देश के नए प्रधान न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई की एक अपील पर तत्काल अमल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज एनवी रमन ने कार्यदिवस (वर्किंग डेज़) 15 नवंबर से 18 नवंबर तक स्पेन में राष्ट्रमंडल न्यायिक शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित एक सम्मेलन का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया है.सीजेआई रंजन गोगोई ने पदभार संभालने के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से अपील की थी कि वो कार्यदिवस (वर्किंग डेज़) पर न्यायिक कार्यों को तरजीह दें. सीजेआई का कहना था कि न्यायिक कामों से इतर सेमिनार और ऐसे किसी इवेंट में जाने से वक्त की बर्बादी होती है. इसी अपील पर जस्टिस रमना ने आमंत्रण अस्वीकार कर दिया. न्यायमूर्ति गोगोई ने हाल ही में न्यायाधीशों से सेमिनार में भाग लेने के लिए कार्य दिवस पर न जाने को कहा था. न्यायमूर्ति रमना सुप्रीम कोर्ट के पहले जज हैं जिन्होंने CJI की सलाह पर सहमति जताई है.

सीजेआई गोगोई के इसी सुझाव पर अमल करते हुए जस्टिस रमन ने एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने से मना कर दिया. कॉमनवेल्थ ज्यूडिशियल एजुकेशन इंस्टीट्यूशन इस सेमिनार का आयोजन तब से कर रहा है, जब से सुप्रीम कोर्ट ने काम करना शुरू किया है.

दरअसल, देश की ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट को मिलाकर लगभग 3 करोड़ मामले लंबित हैं, सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई ने हाल ही में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर लंबित मामलों से निपटने के लिए यह सुझाव दिए थे. न्यायमूर्ति गोगोई ने जजों से अपील की थी कि जब तक कोई आपात स्थिति न हो छुट्टी न लें. उन्होंने लंबित मामलों को जल्द से जल्द निपटने के लिए 'नो लीव' प्लान बनाया है, जिसके तहत अदालतों के किसी भी जज को वर्किंग डेज पर छुट्टी नहीं मिलेगी.

बता दें कि 3 अक्टूबर को रंजन गोगोई ने सीजेआई के रूप में शपथ लेने के समय ही ये ऐलान कर दिया था कि वे सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़े मामलों को निपटाने के लिए जल्द ही कोई बड़ा कदम उठाएंगे.

 

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