हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एनआई एक्ट के एक मामले में स्पष्ट किया है कि चेक बाउंस मामलों में केवल इस आधार पर शिकायत रद्द नहीं की जा सकती कि बैंक ने चेक खाता फ्रीज होने के कारण वापस किया था, न कि अपर्याप्त धनराशि के कारण। न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने याचिका को यह कहते हुए खारिज किया कि चेक बाउंस चाहे अपर्याप्त फंड या खाता फ्रीज होने की वजह से हुआ हो,यह ट्रायल का विषय है। इसे केवल एक रिटर्न मेमो के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर तय नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए रिटर्न मेमो की सत्यता और परिस्थितियों को निचली अदालत में सबूतों के जरिए साबित करना होगा।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 528 बीएनएस के तहत अदालत साक्ष्यों का सरसरी तौर पर अवलोकन तो कर सकती है, लेकिन उनकी पूरी तरह से विवेचना ट्रायल कोर्ट का ही काम है।इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी, जहां दोनों पक्ष अपने साक्ष्य पेश करेंगे। अदालत ने यह आदेश अरविंद वर्मा बनाम ध्यान सिंह मामले में दिया है। याचिकाकर्ता ने ठियोग की अदालत में लंबित धारा 138 की कार्रवाई को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि उनकी ओर से जारी 10 लाख का चेक खाता फ्रीज होने की वजह से लौटाया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि चेक अपर्याप्त फंड की वजह से बाउंस नहीं हुआ, इसलिए उनके खिलाफ एन आई एक्ट के तहत कानूनी मामला नहीं बनता है।
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