#MeToo मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में वकील मनोहर लाल शर्मा ने याचिका दाखिल की है. इस याचिका में कहा गया है कि #MeToo के जितने भी मामले आए हैं. उनमें CRPC की धारा 154 के तहत संज्ञान लेकर FIR दर्ज की जाए और मामले की जांच कर दोषी को सजा दी जाए. याचिका में यह भी मांग की गई है कि ऐसे मामलों में रेप या छेड़छाड़ जैसी धाराएं लगाई जाएं. इसी बीच उच्चतम न्यायालय ने मी टू अभियान के तहत लगे आरोपों पर तुरंत सुनवाई करने से इंकार कर दिया है. CJI रंजन गोगोई ने कहा कि जब मामला लिस्ट होगा तो आपको बता दिया जाएगा.

देशभर में मी टू अभियान की जो लहर शुरू हुई है, वह थमने का नाम नहीं ले रही है. हाल ही में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी और सांसद केसी वेणुगोपाल पर दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ है. दोनों नेताओं पर सोलर घोटाले की आरोपी सरिता एस. नायर ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था. केरल के पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा ने बताया कि नायर की शिकायत पर चांडी और वेणुगोपाल के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं.

गौरतलब है कि #MeToo कैंपेन के तहत महिलाएं अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामलों को साझा कर रही हैं. भारत में बॉलीवुड से जुड़े तमाम सेलिब्रिटी पर ऐसे आरोप तो लगे ही हैं. साथ ही कई पत्रकारों और नेताओं पर भी आरोप लगा है. पिछले दिनों #MeToo के तहत यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर को इस्तीफा देना पड़ा था.

मी टू अभियान की शुरुआत फिल्म जगत से हुई थी. सबसे पहले अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर पर 10 साल पहले यौन शोषण करने का आरोप लगाया था. इसके बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों के नाम सामने आए है. फिल्म जगत के बाद मीडिया, राजनेता और केंद्रीय मंत्री तक इस अभियान की आंच पहुंची.

वहीं मी टू के तहत सामने आ रहे यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए जजों और कानूनविदों की कमेटी नहीं बल्कि मंत्रियों का समूह (जीओएम) बनाई जाएगी. सरकार इसके बारे में जल्द ही अधिसूचना जारी कर सकती है. इसके अलावा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के स्तर पर एक आंतरिक कमेटी भी गठित की जाएगी. सूत्रों का कहना है कि जीओएम का गठन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में किया जाएगा. पहले ऐसे संकेत थे कि इसकी अध्यक्षता कोई वरिष्ठ महिला मंत्री करेगी.

 

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