दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट की के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए जजों की एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए मंगलवार को ही सुनवाई की मांग की, जिसके बाद इसे दोपहर बाद जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष लिस्ट किया गया। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका पर 29 मई को सुनवाई करने का आदेश दिया।
जजों की ये कमेटी 2 सितंबर, 2025 को फुल कोर्ट की बैठक के बाद गठित की गई थी। इस कमेटी में जस्टिस वी कामेश्वर राव, जस्टिस एनडब्ल्यू सांब्रे, जस्टिस दिनेश मेहता, जस्टिस विवेक चौधरी, जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस नवीन चावला शामिल हैं। बता दें कि, ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने मई 2025 में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और लॉ कमीशन के सदस्यों को पत्र लिखकर दिल्ली की जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार दो करोड़ से बढ़ाकर बीस करोड़ करने की मांग की थी। उसके बाद ही हाईकोर्ट के जजों की कमेटी का गठन किया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इसी फैसले का विरोध कर रहा है।
बता दें कि, 25 मई को दिल्ली हाईकोर्ट बपार एसोसिएशन ने जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के प्रस्ताव के विरोध में न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि अगर जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाया गया तो ये हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के प्रैक्टिस और उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। इसका न्याय वितरण प्रणाली पर काफी गहरा असर होगा। इसके पहले दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकीलों ने इसी सवाल को लेकर 14 मई को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था। ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने दिल्ली की जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार दो करोड़ से बढ़ाकर बीस करोड़ करने की मांग की थी।
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