जम्‍मू-कश्‍मीर के कठुआ में बच्ची से रेप और हत्या का मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की सीबीआई जांच कराने व ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस की जांच में कोई कमी थी तो इसे निचली अदालत में ही उठाया जाना चाहिए था. कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें जम्मू कश्मीर पुलिस की जांच में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता में प्रवेश का नाम भी हटा दिया है क्‍योंकि वो नाबालिग है.आरोपी ने की थी सीबीआई जांच की मांग कठुआ गैंगरेप के मामले में आरोपी प्रवेश कुमार ने याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी. आरोपी का कहना है कि उस पर जो कथित तौर पर आरोप लगाए गए हैं वह गलत है. कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए आरोपी ने कहा था कि वह न्याय के लिए मामले की सीबीआई जांच चाहता है. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को कठुआ से पंजाब के पठानकोट में ट्रांसफर किया था. इस मामले में 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान की कार्रवाई बंद कर दी थी और कहा था कि वो ट्रायल की निगरानी नहीं करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आरोपियों को कठुआ जेल से गुरदासपुर जेल ट्रांसफर किया जाए, क्योंकि ट्रायल के दौरान लाने ले जाने में वक्त लगता है. जम्मू-कश्मीर पुलिस मामले की सप्लीमेंट्री चार्जशीट 8 हफ्ते में दाखिल करेगी. ट्रायल जज कोर्ट रूम को ट्रायल इन कैमरा होगा, संबंधित वकील, आरोपी व सुरक्षाकर्मी व केस से जुड़े लोग ही कोर्टरूम में जाएंगे.

पंजाब सरकार ट्रायल जज और वकीलों को सुरक्षा प्रदान करेगी जबकि जम्मू कश्मीर सरकार आरोपियों को सुरक्षा देगी. आरोपी के घरवालों को गुरदासपुर में मिलने का खर्च जम्मू कश्मीर सरकार देगी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया था और कहा कि इसके बाद किसी को कोई दिक्कत है तो पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट जा सकते हैं.

 

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