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M/S Som Extracts Ltd vs The Commissioner Trade Tax U.P. ...
2019 Latest Caselaw 4533 ALL

Citation : 2019 Latest Caselaw 4533 ALL
Judgement Date : 15 May, 2019

Allahabad High Court
M/S Som Extracts Ltd vs The Commissioner Trade Tax U.P. ... on 15 May, 2019
Bench: Ashok Kumar

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

ए.एफ.आर.

कोर्ट नं0 - 5

केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 650 ऑफ 2008

अप्लीकाण्ट :- एम/एस सोम एक्सट्रैक्ट्स लिमिटेड

अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर ऑफ ट्रेड टैक्स यू0पी0 लखनऊ

काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- एन0 आर0 कुमार, विश्वजीत

काउंसिल फार अपोजिट पार्टी :- सी0 एस0 सी0

एवं

केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 651 ऑफ 2008

अप्लीकाण्ट :- एम/एस सोम एक्सट्रैक्ट्स लिमिटेड

अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर ऑफ ट्रेड टैक्स यू0पी0 लखनऊ

काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- एन0 आर0 कुमार, विश्वजीत

काउंसिल फार अपोजिट पार्टी :- सी0 एस0 सी0

एवं

केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 648 ऑफ 2008

अप्लीकाण्ट :- एम/एस सोम एक्सट्रैक्ट्स लिमिटेड

अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर ऑफ ट्रेड टैक्स यू0पी0 लखनऊ

काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- एन0 आर0 कुमार, विश्वजीत

काउंसिल फार अपोजिट पार्टी :- सी0 एस0 सी0

एवं

केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 1502 ऑफ 2008

अप्लीकाण्ट :- एम/एस सोम एक्सट्रैक्ट्स लिमिटेड थ्रू डाइरेक्टर एस0सी0 वार्ष्णेय

अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर ट्रेड टैक्स

काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- एन0 आर0 कुमार, विश्वजीत

काउंसिल फार अपोजिट पार्टी :- सी0 एस0 सी0

एवं

केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 1505 ऑफ 2008

अप्लीकाण्ट :- एम/एस सोम एक्सट्रैक्ट्स लिमिटेड थ्रू डाइरेक्टर एस0सी0 वार्ष्णेय

अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर ट्रेड टैक्स

काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- एन0 आर0 कुमार, विश्वजीत

काउंसिल फार अपोजिट पार्टी :- सी0 एस0 सी0

एवं

केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 1517 ऑफ 2008

अप्लीकाण्ट :- एम/एस सोम एक्सट्रैक्ट्स लिमिटेड थ्रू डाइरेक्टर एस0सी0 वार्ष्णेय

अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर ट्रेड टैक्स यू0पी0 लखनऊ

काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- एन0 आर0 कुमार, विश्वजीत

काउंसिल फार अपोजिट पार्टी :- सी0 एस0 सी0

एवं

केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 1524 ऑफ 2008

अप्लीकाण्ट :- एम/एस सोम एक्सट्रैक्ट्स लिमिटेड थ्रू एस0सी0 वार्ष्णेय

अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर ट्रेड टैक्स

काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- एन0 आर0 कुमार, विश्वजीत

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प्रस्तुत सात याचिकाएँ व्यापार कर अधिकरण के आदेश दिनांक 15.12.2007 द्वारा निर्णित हुई हैं अतएव सभी पुनर्निरीक्षण याचिकाएं एक साथ सुनी जा रही हैं तथा एक आदेश से निर्णित की जाती हैं।

याची के विद्वान अधिवक्ता श्री विश्वजीत एवं व्यापारकर आयुक्त के विद्वान स्थाई अधिवक्ता श्री बी0के0 पाण्डेय को सुना। संक्षेप में प्रस्तुत वाद के तथ्य यह हैं कि अपीलार्थी/करदाता रैक्टीफाईड एसेन्सियल ऑयल, स्पाईस ऑयल एवं एक्सट्रैक्ट्स, एरोमा कैमीकल्स एवं नैचुरल एक्सट्रैक्ट्स के निर्माण एवं बिक्री का व्यापार करता है। अपर निदेशक उद्योग बरेली मण्डल, बरेली द्वारा उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिनियम की धारा 4-ए के अन्तर्गत अपीलार्थी को पात्रता प्रमाण पत्र दिनांक 11.04.1997 को जारी किया गया। उक्त पात्रता प्रमाण पत्र के अन्तर्गत अपीलार्थी को दिनांक 04.10.1994 से दिनांक 03.10.2003 तक स्थायी पूँजी निवेश का 15% अर्थात रू0 76,90,468/- के कर की सीमा तक जो भी पहले पूर्ण हो, कर मुक्ति/रियायती दर की सुविधा अनुमन्य की गई।

अपीलार्थी द्वारा केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम के अन्तर्गत पँजीयन प्रमाण पत्र जारी करने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। उक्त प्रार्थना पत्र स्वीकृत कर पँजीयन प्रमाण पत्र दिनांक 18.03.1993 जिसकी वैधता दिनांक 05.02.1993 से स्वीकृत की गई।

उपरोक्त पँजीयन प्रमाण पत्र में पुनः बिक्रयार्थ एसेन्सियल ऑयल, मैन्था ऑयल, एरोमा कैमीकल्स का उल्लेख किया गया। कॉलम-ख उत्पादन या निर्माण के उपयोग के लिए प्राविधानित था जिसमें उन वस्तुओं का उल्लेख किया जाना अपेक्षित था जिन वस्तुओं को निर्माण में क्रय करने के लिए अनुमति प्रदान करने हेतु तथा पँजीयन प्रार्थना पत्र में लिखने हेतु सूची दाखिल की थी, परन्तु कॉलम खाली था।

निर्विवादित रूप से अपीलार्थी द्वारा विचाराधीन वर्षों में प्रान्त बाहर से प्लांट एवं मशीनरी एवं रॉ मैटेरियल तथा पैकिंग मैटेरियल की खरीद हेतु विभाग द्वारा जारी फार्म 'सी' का प्रयोग किया गया।

कर निर्धारण अधिकारी द्वारा अपीलार्थी के विरुद्ध केन्द्रीय बिक्री कर के अधिनियम धारा 10ए के अन्तर्गत अर्थदण्ड की कार्यवाही की गई जिसका कारण यह लिया गया कि जिन वस्तुओं की खरीद के लिए करदाता द्वारा फार्म सी जारी किये गए वे उस हेतु अधिकृत नहीं थें।

कर निर्धारण अधिकारी द्वारा वर्ष 1993-94 से वर्ष 1999-2000 के मध्य क्रमशः रुपये 1,40,000/-, रु0 4,500/-, रु0 1,30,000/-, रू0 45,000/-, रु0 2,90,000/- रु0 1,90,000/- तथा रु0 95,000/- अर्थदण्ड आरोपित किया गया।

अर्थदण्ड आदेश से क्षुब्ध होकर अपीलार्थी द्वारा प्रथम अपीलें प्रस्तुत की गई जिन्हें प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा दिनांक 17.05.2006 का अस्वीकार किया गया।

प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्णय दिनांक 17.05.2006 के विरुद्ध अपीलार्थी द्वारा व्यापार कर अधिकरण के सम्मुख वर्ष 1993-94 से वर्ष 1999-2000 के बीच की अवधि के लिए (7 वर्ष) द्वितीय अपीलें प्रस्तुत की गई।

विद्वान व्यापार कर अधिकरण द्वारा अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता तथा विभाग के अधिकृत प्रतिनिधि को विस्तृत रूप से सुना तथा कर निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित अर्थदण्ड तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा पारित आदेश दिनांक 17.05.2006 का परिशीलन किया।

विद्वान अधिकरण द्वारा रूपपत्र-ए का सूक्ष्मता से अवलोकन किया एवं उक्त रूपपत्र-ए के कॉलम 16(क) एवं 16(ख) का परिशीलन किया।

अधिकरण द्वारा परिक्षणोपरान्त एवं परिशीलनोपरान्त उपरोक्त कॉलम 16(क) व 16(ख) के परिशीलन के पश्चात अपना निम्नलिखित मत प्रदर्शित किया गया:-

"22. हमारे विचार से यह गलती सदाशयता की गलती है जिसके पीछे करदाता का दूषित इरादा प्रमाणित नहीं होता, क्योंकि जो वस्तुएँ खरीदी गयीं, उनका प्रयोग भी निर्माण में ही किया गया है, तब माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय कमिश्नर ट्रेडटैक्स बनाम किसान सहकारी चीनी मिल्स पीलीभीत (2005-एन0टी0एन0-वाल्यूम-28 पृष्ठ-188) में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुसार यह केवल तकनीकी गलती है और इस गलती पर धारा 10-ए के अन्तर्गत अर्थदण्ड की कार्यवाही नहीं होनी चाहिए।

23. अपीलार्थी के अधिकृत प्रतिनिधि श्री सिन्हा का यह भी कहना था कि उन्होंने निर्माण हेतु अपेक्षित रॉ मैटीरियल, पैकिंग मैटीरियल तथा मशीनरी की खरीद हेतु पंजीयन प्रमाण पत्र में अनुमति प्रदान करने के लिए सूचियाँ दी थीं, जो अभी भी पत्रावली पर उपलब्ध हैं और इन्हीं वस्तुओं के लिए सी-फार्म जारी किये गये। करदाता लगातार वर्ष 93-94 से 99-2000 तक प्रयोग किये गये सी-फार्मों का विवरण प्रस्तुत करते रहे और विभाग उनको मानता रहा और लगातार सी-फार्म देता रहा, तब माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय कमिश्नर ट्रेडटैक्स बनाम सर्वश्री एस0एस0 एण्ड टैक्नीकल (2005-एन0टी0एन0 (वाल्यूम-28)- पृष्ठ-195) में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुसार अर्थदण्ड की कार्यवाही नहीं की जा सकती। प्रश्नगत निर्णय में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निम्न व्यवस्था दे दी गयी है:-

" The Tribunal has set aside the order of penalty on the ground that the applicant has been purchasing the goods from time to time against Form-c with the knowledge of the department and no such objection was ever raised by the department earlier. It has been found that, there was no mala fide intention on the part of the dealer/opposite to purchase these goods on payment of concessional rate of tax against Form-C. The finding that there was no false representation is basically a finding of fact."

24. विचाराधीन मामले में भी करदाता सी-फार्म प्राप्त करके उनके प्रयोग का विवरण विभाग को प्रस्तुत करते रहे हैं और विभाग की जानकारी में बराबर रहा कि करदाता सी-फार्म प्राप्त कर रहे हैं और प्रयोग कर रहे हैं, तब हमारे विचार से इन मामलों में करदाता तथा विभाग दोनों से ही इस बिन्दु पर गलती अवश्य हुई कि करदाता द्वारा घोषित कर देने के बाद भी कि वे निर्माता हैं और निर्माण हेतु सूचियाँ भी दाखिल की गयीं हैं, पजींयन प्रमाण पत्र में उसी दशा में बिक्री के लिए एसेन्सियल ऑयल, मैन्था ऑयल, एरोमा कैमीकल्स का उल्लेख किया गया, जबकि इन वस्तुओं का करदाता निर्माण करते रहे हैं और इन्ही के आगे यह भी उल्लेख किया गया कि विवरण की लिस्ट नत्थी। इन तथ्यों से यह पुनः प्रमाणित होता है कि करदाता की ओर से कोई भी फाल्स रिप्रेजेन्टेशन नहीं किया गया, लेकिन इस मामले में तकनीकी कमियाँ अवश्य हैं।"

विद्वान अधिवक्ता श्री विश्वजीत द्वारा केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम की धारा 10-ए के परिशीलन हेतु निवेदन किया। केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम की धारा 10-ए निम्नवत है:-

"Section 10-A. Imposition of penalty in lieu of prosecution.-

(1) If any person purchasing goods is guilty of an offence under clause (b) or clause (c) or clause (d) of Section 10, the authority who granted to him or, as the case may be, is competent to grant to him a certificate or registration under this Act may, after giving him a reasonable opportunity of being heard, by order in writing, impose upon him by way of penalty a sum not exceeding one-and-a-half times the tax which would have been levied under sub-Section (2) of Section 8 in respect of the sale to him of the goods, if the sale had been a sale falling within that sub-Section:

Provided that no prosecution for an offence under Section 10 shall be instituted in respect of the same facts on which a penalty has been imposed under this Section.

(2) The penalty imposed upon any dealer under sub-Section (1) shall be collected by the Government of India in the manner provided in sub-Section (2) of Secton 9-

(a) in the case of an offence falling under clause (b) or clause (d) of Section 10, in the State in which the person purchasing the goods obtained the form prescribed for the purposes of [sub-section (4) of section 8] in connection with the purchase of such goods;

(b) in the case of an offence falling under clause (c) of section 10, in the State in which the person purchasing the goods should have registered himself if the offence had not been committed."

उपरोक्त धारा 10-ए द्वारा यह प्रस्तावित किया गया है कि यदि कोई व्यापारी किसी माल को क्रय करने के समय किसी तरह का आफेन्स (अपराध) करता है जो कि क्लाज (Clause) (b), or Clause (c) or Clause (d) धारा 10 केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम के अन्तर्गत गिल्टी (दोषी) पाया जाता है उस परिस्थिति में वह अर्थदण्ड देने के लिए बाध्य होगा।

क्लाज (Clause) (b) धारा 10 केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम निम्नवत है:-

Section 10. Penalties.-

If any person-

(b) being a registered dealer, falsely represents when purchasing any class of goods that goods of such class are covered by his certificate of registration; or"

उपरोक्त क्लाज (b) में मुख्यतः जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है वे है Falsely Represents अर्थात यदि कोई व्यापारी false representation करता है उसी अवस्था में वह अर्थदण्ड का भागी होगा।

प्रस्तुत वाद में व्यापार कर अधिकरण द्वारा स्वयं यह मत प्रकट किया गया है कि अपीलार्थी द्वारा यदि कोई गलती की है तो वह गलती सदाशयता वश है उसके पीछे अपीलार्थी की कोई दूषित भावना नहीं है।

उपरोक्त तथ्यों को दृष्टीगत रखते हुए मैं अधिकरण द्वारा पारित आदेश, जिसमें अधिकरण द्वारा अर्थदण्ड कम मात्रा में लगाया गया है को समाप्त करता हूँ तथा अधिकरण का आदेश दिनांक 15.12.2007 अपास्त करता हूँ

उपरोक्तानुसार प्रस्तुत पुनर्निरीक्षण याचिकाएँ स्वीकार की जाती हैं।

दिनाँक :- 15.5.2019

एस0 के0 श्रीवास्तव

 

 

 
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