छह साल पहले जिस युवक के हाथों में भविष्य संवारने वाली किताबें, सुनहरे सपने होने चाहिए थे, वहां पुलिस की तफ्तीश ने हथकड़ियां पहना दीं। हम बात कर रहे हैं पिथौरागढ़ के छात्र नीरज की। नीरज के भाई ने हिन्दुस्तान से खास बातचीत में कहा कि रातों-रात समाज की नजरों में वह कातिल बन गया था।
"सोमवार को नैनीताल हाई कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में युवक को बरी करने का फैसला सुनाया। कानूनी तौर पर वह आजाद तो हो गया है, लेकिन सिस्टम से चली इस लंबी लड़ाई ने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी। सलाखों के पीछे बर्बाद हुई जवानी के साथ-साथ सामाजिक कलंक के कारण उसका पैतृक घर भी छूट गया।"
पढ़ाई के कमरे की जगह जेल की कालकोठरी ने ली
बातचीत में नीरज के बड़े भाई गोकुल ने बताया कि वर्ष 2020 में नीरज इंटर के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। वह पढ़ाई में होनहार था, लेकिन एक आपराधिक मामले में फंसने से उसका पूरा जीवन बिखर गया। हत्या का आरोप लगने के बाद वह रातों-रात समाज की नजरों में 'कातिल' बन गया और उसकी पढ़ाई के कमरे की जगह जेल की कालकोठरी ने ले ली।
सामाजिक बहिष्कार और पलायन
नीरज पर लगे हत्या के आरोपों का असर उसके पूरे परिवार पर पड़ा। समाज के दबाव या स्थिति की गंभीरता के कारण उन्हें अपना पुश्तैनी घर छोड़कर गांव की सीमा पर जाकर बसना पड़ा।
पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सजा निरस्त
नैनीताल हाईकोर्ट ने पिथौरागढ़ के बहुचर्चित हत्या मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी नीरज कुमार की आजीवन कारावास की सजा को निरस्त कर दिया है। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति रविंद्र मैथाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने यह निर्णय दिया। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त के खिलाफ सजा को बरकरार रखने के लिए रिकॉर्ड में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में यदि उसके खिलाफ कोई अन्य मामला लंबित नहीं है, तो उसे तीन सप्ताह के भीतर रिहा किया जाए।
ये था मामला
मामले के अनुसार, पिथौरागढ़ के जिला सत्र न्यायाधीश ने 9 अगस्त 2023 को ग्राम मच्छीखेत, तहसील थल निवासी आरोपी नीरज कुमार को हत्या के अपराध में उम्र कैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने जेल से ही हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी की ओर से पैरवी के लिए अधिवक्ता डीसीएस रावत को न्यायमित्र नियुक्त किया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है ।
19 सितंबर 2020 की है घटना
मृतक पुष्कर के चाचा गंगा सिंह ने थल थाने में केस कराया था। उन्होंने बताया कि रात करीब साढ़े नौ बजे गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बाहर निकलने पर पुष्कर जमीन पर घायल अवस्था में पड़ा था और उसकी पीठ पर गोली के निशान थे। आरोप था कि पुरानी रंजिश के चलते नीरज कुमार ने वारदात को अंजाम दिया। हाईकोर्ट के फैसले के आरोपी की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
चार्जशीट पर सवाल
परिवार का मानना है कि पुलिस ने जो चार्जशीट तैयार की थी, उसका कोई ठोस आधार नहीं था और वे आज भी उस 'सच' की तलाश में हैं जो नीरज ने अब तक छुपा रखा है।यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो कानूनी तौर पर तो मुक्त हो गया, लेकिन सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर उसका परिवार अब भी उस घटना की कीमत चुका रहा है।
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