वैध निविदा (अन्तर्लिखित नोट) अधिनियम, 1964
(1964 का अधिनियम संख्यांक 28)
[30 सितम्बर, 1964]
राजनीतिक स्वरूप के संदेशों से अन्तर्लिखित करेंसी तथा अन्य नोटों की
परक्राम्यता का निर्बन्धन करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पंद्रहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) यह अधिनियम वैध निविदा (अन्तर्लिखित नोट) अधिनियम, 1964 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
2. उन नोटों का जिन पर राजनीतिक स्वरूप के संदेश लिखे हुए हों वैध निविदा न होना-रिजर्व बैंक आफ इंडिया अधिनियम, 1934 (1934 का 2) या करंसी अध्यादेश, 1940 (1940 का अध्यादेश सं० 4) या किसी भी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, भारत सरकार का ऐसा करंसी नोट, रिजर्व बैंक आफ इंडिया द्वारा जारी किया गया ऐसा बैंक नोट, या करंसी अध्यादेश, 1940 के अधीन जारी किया गया भारत सरकार का एक रुपए का ऐसा नोट, जिस पर ऐसे बाहरी शब्द या दृश्यरूपण लिखित हों जो राजनीतिक स्वरूप का संदेश देने के लिए आशयित हों या देने योग्य हों, वैध निविदा न होगा ; और रिजर्व बैंक आफ इंडिया पर इस बात की कोई विधिक बाध्यता न होगी कि वह ऐसा कोई भी नोट प्राप्त करे, अथवा ऐसे किसी भी नोट के बदले में रुपए का सिक्का या अन्य सिक्का या करंसी नोट या बैंक नोट दे, अथवा ऐसे किसी भी नोट का मूल्य वापस करे :
परन्तु रिजर्व बैंक आफ इंडिया ऐसे किसी भी नोट का मूल्य पूरा या उसका कोई भाग रियायत के रूप में वापस कर सकेगा ।
3. निरसन और व्यावृत्तियां-(1) लीगल टैण्डर (इंसक्राइब्ड नोट्स) आर्डिनेंस, 1942 (1942 का अध्यादेश सं० 59) एतद्द्वारा निरस्त किया जाता है ।
(2) उक्त आर्डिनेंस के अधीन की गई कोई भी बात या कार्यवाही ऐसे निरसन के होते हुए भी वैसे ही इस अधिनियम के अधीन की गई समझी जाएगी, जैसे कि वह समझी जाती यदि यह अधिनियम उस दिन प्रवृत्त होता जिस दिन ऐसी बात या कार्यवाही की गई थी ।
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