कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार (27 अप्रैल) को राज्य पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि गंभीर अपराधों से निपटने के बजाय पुलिस तंत्र छोटी-मोटी बातों के पीछे भागने में मशगूल है। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने इस बात पर आपत्ति जताई कि पुलिस ने दो साल पहले गायब हुई दो गायों के मामले में FIR दर्ज कर ली थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस ने दो साल पहले गायब हुई दो गायों के लिए तो मामला दर्ज कर लिया, लेकिन कई गंभीर अपराधों की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आम लोगों को पुलिस स्टेशन के सौ चक्कर काटने पड़ते हैं।

"एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नागप्रसन्ना ने राज्य के वकील से कहा, "गायों की जांच छोड़िए और असली अपराधों के पीछे जाइए। आपने यह FIR क्यों दर्ज की? इस आरोप पर कि दो साल पहले दो गायें गायब हो गई थीं, आपने FIR दर्ज कर ली।" जज ने आगे कहा कि जब ज़्यादा गंभीर अपराधों की शिकायतें दर्ज करने की बात आती है, तो पुलिस ऐसी फुर्ती क्यों नहीं दिखाती। इसके बाद जज ने टिप्पणी की, "असली अपराध, आप दर्ज करते नहीं। उन्हें (शिकायतकर्ताओं को) असली अपराध दर्ज करवाने के लिए पुलिस थाने के दरवाज़े पर 100 बार दस्तक देनी पड़ती है। दो साल पहले दो गायें गायब हुईं और FIR दर्ज हो गई।""

दरसल, हाई कोर्ट एक परिवार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने पिछले महीने अपने खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला 2024 में गायब हुई दो गायों से जुड़ा है। कोर्ट ने आज यह टिप्पणी की कि पुलिस द्वारा दर्ज किया गया यह मामला कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस जांच पर रोक लगा दी।

कोर्ट ने कहा, "2024 में दो गायें गायब होती हैं और पूरा परिवार 2026 में दर्ज किए गए एक आपराधिक मामले के जाल में फंस जाता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि गायों का पता नहीं चल पाया। अगर इसकी इजाज़त दी गई, तो यह साफ तौर पर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। इसलिए, आगे की जांच पर रोक लगाने का एक अंतरिम आदेश जारी किया जाता है।" यह टिप्पणी उसी बेंच की कुछ दिन पहले की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा था कि कर्नाटक पुलिस असली अपराधों की जांच करने के बजाय लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों की जांच करने पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

यह टिप्पणी तब की गई थी, जब कोर्ट बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने फिल्म 'कांतारा' में चामुंडी दैव के चित्रण की नकल करने के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी। जब एक वकील ने अदालत से कहा कि कर्नाटक पुलिस इतनी सक्षम है कि वह सिंह को चामुंडी मंदिर की यात्रा के दौरान (अपने बयानों पर पछतावा करने हेतु) किसी भी संभावित खतरे से बचा सकती है, तो जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा था, "इतनी सक्षम कि ​​वे लिव-इन रिलेशनशिप और जोड़ों के पीछे पड़ जाते हैं। असली अपराधों की तो जांच ही नहीं की जा रही है। वे तो बस (धारा) 69 (BNS) के मामलों को ही देख रहे हैं।"

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