दिल्ली की निचली अदालत का फैसला पलटते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व टीवी एंकर सुहैब इलियासी को बरी कर दिया है। बता दें कि निचली अदालत ने सुहैब इलियासी को पत्नी की हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
गौरतलब है कि सुहैब इलियासी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाली थी। जिसे कोर्ट ने सुनने से इंकार कर दिया था और उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा था। इसके बाद सुहैब दिल्ली हाईकोर्ट गए और आज उन्हें वहां से बरी कर दिया गया। पूर्व टीवी एंकर सुहैब इलियासी अपनी पत्नी की हत्या के सिलसिले में मिली कैद की सजा को निलंबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था।
दरअसल, 11 जनवरी, 2000 को अंजू इलियासी की संदिग्ध परिस्थितयों में मौत हो गई थी। उनके शरीर पर चाकू से वार किए जाने के जख्म थे। शुरुआत में अंजू की मौत को खुदकुशी समझा गया।लेकिन कुछ महीने बाद अंजू की मां और बहन ने एसडीएम के समक्ष बयान दिया कि सुहैब ने अंजू को खुदकुशी के लिए मजबूर किया। इलियासी को शुरू में अपनी पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने (जो उसकी मौत का कारण बना) के आरोप में गिरफ्तार किया गया। हालांकि सुहैब ने इसका पुरजोर तरीके से खंडन किया था।पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तय नहीं हो पाया कि अंजू खुदकुशी की थी या उनकी हत्या की गई। इस मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब अंजू की मां ने मांग की कि सुहैब पर हत्या का मामला चलाया जाए।
निचली अदालत ने सुनाया था ये फैसला टीवी सीरियल प्रोड्यूसर सुहैब इलियासी को पत्नी अंजू की हत्या के लिए दिल्ली कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में बीते साल दिसंबर में 17 वर्ष बाद फैसला आया था। कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसके मल्होत्रा ने अपने फैसले में कहा कि सभी तथ्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष इलियासी पर आरोप साबित करने में सफल रहा है। अदालत ने इलियासी के उस तर्क को खारिज कर दिया था कि उन्हें फर्जी तरीके से फंसाया गया है। 12 अगस्त 2014 को हाईकोर्ट ने सुहैब के खिलाफ पत्नी अंजू की हत्या का केस चलाने का निर्देश दिया था।
जाने सुहैब इलियासी के बारे में….
सुहैब इलियासी की पढ़ाई जामिया मिल्लिया विश्वविद्याल से हुई है। यहां से उन्होंने 1989 में पत्राकारिता की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही सुहैब अंजू से मिले थे। अंजू भूमिहार परिवार से ताल्लुक रखती थीं। जामिया में मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर से पढ़ाई पूरी करने के बाद सुहैब लंदन चले गए जहां उन्होंने 1991 में टीवी एशिया में काम किया। जल्द ही वो इस चैनल के प्रोग्राम प्रोड्यूसर बन गए। इसी बीच 1993 में सुहैब और अंजू ने स्पेशल कोर्ट मैरिज एक्ट के तहत शादी रचा ली। 1995 में पत्नी अंजू के साथ मिलकर सुहैब ने क्राइम शो बनाया, मगर इंडिया में सभी चैनलों ने उसे दिखाने से इनकार कर दिया। नब्बे के दशक में कोई भी टीवी चैनल इस तरह के शो को दिखाने के लिए तैयार नहीं था। मगर बाद में काफी मान-मनौव्वल के बाद जी टीवी ने उनके शो को प्रसारित करने के लिए तैयार हो गया।
साल 2000 में 'इंडियाज मोस्ट वांटेड' शो को लेकर इलियासी का करियर पूरे शबाब पर था। यह टीवी शो भगोड़े अपराधियों पर आधारित था और यह देश का इस तरह का पहला टीवी शो था। गिरफ्तारी के बाद रिहा होने पर सुहैब ने इसी तरह का एक और शो शुरू किया, लेकिन इस बार यह शो ज्यादा नहीं चल सका। सुहैब इलियासी एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते रहे, जिन्होंने क्राइम पत्रकारिता को एक नये मुकाम पर पहुंचा दिया और खोजी पत्रकारिता का एक नया मानक स्थापित किया। एक समय था, जब इनके शो को देखकर अपराधी खौफ खाया करते थे।
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