हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक आदेश में टिप्पणी की है कि नागरिकों के पास हुक्का बार चलाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी गतिविधियां ''वाणिज्य से बाहर/परे की चीज़ें'' के कानूनी सिद्धांत के अंतर्गत आती हैं।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह टिप्पणी होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार करने वाली कंपनी एम्पेरियो ग्रैंड प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उनके पास खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग से जारी खाद्य सेवाएं-रेस्टोरेंट चलाने का लाइसेंस है, लेकिन उन्हें परिसर में हुक्का बार संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
याची ने यह आशंका भी जताई कि पुलिस उन्हें और उनके ग्राहकों को रोक सकती है। इसलिए उन्होंने कोर्ट से राज्य सरकार को हुक्का बार चलाने की अनुमति देने का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था।
सुनवाई के दौरान जब अदालत ने पूछा कि क्या हुक्का बार के लिए कोई विशेष लाइसेंस लिया गया है, तो कोर्ट को बताया गया कि आज तक ऐसा कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। बेंच को यह भी जानकारी दी गई कि इस तरह के अन्य मामले पहले से ही कोर्ट में सुने जा रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कोई अंतरिम राहत न देते हुए याचिका को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
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