फीस, जो किसी आवेदन के साथ दी जा सकेगी और धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन सूचना देने की रीति और उपधारा (2) के अधीन प्रतिकथन भेजने की रीति तथा उपधारा (4) के अधीन साक्ष्य प्रस्तुत करने की रीति तथा उसके लिए समय;
(छ) धारा 16 की उपधारा (2) के अधीन रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र का प्ररूप और उपधारा (3) के अधीन आवेदक को सूचना देने की रीति;
(ज) धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने की रीति और उपधारा (2) के अधीन ऐसे आवेदन के साथ कथन और दस्तावेज प्रस्तुत करने की रीति तथा वह फीस, जो ऐसे आवेदन के साथ दी जा सकेगी;
(झ) धारा 18 की उपधारा (3) के अधीन आवेदन करने की रीति, वह समय जिसमें ऐसा आवेदन किया जाएगा और प्रत्येक आवेदन के साथ संदेय फीस तथा वह समय, जिसके भीतर रजिस्ट्रार सूचना भेजेगा और उपधारा (4) के अधीन ऐसी सूचना की रीति तथा वह प्ररूप, जिसमें और वह फीस, जो उपधारा (5) के अधीन नवीकरण किए जाने के लिए आवेदन के साथ दी जा सकेगी;
(ञ) धारा 27 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन आवेदन करने की रीति, उपधारा (4) के अधीन सूचना देने की रीति तथा उपधारा (5) के अधीन परिशोधन की सूचना की तामील की रीति;
(ट) धारा 28 के अधीन शुद्धि आदि के लिए आवेदन करने की रीति;
(ठ) धारा 29 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने की रीति, उपधारा (1) के अधीन आवेदन का विज्ञापन करने की रीति, ऐसी सूचना का समय और रीति, जिस तक उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन आवेदन का विरोध किया जा सकेगा;
(ड) धारा 30 की उपधारा (2) के अधीन विज्ञापन की रीति;
(ढ) धारा 31 की उपधारा (3) के अधीन अपील करने का प्ररूप, सत्यापन की रीति और संदेय फीस;
(ण) वह प्ररूप, जिसमें धारा 34 की उपधारा (1) के अधीन परिशोधन के लिए आवेदन किया जाएगा;
(त) धारा 60 के खंड (ग) के अधीन पुनर्विलोकन के लिए आवेदन करने की रीति;
(थ) वह समय, जिसके भीतर धारा 61 के अधीन रजिस्ट्रार को उसकी वैवेकिक शक्ति का प्रयोग करने के लिए आवेदन किया जाएगा;
(द) धारा 64 के अधीन आवेदन करने की रीति और उसके लिए संदेय फीस;
(ध) धारा 76 के अधीन किसी व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्राधिकृत करने की रीति और भौगोलिक उपदर्शन अभिकर्ता के रजिस्ट्रीकरण की रीति;
(न) धारा 80 की उपधारा (1) के अधीन आवेदनों और रजिस्ट्रीकरण तथा अन्य विषयों के लिए संदेय फीस और अधिभार;
(प) ऐसा कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाना अपेक्षित हो या जो विहित किया जाए ।
(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । वह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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