"कोलकाता हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि किसी शख्स के अवैध रिश्ते से संतान उत्पन्न हुई है तो उसका भी पेंशन पर हक है। एक रेलवे कर्मचारी से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कोलकाता हाई कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाया है। यह फैसला भविष्य में आने वाले इस प्रकार के मामलों में एक नजीर हो सकता है। यह मामला पूर्वी रेलवे में कार्यरत एक गेटमैन से जुड़ा था। इस केस में अदालत ने शख्स की पहली पत्नी और दूसरी शादी से पैदा 15 साल की बेटी का नाम सर्विस और पेंशन बुक में शामिल करने का आदेश दिया है। मामला यह था कि कर्मचारी ने अपनी पहली पत्नी को छोड़ दिया था और बिना तलाक के ही दूसरा विवाह कर लिया था।"

"पहली पत्नी का कहना था कि उसका और उसके बेटे का नाम सर्विस बुक से हटा दिया गया है। ऐसा करना गलत है। शख्स की 50 वर्षीय पहली पत्नी का कहना था कि मुझे मिर्गी के दौरे आते हैं और इस कारण पति ने मुझे छोड़ दिया। मुझे कोई जानकारी दिए बिना ही उन्होंने दूसरी महिला से विवाह रचा लिया। यही नहीं उन्होंने 31 दिसंबर, 2025 को रिटायरमेंट के बाद सर्विस और पेंशन बुक मेरे और बेटे के स्थान पर दूसरी पत्नी एवं उससे उत्पन्न पुत्री का नाम दर्ज करा दिया। महिला ने कहा कि हमारे बीच मेंटनेंस का केस 2012 से पहले चल रहा था। इस मामले में आदेश दिया गया था कि मुझे हर महीने 1000 रुपय मिलेंगे। ऐसा प्रावधान बेटे की परवरिश के लिए किया गया था।"

"पहली पत्नी ने कहा कि इसके बाद भी हम लोगों का तलाक नहीं हुआ था। हम अलग भले ही रह रहे थे। महिला ने कहा कि 2012 के बाद से पति ने मुझे कोई गुजारा भत्ता नहीं दिया। मैंने बड़ी मुश्किल से जीवन काटा है। इसी को लेकर महिला पूर्व रेलवे के समक्ष ज्ञापन दिया था, जिसने अपने आदेश में कहा था, 'हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत दूसरा विवाह गलत है। कानूनी शादी वाली पहली पत्नी और दूसरी शादी से पैदा बेटी को पेंशन पर आधे-आधे का हक मिलेगा।' यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ और शख्स ने वकील के माध्यम से हाई कोर्ट का रुख किया।"

जज बोले- जब तलाक ही नहीं तो फिर पहली पत्नी ही हकदार

"यहां उसके वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल को उसकी पहली पत्नी ने खुद अलग कर दिया था। वही चाहती थी कि दस्तावेजों में दूसरी पत्नी और उसकी बेटी का नाम रहे। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि तलाक के कोई दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं। ऐसी स्थिति में पहली पत्नी ही कानूनी हकदार है। हालांकि दूसरी शादी वैध नहीं है, लेकिन उससे पैदा संतान का हक है। इसलिए दूसरी पत्नी की बेटी का नाम भी शामिल रहने दिया जाए।"

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