पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट कर दिया कि है विदेश यात्रा करना एक मूल मानव अधिकार है। अदालत ने इस सिद्धांत को दोहराते हुए याची को यूरोप यात्रा की अनुमति प्रदान कर दी।
मामला एक 61 वर्षीय महिला पूर्व पुलिसकर्मी से जुड़ा है, जो एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है। उसने अदालत से स्पेन, स्विट्जरलैंड और चेक गणराज्य की यात्रा के लिए अनुमति मांगी थी। यह यात्रा 10 अप्रैल से 10 मई तक एक महीने के लिए प्रस्तावित थी।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमन चौधरी ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार एक महत्वपूर्ण मूल मानव अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस अनुमति का विरोध किया था। हालांकि, उसने यह भी कहा कि यदि अनुमति दी जाए तो कड़ी शर्तें लगाई जाएं।
हाईकोर्ट ने यात्रा की अनुमति देते हुए कई सख्त शर्तें लगाई कि याची को 30 लाख रुपये की जमानत (परिवार के सदस्य की गारंटी सहित) देनी होगी। साथ ही 10 लाख रुपये की बैंक गारंटी व संपत्ति के दस्तावेज जमा करने होंगे। यात्रा केवल निर्धारित देशों (स्पेन, स्विट्जरलैंड, चेक गणराज्य) तक सीमित रहेगी और इस दौरान याची को मोबाइल नंबर और ईमेल सक्रिय रखनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया किया कि याची को समय पर भारत लौटना अनिवार्य होगा, अन्यथा गारंटी जब्त हो जाएगी।
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