झारखंड हाईकोर्ट ने बिना नोटिस गिरफ्तारी के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किए बिना किसी आरोपी को गिरफ्तार करना कानून के खिलाफ है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने कलीम अंसारी की अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए आगे की कार्यवाही शुरू करने की बात कही।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से कहा गया कि पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए सीधे गिरफ्तार कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) के विपरीत बताया गया।सीधे गिरफ्तार करने के बजाय नोटिस देना अनिवार्यहाईकोर्ट ने कहा कि इस फैसले के अनुसार, जिन अपराधों में अधिकतम सजा सात वर्ष तक है, उनमें पुलिस को आरोपी को सीधे गिरफ्तार करने के बजाय पहले नोटिस देना अनिवार्य है, ताकि वह जांच में सहयोग कर सके। यदि दो सप्ताह के भीतर नोटिस जारी नहीं किया जाता या नियमों का पालन नहीं होता, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और अवमानना का मामला चलाया जा सकता है। मामले में कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि अवमानना याचिका को आगे की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए।
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