" हजारीबाग में नाबालिग से दुष्कर्म और फिर हत्या मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को संज्ञान लिया। साथ ही राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और हजारीबाग एसपी को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने शपथपत्र के जरिए जवाब मांगते हुए पीड़िता के परिवार को पर्याप्त सुरक्षा देने का भी निर्देश दिया। साथ ही यह मामला आगे की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के पास स्थानांतरित कर दिया।"
छह दिन बीतने के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं
"हाईकोर्ट के अधिवक्ता हेमंत शिकरवार ने मामले को कोर्ट के समक्ष उठाया। साथ ही इसे काफी संवेदनशील बताते हुए निष्पक्ष जांच का आग्रह किया। इससे पहले डीजीपी व हजारीबाग एसपी मोबाइल के जरिए सुनवाई में शामिल हुए। कोर्ट ने एसपी से पूछा कि घटना 24 मार्च की है, 25 मार्च को केस दर्ज हुआ, लेकिन 30 मार्च तक छह दिन बीतने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी।"
पुलिस ने कहा, रामनवमी से कार्रवाई प्रभावित हुई
"पुलिस की ओर से कोर्ट को बताया गया कि गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है, लेकिन रामनवमी के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई। कोर्ट ने इस जवाब पर असंतोष जताया। साथ ही यह भी पूछा कि मृतका के कपड़ों को अब तक फॉरेंसिक जांच के लिए क्यों नहीं भेजा गया। इस पर पुलिस कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी और कोर्ट से अब तक अनुमति नहीं लेने की बात कही।"
विष्णुगढ़ पूरी तरह बंद अन्य जगहों पर भी असर
"विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय बच्ची से दरिंदगी के विरोध में सोमवार को बंद का हजारीबाग में मिलाजुला असर रहा। वहीं विष्णुगढ़ पूरी तरह से बंद रहा। न्याय की मांग को लेकर दुकानें, स्कूल-कॉलेज व अन्य प्रतिष्ठान सुबह से शाम तक स्वतः बंद रहे। बंद समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही कुछ समय के लिए एनएच-522 को जाम कर दिया। इससे वाहनों का आवागमन बाधित हुआ।"
"हालांकि, बाद में जाम हटा लिया गया और स्थिति सामान्य हो गई। सातमील मोड़, हॉस्पिटल चौक और अखाड़ा चौक सहित विभिन्न स्थानों पर लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। नवादा, बनासो समेत आसपास के गांवों में भी बंद का असर देखा गया। आवश्यक सेवाएं छोड़ सभी कामकाज ठप रहे। हजारीबाग में सांसद मनीष जायसवाल, बरही विधायक मनोज यादव नेताओं ने बंद कराने निकले।"
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