हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के कार्यकारी मुख्य सचिव संजय गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग और संजय गुप्ता को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की डबल बेंच ने की।

अदालत ने तीनों पक्षों से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को तय की है। यह जनहित याचिका तिलक राज शर्मा द्वारा दायर की गई है, जिसमें IAS अधिकारी संजय गुप्ता को मुख्य सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। गौरतलब है कि संजय गुप्ता 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप

याचिकाकर्ता का आरोप है कि राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर 2025 को संजय गुप्ता को मुख्य सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा, जबकि उनके खिलाफ पहले से तीन एफआईआर दर्ज थीं। इन मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप भी शामिल बताए गए हैं।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित ई।पी। रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि मुख्य सचिव का पद अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को इस पद की जिम्मेदारी देना प्रशासनिक मर्यादाओं और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। अब इस हाईप्रोफाइल मामले पर अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जिस पर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक नजरें टिकी हुई हैं।

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