हाईकोर्ट ने उच्च न्यायालय परिसर की सुरक्षा और पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने की खातिर वकीलों के वाहनों के प्रवेश के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ़्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) पास जारी करने पर विचार करने का आदेश दिया है। साथ ही, साइकिल से आने वाले अधिवक्ताओं और मुंशियों के लिए भी समुचित पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा हैं।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता गिरधारी लाल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

याचिका में हाईकोर्ट परिसर के बेसमेंट पार्किंग में स्लॉट निर्धारण, एक से अधिक वाहन पास जारी करने की जांच और सीसीटीवी कैमरों के संचालन जैसे मुद्दे उठाए गए थे। याची का कहना था कि परिसर में पहले से पर्याप्त पार्किंग सुविधा है, जिसे प्रशासनिक समिति नियंत्रित करता है, लेकिन व्यवस्था को और बेहतर करने की आवश्यकता है।

सुनवाई के दौरान याची ने एक अतिरिक्त प्रार्थना पत्र देकर गेट नंबर 4 पर आरएफआईडी प्रणाली लागू करने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट प्रशासन ने बताया कि गेट नंबर 3 पर यह प्रणाली पहले से सफलतापूर्वक संचालित है और इसे गेट नंबर 4 व 5 पर भी बिना अतिरिक्त लागत के लागू किया जा सकता है।

प्रशासन ने यह भी जानकारी दी कि वाहनों के पास की क्लोनिंग के प्रयास सामने आ चुके हैं, जिससे जालसाजी की आशंका बनी रहती है। ऐसे में आरएफआईडी प्रणाली इस तरह की धोखाधड़ी रोकने और सुरक्षा बढ़ाने में प्रभावी साबित हो सकती है। कोर्ट ने भी इस तकनीक को उपयोगी मानते हुए सभी आवश्यक गेटों पर इसे लागू करने के संबंध में शीघ्र निर्णय लेने के निर्देश दिए।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अधिवक्ता और मुंशी साइकिल से आते हैं, लेकिन उनके लिए परिसर में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है। इस पर खंडपीठ ने प्रशासन से इस विषय में भी उचित निर्णय लेने की अपेक्षा की है।

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