दिल्ली हाई कोर्ट ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज से कहा है कि आपको आलोचना या प्रंशसा से इतना प्रभावित नहीं होना चाहिए। एक धर्मगुरु को इन सबसे ऊपर उठ जाना चाहिए।आदि शंकराचार्य ने कभी किसी के खिलाफ मानहानि की शिकायत नहीं की। उन्होंने असहमति रखने वालों को भी अपने तर्क से जवाब दिया।
अनिरुद्धाचार्य को हाई कोर्ट क्यों आना पड़ा
हाई कोर्ट ने हल्के अंदाज़ में यह टिप्पणी अनिरुद्धाचार्य महाराज कीउस याचिका पर सुनवाई करते हुए की जिसमे उन्होंने अपने पर्सनलिटी राइट्स (अपनी पहचान/प्रतिष्ठा) की रक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी । उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनके नाम और वीडियो का गलत इस्तेमाल हो रहा है।कुछ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एआई से बने कंटेंट को इस तरह दिखाया जा रहा है जैसे वह खुद बोल रहे हों।
आप इन सबसे प्रभावित न हो
आज जस्टिस तुषार राव गेड़ेला ने हल्के अंदाज़ में अनिरुद्धाचार्य महाराज से कहा कि आप तो धार्मिक गुरु है! आपको तो आलोचना, प्रशंसा या पहचान जैसी बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। आप को तो इन सबसे ऊपर होना चाहिए।अगर आप ही अपनी प्रतिष्ठा को लेकर इतने चिंतित होंगे तो यह उस विचार के विपरीत होगा जिसे आप खुद लोगों को सिखाते हैं!
कोर्ट ने आदि शंकराचार्य का हवाला दिया
कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति कोई विचार या दर्शन लोगों के सामने रखता है, तो यह स्वाभाविक है कि कुछ लोग उससे सहमत नहीं होंगे। लोगों को यह अधिकार है कि वे आपके विचारों से असहमति जताएँ या उन पर सवाल उठाएँ।
कोर्ट ने आदि शंकराचार्य का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपने आलोचकों पर मानहानि के मुकदमे नहीं किए।वे उनसे असहमति रखने वाले लोगों से बहस करते थे और तर्क के जरिए अपनी बात साबित करते थे। ऐसे में जब तक कोई बात वास्तव में मानहानिकारक हो, तब तक केवल असहमति को गलत नहीं माना जा सकता।
दिल्ली से इतना प्रेम क्यों है!
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि अनिरुद्धाचार्य महाराज के वृद्धावन का होने के बावजूद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का ही रुख क्यों किया।कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट की चीज़ें तो दुनिया भर में दिखती हैं, फिर चाहे वह मंगल ग्रह या बृहस्पति पर भी क्यों न हों तो फिर दिल्ली हाई कोर्ट आने ही क्या वजह है। कोर्ट ने कहा कि देश में और भी अदालतें है।अगर वो आदेश पास करेंगी तो क्या गूगल उसे नहीं मानेगा! कलकत्ता से लेलर इलाहाबाद , लखनऊ की अदालत क्या इसमे आदेश पास नहीं कर सकती! दिल्ली से आपका इतना प्रेम क्यों है!
अनिरुद्धाचार्य के वकील की दलील
अनिरुद्धाचार्य के वकील ने दलील दी कि सोशल मीडिया जो सर्कुलेट हो रहा हैं, उसके चलते लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेंगे।डीपफेक और एआई से बना कंटेंट उनकी छवि को नुकसान पहुँचा सकता है।इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर लोगों का विश्वास झूठी चीजों से प्रभावित होता है तो इसका मतलब कि उनका विश्वास कमज़ोर है।
गूगल की ओर से जवाब
गूगल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जहाँ तक यूट्यूब का सवाल है।अगर कोई वीडियो या कंटेंट एआई/जनरेटेड या गलत तरीके से बनाया गया है, तो उसे हटाया जा सकता है।गूगल की ओर से पेश वकील ने कहा कि जिन लिंक की शिकायत अनिरुद्धाचार्य की ओर गई है, उनमें से कुछ फैन पेज के वीडियो भी हैं। इन वीडियो में अनिरुद्धाचार्य के कुछ पुराने बयान दिखाए गए हैं, जिनमें महिलाओं या विज्ञान से जुड़ी टिप्पणियों पर लोग आलोचना या सवाल उठा रहे हैं।
अनिरुद्धाचार्य महाराज को राहत
बहरहाल हाई कोर्ट ने अनिरुद्धाचार्य को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि जिन वीडियो/लिंक्स की शिकायत उनकी ओर से गई है, कि उन्हें यूटयूब से हटाया जाए। कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले में आदेश पास करेगा( जो वेबसाइट पर बाद में अपलोड होगा)
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