उच्चतम न्यायालय ने आज केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को त्रिपुरा में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन को लेकर नोटिस जारी किया है। जिसमें अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए त्रिपुरा में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) के कार्यान्वयन की मांग की गई है।
उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने त्रिपुरा पीपुल्स फ्रंट (टीपीएफ) की ओर से दायर अर्जी पर विचार कर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है।दरअसल कोर्ट में त्रिपुरा में एनआरसी को लेकर याचिका दायर की गई थी। जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा एनआरसी के लागू करने की प्रक्रिया को लेकर नोटिस जारी किया है। जिसमें अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एनआरसी में त्रिपुरा के नागरिकों के पंजीकरण की मांग की गई है।
आपको बता दें कि यह याचिका त्रिपुरा पीपुल्स फ्रंट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। जिसमे कहा गया है कि त्रिपुरा में अवैध नागरिकों को लेकर एनआरसी का नवीनीकरण किया जाए। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनवच्छे 14, 15, 19, 21 के तहत नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं। लेकिन इसका प्रदेश में उल्लंघन हो रहा है। इसमे कहा गया है कि पिछले पांच दशक में बड़ी संख्या में बांग्लादेश से अवैध नागरिक प्रदेश में आए हैं। जिसकी वजह से लोगों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में कहा गया है कि त्रिपुरा में मुख्य रूप से आदिवासी रहते थे। लेकिन सीमा पार से आने वाले नागरिकों की वजह से यहां आदिवासियों की आबादी लगभग खत्म हो चुकी है।
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई को असम में एनआरसी लिस्ट को जारी किया गया था। जिसमें 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए। असम के लिए एनआरसी का पहला लिस्ट बीते 31 दिसंबर और एक जनवरी की रात प्रकाशित किया गया था।
20वीं सदी की शुरुआत से ही असम में बांग्लादेश से प्रवासियों के आने का सिलसिला चलता रहा है। असम देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां एनआरसी की व्यवस्था लागू की गई है। असम में पहला एनआरसी 1951 में तैयार किया गया था।
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