मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्विशा शर्मा मौत मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उनकी सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। बुधवार देर रात जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने भोपाल की ट्रायल कोर्ट द्वारा 15 मई को दिए गए अग्रिम जमानत आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि मामले में गंभीर आरोप, जांच में असहयोग और उपलब्ध साक्ष्यों की अनदेखी की गई थी। ट्विशा शर्मा12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। 15 मई को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर भोपाल की 10वीं अतिरिक्त सत्र अदालत ने गिरिबाला सिंह को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी थी, जबकि उनके बेटे और ट्विशा के पति समर्थ सिंह फिलहाल सीबीआई हिरासत में हैं। गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द होने से उनपर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरिबाला सिंह जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं कर रही थीं। अदालत ने कहा कि बयान दर्ज कराने और जांच में शामिल होने के लिए कई नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि नोटिस स्वीकार करने से भी इनकार किया गया और आखिरकार नोटिस व्हाट्सएप के जरिए भेजने पड़े। अदालत ने ट्विशा की गर्भावस्था और उसके समाप्त किए जाने के पहलू पर भी टिप्पणी की। आदेश में कहा गया कि मृतका गर्भवती हुई थी और दो महीने के भीतर गर्भपात कराया गया। शिकायतकर्ता पक्ष ने इसके लिए आरोपियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि गिरिबाला सिंह ने दावा किया कि ट्विशा खुद गर्भ समाप्त करना चाहती थीं। अदालत ने कहा कि व्हाट्सएप चैट से यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप केवल पति समर्थ सिंह के खिलाफ थे और ट्रायल कोर्ट ने इस पहलू पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
ट्रायल कोर्ट से असहमत हाईकोर्ट
दहेज लेनदेन के मुद्दे पर भी हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की टिप्पणी से असहमति जताई। अदालत ने कहा कि अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच ट्विशा के खाते में धनराशि ट्रांसफर की गई थी, लेकिन मौत के आसपास कोई बड़ी राशि नहीं भेजी गई। इसलिए केवल पैसे भेजे जाने के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि दहेज की मांग नहीं की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा की मौत फांसी से हुई, लेकिन शरीर पर छह अन्य चोटों के निशान भी पाए गए थे। इनमें चार चोटें बाएं हाथ पर, एक अंगुली पर और एक सिर पर थीं। अदालत ने कहा कि ये चोटें शव उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं आई थीं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
गिरिबाला सिंह पर गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने दलील दी कि गिरिबाला सिंह ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया और जांच से बचने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के एक घंटे के भीतर जमानत मिलना भी कई सवाल खड़े करता है। वहीं, ट्विशा के परिवार की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि केवल उम्र के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब आरोपी न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हो और फॉरेंसिक प्रक्रियाओं की समझ रखता हो।
बचाव पक्ष ने क्या दी दलील
दूसरी ओर बचाव पक्ष की वकील नित्या रामकृष्णन ने कहा कि ट्विशा की चैट में गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना के सीधे आरोप नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि परिवार ने ट्विशा को फांसी लगाने के बाद अस्पताल पहुंचाया था और उसके खाते में सात लाख रुपये से अधिक ट्रांसफर किए गए थे। इधर, बुधवार को एसआईटी ने आरोपी पति समर्थ सिंह को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से उसे 29 मई तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया गया। सीबीआई ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया में अनियमितताओं और अनधिकृत लोगों की मौजूदगी का हवाला देते हुए हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई।
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