सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या ट्रेनिंग के दौरान चोट या दिव्यांगता के कारण मेडिकल आधार पर बाहर किए गए कैडेट्स को पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो इन कैडेट्स को सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में आरक्षण जैसे लाभ मिल सकेंगे, जो उनके पुनर्वास में अहम साबित होंगे।
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसे अधिकतर कैडेट्स 20 से 30 वर्ष की आयु वर्ग में होते हैं और उन्हें आगे रोजगार की जरूरत पड़ती है। पीठ ने कहा कि ऐसे कैडेट्स को भी पूर्व सैनिक या पूर्व सैन्यकर्मी की श्रेणी में शामिल करने पर विचार होना चाहिए।
इस विषय पर व्यापक प्रतिक्रिया दी जाएगी- अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल
अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण से इस मुद्दे पर केंद्र से निर्देश लेकर जवाब देने को कहा। केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि इस विषय पर व्यापक प्रतिक्रिया दी जाएगी। मामले पर कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था।
कैडेट्स के पुनर्वास के मौके बढ़ेंगे
इस फैसले से प्रशिक्षण के दौरान घायल या दिव्यांग हुए सैन्य कैडेट्स को बड़ा लाभ मिल सकता है। यदि उन्हें पूर्व सैनिक का दर्जा मिलता है, तो नौकरियों में आरक्षण का फायदा मिलेगा, जिससे उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रक्षा सेवाओं से जुड़े डेस्क जॉब या पुनर्वास के अवसर भी मिल सकते हैं।
713 में 1 ही कैंडिडेट दे सकेगा RPSC पेपर
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को बड़ी राहत देते हुए अपने 2 अप्रैल के आदेश में संशोधन किया है। अदालत ने अब 713 अभ्यर्थियों की जगह केवल एक अभ्यर्थी को ही 5-6 अप्रैल को होने वाली सब-इंस्पेक्टर पुलिस/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा, 2025 में शामिल होने की अनुमति दी है।
कोर्ट ने शुक्रवार को यह संशोधित आदेश पारित किया। RPSC ने अदालत में आवेदन देकर कहा था कि पिछली सुनवाई के दौरान कुछ अहम तथ्य पीठ के सामने नहीं रखे गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को सुरज मल मीणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे और 712 अन्य अभ्यर्थियों को प्रोविजनल एडमिट कार्ड जारी करने का निर्देश दिया था।
साथ ही कहा था कि इन अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम तब तक घोषित नहीं किया जाएगा, जब तक राजस्थान हाई कोर्ट इस भर्ती परीक्षा से जुड़े दो लंबित मामलों पर फैसला नहीं सुना देता। अब केवल याचिकाकर्ता सुरज मल मीणा ही परीक्षा में बैठ सकेगा। अदालत ने साफ किया कि बाकी अभ्यर्थी, जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पक्षकार नहीं हैं, वे हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
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