तीन माह के नवजात शिशु को लेकर गायब होनेवाले पिता पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि पिता ने यह हरकत मां को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने के इरादे से की है। पिता ने न केवल तीन माह के बच्चे को मां की देखभाल से वंचित किया है,बल्कि उसे सुरक्षा से भी महरूम किया है, जो बच्चे को सिर्फ उसकी मां ही दे सकती है। पिता की इस करतूत के चलते बच्चे मां को काफी परेशानी हुई है, इसलिए जुर्माने की रकम पिता को बच्चे की मां को सौंपे। कोर्ट ने पिता को बच्चे को बुधवार को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। बच्चे के गायब होने को लेकर परेशान मां ने कोर्ट में याचिका दायर की है। इससे पहले मां ने बच्चे के अपहरण को लेकर ठाणे के एक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।
कोर्ट में बच्चे को पेश करने के निर्देश
जस्टिस श्याम चांडक और जस्टिस फरहान दुबास की बेंच ने कहा कि पिता की हरकत के चलते मां को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। मौजूदा मामले में बच्चे की भलाई सर्वोपरि है। जो सिर्फ मां ही सुनिश्चित कर सकती है। सुनवाई के दौरान महिला की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि पिता बच्चे को लेकर हैदराबाद चला गया है। बच्चा अपनी देखभाल के लिए पूरी तरह से मां पर निर्भर है। मां से बच्चे को जबरन छीना गया है। इसके कारण मां को अदालत आने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 29 जून को पिता ने अदालत को आश्वासन दिया था कि वह 1 जून को बच्चे को अदालत में पेश करेगा। बच्चे को कोर्ट में पेश करने पर याचिकाकर्ता ने पिता को राहत देने का विरोध न करने की भी बाद कही थी। इसके बावजूद बच्चे को नहीं पेश किया गया है। वहीं सरकारी वकील तनवीर खान ने कहा कि ठाणे सेशन कोर्ट ने अग्रिम जमानत आवेदन का निपटारा कर दिया है, क्योंकि आरोपी के खिलाफ जमानती धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
सफाई नहीं दे पाए आरोपी पिता के वकील
केस के तथ्यों के मद्देनजर बेंच ने कहा कि पिता जानबूझकर बच्चे को अदालत में पेश करने से बच रहा है। पहले तो बच्चे को अदालत में पेश न कर पाने को लेकर आरोपी के वकील कोई सफाई नहीं दे पाए। आरोपी के रुख पर जब बेंच ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए तो उनके वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल बुधवार को बच्चे को अदालत में पेश करेगे। मगर आरोपी के आचरण से नाराज बेंच ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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