जागरण संवाददाता, बिहारशरीफ (नालंदा): जिला जज डा. रमेशचन्द्र द्विवेदी ने 52 वर्षों से लंबित जमीन विवाद मामले की त्वरित सुनवाई व निपटारा कर मानक गढ़ दिया। यह मामला बिहारशरीफ न्यायालय में लंबित सबसे पुराना मामला था। पुराने लंबित मामलों को निपटारे के अभियान के तहत इसकी सुनवाई चल रही थी।

मामले के अनुसार 1969 में वासुदेव प्रसाद ने कोर्ट में जमीन का टाइटिल केस दाखिल किया था। इसमें उनका दावा था कि उन्होंने ललिता देवी चार आना और रमपतिया तथा कैलाशनी देवी से छह आना हिस्सा प्राप्त किया था। बिहारशरीफ के मुरारपुर वार्ड चार तथा होल्डिग नंबर 295 व 296 की जमीन में प्रथम पक्ष ने हिस्सा मांगा था।

श्रीराम शर्मा के चार पुत्र कैलाश, कमलेश्वर, रामेश्वर और परमेश्वर हैं। इनमें कैलाश की एकमात्र पुत्री ललिता देवी थी। ललिता देवी ने अपना हिस्सा प्रथम पक्ष वासुदेव को बेचा था। बाद में ललिता ने अपने चाचा परमेश्वर, कामेश्वर, और रामेश्वर की पत्नियों को बयनामा लिख दिया था। जिसमें से छह आना जमीन वासुदेव ने खरीदी थी।

इसी पर प्रथम पक्ष वासुदेव ने 1969 में व्यवहार न्यायालय के सब जज कोर्ट में रामेश्वर कामेश्वर, परमेश्वर को प्रतिवादी बनाते हुए मुकदमा दर्ज किया था। इसी में रामपति देवी ने 1971 में दूसरा मुकदमा दाखिल किया था। जिसमें यह दावा किया था कि पत्नियों के नाम लिखा गया विक्रय पत्र सही है। सब जज ने 23 दिसंबर 1974 को फैसला दिया था कि ललिता जो अपना चार आना हिस्सा वासुदेव को बेचा था, वह सही है और रामेश्वर,

परमेश्वर तथा कामेश्वर की पत्नियों के पक्ष में किए गए विक्रय पत्र को रद कर दिया, जिसके विरुद्ध इन्होंने 1975 में सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी, जो 46 वर्षों से लंबित थी। अब इस मामले में जिला जज ने त्वरित सुनवाई करते हुए पाया कि द्वितीय अवर न्यायधीश द्वारा पारित किया गया निर्णय सही है। इस न्यायालय द्वारा इस निर्णय में हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है। अत: फैसला दिया कि अपील खारिज कर निष्पादन करते हुए मामला समाप्त किया जाता है। इस तरह 52 वर्षों से लंबित मामले का समापन किया गया।

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