पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस कर्मियों के लिए न्यू चंडीगढ़ में आवासीय परियोजना के नाम पर सामने आए कथित 146 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन, पंजाब सरकार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तथा कई सेवारत और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

जस्टिस जगमोहन बंसल की अदालत ने पंजाब पुलिस प्राइमरी कंज्यूमर कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त निर्धारित की। 

याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2009 में मुख्य रूप से पंजाब पुलिस के निचले रैंक के कर्मचारियों को सस्ते आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गठित इस सोसाइटी के माध्यम से हजारों पुलिसकर्मियों की जीवन भर की कमाई और बैंक ऋण की राशि को सुनियोजित तरीके से दांव पर लगाया गया।

60 एकड़ भूमि का फर्जी हस्तांतरण

याचिकाकर्ता के अनुसार, कई वरिष्ठ सेवारत और पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने कथित रूप से निजी बिल्डर के साथ मिलीभगत कर न केवल 146 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के गबन को अंजाम दिया, बल्कि न्यू चंडीगढ़ में सोसाइटी की लगभग 60 एकड़ भूमि के फर्जी हस्तांतरण की भी साजिश रची।

याचिका में दावा किया गया कि वर्ष 2010 में एक सेवानिवृत्त डीजीपी की अध्यक्षता में बिना किसी पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के बिल्डर की नियुक्ति कर दी गई और बाद में 100 एकड़ टाउनशिप परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन किया गया। सदस्यों से पहले प्रोजेक्ट के लिए 111 करोड़ रुपये से अधिक और दूसरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 35 करोड़ रुपये एकत्र किए गए, जबकि दूसरे प्रोजेक्ट हेतु भूमि खरीदे जाने तक के प्रमाण नहीं मिले।

बिल्डर के पक्ष में स्थानांतरित करने के आरोप

मामले में भूमि अभिलेखों में कथित हेराफेरी, बिक्री विलेखों में खसरा नंबरों की पुनरावृत्ति कर भूमि क्षेत्रफल बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने तथा सोसाइटी के नाम खरीदी गई जमीन को बाद में बिल्डर के पक्ष में स्थानांतरित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों ने अपनी प्रशासनिक स्थिति का उपयोग कर जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अगस्त 2023 में पंजाब पुलिस को विस्तृत शिकायत देने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई। वहीं, वर्ष 2025 की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में तत्कालीन प्रबंध समिति के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया। सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन, पंजाब सरकार और सीबीआई की ओर से नोटिस स्वीकार कर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया।

Source link

Picture Source :