आम आदमी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से सोमवार को बड़ी राहत मिली। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की खंडपीठ ने पंजाब सरकार द्वारा पूर्व में दिए गए आश्वासन को एक सप्ताह के लिए और बढ़ाते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक संदीप पाठक के खिलाफ अदालत की पूर्व अनुमति के बिना कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सुनवाई की शुरुआत में पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत से एक सप्ताह का समय मांगा ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि पाठक के खिलाफ किसी जिले में कोई एफआइआर दर्ज है या नहीं।

इससे पहले पिछली सुनवाई में भी हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से बार-बार पूछा था कि आखिर यह कैसे संभव है कि राज्य को यह तक स्पष्ट न हो कि संदीप पाठक के खिलाफ कोई एफआइआर दर्ज हुई है या नहीं। अदालत ने इस स्थिति को “समझ से परे” बताते हुए कड़ी टिप्पणी की थी।

क्या है मामला?

पाठक की ओर से अदालत को बताया गया कि समाचार रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके खिलाफ दो एफआइआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक से संपर्क करने के बावजूद यह नहीं बताया जा रहा कि कोई मामला दर्ज है या नहीं, यदि है तो कहां और किन धाराओं में।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यकता हुई तो याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत के कानूनी विकल्प का सहारा ले सकते हैं, लेकिन फिलहाल मुख्य प्रश्न एफआइआर संबंधी जानकारी प्राप्त करना है।

Source link

Picture Source :