सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किये जाने की तारीख पर मंगलवार को निर्णय करेगा. यह याचिका अध्यक्ष शैलजा विजयन की तरफ से दायर की गई है. इसके अलावा भी कई याचिकाएं दाखिल हैं. याचिका में कहा गया है कि जो महिलाएं आयु पर प्रतिबंध लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आईं थीं वे अयप्पा भक्त नहीं हैं. ये फैसला लाखों अयप्पा भक्तों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है. फैसले के जरिए लोगों की आवाज़ के लिए मेल नहीं खाया जा सकता.प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस.के. कौल की पीठ ने वकील मैथ्यूज जे नेदुम्परा की इस दलील पर विचार किया कि संवैधानिक पीठ के फैसले पर फिर से विचार की मांग कर रही उनकी याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए.
पीठ ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि 19 पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं. हम कल तक फैसला करेंगे.’’ नेदुम्परा राष्ट्रीय अयप्पा श्रद्धालु संगठन की ओर से दाखिल याचिका पर वकील के तौर पर पेश हुए.
पांच सदस्यों वाली संविधान पीठ ने 4:1 के अनुपात से फैसला सुनाया था कि सबरीमला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जाए. हालांकि जब से सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है तभी से श्रद्धालु कोर्ट के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.
बता दें कि मंदिर के कपाट खुलने के बाद से ही महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश भी की लेकिन उन्हें रोक लिया गया. रविवार को भी 6 महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। श्रद्धालुओं ने अयप्पा के मंत्रों का उच्चारण करते हुए तेलुगु बोलने वाली छह महिलाओं को मंदिर में पहुंचने से पहले ही रोक दिया. इससे पहले एक महिला पत्रकार ने भी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें भी श्रद्धालुओं ने नहीं जाने दिया था. भगवान अयप्पा के भक्त, मंदिर के पुजारी, कई संगठन और पार्टियां इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और रैलियां भी निकाल रहे हैं.
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