पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में सड़क हादसे में घायल हरियाणा पुलिस के एक कांस्टेबल को मिलने वाली मुआवजा राशि को लगभग तीन गुना बढ़ाते हुए 4.75 लाख रुपये से बढ़ाकर 14.05 लाख रुपये कर दिया। अदालत ने कहा कि दुर्घटना के बाद सदमे में व्यक्ति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह हर मेडिकल बिल संभालकर रखे।
वर्ष 2006 में हुए एक सड़क हादसे में हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल लक्ष्मण सिंह घायल हो गए थे। दुर्घटना के बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं, अस्पताल में करीब 22 दिन भर्ती रहना पड़ा और लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 2012 में उन्हें 4.75 लाख रुपये मुआवजा दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए कांस्टेबल और बीमा कंपनी दोनों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
न्यायमूर्ति हरकेश मनुजा ने अपने आदेश में कहा कि दुर्घटना के बाद व्यक्ति मानसिक आघात और सदमे में होता है, ऐसे में उससे सभी मेडिकल बिल सुरक्षित रखने की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है और इसलिए केवल बिलों की कमी के आधार पर मुआवजा कम नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही कांस्टेबल को इलाज के दौरान वेतन मिलता रहा हो लेकिन उसे अपनी अर्जित छुट्टियां खर्च करनी पड़ीं और यह भी एक वास्तविक आर्थिक नुकसान है, जिसकी भरपाई होनी चाहिए। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने कुल मुआवजा बढ़ाकर 14.05 लाख रुपये कर दिया।
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