महाराष्ट्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें कोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा से संबंध रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को रिहा करने का आदेश दिया था।1 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने गौतम नवलखा को नजरबंदी से रिहा करने का आदेश दिया था। और कहा कि उनकी हिरासत कानून के तहत 'असमर्थनीय' है।
राज्य सरकार इस मामले को सीजेआइ के सामने ले जाकर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक और गौतम नवलखा के हाउस अरेस्ट को बहाल करने के निर्देश की मांग करेगी।
महाराष्ट्र सरकार के वकील निशांत कटनेश्वर ने कहा, दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए बुधवार को याचिका दाखिल की गई है। महाराष्ट्र सरकार की मांग है कि उनकी याचिका पर आज ही सुनवाई की जाए। उम्मीद जताई जा रही है कि दोपहर 12 बजे के बाद इस पर सुनवाई हो सकती है।
याचिका में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाकर तुरंत हाउस अरेस्ट के आदेश बहाल करने की मांग है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला गलत है। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में ट्रांजिट रिमांड को चुनौती नहीं दी गई थी। ये हैवियस कॉरपस याचिका थी।
आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की एक पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें महाराष्ट्र पुलिस को नवलखा को पुणे ले जाने की इजाजत दी गई थी।
बता दें कि, दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर को कहा था कि नवलखा को 24 घंटे से अधिक समय से हिरासत में रखा गया, जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के हाल में दिए उस फैसले के बाद आया, जिसमें नवलखा और चार अन्य को कोर्ट ने उनकी नजरबंदी को और चार सप्ताह के लिए बढ़ा दिया था।
गौरतलब है कि नवलखा को प्रतिबंधित नक्सली समूह के साथ कथित रूप से संबंधों के लिए दिल्ली में 28 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। अन्य चार कार्यकर्ताओं को देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया था।
इसके बाद उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र पुलिस को नवलखा को दिल्ली से बाहर नहीं ले जाने का निर्देश दिया था और अगले आदेश तक उन्हें नजरबंद रखने को कहा था।
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