उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 6 साल की मासूम से हैवानियत मामले में फास्‍ट ट्रैक कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल करने के सिर्फ 17 दिन के भीतर फैसला सुना दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी युवक को जहां उम्रकैद की सजा सुनाई है, वहीं साक्ष्य छुपाने वाली मां को भी 4 साल की सजा दी है। विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार यादव ने ये सजा सुनाई है।

ड्रोन कैमरे से हुई आरोपी की पहचान

परिजनों ने बच्ची की तलाश शुरू की और शादी में आए ड्रोन कैमरे की मदद से आरोपी की पहचान हुई तो सभी दंग रह गए। बच्ची के बेहोशी की हालत में मिलने पर परिजनों ने पीपीगंज पुलिस को सूचना दी और बच्ची को सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। इस मामले में आरोपित अशोक की मां ने बेटे को बचाने के लिए खून से सना उसका कपड़ा धुला था और उसे भूसे वाले घर में छुपा दिया था।

17 दिन पहले ही दाखिल हुई थी चार्जशीट

मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद 17 दिन पहले ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी और मंगलवार को फैसला आ गया। इस फैसले के बाद आमजन का मानना है कि हर आपराधिक मामले में ऐसे ही फैसला आता रहे तो अपराधियों की कमर टूट जाएगी और वह कोई भी अपराध करने के पहले सौ बार सोचेंगे।

आरोपियों पर जुर्माना भी लगा

अदालत ने आरोपी युवक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अर्थदंड न देने की स्थिति में अतिरिक्त 6 माह का कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा अशोक निषाद की मां को भी धारा 238 ए के तहत 4 साल की कठोर कारावास और 5 हजार के जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है। जुर्माना न देने की स्थिति में 2 माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।

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